ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ती महंगाई की आशंका के बीच एफडी निवेशकों के लिए यह सवाल अहम हो गया है कि क्या अभी निवेश करें या आरबीआई की अगली नीति का इंतजार करें.
ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखा जा सकता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ, महंगाई के दबाव के फिर से लौटने की संभावना और भी बढ़ रही हैं. इसको लेकर कई एफडी निवेशकों के दिमाग में चल रहा है कि, क्या उन्हें मौजूदा दरों को अभी लॉक कर देना चाहिए या भारतीय रिज़र्व बैंक RBI की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना चाहिए.
विशेषज्ञ दे रहे प्रक्रिया
ज्यादातर विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक संदेह बढ़ने के मद्देनजर आरबीआई अपनी आगामी नीति बैठक में मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा और ब्याज दरों और नीतिगत रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि महंगाई को देखते हुए आरबीआई के सतर्क रुख अपनाने की संभावना है.
उन्होंने कहा हमें उम्मीद है कि आगामी मौद्रिक नीति में आरबीआई रेपो दर और नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा. जिसके साथ महंगाई का खतरा बढ़ रहा है और पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि और तीव्रता के साथ यह और भी बढ़ेगा. फिलहाल, सीपीआई आधारित महंगाई और कोर महंगाई दोनों ही सुरक्षित सीमा में हैं. साथ ही कहा, ”आरबीआई फिलहाल प्रतीक्षा करो और देखो की नीति अपनाएगा.”
इसको लेकर स्टेबल मनी के सह-संस्थापक और सीईओ सौरभ जैन ने कहा, मौजूदा हालात को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि आरबीआई फिलहाल रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और महंगाई के आंकड़ों की स्थिति और मैक्रोइकॉनॉमिक हालातों पर बारीकी से नज़र रखते हुए बेहतरीन रुख अपनाना जारी रखेगा.
FD निवेश को लेकर एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट जैन के मुताबिक, हाल के महीनों में एफडी में कुछ नरमी के बावजूद, फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें अभी भी काफी रोमांचक बनी हुई हैं. ऐसे में बिना ब्याज दर चक्र का इंतजार के बजाय मौजूदा दरों पर निवेश करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है. निवेशकों को निवेश संबंधी निर्णय टालने के बजाय मौजूदा दरों को सुरक्षित करने पर विचार करना चाहिए.
बैंकबाज़ार के सीईओ, अधिल शेट्टी ने भी इस पर अपनी राय रखी कहा, अगर अगले कुछ महीनों तक ब्याज दरें स्टेबल रहती हैं, तो जून की बैठक का इंतज़ार करने से कोई खास फ़ायदा नहीं होगा. आगे कहा, मौजूदा दरों पर अभी निवेश करना समझदारी भरा कदम है. क्योंकि आगे ब्याज दरों में कटौती की आशंका कम ही है. कोई भी ब्याज दरों में भारी गिरावट के कगार पर नहीं हैं. सभी को अच्छा और स्टेबल रिटर्न मिल रहा है.
ऐसे में एक्सपर्टस का कहना है कि, निवेशकों को इस बात का हमेश ध्यान रखना चाहिए कि मार्किट में स्टेबलिटी हमेशा मौजूद रहता है. आरबीआई के भविष्य के नीतिगत फैसलों से जमा दरों में सुधार होता है, तो जमा राशि को अपग्रेड किया जा सकता है. केवल दर बढ़ोतरी की उम्मीद में इंतजार करने से बाजार में मौजूदा उपलब्ध दरों का फायदा उठाने से चूक हो सकती है.



