सऊदी अरब समेत दुनियाभर में रविवार 17 मई को आज धुल हिज्जा या जिलहिज्जा का चांद देखने का प्रयास किया जाएगा. आज चांद नजर आता है तो 18 मई से माह-ए-जिलहिज्जा शुरू हो जाएगा.
धुल हिज्जा (Dhul Hijjah) इस्लामिक चंद्र कैलेंडर 1447 का 12वां और आखिरी महीना है, जिसे बहुत ही पवित्र माना जाता है. इसे जिलहिज्जा के नाम से भी जाना जाता है. इस्लाम धर्म के लिए यह कुर्बानी और तीर्थयात्रा का महीना होता है. क्योंकि जिलहिज्जा में भी कुर्बानी का त्योहार ईद-अल-अदहा (बकरीद) मनाई जाती है और हज यात्रा की शुरुआत होती है.
सऊदी कोर्ट ने की चांद देखने की अपील
दुनियाभर के मुसलमान धुल हिज्जा या जिलहिज्जा का चांद देखने का प्रयास कर रहे हैं. प्रमुख चांद कमेरियों द्वारा चांद दिखने की आधिकारिक पुष्टि के ऐलान के बाद ही जिलहिज्जा महीने की शुरुआत होगी. सऊदी अरब ने भी पूरे राज्य के मुसलमानों से रविवार, 17 मई की शाम धुल हिज्जा का अर्धचंद्र देखने की अपील की है, जो उम्म अल-कुरा कैलेंडर के अनुसार धुल क़दाह की 29 तारीख के बराबर है.
सऊदी अरब के सर्वोच्च न्यायालय ने एक बयान जारी कर लोगों से आग्रह किया है कि, वे चांद को देखें, चाहे नंगी आंखों से या दूरबीन से. अगर चांद नजर आता है है तो वे इसकी सूचना निकटतम न्यायालय को जरूर दें और अपना बयान दर्ज कराएं.
अर्धचंद्र को देखने के बाद ही इस्लामिक कैलेंडर के नए महीने की शुरुआत होती है. लेकिन सऊदी अरब में जिलहिज्जा के अर्धचंद्रमा को देखना एक उच्च धार्मिक महत्व रखता है. इसका कारण यह है कि, किंगोम वार्षिक हज सीजन की लिए हजारों की संख्या में तीर्थयात्रों की मेजबानी की तैयारियां शुरू हो जाती है.
धुल–हिज्जा कब शुरू होगा
रविवार 17 मई की शाम अगर चांद की दीदार होता है तो, धुल हिज्जा का पहला दिन सोमवार, 18 मई को रहेगा. इसके अनुसार अराफा का दिन मंगलवार, 26 मई को बकरीद (ईद-अल-अदहा) बुधवार, 27 मई को मनाई जा सकती है. लेकिन 17 मई को चांद नजर नहीं आता तो जुलहिज्जा की शुरुआत 19 मई 2026 से होगी.
बकरीद की संभावित तिथि
आज 17 मई की शाम में जिलहिज्जा का नया चांद (हिलाल) देखने की कोशिश होगी. अगर आज चांद देखने की तस्दीक (पुष्टि) हो जाती है, तो ईद-उल-अजहा 27 मई 2026 को मनाया जा सकता है. वहीं अगर चांद नजर नहीं आता, तो कल शाम फिर से चांद देखने की कोशिश होगी और बकरीद 28 मई को हो सकती है. हालांकि चांद दिखने की सटीक जानकारी के लिए मगरिब की नमाज के बाद शहर की मरकजी चांद कमेटी या फिर स्थानीय मस्जिदों में इसका आधिकारिक ऐलान का इंतजार करें.



