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पंजाब में भी विधानसभा चुनाव के लिए साल भर से भी कम का वक्त, राहुल गांधी के सामने फिलहाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती…

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पंजाब में भी विधानसभा चुनाव के लिए अब साल भर से भी कम का वक्त बचा हुआ है. लेकिन राहुल गांधी के सामने फिलहाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी से निपटना है.

तमाम कवायदों के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के बीच का आपसी खींचतान अब भी नहीं थमा है. इस बीच राहुल गांधी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पंजाब कांग्रेस में सियासी हलचल में इजाफा कर दिया है.

दरअसल, राहुल गांधी ने गुरुवार यानी 06 अगस्त को Gen Z जनरेशन तक पहुंचने के लिए ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन किया. इस दौरान राहुल गांधी से उनके पसंदीदा बीजेपी नेता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया. राहुल गांधी ने कहा कि वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ आसानी से घुल-मिल जाते हैं. वह कूल हैं और मिलिट्री हिस्ट्री के एक्सपर्ट हैं. इसके बाद राहुल ने मजाकिया अंदाज में कहा- हैलो अंकल अमरिंदर.

राहुल का गांधी कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ का यह वीडियो वायरल होते ही पंजाब की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सियासी हलचल बढ़ गई और कयासों का दौर शुरू हो गया है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ पुराने व्यक्तिगत रिश्तों की गर्माहट है या कांग्रेस से अलग हो चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के लिए कोई सियासी संदेश.

राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ की तो क्यों मच गई हलचल?

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, इस दौरान उन्होंने अपनी एक पार्टी बनाई थी. हालांकि, कुछ ही दिनों में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर लिया था. हालांकि, पार्टी बदलने के बाद भी गांधी परिवार के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हुए. कैप्टन अमरिंदर सिंह कई मौकों पर गांधी परिवार के साथ अपने संबंधों का जिक्र अपने इंटरव्यू में करते रहे थे.

उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में तो यहां तक कहा था कि वह कांग्रेस को मिस करते हैं. उनका कहना था कि कांग्रेस एक परिवार की तरह है. जब वह राहुल गांधी को फोन करते थे तो उनसे आसानी से बात हो जाती थी. वहीं, बीजेपी में हाईकमान से संपर्क को लेकर असंतोष जताया था. कैप्टन ने यह भी बताया था कि उनके चचेरे भाई की मौत के बाद राहुल गांधी ने उन्हें फोन कर संवेदना जताई, जबकि बीजेपी में किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया.

अब तक कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से गांधी परिवार की सार्वजनिक तौर पर तारीफ की गई थी. अब तक तारीफों का मामला एकतरफा था. लेकिन अब पहली बार राहुल गांधी ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ की है. ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो गया है कि जब पंजाब कांग्रेस के अंदर अलग-अलग गुटों में टकराव की स्थिति है तो अमरिंदर सिंह की तारीफ में कोई सियासी संदेश तो नहीं छिपा है. क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब कांग्रेस में वापसी होने जा रही है?

कांग्रेस से अलग क्यों हो गए थे कैप्टन अमरिंदर सिंह?

  • 2021 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था.
  • कैप्टन इस फैसले से नाराज हुए और उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर उन्हें विश्वास में नहीं लेने का आरोप लगाया.
  • इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए
  • . लेकिन कांग्रेस छोड़ने के बावजूद उनका पार्टी और गांधी परिवार के प्रति रवैया हमेशा पूरी तरह आक्रामक नहीं रहा.

कैप्टन का गांधी परिवार की तारीफ करना पुराना रिश्ता या फिर कुछ और?

कैप्टन अमरिंदर सिंह और गांधी परिवार के संबंध सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहे हैं. कैप्टन की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से पुरानी दोस्ती रही है.राजीव गांधी के साथ करीबी संबंधों की वजह से कैप्टन की सोनिया गांधी से भी अच्छी नजदीकी रही. यही वजह है कि 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद भी कांग्रेस छोड़ने के बावजूद गांधी परिवार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए. ऐसे में राहुल गांधी द्वारा उनकी तारीफ करने की वजह उनका गांधी परिवार के साथ पुराना रिश्ता है या फिर कुछ और खिचड़ी पक रही है.

कांग्रेस को क्यों आ रही है कैप्टन अमरिंदर सिंह की याद?

  • पंजाब में कांग्रेस की सत्ता 2002 और 2017 में आई. इसका श्रेय कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही जाता है.
  • पंजाब कांग्रेस इस समय अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है. पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बीच नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद हैं.
  • अमरिंदर सिंह पार्टी में एक बड़ा और स्वीकार्य चेहरा थे. उनका कद ऐसा था कि उनके खिलाफ लोग खुलकर जाने से बचते थे.
  • हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला था.
  • लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने के बाद पंजाब कांग्रेस भी बिखर गई.
  • अब कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के अलग-अलग धड़ों को एक साथ कैसे रखा जाए.
  • ऐसे में कैप्टन की लोकप्रियता और उनका पुराना संगठनात्मक अनुभव कांग्रेस के लिए फिर से उपयोगी साबित हो सकता है.

कैप्टन के जाने के बाद कांग्रेस को क्या नुकसान हुआ?

कैप्टन को 2022 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री पद से हटाया गया. इसके बाद कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया और उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव
लड़ा.लेकिन आम आदमी पार्टी की मजबूत लहर में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ. 117 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई. वहीं, आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीत लीं. कैप्टन अमरिंदर की पार्टी छोड़ते ही कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ती गई. नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश नेतृत्व के बीच मतभेदों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दीं.

हिंदू-सिख दोनों वर्गों में पकड़ वाला चेहरा कमजोर हुआकैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में ऐसे नेताओं में गिने जाते रहे, जिनकी स्वीकार्यता अलग-अलग सामाजिक वर्गों में थी. उनकी लोकप्रियता हिंदू और सिंह दोनों वर्गों में थी. उनकी पंजाब के जाट सिख समुदाय में भी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ते ही कांग्रेस ने पंजाब में अपनी सबसे प्रभावशाली और बड़ी आवाज खो दी. दरअसल,कैप्टन का कद सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं था. बतौर पूर्व मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय स्तर के नेता और पूर्व सैनिक, उनकी बात को दिल्ली तक सुना जाता था.

कैप्टन अमरिंदर सिंह और राहुल गांधी दोनों एक-दूसरे के लिए जरूरी क्यों हैं?

कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस के लिए कितने अहम हैं यह इसी से साबित होता है कि साल 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 में से 62 सीटें जीतकर सरकार बनाई. 2014 में मोदी लहर के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर लोकसभा सीट से बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. फिर, 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया. उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें जीतकर कांग्रेस को पंजाब में 10 साल बाद सत्ता में वापसी करा दी थी. पंजाब में कांग्रेस के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह सत्ता की गारंटी थे.

कैप्टन अमरिंदर सिंह इस वक्त बीजेपी में हैं. लेकिन उनकी राजनीति फिलहाल हाशिये पर है.वहीं, कांग्रेस भी गुटबाजी से निपटकर पंजाब की सत्ता में वापसी करना चाहती है. ऐसे में अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में फिर से शामिल होते हैं, तो उसके सत्ता में वापसी की संभावनाओं में इजाफा जरूर होगा. इसके अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक करियर रिवाइव हो सकता है. ऐसे में राहुल गांधी और कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत है. यही वजह है, राहुल गांधी द्वारा तारीफ के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह का कांग्रेस में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे हैं.