अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे करीब 14,000 सुपरटेक होमबायर्स के लिए एक बार फिर उम्मीद जगी है। अब हाउसिंग प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर वापस लाने की योजना के साथ एक और वादा की गई तारीख सामने आई है। सालों से दिवालिया प्रक्रिया, कानूनी लड़ाई और फंडिंग की दिक्कतों में फंसे सुपरटेक के 16 अधूरे प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य 16 जनवरी 2027 से दोबारा शुरू करने की योजना बनाई गई है। इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को दी गई है। NBCC 27 या उससे ज़्यादा टेंडर पैकेज के जरिए निर्माण कार्य सौंपने की तैयारी कर रही है।
27 से ज्यादा टेंडर पैकेज में होगा काम
हमारे सहयोगी ‘लोकल 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, NCLAT की ओर से NBCC को इन परियोजनाओं की निर्माण प्रक्रिया लागू करने वाली एजेंसी नियुक्त किया गया है। NBCC अब निर्माण कार्य के लिए 27 या उससे अधिक टेंडर पैकेज जारी करने की तैयारी कर रहा है। टेंडर चरणबद्ध तरीके से 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 के बीच जारी किए जाने हैं। उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित रिवर क्रेस्ट प्रोजेक्ट के लिए एक टेंडर पहले ही 16 सितंबर को जारी किया जा चुका है। निर्माण शुरू करने की यह नई डेडलाइन NCLAT की 25 अगस्त की सुनवाई के बाद सामने आई है। शीर्ष अदालत ने होमबायर्स की ओर से बार-बार समयसीमा बढ़ाए जाने की शिकायतों के बाद स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इससे पहले NBCC को 1 अक्टूबर 2026 से काम शुरू करने को कहा गया था। इससे पहले 1 मई और 31 जुलाई की डेडलाइन भी तय की गई थी, लेकिन दोनों समयसीमाओं पर निर्माण शुरू नहीं हो सका।
2021 में शुरू हुआ सुपरटेक का संकट
सुपरटेक की मुश्किलें मार्च 2021 में उस समय बढ़ीं, जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कंपनी के खिलाफ NCLT में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की। यह मामला Eco Village II से जुड़े करीब 432 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट से संबंधित था। NCLT ने इस मामले को 25 मार्च 2021 को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद 12 दिसंबर 2024 को NCLAT ने NBCC को सुपरटेक के 16 अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की मंजूरी दी। साथ ही निर्माण, फंड और प्रत्येक प्रोजेक्ट से होने वाली प्राप्तियों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एक कमेटी गठित करने का रास्ता साफ हुआ।
50 हजार फ्लैट वाले प्रोजेक्ट्स, 14 हजार की डिलीवरी बाकी
इन 16 परियोजनाओं में कुल मिलाकर करीब 50,000 फ्लैट हैं। इनमें से लगभग 14,000 फ्लैट अब तक खरीदारों को नहीं मिल पाए हैं। इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट्स को 2010 से 2012 के बीच लॉन्च किया गया था।
इन प्रोजेक्ट्स का विस्तार इस तरह है:-
- ग्रेटर नोएडा: 6 प्रोजेक्ट
- नोएडा: 4 प्रोजेक्ट
- गुरुग्राम: 2 प्रोजेक्ट
- मेरठ: 2 प्रोजेक्ट
- उत्तराखंड: 1 प्रोजेक्ट
- बेंगलुरु: 1 प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती से फिर अटका था रास्ता
NCLAT के फैसले के बाद सुपरटेक ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर रोक लगा दी, जिससे परियोजनाओं के पुनरुद्धार की प्रक्रिया एक बार फिर प्रभावित हुई। बाद में फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोजेक्ट्स को दोबारा आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग बनकर सामने आई।
फंड की कमी दूर करना सबसे बड़ी चुनौती
NBCC का कहना था कि जिन प्रोजेक्ट्स में पर्याप्त फंड उपलब्ध हैं, वहां से पैसा निकालकर आर्थिक रूप से कमजोर परियोजनाओं में सीधे नहीं लगाया जा सकता। इसकी वजह UP-RERA के नियम हैं। NBCC की ओर से नियमों में छूट की मांग की गई थी। लेकिन मई 2026 में NCLAT ने इस मांग को खारिज कर दिया। अब कमेटी संस्थागत वित्त जुटाने की दिशा में काम कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से मांगी गई टेक्नो-इकोनॉमिक वायबिलिटी रिपोर्ट (TEV Report) भी तैयार की जा रही है। इसके 15 दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है।
बिना बिके फ्लैटों से भी जुटाया जाएगा पैसा
इस परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बिना बिके फ्लैटों की बिक्री भी फंड जुटाने का एक महत्वपूर्ण स्रोत होगी। दिसंबर 2024 के NCLAT आदेश के मुताबिक इन परियोजनाओं में कुल 10,040 यूनिट्स बिना बिकी हुई दर्ज की गई थीं।
होमबायर्स बोले- इस बार लिखित गारंटी चाहिए
होमबायर्स की संस्था NEFOWA के प्रमुख अभिषेक कुमार ने बार-बार बदलती डेडलाइन पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार समयसीमा बदलने से खरीदारों की अनिश्चितता और बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि 16 जनवरी 2027 को निर्माण शुरू करने की नई तारीख तय की गई है, तो NBCC और कमेटी को इसे अदालत में लिखित रूप से दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों परिवार ऐसे हैं जो अपने घरों में रह तो रहे हैं। लेकिन अभी तक उनके फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे खरीदारों के लिए भी रजिस्ट्रेशन पूरा करने की एक निश्चित समयसीमा तय की जानी चाहिए। अब खरीदारों की नजर 1 से 15 अक्टूबर के बीच जारी होने वाले टेंडरों, दिसंबर में आने वाली वायबिलिटी रिपोर्ट और 16 जनवरी 2027 से प्रस्तावित निर्माण कार्य पर है। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस बार तय डेडलाइन के मुताबिक वास्तव में जमीन पर काम शुरू हो पाता है या नहीं।



