FDI Easing Under FEMA: भारत ने विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी है, जिसके तहत जिन विदेशी कंपनियों में चीन की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे कम है, वे अब सरकारी मंजूरी बिना भारत में निवेश कर सकती हैं.
FDI Norms India: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने FEMA नियमों में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत 10 परसेंट तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को अब ‘ऑटोमैटिक रूट’ से निवेश करने की मंजूरी मिल गई है.
यह नया नियम 1 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है. यानी कि भारत में जिन वैश्विक कंपनियों में चीन या भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देश (चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि) की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे कम है, वे अब बिना किसी सरकारी मंजूरी के भारत में सीधा निवेश कर सकती है.
देश में कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में यह नियम बनाया गया था कि भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों या उनके निवेशकों को भारत में निवेश के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य थी. अब नए नियमों के तहत, किसी विदेशी कंपनी में अगर चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी 10 परसेंट या उससे ज्यादा है, तो वह कंपनी भारत में ‘ऑटोमैटिक रूट’ ( बिना सरकारी मंजूरी) से सीधे निवेश कर सकेंगे.
पहले क्या था नियम?
पहले भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले देशों की कोई एक कंपनी भी अगर भारत में 1 रुपये का निवेश करना चाहती थी, तो पहले उसे सरकार से लिखित मंजूरी लेनी पड़ती थी. अगर किसी बड़ी अमेरिकी या यूरोपीय कंपनी में चीनी कंपनी की हिस्सेदारी सिर्फ 1 परसेंट भी होती थी, तो भी उस कंपनी को भारत में निवेश के लिए महीनों सरकारी मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
यह छूट सिर्फ चीन या हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए नहीं है, बल्कि उन अमेरिकी या यूरोपीय मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए है, जिनमें चीन के निवेशकों का एक छोटा सा हिस्सा है. यानी कि चीन और हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों को अभी से सरकारी मंजूरी लेनी होगी.
बदलाव का मकसद
FDI के नियमों में ढील देने का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण और निवेश को तेज करना है.



