Home Blog

अगले हफ्ते बैंकों की लंबी छुट्टी! 7 में से 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, घर से निकलने से पहले चेक कर लें ये लिस्ट…

0

भारत में सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक अगले हफ्ते, 13 अप्रैल से 19 अप्रैल, 2026 के बीच, 4 दिनों तक बंद रहेंगे. अगले हफ़्ते बैंकों की छुट्टियां कई त्योहारों और खास मौकों की वजह से होंगी, जिनमें अंबेडकर जयंती, संक्रांति, तमिल नव वर्ष और पोहेला बोइशाख शामिल हैं.

13 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्मे में बैंकों की छुट्टियों में रविवार का वीकेंड अवकाश भी शामिल है. जब तक कोई खास सरकारी या क्षेत्रीय बैंक अवकाश घोषित न हो, बैंक आम तौर पर हर महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं. चूंकि अगले हफ़्ते का शनिवार महीने का तीसरा शनिवार है, इसलिए पूरे भारत में बैंक कामकाज के लिए खुले रहेंगे.

13 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच बैंकों की छुट्टियों की पूरी सूची

14 अप्रैल” मंगलवार अंबेडकर जयंती / महा विषुव संक्रांति / बीजू उत्सव / बुइसु उत्सव / तमिल नव वर्ष दिवस / बोहाग बिहू / चेइराओबा / बैसाखी अगरतला, अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, देहरादून, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंफाल, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना, राँची, तिरुवनंतपुरम, विजयवाड़ा में बैंक अवकाश

15 अप्रैल” बुधवार पोहेला बोइशाख / बोहाग बिहू / विशु / हिमाचल दिवस अगरतला, बेलापुर, भुवनेश्वर, चेन्नई, देहरादून, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंफाल, ईटानगर, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना, राँची, शिमला, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयवाड़ा में बैंक अवकाश

16 अप्रैल” गुरुवार बोहाग बिहू ईटानगर, कोच्चि, कोलकाता, तिरुवनंतपुरम में बैंक अवकाश

19 अप्रैल” रविवार – वीकेंड अवकाश के कारण पूरे भारत में बैंक अवकाश

बैंक आम तौर पर छुट्टियों के लिए कब बंद होते हैं?

RBI सभी बैंक छुट्टियों को तीन हिस्सों नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) की छुट्टियां, और बैंकों के खातों को बंद करने का दिन में बांटता है. RBI के बैंक छुट्टियों के कैलेंडर के अनुसार, बैंक की छुट्टियां अलग-अलग इलाकों में वहां के त्योहारों और रीति-रिवाजों के आधार पर अलग-अलग होती हैं. हालांकि, सभी बैंक गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय त्योहारों पर बंद रहते हैं. आम छुट्टियों के अलावा, बैंक आमतौर पर दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं. वे हर महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं. पूरे देश में हर रविवार को बैंक की छुट्टी होती है. शनिवार को होने वाली बैंक छुट्टी को RBI द्वारा नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषित किया गया है. यह बैंक छुट्टी चेक और प्रॉमिसरी नोट जारी करने के काम को नियंत्रित करती है.

बैंक छुट्टियों के दिन ये सेवाएं उपलब्ध रहती हैं

बैंक छुट्टियों के दिन भी जरूरी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं, जिसमें ऑनलाइन बैंकिंग, बैंकिंग गतिविधियों का एक अहम हिस्सा होने के कारण, इन दिनों भी काम करती है, जबकि बैंक की शाखाएं बंद रहती हैं. इसके अलावा, बैंक छुट्टियों के दिन ATM भी खुले रहते हैं. इसका मतलब है कि ग्राहक बैंक छुट्टियों के दिन भी कैश निकाल सकते हैं, ऑनलाइन पैसे भेज सकते हैं, अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकते हैं, मिनी स्टेटमेंट निकाल सकते हैं, और यहां तक ​​कि लोन के लिए अप्लाई भी कर सकते हैं. जिन कामों के लिए बैंक की शाखा में खुद जाना ज़रूरी होता है-जैसे चेक भुनाना या बैंक मैनेजर से मिलना-वे काम बैंक छुट्टियों के दिन बंद रहते हैं. चूंकि बैंक की छुट्टियां अलग-अलग इलाकों में काफी अलग-अलग होती हैं, इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक जाने से पहले अपनी स्थानीय शाखा से छुट्टियों के बारे में पता कर लें.

दिल्ली में ‘रन फॉर आंबेडकर’ मैराथन को राहुल गांधी ने दिखाई हरी झंडी, BJP-RSS पर साधा निशाना…

0

राहुल गांधी ने दिल्ली में रविवार को “रन फॉर आंबेडकर, रन फॉर संविधान” मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मैराथन अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अनुसूचित जाति विभाग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के सहयोग से आयोजित की गई। इसका मकसद युवाओं के बीच बाबा साहेब के संविधान और उनके विचारों के प्रति जागरूकता फैलाना है।

नेता विपक्ष श्री RahulGandhi ने “Run for Ambedkar, Run for Constitution” मैराथन को हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरूआत की। कांग्रेस द्वारा आयोजित इस मैराथन का लक्ष्य बाबा साहेब के संविधान और उनकी सोच के प्रति युवाओं को जागरूक करना है।

📍 दिल्ली संविधान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की पहल इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा कि “संविधान” ही बाबा साहेब का सबसे बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि अगर संविधान नहीं होता, तो आज भारत इस स्वरूप में दिखाई नहीं देता। इस मैराथन के जरिए कांग्रेस युवाओं तक संविधान के मूल विचार और समानता का संदेश पहुंचाना चाहती है। ‘संविधान’ बाबा साहेब अंबेडकर जी का संदेश है। अगर संविधान नहीं होता, तो भारत का ये स्वरूप हमें देखने को नहीं मिलता आज RSS-BJP के लोग संविधान को खत्म करना चाहते हैं, क्योंकि ये नहीं चाहते देश में सभी को एक समान माना जाए। चाहे BJP के लोग बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़ते…

बीजेपी-आरएसएस पर सीधा हमला

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ये संगठन संविधान को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “आज आरएसएस-बीजेपी के लोग संविधान को खत्म करना चाहते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि देश में सभी को बराबरी मिले।” उन्होंने यह भी कहा कि भले ही बीजेपी के नेता बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़ते नजर आते हैं, लेकिन उनके दिल में संविधान को खत्म करने की सोच है।

कांग्रेस का लक्ष्य: संविधान की रक्षा

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है और उसके संदेश को देश के हर कोने तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि हर नागरिक संविधान के महत्व को समझे और उसे बचाने के लिए आगे आए। इस मैराथन को कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग ने मिलकर आयोजित किया, जिसमें युवाओं की भागीदारी के जरिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई।

एनर्जी क्रंच के बीच नई पार्टनरशिप: बांग्लादेश के काम आएगी भारत की रिफाइनिंग पॉवर…

0

बांग्लादेश एक ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रहा है जिसके तहत वह रूसी कच्चे तेल को भारत में रिफाइन करवाएगा और फिर उस रिफाइंड फ्यूल को इंपोट करेगा. ऐसा करके वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में आई रुकावटों से निपटना चाहता है.

इस योजना के तहत, जिस पर अभी विचार चल रहा है, कच्चे तेल के इंपोर्ट, भारत में उसकी रिफाइनिंग और फिर रिफाइंड फ्यूल के ट्रांसपोर्ट का पूरा खर्च बांग्लादेश ही उठाएगा. ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा ​गया है कि इस सप्ताह बांग्लादेश के ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग ने इस संबंध में बिजली और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू को एक प्रस्ताव भेजा है. इस प्रस्ताव में विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर ‘सरकार-से-सरकार’ (G2G) लेवल का समझौता करने की अनुमति मांगी गई है.

बांग्लादेश के लिए क्यों जरूरी बनी भारत की रिफाइनरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चटगांव में स्थित बांग्लादेश की एकमात्र सरकारी रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं है. रूसी कच्चा तेल ज्यादातर ‘हेवी ग्रेड’ (भारी श्रेणी) का होता है, जिसके कारण बांग्लादेश को रिफाइंड फ्यूल के इंर्पोट पर ही पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता है. इस रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 1.5 मिलियन टन है और इसे मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट देशों से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए ही तैयार किया गया है.

इस सप्ताह बांग्लादेश के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान, भारत से डीजल का आयात बढ़ाने का मुद्दा एजेंडे में सबसे ऊपर रहा. बांग्लादेश पहले से ही भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बनाए हुए है. इसके लिए सिलीगुड़ी से लेकर दिनाजपुर के पार्वतीपुर तक एक सीमा-पार डीजल पाइपलाइन बिछाई गई है. यह पाइपलाइन ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड’ से डीजल आयात करने में सहायक है. इस इंपोर्ट के लिए वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच 15 साल का एक समझौता हुआ था.

रूस के सामने रखा ये प्रस्ताव

रूसी तेल के निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के कारण, बांग्लादेश को ‘इनडायरेक्ट इंपोर्ट’ के विकल्पों को तलाशने का एक सीमित अवसर मिल गया है. करीब दो हफ्ते पहले मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश, रूस से 600,000 टन तक डीजल आयात करने का प्रस्ताव भी रख रहा है. पिछले महीने, बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर खोजिन ने बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी.

‘राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही सरकार’ खड़गे का PM मोदी को पत्र…

0

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि राज्यों में चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना इस धारणा को बल देता है कि सरकार ”राजनीतिक लाभ” के लिए महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जल्दबाजी कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खड़गे ने इस मांग को दोहराया कि परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। इस परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों से जोड़ा जा रहा है।

खड़गे का यह पत्र प्रधानमंत्री के उस पत्र के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र का उल्लेख किया था।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने मोदी को शनिवार को लिखे पत्र में कहा, ”मुझे अभी-अभी 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र के संबंध में आपका पत्र प्राप्त हुआ है।”

खड़गे ने कहा, ”जैसा कि आप जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था। उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इसके तत्काल कार्यान्वयन के लिए व्यापक सहमति थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे लागू नहीं किया।

उन्होंने कहा, ”तब से 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष बैठक बुलाई गई है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है। आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना असंभव होगा।”

PM मोदी ने सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को लिखा पत्र, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर मांगा समर्थन…

0

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने को लेकर 16-18 अप्रैल के बीच तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. पीएम मोदी ने इसको लेकर सभी फ्लोर लीडर्स को लेटर लिखा. पीएम ने विपक्षी नेताओं से महिलाओं को आगे बढ़ने की दिशा में चर्चा में भाग लेने की बात कही है.

उन्होंने 2023 का जिक्र किया और कहा कि सभी दलों के सांसदों ने संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन करने के लिए एकजुट होकर काम किया. अब पीएम मोदी के इस लेटर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान सामने आया है. संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के लिए पीएम मोदी जी के पत्र के जवाब में खरगे ने लेटर लिखा कि जैसा कि आप जानते हैं, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था. उस समय, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से, मैंने यह मांग की थी कि इस महत्वपूर्ण कानून को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए. हालांकि, अपने पत्र में आपने यह उल्लेख किया है कि इसे तत्काल लागू करने पर व्यापक सहमति थी, फिर भी आपने इसे लागू नहीं किया.

खरगे ने कहा कि तब से अब तक 30 महीने बीत चुके हैं और अब यह विशेष सत्र हमें भरोसे में लिए बिना बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि आपकी सरकार, होने वाले परिसीमन के बारे में कोई भी जानकारी दिए बिना, एक बार फिर हमसे सहयोग की अपेक्षा कर रही है. आप इस बात से सहमत होंगे कि परिसीमन और दूसरे पहलुओं की विस्तृत जानकारी के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा.

चुनावी दौर खत्म होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने को कहा

खरगे ने कहा कि आपने अपने पत्र में जिक्र किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद हो रहा है कि यह बात सच्चाई के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से लगातार यह आग्रह कर रहे थे कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा चुनावी दौर समाप्त होने के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा की जा सके.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चल रहे राज्य चुनावों के दौरान इस विशेष सत्र को बुलाना हमारे इस विश्वास को और भी पुख्ता करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय, राजनीतिक लाभ उठाने की होड़ में इस विधेयक को जल्दबाजी में लागू करने का प्रयास कर रही है.

सभी की बात सुनी जाए

खरगे ने कहा कि मुझे यह लिखते हुए भी दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी हो, GST हो, जनगणना हो, या फिर संघीय ढांचे से जुड़े मामले हों, जैसे कि वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना और करों का बंटवारा, किसी भी तरह का भरोसा नहीं जगाता. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों का प्रभाव केंद्र और राज्यों, दोनों पर पड़ेगा और एक लोकतंत्र में यह अत्यंत आवश्यक है कि सभी दलों और राज्यों चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों उनकी बात सुनी जाए.

खरगे ने कहा कि यदि इस विशेष सत्र का उद्देश्य, जैसा कि आपने अपने पत्र में लिखा है, हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सबको साथ लेकर, मिलकर आगे बढ़ना है, तो मेरा सुझाव है कि सरकार 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक बुलाए, ताकि परिसीमन के उस मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में किए जा रहे संशोधन से जोड़ा जा रहा है.

सांसदों के लिए जारी किया व्हिप

सत्र से पहले, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में अपने सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है, जिसमें उन्हें कार्यवाही के दौरान पूरे समय उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. सांसदों को इस व्हिप का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है और इन तीन दिनों के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की छुट्टी की अनुमति नहीं होगी.

मौसम अपडेट: दिल्ली, यूपी, बिहार और राजस्थान में बढ़ी गर्मी, कई इलाकों में लू का असर, कहीं राहत के संकेत…

0

देशभर में अप्रैल के महीने में पारा चढ़ने लगा है। रविवार को मौसम का मिजाज साफ तौर पर बदलता नजर आ रहा है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की कगार पर है। वहीं, दूसरी ओर पहाड़ी राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मौसम राहत देने वाला बना हुआ है।

उत्तर भारत में सूरज के कड़े तेवर

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सूरज का तेवर कड़ा हो गया है। राजधानी में मौसम साफ रहेगा, लेकिन दोपहर के समय लू जैसे हालात बन सकते हैं। अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम 22 से 24 डिग्री के आसपास रहेगा। हवा की गति 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है, जिससे हल्की धूलभरी आंधी के संकेत भी हैं। वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में रह सकती है।

पंजाब और हरियाणा में भी तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाएंगी। यहां तापमान 37 से 41 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है और दोपहर में हीट वेव जैसी स्थिति बन सकती है। हालांकि शाम के समय हल्के बादल थोड़ी राहत दे सकते हैं, लेकिन बारिश की संभावना बेहद कम है।

राजस्थान और पश्चिमी भारत में चरम गर्मी

राजस्थान में गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ रही है। पश्चिमी हिस्सों जैसे जैसलमेर और बीकानेर में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जहां तेज लू चलेगी। वहीं पूर्वी राजस्थान में भी पारा 39 से 41 डिग्री के आसपास बना रहेगा।

गुजरात में तापमान 39 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है और तटीय इलाकों में उमस बढ़ेगी। मुंबई में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहेगा, जहां तापमान 30 से 34 डिग्री के बीच रहेगा, लेकिन 65 से 75 प्रतिशत तक आर्द्रता के कारण पसीना अधिक आएगा। समुद्री हवाएं कुछ राहत जरूर देंगी।

पहाड़ों और दक्षिण भारत में राहत

जहां एक तरफ मैदानों में गर्मी बढ़ रही है, वहीं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम राहत देने वाला है। देहरादून और नैनीताल जैसे इलाकों में बादल, हल्की बारिश और ठंडी हवाएं चल सकती हैं, जिससे तापमान 20 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा।

दक्षिण भारत में प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की बारिश से मौसम सुहावना हो सकता है। यहां तापमान 30 से 35 डिग्री के बीच रहेगा, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गर्मी और उमस दोनों का असर देखने को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में मिला-जुला असर

उत्तर प्रदेश में मौसम का असर अलग-अलग हिस्सों में अलग दिखाई देगा। पश्चिमी यूपी में गर्मी तेज रहेगी, जबकि पूर्वी हिस्सों में कुछ जगहों पर बादल छा सकते हैं, जिससे आंशिक राहत मिल सकती है।

cg प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की बारिश…

0

प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिलेगा और दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है

छत्तीसगढ़ में मौसम अब तेजी से गर्म होने की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिलेगा और दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग में गर्मी अपने चरम के करीब पहुंच सकती है। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को लू जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन पर भी असर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की बारिश दर्ज की गई, लेकिन इसका मौसम पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। दिन के समय सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 39.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो कि अपेक्षाकृत ठंडा रहा।

मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि वर्तमान में एक उत्तर-दक्षिण द्रोणिका मध्य ओडिशा से दक्षिण छत्तीसगढ़, तेलंगाना, रायलसीमा होते हुए तमिलनाडु के आंतरिक हिस्सों से गुजरकर मन्नार की खाड़ी तक फैली हुई है। यह मौसम प्रणाली क्षेत्र में तापमान और आर्द्रता को प्रभावित कर रही है, हालांकि फिलहाल इससे किसी बड़े बदलाव या बारिश की उम्मीद नहीं है।

राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां आज आसमान साफ रहने और मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। दिन का तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि रात में तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। दिनभर तेज धूप और बढ़ती गर्मी लोगों को सतर्क रहने का संकेत दे रही है।

CG” सीएम साय अब बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो की नई गाड़ियों के काफिले के साथ चलेंगे’

0

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अब बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो की नई गाड़ियों के काफिले के साथ चलेंगे। पूर्ववर्ती सरकार के समय की फॉर्च्यूनर गाड़ियों की जगह अब स्कॉर्पियो ने ले ली है। मुख्यमंत्री साय ने मुस्कुराते हुए बताया कि पुरानी गाड़ियां काफी चल चुकी थीं और कई बार रास्ते में बंद हो जाती थीं। सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से बदलाव की आवश्यकता थी। इसलिए नई गाड़ियों का उपयोग शुरू किया गया है। छह नई बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काफिले में छह नई बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री उन गाड़ियों का उपयोग कर रहे थे, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खरीदी गई थीं।

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण मई से, घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी…

0

जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में पहले चरण की शुरुआत अगले महीने से होने जा रही है। इस चरण में ‘मकान सूचीकरण एवं हाउसिंग सेंसस’ का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा।

जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में पहले चरण की शुरुआत अगले महीने से होने जा रही है। इस चरण में ‘मकान सूचीकरण एवं हाउसिंग सेंसस’ का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। यह प्रक्रिया 30 दिनों तक चलेगी, जिसमें प्रत्येक घर और भवन से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्रित की जाएगी।

इस चरण को जनगणना का अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए प्रदेश के सभी आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की स्थिति, उपयोग और उपलब्ध सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में सटीक आंकड़े मिल सकेंगे।

इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल रूप देने के लिए आम नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया गया है। इच्छुक लोग 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना पूरी करने के बाद एक विशेष आईडी जारी की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा और बाद में प्रगणक के आने पर उसे दिखाना अनिवार्य रहेगा।

मई महीने में प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। वे अधिकृत पहचान पत्र के साथ पहुंचेंगे, जिसकी पुष्टि नागरिक कर सकेंगे। लोगों से अपील की गई है कि वे सही और पूरी जानकारी दें, ताकि आंकड़े सटीक तैयार हो सकें।

इस प्रक्रिया के तहत मकान की संख्या, उसका प्रकार, उपयोग, निर्माण की स्थिति (कच्चा, पक्का या अर्ध-पक्का), परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, ईंधन और इंटरनेट जैसी जानकारी जुटाई जाएगी। ये आंकड़े शहरी और ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

पूरे कार्य की निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। साथ ही शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। अधिकारियों ने नागरिकों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करने और समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ में पांडुलिपि अभियान को मिलेगी नई गति, जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान, सीएम साय ने जनता से की ये अपील…

0

सीएम साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है।

पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व – संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सीएम साय ने कहा -ज्ञान की विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित करने का संकल्प – जनभागीदारी से होगा संरक्षण’

डिजिटल युग में सुरक्षित होगी हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा – जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।

ज्ञानभारतम मोबाइल एप का विवरण करें दर्ज

उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।

ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को किया गया प्रारंभ

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।

26 जिलों में हुआ जिला स्तरीय समिति का गठन

छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।