Strait of Hormuz: हाल ही में होर्मुज से एक एलएनजी कैरियर भारत आया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज से जहाज को भारत आने में कितना समय लगता है.
Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते से भारत को बड़ी राहत मिली है. होर्मुज स्ट्रेट से पहला एलएनजी कैरियर सफलतापूर्वक भारत के पश्चिमी तट तक आ गया है. दिशा नाम का एलएनजी जहाज गुजरात के भरूच जिले में दहेज पोर्ट पर पहुंच चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज से जहाज को भारत आने में कितना समय लगता है.
भारत पहुंचने में जहाज को कितना समय लगता है?
होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक का सफर दूसरे इंटरनेशनल शिपिंग रूट की तुलना में काफी छोटा है. होर्मुज को पार करने के बाद कांडला, मुंद्रा, मुंबई या फिर दहेज जैसे बंदरगाहों की तरफ जाने वाले जहाजों को अरब सागर में लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.
बड़े तेल टैंकर और एलएनजी कैरियर आमतौर पर मौसम की स्थिति, समुद्री ट्रैफिक और कार्गो लोड के बेस पर यह पूरा सफर 48 से 72 घंटे में पूरा कर लेते हैं. ठीक परिस्थितियों में कुछ जहाज लगभग 33 घंटे के अंदर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं.
कब सामान्य होगी स्थिति?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर भी वैश्विक और भारतीय सप्लाई चेन को पूरी तरह से नॉर्मल होने में लगभग 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं. आपको बता दें कि सप्लाई चेन रातों-रात सामान्य नहीं हो सकती. शांति समझौते के बावजूद भी इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं.
सैकड़ों जहाजों का इंतजार
सबसे बड़ी मुश्किलों में से एक है जहाजों का भारी जमावड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी क्षेत्र में लगभग 500 कमर्शियल जहाज और कार्गो कैरियर मंजूरी और सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहे हैं. सुरक्षा बनाए रखने और भीड़ से बचने के लिए अधिकारी शुरू में हर दिन सिर्फ सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहे हैं.
साथ ही संघर्ष के दौरान रणनीतिक शिपिंग रूट में समुद्री बारूदी सुरंगों और दूसरे समुद्री खतरों को लेकर डर पैदा हो गया था. यही वजह है कि जहाजों को अभी रूट की पूरी चौड़ाई का इस्तेमाल करने के बजाय सुरक्षित कॉरिडोर से निकाला जा रहा है. पूरे रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित बताने से पहले समुद्री सुरक्षा एजेंसियां जांच और निगरानी कर रही हैं.



