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UPI ATM: कार्ड की झंझट खत्म! अब UPI के जरिए ATM से निकलेगा पैसा, जानिए कैसे!

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UPI Using ATM: भारत का पहला UPI एटीएम लॉन्च हो चुका है. हिताची लिमिटेड की सहायक कंपनी हिताची पेमेंट सर्विसेज ने UPI ATM को लॉन्च किया है. इस सुविधा की मदद से अब बिना डेबिट या एटीएम कार्ड के आप यूपीआई के जरिए पैसा एटीएम से निकाल पाएंगे.

भारत के लोगों को यह सुविधा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से UPI एटीएम का व्हाइट लेबल एटीएम (WLA) के रूप में इसे पेश किया गया है. यह एटीएम यूजर्स को मल्टीपल अकाउंट से यूपीआई ऐप के जरिए पेमेंट करने की सुविधा देती है.

फ्रॉड रोकने में होगी मददगार

यह नॉन बैंकिंग संस्थाओं की ओर से संचालित होगा. यह केवल नया अनुभव ही नहीं देगा, बल्कि बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पैसा निकालने की लिमिट बढ़ा देगी. इसके अलावा, यूपीआई एटीएम को कार्ड स्किमिंग जैसे वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक सकारात्मक उपाय के रूप में देखा जा रहा है.

यूपीआई एटीएम कैसे करेगा काम

मुंबई के ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में रविसुतंजनी कुमार की ओर से एक वीडियो डेमो शेयर किया गया है, जिसमें यूपीआई एटीएम को एक टच पैनल के रूप में देखा जा सकता है. दाईं ओर यूपीआई कार्डलेस कैश पर टैप करने से एक और विंडो ओपन होता है, जिसमें कैश रकम का विकल्प जैसे 100 रुपये, 500 रुपये, 1000 रुपये, 2000 रुपये, 5000 रुपये और अन्य राशियों के लिए एक बटन ​दिया है. इसका चयन करने के बाद स्क्रीन पर क्यूआर कोड आता है.

अब किसी भी यूपीआई ऐप का उपयोग करके आपको स्कैन करना होगा. कोड स्कैन होने के बाद यूजर्स को अपना वांछित बैंक अकाउंट चुनने और ​कंफर्म पर क्लिक करने के लिए कहा जाएगा. अब कैश निकालने के लिए पुष्टि करना होगा. इसके बाद यूपीआई पिन दर्ज करना होगा. ऐसा करने के बाद यूपीआई संदेश भेजा जाएगा कि ट्रांजेक्शन होने जा रहा है. इसके बाद एटीएम आपका पैसा निकाल देगा.

UPI एटीएम एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर बनाया गया है. अब तक हिताची पेमेंट सर्विसेज एकमात्र WLA ऑपरेटर है, जो कैश जमा भी प्रदान करता है और 3000 से अधिक एटीएम स्थानों के नेटवर्क तक पहुंच रखता है.

Jawan Release Celebration: ‘जवान’ का तूफान, शाहरुख खान की एंट्री पर झूम उठे फैंस, वायरल हो रहे वीडियोज

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Jawan: बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की मचअवेटेड फिल्म ‘जवान’ का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ. एटली की फिल्म आज 7 सितंबर को पूरे देशभर में रिलीज हो चुकी है. शाहरुख के चाहने वाले ‘जवान’ का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने के लिए बताब थे.

फिल्म की जबरदस्त एडवांस बुकिंग के बाद आलम ऐसा है कि बीती रात से ही थिएटर्स के बाहर भयंकर भीड़ देखी जा रही है. इतना ही नहीं, शाहरुख के फैंस उनके फिल्म को सेलिब्रेट करने के लिए थिएटर्स के बाहर ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचे हैं.

शाहरुख की एंट्री पर झूमे फैंस
वहीं थिएटर के अंदर के कुछ वीडियोज सामने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इन वायरल वीडियोज में फैंस अपने चहेते सुपरस्टार की एंट्री पर खुशी से झूमते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं शाहरुख खान के लिए फैंस की दीवानगी देखने लायक है. पूरा थिएटर शाहरुख की एंट्री पर झूमता हुआ नजर आ रहा है. थिएटरर्स में लोग अपनी सीटों से उठकर फिल्म के गानों पर डांस करते हुए नजर रहे हैं.

ओपनिंग पर करेगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई
‘पठान’ के बाद शाहरुख खान को एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन करते हुए देखना फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है. इस फिल्म की चर्चा पूरे देशभर में है. वहीं जन्माष्टमी के साथ-साथ लोगों के बीच किंग खान का भी क्रेज साफ नजर आ रहा है. कई लोग तो कृष्ण भगवान की फोटो के साथ शाहरुख की तस्वीर लगाए थिएटर के बाहर घूम रहे हैं. इन सब से बीच एक चीज तो साफ है कि फिल्म अपने ओपनिंग डे पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली है.

MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस नेता के जरिए दांव खेलेगी कांग्रेस, होंगी 40 से ज्यादा रैलियां…

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MP: मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जोकि लेकर कांग्रेस ने कमर कस ली है. जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं.

बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी का पूरा फोकस मध्य प्रदेश पर ही होगा. जानकारी के अनुसार चुनावी समर में प्रियंका गांधी प्रदेश में 40 से ज्यादा रैली और सभाएं करेंगी. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश चुनाव को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूरी प्लानिंग बना ली है. इस प्लानिंग के तहत कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है.

बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी मध्य प्रदेश में 40 से ज्यादा सभा और रैली करेंगी. माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी हर दूसरे दिन मध्य प्रदेश में रहेंगी, इस दौरान वे एक दिन में 2 से 3 रैलियां करेंगी. कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की प्लानिंग बनी है जिसके अनुसार राहुल गांधी को राजस्थान और तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई है. जबकि प्रियंका गांधी को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रियंका गांधी के साथ कई बार राहुल गांधी भी साथ नजर आएंगे. इस दौरान प्रियंका गांधी के साथ राहुल गांधी भी जनसभा को संबोधित करेंगे. बताया जा रहा है कि चुनावों की घोषणा होते ही प्रियंका गांधी के मध्य प्रदेश दौरे शुरु हो जाएंगे.

प्रियंका ने दी है 5 गारंटी
बता दें मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने 5 गारंटी दी हैं. इन गारंटियों में हर परिवार को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, ग्रेजुएट बेरोजगार को 3 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता और डिप्लोमा होल्डर्स को 1500 रुपए महीने भत्ता, परिवार की एक महिला को 2 हजार रुपए के अलावा गरीब व्यक्ति को हर महीने 10 किलो मुफ्त अनाज, महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त सफर शामिल है.

RSS चीफ मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान पर टीएस सिंहदेव बोले- उनका अनुभव ठीक नहीं रहा…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता और डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने प्रतिक्रिया दी है. डिप्टी सीएम ने बिहार चुनाव से पहले मोहन भागवत के बयान का जिक्र किया है.

उन्होंने यह भी मांग की है कि केंद्र सरकार को विशेष सत्र का एजेंडा बताना चाहिए.

डिप्टी सीएम ने मोहन भागवत के बयान पर कहा कि बिहार चुनाव से पहले भागवत जी का बयान आया था उनका अनुभव ठीक नहीं रहा. विशेष सत्र के मुद्दे पर सिंहदेव ने कहा कि हम लोग इतंजार कर रहे है की कहीं संविधान में फेरबदल न कर दिया जाये ये लोग कब क्या करेंगें पता नहीं. सरकार को सत्र का एजेंडा बताना चाहिए.

बता दें आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि जबतक समाज में भेदभाव है, तबतक आरक्षण जारी रहना चाहिए. उन्होंने महाराष्ट्र स्थित नागपुर में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि भेदभाव भले ही नजर नहीं आये लेकिन यह समाज में व्याप्त है.

उन्होंने कहा, ‘सामाजिक व्यवस्था में हमने अपने बंधुओं को पीछे छोड़ दिया. हमने उनकी देखभाल नहीं की और यह 2000 सालों तक चला. जबतक हम उन्हें समानता नहीं प्रदान कर देते हैं तबतक कुछ विशेष उपचार तो होने ही चाहिए और आरक्षण उनमें एक है . इसलिए आरक्षण तबतक जारी रहना चाहिए जबतक ऐसा भेदभाव बना हुआ है. संविधान में प्रदत्त आरक्षण का हम संघवाले पूरा समर्थन करते हैं.’

सरसंघचालक ने कहा कि यह केवल वित्तीय या राजनीतिक समानता सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान देने के लिए भी है. उन्होंने कहा कि भेदभाव झेलने वाले समाज के कुछ वर्गों ने 2000 सालों तक यदि परेशानियां उठायी हैं तो ‘क्यों न हम ( जिन्होंने भेदभाव नहीं झेली है) और 200 साल कुछ दिक्कतें उठा सकते हैं?’

घोसी का वोटिंग ट्रेंड क्या कहता है? जानिए 9 फीसदी कम मतदान से बीजेपी या सपा किसे फायदा और नुकसान

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उत्तर प्रदेश के घोसी और उत्तराखंड के बागेश्वर सहित 6 राज्यों की 7 विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है. अब नतीजों का इंतजार है. ऐसे में सभी की निगाहें घोसी उपचुनाव पर लगी हैं, क्योंकि एनडीए बनाम INDIA गठबंधन की लड़ाई है.

एनडीए से बीजेपी के दारा सिंह चौहान और विपक्षी गठबंधन INDIA से सपा के सुधाकर सिंह की बीच सीधा मुकाबला है. घोसी उपचुनाव के वोटिंग पैटर्न को देखें तो 2022 के चुनाव की तुलना में सवा 8 फीसदी कम वोटिंग हुई है. ऐसे में कम वोटिंग बीजेपी के दारा सिंह के लिए चिंता बढ़ाएगी या फिर सपा के सुधाकर के लिए संजीवनी?

घोसी विधानसभा उपचुनाव में मतदाताओं का उत्साह नहीं दिखा और 50.30 फीसदी ही वोटिंग हो सकी. चुनाव आयोग के लिहाज से 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में घोसी सीट पर 58.53 फीसदी मतदान हुआ था. इस लिहाज से देखें तो इस बार 8.23 फीसदी वोटिंग कम हुई है. कम मतदान किसके लिए टेंशन का सबब बनेगा ये तो शुक्रवार को मतगणना के दिन ही पता चल सकेगा. हालांकि, सपा और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन साथ ही कम वोटिंग के नफा और नुकसान का भी आकलन करने में जुटे हैं. ऐसे में दारा सिंह से लेकर सुधाकर सिंह की धड़कने बढ़ी हुई हैं.

घोसी का वोटिंग पैटर्न क्या कहता है?

घोसी विधानसभा उपचुनाव में 8.23 फीसदी कम वोटिंग हुई है, जिसे लेकर सपा और बीजेपी दोनों की चिंताए बढ़ी हुई हैं. वोटिंग पैटर्न और ट्रेंड को देखें तो राजनीतिक पंडित यह मानते हैं कि भारी मतदान और उनके बदलाव के संकेत होते हैं जबकि कम वोटिंग को सरकार और विधायक के प्रति मतदाताओं की नाराजगी के तौर पर देखा जाता है. हालांकि, घोसी सीट के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो उपचुनाव में हमेशा से 8 से 9 फीसदी कम ही वोटिंग रही है.

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर फागू चौहान विधायक बने थे, उस समय घोसी सीट पर 58.89 फीसदी वोटिंग हुई थी. फागू
चौहान ने राज्यपाल बनने के बाद विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया था, उसके बाद 2019 में हुए उपचुनाव में 51.93 फीसदी फीसदी वोटिंग हुई थी. इस तरह से उपचुनाव में 7 फीसदी कम मतदान रहा था. इस बार भी उपचुनाव में यही ट्रेंड दिखा है और करीब सवा 8 फीसदी वोटिंग कम हुई है.

भूमिहारों में दिखा कम उत्साह, मुस्लिमों की लंबी कतार

भूमिहार बहुल खुंखदवा और काछीकला में वोटिंग कम हुई है जबकि मुस्लिम बहुल जमालपुर और मिर्जापुर में मतदान काफी रही. इसी तरह मुस्लिम बहुल कोपागंज में कम वोटिंग रही तो राजभर और ओबीसी बहुल गांव धवरियासाथ में भी मतदाताओं में उत्साह नहीं दिखा. अगर ऐसे ही वोटिंग पैटर्न रहा तो बीजेपी के दारा सिंह चौहान की राह काफी मुश्किलों भरी हो सकती है.

2019 के उपचुनाव में बीजेपी के विजय राजभर जीतने में कामयाब रहे थे, लेकिन इस बार के उपचुनाव में बीजेपी ने दारा सिंह चौहान को उतारा था, जो सपा से 2022 में विधायक बने थे और बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने दारा सिंह के जरिए नोनिया कार्ड चला है, जो 2022 के चुनाव में सपा के साथ चला गया था. इसके अलावा राजभर वोटों को जोड़ने के लिए सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर को भी लगाया गया था. इस लिहाज से दारा सिंह चौहान अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे और साथ ही बीजेपी के सत्ता में होने का भी उन्हें लाभ मिलने की उम्मीद है.

उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी को लाभ

उपचुनाव में अक्सर देखा गया है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिलती है, इस लिहाज से दारा सिंह चौहान को जीत मिलने की उम्मीद दिख रही है, लेकिन घोसी के सियासी समीकरण और उनके बाहरी होने का खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ सकता है. सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह क्षेत्रीय हैं और 2012 में इस सीट से विधायक रह चुके हैं. इतना ही नहीं निर्दलीय लड़कर भी 60 हजार के करीब वोट हासिल करने में वो कामयाब रहते हैं. इतना ही नहीं सपा ने सवर्ण कैंडिडेट उतारकर ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार वोटों को भी साधे रखने की कवायद की है.

घोसी सीट पर जिस तरह से एक लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाता, 65 हजार यादव और 38 हजार राजपूत वोटर हैं, उसके चलते सुधाकर सिंह के लिए जीत की उम्मीद दिखती है और सपा भी इसी समीकरण के लिहाज पर जीत की आस लगाए हुए है, लेकिन वोटिंग के दौरान जिस तरह से सपा ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम और यादव समुदाय बहुल वाले बूथों पर वोटिंग डालने नहीं दिया गया है. ऐसे में करीब 8 फीसदी वोटिंग का कम होना, सपा के लिए चिंता बढ़ा सकती है.

बसपा के चुनाव न लड़ने का फायदा किसे?

घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा ने अपना कैंडिडेट नहीं उतारा जबकि इससे पहले तक हर चुनाव लड़ती रही है. 2017, 2022 के विधानसभा 2019 के उपचुनाव और उससे पहले भी बसपा अपना उम्मीदवार उतारती रही है. बसपा को औसतन करीब 55 हजार वोट मिलते रहे हैं, लेकिन मायावती घोसी सीट पर ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से ही कैंडिडेट लड़ाती रही है. ऐसे में बसपा के चुनावी मैदान में न होने से एक तरफ सपा को मुस्लिम वोटों के फायदा मिलने की उम्मीद दिख रही है तो दलित वोटों में बिखराव दिखा है. इस तरह से बसपा का वोट बैंक घोसी में किंगमेकर की भूमिका में है, जिसे साधने के लिए सपा और बीजेपी दोनों ने ही पूरी ताकत झोंकी थी. ऐसे में दलित वोटों के झुकाव घोसी सीट पर जीत की उम्मीद बना है.

Business Idea: कम खर्चे में शुरू करे पोल्ट्री फार्म का बिज़नेस के लिए मिलेंगी इतनी सब्सिडी,जाने पूरी डिटेल

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Business Idea: कम खर्चे में शुरू करे पोल्ट्री फार्म का बिज़नेस के लिए मिलेंगी इतनी सब्सिडी,जाने पूरी डिटेलआपको बतादे एक मुर्गी अपने 72 हफ्ते के व्यावसायिक जीवनकाल में 360 अंडे देती है. ये मुर्गियां 2 से 3 साल जीती है. जब अंडे नहीं मिलते तब भी इन मुर्गियां की अच्छे कीमत मिलती हैं।


इस बिज़नेस की बढ़ रही काफी डिमांड


Business Idea: जैसा की सबको पता है अंडा हाई प्रोटीन सोर्स माना जाता है। और यह पुरे विश्व में बड़ी तादात में खाया जाता है। और भारत में इसकी मांग दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे मे आप अगर बिज़नेस का सोच रहे है तो आपके लिए मुर्गी फॉर्मिंग का आईडिया एक दम सही रहेगा। जानिए कैसे शुरू करे पोल्ट्री फार्म का बिज़नेस।

सरकार के तरफ से मिलेंगी इतनी सब्सिडी


Business Idea: सरकार भी कर रही मदद पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही है. आप चाहें तो किसी बैंक से लोन लेकर या फिर पोल्ट्री के लिए कांट्रेक्ट फार्मिंग भी कर सकते हैं. इस तरह पोल्ट्री फार्म शुरू करने का खर्चा लगभग आधा हो जाता है. और सरकार आपको 35 प्रतिशत सब्सिडी भी प्रदान करती है।

बाजार में एक अंडे की कीमत होती है इतनी



Business Idea: आपकी जानकारी के लिए बतादे पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों से एक अंडा तैयार करने में करीब 3.50 रुपये से लेकर 4 रुपये तक की लागत आती है। इसमें मुर्गियों को दाना, उनकी देखभाल आदि शामिल है, वही बाजार में अंडे की कीमत की बात करे तो 5 से लेकर 10 रुपये तक की कीमत पर बिकता है. अंडे के दाम पूरी तरह से मुर्गी की प्रजाति पर निर्भर करते हैं. साधारण देसी मुर्गियों के अलावा कड़कनाथ का अंडा 30 रुपये प्रति पीस बिकता है.

पोल्ट्री फार्म बिज़नेस से कितना कमा सकते मुनाफा

Business Idea


Business Idea: एक अनुमान के मुताबिक 50000 की लागत के साथ पोल्ट्री फार्म शुरू करने पर आपको हर महीने में लगभग 3 लाख तक का मुनाफा हो सकता है। एक बार पोल्ट्री फार्म शुरू करने पर अगले कुछ महीने में आपको कमाई तो नहीं होगी पर जिसती मुर्गीया अंडे देना चालू करेंगे उस के अगले महीने से आप प्रति दिन लगभग 6000-10000 रुपये तक कमा सकते है।

MP Crime: नक्सली दंपति का एक और मददगार गिरफ्तार, NIA कोर्ट में पेश कर 9 सितंबर तक रिमांड पर

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नक्सली दंपति का एक और मददगार गिरफ्तार हुआ है। वहीं इससे पहले 26 अगस्त को एक और सहयोगी धनसिंह को मंडला से गिरफ्तार किया था। छेरमू सिंह को NIA की कोर्ट में पेश कर 9 सितंबर तक रिमांड पर लिया गया है।

ATS द्वारा 22 अगस्त को गोहलपुर क्षेत्र स्थित एक अस्पताल में ईलाज के दौरन 82 लाख के इनामी नक्सली अशोक रेड्डी और उसकी पत्नी रैमती को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद नक्सली दंपति को धन व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने व उन्हें जबलपुर लेकर आने के संबंध में जानकारी जुटाने के बाद एटीएस ने मंडला जिले के कालपी के पास से उनके नक्सली साथी धनसिंह को 26 अगस्त को मंडला से गिरफ्तार किया था।

इन तीनों से की गई पूछताछ के आधार पर ही साथी छेरमू सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी को सोमवार को एनआईए कोर्ट में पेश किया जाएगा। जहां से उसे 9 सितंबर तक की रिमांड पर लिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक़ पकड़ा गया नक्सलियों का मददगार साथी छेरमू राम छत्तीसगढ़, दुर्ग के लोहतरा ग्राम गुदुम का रहने वाला है। वह प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मऊ ईस्ट का सक्रिय सदस्य भी है। उसके नक्सली दंपति से संपर्क होने की सुचना के आधार पर गिरफ्तारी की गई है।

Gold: पत्नी के नाम पर खरीदा गोल्ड, क्या फ्यूचर में इसकी बिक्री से होने वाली इनकम पर पति को देना होगा टैक्स?

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Gold Price: भारत में सोने की खरीद को काफी अहम माना जाता है. त्योहारों के मौके पर देश में सोने की खरीद भी बढ़ जाती है. वहीं अब देश में आने वाले दिनों में धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहार भी आ रहे हैं, ऐसे में इन त्योहारों पर भी सोने की खरीद में इजाफा देखने को मिल रहा है.

इससे पहले आज हम आपको सोने को लेकर एक अहम अपडेट देने जा रहे हैं. वहीं कई लोग सोने को खरीदने के बाद उसकी ऊंचे दाम पर बेचकर मुनाफा भी कमाते हैं. वहीं किसी संपत्ति को खरीद के समय की कीमत से अधिक कीमत पर बेचने पर पूंजीगत लाभ टैक्स (Capital Gains Tax) लगता है. यह बात सोने की बिक्री पर भी लागू होती है. उदाहरण के लिए, यदि आप आज थोक में सोना खरीदते हैं और भविष्य में इसे ऊंची कीमत पर बेचते हैं, तो आप ऐसी बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे.

केपिटल गेन टैक्स

बहुत से लोग सोने की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स बचाने के तरीकों के बारे में जानने में रुचि रखते हैं. वहीं लोगों को मन में सवाल आता है कि अगर कोई आदमी अपनी पत्नी को सोने के आभूषण खरीदने के लिए पैसे देता है और बिल पत्नी के नाम पर बनता है. ऐसे में भविष्य में सोने की बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स कौन देगा? पति टैक्स देगा या पत्नी टैक्स देगी. आइए जानते हैं इसके बारे में…

क्या देना होगा टैक्स?

किसी व्यक्ति के जरिए अपने पति या पत्नी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर की गई संपत्ति पर उत्पन्न होने वाली इनकम को ऐसे व्यक्ति (यानी हस्तांतरणकर्ता) की आय के साथ जोड़ा जाएगा. बशर्ते कि ऐसा हस्तांतरण पर्याप्त प्रतिफल के विरुद्ध या तलाक के निपटान के हिस्से के रूप में नहीं किया गया हो या अलग रहने के समझौते के तहत न हो.

पूंजीगत लाभ

इसलिए, इस मामले में जहां एक आदमी सोने के आभूषण खरीदने के लिए अपनी पत्नी को पैसे देता है, उस पर क्लबिंग प्रावधान लागू होंगे और ऐसे आभूषणों के ट्रांसफर पर होने वाले किसी भी पूंजीगत लाभ को आदमी की आय के साथ जोड़ दिया जाएगा. सिर्फ सोना ही नहीं, अपनी पत्नी के नाम पर रियल एस्टेट संपत्ति खरीदने से किसी व्यक्ति को ऐसी संपत्ति की बिक्री के बाद उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ टैक्स देनदारी या इसे किराए पर लेने से अर्जित आय पर टैक्स देनदारी से कोई राहत नहीं मिलती है.

‘उदयनिधि के बयान पर सख्ती से जवाब देना होगा’…सनातन धर्म विवाद पर पहली बार बोले PM मोदी

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में होने जा रहे G-20 समिट से पहले मंत्रियों के साथ बैठक की और उनको कुछ खास हिदायतें दीं। पीएम मोदी ने सनातन धर्म पर हो रहे विवाद पर कहा कि उदयनिधि स्टालिन को उचित जवाब देना होगा।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि उदयनिधि के सनातन धर्म वाले बयान पर सही से जवाब दें। साथ ही पीएम मोदी ने मंत्रियों से इंडिया बनाम भारत पर कुछ नहीं बोलने को कहा है।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि G-20 समिट के दौरान VIP क्लचर को न अपनाएं और जिसको जो ड्यूटी दी गई है वहां मंत्री समय पर पहुंचें। बता दें कि तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को लेकर दिए अपने बयान के कारण देशभर में निशाने पर है। उदयनिधि ने एक सम्मेलन में कहा था कि सनातन धर्म डेंगू, मलेरिया की तरह है जिसे मिटाना जरूरी है। उदयनिधि ने कहा कि मच्छरों, डेंगू, मलेरिया और कोरोना की तरह ही सनातन धर्म को बढ़ने से रोकना है।

कांग्रेस का दावा- साढ़े तीन साल में 67,000 रेल गाड़ियां हुईं कैंसिल अब पार्टी करेगी रेल रोको आंदोलन

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Politics on train cancellation: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव(Chhattisgarh assembly election 2023) के पहले कांग्रेस (Congress)पार्टी रेलवे के जरिए बीजेपी (BJP)को घेरने की तैयारी में है.

कांग्रेस ने 13 सितंबर को पूरे प्रदेश रेल रोकने(Train Stop) का एक्शन प्लान बनाया है. इसके जरिए लगातार छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेन कैंसिल होने पर कांग्रेसी विरोध जताएंगे. इसके अलावा कांग्रेस ने दावा किया है कि साढ़े तीन साल में 67 हजार से अधिक ट्रेन कैंसिल(Train cancel) की गई है. केंद्र सरकार पैसेंजर ट्रेन(passenger train) की जगह मालगाड़ी चला रही और ये रेलवे को निजी हाथ में सौंपने का षड्यंत्र है.

13 सितंबर को छत्तीसगढ़ के सभी रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन
दरअसल कांग्रेस ने रेलवे के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है. इसके अनुसार इसी महीने 9 सितंबर से कांग्रेस का आंदोलन शुरू हो जाएगा.सबसे पहले 9 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में पत्रकारवार्ता के बाद रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने जाएंगे.10, 11 और 12 सितंबर को पाम्पलेट-पोस्टर वितरण और चस्पा कार्यक्रम रखा गया है. इसके बाद यदि केंद्र सरकार नहीं मानी तो 13 सितंबर को प्रदेश के सभी रेलवे स्टेशनों पर रेल रोको आंदोलन किया जायेगा. इसको लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सभी जिला कांग्रेस कमेटी को निर्देश दे दिया है.

कांग्रेस का दावा साढ़े 3 साल में 67 हजार से अधिक ट्रेन कैंसिल
कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया है कि पिछले साढ़े तीन साल में 67 हजार 382 ट्रेनों को रद्द किया गया है. इस आंकड़े पीछे उन्होंने आरटीआई से प्राप्त जानकारी को आधार बताया है. उन्होंने मीडिया से कहा कि साल 2020 में 32757 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2021 में 32151 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2022 में 2474 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2023 में (अप्रैल माह तक) 208 ट्रेनें निरस्त की गई और बीते अगस्त महीने में 24 ट्रेनें रद्द की गई है. ये सभी ट्रेन छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनें है और येन मौके पर कैंसिल कर दी जाती है जब रक्षाबंधन, दीवाली, शीतकालीन और शादी-ब्याह के समय खासकर.

कांग्रेस का आरोप रेलवे को निजी हाथ में सौंपने की साजिश
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेन लगातार कैंसिल होने के पीछे कांग्रेस ने कारण बताया कि यात्री ट्रेनों को जानबूझकर रद्द किया जाता है, कभी कोयले के आपूर्ति के नाम पर, कभी कोई और कारण बता कर यह विश्वसनीय यात्री सेवा भारतीय रेल को बदनाम करने की साजिश है ताकि लोग रेलवे से ऊब जाये और रेल को भी मोदी अपने उद्योगपति मित्र अडानी के हवाले कर सके. मोदी सरकार रेलवे की यात्री सुविधाओं को समाप्त कर इसे सिर्फ मालवाहक बनाना चाहती है और बाद में रेल को निजी हाथों में सौंपा जा सके इसका रास्ता बना रही है. ऐसा इसलिये कि यात्री ट्रेनों की अपेक्षा माल भाड़े में रेलवे को 300 से 400 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा मिलता है.

यात्री कोयले के कारण खामियाजा भुगत रहे है ?
कांग्रेस ने ये भी दावा किया है कि बिलासपुर रेलवे जोन जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ आता है यहां से केवल माल भाड़े से केंद्र की मोदी सरकार 20 हजार से 22 हजार करोड रुपए हर साल कमाती है. लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता को रेलवे की सुविधा नहीं दे रही है. बीजेपी के 9 लोकसभा सांसद मौन बैठे है. वहीं बीजेपी की तरफ से ट्रेन कैंसिल होने के पीछे मेन्टेनेंस और रेलवे लाइन को अपडेट करने का दावा किया जाता है. इसपर भी कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि ट्रेन मेन्टेनेंस के कारण ट्रेनों को रद्द किया गया है तो फिर उसी रेलवे ट्रेक पर सवारी ट्रेन से 50 गुना ज्यादा वजनी मालगाड़ियों का परिचालन कैसे किया जा रहा है. इसके पीछे कांग्रेस ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती रत्नगर्भा है.हमारे यहां कोयले का प्रचुर भंडार है. इसका मतलब यह तो नहीं कि खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा.