छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चर्चा ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है।**
चार वरिष्ठ नेताओं के साथ पांचवां नाम भी उभरा: 50 अंडर-50 फॉर्मूले पर भी जोर:**
मिशन-2028 की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं को मुख्यमंत्री पद के योग्य बताया है।**
इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू शामिल हैं।
बैज ने अंबिकापुर में पार्टी की बैठक के दौरान इन नेताओं के नाम लिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान करेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर पुराने चेहरों के साथ नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि 2018 में कांग्रेस के सत्ता में लौटने के बाद भी मुख्यमंत्री पद के लिए इन्हीं चार नेताओं के नाम सामने आए थे। उस समय भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। अंततः भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि सिंहदेव सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे और महंत विधानसभा अध्यक्ष बने।
अब करीब आठ साल बाद: राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद पार्टी के सामने 2028 में वापसी की चुनौती है। ऐसे में नेतृत्व को लेकर शुरुआती स्तर पर ही मंथन शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैज के बयान के बाद टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री चेहरे की चर्चा में खुद बैज का नाम भी जोड़ दिया। सिंहदेव ने उन्हें स्वाभाविक दावेदार बताया। इससे साफ है कि पार्टी में मुख्यमंत्री पद की चर्चा केवल चार पुराने चेहरों तक सीमित नहीं है। हालांकि अभी कांग्रेस की ओर से 2028 के लिए किसी नेता को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक चेहरा घोषित नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल सामने आए नामों को राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है।
कांग्रेस में एक तरफ वरिष्ठ नेताओं का अनुभव बनाए रखने की बात है, तो दूसरी तरफ युवा नेतृत्व तैयार करने की रणनीति भी लंबे समय से चर्चा में रही है। पार्टी के उदयपुर और रायपुर चिंतन शिविरों में 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को संगठन और चुनावी राजनीति में ज्यादा अवसर देने का विचार सामने आया था।
इसे ’50 अंडर 50′ फॉर्मूले के तौर पर चर्चा मिली थी।छत्तीसगढ़ में भी इस फॉर्मूले के तहत नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की जरूरत पर पार्टी के भीतर जोर दिया जाता रहा है। इसका मतलब यह है कि 2028 की तैयारी में कांग्रेस के सामने एक साथ दो स्तर की चुनौती है वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल और नए चेहरों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना।
चुनाव से पहले नेतृत्व का सवाल:
कांग्रेस के सामने फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक लक्ष्य 2028 में सत्ता में वापसी का है। ऐसे में मुख्यमंत्री चेहरे का सवाल पार्टी के भीतर समय-समय पर उठना स्वाभाविक है।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव के पहले कांग्रेस किसी एक चेहरे को आगे करेगी या सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। फिलहाल इतना जरूर है कि मुख्यमंत्री पद की चर्चा ने कांग्रेस के पुराने समीकरणों को फिर चर्चा में ला दिया है।
चार वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आने के साथ ही दीपक बैज जैसे अपेक्षाकृत नई पीढ़ी के नेता भी इस बहस का हिस्सा बन रहे हैं।
आने वाले समय में पार्टी संगठन में होने वाले बदलाव और चुनावी तैयारियों से यह संकेत मिल सकता है कि कांग्रेस नेतृत्व का अगला चेहरा किस दिशा में बढ़ रहा है।



