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विभिन्न शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की पहली आवंटन सूची जारी…

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छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने विभिन्न शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की पहली आवंटन सूची जारी कर दी है।

छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने विभिन्न शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रथम चरण की पहली आवंटन सूची जारी कर दी है। पहली सूची के माध्यम से बीएड की 14,005 और डीएलएड की 6,379 सीटों का आवंटन किया गया है। राज्य भर में बीएड प्रवेश के लिए 20,178 स्टेट रैंक तक और डीएलएड के लिए 21,775 स्टेट रैंक तक के अभ्यर्थियों को सीटें मिली हैं। आवंटित कॉलेजों में अभ्यर्थियों को 21 अगस्त तक प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संपूर्ण राज्य में बीएड की कुल 14,495 तथा डीएलएड की कुल 6,710 सीटें उपलब्ध हैं।

शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय रायपुर में बीएड पाठ्यक्रम के लिए आवंटित 73 सीटों में स्टेट रैंक 1 से लेकर 18,693 तक के अभ्यर्थियों को जगह मिली है। सामान्य वर्ग में यह आवंटन 70वीं स्टेट रैंक से लेकर 3,085वीं रैंक तक हुआ है। इस संस्थान में राज्य के शीर्ष 10 रैंकर्स में से प्रथम, तीसरे, चौथे और सातवें स्थान वाले चार अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया है। इसके अलावा शीर्ष 100 रैंकर्स में से 23 अभ्यर्थी इस महाविद्यालय में शामिल हुए हैं।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) रायपुर में डीएलएड की 94 सीटें आवंटित की गई हैं। यहां सामान्य श्रेणी के तहत 86 से 1,740 स्टेट रैंक तक के अभ्यर्थियों को सीट मिली है, जिसमें शीर्ष 100 में से 17 अभ्यर्थी और शीर्ष 10 में से दूसरी रैंक पाने वाले अभ्यर्थी की पहली पसंद यह संस्थान रहा।

डीएलएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों ने डाइट संस्थानों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। डीएलएड की राज्य स्तरीय मेरिट में शीर्ष 10 रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों में से सात अभ्यर्थियों को डाइट में सीट मिली है। इसी तरह शीर्ष 50 रैंकर्स में से 27 अभ्यर्थियों और शीर्ष 100 रैंकर्स में से 56 अभ्यर्थियों ने डाइट को ही चुना है। इस प्रकार डीएलएड करने वाले शीर्ष 100 में से 56 प्रतिशत मेधावी अभ्यर्थियों की पहली पसंद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रहे हैं।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) रायपुर में डीएलएड की 94 सीटें आवंटित की गई हैं। यहां सामान्य श्रेणी के तहत 86 से 1,740 स्टेट रैंक तक के अभ्यर्थियों को सीट मिली है, जिसमें शीर्ष 100 में से 17 अभ्यर्थी और शीर्ष 10 में से दूसरी रैंक पाने वाले अभ्यर्थी की पहली पसंद यह संस्थान रहा।

डीएलएड पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों ने डाइट संस्थानों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है। डीएलएड की राज्य स्तरीय मेरिट में शीर्ष 10 रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों में से सात अभ्यर्थियों को डाइट में सीट मिली है। इसी तरह शीर्ष 50 रैंकर्स में से 27 अभ्यर्थियों और शीर्ष 100 रैंकर्स में से 56 अभ्यर्थियों ने डाइट को ही चुना है। इस प्रकार डीएलएड करने वाले शीर्ष 100 में से 56 प्रतिशत मेधावी अभ्यर्थियों की पहली पसंद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रहे हैं।

प्रथम चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया के अंतर्गत कुल चार सूचियां जारी की जाएंगी। पहली सूची के तहत प्रवेश प्रक्रिया 21 अगस्त को समाप्त होने के पश्चात दूसरी सूची के लिए दावा-आपत्ति 25 अगस्त को दर्ज की जा सकेगी। 27 अगस्त को द्वितीय सूची प्रकाशित होगी, जिसके आधार पर अभ्यर्थी 27 अगस्त से 2 सितंबर तक प्रवेश ले सकेंगे। तृतीय सूची पर दावा-आपत्ति 7 सितंबर को होगी और 9 सितंबर को सूची जारी की जाएगी। इस सूची के अभ्यर्थी 9 से 11 सितंबर तक दाखिला ले सकते हैं। चतुर्थ सूची हेतु दावा-आपत्ति 15 सितंबर को तथा अंतिम सूची का प्रकाशन 16 सितंबर को होगा, जिसके तहत 16 से 19 सितंबर तक प्रवेश लिया जाएगा।

“शिष्ट पहचान और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने में उपयोगी सिद्ध”

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भारतीय लोक प्रशासन संस्थान प्रशासन, सुशासन, विकास, संस्कृति और प्राकृतिक वैभव”

आजादी के बाद प्रशासनिक बदलाव से लेकर वर्तमान विकास यात्रा तक का दस्तावेज है पुस्तक”

प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बनेगी पुस्तक”

जिले में बेहतर प्रशासन और भावी विकास के लिए भी प्रस्तुत किए गए हैं महत्वपूर्ण आयाम”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के द्वारा प्रकाशित पुस्तक एक परिचय’ का विमोचन किया।

जिले के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन की व्यवस्थाओं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित एक व्यापक अध्ययन है।

प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों के साथ वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया है।

इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की  छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन  भूतपूर्व मुख्य सचिव श्री सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन भूतपूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय”

इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़

क्षेत्रीय शाखा को बधाई देते हुए कहा…

छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।”

पहचान उसके सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों से तो है ही, यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं।”

उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के साथ जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में समेटना सराहनीय प्रयास है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए वहां के इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समग्र अध्ययन आवश्यक है। इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्तक केवल जशपुर की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए परिवर्तनों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।”

श्री साय ने कहा कि..

सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है।

छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका के स्वरूप की अपनी विशिष्टताएं हैं।

पीढ़ियों से यहां निवासरत जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही विविधता जशपुर को अध्ययन और विकास, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते वर्षों में जशपुर ने अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है। विकास की इस यात्रा में यह आवश्यक है कि स्थानीय विशेषताओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएं। इस प्रकार के अध्ययन प्रशासन को क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने और विकास की भावी प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार करते हुए स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जशपुर में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और महिला तथा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध अंचलों में से एक है। यहां के पहाड़, वन, नदियां, जलप्रपात और सुरम्य घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही जनजातीय जीवन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान जशपुर को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। जिले की इन खूबियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण जशपुर को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।

श्री साय ने कहा कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने देश में लोक प्रशासन के अध्ययन और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शोध, प्रशिक्षण, प्रकाशन और नीतिगत विमर्श के माध्यम से संस्थान ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में निरंतर योगदान दिया है। जिला स्तर पर प्रशासन और विकास के अध्ययन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की विकास यात्रा को सही मायने में समझने के लिए जिलों और स्थानीय प्रशासन के अनुभवों को समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन शासन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर सेवा प्रदाय और स्थानीय समस्याओं के समाधान तक जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसे में किसी जिले की प्रशासनिक यात्रा, सफल प्रयोगों और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीख और नवाचार का आधार बन सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जशपुर : एक परिचय’ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जशपुर के सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को समझने की रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। यह पुस्तक जशपुर की विशिष्टताओं को व्यापक मंच पर सामने लाने के साथ जिले पर आगे होने वाले शोध और विकासपरक अध्ययनों को भी प्रेरित करेगी।

“भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान

उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली द्वारा अपनी क्षेत्रीय शाखाओं को संबंधित राज्यों के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसका उद्देश्य आजादी के बाद जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली में आए बदलावों के साथ उनकी विकास यात्रा का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करना है।

इस अध्ययन में वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का आकलन करने के साथ भविष्य में बेहतर प्रशासन और विकास के लिए संभावित दिशा की पहचान पर भी जोर दिया गया है। इसी क्रम में भारतीय लोक प्रबंधन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर .

जशपुर को अध्ययन के लिए चुने जाने के पीछे जिले की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रही हैं।

छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जशपुर एक प्रमुख जनजातीय बहुल जिला है। इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संरचना प्रदेश के मैदानी कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों से काफी अलग है।

छोटानागपुर पठार के विस्तारित क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण जशपुर में ऊंचे भू-भाग, वन आधारित आजीविका और समृद्ध जनजातीय परंपराओं का अनूठा संगम दिखाई देता है।

महत्वपूर्ण समग्र अध्ययन

पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि यह परंपरागत जिला गजेटियर नहीं, बल्कि जशपुर के विविध पक्षों को समेटने वाला संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर, रायगढ़ जिले की एक तहसील था।

जशपुर का पृथक जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, जनगणना 2011, शासकीय विभागों की रिपोर्ट और जिले से संबंधित प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है।

इस अध्ययन की एक विशेषता यह भी है कि इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा तैयार नहीं किया गया है, बल्कि जशपुर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारियों और सामूहिक सहयोग के आधार पर इसे स्वरूप दिया गया है।

जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों से उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं को संकलित कर जशपुर की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक जशपुर के प्रशासन और विकास की यात्रा के साथ उसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को भी सामने लाती है।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा ने विश्वास व्यक्त किया है कि जशपुर के विविध पहलुओं पर केंद्रित यह प्रारंभिक समग्र अध्ययन भविष्य में जिले के इतिहास, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विकास की संभावनाओं पर और अधिक विस्तृत शोध के लिए आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘जशपुर : एक परिचय’ के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह अध्ययन जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने के साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देने में उपयोगी सिद्ध होगा।

विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक…

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“”लापरवाही और धीमा प्रगति पर होगी कार्रवाई”

”अधिकारियों को सभी विकास कार्यों को निर्धारित समयावधि के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।”

”लंबे समय से लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ जल्दी पूरा करने को कहा।”

”निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों से कहा कि’ इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

”उन्होंने कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों एवं संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।”

”बैठक में शासन की प्राथमिकता के अनुरूप विकास कार्यों को गति देते हुए उनका लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ”

”उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों की निरंतर समीक्षा एवं स्थल निरीक्षण करते हुए प्रगति पर कड़ी नजर रखने को कहा। ”

”उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और कार्यों की धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की बात कही।”’

भाजपा ओबीसी मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक…

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महासमुद जिला भाजपा कार्यालय में आज भाजपा ओबीसी मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में संगठन को और मजबूत करने, आगामी कार्ययोजनाओं को जमीन पर उतारने और पिछड़ा वर्ग के लोगों को भाजपा से जोड़ने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

आने वाले दिनों में प्रदेश के सभी संभागों में प्रबुद्धजन एवं कार्यकर्ता सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समाज के प्रबुद्ध लोगों को सम्मानित करने के साथ संगठन की गतिविधियों को और व्यापक बनाना है।

भाजपा ओबीसी मोर्चा का लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पिछड़ा वर्ग के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग की बड़ी आबादी निवास करती है।

लोगों को संगठन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जो अब तक भाजपा के साथ नहीं जुड़ पाए हैं। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर लाभ दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा।

आरक्षण और जातिगत जनगणना के मुद्दे

भाजपा इन विषयों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर केवल राजनीतिक दिखावे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग को महत्वपूर्ण संवैधानिक पहचान और अवसर मिले हैं।

बैठक के अंत में कार्यकर्ताओं ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और ओबीसी समाज के अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने का संकल्प लिया।

केंद्र सरकार ने फिर से हमारे दावों पर मुहर लगाई, भूपेश बघेल फैला रहे हैं भ्रम- उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा…

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केंद्र सरकार ने फिर से हमारे दावों पर मुहर लगाई, भूपेश बघेल फैला रहे हैं भ्रम- उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा**

नई सरकार के गठन के बाद 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण प्रथम कैबिनेट में 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास निर्माण का लिया गया था संकल्प,जिसे हम पूर्ण करने की ओर अग्रसर**

नई सरकार के गठन के बाद 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण**

प्रथम कैबिनेट में 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास निर्माण का लिया गया था संकल्प,जिसे हम पूर्ण करने की ओर अग्रसर**

प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व मे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास निर्माण का कार्य निरंतर गति से जारी है। संसद में छत्तीसगढ़ से सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल के 5 वर्षों के प्रधानमंत्री आवास निर्माण के सवाल पर केंद्र सरकार ने फिर से हमारे दावों पर मुहर लगाने का कार्य किया है परंतु पूर्व मुख्यमंत्री इसमें भी आंकड़ों का भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने कार्यकाल में भ्रम फैलाने की जगह अगर कार्य करते तो गरीबों को अपने आवासों से वंचित नहीं होना पड़ता, अब भी यदि श्री भूपेश बघेल चर्चा से भागना छोड़ किसी भी मंच पर आकर प्रधानमंत्री आवास के संबंध में बात करना चाहते हैं तो हम तैयार हैं।

उपमुख्यमंत्री एवं पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज अपने निवास में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि नई सरकार के गठन के बाद से अब तक 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के मकान पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य सरकार गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ लगातार कार्य कर रही है।

प्रथम कैबिनेट में 18 लाख से अधिक आवासों का संकल्प

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद प्रथम कैबिनेट बैठक में ही प्रदेश के पात्र परिवारों के लिए 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने एवं निर्माण का संकल्प लिया गया था। इसी संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा आवास निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया है। पुराने एवं नए वित्तीय वर्षों के स्वीकृत आवासों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कराया जा रहा है।

पिछले वित्तीय वर्ष में 5.92 लाख से अधिक आवास पूर्ण

श्री शर्मा ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 5 लाख 92 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए। यह उपलब्धि पूरे देश में सर्वाधिक है। राज्य सरकार द्वारा आवास निर्माण की गति को बनाए रखते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

2011 और 2018 की पात्रता सूची के सभी पात्र आवास स्वीकृत

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2011 एवं 2018 की पात्रता सूची के अंतर्गत पात्र पाए गए सभी आवासों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। कुल स्वीकृत आवासों में से अब तक 20 लाख 40 हजार मकानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वहीं, वर्तमान में लगभग 4 लाख आवासों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आवास स्वीकृत करना नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को शीघ्रता से उनके पक्के मकान का लाभ दिलाना है। इसी उद्देश्य से निर्माणाधीन आवासों को जल्द से जल्द पूर्ण कराने के लिए विभागीय स्तर पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।

पुराने वित्तीय वर्षों के आवास भी वर्तमान सरकार में हुए पूर्ण

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पूर्ण किए गए 11 लाख से अधिक आवासों में पिछले वित्तीय वर्षों में स्वीकृत आवास भी शामिल हैं। पुराने समय में स्वीकृत ऐसे आवास, जो विभिन्न कारणों से लंबित थे, उन्हें भी आवश्यक राशि उपलब्ध कराकर वर्तमान सरकार द्वारा पूर्ण कराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने लंबित आवासों को भी प्राथमिकता देते हुए हितग्राहियों को आवास का लाभ दिलाने का कार्य किया है। इस प्रकार पिछले ढाई वर्षों के अल्प समय में पुराने एवं नए वित्तीय वर्षों के आवासों को मिलाकर 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री आवास योजना और विशेष योजनाओं के आवास भी शामिल

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पूर्ण किए गए आवासों में विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत आवास भी शामिल हैं। इनमें मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत 48 हजार आवासों में से लगभग 20 हजार आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत लगभग 23 हजार आवास शामिल हैं। इसके अतिरिक्त विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत आवास भी आवास निर्माण की उपलब्धि में शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से विशेष रूप से जरूरतमंद, गरीब एवं वंचित परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रत्येक गरीब परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार इसी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार बनने के बाद आवास निर्माण को प्राथमिकता देते हुए स्वीकृत आवासों के निर्माण में तेजी लाई गई है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। पुराने लंबित आवासों को पूरा करने के साथ-साथ नए स्वीकृत आवासों का निर्माण भी नियमित रूप से जारी है।

श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 4 लाख आवास निर्माणाधीन हैं और इन्हें भी शीघ्र पूर्ण करने के लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से गरीब परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है। सरकार पुराने एवं नए सभी वित्तीय वर्षों के आवासों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण कराते हुए प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र परिवारों को पक्के आवास का लाभ दिलाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

28 अगस्त 2026 को लगेगा साल का दूसरा चंद्रग्रहण…

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साल 2026 का दूसरा चंद्रग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। यह ग्रहण सामान्य आंशिक चंद्रग्रहण की तुलना में काफी गहरा होगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के चरम चरण में चंद्रमा का करीब 93 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी अम्ब्रा में पहुंच सकता है।

इस दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा लाल या तांबे जैसी रंगत में दिखाई देने की संभावना है।

हालांकि भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस खगोलीय घटना को सीधे देख पाना संभव नहीं होगा। यह चंद्रग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इसके दौरान चंद्रमा के स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नजर नहीं आएगा।

क्यों खास है यह चंद्रग्रहण?

चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। जब चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है तो इसे आंशिक चंद्रग्रहण कहा जाता है। 28 अगस्त का ग्रहण इसी वजह से खास है क्योंकि इसके चरम पर चंद्रमा का बहुत बड़ा हिस्सा पृथ्वी की अम्ब्रा में पहुंच सकता है।

जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में जाता है तो वह पूरी तरह गायब होने के बजाय लाल, नारंगी या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। इसे आम तौर पर ब्लड मून जैसी लालिमा के रूप में देखा जाता है। इसका कारण पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की रोशनी का प्रभाव है।

भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

28 अगस्त 2026 का यह चंद्रग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय शहरों में रहने वाले लोगों को इस दौरान चंद्रमा के ग्रहणग्रस्त रूप का प्रत्यक्ष नजारा नहीं मिलेगा। ग्रहण की दृश्यता मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में होगी जहां घटना के समय रात का आसमान चंद्रमा के साथ दिखाई दे रहा होगा।

क्या चंद्रग्रहण देखना सुरक्षित है?

चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना सामान्य तौर पर सुरक्षित माना जाता है। इसके लिए सूर्यग्रहण की तरह विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि इस ग्रहण को भारत से देखा ही नहीं जा सकेगा।

धार्मिक मान्यताओं में भी महत्व

चंद्रग्रहण का ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में भी विशेष महत्व माना जाता है। ग्रहण के दौरान सूतक, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक नियमों को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। हालांकि इन मान्यताओं का पालन व्यक्तिगत आस्था और परंपरा पर निर्भर करता है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर नितिन गडकरी और सीएम योगी समेत कई नेताओं ने दी बधाई…

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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बधाई दी है। बता दें कि वर्ष 2023 में ‘चंद्रयान-3’ की ऐतिहासिक सफलता ने पूरी दुनिया को भारत की अंतरिक्ष क्षमता का परिचय कराया।

यह उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और अदम्य संकल्प का परिणाम है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज हम अंतरिक्ष में भारत की असाधारण यात्रा का सम्मान करते हैं, जिसमें शुरुआती मिशनों से लेकर चंद्रयान और उससे आगे के मिशन शामिल हैं। हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और इनोवेटर्स की प्रतिभा, लगन और साहस को सलाम है। उनकी उपलब्धियां हर युवा भारतीय में जिज्ञासा जगाएं और अगली पीढ़ी को नई सीमाओं को खोजने के लिए प्रेरित करें।”

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने पोस्ट किया, “भारत के समस्त वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। वर्ष 2023 में आज ही के दिन देश के महान वैज्ञानिकों ने अपनी उत्कृष्ट शोध-क्षमता, असाधारण कौशल और अथक परिश्रम से चंद्रमा पर सफलतापूर्वक ‘चंद्रयान-3’ की सॉफ्ट लैंडिंग कराकर अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रचा था।”

उन्होंने लिखा, “आज ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के अवसर पर हम इसरो के सभी वैज्ञानिकों और उनकी टीम का अभिनंदन करते हैं, जिन्होंने स्वदेशी के सामर्थ्य से भारत को वैश्विक पटल पर एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है।”

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की सभी वैज्ञानिकों और प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “यह दिवस चंद्रमा से लेकर अंतरिक्ष की अनंत संभावनाओं तक भारत की साहसिक उड़ान, वैज्ञानिक सामर्थ्य और नवाचार की अद्भुत यात्रा का उत्सव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में विज्ञान, अनुसंधान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित करता नया भारत, ‘विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को नई गति और वैश्विक पहचान प्रदान कर रहा है।”

दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 23 अगस्त 2023 को चांद पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग की याद में मनाया जाता है। यह एक ऐसा पल था, जिसने भारत को दुनिया के सबसे आगे अंतरिक्ष में जाने वाले देशों में शामिल कर दिया। आज, हम अपने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की दूर की सोच, हिम्मत और काबिलियत को सलाम करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत का अंतरिक्ष मिशन नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है और नई पीढ़ी को सीमाओं से आगे सपने देखने के लिए प्रेरित किया है। दिल्ली छात्रों के बीच एसटीईएम लर्निंग और वैज्ञानिक जिज्ञासा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “एक सपना था, चांद तक पहुंचने का। 23 अगस्त 2023 को वह सपना भारत के इतिहास का गौरव बन गया। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमता, दृढ़ संकल्प और अंतरिक्ष में बढ़ती शक्ति का परिचय दिया। ‘विक्रम’ की सुरक्षित लैंडिंग से लेकर ‘प्रज्ञान’ की चंद्र सतह पर यात्रा तक, यह मिशन भारत की वैज्ञानिक यात्रा में एक मील का पत्थर बन गया। हमारे महान राष्ट्र की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आइए, उस ऐतिहासिक उपलब्धि को नमन करें जिसने भारत के अंतरिक्ष सपनों को नई उड़ान दी।”

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने लिखा, “चंद्रमा पर तिरंगे की शान और भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य की पहचान। वर्ष 2023 में ‘चंद्रयान-3’ की ऐतिहासिक सफलता ने पूरी दुनिया को भारत की अंतरिक्ष क्षमता का परिचय कराया। यह उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और अदम्य संकल्प का परिणाम है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।”

‘हाथ में तिरंगा, अंतरिक्ष और 140 करोड़ का सपना हमारा संकल्प’, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं…

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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने आह्वान किया कि बड़े सपने देखें, अधिक नई चीजें बनाएं और नई सीमाओं को पार करें।

पीएम मोदी ने कहा कि हाथ में तिरंगा है, अंतरिक्ष है, 140 करोड़ देशवासियों का सपना है, वही हम सबका संकल्प है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की शुभकामनाएं। आइए, और भी बड़े सपने देखें, अधिक नई चीजें बनाएं और नई सीमाओं को पार करें।”

इस अवसर पर पीएम मोदी ने एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने कहा, “मैंने अयोध्या में कहा था कि ये नए कालचक्र की शुरुआत है। यह एक नए कालचक्र का उद्गम है। इस नए काल क्षेत्र में ग्लोबल ऑर्डर में भारत अपना स्पेस लगातार बड़ा बना रहा है। यह हमारे स्पेस प्रोग्राम में भी साफ-साफ दिखाई दे रहा है। हम सबने मिलकर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में स्पेस सेक्टर की भूमिका बहुत बड़ी है।

उन्होंने कहा, “आज ये जेन-जी इंजीनियर्स, जेन-जी डिजाइनर, जेन-जी कोडर और जेन-जी साइंटिस्ट नई-नई टेक्नोलॉजी बना रहे हैं। प्रोपल्शन सिस्टम हो, कंपोजिट मटेरियल हो, रॉकेट स्टेजेज हो, सैटेलाइट प्लेटफॉर्म्स हो, भारत का युवा आज उन क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिनकी कुछ साल पहले कल्पना भी संभव नहीं थी।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का प्राइवेट स्पेस टैलेंट पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। आज ग्लोबल इंवेस्टर्स के लिए भारत का स्पेस सेक्टर एक आकर्षक जगह बन रहा है। इसरो की सफलता देखकर कितने ही बच्चों के मन में ये बात आती है कि बड़ा होकर मैं भी वैज्ञानिक बनूंगा।”

उन्होंने आगे कहा, “वो रॉकेट का काउंटडाउन लाखों बच्चों को प्रेरित करता है। हर घर में कागज के हवाई जहाज उड़ाने वाला जो एयरोनॉटिकल इंजीनियर है, वो बड़ा होकर आप जैसा इंजीनियर बनना चाहता है, साइंटिस्ट बनना चाहता है। हाथ में तिरंगा है, अंतरिक्ष है और 140 करोड़ देशवासियों का सपना है, वही हम सबका संकल्‍प है।”

मायावती का कांग्रेस पर निशाना, जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी…

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन को आरक्षण विरोधी करार देते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज को संविधान में मिले आरक्षण को खत्म करने की कोशिश देशहित में नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस दिन राहुल गांधी एक पीड़ित के लिए एफआईआर दर्ज कराने को लेकर धरने पर बैठे थे, उसी दिन जंतर-मंतर पर दलित और शोषित वर्गों के आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था, लेकिन राहुल गांधी या कोई कांग्रेसी नेता वहां प्रदर्शनकारियों को समझाने तक नहीं गया।

इससे इन वर्गों के प्रति कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता साफ झलकती है। बसपा मुखिया मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा है कि दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुंचे।

उन्होंने कहा कि वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ‘जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।

मायावती ने कहा कि जहां तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी गरीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है लेकिन उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।

मायावती ने कहा कि वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी गरीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।

बसपा प्रमुख ने कहा कि उसी दिन पार्लियामेन्ट थाने के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज नहीं है।

हालांकि उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को खत्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहां पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में स्पेस स्टार्टअप्स के सीईओ और फाउंडर्स के साथ बातचीत…

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अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में स्पेस स्टार्टअप्स के सीईओ और फाउंडर्स के साथ बातचीत की। इस बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने बातचीत का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “भारत के सबसे होनहार स्पेस स्टार्टअप्स से मुलाकात हुई। हमेशा की तरह, उनकी ऊर्जा और महत्वाकांक्षा देखकर बहुत प्रभावित हुआ। आपको उनकी सोच और सकारात्मक नजरिया जरूर पसंद आएगा। मुझे जरूर बताइए, भारत के स्पेस सफर के बारे में आपको सबसे ज़्यादा क्या उत्साहित करता है?”

प्रधानमंत्री ने सभी सीईओ और फाउंडर्स से कहा, “आप लोगों ने नए क्षेत्र में साहस दिखाया है। सबसे बड़ी बात है कि सरकार की बात पर भरोसा किया। मेरा मत रहा है कि हम जो भी निर्णय करें, उस पर अडिग रहें और बार-बार बदलाव न करें, ताकि कोई भी रिस्क ले तो उसे भरोसा रहे।”

भारत के पहले स्पेस टेक यूनिकॉर्न के सीईओ ने पीएम मोदी को बताया, “18 जुलाई को हमने भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, यह अभी शुरुआत है। अगले साल में हम हर महीने एक रॉकेट लांच करने की योजना पर काम कर रहे हैं, इसके लिए तीन फैक्ट्री तैयार है। इन फैक्ट्रियों में एक महीने में एक रॉकेट बनाने की क्षमता है। मेरा सपना है कि हर सप्ताह और फिर हर दिन एक रॉकेट लांच करना है।”

एक सीईओ ने प्रधानमंत्री को बताया, “हमने एक ऐसा इंजन बनाया है, जो दुनिया के आधुनिक इंजनों में से एक है। इस इंजन की टेस्टिंग जारी है।”

एक अन्य सीईओ ने कहा, “स्पेस इंडस्ट्रीज खुलने के बाद यूएस और यूरोप में रह रहे लोग यहां आकर काम करना चाहते हैं।”

इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें बहुत लोगों को जोड़ना है। इस (स्पेस) क्षेत्र में दुनिया भर के लोगों को हिंदुस्तान आने के लिए प्रेरित करना होगा। आपके कारण हम ऐसा कर सकते हैं।”

एक अन्य सीईओ ने प्रधानमंत्री को बताया, “हम सैटेलाइट का इंजन बनाते हैं। वैश्विक स्तर पर बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। एक्सपोर्ट के लिए भारत सरकार का बहुत सहयोग मिला है।”

इस पर पीएम मोदी ने कहा, “लागत में हम प्रतिस्पर्धी हैं और टैलेंट में तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। रिस्क टेकिंग कैपेसिटी हमारे देश के लोगों में ज्यादा होती है। इसके कारण हम अपनी जगह बहुत तेजी से बना सकते हैं।”

स्पेस फार्मा स्टार्टप के अंतरिक्ष ने पीएम मोदी से कहा, “हम भारत के पहले फार्मा स्टार्टअप हैं। हम ऐसे सैटेलाइट बना रहे हैं, जो स्पेस में जाकर फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चर कर सके और उसे वापस ला सके।”