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नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद से अब तक राहत और बचाव अभियान लगातार जारी…

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नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद से अब तक राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। एक तरफ नुवाकोट जिले में चिलिमे सुरंग के अंदर फंसे छह श्रमिकों को निकालने के लिए नेपाल और भारत की संयुक्त टीम अभियान के अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। वहीं, दूसरी तरफ रसुवागढ़ी सीमा चौकी के बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के बाद नेपाल-चीन के बीच यात्रियों की आवाजाही अब वैकल्पिक मार्गों से हो रही है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश-मानसरोवर यात्रा से लौटने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों की है।

चिलिमे सुरंग में बचाव अभियान अंतिम चरण में

नुवाकोट में चिलिमे सुरंग के अवरुद्ध हिस्से को साफ करने का काम तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग के पास जमा मलबे को व्हील लोडर की मदद से हटाया जा रहा है। जैसे ही रास्ता पूरी तरह साफ होगा, भारत और नेपाल की संयुक्त बचाव टीमें सुरंग के भीतर आगे बढ़कर भूमिगत पावरहाउस तक पहुंचने का प्रयास करेंगी, जहां छह श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है।

अब भी है कई चुनौती

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त टीम ने सुरंग को साफ करने का काम कर रही है। इसके लिए एक्सकेवेटर और लोडर समेत भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, टीमों को कई बड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। बड़े-बड़े बोल्डर अब भी रास्ता साफ करने में बाधा बन रहे हैं। पानी निकालने के लिए मड पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रसुवागढ़ी बॉर्डर बंद होने से कैलाश यात्रियों ने बदले रास्ते

बाढ़ का असर नेपाल-चीन सीमा पर यात्रियों की आवाजाही पर भी पड़ा है। रसुवा जिले में स्थित रसुवागढ़ी सीमा चौकी के आसपास बाढ़ ने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। सीमा पर स्थित आव्रजन कार्यालय भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके चलते नेपाल और चीन के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक सीमा मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

भारतीय तीर्थयात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा

रसुवागढ़ी तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत की यात्रा के लिए नेपाल से जाने वाले प्रमुख उत्तरी प्रवेश मार्गों में से एक है। नेपाल के आव्रजन विभाग के मुताबिक, तातोपानी और हिल्सा सीमा चौकियां अब यात्रियों की आवाजाही के लिए प्रमुख वैकल्पिक मार्ग बन गई हैं। इन रास्तों से आने-जाने वालों में बड़ी संख्या कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों की है। इसके अलावा वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले विदेशी नागरिकों में भारतीयों के साथ ब्रिटेन और अमेरिका के नागरिक भी बड़ी संख्या में हैं।

पांच साल बाद फिर शुरू हुई थी कैलाश यात्रा

भारत-चीन सीमा पर 2020 में गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। इसके चलते कैलाश-मानसरोवर यात्रा करीब पांच साल तक बाधित रही। पिछले वर्ष भारत और चीन के बीच यात्रा बहाल करने पर सहमति बनने के बाद भारतीय नागरिकों के लिए यह तीर्थयात्रा फिर शुरू हुई। पिछले साल नेपाल के रास्ते कैलाश-मानसरोवर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों का कोटा 20,000 था। मौजूदा यात्रा सत्र में चीन ने नेपाल के रास्ते कैलाश-मानसरोवर जाने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों का कोटा बढ़ाकर 24000 कर दिया है।

26 अगस्त की आपदा ने मचाई थी भारी तबाही

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। भोतेकोशी नदी में आई बाढ़ ने घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया था। कई जलविद्युत परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के सोमवार शाम तक के आंकड़ों के अनुसार, आपदा में करीब 1395 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5130 लोग अब भी लापता हैं।