एमएसएमई का आर्थिक महत्व
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अब देश की आर्थिक प्रगति और औद्योगिक विकास की एक मजबूत नींव बन चुके हैं। विश्व एमएसएमई दिवस से पहले शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक तथ्य पत्रक के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और कुल निर्यात में 48.58 प्रतिशत योगदान है (जनवरी 2026 तक)।
रोजगार सृजन में एमएसएमई की भूमिका
38.9 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला एमएसएमई क्षेत्र, कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
विश्व एमएसएमई दिवस का महत्व
संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 27 जून को विश्व एमएसएमई दिवस के रूप में घोषित किया है, ताकि एमएसएमई के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में उनके योगदान को उजागर किया जा सके।
सरकारी पहल और उपलब्धियां
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा। इस दौरान औपचारिक पंजीकरण, ऋण सुविधाएं, तकनीकी अपनाना, शिकायत निवारण और बाजार विस्तार जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं।
जून 2026 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण की संख्या 8.7 करोड़ से अधिक हो गई है, जिससे करोड़ों सूक्ष्म और लघु उद्यमों को संस्थागत ऋण, सरकारी योजनाओं और नए बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली है।
क्रेडिट गारंटी और ऋण सुविधाएं
फैक्ट शीट के अनुसार, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) ने 1 जनवरी से 30 नवंबर 2025 के बीच 29.03 लाख गारंटी को मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि 3.77 लाख करोड़ रुपए रही।
सरकार ने बिना गिरवी अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए गारंटी कवरेज सीमा को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया है।
खादी और ग्रामोद्योग की बिक्री
वर्ष के दौरान खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गई, जो ग्रामीण उद्योगों की बढ़ती मांग और रोजगार सृजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
समस्या समाधान के लिए पोर्टल
सूक्ष्म और लघु उद्योगों को भुगतान में देरी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संचालित एमएसएमई समाधान पोर्टल पर जून 2026 तक 2,56,892 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें कुल 55,244.29 करोड़ रुपए के दावे शामिल थे।
इनमें से 58,148 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा एमएसई सुविधा परिषदों द्वारा किया गया।
उद्यमियों की शिकायतों का समाधान
उद्यमियों की शिकायतों के समाधान के लिए बनाए गए चैंपियंस पोर्टल पर वर्ष 2025-26 के दौरान 39,494 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 39,387 शिकायतों का समाधान कर दिया गया, जिससे पोर्टल ने 99.72 प्रतिशत निस्तारण दर हासिल की।
डिजिटल समाधान और उद्यमिता का विकास
सरकार ने ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्योगों के भुगतान विवादों का तकनीक आधारित और तेज समाधान उपलब्ध कराना है।
सरकार का कहना है कि एमएसएमई सेक्टर केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में उद्यमिता की नई संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहा है।
नए अवसरों का सृजन
विशेष रूप से अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पहली पीढ़ी के उद्यमियों, महिला उद्यमियों और युवाओं के लिए यह सेक्टर नए अवसर पैदा कर रहा है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल और सिडबी (एसआईडीबी) को बढ़ी हुई इक्विटी सहायता जैसी सुधारात्मक पहलें एमएसएमई को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने और उनकी पूंजी तक पहुंच आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।



