आगामी त्योहारी सीजन और शादियों की खरीदारी से ठीक पहले घरेलू बाजार में सोने की खुदरा मांग सुस्त पड़ गई है। सितंबर महीने में सोने की खुदरा बिक्री में पिछले साल (2025) की तुलना में 8 से 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। ऊंची कीमतों, वैश्विक युद्ध की स्थिति और बाजार की अनिश्चितता के कारण उपभोक्ता फिलहाल खरीदारी करने से बच रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों और बाजार विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर जानिए सोने के बाजार का पूरा हाल।
‘युद्ध और अनिश्चितता से घबराए ग्राहक’
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद मेहता के अनुसार, ‘पिछले वर्ष की तुलना में इस सितंबर में सोने की बिक्री में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई है’। रूस-इरान या अन्य वैश्विक युद्ध की स्थितियों के कारण ग्राहक असमंजस में हैं। ग्राहकों को लगता है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है या स्थिति बदलती है, तो सोने के दाम और नीचे गिर सकते हैं। वही सुरेंद मेहता का मानना है कि जब तक युद्ध समाप्त नहीं होता और सोने की कीमतें एक स्थिर दिशा में नहीं बढ़तीं, तब तक खुदरा मांग में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिलेगा।
1 साल में 60% उछला सोने का भाव
हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ करेक्शन देखा गया है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले सोने की दरें अभी भी रिकॉर्ड स्तर पर हैं। पिछले साल 24-कैरेट शुद्ध सोने की कीमत करीब ₹98,000 प्रति 10 ग्राम थी, जो इस साल बढ़कर ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई है। यानी साल-दर-साल आधार पर करीब 60% की बढ़ोतरी। फरवरी के अंत में अमेरिकी-ईरान तनाव के बाद MCX पर सोना ₹1,61,700 प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंचा था। अगस्त में यह ₹1,57,750 के आसपास था, जो 24 सितंबर 2026 तक करीब 4.85% गिरकर ₹1,50,106 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।
क्या धनतेरस और दिवाली पर सुधरेगी मांग?
बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, अगर त्योहारी सीजन में कीमतें मौजूदा स्तर से थोड़ी और गिरकर स्थिर होती हैं, तो रुकी हुई खरीदारी बाजार में वापस आ सकती है। वैसे, फिजिकल मात्रा में रिकवरी धीमी ही रहेगी क्योंकि कीमतें अभी भी बहुत ऊंची हैं। कम ग्राम-ज्यादा वैल्यू का ट्रेंड: इस बार का त्योहारी सीजन ‘कम वॉल्यूम लेकिन ज्यादा वैल्यू’ वाला रहेगा। यानी भले ही लोग कम ग्राम सोना खरीदें, लेकिन कुल रुपये के मूल्य में ज्वेलर्स की बिक्री मजबूत दिख सकती है।
ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न में बड़ा बदलाव
ऑगमोंट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चैनानी और अन्य बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहक अब पारंपरिक ज्वेलरी के बजाय अन्य विकल्पों को तरजीह दे रहे हैं। ऊंची कीमतों की वजह से ग्राहक कम वजन, कम कैरेट (18K या 14K) और डायमंड-स्टडेड ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं। ज्वैलर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज पर छूट और पुराने सोने के बदले नया सोना जैसी स्कीम चला रहे हैं। फिजिकल सोने के मुकाबले Gold ETF, Gold Coins, Gold Bars और डिजिटल गोल्ड में रिकॉर्ड निवेश देखा जा रहा है। युवा निवेशक SIP मोड के जरिए डिजिटल गोल्ड में पैसा लगा रहे हैं।



