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यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा गंगा एक्सप्रेसवे, खरीदी जाएगी 16 गांवों की 740 एकड़ जमीन, 1204 करोड़ रुपये की मंजूरी…

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उत्तर प्रदेश के नोएडा में सरकार बेहतर कनेक्टिविटी के लिए काम कर रही है. सरकार का प्लान है कि यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने का जाए. इसके लिए जमीन खरीद के लिए सरकार ने बजट भी पास कर दिया है.

यमुना एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा. सरकार ने इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) को 1204 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया है.

नोएडा में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सरकार योजना बनाकर तेजी से काम कर रही है. सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे को बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इसके लिए यीडा क्षेत्र के 16 गांवों की करीब 740 एकड़ जमीन खरीदने पर जोर दिया जा रहा है. जमीन खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की योजना पर काम तेज हो जाएगा.

राज्य सरकार ने जमीन खरीदने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) को 1204 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. यूपी सरकार के संयुक्त सचिव निर्मष कुमार शुक्ल ने यीडा के सीईओ को इससे संबंधित पत्र भेजा है, जिसे 17 फरवरी को जारी कर दिया गया था.

यूपीडा करेगा निर्माण

गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य करने की जिम्मेदारी यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को दी गई है. लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर के सियाना क्षेत्र से शुरू होगा और यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर यानी सेक्टर-21 फिल्म सिटी के पास आकर जुड़ेगा. इस लिंक एक्सप्रेसवे का करीब 20 किलोमीटर का हिस्सा यीडा क्षेत्र में है. इसमें से 9 किलोमीटर के भाग में एलिवेटेड निर्माण भी शामिल है. इसके असावा, स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा.

16 गांवों से होगी जमीन की खरीद

गंगा लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 16 गांवों की लगभग 740 एकड़ जमीन की खरीदी जाएगी, जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. सरकार जमीन खरीदने के लिए 1204 करोड़ रुपये खर्च करेगी. जेवर के मेहंदीपुर बांगर, भाईपुर ब्रह्मनान, रबुपूरा, भुन्नातगा, म्याना, फाजिलपुर और कल्लूपुरा में अथॉरिटी ने सर्वेक्षण के बाद जमीन खरीद की तैयारी की है.

खाते में कब आएंगे पीएम किसान के 2000 रुपये? तारीख को लेकर आई ये बड़ी अपडेट…

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पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का इंतजार लंबा होता जा रहा है. जनवरी का महीना बीत चुका है और अब फरवरी भी खत्म होने की कगार पर है. देशभर के करोड़ों किसान इस आस में हैं कि आखिर उनके बैंक खातों में दो हजार रुपये की सम्मान राशि कब क्रेडिट होगी.

किसानों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है, क्योंकि कई लोगों के खेती-किसानी से जुड़े कई खर्चे इसी राशि पर निर्भर करते हैं. सरकार की तरफ से अभी तक किस्त जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 22वीं किस्त का पैसा होली के पहले खाते में आ सकता है.

होली से पहले आ सकती है किस्त?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 24 फरवरी को किसानों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं. हालांकि, यह केवल एक संभावित तारीख है. कृषि मंत्रालय ने फिलहाल इन दावों पर कोई मुहर नहीं लगाई है. दूसरी तरफ, यह भी चर्चा तेज है कि होली के त्योहार से ठीक पहले केंद्र सरकार किसानों को यह तोहफा दे सकती है. जब तक कोई पक्की घोषणा नहीं हो जाती, तब तक इन तारीखों को केवल एक अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

कहीं पैसा रास्ते में तो नहीं अटक जाएगी?

आर्थिक लाभ पाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आपकी सारी कागजी औपचारिकताएं पूरी हों. अक्सर देखा गया है कि छोटी सी चूक के कारण कई किसानों की किस्त लटक जाती है. पेंडिंग स्टेटस का सीधा मतलब यही है कि आपके आवेदन की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कोई कमी रह गई है.

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आपको अपने आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक कराना होगा. इसके अलावा, पैन कार्ड का वेरिफिकेशन और बैंक अकाउंट से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तुरंत करना होगा. यदि ये काम अधूरे हैं, तो राशि मिलने में भारी दिक्कत आ सकती है.

घर बैठे आसानी से ऐसे चेक करें अपना स्टेटस

आप घर बैठे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी किस्त की स्थिति आसानी से जांच सकते हैं. सबसे पहले पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in को अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर खोलें. होमपेज पर आपको ‘फार्मर कॉर्नर’ (Farmers Corner) का एक खास सेक्शन दिखाई देगा, जहां आपको जाना है.

इस सेक्शन के भीतर ‘नो योर स्टेटस’ (Know Your Status) विकल्प पर . यहां आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी कोड दर्ज करना होगा. इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. पोर्टल पर इस ओटीपी को सबमिट करते ही 22वीं किस्त का पूरा स्टेटस स्क्रीन पर आ जाएगा.

‘गृहयुद्ध से बचना है तो कानून वापस लेना होगा’, UGC की नई गाइडलाइंस को लेकर रामभद्राचार्य का सरकार पर हमला…

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UGC की नई गाइडलाइंस को लेकर देश में वैचारिक मतभेद का मामला बड़ा होता जा रहा है. उत्तर प्रदेश के बस्ती में राम कथा के दौरान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने UGC को लेकर बड़ा बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि सरकार को ये कानून हर हाल में वापस लेना ही होगा. उनके धर्माचार्य रहते ये कानून लागू नहीं हो सकता है. रामभद्राचार्य ने सरकार को घेरते हुए कहा कि UGC की क्या आवश्यकता थी, समाज में क्यों भेदभाव किया जा रहा. सरकार को अगर गृहयुद्ध से बचना है तो इस कानून को वापस लेना ही होगा.

वहीं यूपी की राजधानी लखनऊ में शनिवार को UGC एक्ट के खिलाफ सवर्ण मोर्चा बैनर तले जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला. सैकड़ों लोगों की भीड़ UGC के खिलाफ सड़कों पर उतरी नजर आई. इस दौरान अपने पद से इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे. प्रदर्शन करने वाले लोग सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. लोगों की भीड़ को देखते हुए भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है. परिवर्तन चौराहे से गांधी प्रतिमा तक लोगों की भीड़ है. इसके अलावा कई अन्य संगठन भी इस प्रदर्शन में मौजूद हैं.

UGC के नए नियमों की आवश्यकता ही क्या थी?

जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित एक रामकथा कार्यक्रम के दौरान रामभद्राचार्य ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. रामभद्राचार्य ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार को इस विवादास्पद कानून को तुरंत वापस लेना चाहिए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि जब तक वे धर्माचार्य के पद पर आसीन हैं इस कानून को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे. उन्होंने पूछा कि आखिर इन नए नियमों की आवश्यकता ही क्या थी? रामभद्राचार्य ने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि यदि देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाना है तो इस कानून को वापस लेना ही होगा.

ब्राह्मण समाज और जातिवाद पर चर्चा

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज और जातिवाद पर भी गहरी चर्चा की. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कभी भी जातिवादी नहीं रहा है. उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना न किया होता तो शायद महाभारत का भीषण युद्ध टल सकता था. वहीं गुरु वशिष्ठ की महानता का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने निषाद राज का आदर किया था. गुरु वशिष्ठ ने न केवल राजकुमारों को, बल्कि समाज के हर वर्ग को समान आदर और शिक्षा दी थी.

जगद्गुरु ने समाज में व्याप्त छुआछूत और कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि जो भगवान राम का है वह सबका है. इस दौरान उन्होंने बस्ती जिले का नाम बदलकर ‘वशिष्ठ नगर’ करने की मांग को दोहराया. उन्होंने दुख व्यक्त किया कि आज कुछ ब्राह्मण मांस और मदिरा का सेवन कर रहे हैं जिन्हें स्वयं जागरूक होने की आवश्यकता है. इससे ब्राह्मण समाज को बचना होगा.

अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में शामिल

लखनऊ में UGC के नए नियम के खिलाफ सवर्ण समाज के लोगों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया. अपने पद से इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री भी प्रदर्शन में पहुंचे. उन्होंने इस दौरान मीडिया से बात नहीं की. लेकिन हाथ में तख्ती लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे.

US SC का फैसला और ट्रंप का ग्लोबल टैरिफ, कैसे बदलेगी भारत-US ट्रेड की तस्वीर?

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को पूरी तरह से नकार दिया है. जिसके कुछ घंटों के बाद ट्रंप अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली चीजो पर एक नए ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की है, जिसके बाद भारत पर अब 25 परसेंट से कम 10 परसेंट का रेसिप्रोकल टैरिफ लगेगा.

ट्रंप के ऐलान के मुताबिक, 10 परसेंट का टेम्पररी इंपोर्ट सरचार्ज 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर भारत के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की ओर से नए ग्लोबल टैरिफ की घोषणा के क्या मायने हैं?

क्या होता है टैरिफ?

ये कस्टम या इंपोर्ट ड्यूटी हैं जो कोई देश दूसरे देशों से खरीदे गए सामान पर लगाता है. इंपोर्टर को यह ड्यूटी सरकार को देनी होती है. आम तौर पर, कंपनियां ये टैक्स एंड यूजर या कंज्यूमर पर डालती हैं. इंपोर्ट ड्यूटी इंपोर्ट करने वाले देश में सामान को महंगा बनाती है. इसके अलावा, कुछ और फैक्टर भी इसमें भूमिका निभाते हैं.

रेसिप्रोकल टैरिफ

रेसिप्रोकल टैरिफ शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले US ने किया था. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने 2 अप्रैल, 2025 को भारत समेत करीब 60 देशों पर इन ड्यूटीज़ की घोषणा की. इसका मकसद US एक्सपोर्टर्स को बराबर का मौका देना था.

उदाहरण के लिए, अगर कोई देश US के सामान पर X परसेंट ड्यूटी लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश के इंपोर्ट पर उतनी ही ड्यूटी लगाएगा.ये एडिशनल इंपोर्ट ड्यूटीज़ हैं, जो मौजूदा या MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) लेवी के अलावा लगाई जाती हैं.

अब इंडिया पर रेसिप्रोकल टैरिफ कितना?

2 अप्रैल, 2025 को, US ने 26 परसेंट रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की. बाद में जुलाई में, US ने 7 अगस्त, 2025 से अमेरिकी मार्केट में आने वाले इंडियन सामान पर 25 परसेंट RT की घोषणा की. पिछले साल अगस्त में, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने रशियन क्रूड ऑयल खरीदने पर इंडिया पर एडिशनल 25 परसेंट टैरिफ की घोषणा की, जिससे इंडिया पर टोटल RT 50 परसेंट हो गया. फरवरी में एक अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर सहमति के बाद, US ने घोषणा की कि वह भारत पर RT को घटाकर 18 परसेंट कर देगा और अतिरिक्त 25 परसेंट प्यूनिटिव टैरिफ हटा देगा. तो अभी, US में भारत के सामान पर 25 परसेंट RT लग रहा है.

US सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को रद्द करने और वॉशिंगटन के एक नया ऑर्डर जारी करने के साथ, जिसमें टेम्पररी 10 परसेंट इंपोर्ट सरचार्ज लगाया गया है, भारतीय सामान पर अब 24 फरवरी, 2026 से सिर्फ़ 10 परसेंट रेसिप्रोकल लेवी लगेगी.

उदाहरण के लिए, अगर किसी प्रोडक्ट पर अमेरिका में 5 परसेंट MFN ड्यूटी लगती है, तो अब अतिरिक्त 10 परसेंट लगाया जाएगा, जिससे इफेक्टिव ड्यूटी 15 परसेंट हो जाएगी. पहले, यह 5 प्लस 25 परसेंट था.

ट्रंप के 20 फरवरी के ऐलान में कहा गया था कि मैं 150 दिनों के लिए, अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली चीज़ों पर 10 परसेंट का टेम्पररी इंपोर्ट सरचार्ज लगाता हूं, जो 24 फरवरी, 2026 को रात 12:01 बजे ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम से लागू होगा.

एक सोर्स ने कहा कि अलग-अलग देशों पर अलग-अलग RTs के बजाय, अब उन सभी पर 10 परसेंट है जो RTs के तहत आते थे.

7 फरवरी से 24 फरवरी, 2026 तक, रूस-तेल पेनल्टी हटा दी गई, जिससे एडिशनल ड्यूटी घटकर 25 परसेंट हो गई. 6 फरवरी के जॉइंट स्टेटमेंट में इस रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 परसेंट करने का प्रपोज़ल था, लेकिन यह बदलाव अभी तक लागू नहीं हुआ है.

24 फरवरी, 2026 से, MFN ड्यूटी के अलावा 150 दिनों के लिए एक टेम्पररी एक्रॉस-द-बोर्ड 10 परसेंट टैरिफ लागू होगा, जो पहले के रेसिप्रोकल टैरिफ स्ट्रक्चर की जगह लेगा.

सवाल ये भी है कि 150 दिनों के बाद क्या होगा? जानकारों के अनुमार अभी तक यह साफ नहीं है कि 150 दिन के समय के बाद भारत जैसे देशों पर US क्या टैरिफ लगाएगा.

इंडिया-US ट्रेड पैक्ट

दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट के पहले फेज के लिए लीगल टेक्स्ट को फ़ाइनल करने के लिए, इंडियन टीम 23 फरवरी, 2026 को वाशिंगटन में अपने काउंटरपार्ट्स से मिलने वाली है. कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि इंडिया और US अगले महीने डील पर साइन कर सकते हैं, और यह अप्रैल में शुरू हो सकता है.

एक्सपर्ट की राय

थिंक टैंक GTRI ने कहा कि, चूंकि इंडियन सामान पर RT 25 परसेंट से घटकर 10 परसेंट हो गया है, इसलिए इंडिया को US के साथ ट्रेड पैक्ट पर फिर से सोचना चाहिए.भारत, अमेरिका के लिए टैरिफ कम करने पर सहमत हुआ था, क्योंकि वाशिंगटन ने भारत पर RT घटाकर 18 परसेंट कर दिया था, लेकिन अब अमेरिका ने सभी देशों के लिए RT घटाकर 10 परसेंट कर दिया है. GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि डील कोई चैरिटी नहीं होतीं. दोनों पक्षों को फायदा होना चाहिए. अब, भारत के फायदे का नए सिरे से मूल्यांकन करने की ज़रूरत है.

भारत के साथ डील पर ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि उनके बड़े टैरिफ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने इस फैसले के जवाब में अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली चीज़ों पर 10 परसेंट अतिरिक्त ग्लोबल लेवी लगाने की घोषणा की.

छूट वाली कैटेगरी में आने वाले सामान

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक फैक्ट शीट में कहा गया है कि कुछ सामान पर टेम्पररी इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी क्योंकि अमेरिकी इकोनॉमी की ज़रूरतें हैं या यह पक्का करने के लिए कि ड्यूटी अमेरिका के सामने आने वाली बुनियादी इंटरनेशनल पेमेंट समस्याओं को ज़्यादा असरदार तरीके से हल करे.

इन चीज़ों में कुछ ज़रूरी मिनरल, करेंसी और बुलियन में इस्तेमाल होने वाले मेटल, एनर्जी और एनर्जी प्रोडक्ट शामिल हैं; ऐसे नेचुरल रिसोर्स और फर्टिलाइजर जिन्हें यूनाइटेड स्टेट्स में उगाया, माइन किया या किसी और तरह से प्रोड्यूस नहीं किया जा सकता या जिन्हें घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए काफी मात्रा में उगाया, माइन किया या प्रोड्यूस नहीं किया जा सकता; कुछ खेती के प्रोडक्ट, जिनमें बीफ, टमाटर और संतरे शामिल हैं; फार्मास्यूटिकल्स और फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स.

दूसरे आइटम में कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स सामान; पैसेंजर गाड़ियां, कुछ हल्के ट्रक, कुछ मीडियम और हेवी-ड्यूटी गाड़ियां, बसें, और पैसेंजर गाड़ियों, हल्के ट्रक, हेवी-ड्यूटी गाड़ियों, बसों और कुछ एयरोस्पेस प्रोडक्ट के कुछ पार्ट्स शामिल हैं.

भारत पर सेक्टोरल टैरिफ

सेक्टोरल टैरिफ (स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर पर 50 परसेंट, और कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 परसेंट) जारी रहेंगे.

US टैरिफ क्यों लगा रहा है

US ने आरोप लगाया है कि उसे भारत के साथ काफी ट्रेड डेफिसिट का सामना करना पड़ रहा है, उसने नई दिल्ली पर अमेरिकी सामान पर ज़्यादा टैरिफ लगाने का आरोप लगाया है, जिससे उसका कहना है कि भारतीय बाज़ार में US एक्सपोर्ट पर रोक लगती है.

कितना है दोनों देशों का बाइलेटरल ट्रेड?

2021-25 के दौरान, US सामान के मामले में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था. भारत के कुल एक्सपोर्ट में US की हिस्सेदारी लगभग 18 परसेंट, इंपोर्ट में 6.22 परसेंट और दोनों तरफ़ के ट्रेड में 10.73 परसेंट है. 2024-25 में, दोनों तरफ़ का ट्रेड USD 131.8 बिलियन (USD 86.5 बिलियन एक्सपोर्ट और USD 45.3 बिलियन इंपोर्ट) तक पहुंच गया.

अमेरिका के साथ, भारत का 2024-25 में USD 41 बिलियन का ट्रेड सरप्लस (इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के बीच का अंतर) था. 2023-24 में यह USD 35.32 बिलियन और 2022-23 में USD 27.7 बिलियन था.

सर्विसेज़ में, भारत ने लगभग USD 28.7 बिलियन का एक्सपोर्ट किया और USD 25.5 बिलियन का इंपोर्ट किया, जिससे USD 3.2 बिलियन का सरप्लस हुआ. कुल मिलाकर, भारत का US के साथ कुल ट्रेड सरप्लस लगभग USD 44.4 बिलियन था.

देशों के बीच ट्रेड होने वाले मुख्य प्रोडक्ट

2024 में, भारत के US को मुख्य एक्सपोर्ट में दवा के फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिकल (USD 8.1 बिलियन), टेलीकॉम इंस्ट्रूमेंट (USD 6.5 बिलियन), कीमती और सेमी-कीमती पत्थर (USD 5.3 बिलियन), पेट्रोलियम प्रोडक्ट (USD 4.1 बिलियन), गाड़ी और ऑटो कंपोनेंट (USD 2.8 बिलियन), सोना और दूसरी कीमती मेटल की ज्वेलरी (USD 3.2 बिलियन), कॉटन के रेडीमेड कपड़े, एक्सेसरीज़ के साथ (USD 2.8 बिलियन), और लोहे और स्टील के प्रोडक्ट (USD 2.7 बिलियन) शामिल थे.

इंपोर्ट में कच्चा तेल (USD 4.5 बिलियन), पेट्रोलियम प्रोडक्ट (USD 3.6 बिलियन), कोयला, कोक (USD 3.4 बिलियन), कटे और पॉलिश किए हुए हीरे (USD 2.6 बिलियन), इलेक्ट्रिक मशीनरी (USD 1.4 बिलियन), एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट और पार्ट्स (USD 1.3 बिलियन), और सोना (USD 1.3 बिलियन) शामिल थे.अनुमान के मुताबिक, कैलेंडर साल 2024 में भारत से US सर्विसेज का इम्पोर्ट USD 40.6 बिलियन था, जिसमें कंप्यूटर/इन्फॉर्मेशन सर्विसेज़ का इम्पोर्ट USD 16.7 बिलियन और बिज़नेस मैनेजमेंट/कंसल्टिंग का इम्पोर्ट USD 7.5 बिलियन था.

दिल्ली: AI समिट में हंगामे पर भड़के बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल, बोले- ‘कांग्रेस एक विफल…’

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चांदनी चौक से बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने AI समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कथित आपत्तिजनक आचरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस घटना को अत्यंत शर्मनाक बताते हुए कांग्रेस को एक विफल राजनीतिक दल करार दिया है.

उनका कहना है कि जिस मंच पर देश के तकनीकी भविष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां इस तरह का व्यवहार राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ है.

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जब देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और तकनीकी नेतृत्व को लेकर गंभीर विमर्श कर रहा था, तब ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया यह “नंगा प्रदर्शन” न केवल अनुचित है, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय मंच की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला भी है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की हरकतें लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को प्रभावित कर सकती हैं.

कांग्रेस की दिवालिया मानसिकता उजागर

बीजेपी सांसद ने कहा कि यह आचरण उस राजनीतिक दिवालियापन को उजागर करता है, जो आज कांग्रेस की पहचान बन चुका है. उनके मुताबिक, विचार और नीति आधारित बहस पेश करने के बजाय कांग्रेस नाटक, उकसावे और अव्यवस्था की राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि यह व्यवहार राजनीतिक हताशा का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि पार्टी देश के युवाओं की आकांक्षाओं से पूरी तरह कट चुकी है.

राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल

खंडेलवाल ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लगातार चुनावी पराजयों के बावजूद पार्टी ने आत्ममंथन नहीं किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने रचनात्मक विपक्ष की भूमिका छोड़ दी है और अब केवल प्रदर्शन और सनसनी की राजनीति तक सिमट गई है. उनका कहना है कि विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों पर ठोस और सार्थक बहस करना है, न कि मंचों को बाधित करना.

भारत का युवा नवाचार चाहता है, विवाद नहीं

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारत का युवा अवसर, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. AI समिट देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक दृष्टि को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर था. ऐसे में उसे बाधित करने की कोशिश राष्ट्रीय प्रगति का अपमान है. उन्होंने कहा कि देश के युवा शोर-शराबे और कृत्रिम विवादों से अधिक सार्थक संवाद और ठोस नीति विकल्प की अपेक्षा रखते हैं.

जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत पर जोर

अपने बयान के अंत में खंडेलवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सशक्त और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. लेकिन जो कुछ AI समिट के दौरान देखने को मिला, वह विरोध नहीं बल्कि हताशा का प्रदर्शन था. उन्होंने कहा कि देश की जनता, विशेषकर युवा वर्ग, नेतृत्व से परिपक्वता और दूरदृष्टि की उम्मीद करता है, न कि अव्यवस्था और सनसनी की राजनीति की.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रेड डील पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ‘भारत के लिए कुछ नहीं बदला’

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ को रद्द करने के फैसले के 3 घंटे बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा.

ट्रंप ने कहा कि भारत उस पर पहले से तय किया गया टैरिफ देता रहेगा, जबकि अमेरिका कोई टैरिफ नहीं देगा. अमेरिका और भारत के बीच हुए ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों के आयात पर 18 परसेंट की दर से टैरिफ लगाने की बात कही थी, जो पहले लगाए गए 50 परसेंट के टैरिफ से कम है.

हालांकि, यहां दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी मानने के बाद ट्रंप का भारत के लिए यह कहना हैरान कर देने वाला लगता है. वह भी तब जब कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने दुनियाभर पर 10 परसेंट के ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया.

भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रंप ने क्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, ”कुछ नहीं बदलेगा. वो टैरिफ देते रहेंगे और हम टैरिफ नहीं देंगे. भारत के साथ टैरिफ देने को लेकर डील हुई और वो टैरिफ देते रहेंगे. यह पहले जैसा नहीं है. मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी एक बहुत अच्छे सज्जन व्यक्ति हैं, असल में एक महान इंसान हैं, लेकिन वह अमेरिका के मामले में उन लोगों से कहीं ज्यादा स्मार्ट हैं, जिनके वह खिलाफ थे. वे हमें, भारत को लूट रहे थे इसलिए हमने भारत के साथ एक डील की. यह अब एक सही डील है और हम उन्हें टैरिफ नहीं दे रहे हैं और वे टैरिफ दे रहे हैं. हमने थोड़ा पलटवार किया.”

क्या भारत पर कम होगा टैरिफ?

हालांकि, इस बीच ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने वाले पार्टनर्स को 10 परसेंट टैरिफ का ही सामना करना पड़ेगा. भले ही पहले हुई डील के तहत ज्यादा टैरिफ रेट पर ही सहमति क्यों न बनी हो. ऐसे में यह बात भारत पर भी लागू होती है.

इस बीच व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से AFP ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 10 परसेंट का ग्लोबल टैरिफ अस्थायी है क्योंकि ट्रंप प्रशासन पहले से तय हुए ज्यादा टैरिफ रेट को लागू करने के लिए कानूनी पैंतरे अपना सकता है.

‘पीएम मोदी फिर से करेंगे सरेंडर…’, टैरिफ पर US कोर्ट के फैसले के बीच राहुल गांधी ने साधा प्रधानमंत्री पर निशाना…

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर उठे विवाद ने अब भारत की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिए जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है.

राहुल ने आरोप लगाया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देश के हितों से समझौता किया गया है और सच्चाई अब सामने आ रही है.

ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द करते हुए कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह के शुल्क लगाने का अधिकार नहीं था. अदालत के फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि वह एक नए आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके तहत दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होगा.

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर सीधा वार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि ‘प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है, उनका धोखा अब सामने आ गया है. वह दोबारा बातचीत नहीं कर सकते, वे फिर से सरेंडर कर देंगे.’

कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में भारतीय हितों, खासकर किसानों और छोटे कारोबारियों, की अनदेखी की गई है.

पहले भी उठा चुके हैं ट्रेड डील का मुद्दा

यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने ट्रेड डील और टैरिफ के मुद्दे पर सरकार को घेरा है. इससे पहले भी वह कई बार संसद और सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं. बजट सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर जमकर राजनीतिक बयानबाजी और हंगामा देखने को मिला था.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी. कई सेक्टरों में मतभेद के बाद फरवरी की शुरुआत में सहमति बनी और 7 फरवरी को समझौते का ऐलान किया गया. समझौते के तहत भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की अनुमति दी गई, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में टैरिफ में कोई विशेष छूट नहीं दी गई. सरकार का दावा है कि किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है.

AI समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर मायावती की पहली प्रतिक्रिया, जानें- BSP चीफ ने क्या कहा?

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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपेक्ट समिट में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न होकर प्रदर्शन को अशोभनीय बताया और कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समिट के दौरान ऐसा आचरण करना चिंता की बात है.

यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर मायावती की प्रतिक्रिया

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा- ‘नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’, जिसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था, इस दौरान जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताये जा रहे हैं, वह अति-अशोभनीय व निन्दनीय है.

अगर यह सम्मेलन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, किन्तु समिट के दौरान ऐसा आचरण करना यह चिन्ता की बात है अर्थात अपने देश की गरिमा व इमेज को ना बिगाड़ा जाये तो यह उचित होगा.’

एआई समिट में किया था प्रोटेस्ट

बता दें कि शुक्रवार 20 फरवरी को दिल्ली में एआई समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस के 8-10 कार्यकर्ताओं ने भारत मंडपम परिसर में घुसकर भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. कार्यकर्ताओं ने टीशर्ट उतार कर परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की और ‘पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ के नारे लगाए.

इस घटना के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया था. जिसके बाद वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने सभी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और तुरंत उन्हें इवेंट से दूर ले जाया गया.

इस घटना को लेकर सियासत भी गरम हो गई है. भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला. बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि वो एंटी नेशनल पार्टी है. जहां दुनिया भर में एआई समिट की तारीफ़ हो रही है वहीं राहुल गांधी की कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. बीजेपी आज देशभर में इसके विरोध में प्रदर्शन भी कर रही है.

AI समिट के बीच हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला का बड़ा बयान, ‘नेताओं की जगह वैज्ञानिकों को…’

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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने तकनीक और अध्यात्म के संगम पर जोर देते हुए विपक्ष को जमकर निशाने पर लिया है. राष्ट्र कथा में बतौर कथा वाचक पहुंचे जगद्गुरु रामभद्राचार्य मौजूद रहे, इस दौरान राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि AI आज पूरे विश्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है और भारत इस क्षेत्र में अब चीन की बराबरी करने की स्थिति में आ गया है.

उन्होंने तकनीक के विरोध को प्रगति में बाधक बताया है.

‘तकनीकी उपलब्धि का श्रेय वैज्ञानिकों को दें’

कांग्रेस द्वारा डिजिटल इंडिया और AI का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिए जाने के दावों पर राज्यपाल ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि देश की किसी भी तकनीकी उपलब्धि का श्रेय राजनेताओं के बजाय उन वैज्ञानिकों को मिलना चाहिए, जिन्होंने अपनी मेहनत से देश को इस मुकाम पर पहुंचाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रेय की राजनीति के बजाय प्रतिभा के सम्मान की संस्कृति विकसित होनी चाहिए.

राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं के वादों (रेवड़ी कल्चर) पर बोलते हुए राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए लोगों को ‘रेवड़ी’ यानी मुफ्त की चीजें देने के बजाय ‘नौकरी और स्वरोजगार’ के अवसर प्रदान करने चाहिए. युवाओं के हाथ में कौशल होगा तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा.

पीएम मोदी की तारीफ की

मंच से अपने संबोधन में शिव प्रताप शुक्ला ने विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने कहा, “अगर किसी को राजनीति ही करनी है, तो राम के नाम पर करो, क्योंकि राम के बिना भारत की कल्पना भी संभव नहीं है. राम हैं तो सब कुछ है.”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व उन्हें ‘बॉस’ के रूप में स्वीकार कर रहा है. उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का श्रेय प्रधानमंत्री की इच्छाशक्ति को देते हुए कहा कि हम सभी को राम के मार्ग पर चलना चाहिए, तभी हमारे सभी संकल्प और कार्य पूर्ण होंगे.

Social Media Ban: इन देशों में बच्चों के लिए बैन है Insta-Facebook, जानें भारत में क्या है नियम?

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ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. यह कानून दिसंबर 2025 में पूरी तरह से लागू हुआ और इसके तहत प्लेटफार्म ने उम्र वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू किया गया.

जो कंपनियां इसका पालन नहीं करती उन्हें भारी पेनल्टी लग सकती है.

फ्रांस ने भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति के बिना सोशल मीडिया एक्सेस पर बैन लगाकर कड़ा रुख अपनाया है. फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने बच्चों की डिजिटल सेफ्टी पर दुनिया भर में मजबूत सहयोग की खुलकर वकालत की है और भारत समेत कुछ दूसरे देशों को भी ऐसे ही सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए कहा है.

कई यूरोपियन देश इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. डेनमार्क ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर रोक लगा दी है. इसी के साथ नॉर्वे ने अपनी मिनिमम उम्र सीमा बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव दिया है. स्पेन 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है.

भारत में अभी इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे प्लेटफार्म इस्तेमाल करने वाले बच्चों पर देशभर में कोई बैन नहीं है. ज्यादातर प्लेटफार्म ने अपनी मिनिमम उम्र की जरूरत 13 साल तय की है. हालांकि भारत सरकार ने मिनिमम उम्र को 16 साल तक बढ़ाने और बड़े कंप्लायंस स्टैंडर्ड लाने पर सलाह मशविरा शुरू कर दी है.

डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटक्शन एक्ट बच्चों के पर्सनल डाटा को प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की सहमति को जरूरी बनाता है. यह कानून पहले से ही नाबालिगों की ऑनलाइन प्राइवेसी को सुरक्षित रखने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाता है.

सरकार नाबालिगों को नियमों को बायपास करने से रोकने के लिए उम्र वेरिफिकेशन के सख्त तरीकों पर विचार कर रही है. इसके अलावा पॉलिसी बनाने वाले बच्चों के लिए एडिक्टिव डिजाइन फीचर जैसे कि एंडलेस स्क्रॉलिंग और एल्गोरिथम ड्रिवन कंटेंट लूप को लिमिट करने पर चर्चा कर रहे हैं.