Home Blog

कांग्रेस में घमासान के बीच समय से पहले चुनाव तय, कर्नाटक भाजपा प्रमुख विजयेंद्र का दावा…

0

विजयेंद्र ने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि कर्नाटक कर्ज के जाल में फंस चुका है. उनके अनुसार असली मुद्दा यह नहीं है कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, बल्कि यह है कि राज्य किस दिशा में जा रहा है.

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने बुधवार (27 मई, 2026) को कहा कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कांग्रेस आलाकमान की कथित पहल सिद्धारमैया सरकार की प्रशासनिक विफलता को स्वीकार करने जैसा है. उन्होंने दावा किया कि राज्य में समय से पहले विधानसभा चुनाव अब तय हो चुके हैं.

विजयेंद्र ने कहा, ‘राज्य में समय से पहले चुनाव को अब कोई नहीं रोक सकता.’ मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मंगलवार (26 मई) को दिल्ली में करीब पांच से साढ़े पांच घंटे तक चली मैराथन बैठकों के बाद मुख्यमंत्री से इस्तीफा लेने का अंतिम फैसला किया गया. उन्होंने कहा कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कर्नाटक में कांग्रेस अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है.

एक सवाल के जवाब में विजयेंद्र ने कहा कि सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद चाहे जो भी मुख्यमंत्री बने, वह केवल अस्थायी होगा. उन्होंने दोहराया कि कर्नाटक में समय से पहले चुनाव को कोई नहीं रोक सकता.

उन्होंने कहा कि जैसे ही

सिद्धारमैया इस्तीफा देंगे, उसके बाद पैदा होने वाली राजनीतिक असमंजस की स्थिति जनता के सामने आ जाएगी, चाहे अगला मुख्यमंत्री कोई भी बने. एक अन्य सवाल पर विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बाद सिद्धारमैया निश्चित रूप से इस्तीफा देंगे. हालांकि, अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह केवल भगवान ही जानता है.

उन्होंने कहा कि यह सब कर्नाटक में कांग्रेस के पतन का संकेत है. विजयेंद्र ने स्पष्ट किया कि उनकी सिद्धारमैया से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और वह उन्हें दक्षिण भारत के सबसे अनुभवी मुख्यमंत्रियों में से एक मानते हैं. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने राज्य को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा दिया है.

उन्होंने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि कर्नाटक कर्ज के जाल में फंस चुका है. उनके अनुसार असली मुद्दा यह नहीं है कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, बल्कि यह है कि राज्य किस दिशा में जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष ने शासन व्यवस्था को पूरी तरह कमजोर कर दिया है.

विजयेंद्र ने वाल्मीकि निगम घोटाले और ‘मुदा’ घोटाले का जिक्र करते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. उन्होंने कुछ अधिकारियों की कथित आत्महत्या की घटनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उपचुनावों में जीत को सुशासन का पैमाना नहीं माना जा सकता. अगर उपचुनाव की जीत ही सुशासन का पैमाना होती, तो सिद्धारमैया को इस्तीफे की नौबत नहीं आती. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में डूब चुकी है, राज्य में विकास कार्य ठप हो गए हैं और इसी वजह से नेतृत्व परिवर्तन की नौबत आई है.

JDU के जनता दरबार में निशांत कुमार से मिलने पहुंच गए RJD के विधायक…

0

आरजेडी के विधायक बोगो सिंह ने कहा कि वे जेडीयू कार्यालय नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री के जनता दरबार में गए थे. अपने क्षेत्र की समस्या को लेकर उन्होंने आवेदन दिया है.

जेडीयू कार्यालय में बुधवार (27 मई, 2026) को पार्टी की ओर से आयोजित जनता दरबार में हैरान करने वाली तस्वीर तब दिखी जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार (Nishant Kumar) से मिलने के लिए आरजेडी के विधायक नरेंद्र सिंह उर्फ बोगो सिंह (Bogo Singh) पहुंच गए. बोगो सिंह अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे. निशांत से मिलकर उन्होंने अपनी बात रखी.

बोगो सिंह बेगूसराय की मटिहानी विधानसभा सीट से विधायक हैं. मुलाकात के बाद क्या कुछ बातें हुईं इसके बारे में उन्होंने एबीपी न्यूज़ को बताया. कहा कि हम जेडीयू कार्यालय नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री के जनता दरबार में गए थे.

अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर गए थे मिलने

उन्होंने कहा कि हम अपने क्षेत्र की समस्या को लेकर मिलने गए थे. हमारे यहां सिक्स बेड के हॉस्पिटल में कुत्ते बैठे रहते हैं. कोई डॉक्टर नहीं रहता है. इस समस्या का निदान किया जाए इसके लिए हमने उनको आवेदन दिया.

आरजेडी विधायक ने कहा कि हमने ज्यादा समय नहीं लगाया. अपनी बात को रखा और आवेदन देकर निकल गए. निशांत कुमार ने आश्वासन दिया है कि वे इसको देखेंगे. जल्द स्वास्थ्य-व्यवस्था वहां दुरुस्त होगी ऐसी बात उन्होंने कही है.

दूसरी ओर बोगो सिंह ने आरोप लगाया कि कहने को सुशासन है लेकिन एक मंत्री से एक विधायक को मिलने के लिए चप्पल घिस जा रहा है. हम 22 घंटे से स्वास्थ्य मंत्री से मिलने का प्रयास कर रहे थे. कल (मंगलवार) सुबह से हम लगे हुए थे. हम आवास पर भी गए, लेकिन मुलाकात नहीं हुई. अंत में जनता दरबार में जाना पड़ा. एक मंत्री से मिलने के लिए एक विधायक की कितनी फजीहत होती है यह देख सकते हैं.

बोगो सिंह ने कहा कि हमने अपने विधानसभा क्षेत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आदेश लेकर उनके (नीतीश) माता-पिता के नाम पर हॉस्पिटल बनवाया था. दो करोड़ की जमीन हमने दान में देकर उप स्वास्थ्य केंद्र को बनावाया. अभी वहां डॉक्टर नहीं रहते हैं. छह बेड का अस्पताल है. उसमें भूसा रखा रहता है. मवेशी बैठते हैं. इसी बात को रखने हम निशांत कुमार के पास गए थे.

भारत में Free WiFi का बड़ा अपडेट! अब QR Code स्कैन करते ही मिलेगा इंटरनेट, PM-WANI में हुए बड़े बदलाव….

0

PM-WANI Wi-Fi: अब PM-WANI वाई-फाई इस्तेमाल करने के लिए लंबी लॉगिन प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत यूजर्स QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में इंटरनेट से जुड़ सकेंगे.

PM-WANI Wi-Fi: देशभर में लोगों तक सस्ता और आसान इंटरनेट पहुंचाने के लिए सरकार ने PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) योजना में कई अहम बदलाव किए हैं. दूरसंचार विभाग (DoT) का उद्देश्य पब्लिक वाई-फाई को ज्यादा सुरक्षित, तेज और यूजर फ्रेंडली बनाना है, ताकि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक जगहों पर लोग आसानी से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकें.

QR Code स्कैन करते ही कनेक्ट होगा Wi-Fi

अब PM-WANI वाई-फाई इस्तेमाल करने के लिए लंबी लॉगिन प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत यूजर्स QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में इंटरनेट से जुड़ सकेंगे. इस फीचर की मदद से लैपटॉप, टैबलेट और दूसरे डिवाइस को भी आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा. यूजर को सिर्फ लॉगिन पेज पर दिख रहे QR कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होग जिसके बाद इंटरनेट एक्सेस तुरंत मिल जाएगा. इससे लॉगिन प्रोसेस पहले के मुकाबले तेज और ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी.

15, 30 और 60 मिनट वाले सस्ते प्लान

सरकार ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए PM-WANI के तहत छोटे समय वाले नए प्लान भी पेश किए हैं. ये सैशे स्टाइल प्लान होंगे जिनकी वैलिडिटी 15 मिनट, 30 मिनट और 60 मिनट तक रहेगी. इन प्लान्स का फायदा उन लोगों को मिलेगा जिन्हें थोड़े समय के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है जैसे यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन या बस अड्डे पर. इससे यूजर्स कम कीमत में अपनी जरूरत के हिसाब से डेटा इस्तेमाल कर पाएंगे.

फर्जी Wi-Fi नेटवर्क से मिलेगी सुरक्षा

पब्लिक वाई-फाई के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड और फेक हॉटस्पॉट से बचाने के लिए भी सरकार ने नया कदम उठाया है. अब आधिकारिक नेटवर्क के नाम में PMWANI ब्रांडिंग अनिवार्य होगी. इस बदलाव के बाद लोग असली और नकली वाई-फाई नेटवर्क में आसानी से फर्क कर सकेंगे. इससे डेटा चोरी और ऑनलाइन स्कैम जैसी घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी.

देशभर में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने की तैयारी

सरकार का मानना है कि इन नए बदलावों से PM-WANI योजना ज्यादा प्रभावी बनेगी और ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक इंटरनेट पहुंच को मजबूत किया जा सकेगा. आसान लॉगिन, छोटे प्लान और बेहतर सुरक्षा जैसे फीचर्स लोगों के डिजिटल अनुभव को पहले से बेहतर बनाने में मदद करेंगे.

 

अब सरकार कराएगी शॉपिंग, जल्द लॉन्च होगी वेबसाइट, जानिए आपको इससे कैसे मिलेगा फायदा?

0

पिछले कुछ सालों में देश के खादी सेक्टर में हुए तेजी से बढ़ोतरी ने हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. इसी को लेकर अब भारत में जल्द ही ई-कॉमर्स पोर्टल लॉन्च होने जा रहा है.

हमारे देश में खादी सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसी को लेकर खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि देश में जल्द ही खादी इंडिया उत्पादों के लिए एक नया और आधुनिक ई-कॉमर्स पोर्टल की शुरुआत होने जा रही है. जहां, पिछले साल 2 लाख करोड़ की बिक्री के बाद अब आम जनता के लिए बड़ा एक खजाना खुलने जा रहा है.

  1. क्या है नए पोर्टल की खास तकनीक?

चेयरमैन मनोज कुमार ने इस नए पोर्टल की तकनीक और फीचर्स के बारे में बताया कि यह पोर्टल मोबाइल-फर्स्ट पर ही पूरी तरह से आधारित होगा. जिसमें, हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें, बेहतर भुगतान सुविधाएं और ‘शॉप द लुक’ जैसे कमाल के फीचर्स ग्राहकों को देखने को मिलेंगे. इसके अलावा उन्होंने आगे कहा कि इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जेन जी को सबसे ज्यादा आकर्षित कर ब्रांड की कहानी को पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ पेश करना है.

  1. बिक्री और उत्पादन के रिकॉर्ड आंकड़े

तो वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी उत्पादों की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. जहां, रिकॉर्ड 1 लाख 87 हजार 105 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. जो कि साल 2013-14 में केवल 31 हजार 154 करोड़ रुपये हुआ करता था. इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2026-27 में इस बिक्री के 2.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है.

  1. रोजगार में देखने को मिली बढ़ोतरी

खादी और ग्रामोद्योग गतिविधियों में कुल रोजगार 2013-14 के 1.30 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 2.04 करोड़ हो गया है. यानी, साल 2013-14 के मुकाबले  2025-26 में खादी के माध्यम से करोड़ों को लोगों को रोजगार का अवसर मिला है.

  1. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का योगदान

इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में 66 हजार 494 नई इकाइयां स्थापित की गईं. जिसके तहत 7 लाख 31 हजार 434 लोगों को रोजगार के सुनहरे मौके मिले. इसके लिए 7 हजार 375 करोड़ रुपये के कर्ज पर 2 हजार 457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी भी लोगों को दी जा चुकी है.

तेल, रुपया और युआन… जानिए क्यों पुराने आर्थिक नियमों से नहीं संभल रही हमारी करेंसी…

0

पेट्रोल, गैजेट्स और राशन महंगा होने के पीछे सिर्फ महंगाई का हाथ नहीं है. रुपये, कच्चा तेल और चीनी युआन इसके पीछे बड़ा रोल प्ले करते हैं. यहां से इसके बारे में विस्तार में समझते हैं.

रुपया, तेल और युआन: क्यों बदल गया भारत की अर्थव्यवस्था का पूरा खेल

अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ सालों में पेट्रोल, गैजेट्स और रोजमर्रा की चीजें तेजी से महंगी हुई हैं, तो इसके पीछे सिर्फ महंगाई नहीं है. असली कहानी तीन बड़ी ताकतों के इर्द-गिर्द घूम रही है रुपया, कच्चा तेल और चीनी युआन. पहले माना जाता था कि अगर रुपया कमजोर होगा तो भारत के एक्सपोर्ट बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. 2019 से 2025 के बीच के आर्थिक ट्रेंड बताते हैं कि अब कमजोर रुपया हमेशा फायदे का सौदा नहीं रहा. आज भारत की अर्थव्यवस्था सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं है, बल्कि तेल की कीमतें और चीन पर बढ़ती निर्भरता भी रुपये की चाल तय कर रही हैं.

भारत के लिए तेल क्यों सबसे बड़ा खतरा?

भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही सीधा असर भारत की जेब पर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो भारत पर सालाना करीब 16 अरब डॉलर से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यही वजह है कि जब तेल महंगा होता है, तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का खर्च भी बढ़ जाता है.

रुपया कमजोर होने का फायदा अब कम क्यों?

एक समय था जब कमजोर रुपया भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए फायदा माना जाता था. क्योंकि इससे भारत का सामान विदेशों में सस्ता पड़ता था. लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था बदल चुकी है. पहले भारत मुख्य रूप से कपड़े और सस्ते उत्पाद बेचता था. अब भारत फार्मा, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है. इन सेक्टर्स में सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं है. यहां क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन ज्यादा मायने रखती है. इसलिए अब सिर्फ रुपये के कमजोर होने से एक्सपोर्ट में बड़ा फायदा नहीं मिलता.

आईटी सेक्टर और फैक्ट्रियों की अलग कहानी

कमजोर रुपया हर सेक्टर को एक जैसा प्रभावित नहीं करता. आईटी और BPO कंपनियों को कुछ फायदा जरूर मिलता है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है. लेकिन अब AI और ऑटोमेशन की वजह से यह फायदा भी पहले जितना बड़ा नहीं रहा. दूसरी तरफ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की मुश्किल बढ़ जाती है. भारत में मोबाइल, कार और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को चिप्स, मशीनें और पार्ट्स विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. जब रुपया गिरता है, तो इन चीजों की कीमत और बढ़ जाती है. यानी उत्पादन महंगा हो जाता है और कंपनियों का मुनाफा कम हो जाता है.

चीन बना सबसे बड़ी चिंता

डॉलर के अलावा अब चीन का युआन भी भारत के लिए बड़ा फैक्टर बन गया है. भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सोलर सेक्टर में चीन पर काफी निर्भर है. स्थिति ऐसी है कि भारत की कई इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान का 80 से 95 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है. अगर रुपया कमजोर होता है, तो चीन से आने वाला सामान और महंगा हो जाता है. इसका असर भारत की फैक्ट्रियों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है.

क्यों पहले बढ़ता है नुकसान?

अर्थशास्त्र में इसे जे कर्व इफेक्ट कहा जाता है. इसका मतलब है कि जब रुपया कमजोर होता है, तो शुरुआत में फायदा नहीं बल्कि नुकसान ज्यादा दिखाई देता है. क्योंकि भारत तेल जैसी जरूरी चीजें खरीदना बंद नहीं कर सकता. भले कीमत बढ़ जाए, फिर भी आयात करना पड़ता है. यानी कमजोर रुपया पहले व्यापार घाटा बढ़ाता है और बाद में जाकर कुछ फायदा देता है. 2022 में भी ऐसा ही हुआ था, जब भारत का चालू खाता घाटा काफी बढ़ गया था.

अब सिर्फ रुपये से नहीं चलेगा काम

अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ रुपये को बचाना नहीं है. असली चुनौती है देश के अंदर मजबूत उत्पादन तैयार करना. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को तेल पर निर्भरता कम करनी होगी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी और चीन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा घटाना होगा. अगर भारत हाई-टेक प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मजबूत सप्लाई चेन तैयार कर लेता है, तो रुपया लंबे समय तक मजबूत रह सकता है.

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रुपया कितना गिरेगा. असली सवाल यह है कि भारत कितना मजबूत उत्पादन कर पाएगा. क्योंकि आने वाले समय में वही देश आगे बढ़ेंगे जो सिर्फ मुद्रा नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत होंगे.

Happy Eid-ul-Adha 2026 Wishes: ये मैसेज भेज कहें हैप्पी ईद-उल-अजहा, तुरंत रिप्लाई आएगा बकरीद मुबारक…

0

Happy Eid-ul-Adha 2026 Wishes: जिलहिज्जा की दसवीं तारीख पर भारत में गुरुवार 28 मई को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का दिन रहेगा. बकरीद पर दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों को भेजने के लिए देखें बेहतरीन मैसेज.

इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का आखिरी महीना जिलहिज्जा बहुत ही पाक और महत्वपूर्ण माना जाता है. खासकर जिलहिज्जी के पहले 10 दिन नेमत, बरकत और इबादत वाले होते हैं. इन दिनों मे हज यात्रा पूरी की जाती है और जिलहिज्जा के दसवें दिन कुर्बानी दी जाती है, जिसे बकरीद या बकरा ईद के नाम से जानते हैं,

ईद-उल-अजहा का त्योहार दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय के लोग मनाते हैं. यह त्योहार पशु कुर्बानी के साथ ही अल्लाह पर विश्वास, श्रद्धा और समर्पण को भी दर्शाता है. बकरीद के दिन सुबह नमाज अदा की जाती है, घरों में तरह-तरह के पकवान बनते है, लोग नए कपड़े पहनते हैं, मेहमानों का घर पर आना-जाना होता है और पशु की कुर्बानी दी जाती है.

बकरीद के एक दिन पहले से तमाम तरह की तैयारियों के साथ ही मुबारकबाद का सिलसिला भी शुरू हो जाता है. अगर आप भी ईद-उल-अजहा पर अपने खास दोस्त, रिश्तेदार, परिवार या कलीग को मुबारकबाद देना चाहते हैं तो, यहां देखें बकरीद के बेहतरीन बधाई संदेश

ईद का दिन है, अल्लाह का इनाम है,
कुर्बानी से भरपूर, यह प्यार का पैगाम है.
ईदउलअजहा की मुबारकबाद!

जो भी मांगा सच्चे दिल से, वो मुकम्मल हो,
ऐसी दुआओं से भरा, ये ईद का पैगाम हो.
बकरीद मुबारक!

आपकी कुर्बानी कबूल हो और आपकी
जिंदगी में नई उम्मीदें और सफलताएं आएं
हर दिल में सच्चा प्रेम और भाईचारा बना रहे.

आप सबसो ईदउलअजहा की मुकाबरकबाद!

अल्लाह आपको खुशियां और अता करे,
दुआ हमारी है आपके साथ,
बकरा ईद पर आप और सबाब हासिल करें!
Happy Eid Ul Adha 2026

कुर्बानी का त्योहार है, ईमान की पहचान है,
अल्लाह की रहमत बनी रहे, यही दुआ बारबार है.
बकरीद 2026 मुबारक!

समंदर को मिले उसका किनारा,
चांद को प्यारा सितारा
फूलों को भाए उसकी महक,
दिल को मिले उसका हमसफर
आपको और आपके परिवार को
बकरीद की ढेरों मुबारकबाद!

नजराना जन्नत से आया है,
खुशियों का खजाना संग लाया है
दिल की दुआ है, कुबूल हो हर आरजू,
बकरीद मुबारक का फरमान आया है
बकरीद की मुबारकबाद!

तुम्हारी हर ख्वाहिश खुदा मंजूर करे,
हर कदम पर उसकी रजा मिले
गम का नामोनिशान मिट जाए,
बस रहमतखुदा बरसती रहे
Happy Eid ul-Adha 2026!

मेरे दोस्‍त याद रहे अपनी बुराइयों और घमंड की भी कुर्बानी देना ही इस त्योहार की असली सीख है.

अल्लाह हम सबको नेक राह पर चलने की तौफीक दे. ईद उल अजहा मुबारक

इस पाक मौके पर दुआ है कि,
आपके जीवन से हर परेशानी दूर हो जाए और
हर कदम पर कामयाबी आपका साथ है.
बकरीद 2026 मुबारक!

कुर्बानी का यह त्योहार हमें प्यार, सब्र और इंसानियत का संदेश देता है.
अल्लाह आपके दिव को सुकून और जिंदगी को खुशियों से भर दे.
बकरीद की बहुत बहुत मुबारकबाद!

असम में UCC बिल पास होने के बाद CM हिमंत बिस्वा सरमा का पहला रिएक्शन…

0

Assam UCC: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम विधानसभा से यूसीसी बिल पास होना केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक अधिक न्यायपूर्ण और एकजुट भविष्य की ओर बढ़ाया गया कदम है.

असम विधानसभा ने बुधवार (27 मई 2026) को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास किया. उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम अब देश का तीसरा राज्य बन चुका है, जिसने इस कानून को अपनाया है. सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल के पास होने के बाद एनडीए के विधायकों को धन्यवाद दिया है.

हर धर्म के लोगों को मिलेगा बराबरी का अधिकारी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘आज असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पास होने के साथ ही यहां रहने वाले हर धर्म के लोगों को नागरिक मामलों में कानून के सामने बराबरी का अधिकार मिल जाएगा. इस महत्वपूर्ण बिल का पूरा समर्थन करने के लिए मैं एनडीए के सभी विधायकों को दिल से धन्यवाद देता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘असम ऐसे सुधारों के साथ आगे बढ़ना जारी रखेगा जो समाज को मजबूत करते हों, महिलाओं को न्याय दिलाते हों, परिवारों की सुरक्षा करते हों और समुदायों के बीच आपसी एकता को बढ़ावा देते हों. असम विधानसभा से यूसीसी बिल पास होना केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक अधिक न्यायपूर्ण और एकजुट भविष्य की ओर बढ़ाया गया कदम है. असम के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि हम समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने वाले भारत के तीसरे राज्य बन गए हैं. इसके साथ ही हमने हमारे देश के संविधान निर्माताओं की इच्छा को भी पूरा किया है.’

यूसीसी लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी: विपक्ष

असम विधानसभा में सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया था. सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री यूसीसी को सभी वर्गों के लिए लाभदायक बता रहे हैं. वहीं, विपक्षी दलों के नेता इसका लगातार विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता वाजेद अली चौधरी ने कहा, ‘समान नागरिक संहिता में जिन विषयों का उल्लेख किया गया है, वे पहले से ही अलग-अलग कानूनों के माध्यम से लागू हैं. बाल विवाह, बहुविवाह, विवाह और तलाक का पंजीकरण, गुजारा भत्ता और अन्य मुद्दे विभिन्न कानूनों द्वारा शासित हैं. फिर यूसीसी लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी.’

US Iran War Impact: US-ईरान जंग के तीन महीने पूरे! कैसे होर्मुज से दुनिया की नसों में घुला जहर…

0

IMF ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है. लेकिन दूसरी तस्वीर में, ग्लोबल ग्रोथ 2% तक गिर सकती है और महंगाई दर 6% से ऊपर जा सकती है.

आज ईरान-अमेरिका जंग को पूरे 88 दिन हो गए. दोहा में एक तरफ अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार शांति समझौते की बारीकियों पर उलझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल ठिकानों और माइन बिछा रही नौकाओं पर नए हमले कर दिए हैं. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने ‘युद्धविराम का उल्लंघन’ किया और वो इसका ‘भारी जवाब’ देने को तैयार .  होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं और IMF ने चेतावनी दे दी है कि अगर जंग लंबी खिंची तो दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती है.

आइए समझते हैं, पिछले तीन महीनों में इस जंग ने दुनिया का नक्शा कैसे बदल डाला

28 फरवरी: जब रातोंरात बदल गया सब कुछ

28 फरवरी 2026 को अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमानों ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. रॉकेट, मिसाइलें और ड्रोन तेहरान, करमानशाह, तबरेज, क़ोम और इस्फ़हान जैसे बड़े शहरों पर एक साथ बरसने लगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद ऐलान किया, ‘हमने ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है.’ व्हाइट हाउस का तर्क था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल प्रणाली अमेरिकी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन चुकी थी.

लेकिन जिसे ट्रंप ‘एक छोटी और विजयी जंग’ समझ रहे थे, वो तीन महीने में एक ऐसे क्षेत्रीय तूफान में बदल गई जिसने तेल की सप्लाई चेन से लेकर आम आदमी की रसोई तक सबकी कमर तोड़कर रख दी. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की राजधानी तेहरान के डाउनटाउन इलाके में तीन बड़े धमाके हुए थे, जिनकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी.

ईरान ने दिया मुंहतोड़ जवाब

ईरान भी चुप बैठने वालों में से नहीं था. उसकी एलीट रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तुरंत पलटवार किया और बहरीन, जॉर्डन, कतर, कुवैत, UAE और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, अमेरिका अब तक 10,000 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका है, जबकि इजरायल ने 3,000 से ज्यादा टारगेट हिट किए हैं. दूसरी तरफ, ईरान का दावा है कि वो अब तक 87 से ज्यादा बार जवाबी हमले कर चुका है.

इस जंग ने लेबनान, यमन, इराक, सीरिया और पूरे खाड़ी इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. अल जजीरा के मुताबिक, 20 मई 2026 तक अकेले ईरान में 3,468 लोग मारे जा चुके थे और 26,500 से ज्यादा घायल हो चुके थे. लेबनान में 3,042 लोगों की मौत हुई और 9,300 से ज्यादा जख्मी हुए. इजरायल में 26, अमेरिका के 13 सैनिक और खाड़ी देशों में 12 से ज्यादा लोगों की जान गई.

होर्मुज की नाकेबंदी और तेल की बौखलाई कीमतें

इस जंग का सबसे बड़ा और तुरंत दिखने वाला असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा. ये एक संकरा सा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया का करीब 20% समुद्री तेल इसी से होकर गुजरता है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में इस रास्ते से रोजाना करीब 2.09 करोड़ बैरल तेल गुजरता था.

ईरान ने जंग के शुरुआती दिनों में ही इस रास्ते पर नाकेबंदी कर दी, जिसके बाद तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह से गड़बड़ा गई. ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 23 मार्च के बीच होर्मुज से सिर्फ 144 कमर्शियल जहाज गुजरे, जो जंग से पहले के मुकाबले 95% की भारी गिरावट थी. नतीजतन, ब्रेंट क्रूड का भाव अप्रैल के आखिर में 138 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया. फिलहाल, 27 मई को ये 100 डॉलर के आसपास मंडरा रहा है. EIA के मुताबिक, अप्रैल में इराक, सऊदी अरब, कुवैत, UAE, कतर और बहरीन का करीब 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन का उत्पादन ठप रहा.

भारत के लिएपरफेक्ट स्टॉर्म

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इस जंग की चपेट में सबसे बुरी तरह आया. होर्मुज की नाकेबंदी ने भारत की सप्लाई लाइन को सीधे तौर पर हिट किया. विवश होकर, भारतीय रिफाइनरियों ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का रुख किया और नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, अमेरिका से एक अस्थायी छूट मिलने के बाद भारत ने सात साल बाद पहली बार ईरान से सीधे क्रूड खरीदना भी शुरू कर दिया. लेकिन इससे राहत नहीं मिली.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ आखिरकार आम भारतीय उपभोक्ता पर आ ही गया. सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने मई 2026 में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी की. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया. ONGC की निदेशक (अन्वेषण) सुषमा रावत ने ANI को बताया, ‘सरकार ने 75 दिनों तक जनता को राहत दी, इस दौरान कीमत नहीं बढ़ाई गई. लेकिन तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था. कब तक इसे झेला जाता?’

महंगे तेल ने रुपये की भी कमर तोड़ दी. जंग शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में अब तक रुपया 7% से ज्यादा लुढ़क चुका है और 27 मई को ये 95.75 के स्तर पर पहुंच गया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये जल्द ही 100 के पार जा सकता है.

बिखरती दुनिया: NATO में दरार, चीन का फायदा

इस जंग ने दुनिया के देशों को एक बार फिर दो खेमों में बांट दिया है. एक तरफ अमेरिका है, जिसे अपने NATO सहयोगियों से खुला समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और पोलैंड जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने इस जंग में अमेरिका का साथ देने से साफ इनकार कर दिया. स्पेन ने तो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने तक की इजाजत नहीं दी. इस नाराजगी के चलते ट्रंप प्रशासन इन ‘नाकारा’ सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई तक की धमकी दे चुका है.

दूसरी तरफ चीन और रूस हैं. चीन, जो पहले से ही ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, उसे इस संकट में भी फायदा होता दिख रहा है. वो लगातार ईरान से भारी डिस्काउंट पर तेल खरीद रहा है और युआन या बार्टर सिस्टम के जरिए भुगतान करके डॉलर की सर्वोच्चता को चुनौती दे रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये जंग जितनी लंबी खिंचेगी, चीन की सौदेबाजी की ताकत उतनी ही बढ़ेगी.

अर्थव्यवस्था पर ब्रेक और मंदी का डर

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि अगर ये जंग और लंबी चली, तो दुनिया मंदी के दौर में जा सकती है. अपने सबसे आशावादी अनुमान में भी IMF ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है. लेकिन दूसरी तस्वीर में, ग्लोबल ग्रोथ 2% तक गिर सकती है और महंगाई दर 6% से ऊपर जा सकती है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का कहना है कि जंग के दौरान 80 से ज्यादा एनर्जी फैसिलिटी डैमेज हो चुके हैं और इनकी रिकवरी में 2 साल तक का समय लग सकता है. IEA ने ये भी चेतावनी दी है कि अगर जंग अगले महीने खत्म भी हो जाती है, तब भी तेल बाजार अक्टूबर 2026 तक ‘गंभीर रूप से अंडरसप्लाइड’ रहेगा.

IMF के मुताबिक, अकेले ईरान की GDP इस साल 6.1% तक सिकुड़ सकती है. वहीं, कतर (8.6%), इराक (6.8%), कुवैत (0.6%) और बहरीन (0.5%) जैसे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी बुरा असर पड़ने का अनुमान है.

एक नाजुक समझौता या महाविनाश की ओर?

विदेश मामलों के जानकार और NEHU के प्रोफेसर डॉ. प्रसेनजीत बिस्वास कहते हैं, ’87 दिनों के इस संघर्ष के बाद, अब दोनों तरफ से शांति की कोशिशें तेज हैं. कतर की राजधानी दोहा में एक नाजुक समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को धीरे-धीरे खोला जाएगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा. बदले में ईरान को अपने अरबों डॉलर की फ्रोजन संपत्ति तक पहुंच मिलेगी और सीमित तेल निर्यात की इजाजत दी जाएगी. सबसे अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिसमें तेहरान 60 दिनों के भीतर अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सरेंडर कर सकता है.’

27 मई 2026 को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में एक बार फिर ‘डिफेंसिव अटैक’ किए, जिसमें मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइन बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया. ईरान ने इसे ‘युद्धविराम का खुला उल्लंघन’ बताते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान कहा कि ‘डील होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं.’ वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का कहना है कि ‘घड़ी की सुइयां पीछे नहीं घुमाई जा सकतीं.’ ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर लिखा, ‘या तो एक अच्छी डील होगी या फिर हमें इससे दूसरे तरीके से निपटना होगा.’

दुनिया सांस थामे देख रही है. ये जंग, जिसने तेल के मोल और दुनिया के बंटवारे की असलियत दिखा दी है, आखिर किस मोड़ पर जाकर थमेगी? फिलहाल इस सवाल का जवाब होर्मुज की लहरों में ही छिपा है.

कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में कांग्रेस? राहुल गांधी के करीबी नेता के बयान से मची हलचल…

0

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने पेपर लीक और SIR मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि असली विपक्ष सड़क पर लड़ रहा है.

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने पेपर लीक, SIR और विपक्ष की राजनीति को लेकर केंद्र सरकार के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला. बातचीत के दौरान कन्हैया कुमार ने कहा कि असली लड़ाई सड़क पर लड़ी जा रही है, जबकि कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर राजनीति कर रहे हैं.

‘कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ रील बना रही’

बातचीत के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उनके कॉकरोच जनता पार्टी वाले बयान की रही. कन्हैया कुमार ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी विपक्ष का स्पेस नहीं खा रही है. रील बनाने वाले लोग हैं. विपक्ष सड़क पर है. अभी कॉकरोच जनता पार्टी दल नहीं बनी है. मेरी उनको शुभकामना है कि वह दल बनाए और जमीन पर जाये. सिर्फ रील के माध्यम से राजनीति नहीं होती.”

कन्हैया कुमार ने साफ तौर पर कहा कि राजनीति सिर्फ सोशल मीडिया और वीडियो बनाने से नहीं चलती, बल्कि जनता के मुद्दों पर जमीन पर संघर्ष करना पड़ता है.

पेपर लीक पर सरकार को घेरा

कन्हैया कुमार ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, पेपर लीक के मामले पर सरकार चुप क्यों है. मोदी जी प्रधान को क्यों बचा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से लगातार खिलवाड़ हो रहा है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है. उन्होंने कहा, “पेपर लीक के खिलाफ युवा सड़क पर रहेगा. हम आने वाले वक्त पर सड़क पर विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे.”

कन्हैया कुमार ने कहा कि बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी से युवाओं में भारी नाराजगी है और विपक्ष इस आवाज को लगातार उठाता रहेगा.

SIR और चुनाव आयोग पर भी सवाल

बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटिंग प्रक्रिया को लेकर भी कन्हैया कुमार ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “बिहार और पश्चिम बंगाल में वोट चोरी हुआ है. सुप्रीम कोर्ट का रही है कि SIR वैध है लेकिन राहुल गांधी ने सबूत के साथ बताया है कि चुनाव आयोग ने किस तरीके से धांधली की है.”

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष लगातार चुनावी गड़बड़ियों को लेकर जनता के बीच जा रहा है और इस मुद्दे पर भी आंदोलन जारी रहेगा.

Petrol-Diesel Price: भारत में पेट्रोल- डीजल का भाव क्या है? पाकिस्तान में पेट्रोल- डीजल का भाव क्या है?

0

कच्चा तेल इस समय दुनियाभर में परेशानी का कारण बन गया है. भारत ही नहीं, पाकिस्तान भी इससे निपटने के लिए क्या कर रहा है, ये जानने वाली बात है. यहां आप दोनों देश की स्थिति समझें.

भारत में पिछले करीब 13 दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. तेल कंपनियों ने कई बार दाम बढ़ाए हैं, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है. दूसरी तरफ पाकिस्तान में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए तेल की कीमतों में कटौती की है. यानी जहां भारत में तेल महंगा हो रहा है, वहीं पाकिस्तान में कुछ राहत देखने को मिली है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर दोनों देशों पर पड़ा है, लेकिन दोनों सरकारों का तरीका अलग नजर आ रहा है. यहां हम इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे और समझेंगे कि भारत और पाकिस्तान के हालात इस समय कैसे हैं.

भारत में पेट्रोलडीजल का भाव क्या है?

भारत में पिछले 13 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं. सिर्फ 10 दिनों के अंदर चार बार कीमतों में इजाफा किया गया. अभी दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है, जबकि मुंबई में पेट्रोल करीब 111 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. डीजल के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा की कई चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं.

पाकिस्तान में पेट्रोलडीजल का भाव क्या है?

पाकिस्तान में कुछ समय पहले पेट्रोल की कीमतें 409 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं. वहां भी तेल संकट और महंगाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम घटाए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने पेट्रोल करीब 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 6.80 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया है. नई कीमत के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल करीब 403 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है. इससे पहले भी पाकिस्तान सरकार 5 रुपये प्रति लीटर तक की राहत दे चुकी है.

दोनों देशों का तरीका अलग क्यों है?

भारत में तेल कंपनियां लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और नुकसान का हवाला दे रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 13 रुपये और डीजल पर 38 रुपये प्रति लीटर तक नुकसान हो रहा है. इसी वजह से भारत में लगातार दाम बढ़ाए जा रहे हैं. वहीं, पड़ोसी देश की बात करें तो पाकिस्तान में सरकार ने बढ़ती नाराजगी और महंगाई को देखते हुए राहत देने का फैसला किया है. हालांकि, वहां की अर्थव्यवस्था पहले से भी ज्यादा दबाव में है, इसलिए सरकार को इससे निपटने के लिए सब्सिडी और टैक्स एडजस्टमेंट का सहारा लेना पड़ रहा है.

आम लोगों पर क्या असर?

भारत में लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से लोगों का ट्रैवल और घर का खर्च तेजी से बढ़ा है. सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार महंगाई को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कई शहरों में पैनिक बाइंग तक देखने को मिली है. दूसरी तरफ पाकिस्तान में कीमतें घटने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन वहां भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. फिलहाल दोनों देशों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार और मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि तेल की अगली चाल वहीं से तय होगी.