Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की साय सरकार के चौथे बजट की तैयारी, सभी अपर मुख्य...

छत्तीसगढ़ की साय सरकार के चौथे बजट की तैयारी, सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों से प्रस्ताव…

1
0

वित्त विभाग ने 20 नवंबर तक मांगे प्रस्ताव, दिसंबर से सचिवों और जनवरी में मंत्रियों से चर्चा**

छत्तीसगढ़ की साय सरकार के चौथे बजट की तैयारी शुरू हो गई है। वित्त विभाग ने वर्ष 2027-28 के बजट के लिए सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों से प्रस्ताव मांगे हैं। इसके लिए 20 नवंबर तक की समय सीमा तय की गई है। 1 अक्टूबर से बजट प्रक्रिया शुरू होगी और अगले साल जनवरी तक विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी का दौर चलेगा। अब विभागों को तय समय में अपनी जरूरतें, नई योजनाएं और खर्च का पूरा खाका वित्त विभाग के सामने रखना होगा।

20 नवंबर तक जमा करने होंगे प्रस्ताव

वित्त सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर बजट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। 1 अक्टूबर से प्रक्रिया शुरू होगी और 20 नवंबर तक प्रस्ताव अंतिम रूप से जमा किए जा सकेंगे। इसका मतलब यह है कि विभागों के पास नई योजनाओं और अतिरिक्त खर्च की जरूरतों को आंकड़ों के साथ रखने के लिए सीमित समय रहेगा। इसके बाद वित्त विभाग प्रस्तावों की जांच और विभागीय चर्चाओं की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

दिसंबर में सचिवों के साथ मंथन

वित्त विभाग के तय कार्यक्रम के अनुसार 1 से 17 दिसंबर तक वित्त सचिव विभागों के सचिवों के साथ बजट प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान नई योजनाओं और नए खर्च से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा होगी। विभागों को यह बताना होगा कि उन्हें अतिरिक्त बजट क्यों चाहिए और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। इसके बाद वित्त मंत्री की स्तर पर होने वाली चर्चा के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ेंगे।

जनवरी में मंत्रियों की बारी

4 से 18 जनवरी 2027 तक वित्त मंत्री की अन्य विभागीय मंत्रियों के साथ चर्चा होगी। इसमें नवीन मद यानी नई योजनाओं और नए खर्च के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। इस चरण में किन प्रस्तावों को मंजूरी मिलेगी, यह वित्तीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। विभागों के लिए यह चरण महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि नई योजनाओं के लिए बजट हासिल करने की प्रक्रिया यहीं आगे बढ़ेगी।

आदिवासी और SC बजट पर अलग फोकस

वित्त सचिव ने पत्र में आदिवासी क्षेत्र उपयोजना और अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजना के बजट प्रस्तावों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए हैं। ऐसे प्रस्ताव आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के वित्तीय सलाहकार प्रकोष्ठ को भेजने होंगे। विभागों को इन योजनाओं के बजट में सूक्ष्म परीक्षण के बाद शामिल किए जाने वाले प्रस्तावों पर ध्यान देना होगा।

अपरीक्षित मदों पर सख्ती

बजट प्रस्तावों में परीक्षित और अपरीक्षित नवीन मदों को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। वर्ष 2027-28 के बजट में अपरीक्षित व्यय के नए मदों के बजाय परीक्षित मदों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी। यानी जिन प्रस्तावों की वित्तीय जांच और समीक्षा हो चुकी है, उन्हें आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। हालांकि, अपरीक्षित नवीन मदों के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। ऐसे प्रस्ताव केवल मंत्री-स्तरीय चर्चा में विचार किए जाएंगे।

पंचायत विभाग को भी जिम्मेदारी

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत चलने वाली योजनाओं के बजट प्रस्तावों को समेकित रूप से तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग संबंधित विभागों से चर्चा करेगा और प्रस्ताव तैयार करके वित्त विभाग को समय सीमा में भेजेगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों में चल रही योजनाओं के बजट को समन्वित तरीके से प्रस्तुत करना है।

केंद्र की योजनाओं में बजट अटकने का डर

केंद्र प्रवर्तित योजनाओं को लेकर भी वित्त विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। केंद्रीय विभागों से संपर्क करके SNA-SPARSH मॉडल के जरिए संचालित योजनाओं के लिए उचित बजट शीर्ष खोलने को कहा गया है। इसका उद्देश्य योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन और राशि जारी करने की प्रक्रिया में रुकावट रोकना है।

अब विभागों की अग्निपरीक्षा

साय सरकार के चौथे बजट की प्रक्रिया में समय सीमा और वित्तीय जांच पर जोर दिया गया है। विभागों को नई योजनाओं के प्रस्ताव भेजने के साथ उनके खर्च और जरूरत का आधार भी तैयार करना होगा। अब देखना होगा कि 20 नवंबर तक कितने प्रस्ताव आते हैं और इनमें से कितनी नई योजनाएं बजट में जगह बना पाती हैं।