केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि CEPA भारत के कारीगरों, किसानों, मछुआरों और MSMEs की समृद्धि के लिए नए रास्ते खोलने के नई दिल्ली के मिशन में एक मील का पत्थर साबित होगा.
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) आज सोमवार (1 जून, 2026) से लागू हो गया है. यह समझौता पिछले साल दिसंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट या के दौरान साइन की गई थी. इस ट्रेड डील के लागू होने के साथ ही अब भारतीय श्रम-प्रधान उत्पादों को ओमान के बाजार में जीरो-ड्यूटी के साथ प्रवेश मिलेगा, जिससे भारत के निर्यात को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
पीयूष गोयल ने X पोस्ट में की CEPA लागू करने की घोषणा
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार (1 जून, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दोनों देशों के बीच लागू CEPA की घोषणा की. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और MSMEs की समृद्धि के लिए नए वैश्विक रास्ते खोलने के नई दिल्ली के मिशन में एक मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि इससे नए बाजार उपलब्ध होंगे, निर्यात बढ़ेगा, निवेश को आकर्षित किया जाएगा और रोजगार के मौकों में भी इजाफा होगा.
क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
भारत और ओमान के बीच CEPA ऐसे समय पर लागू हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष और तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक समुद्री व्यापार को व्यापक तौर पर प्रभावित किया है. यह रणनीतिक समुद्री रास्ता दुनिया में हर रोज होने वाले कुल तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत और समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत संभालता है. इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है.
वहीं, इसके अलावा, ओमान की सबसे बड़ी रणनीतिक विशेषता उसकी भौगोलिक स्थिति है. ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते दबाव की वजह से भारत को सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता है, लेकिन ज्यादातर खाड़ी देशों के उलट ओमान का बड़ा समुद्री किनारा होर्मुज स्ट्रेट के बाहर अरब सागर और ओमान की खाड़ी में स्थित है.
इस समझौते के संबंध में थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सलालाह और दुक्म के प्रमुख बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी परेशानी के बावजूद आराम से संचालित रह सकते हैं. यही वजह है कि संघर्ष या अस्थिरता के दौर में भी ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा गेटवे के तौर पर उभर सकता है.



