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cg प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की बारिश…

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प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिलेगा और दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है

छत्तीसगढ़ में मौसम अब तेजी से गर्म होने की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल शुष्क मौसम बना रहेगा, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिलेगा और दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग में गर्मी अपने चरम के करीब पहुंच सकती है। इन इलाकों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को लू जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन पर भी असर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की बारिश दर्ज की गई, लेकिन इसका मौसम पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। दिन के समय सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 39.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो कि अपेक्षाकृत ठंडा रहा।

मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि वर्तमान में एक उत्तर-दक्षिण द्रोणिका मध्य ओडिशा से दक्षिण छत्तीसगढ़, तेलंगाना, रायलसीमा होते हुए तमिलनाडु के आंतरिक हिस्सों से गुजरकर मन्नार की खाड़ी तक फैली हुई है। यह मौसम प्रणाली क्षेत्र में तापमान और आर्द्रता को प्रभावित कर रही है, हालांकि फिलहाल इससे किसी बड़े बदलाव या बारिश की उम्मीद नहीं है।

राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां आज आसमान साफ रहने और मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। दिन का तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि रात में तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। दिनभर तेज धूप और बढ़ती गर्मी लोगों को सतर्क रहने का संकेत दे रही है।

CG” सीएम साय अब बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो की नई गाड़ियों के काफिले के साथ चलेंगे’

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अब बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो की नई गाड़ियों के काफिले के साथ चलेंगे। पूर्ववर्ती सरकार के समय की फॉर्च्यूनर गाड़ियों की जगह अब स्कॉर्पियो ने ले ली है। मुख्यमंत्री साय ने मुस्कुराते हुए बताया कि पुरानी गाड़ियां काफी चल चुकी थीं और कई बार रास्ते में बंद हो जाती थीं। सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से बदलाव की आवश्यकता थी। इसलिए नई गाड़ियों का उपयोग शुरू किया गया है। छह नई बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काफिले में छह नई बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री उन गाड़ियों का उपयोग कर रहे थे, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खरीदी गई थीं।

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण मई से, घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी…

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जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में पहले चरण की शुरुआत अगले महीने से होने जा रही है। इस चरण में ‘मकान सूचीकरण एवं हाउसिंग सेंसस’ का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा।

जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में पहले चरण की शुरुआत अगले महीने से होने जा रही है। इस चरण में ‘मकान सूचीकरण एवं हाउसिंग सेंसस’ का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। यह प्रक्रिया 30 दिनों तक चलेगी, जिसमें प्रत्येक घर और भवन से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्रित की जाएगी।

इस चरण को जनगणना का अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए प्रदेश के सभी आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की स्थिति, उपयोग और उपलब्ध सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में सटीक आंकड़े मिल सकेंगे।

इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल रूप देने के लिए आम नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया गया है। इच्छुक लोग 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना पूरी करने के बाद एक विशेष आईडी जारी की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा और बाद में प्रगणक के आने पर उसे दिखाना अनिवार्य रहेगा।

मई महीने में प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। वे अधिकृत पहचान पत्र के साथ पहुंचेंगे, जिसकी पुष्टि नागरिक कर सकेंगे। लोगों से अपील की गई है कि वे सही और पूरी जानकारी दें, ताकि आंकड़े सटीक तैयार हो सकें।

इस प्रक्रिया के तहत मकान की संख्या, उसका प्रकार, उपयोग, निर्माण की स्थिति (कच्चा, पक्का या अर्ध-पक्का), परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली, ईंधन और इंटरनेट जैसी जानकारी जुटाई जाएगी। ये आंकड़े शहरी और ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और नीतिगत उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

पूरे कार्य की निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। साथ ही शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। अधिकारियों ने नागरिकों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करने और समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ में पांडुलिपि अभियान को मिलेगी नई गति, जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान, सीएम साय ने जनता से की ये अपील…

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सीएम साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है।

पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व – संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सीएम साय ने कहा -ज्ञान की विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित करने का संकल्प – जनभागीदारी से होगा संरक्षण’

डिजिटल युग में सुरक्षित होगी हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा – जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।

ज्ञानभारतम मोबाइल एप का विवरण करें दर्ज

उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।

ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को किया गया प्रारंभ

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।

26 जिलों में हुआ जिला स्तरीय समिति का गठन

छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।

CG Drone Pilot Bharti: 10वीं पास युवाओं के लिए शानदार मौका, यहां ड्रोन पायलट और सुरक्षा जवान के पदों पर निकली भर्ती…

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CG Drone Pilot Bharti “भर्ती शिविर 13 और 15 अप्रैल को आयोजित होगा” 100 सुरक्षा जवान, 20 ड्रोन पायलट और 30 सुपरवाइज़र पद उपलब्ध हैं” चयनित युवाओं को स्थायी नौकरी और कई सुविधाएँ दी जाएँगी”

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था गौरेला के सहयोग से जीडीएक्स ग्रुप ग्रेटर नोएडा एवं भारत सरकार के पसारा एक्ट के तहत 100 सुरक्षा जवान, 20 ड्रोन पायलेट, 30 सुरक्षा सुपरवाईज़र एवं कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती हेतू शिविर 13 अप्रैल को शासकीय आईटीआई मरवाही में और 15 अप्रैल को शासकीय आईटीआई गौरेला में सुबह 10 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक भर्ती कैम्प आयोजित किया जा रहा है।

इच्छुक युवा जिनकी योग्यता 10वी पास, उम्र 18 से 40 वर्ष, ऊँचाई 168 सेमी0, वजन 52से 96 किलो और सुपरवाईज़र हेतु स्नातक के साथ कम्प्यूटर ज्ञान, उम्र 22 से 40 वर्ष, ऊँचाई 170 सेंटी मीटर, वजन 55 से 96 किलो हो, वे सभी 10 वी पास अथवा अधिकतम प्रमाणपत्र की छायाप्रति एवं आधार कार्ड की छायाप्रति, दो पासपोर्ट साईज फोटो के साथ स्वयं शासकीय आईटीआई में उपस्थित होकर आफलाईन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती शिविर में दूसरे जिले के युवा भी शासकीय आईटीआई में स्वयं उपस्थित होकर आफलाईन आवेदन कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए भर्ती अधिकारी के मोबाइलनंबर- +91-9311947932 एवं +91-9667989993 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

चयनित युवाओं को जीडीएक्स ग्रुप के ट्रेनिंग सेंटर एन.आई.एम.टी कैंपस नियर परीचौक मेट्रो स्टेशन, एनआईएमटी कालेज प्रांगण में स्थित सेंटर में 15 दिन के आवासीय प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र के साथ मध्यप्रदेश के बड़े-बड़े ओद्योगिक क्षेत्रों में 15 हजार से 25 हजार तक के मासिक सेलरी के साथ 58 वर्ष तक स्थाई नौकरी के साथ ही पीएफ, पेंशन, जीवन बीमा, फेमिली मेडिकल सुविधा, सालाना वेतन में वृद्धि, लोन की सुविधा, प्रमोशन जैसे अनेक सुविधाओ के साथ ड्यूटी दौरान रहने एवं खाने की सुविधाएं रियायती दरों पर दी जाएगी।

LPG Crisis: गैस-पेट्रोल-डीजल की किल्लत होगी दूर! जंग के बीच ‘मिशन एनर्जी’ में जुटा भारत, जयशंकर ने संभाली कमान…

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LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता और युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के दौरे के बाद अब फ्रांस और जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई (UAE) में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं। यह भागदौड़ ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की खबरें हैं। भारत की प्राथमिकता इस तनावपूर्ण माहौल में अपनी अर्थव्यवस्था को ग्लोबल उतार-चढ़ाव से बचाना है।

S Jaishankar UAE Visit: ऊर्जा सुरक्षा और यूएई का दौरा

भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर का यूएई दौरा इसी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण सप्लाई रुकती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यूएई जैसे रणनीतिक साझेदारों से बातचीत का मकसद संकट के समय ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने का ठोस रास्ता निकालना है।

फ्रांस के साथ रणनीतिक सहयोग

पेरिस में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। यहां बातचीत का मुख्य केंद्र रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे अहम मुद्दे हैं। फ्रांस के साथ साइबर सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और एआई (AI) पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। भारत की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच रक्षा और तकनीकी मोर्चों पर फ्रांस के साथ संबंधों को और अधिक गहरा किया जाए ताकि वैकल्पिक सुरक्षा घेरा मजबूत हो सके।

Vikram Misri Europe Visit: जर्मनी के साथ व्यापारिक हित

जर्मनी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल व्यापार, निवेश और ग्रीन एनर्जी जैसे विषयों पर चर्चा करेगा। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जर्मनी भारत के लिए व्यापार और नई टेक्नोलॉजी का बड़ा स्रोत है। हाल ही में जर्मन चांसलर के भारत दौरे के बाद अब विदेश सचिव उन समझौतों को जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगे। मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच भारत जर्मनी के साथ मिलकर अपनी व्यापारिक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।

वैश्विक बदलावों के बीच कूटनीति

विदेश सचिव का यह दौरा अमेरिकी प्रशासन में बदलाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर वार्ताओं के बीच हो रहा है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के संभावित अधिकारियों से मिलने के बाद अब यूरोप के इन दो बड़े देशों के साथ तालमेल बिठाना भारत की सोची-समझी रणनीति है। भारत का उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाहे जो भी समीकरण बनें, देश की व्यापारिक और रक्षा संबंधी जरूरतों पर कोई आंच न आए और ग्लोबल मंच पर भारत की स्थिति मजबूत बनी रहे।

लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर! फुले जयंती पर PM मोदी-राहुल गांधी की मुलाकात ने जीता दिल…

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PM Modi Rahul Gandhi शनिवार, 11 अप्रैल को संसद परिसर के ‘प्रेरणा स्थल’ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने देश का राजनीतिक माहौल अचानक बदल दिया। अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच आज संक्षिप्त लेकिन बेहद संजीदा बातचीत देखने को मिली। मौका था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती (Jyotiba Phule 200th Anniversary) का, जहां तमाम दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक, इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें अब ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बनी हुई हैं।

जब आमने-सामने आए मोदी और राहुल

घटना उस वक्त की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गाड़ी से ‘प्रेरणा स्थल’ पर उतरे। वहीं पास में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री अपनी कार से उतरते ही कुछ पल के लिए रुके और राहुल गांधी के पास जाकर उनसे बात करने लगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ तरीके से बातचीत हुई। हालांकि, यह बातचीत महज कुछ सेकंड्स की थी, लेकिन इसकी गंभीरता और सहजता ने वहां मौजूद हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजनीतिक कड़वाहट के बीच देश के दो सबसे बड़े नेताओं को इस तरह सहज भाव से बात करते देखना सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को इस तरह गंभीर चर्चा करते देखना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।

महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर जुटे दिग्गज

संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी 200वीं जन्मशती पर नमन करना था। पीएम मोदी और राहुल गांधी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और हाशिए पर खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले के महान योगदान को याद किया।

क्यों खास हैं दोनों नेताओं की यह मुलाकात?

संसद के सत्रों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी नोंकझोंक, नारेबाजी और वॉकआउट देखने को मिलता है। भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विचारधारा की जंग काफी पुरानी और गहरी है। ऐसे में पीएम मोदी और राहुल गांधी का एक-दूसरे के करीब खड़े होकर शिष्टाचार के साथ बात करना यह संदेश देता है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादाएं और औपचारिक संवाद जीवित हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले ने हमेशा समाज को जोड़ने और न्याय की बात की थी। आज उनकी 200वीं जयंती के मौके पर संसद के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच का यह छोटा सा ‘संवाद’ शायद उनकी विरासत को सबसे बेहतरीन श्रद्धांजलि थी। अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह छोटी सी मुलाकात आने वाले दिनों में संसद के भीतर की कड़वाहट को कम करने में मददगार साबित होगी?

Ambedkar Jayanti 2026: बैंक, स्कूल और ऑफिस… जानें 14 अप्रैल को कहां रहेगी छुट्टी…

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Ambedkar Jayanti 2026: समाज सुधारक और भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है। इसे भीम जयंती भी कहा जाता है। इस दिन, एक विधिवेत्ता, समाज सुधारक और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए समानता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के पैरोकार के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

2026 में, अंबेडकर जयंती मंगलवार को पड़ रही है। यह दिन पूरे भारत में मनाया जाएगा, जिसमें कई राज्यों के स्कूल, कॉलेज, निजी और सरकारी संगठन छुट्टी मनाएंगे।

अंबेडकर जयंती पर क्या खुला रहेगा और क्या बंद?

केंद्र सरकार ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में 14 अप्रैल (मंगलवार) को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में भी इस दिन को अधिकांश राज्यों में बैंक अवकाश के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

क्या स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे?

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, पूरे देश में सभी केंद्र सरकार के कार्यालयों, जिसमें औद्योगिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, में अवकाश रहेगा।

शेयर बाजार, डाकघर, सरकारी स्कूल और कॉलेज, अदालतें और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) भी बंद रहेंगे।

क्या अंबेडकर जयंती पर बैंक खुले रहेंगे या बंद?

RBI कैलेंडर के अनुसार, अगरतला, अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंफाल, जयपुर, जम्मू, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना, रांची, तिरुवनंतपुरम और विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे।

हालांकि, सूचीबद्ध राज्यों में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी, फिर भी ग्राहक वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों सेवाओं के लिए इंटरनेट बैंकिंग, SMS बैंकिंग और WhatsApp बैंकिंग का उपयोग जारी रख सकते हैं।

अंबेडकर जयंती के अलावा, इस दिन महा विषुव संक्रांति, बिजू/बुइसु उत्सव, तमिल नव वर्ष, चेइराओबा, बैसाखी और बोहाग बिहू जैसे क्षेत्रीय उत्सव भी मनाए जाते हैं।

क्या 14 अप्रैल को शेयर बाज़ार (NSE, BSE) खुला रहेगा? शेयर बाज़ार के सभी सेगमेंट, जिनमें इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और कमोडिटी डेरिवेटिव्स शामिल हैं, 14 अप्रैल को बंद रहेंगे।

अंबेडकर जयंती पर कौन सी सेवाएं खुली रहेंगी?

अस्पताल (हालांकि कुछ जगहों पर आउटपेशेंट डिपार्टमेंट/OPD बंद हो सकते हैं), आपातकालीन सेवाएं और मेडिकल स्टोर जैसी ज़रूरी सेवाएं खुली रहेंगी।

आप किराने की खरीदारी के लिए भी जा सकते हैं, क्योंकि स्थानीय नियमों के आधार पर दुकानें, सुपरमार्केट और निजी कंपनियां खुली रह सकती हैं।

ATM, पेट्रोल पंप, सार्वजनिक परिवहन (बसें, ट्रेनें) और निजी परिवहन सेवाएं (कैब) भी सामान्य रूप से काम करेंगी।

इस महीने आने वाली छुट्टियां:

15 अप्रैल: बंगाली नव वर्ष (नबबरशा) / बोहाग बिहू / विशु / हिमाचल दिवस

16 अप्रैल: बोहाग बिहू

20 अप्रैल: बसव जयंती, अक्षय तृतीया (कर्नाटक)

Indian Iron Dome: UP में बनेगा भारत का अपना आयरन डोम! मिसाइल-ड्रोन से करेगा रक्षा, कौन बनाएगा और कहां बनेगा?

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Indian Iron Dome: पिछले साल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ Operation Sindoor चलाया था। जिसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत की तरफ ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए थे।

ये पहली बार था जब भारत को अपने खुद के Defence System Iron Dome की जरूरत महसूस हुई। तभी से भारत इसकी तैयारी में जुट गया और अब लग रहा है भारत को अपना आयरन डोम जल्द मिल जाएगा। जानिए कहां बन रहा है, किस राज्य जमीन पर तैयार होगा, कौन बना रहा है और इसमें कितना खर्चा आने वाला है।

यूपी में बनेगा भारत का अपना आयरन डोम

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसके लिए Bharat Electronics Limited (BEL) ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के चित्रकूट में 75 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया है। इस नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में अगली पीढ़ी की मिसाइलें, रडार सिस्टम और भारत का अपना ‘आयरन डोम’ तैयार किया जाएगा।

₹600 करोड़ से ज्यादा का बड़ा निवेश

BEL के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में ₹600 करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट सरकार की तरफ से किया जाएगा। यह सुविधा क्विक-रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM), कुशा एयर डिफेंस सिस्टम और अगली पीढ़ी के रडार सिस्टम जैसे अहम डिफेंस प्रोग्राम्स की जरूरतों को पूरा करेगी। इसके साथ ही यहां मेंटेनेंस, रिपेयर और ऑपरेशन (MRO) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

क्या है प्रोजेक्ट कुशा?

Defence Research and Development Organisation (DRDO)

द्वारा विकसित प्रोजेक्ट कुशा एक लंबी दूरी का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका मकसद स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों से देश की रक्षा करना है। यह सिस्टम करीब 400 किलोमीटर की रेंज में तीन अलग-अलग लेवल का सुरक्षा कवच (three-layer shield) प्रदान करेगा।

S-400 जैसा सिस्टम, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी

प्रोजेक्ट कुशा की तुलना अक्सर रूस के S-400 सिस्टम से की जाती है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह भारत में विकसित हो रहा है। इसका लक्ष्य 2028-29 तक भारत का अपना ‘आयरन डोम’ तैयार करना है, जिससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हो सके।तीन लेयर में काम

करेगा डिफेंस सिस्टम

कुशा सिस्टम में तीन तरह के इंटरसेप्टर मिसाइल होंगे-

M1- रेंज 150 किमी होगी,

M2- रेंज 250 किमी होगी,

M3- रेंज 350 से 400 किमी तक।

इसमें एडवांस रडार सिस्टम भी लगे होंगे, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और डिस्ट्रॉय करने की क्षमता रखते हैं।

CM योगी का बड़ा योगदान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने BEL के CMD मनोज जैन को भूमि आवंटन पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग ₹562.5 करोड़ के निवेश से एक लेटेस्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जहां हाई टेक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम का उत्पादन होगा।

MSME और इंडस्ट्री को भी मिलेगा फायदा

इस प्रोजेक्ट से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी बड़ा फायदा होगा। इससे टेक्नोलॉजी सहयोग, इनोवेशन और नॉलेज ट्रांसफर के नए मौके मिलेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश को एक बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलेगी।

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आएगी, हमें पूरा विश्वास?, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा-ममता दीदी का जाना तय, गुंडागर्दी, हिंसा बहुत बढ़ी…

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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आएगी, इसका हमें पूरा विश्वास है। वहां की जनता ममता बनर्जी से नाराज है, उनके राज में वहां गुंडागर्दी, हिंसा बहुत बढ़ गई है, कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ गई हैं।

इस बार भाजपा की सरकार बनेगी और वहां ममता दीदी का जाना तय है। असम में भी भाजपा की सरकार बनेगी…केरल की जनता भी परिवर्तन चाहती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैदान पर मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की स्पर्धा ऐतिहासिक है। दोनों विजय प्राप्त करने के लिए जी जान से जुट जाते हैं, जब आर जी कर मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर बेटी के साथ अन्याय किया गया, हत्या की गई तो बंगाल का हर परिवार, हर युवा सड़क पर आ गया था।

यहां तक मोहन बागान और ईस्ट बंगाल भी बेटियों के साथ हुई निर्ममता के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए थे। यानी बेटियों का सम्मान और जान को बचाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर निर्मम सरकार को सबक सिखाना है…मोदी ने बंगाल की बहनों और बेटियों के लिए भी एक गारंटी दी है। बेटियों के साथ हुए हर अन्याय, हर दुष्कर्म केस की फाइल खुलेगी।

अपराध करने वाले और अपराधियों को बचाने वालों को कोई नहीं बचाएगा। चुन-चुन कर हिसाब लिया जाएगा। ये कैसे होगा? ये बंगाल भाजपा ने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है। एक रिटायर्ड हाई कोर्ट की महिला जज को इस काम की जिम्मेदारी दी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर ब्लॉक में महिला थाने बनाए जाएंगे।

TMC कभी आदिवासी क्षेत्रों का उन्नयन नहीं कर सकती। मैं आपको पीएम जन मन योजना का उदाहरण देता हूं। देश के हर राज्य में आदिवासियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार इस योजना पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पास में ओडिशा में ही जहां भाजपा की सरकार है वहां पीएम जन मन योजना के तहत आदिवासियों के 30 हजार से अधिक घर बने हैं।

त्रिपुरा में भी ट्राइबल समाज के लिए 16 हजार से ज्यादा घर बनाए गए हैं। लेकिन यहां TMC की आदिवासी विरोधी सरकार ने पीएम जन मन योजना के तहत जानते हैं कितने घर बनाए? शून्य। एक भी घर नहीं बनाया। पैसे भारत सरकार देती है। आदिवासी समाज से इनकी दुश्मनी क्या है कि वे पक्का घर भी देने को तैयार नहीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा ने तय किया है कि हमारी सरकार बनते ही कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में हम दायर करा देंगे। राजवंशी और कुड़माली दोनों भाषाएं बंगाल, असम और झारखंड की प्रमुख भाषाएं हैं और उनको आठवीं अनुसूची में लाने का काम भाजपा की सरकार करेगी।