राज्यसभा में एनडीए गठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल बीजेपी है और ये गठबंधन अब 152 सीटों तक पहुंच गया है तो वहीं विपक्षी गठबंधन के पास महज 64 सांसद हैं.
बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में भी ताकतवर नजर आ रहा है. हालांकि अभी वो दो तिहाई बहुमत से दूर हैं, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में अच्छा खासा इजाफा कर दिया है. बता दें कि 18 जून तक 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों के इस्तीफे के बाद अब कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
राज्यसभा में एनडीए गठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल बीजेपी ही है और ये गठबंधन अब 152 सीटों तक पहुंच गया है. सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए तो उनमें 19 सांसद एनडीए के ही थे. झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने गुरुवार को एनडीए सांसदों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी है. खास बात ये है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है.
बता दें कि हाल ही में टीएमसी के बागी 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है. इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर बीजेपी आसानी से जीत दर्ज कर सकती है. अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं.
ये पार्टियां किसी का हिस्सा नहीं
दरअसल बीजू जनता दल के राज्यसभा में 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं और ये दोनों ही दल किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हैं. हालांकि कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं. ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और बीजेपी के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है.
संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को संसद में पास कराने के लिए 2 तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. ऐसे में अगर एनडीए इस आंकड़ों को हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी. कहा जा रहा है कि मोदी सरकार मॉनसून सत्र के दौरान ये बिल दोबारा पेश कर सकती है. हालांकि अभी आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है.
इंडिया गठबंधन के पास कितने सांसद
कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के पास महज 64 सांसद हैं क्योंकि 8 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी इस ग्रुप से अलग हो गई हैं. बता दें कि लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग ग्रुप बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं.



