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Nitin Nabin: नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर RJD की पहली प्रति

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नितिन नबीन को मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया. उन्होंने जेपी नड्डा का स्थान लिया है. उनके अध्यक्ष बनने के साथ ही ऐसे वक्त में पार्टी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है जब वह देश की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

इस बीच बिहार में सियासत भी शुरू हो गई है.

‘मोदी-शाह ने नितिन नबीन का नाम आगे कर दिया’

आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने परिवारवाद का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी को घेरा. आरजेडी का कहना है कि आरएसएस ने मोदी शाह पर दबाव बनाया था कि संघ के पसंद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए. इससे छुटकारा पाने के लिए मोदी-शाह ने नितिन नबीन का नाम आगे कर दिया.

एजाज अहमद ने कहा कि बीजेपी परिवारवाद पर सवाल उठाती है दिखावे के लिए. आज बीजेपी ने परिवारवाद की राजनीति को आगे बढ़ाने का काम किया है. क्या बीजेपी अब परिवारवाद के अनुसार चलेगी? बीजेपी सफाई दे.

क्यों उठ रहा परिवारवाद का सवाल?

बता दें कि नितिन नबीन के पिता नवीन सिन्हा बिहार में बीजेपी के विधायक हुआ करते थे. 2006 में उनका निधन हो गया था. उप चुनाव हुआ तो नितिन नबीन जीत गए. अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया. बांकीपुर (पटना जिला) से वे अभी विधायक हैं. अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है तो आरजेडी परिवारवाद से इसको जोड़ते हुए बीजेपी को घेर रही है. हालांकि लालू परिवार को बीजेपी परिवारवाद को लेकर हमेशा घेरते रही है.

दूसरी ओर पार्टी (बीजेपी) के शीर्ष पद पर आसीन होने वाले नितिन नबीन अब तक के सबसे युवा व्यक्ति हैं. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वरिष्ठ मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और अन्य लोग भाजपा मुख्यालय में मौजूद थे. नितिन नबीन बीजेपी के 12वें अध्यक्ष बने, जिसकी स्थापना 1980 में हुई थी और उसी वर्ष उनका जन्म भी हुआ था. सुर्खियों से दूर रहने वाले नितिन नबीन 14 दिसंबर को बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त हुए थे. इसके बाद बिहार सरकार में कानून और न्याय, शहरी विकास और आवास मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.

बजट 2026: ‘चीन के एक्शन से बचाओ.’, क्यों कंपनियां लगा रही मदद की सरकार

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एक फरवरी को केन्द्रीय बजट पेश होने वाला है और इससे पहले अलग-अलग सेक्टर सरकार से अपनी-अपनी मांगें रख रहे हैं. उद्योग जगत न सिर्फ वित्तीय राहत की उम्मीद कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर दूसरे देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार से सहयोग चाहता है.

इन्हीं क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी शामिल है, जिसने चीन में लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला देते हुए सरकार से संरक्षण और राहत की मांग की है.

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का कहना है कि चीन द्वारा मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स के निर्यात पर रोक लगाने से वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है. भारत में मोबाइल फोन निर्माण काफी हद तक आयातित पार्ट्स पर निर्भर है, ऐसे में चीन के प्रतिबंधों ने उत्पादन लागत और आपूर्ति दोनों को जोखिम में डाल दिया है. इसी वजह से कंपनियां सरकार से बजट में ऐसे कदम उठाने की मांग कर रही हैं, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिल सके.

इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने सरकार से मोबाइल पार्ट्स जैसे माइक्रोफोन, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) और वियरेबल्स पर कस्टम ड्यूटी में कटौती की मांग की है. इसके साथ ही, अन्य जरूरी कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ कम करने की अपील की गई है, ताकि मोबाइल फोन की कुल उत्पादन लागत घटाई जा सके. आईसीईए के सदस्य संगठनों में एप्पल, फॉक्सकॉन, शाओमी, वीवो और ओप्पो जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आईसीईए ने सरकार को बताया है कि चीन की ओर से मैन्युफैक्चरिंग इनपुट्स पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण सप्लाई चेन में अनिश्चितता काफी बढ़ गई है. भारत की आयात पर निर्भरता इस जोखिम को और बढ़ा रही है. ऐसे में उद्योग संगठन ने मांग की है कि मोबाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले आयातित कंपोनेंट्स पर जीरो ड्यूटी का लाभ दिया जाए, ताकि कंपनियों को राहत मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो.

उद्योग निकाय ने यह भी याद दिलाया कि पिछले बजट 2025-26 में सरकार ने कई कैपिटल गुड्स को सीमा शुल्क से बाहर रखा था. इसी तर्ज पर मोबाइल फोन उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले आयातित कंपोनेंट्स और लिथियम आयन सेल पर भी सीमा शुल्क शून्य किया जाना चाहिए. संगठन का कहना है कि इन जरूरी कंपोनेंट्स के बिना न केवल उत्पादन लागत बढ़ेगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है.

आईसीईए ने आगे कहा कि बैटरी मैटेरियल्स की वैश्विक आपूर्ति पहले से ही अनिश्चित बनी हुई है और चीन द्वारा निर्यात पर रोक लगाए जाने से यह समस्या और गंभीर हो गई है. ऐसे में भारत में जल्द से जल्द घरेलू बैटरी और लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए उद्योग संगठन ने लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी पर भी सीमा शुल्क माफ करने की मांग सरकार से की है, ताकि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके.

पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में मिल रहा 6.70% का सालाना ब्याज, 100 रुपये से

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अगर आप सुरक्षित निवेश की तलाश में है और हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत करके बना फंड बनाना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकती है. दरअसल सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, ऐसे में पोस्ट ऑफिस आरडी पर पहले की तरह 6.70 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है.

वहीं पोस्ट ऑफिस आरडी एक ऐसी स्कीम है, जिसमें हर महीने तय रकम जमा करके 5 साल में अच्छा खासा फंड तैयार किया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है, जो खतरे से दूर रहकर सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं.

सबसे पहले समझें क्या है पोस्ट ऑफिस आरडी?

पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम में आपको हर महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है. यह अवधि आमतौर पर 5 साल की होती है. मैच्योरिटी पर जमा रकम के साथ ब्याज जोड़कर एक मुफ्त पैसा मिलता है. वहीं माना जाता है कि गुल्लक में पैसे रखने की बजाय यहां निवेश करने पर ब्याज का फायदा भी मिलता है. अगर आप पोस्ट ऑफिस आरडी में हर महीने 2000 रुपये जमा करते हैं, तो 5 साल में आपका कुल निवेश 1.20 लाख रुपये होगा. वहीं 6.70 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ मैच्योरिटी पर यह रकम करीब 1 लाख 43 हजार हो जाती है. हर महीने 1000 निवेश करने पर 5 साल बाद लगभग 71,000 का फंड तैयार होता है.

आरडी पर मिलती है लोन की सुविधा

पोस्ट ऑफिस आरडी की एक खास से बात यह है कि इसमें जमा रकम पर लोन भी लिया जा सकता है. अगर अपने लगातार 12 महीने तक किस्त जमा कर ली है तो आप अपनी जमा राशि पर 50 प्रतिशत तक लोन ले सकते हैं. इसके लिए आरडी अकाउंट तोड़ने की जरूरत नहीं होती है. इस लोन पर ब्याज दर आरडी की ब्याज दर से दो प्रतिशत ज्यादा होती है. यानी मौजूदा समय में आरडी पर लोन लेने पर करीब 8.7 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा जो पर्सनल लोन से काफी कम है.

पोस्ट ऑफिस आरडी के फायदे

पोस्ट ऑफिस आरडी भारत सरकार की ओर से समर्थित स्कीम है, इसलिए इसमें पैसा डूबने का कोई खतरा नहीं रहता है. वहीं हर महीने थोड़ी रकम जमा करने से नियमित बचत की आदत बनती है. इसके अलावा 6.70 प्रतिशत सालाना ब्याज कंपाउंडिंग के साथ मिलता है, जो सेविंग अकाउंट से बेहतर होता है. वहीं इसमें न्यूनतम 100 से निवेश शुरू किया जा सकता है और अधिकतम सीमा तय नहीं है. इसके अलावा इमरजेंसी में आरडी के खिलाफ लोन की सुविधा भी मिलती है.

कौन खोल सकता है आरडी में अकाउंट?

पोस्ट ऑफिस आरडी अकाउंट कोई भी व्यक्ति खोल सकता है. 10 साल या उससे ज्यादा उम्र का बच्चा इसे खुद ऑपरेट कर सकता है. इसके अलावा तीन लोग मिलकर जॉइंट अकाउंट भी खोल सकते हैं. यह अकाउंट देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस में खुलवाया जा सकता है. वहीं पोस्ट ऑफिस आरडी में न्यूनतम निवेश 100 रुपये है और इसके बाद 10 रुपये के मल्टीपल में रकम बढ़ाई जा सकती है. वहीं इसमें अगर अकाउंट महीने की 1 से 15 तारीख के बीच खोला है तो हर महीने 15 तारीख तक किस्त जमा करनी होती है, वहीं 16 तारीख के बाद अकाउंट खोलने पर महीने की आखिरी तारीख तक किस्त जमा करनी होती है.

‘Nitin Nabin मेरे बॉस, मैं उनका कार्यकर्ता…’, BJP के नए अध्यक्ष’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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बीजेपी नेता Nitin Nabin को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया है। पीएम मोदी समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नितिन नवीन ने अपना पदभार संभाल लिया है।

बीजेपी मुख्यालय में नितिन नवीन की ताजपोशी देखने को मिली। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है।

बीजेपी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को सम्मानित करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा की वो दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का नेतृत्व करने जा रहे हैं। पिछले कई महीने से संगठन के कई स्तर पर चुनाव की प्रक्रिया चली, जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक थी। आज इस प्रक्रिया का विधिपूर्वक समापन हुआ।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले डेढ़ सालों में हमने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती, अटल जी की 100वीं जयंती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष जैसे महापर्व मनाए हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा-

अटल जी, आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में बीजेपी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। वैंकेया नायडू और नितिन गडकरी ने संगठन के विस्तार में सहयोग दिया। राजनाथ जी के नेतृत्व में बीजेपी ने पहली बार बहुमत हासिल किया और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी दूसरी बार सत्ता में आई। अब जेपी नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने पंचायत से संसद तक का सफर तय किया है।

Nitin Nabin मेरे बॉस: PM मोदी

नितिन नवीन के बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर पीएम मोदी ने कहा कि नितिन नवीन आज से मेरे बॉस हैं और मैं उनका कार्यकर्ता हूं। पीएम मोदी के अनुसार, “लोगों को लगता होगा कि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, 50 साल की छोटी उम्र में मुख्यमंत्री बन गए। 25 साल से सरकार के मुखिया हैं। ये सब अपनी जगह है, लेकिन सबसे बड़ी चीज ये है कि मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं।”

नितिन नवीन पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

नितिन नवीन पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज के युवाओं की भाषा में कहें तो नितिन जी खुद मिलिनियल हैं। 45 साल के नितिन नवीन उस पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं, जिसने बड़े आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव देखे हैं। उनकी पीढ़ी के लोगों ने रेडियो से AI तक का सफर तय किया है। ऐसे में नितिन जी के पास युवा शक्ति हने के साथ-साथ संगठन में काम करने का अनुभव भी है। ये पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा।”

राजनीति, सत्ता, साधना और चुनाव. अपने पहले भाषण में क्या-क्या बोले BJP

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भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले भाषण में कहा कि इस साल पांच राज्यों में चुनाव है और आगे आने वाले चुनाव में भाजपा और भी मजबूत होगी.

उन्होंने कहा कि हम ऐसे राजनीतिक दल से जुड़े हैं, जहां… राजनीति सत्ता नहीं, साधना है. राजनीति भोग नहीं, त्याग है. राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है. राजनीति कोई पदभार नहीं, उत्तरदायित्व है.

नितिन नबीन

ने कहा कि आज मैं सर्वप्रथम आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि भाजपा के विस्तार में योगदान देने वाले हमारे शीर्ष नेतृत्व ने मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ता को पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुंचाने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आप सभी को प्रणाम करता हूं.

उन्होंने कहा कि यदि आज भाजपा विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनी है, तो इसकी वजह हमारा प्रेरणादायी नेतृत्व है, हमारी विचारधारा और कार्यकर्ताओं की मेहनत है. वो कार्यकर्ता, जो अनवरत काम करता है, जो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी भारत का ध्वज झुकने नहीं देता है, जो सीना ठोककर कहता है, तेरा वैभव अमर रहे मां.

Nation First

और Self Last… बोले नबीन

उन्होंने कहा कि जब पीएम मोदी ने Article 370 खत्म किया, तो कश्मीर का माहौल बदल गया और आज कश्मीर के हर कोने पर तिरंगा शान से लहराता है. हम Nation First, Party Next, और Self Last की सोच के साथ काम करते हैं.

उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को अपने हिस्सा का त्याग करना होगा. उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि राजनीति से दूर रहना समाधान नहीं है, रचनात्मक तरीके से इसमें भाग लें. राजनीति शार्टकट नहीं है.

सभी पांच राज्यों के चुनाव में मिलेगी सफलता

नितिन नबीन ने कहा कि अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने वाले हैं, और इन राज्यों के डेमोग्राफिक्स पर बहुत चर्चा हो रही है. बदलते डेमोग्राफिक्स वहां के हालात बदल रहे हैं, और यह हमारे लिए एक चुनौती है. हालांकि, हमें पूरा भरोसा है कि BJP के कार्यकर्ता अपने संघर्ष और कड़ी मेहनत से BJP को सभी पांच राज्यों में सफलता दिलाएंगे.

नितिन नबीन ने कहा कि हाल ही में हमने देखा कि कैसे विपक्षी पार्टियों ने तमिलनाडु की एक पहाड़ी पर पवित्र कार्तिगई दीपम फेस्टिवल को रोकने की कोशिश की. यह अकेला मामला नहीं है; विपक्ष ने दूसरी चीजों को भी रोकने की साजिश की है. हमने हाल ही में देखा कि कैसे एक जज पर इंपीचमेंट की कोशिश की गई.

उन्होंने कहा कि जब हम सोमनाथ की बात करते हैं और गर्व के इस फेस्टिवल को मनाने की कोशिश करते हैं, तो विपक्षी पार्टियों के लोग असहज महसूस करते हैं. हमारा मानना ​​है कि ऐसी परंपराओं को रोकने की कोशिश करने वाली ताकतों का सामना करना जरूरी है. हमें यह पक्का करना होगा कि जो लोग राम सेतु के होने को नकारते हैं और कार्तिगई दीपम फेस्टिवल का विरोध करते हैं, उनके लिए भारतीय राजनीति में कोई जगह नहीं है.’

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों का जताया आभार

उन्होंने कहा कि मैं आज इस अवसर पर पार्टी के पूर्व के राष्ट्रीय अध्यक्षों का स्मरण करता हूं और यहां मौजूद पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों का अभिवादन करता हूं. 2006 में जब मैं पहली बार विधायक बना, तब से मैं देख रहा हूं कि राजनाथ सिंह ने किस प्रकार हर कार्यकर्ता से जुड़ने का प्रयास किया.

DNA: भारत-यूएई के नेताओं की केमिस्ट्री कितनी मजबूत? एक विश्लेषण

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DNA: यूएई भारत का कितना महत्वपूर्ण मित्र है इसे आप इस तरह समझ सकते हैं. आज भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूएई के राष्ट्रपति का स्वागत करने सारे प्रोटोकाल तोड़कर एयरपोर्ट पर पहुंचे दोनों नेताओं ने जिस तरह एक दूसरे को गले लगाया वो बताने के​ लिए काफी है भारत और यूएई के नेताओं की केमिस्ट्री कितनी मजबूत है.

यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को एयरपोर्ट पर गार्ड आफ आनर दिया गया. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कार डिप्लोमेसी भी दिखी. यानी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति नाहयान एक कार में बैठकर एयरपोर्ट से बाहर गए.

आजकल दुनिया भर में कार डिप्लोमेसी बहुत ज्यादा मशहूर हो रही है. भारत में भी प्रधानमंत्री मोदी पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जर्मन चांलसर फ्रेडरिक मर्ज के साथ एक ही कार में नजर आए. ये कार डिप्लोमेसी वैश्विक नेताओं की आपसी समझ और मजबूत रिश्तों का प्रतीक बन रही है. एयरपोर्ट पर यूएई के राष्ट्रपति को रिसीव करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने आवास में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और उनके परिवार का स्वागत किया। यानी दुनिया को संदेश दिया गया. भारत और यूएई के नेताओं के रिश्ते औपचारिक नहीं पारिवारिक संबंधों जैसे मजबूत हैं.

पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति को झूला गिफ्ट किया

प्रधानमंत्री ने UAE के राष्ट्रपति को एक रॉयल नक्काशीदार लकड़ी का झूला गिफ्ट किया. यह गुजरात का एक खूबसूरत नक्काशीदार लकड़ी का झूला है, जो गुजरात के कई परिवारों के घरों का खास हिस्सा होता है. इसमें हाथ से फूलों और पारंपरिक डिज़ाइनों को तराशा गया है, जो कुशल कारीगरी को दिखाता है. गुजराती संस्कृति में, झूला पीढ़ियों के बीच एकजुटता, बातचीत और जुड़ाव का प्रतीक है. यह तोहफ़ा UAE द्वारा 2026 को ‘परिवार का वर्ष’ घोषित करने के फैसले से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. ये झूला भी दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक है. इसके बाद भारत और यूएई के बीच वो समझौते हुए जिनके बारे में सुनकर पाकिस्तान जैसे कट्टर और आतंक के एक्सपोर्टर देश को बहुत दर्द होगा. हो सकता है पाकिस्तान के हुक्मरानों की आंखों में आंसू भी आ जाएं. क्योंकि मुस्लिम मुल्क उसको भाव नहीं दे रहे और भारत में आकर बड़े बड़े समझौते कर रहे हैं. आज आपको भारत और यूएई के बीच हुए बड़े समझौतों के बारे में भी जानना चाहिए.

दोनों देश बने कई क्षेत्रों में साझेदार

भारत और UAE ने एक Letter of Intent पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मतलब है कि दोनों देश अब रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक और गहरी साझेदारी बनाना चाहते हैं. इसके तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग..संयुक्त युद्धाभ्यास…रक्षा उपकरणों और तकनीक में साझेदारी बढ़ाई जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी तालमेल को औपचारिक रूप दिया जाएगा. मतलब अब भारत और यूएई के रक्षा संबंध नए स्तर पर पहुंच गए हैं.

दोनों देश एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग करेंगे ये भारत की स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा रणनीति के लिए बेहद अहम है

LNG पर भारत और यूएई के बीच 10 साल का दीर्घकालिक समझौता हुआ है. अब UAE भारत को 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG प्रति वर्ष देगा. UAE अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर बन गया है.

दोनों देश AI, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर साझेदारी को बढ़ाएंगे…इस समझौते में AI को प्राथमिक क्षेत्र घोषित किया गया.

UAE की भागीदारी से गुजरात के धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, MRO सुविधा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल शुरू होगा. यानी यूएई भारत में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश कर रहा है.

कट्टरपंथी इस मुलाकात से होंगे परेशान

आज मिडिल ईस्ट के प्रभावशाली मुस्लिम देश के नेता को दिल्ली में देखकर इन समझौतों के बारे में जानकार कई कट्टरपंथी देश बेचैन होंगे. क्योंकि यूएई और भारत की दोस्ती दोनों देशों को फायदा पहुंचाने वाली है. उनकी तिजोरियों को भरने वाली है. आज आपको दोनों देशों की इस साझेदारी के असर के बारे में भी जानना चाहिए. भारत और यूएई India-Middle East-Europe Economic Corridor यानी भारत से मिडिल ईस्ट होते हुए यूरोप तक नए व्यापार रास्ते IMEC पर काम कर रहे हैं. ये कॉरिडोर सीधे भारत के सामान को यूरोप तक पहुंचाएगा. यूएई और भारत 2030 तक व्यापार को $100 अरब पहुंचाना. चाहते थे. लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में ही द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया. यानी लक्ष्य को वक्त से पहले हासिल कर लिया गया. अब नया लक्ष्य 2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार का रखा गया है.

आज आपको ये भी जानना चाहिए कि ये कमाल कैसे हुआ तो यूएई ने 2022 में भारत के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता किया था. जिसके जरिए दोनों देशों ने टैक्स घटाकर व्यापार, निवेश और सेवाओं को आसान बनाया. जिसकी वजह से 2030 का लक्ष्य 5 साल पहले हासिल कर लिया गया.

आज UAE, भारत में टॉप-5 निवेशकों में है यूएई अब तक 20 अरब डॉलर से ज्यादा का FDI भारत में लगा चुका है.

भारत UAE का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और वहां 35-40 लाख भारतीय काम कर रहे हैं, जो हर साल 15-17 अरब डॉलर रेमिटेंस भारत भेजते हैं. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है और रुपये पर दबाव कम होता है.

यूएई भारत के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग मज़बूत कर रहा है. यानी यूएई चाहता है. समुद्र में जहाज़ों, तेल-गैस और व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा भारत और यूएई मिलकर करें

यूएई की नीति मिडिल ईस्ट में बदलते power balance पर भारत से तालमेल बढ़ाने की है. यानी मिडिल ईस्ट की राजनीति में भारत और UAE मिलकर स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं.

यूएई ने ऑपरेशन सिंदूर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले आकाश एयर डिफेंस सिस्टम में रूचि दिखाई है. अगर ये डील फाइनल हुई तो यूएई की सुरक्षा मजबूत होगी और भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट.

समझे आप जब दो देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी इतनी मजबूत होती है. तो कैसे किसी एक का नहीं बल्कि दोनों देशों का फायदा होता है….आज आपको ये भी समझना चाहिए. यूएई और भारत ने एक दूसरे का भरोसा कैसे जीता. क्यों यूएई को भारत अपना इतना महत्वपूर्ण दोस्त मानता है कि राष्ट्रपति अल नाहयान की अगवानी करने. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सारे प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट तक पहुंच गए.

यूएई सरकार ने अबू धाबी में मंदिर बनवाया

आपको यूएई में 14 फ़रवरी 2024 के दिन हुए भव्य हिंदू मंदिर के उदघाटन की तस्वीरें जरूर याद होंगी. ये मंदिर यूएई की राजधानी अबू धाबी में बनाया गया है. ये अरब क्षेत्र का पहला पारंपरिक पत्थर का हिंदू मंदिर है. जिसके लिए जमीन खुद United Arab Emirates सरकार ने दी. जो इसे ऐतिहासिक बनाता है. सोचिए एक मुस्लिम मुल्क की सरकार ने एक हिंदू मंदिर के लिए जमीन दी. इतने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. सनातन की शक्ति को पहचाना. उसके अनुयायियों को सम्मान किया. यही बात यूएई को दूसरे कट्टर मुल्कों से अलग करती है और भारत के साथ साथ दुनिया के दूसरे मुल्कों के भरोसे को मजबूत बनाती है. यानी आप कह सकते हैं उदारता ही यूएई को आर्थिक रूप से इतना मजबूत बनाती है कि परमाणु बम रखने वाले कट्टर इस्लामिक मुल्क भी उसके सामने झोली फैलाकर खड़े होते हैं. आज आपको ये भी जानना चाहिए कट्टरता को छोड़ने से यूएई को क्या क्या फायदा हुआ.

यूएई ने उदार नीति अपनाकर खुद को वैश्विक निवेश और व्यापार का सुरक्षित केंद्र बना लिया. आज यूएई मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा FDI यानी Foreign Direct Investment हब है. जहा हर साल 20-25 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश आता है.

धार्मिक सहिष्णुता से UAE को भारतीय और पश्चिमी वर्कफोर्स का भरोसा मिला, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत हुई. आज सिर्फ दुबई और अबू धाबी मिलकर UAE को दुनिया के टॉप-10 ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स में शामिल करते हैं. यानी UAE दुनिया के उन 10 देशों में शामिल हैं जहां से वैश्विक पैसा, निवेश और वित्तीय फैसले सबसे ज़्यादा नियंत्रित होते हैं.

कट्टर इस्लाम से दूरी बनाकर UAE ने आंतरिक स्थिरता और राजशाही की सुरक्षा सुनिश्चित की. आज UAE में एक स्थिर सरकार है और देश की GDP 500 अरब डॉलर के आसपास है, जिसमें तेल के अलावा व्यापार, रियल एस्टेट, फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स का बड़ा योगदान है.

मंदिर, चर्च और सिनेगॉग की अनुमति देकर UAE ने “Tolerance Capital” यानी सभी धर्मों को सम्मान देने वाले देश की छवि बनाई. इसी वजह से 150 से ज्यादा देशों की 5 लाख से अधिक कंपनियां UAE को अपना रीजनल या ग्लोबल बेस बनाकर काम कर रही हैं.

मिडिल ईस्ट संपन्न लेकिन ऑयल की इकोनॉमी पर निर्भर

इसका मतलब समझ रहे हैं आप उदार नीति ने UAE को मिडिल ईस्ट का स्थायी ‘किंग’ बनाया है. मिडिल ईस्ट में कई संपन्न देश हैं लेकिन ये सभी ऑयल की इकोनॉमी पर निर्भर करते हैं यानी जिस दिन तेल या तेल की जरूरत खत्म हो जाएगी. उस दिन मिडिल ईस्ट के बाकी देशों की संपन्नता भी खत्म हो जाएगी. लेकिन दुनिया का बिजनेस हब बन चुके यूएई को कोई परेशानी नहीं होगी. एक तरफ उदार यूएई है. जहां निवेश करने वालों की लाइन लगी है..दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे कट्टर मुल्क हैं..जहां निवेश का मतलब खैरात है…यानी जो पैसा लगाया..वो कभी वापस नहीं लौटा इसीलिए कोई पाकिस्तान की तरफ देखता नहीं और यूएई के विकास मॉडल को अपनाकर दुनिया भर के मुस्लिम देश अब भारत से संबंध मजबूत कर रहे हैं. इस लिस्ट में सऊदी अरब भी शामिल है. इस लिस्ट में अफगानिस्तान भी शामिल है.

जब बंगाल में राष्ट्रपति शासन के लिए अड़ गईं ममता बनर्जी, मुस्लिम वोटों

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बेशक, तब ममता बनर्जी वाजपेयी सरकार में कड़े मोलभाव के बाद शामिल हुई थीं. उन्हें रेल मंत्रालय दिया गया था लेकिन ममता का ध्यान ज्यादातर बंगाल की राजनीति में ही रमा रहता था क्योंकि राज्य में 2001 में विधानसभा चुनाव होने थे और वाम मोर्चे को सत्ता से दूर करने के लिए ममता पूरा जोर लगाना चाहती थीं.

ममता बार-बार वाजपेयी मंत्रिमंडल से इस्तीफे की धमकी दिया करती थीं. उन्होंने वाजपेयी मंत्रिमंडल से दो बार इस्तीफा दिया था. पहली बार सितंबर 2000 में, जब वाजपेयी सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ा दी थीं लेकिन गठबंधन धर्म निभाने के उस्ताद वाजपेयी के समझाने और यह आश्वासन देने पर कि इस बढ़ोतरी पर पुनर्विचार किया जाएगा, ममता मान गईं और उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया. आपको शायद आश्चर्य करें तब बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए ममता ने पूरी ताकत झोंक दी थी.

मंजीत ठाकुर अपनी किताब ‘बंगाल में भाजपा – वाम गढ़ में दक्षिणपंथ की विकास यात्रा’ में लिखते हैं कि ममता बनर्जी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का काफी ज्यादा दबाव डाल रही थीं. एक वक्त ऐसा भी आया, जब पूर्वी मिदनापुर के पांसकुड़ा में हिंसक उपचुनावों के बाद एनडीए के संयोजक जॉर्ज फर्नांडीज को गठबंधन की ओर से एक प्रस्ताव पारित करके सरकार से अनुरोध करना पड़ा कि बंगाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाने के लिए उचित कदम उठाया जाए. इसके बाद केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में बंगाल की ज्योति बसु सरकार से जवाब भी मांगा था. इसके बाद एनडीए का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत की जांच के लिए दौरे पर आया था लेकिन उसे महसूस हुआ कि इस कदम से गठबंधन को राजनैतिक रूप से नुकसान होगा और इससे ज्योति बसु शहीद का तमगा पा लेंगे.

बंगाल में भाजपा ने जमाए पैर

1999 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को सूबे में कुल 11.13 फीसद वोट हासिल हुए थे लेकिन यह आंकड़ा सिक्के का महज एक पहलू है. पश्चिम बंगाल में भाजपा का 1999 का लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन भी ऐसा ही है, जिसमें लोगों का ध्यान इस बात में अटककर रह जाता है कि पार्टी ने पहली बार दो सीटें जीतीं लेकिन दिलचस्प यह है कि कुल 13 सीटों में से भाजपा के दो उम्मीदवार जीते, एक उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे और बाकी के दो तीसरे स्थान पर.

भाजपा के लिए यह पैर जमाने वाला चुनाव साबित होना चाहिए था और इसने बेशक जमीनी स्तर पर पैर पसारने के लिए आतुर ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दीं. इसके साक्ष्य हमें बाद में जाकर मिलते हैं. हालांकि 1999 के आम चुनाव के दौरान ऐसी कई घटनाओं का ब्योरा मिलता है जिसमें ममता बनर्जी ने भाजपा के नेताओं के साथ रूखा व्यवहार किया. इनमें से एक तो भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन के साथ संयुक्त रैली के दौरान उनसे किया दुर्व्यवहार भी था. ऐसे में भाजपा का प्रदेश नेतृत्व ममता से नाराज था और केंद्रीय नेतृत्व से इसकी शिकायत भी की गई थी, पर केंद्रीय नेतृत्व ने इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया था.

ममता ने दूसरी बार दिया इस्तीफा

दिसंबर 2000 में पंजाब में एक रेल दुर्घटना हो गई थी, जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई. ममता ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, वाजपेयी ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया था लेकिन उन्हीं दिनों तहलका प्रकरण हो गया और इस बार रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज के इस्तीफे की मांग करती हुई ममता बनर्जी ने मार्च 2001 में एक बार फिर से इस्तीफा दे दिया और वाजपेयी सरकार से समर्थन वापस लेकर एनडीए से बाहर निकल गईं.

कलकत्ता नगर निगम के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था और इससे ममता बनर्जी का आत्मविश्वास भी काफी बढ़ गया था. मीडिया को ममता की अगुआई वाले विपक्ष और कमजोर होते वाम मोर्चे से सत्ताविरोधी लहर का रुझान मिल गया. ममता की रैलियों में उमड़ी भीड़ ने इस नरैटिव को हवा दे दी लेकिन अब तक रायटर्स बिल्डिंग में ज्योति बसु की जगह कमान बुद्धदेव भट्टाचार्य के हाथों में आ चुकी थी.

मुसलमानों के छिटकने का डर

ममता के बार-बार केंद्र सरकार से इस्तीफे देने को राजनैतिक पंडित एनडीए से बाहर आने और पश्चिम बंगाल में भाजपा के साथ गठजोड़ तोड़ने की कवायद के रूप में देख रहे थे. इसकी दो वजहें थीं, पहला, भाजपा अगर तृणमूल कांग्रेस के साथ बनी रहती तो सूबे का मुसलमान ममता के पाले में पूरी तरह आने से हिचकता. दूसरा, तृणमूल कांग्रेस वैचारिक रूप से भाजपा-विरोधी गैर-वाम वोटों को अपने पक्ष में गोलबंद करना चाहती थीं. ममता ने बंगाल में नारा दिया – होए एईबार, नॅय नेबर.

उनकी इन कोशिशों को बुद्धदेव भट्टाचार्य ने एक अवसर के तौर पर भुनाने का फैसला कर लिया. इधर, चुनाव में अकेली मैदान में आई भाजपा और तृणमूल दोनों के लिए चुनाव अच्छे साबित नहीं हुए. ममता अतिआत्मविश्वास का शिकार होती दिखीं और सूबे की कुल 294 सीटों में उनकी पार्टी को महज 60 सीटें हासिल हुईं.

13 मई, 2001 को जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे टीवी पर आने लगे तो एक बात स्पष्ट हो गई थी, पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा भारी जीत की तरफ बढ़ रहा था. बंगाली मतदाताओं ने राष्ट्रीय चलन के उलट एक बार बुद्धो बाबू (बुद्धदेव भट्टाचार्य) के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया था. नतीजतन, सूबे की 294 सीटों में से वाम मोर्चे ने 199 सीटों पर फतह हासिल की थी और उसका वोट-शेयर भी 49 फीसद तक पहुंच गया था.

ब्रिटेन की अदालत को भारत की जरूरत! नीरव मोदी केस में दिल्ली HC से मांग

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ब्रिटेन की एक अदालत ने नीरव मोदी से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट से मदद मांगी है. यह मामला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि बहुत कम मामलों में किसी विदेशी अदालत ने सीधे भारतीय अदालत से इस तरह का सहयोग मांगा है.

इंग्लैंड और वेल्स की सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध किया है कि दिल्ली में मौजूद एक बैंक अधिकारी का बयान दर्ज कराया जाए, ताकि उसे ब्रिटेन में चल रही कानूनी कार्यवाही में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके. यह मामला नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई से जुड़े लोन डिफॉल्ट विवाद से संबंधित है.

सरकार की राय जरूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस अनुरोध पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की मदद भी मांगी है. जस्टिस सी. हरि शंकर ने कहा कि इस तरह के मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होनी चाहिए, इस पर सरकार की राय जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा कोई पुराना उदाहरण नहीं मिला है, जिसमें किसी विदेशी अदालत के सीधे पत्र के आधार पर भारतीय अदालत ने कार्रवाई की हो, और वह भी तब, जब इस मामले से जुड़ा कोई पक्ष खुद अदालत न आया हो. इसी वजह से यह मामला कानूनी रूप से नया और जरूरी बन गया है.

ब्रिटेन की अदालत चाहती है कि दिल्ली में कार्यरत बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी का बयान दर्ज किया जाए. यह अधिकारी उस लोन से जुड़ी जानकारी रखता है, जो नीरव मोदी और उसकी कंपनी से संबंधित है. ब्रिटेन में चल रहे केस में इस गवाही को जरूरी माना जा रहा है. यह अनुरोध भारत के कानून मंत्रालय के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा है. अदालत ने अपने आदेश में बताया कि यह प्रक्रिया 1970 की हेग कन्वेंशन के तहत की जा रही है, जो नागरिक और व्यापारिक मामलों में विदेश में सबूत इकट्ठा करने से जुड़ी है.

नीरव मोदी भी हैं शामिल

इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटेन में चल रही कार्यवाही के सभी पक्षों को भी इस मामले में शामिल करने का फैसला किया है. इसमें भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी भी शामिल है. अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है, ताकि वे अपनी बात रख सकें. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के दायरे में रहे.

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के वकील से यह भी पूछा है कि क्या बैंक इस मामले में कोई औपचारिक अर्जी दाखिल करना चाहता है या नहीं. अदालत चाहती है कि सभी कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया जाए, ताकि आगे की कार्रवाई में किसी तरह की दिक्कत न आए. यह मामला न सिर्फ नीरव मोदी से जुड़े विवाद की वजह से अहम है, बल्कि इसलिए भी कि इसमें भारत और ब्रिटेन की अदालतों के बीच कानूनी सहयोग का एक नया रास्ता खुल सकता है.

10,000 स्पेशल गेस्ट… 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर जानें कौन होंगे शामिल .

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भारत में 26 जनवरी, 2026 को मनाए जाने वाले 77वें गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में करीब 10,000 खास अतिथि शामिल होंगे. रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ये अतिथि अलग-अलग क्षेत्रों से आए हैं और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हैं.

इन विशेष अतिथियों में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिन्होंने आय और रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप्स और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के क्षेत्र में अच्छे कार्य किए हैं. इसके अलावा, सरकार की प्रमुख पहलों में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को भी बुलाया गया है. उनका उद्देश्य देश निर्माण में योगदान देने वालों का सम्मान करना और राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं में जन भागीदारी बढ़ाना है.

विशेष अतिथियों के लिए कर्तव्य पथ पर विशेष बैठने की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा, उन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्राहलय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थलों का दौरा करने का अवसर मिलेगा. अतिथि संबंधित मंत्रियों के साथ बातचीत भी कर सकेंगे. यह आयोजन उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा.

​सुरक्षा व्यवस्था पर एजेंसियों का ध्यान

सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से, दिल्ली पुलिस ने कर्तव्य पथ और पूरे नई दिल्ली जिले में अत्याधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की है. यह कदम खुफिया एजेंसियों से मिली कई आतंक संबंधी चेतावनियों के मद्देनजर उठाया गया है. इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की बैठने की व्यवस्थाओं को भारतीय नदियों के नाम पर रखा गया है और अतिथियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जरूरी बदलाव किए गए हैं.

अतिथियों और टिकट धारकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने निमंत्रण कार्ड में दिए गए विवरण को ध्यान से पढ़ें और केवल निर्दिष्ट मार्गों का पालन करें. मार्गों, पार्किंग और एन्क्लोजर से संबंधित पूरी जानकारी रक्षा मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है. इस व्यवस्था का उद्देश्य समारोह को सुरक्षित, व्यवस्थित और सभी अतिथियों के लिए यादगार बनाना है.

किश्तवाड़ मुठभेड़ अपडेट: ऑपरेशन त्राशी-I तीसरे दिन भी जारी

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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के सिंगपोरा इलाके में चल रहा आतंकवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन त्राशी-I सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. यह मुठभेड़ 18 जनवरी की सुबह करीब 12 बजे शुरू हुई थी जब सुरक्षा बलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी.

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 3 आतंकियों को घेर लिया गया है और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए लगातार कहा जा रहा है. हालांकि, आतंकियों की ओर से की जा रही फायरिंग के चलते अभियान को बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इस संयुक्त अभियान में भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज के पैरा कमांडो, जम्मू-कश्मीर पुलिस का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान शामिल हैं. इलाके में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है ताकि आतंकियों के भागने का कोई रास्ता न बचे.

मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना के पैरा कमांडो हवलदार गजेंद्र सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया. इस दौरान सात अन्य जवान भी घायल हुए थे, जिनका इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

आतंकियों के एक ठिकाने को सेना ने किया ध्वस्त

बता दें, रविवार को मुठभेड़ के दूसरे दिन सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली थी. अभियान के दौरान आतंकियों के एक ठिकाने को ध्वस्त किया गया, जहां से वे सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने की साजिशें रच रहे थे. ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई थी. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक इलाके को पूरी तरह आतंकमुक्त नहीं कर दिया जाता. अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा बलों को पूरा सहयोग करें.

4 लोगों को सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया

ताजा जानकारी के अनुसार, किश्तवाड़ के सिंगपोरा इलाके में जारी आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किए गए आतंकवादी ठिकाने के संबंध में 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया है. यह कार्रवाई उस समय की गई जब पिछले दिनों मुठभेड़ में आतंकियों के एक छिपे हुए ठिकाने को ढहा दिया गया था. सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि ठिकाने के अवशेषों से मिले सामान और हथियारों की आपूर्ति को लेकर जांच की जा रही है. इस दौरान सुरक्षा बलों को शक हुआ कि ठिकाने तक यह सामग्री स्थानीय लोगों के माध्यम से पहुंचाई गई हो सकती है. इसी शक के आधार पर चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है.