अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के लिए युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं लेकिन इस बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 8 अप्रैल को सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है और सभी भारतीयों से देश छोड़ने की अपील की है, ये कदम भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मद्दे नजर उठाया गया है।
ये निर्देश 7 अप्रैल को जारी पिछली एडवाइजरी का ही अगला हिस्सा है।
एडवाइजरी में साफ तौर पर निम्नलिखित बातें कही गई हैं और साथ ही हेल्पलाइन नंबर्स जारी किए गए हैं। घटनाक्रमों को देखते हुए, जो भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में हैं, उन्हें दृढ़तापूर्वक सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के समन्वय से और दूतावास द्वारा सुझाए गए मार्गों का उपयोग करके शीघ्रता से ईरान छोड़ दें। यह पुनः दोहराया जाता है कि दूतावास के साथ पूर्व परामर्श और समन्वय के बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा तक पहुँचने का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
दूतावास के आपातकालीन नंबर नीचे दिए गए हैं।
मोबाइल नंबर:
+989128109115
+989128109102
+989128109109
+989932179359
ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
US-Iran सीजफायर का भारत ने किया स्वागत
US-Iran सीजफायर का भारत ने स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि ‘हम संघर्ष-विराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति आएगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार ज़ोर दिया है, चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति ज़रूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही बहुत ज़्यादा तकलीफ़ दी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर आवागमन की निर्बाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।
सीजफायर पर ट्रंप ने क्या कहा?
सीजफायर के ऐलान के बाज डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ‘विश्व शांति के लिए एक बहुत बड़ा दिन’! ईरान भी यही चाहता है, अब उनका सब्र टूट चुका है! और ठीक इसी तरह, बाकी सभी का भी! यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका, Strait of Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही को सुचारू बनाने में मदद करेगा। वहां बहुत सारे सकारात्मक काम होंगे! इससे बहुत ज़्यादा पैसा भी कमाया जाएगा। ईरान अब अपने पुनर्निर्माण का काम शुरू कर सकता है। हम हर तरह की ज़रूरी चीज़ों से लदे हुए वहां मौजूद रहेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा। ठीक वैसे ही, जैसा कि हम US में अनुभव कर रहे हैं, यह Middle East का ‘स्वर्ण युग’ साबित हो सकता है!’



