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“प्रधानमंत्री मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा” एक नई राजनयिक पहल” प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक दौरा”

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मोदी की न्यूज़ीलैंड की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड की यात्रा के दौरान एक अनोखी राजनयिक पहल देखने को मिली। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पीएम मोदी के स्वागत में एक वीडियो साझा किया, जिस पर दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने दोनों देशों के लिए शुभकामनाएँ भेजीं। इस अंतरराष्ट्रीय गर्मजोशी पर पीएम मोदी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ली का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, राष्ट्रपति ली जे-म्युंग। दोस्तों की ओर से ऐसे विचारशील संदेश हमेशा महत्वपूर्ण होते हैं।”

राष्ट्रपति ली का संदेश

राष्ट्रपति ली का संदेश लक्सन के उस पोस्ट के जवाब में आया था जिसमें पीएम मोदी का स्वागत किया गया था। पीएम मोदी शुक्रवार को दो दिन की राजकीय यात्रा पर ऑकलैंड पहुँचे थे, जो इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद उनके तीन देशों के दौरे का अंतिम चरण है। राष्ट्रपति ली ने लक्सन के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच दोस्ती और विकास की कामना करता हूँ।”

मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा का महत्व

यह यात्रा चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड की पहली राजकीय यात्रा है। यह यात्रा प्रधानमंत्री लक्सन के निमंत्रण पर हो रही है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। यह यात्रा मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा और भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ महीनों बाद हो रही है।

व्यापार और सहयोग पर चर्चा

इस यात्रा के दौरान, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन व्यापार, निवेश, रक्षा और आर्थिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करेंगे। पीएम मोदी बिज़नेस और स्पोर्ट्स जगत के नेताओं से भी बातचीत करेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे।

भारत की विदेश नीति

पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, ‘महासागर विज़न’ और आज़ाद व खुले इंडो-पैसिफ़िक के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सफल मुलाकातों के बाद, वे न्यूज़ीलैंड का दौरा कर रहे हैं। इससे भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों और क्षेत्रीय साझेदारियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

“गुरु बृहस्पति का कर्क राशि में अस्त” राशियों पर प्रभाव” गुरु बृहस्पति का कर्क राशि में अस्त”

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15 जुलाई 2026 को गुरु बृहस्पति कर्क राशि में अस्त होने जा रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धन, भाग्य, विवाह, संतान और आध्यात्मिक उन्नति का कारक ग्रह माना जाता है।

जब गुरु सूर्य के निकट पहुंचते हैं, तो उन्हें अस्त माना जाता है। इस समय उनकी शुभ शक्ति थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन कर्क राशि में होने के कारण उनका सकारात्मक प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता।

गुरु के अस्त होने का प्रभाव

गुरु बृहस्पति के अस्त होने पर नए कार्यों में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है। हालांकि, कर्क राशि में उनकी स्थिति के कारण शुभ परिणाम पूरी तरह खत्म नहीं होते। इस समय धैर्य, सही योजना और मेहनत को अधिक महत्व दिया जाता है।

वृषभ राशि के लिए करियर में अवसर

वृषभ राशि के लिए गुरु तीसरे भाव में रहेंगे, जो संचार, कौशल और प्रयास का स्थान है। लंबे समय से रुके काम फिर से गति पकड़ सकते हैं। लेखन, मीडिया, मार्केटिंग, शिक्षा और संचार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलने की संभावना है।

बातचीत का प्रभाव बढ़ सकता है और नए कौशल सीखने से भविष्य में करियर मजबूत हो सकता है। उपाय के तौर पर गुरुजनों और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना शुभ माना गया है।

कन्या राशि के लिए आय में वृद्धि

कन्या राशि के लिए गुरु ग्यारहवें भाव में प्रभाव डालेंगे। यह भाव आय, लाभ और सामाजिक नेटवर्क से जुड़ा है। लंबे समय से रुकी योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।

यदि किसी का पैसा लंबे समय से अटका हुआ है, तो उसके मिलने की संभावना भी ज्योतिषीय दृष्टि से व्यक्त की गई है। गुरुवार को पीले रंग की खाद्य वस्तुओं का दान शुभ माना गया है।

तुला राशि के लिए मेहनत का फल

तुला राशि के लिए गुरु दसवें भाव में अस्त होंगे, जो करियर और प्रतिष्ठा का स्थान है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों और कारोबार करने वालों को थोड़े इंतजार के बाद अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

कार्यस्थल पर अनुशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर व्यवहार भविष्य में लाभ दिला सकता है। मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे मिलने की संभावना बताई गई है।

वृश्चिक राशि के लिए भाग्य का साथ

वृश्चिक राशि के लिए गुरु नवम भाव में रहेंगे, जिसे भाग्य, उच्च शिक्षा और धार्मिक कार्यों का स्थान माना जाता है। पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश में शिक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह समय अनुकूल है।

महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय भाग्य का सहयोग मिलने की संभावना है। गुरुजनों और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना शुभ माना गया है।

मीन राशि के छात्रों के लिए अनुकूल समय

मीन राशि के लिए गुरु पंचम भाव में रहेंगे, जो शिक्षा, संतान और रचनात्मक कार्यों के लिए सकारात्मक है। छात्रों की पढ़ाई में रुचि बढ़ सकती है और रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वालों को बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिल सकता है।

संतान पक्ष से सुख मिलने और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने के संकेत हैं। गुरुवार को गुरु बीज मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है।

कर्क, मिथुन और मकर राशि पर प्रभाव

कर्क राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है, हालांकि उन्हें जल्दबाजी से बचकर धैर्य रखना होगा। मिथुन राशि के लोगों की आर्थिक योजना बेहतर हो सकती है और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मकर राशि वालों के लिए साझेदारी से जुड़े कार्यों में प्रगति के संकेत हैं। स्पष्ट संवाद और समझदारी से लिए गए निर्णय लाभदायक साबित हो सकते हैं।

क्या सभी पर एक जैसा असर पड़ेगा?

ज्योतिष में किसी भी ग्रह का प्रभाव केवल राशि के आधार पर तय नहीं किया जाता। जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति, दशा और गोचर जैसे कई अन्य कारक भी अंतिम फल को प्रभावित करते हैं। इसलिए व्यक्तिगत ज्योतिषीय सलाह के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना अधिक उपयुक्त है।

“लड़कियों में ADHD” लक्षणों की अनदेखी के गंभीर परिणाम” ADHD और लड़कियों का संबंध”

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अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर, जिसे आमतौर पर ADHD कहा जाता है, को प्रायः लड़कों से जोड़ा जाता है। इस धारणा के कारण, यदि लड़कियों में इसके लक्षण प्रकट होते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज किया जाता है।

लड़कियों में ADHD के लक्षण अक्सर छिपे होते हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि कोई लड़की सामान्य व्यवहार कर रही है, तो इसे सामान्य माना जाता है। हाल ही में एक अध्ययन ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि लड़कियों में ADHD के लक्षणों की अनदेखी करने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं।

लड़कियों में ADHD के लक्षण

एक नई रिसर्च में लड़कियों में ADHD के लक्षणों पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं में बचपन में ADHD के लक्षण दिखाई देने पर, युवावस्था में उन्हें दिल के दौरे और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

अध्ययन का विवरण

इस अध्ययन में 18 से 32 वर्ष की लगभग 1,20,000 महिलाओं के आंकड़े शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खराब आर्थिक और सामाजिक स्थिति और ADHD के लक्षण महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ दो या दो से अधिक शारीरिक और मानसिक बीमारियों का कारण बनते हैं। यह अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि ADHD केवल बचपन से जुड़ा व्यवहारिक विकार नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ADHD और आर्थिक-सामाजिक स्थिति

यह शोध स्वास्थ्य और कमजोर आर्थिक-सामाजिक स्थिति के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कई कारक इसके लिए जिम्मेदार होते हैं, जैसे शिक्षा, आय, आवास, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच। ऐसे बच्चे जो ऐसे वातावरण में बड़े होते हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी होती है, उनमें कुपोषण, तनाव और बचपन के नकारात्मक अनुभवों का सामना करने की संभावना अधिक होती है, जिससे ADHD का खतरा बढ़ जाता है।

ADHD क्या है?

अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जो मस्तिष्क के कार्य करने के तरीके को प्रभावित करता है। ADHD के लक्षणों में स्थिर न बैठ पाना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बिना सोचे-समझे कार्य करना और ध्यान की कमी शामिल हैं।

मेंटल हेल्थ पर प्रभाव

बचपन में ADHD के लक्षणों के कारण महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इनमें शामिल हैं:

  • बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर
  • पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर
  • एंग्जायटी डिसऑर्डर
  • डिप्रेशन
  • क्रोनिक बीमारियाँ जैसे डायबिटीज, कैंसर, COPD और हृदय रोग।

” भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का किराया मात्र 5 रुपए से शुरू… हाइड्रोजन ट्रेन का सस्ता किराया…”

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भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का किराया मात्र 5 रुपए से शुरू”
हाइड्रोजन ट्रेन का सस्ता किराया”

भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन अगले सप्ताह होने जा रहा है। इस ट्रेन का किराया इतना कम होगा कि यह सुनकर हर कोई खुश हो जाएगा। ट्रेन का न्यूनतम किराया केवल 5 रुपए होगा, जबकि अधिकतम किराया 25 रुपए तक रहेगा।

” गोवा की यात्रा का सुनहरा मौका” IRCTC का नया टूर पैकेज” गोवा की यात्रा का शानदार पैकेज”

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यदि आप मॉनसून के बाद गोवा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन अवसर है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने हैदराबाद से गोवा के लिए एक आकर्षक टूर पैकेज पेश किया है।

इस पैकेज में फ्लाइट, 4-स्टार होटल में ठहरने की व्यवस्था, नाश्ता और डिनर, और स्थानीय दर्शनीय स्थलों की यात्रा शामिल है। इससे यात्रियों को अलग-अलग बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

गोवा की अद्भुत जीवनशैली

गोवा अपने खूबसूरत समुद्र तटों, अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों और शांत वातावरण के कारण भारत और विदेशों के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है। कोल्वा, कैंडोलिम, मिरामार, अंजुना और वर्का जैसे समुद्र तट बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करते हैं। अरब सागर के किनारे की प्राकृतिक सुंदरता और शांति यहाँ की यात्रा को अविस्मरणीय बनाती है। IRCTC का यह पैकेज ‘गोवा डिलाइट’ (पैकेज कोड: SHA03) है, जिसमें हैदराबाद एयरपोर्ट से हवाई यात्रा शामिल है। यात्री गोवा में 3 रात और 4 दिन बिताएंगे।

यात्रा की तारीखें

यह पैकेज दो अलग-अलग तारीखों पर उपलब्ध है। पहली यात्रा 26 अगस्त, 2026 को शुरू होगी, जबकि दूसरी यात्रा 9 सितंबर, 2026 को होगी। अगस्त बैच के लिए, इंडिगो की फ्लाइट (6E-905) सुबह 11:45 बजे हैदराबाद से गोवा के लिए रवाना होगी और दोपहर 1:05 बजे पहुंचेगी। गोवा से हैदराबाद वापसी की यात्रा 29 अगस्त को इंडिगो की फ्लाइट 6E-117 से होगी। सितंबर बैच के लिए, वापसी की यात्रा 12 सितंबर को इंडिगो की फ्लाइट 6E-712 से होगी।

पैकेज की लागत

पैकेज की कीमत के अनुसार, अगस्त बैच के लिए प्रति व्यक्ति सिंगल ऑक्यूपेंसी की कीमत ₹26,950, डबल शेयरिंग के लिए ₹21,500 और ट्रिपल शेयरिंग के लिए ₹21,000 है। वहीं, सितंबर बैच के लिए यह पैकेज थोड़ा सस्ता है, जिसमें सिंगल ऑक्यूपेंसी के लिए ₹24,640, डबल शेयरिंग के लिए ₹19,200 और ट्रिपल शेयरिंग के लिए ₹18,680 प्रति व्यक्ति की दरें हैं। बच्चों के लिए भी विभिन्न श्रेणियों के आधार पर रियायती दरें उपलब्ध हैं।

पैकेज में शामिल सुविधाएं

इस पैकेज में हैदराबाद और गोवा के बीच हवाई यात्रा, गोवा के 4-स्टार होटल ‘नीलम द ग्रैंड’ में तीन रात ठहरने की सुविधा, तीन बार नाश्ता और तीन बार डिनर, एसी गाड़ी से स्थानीय भ्रमण, ट्रैवल इंश्योरेंस, IRCTC के एस्कॉर्ट की सेवा और सभी लागू कर शामिल हैं।

हालांकि, यात्रियों को लंच, हैदराबाद एयरपोर्ट से आने-जाने का खर्च, फ्लाइट में मिलने वाले खाने, मांडवी नदी में क्रूज़ की सवारी, गाइड की फीस, व्यक्तिगत खर्च, लॉन्ड्री, ड्रिंक्स और पैकेज में शामिल न की गई किसी अन्य सेवा का खर्च खुद उठाना होगा। हवाई किराए या एयरपोर्ट टैक्स में भविष्य में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का खर्च भी अलग से लिया जाएगा। IRCTC के अनुसार, इस टूर के लिए अभी केवल 19 सीटें उपलब्ध हैं।

“भारतीय नौसेना की नई उपलब्धि “INS महेंद्रगिरि को कमीशन” कम समय में कमीशन होने वाला” चौथा नया नौसैनिक जहाज़”

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“भारतीय नौसेना की नई उपलब्धि “INS महेंद्रगिरि को कमीशन” कम समय में कमीशन होने वाला” चौथा नया नौसैनिक जहाज़”

भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को कमीशन किया है। यह जहाज़ प्रोजेक्ट 17A नीलगिरि क्लास फ्रिगेट्स में छठा है और एक महीने से भी कम समय में कमीशन होने वाला चौथा नया नौसैनिक जहाज़ है।”

21 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टील्थ फ्रिगेट INS दूनागिरी, सर्वे वेसल INS संशोधक और ASW शैलो-वॉटर क्राफ्ट INS अग्रय को कमीशन किया था। ये नए जहाज़ नौसेना की खरीद प्रक्रिया की गति को दर्शाते हैं, जिसमें औसतन हर 40 दिन में एक नया जहाज़ शामिल किया जा रहा है।”

पिछले वर्ष एक दर्जन से अधिक नौसैनिक जहाज़ शामिल किए गए थे और इस वर्ष रिकॉर्ड 19 जहाज़ों को शामिल करने का लक्ष्य है। विदेश में बना आखिरी युद्धपोत, INS तमाल, पिछले साल रूस में कमीशन किया गया था। नौसेना का उद्देश्य 2035 तक 200 युद्धपोतों की एक मजबूत नौसेना बनाना है, और ये सभी भारतीय शिपयार्ड में निर्मित होंगे।”

वर्तमान में 140 जहाजों वाली भारतीय नौसेना के लिए 50 से अधिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं। इनमें दो न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN), दो न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन (SSN), पांच फ्लीट सपोर्ट शिप और एक दर्जन से अधिक कार्वेट और सपोर्ट वेसल शामिल हैं।”

हालांकि, कई जहाजों के शामिल होने की खुशी के बीच एक चिंता का विषय भी है। कम से कम 50 युद्धपोत अभी भी डिज़ाइन और मंज़ूरी के चरणों में अटके हुए हैं, जिसका अर्थ है कि नए प्लेटफॉर्म के निर्माण में कुछ साल लगेंगे और उन्हें नौसेना में शामिल होने में और अधिक समय लगेगा।”

सरकारी शिपयार्ड की चुनौतियाँ” सरकारी शिपयार्ड

प्रक्रिया में देरी केवल एक समस्या है। भले ही निर्णय लेने की गति बढ़ाई जाए और बजट में वृद्धि की जाए, फिर भी भारत के डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर में रुकावटों के कारण समय पर डिलीवरी संभव नहीं हो पाएगी।”

90% से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां छह PSU शिपयार्ड द्वारा निर्मित की जाती हैं – मज़गाँव डॉक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL)।”

इन शिपयार्ड में सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का समाधान दशकों से नहीं किया गया है-इन शिपयार्ड को आधुनिक नहीं बनाया गया है, जिसके कारण निर्माण की गति धीमी हो गई है और लागत में वृद्धि हुई है।’

समाजवादी भारत के समय की तरह, युद्धपोतों के निर्माण के लिए नामित शिपयार्ड आज भी उसी तरह काम कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि अनुबंध बिना किसी प्रतिस्पर्धा के दिए जाते हैं।’

प्रतिस्पर्धी बोली न होने के कारण, कीमतों का निर्धारण नहीं हो पाता और लागत में वृद्धि होना आम बात है। इन सभी लागतों का वहन सरकार करती है।

शिपयार्ड आधुनिक हल ब्लॉक निर्माण विधि (एचबीसीएम) का उपयोग नहीं करते हैं, जिसमें जहाज को कई पूर्वनिर्मित मॉड्यूलर खंडों में बनाया जाता है, जिनका निर्माण, साज-सज्जा और रंगाई अंतिम संयोजन से पहले एक साथ की जाती है।’

मॉड्यूलर निर्माण से कमीशनिंग का समय काफी कम हो जाता है और लागत भी घटती है, लेकिन एक भी भारतीय रक्षा शिपयार्ड इस तकनीक का उपयोग नहीं करता है।’

भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता की दिशा” टेक्नोलॉजी का जाल

भारतीय नौसेना 2047 तक हर तरह से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की योजना बना रही है। आधी सदी से भी पहले, यही वह पहली सेवा थी जिसने अपने खुद के प्लेटफॉर्म बनाने की आवश्यकता को समझा था।”

इसने 1972 में भारत का पहला बड़ा डिफेंस प्लेटफॉर्म, INS नीलगिरि बनाया। 1984 में इसने चार न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन की एक सीरीज़ बनाने का कार्यक्रम शुरू किया, जो भारत की सबसे बड़ी मिलिट्री-टेक्नोलॉजिकल उपलब्धि थी।”

यही वह पहली सेवा थी जिसने 1971 में लड़ाई के दौरान गाइडेड मिसाइलें दागीं, 2001 में सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों को शामिल किया, और 1990 के दशक के मध्य में, मुश्किलों का सामना कर रहे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम को फंड देकर नई ज़िंदगी दी।”

स्वदेशीकरण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता के पीछे कई खास संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क है – वेपन्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स इंजीनियरिंग एस्टेब्लिशमेंट (WESEE), एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV), डायरेक्टरेट ऑफ़ इंडिजनाइज़ेशन, इलेक्ट्रिकल, मरीन और नेवल आर्किटेक्चर के डायरेक्टरेट, युद्धपोत और सबमरीन डिज़ाइन करने के लिए वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो, डायरेक्टरेट ऑफ़ शिप प्रोडक्शन, डायरेक्टरेट ऑफ़ स्टाफ़ रिक्वायरमेंट्स और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम।”

नौसेना ही एकमात्र ऐसी सेवा है जिसके पास इस तरह का ढांचा है। इन संगठनों ने भारतीय नौसेना की बहुत अच्छी सेवा की है। लेकिन आगे के रास्ते के लिए सेवा को भारी निवेश करने की आवश्यकता होगी।”

“पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय को संबोधित किया”  मेलबर्न में भारतीय प्रवासियों के साथ संवाद” 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह यहां फ्लैट वाइट कॉफी का आनंद लेते हैं।

उन्होंने भारतीय समुदाय द्वारा किए गए गर्म स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया और इसे अद्भुत बताया। मोदी ने कहा कि मेलबर्न ने एक तरह से सभी का दिल जीत लिया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीसी का भी धन्यवाद किया, जो सिडनी में उनके साथ थे और अब मेलबर्न में भारतीय समुदाय के बीच आए हैं। यह एक तरह से उनके संबंधों का पूरा चक्र है। अहमदाबाद, जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है, और मेलबर्न, जहां एक प्रतिष्ठित स्टेडियम है, दोनों का संबंध महत्वपूर्ण है।

मोदी ने कहा कि मेलबर्न शहर में भारतीय समुदाय ने अपने सांस्कृतिक रंगों से इसे और भी जीवंत बना दिया है। यहां कई ऐसे बाजार हैं जिन्हें ‘लिटल इंडिया’ या ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जो भारतीयता से भरे हुए हैं। उन्होंने एक मार्केट का वीडियो साझा किया, जिसमें बताया गया कि वहां हमेशा सेल चलती रहती है, जिससे लोग खरीदारी करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रवासी भारतीयों के घरों में दो टाइम जोन चलते हैं, और वे अपने परिवार के सदस्यों से वीडियो कॉल के जरिए जुड़े रहते हैं।

मोदी ने कहा कि भारतीय प्रवासी ऐसे हैं जैसे दूध में चीनी मिल जाती है, जिससे वह और मीठा हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि घर में ऑस्ट्रेलियाई दूध आता है, लेकिन चाय हमेशा भारतीय तरीके से बनाई जाती है। यह दर्शाता है कि भारतीयता हमेशा जीवित रहती है, चाहे वे कितनी भी दूर क्यों न हों।

” पीएम मोदी की यात्रा ” चीन के लिए एक बड़ा झटका” मोदी की ट्रिपल स्ट्राइक ” चीन को चुनौती “

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न्यूजीलैंड में पीएम मोदी का ऐतिहासिक दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने छह दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचकर चीन को एक बड़ा संदेश दिया है। इससे पहले, उन्होंने इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया, जहां उन्होंने भारत की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन किया।

इन देशों की यात्रा ने चीन की शक्ति को चुनौती दी है, जिससे पूरा देश सदमे में है। मोदी की कूटनीतिक रणनीति चीन के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। इंडोनेशिया से न्यूजीलैंड तक का यह दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है।

भारत और इंडोनेशिया के बीच नया सहयोग

पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान इंडोनेशिया में महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच की रणनीतिक स्थिति के कारण इंडोनेशिया का महत्व बढ़ गया है। मोदी के दौरे के दौरान 630 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल डील हुई, जो चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर दबाव डालेगी। इसके अलावा, मलक्का में भारत की मौजूदगी चीन के लिए चिंता का विषय बनेगी। दोनों देशों के बीच समुद्री निगरानी और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी है।

हाल के दिनों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों में मजबूती आई है। पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में अपने दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और नौसैनिक सहयोग को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा की। यह चीन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं।

न्यूजीलैंड में पीएम मोदी का ऐतिहासिक दौरा

न्यूजीलैंड में पीएम मोदी का स्वागत भव्य रहा। यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह लगभग चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करना है। पीएम मोदी का यह दौरा दर्शाता है कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनना चाहता है।

पवित्र अमरनाथ यात्रा का आज आठवां दिन श्रद्धालुओं ने गुफा मंदिर में पूजा…

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अमरनाथ यात्रा का आठवां दिन

पवित्र अमरनाथ यात्रा का आज आठवां दिन है, और तीन जुलाई से शुरू होने के बाद से अब तक दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गुफा मंदिर में पूजा की है। यह इस वर्ष श्रद्धालुओं के बीच गहरी आध्यात्मिकता का संकेत है।

नौवें जत्थे की यात्रा

शुक्रवार को, 8,796 तीर्थयात्रियों का नौवां जत्था जम्मू के भगवती नगर से कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए।

यात्रा की स्थिति

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमरनाथ यात्रा ने केवल आठ दिनों में 2 लाख तीर्थयात्रियों का आंकड़ा पार कर लिया है। उन्होंने बताया कि दोनों रास्तों पर यात्रा सुचारू रूप से चल रही है।

जत्थे का विवरण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नौवें जत्थे में 3,450 श्रद्धालुओं ने बालटाल का रास्ता चुना, जबकि 5,346 ने पारंपरिक पहलगाम मार्ग लिया। 10 जुलाई की सुबह तक, कुल 14,502 तीर्थयात्री डोमेल एक्सेस कंट्रोल गेट पार कर चुके थे। इनमें 8,516 पुरुष, 5,064 महिलाएं, 529 बच्चे, 78 साधु, 59 साध्वियां, नौ ट्रांसजेंडर श्रद्धालु और 247 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।

सुरक्षा इंतजाम

अधिकारियों ने बताया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसमें 24 घंटे सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं, इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें, सफाई व्यवस्था और ठहरने की सुविधाएं शामिल हैं। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में उठे गंभीर मुद्दे, सुरक्षा पास विवाद पर एफआईआर की मांग…

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हाल ही में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी के मामले को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है।

अयोध्या में दो दिवसीय बैठक में भाग लेने पहुंचे पूर्व नौकरशाह ने शनिवार को सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की।

मीडिया से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा का बयान

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने इस घटना को संगठन के लिए एक ‘कलंक’ माना है। उन्होंने कहा, ‘यह घटना हमारे लिए शर्मिंदगी का कारण है।’

निर्माण कार्य की प्रगति

बैठक में मंदिर निर्माण की प्रगति पर चर्चा करते हुए, मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर का काम अब अंतिम चरण में है। श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे अखंड ज्योति जलाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही, बलिदानियों की स्मृति में ‘हुतात्मा स्मारक’ भी जुलाई के अंत तक तैयार हो जाएगा।

निर्माण कार्य की समयसीमा

समिति के अध्यक्ष ने बताया कि राम मंदिर के मुख्य परिसर के सभी बुनियादी निर्माण कार्य 30 जुलाई तक पूरे कर लिए जाएंगे। परिसर के चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।

भव्य ऑडिटोरियम और संग्रहालय

मंदिर से जुड़े भव्य ऑडिटोरियम का कार्य दिसंबर तक पूरा होगा। रामकथा संग्रहालय के लिए 20 गैलरियों की ‘स्टोरी लाइन’ भी तैयार की जा चुकी है, जिस पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।

नए CEO की नियुक्ति

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए एक चयन समिति का गठन किया गया है।

गोपाल राव की भूमिका

ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने कहा कि वे 15 जुलाई तक ट्रस्ट के दैनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उन्होंने बताया कि नए महासचिव के सहयोगी के रूप में वे बिना किसी वित्तीय अधिकार के कार्य करेंगे।

येलो जोन पास विवाद

मंदिर परिसर में प्रशासनिक फेरबदल के बीच, ‘येलो जोन पास’ में अनियमितता को लेकर विवाद बढ़ गया है। युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने अयोध्या पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

आरोपों की गंभीरता

शिकायत में कहा गया है कि गोपाल राव के वाहन पर लगा पास गलत तरीके से जारी किया गया है। युवा कांग्रेस ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।