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BRICS सम्मेलन 2026: भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन…

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BRICS सम्मेलन 2026

भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह समूह पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तारित हुआ है। कई देश BRICS से जुड़ने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन किसी देश को पूर्ण सदस्य बनाना केवल आवेदन करने की प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे सदस्य देशों के बीच लंबी कूटनीतिक बातचीत और आपसी सहमति अहम भूमिका निभाती है।

सर्वसम्मति है सदस्यता का सबसे बड़ा आधार

BRICS में नए देश को शामिल करने के लिए Consensus यानी सर्वसम्मति का सिद्धांत महत्वपूर्ण है। इच्छुक देश अपनी सदस्यता में रुचि अध्यक्ष देश या किसी मौजूदा सदस्य के सामने रखता है। इसके बाद मौजूदा सदस्य देश उस उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर आपस में चर्चा करते हैं। इस प्रक्रिया में सभी पूर्ण सदस्यों की सहमति जरूरी मानी जाती है। यानी अगर अधिकांश देश किसी उम्मीदवार के पक्ष में हों, लेकिन कोई एक सदस्य भी गंभीर आपत्ति जताता है, तो उसकी सदस्यता अटक सकती है।

2023 में तय हुई सदस्यता की रूपरेखा

नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए 2023 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्यता के लिए एक रूपरेखा और बुनियादी मापदंड तय किए गए थे। किसी उम्मीदवार पर सभी मौजूदा सदस्य देशों की सहमति बनने के बाद उसे आधिकारिक रूप से BRICS में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाता है। संबंधित देश के निमंत्रण स्वीकार करने के बाद वार्षिक शिखर सम्मेलन में उसकी सदस्यता की औपचारिक घोषणा की जाती है।

11 देशों तक पहुंच चुका है BRICS

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी। दक्षिण अफ्रीका 2010 में इसमें शामिल हुआ और इसके बाद समूह का विस्तार लगातार होता गया। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को समूह में शामिल किया गया। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के पूर्ण सदस्य बनने के बाद BRICS में पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई। इस विस्तार ने समूह के आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व को और बढ़ाया है।

Full Member के अलावा Partner Country का विकल्प

BRICS ने इच्छुक देशों को जोड़ने के लिए Partner Country की एक अलग श्रेणी भी शुरू की है। 2024 में रूस के कजान में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान इस मॉडल को आगे बढ़ाया गया। इसका उद्देश्य उन देशों को BRICS के साथ जोड़ना है जो पूर्ण सदस्यता की स्थिति में अभी नहीं हैं या जिन्हें तत्काल पूर्ण सदस्य का दर्जा नहीं दिया गया है। पार्टनर देशों को आर्थिक, व्यापारिक और सहयोग से जुड़े क्षेत्रों में BRICS देशों के साथ काम करने का अवसर मिलता है।

कौन-कौन हैं Partner Countries?

मौजूदा पार्टनर देशों में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। इस श्रेणी के जरिए BRICS का दायरा पूर्ण सदस्यता बढ़ाए बिना भी व्यापक हो रहा है।

Full Member और Partner Country में क्या अंतर?

पूर्ण सदस्य BRICS के प्रमुख नीतिगत फैसलों और एजेंडे से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं पार्टनर देशों की भागीदारी सीमित होती है और उन्हें चुनिंदा बैठकों तथा चर्चाओं में शामिल होने का अवसर मिलता है। पूर्ण सदस्य BRICS की संस्थागत गतिविधियों में ज्यादा प्रभाव रखते हैं, जबकि पार्टनर देशों को मुख्य रूप से व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के अवसर मिलते हैं। यानी Full Membership जहां निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी देती है, वहीं Partner Country का दर्जा BRICS के साथ जुड़ने और सहयोग बढ़ाने का रास्ता खोलता है।

BRICS का बढ़ता प्रभाव

लगातार नए देशों के जुड़ने और पार्टनर देशों की नई व्यवस्था के कारण BRICS का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है। हालांकि, समूह के विस्तार में सबसे अहम भूमिका अभी भी मौजूदा सदस्यों की आपसी सहमति की है। यही वजह है कि किसी भी इच्छुक देश के लिए BRICS की पूर्ण सदस्यता हासिल करना एक लंबी और महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया मानी जाती है।