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Ek Desh Ek Chunav: जून में ही लिख दी गई थी ‘एक देश एक चुनाव’ की स्क्रिप्ट, क्यों रामनाथ कोविंद रहे सरकार की पसंद

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What is One Nation One Election: संसद के विशेष सत्र के ऐलान के साथ ही ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब खबर है कि सरकार ने इसकी पटकथा जून की शुरुआत से लिखना शुरू कर दी थी।

साथ ही इस पूरी प्रक्रिया में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बड़ी भूमिका निभाते नजर आए। बहरहाल, इससे जुड़ा बिल सत्र में पेश होगा या नहीं, यह अब तक तय नहीं है। लेकिन माना जा रहा है कि अगर देश में एक ही चुनाव के फैसले पर मुहर लगती है, तो विपक्ष को बड़ा झटका लग सकता है।

भारत के नए संसद भवन के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोविंद से मुलाकात की थी। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉक्टर पीके मिश्रा भी मौजूद थे। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस बैठक में ही एक देश एक चुनाव पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई थी। अटकलें हैं कि 18 सितंबर से शुरू रहे पांच दिवसीय संसद सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है।

कोविंद की क्यों?
शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर पूर्व राष्ट्रपति के नाम ऐलान कर दिया गया। समिति उनकी अगुवाई में काम करेगी। इसके बाद सदस्यों की भी घोषणा कर दी गई थी। अब सवाल यह भी है कि सरकार ने कोविंद के नाम पर ही मुहर क्यों लगाई? इसकी भी कई वजहें गिनाईं जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति जटिल कानूनी मामलों को आसानी से संभाल सकते हैं।

साथ ही उन्होंने पीएम मोदी का भी भरोसेमंद माना जाता है। रविवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति से जुड़े कामों को लेकर मुलाकात की थी। खबर है कि पूर्व राष्ट्रपति बीते तीन महीनों में कम से कम 10 राज्यपालों से मुलाकात कर चुके हैं।

विपक्ष के लिए झटका कैसे
कहा जा रहा है कि यह विपक्ष को भी परेशान कर सकता है। दरअसल, अगर एक देश एक चुनाव होते हैं, तो उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों के लिए गठबंधन मुश्किल हो सकता है। साथ ही यही स्थिति आप और कांग्रेस के बीच पंजाब और दिल्ली में भी बन सकती है। इधर, समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश चुनाव में कुछ सीटों पर पहले ही उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है।

जी20 में भी अफ्रीकी देशों पर पीएम मोदी का फोकस, चीन को यूं झटका देने का है प्लान

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राजधानी दिल्ली में जी20 की औपचारिक बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने वाले हैं। शुक्रवार को वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और इसके बाद डिनर का आयोजन होगा।

वहीं पीएम मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और मॉरिशस के पीएम प्रविंद जुगनाथ के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। रविवार को वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली असौमानी के साथ मीटिंग करने वाले हैं। असौमानी अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में जी20 सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।

अफ्रीकी संघ को पीएम मोदी ने दी अहमियत
जी20 सम्मेलन में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों और अफ्रीकी संघ को पीएम मोदी ने काफी अहमियत दी है। कोरोना महामारी के बाद अफ्रीकी देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं अफ्रीका के कई देश चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट रोड के तहत भी आते हैं और उनपर चीन का काफी कर्ज हो गया है। उन देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चीनी बैंकों ने पैसा लगाया है और अब वे देश बोझ तले दब गए हैं। मेजबान के तौर पर पीएम मोदी इस दौरान काफी व्यवस्त रहने वाले हैं। फिर भी उन्होंने कई मेहमानों से मिलने और द्विपक्षीय वार्ताओं को समय फिक्स किया है।

किन मुद्दों पर होगी चर्चा
जी20 सम्मेलन और अलग से होने वाली मुलाकातों में जलवायु परिवर्तन और रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा अहम हो सकता है। जी20 का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास होता है। यूक्रेन का मुद्दा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से अहम है। इसके अलावा कोयला बनाम अन्य खनिज ईंधन को लेकर भी चर्चा होने वाली है। पर्यावरण के लिहाज से ग्रीन एनर्जी पर बल दिया जाना जी20 सम्मेलन का बड़ा टॉपिक होगा। वहीं खानपान में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के मामले पर भी चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस दक्षिणी दुनिया यानी अफ्रीकी देशों पर रहने वाला है। कोरोना महामारी के बाद खराब होती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दुनियाभर के देशों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। भारत इसपर अपने विचार रख सकता है और जी20 देशों से अफ्रीकी देशों की मदद की भी अपील कर सकता है ताकि वहां राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता लाई जा सके।

देश की सबसे सुरक्षित 5 गाड़ियों की लिस्ट, सभी को मिले हैं 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग

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क्या आप भी नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं? अगर हां तो आपको ऐसे गाड़ी खरीदनी चाहिए जो सेफ्टी के लिहाज से काफी अच्छा हो। इसलिए आपको इस खबर के माध्यम से उन गाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें सेफ्टी के लिहाज से 5 स्टार रेटिंग मिली हुई है।

Volkswagen Virtus

जर्मन ऑटो कंपनी Volkswagen की ये कार हमारी सूची में प्रथम स्थान पर है। Volkswagen Virtus और Skoda Slavia भारत की पहली सेडान बन गई हैं जो ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5 स्टार की रेटिंग लेकर आई है। इन कारों को वयस्कों और बच्चों दोनो की ही सुरक्षा के लिए 5-स्टार रेटिंग मिली है। वर्टस ने एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन टेस्ट में 34 में से 29.71 अंक और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन टेस्ट में 49 में से 42 अंक हासिल किए हैं।

Skoda Kushaq

भारत में सबसे सुरक्षित SUVs भी जर्मन कार निर्माता फॉक्सवैगन और उसके चेक पार्टनर स्कोडा ही पेश करती है। Taigun कॉम्पैक्ट SUV ने पिछले साल ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार स्कोर किए थे। Volkswagen Taigun को वयस्कों और बच्चों दोनो की ही सुरक्षा के लिए 5-स्टार रेटिंग मिली है। आपको बता दें कि 71.64 अंकों के समग्र सुरक्षा स्कोर के साथ Taigun भारत में बिकने वाली सबसे सुरक्षित SUV कार है।

Mahindra Scorpio N

महिंद्रा स्कॉर्पियो N को भी सेफ्टी के लिहाज से 5 स्ट़ार रेटिंग मिली है। पिछले साल महिंद्रा की ये सबसे बड़ी लॉन्चिंग में से एक थी। कीत की बात करें तो स्कॉर्पियों की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 12 लाख 73 हजार रुपये से लेकर 24 लाख 3 हजार रुपये तक है।

Tata Punch

टाटा मोटर्स ने हाल ही में भारत में अपनी सबसे छोटी एसयूवी पंच को पेश किया है। लेकिन अपने लॉन्च से पहले ही यह देश की सबसे सुरक्षित एसयूवी बन गई थी और टाटा पंच को ग्लोबल एनकैप से सुरक्षा के लिए पूरे 5 स्टार्स की रेटिंग हासिल हुई। इसे एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए फाइव-स्टार सेफ्टी रेटिंग (16.453) और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए फोर-स्टार रेटिंग (40.891) मिली। जनवरी 2020 में अल्ट्रोज और दिसंबर 2018 में नेक्सॉन और 2021 टिगोर ईवी के बाद यह सुरक्षा मान्यता प्राप्त करने वाली टाटा का तीसर व्हीकल है।

टाटा Altroz

टाटा मोटर्स की तरफ से आने वाली प्रीमियम हैचबैक कार अल्ट्रोज का नाम भी इस लिस्ट में आता है। अपने क्रैश टेस्ट के दौरान ग्लोबल एनकैप द्वारा एडल्ट ऑक्यूपेंट के लिए इसे फाइव-स्टार की रेटिंग और चाइल्ड ऑक्यूपेंट के लिए थ्री-स्टार की रेटिंग प्राप्त हुई थी। सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्ट्रोज में एक स्थिर संरचना और फुटवेल क्षेत्र, सिर और गर्दन की सुरक्षा, आगे की सीटों पर दो लोगों के लिए बेहतरीन सुरक्षा फीचर दी गई है।

हरीश साल्वे ने 68 की उम्र में रचाई तीसरी शादी तो भड़क गए KRK…

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“हरीश साल्वे ने 68 की उम्र में रचाई तीसरी शादी तो भड़क गए KRK, बोले- मुस्लमानों को…”><“वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे की शादी की कई तस्वीरें सामने आई हैं। साल्वे ने 68 साल की उम्र में तीसरी शादी कर ली है। अब इस पर केआरके ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और देश के सबसे महंगे वकीलों में शुमार हरीश साल्वे के 68 की उम्र में तीसरी बार शादी करने की खबरें सामने आ रही है। हरीश साल्वे ने त्रीना नाम की महीला से शादी की है। वह ब्रिटिश मूल की हैं। हरीश साल्वे की शादी में शादी में नीता अंबानी, ललित मोदी और उज्ज्वला राउत समेत करीबी दोस्त और परिवार के लोग शामिल हुए। हरीश साल्वें की शादी की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। लोग केंद्र सरकार की नवगठित वन नेशन-वन इलेक्शन कमेटी के सदस्य साल्वे को बधाईयां देते नजर आ रहे हैं। लेकिन इसी बीच बॉलीवुड एक्टर और फिल्म क्रिटिक कमाल राशिद खान ने साल्वे की तीसरी शादी पर टिप्पणी की है। अब एक्टर का यह कमेंट काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

कमाल राशिद खान ने हरीश साल्वे की शादी का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि “मुसलमानों को बदनाम किया जाता है। मजे ये लोग ले जाते हैं। वकील हरीश साल्वे ने तीसरी शादी कर ली है।” अब केआरके के ट्वीट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि “छुपाकर गर्लफ्रेंड रखने से अच्छा है शादी कर लो। साल्वे जी ने बिल्कुल सही किया है।

सुनील नाम के यूजर ने लिखा कि “मुस्लमानों को बदनाम करने के लिए उनका नाम भी तो होना चाहिए।” एक यूजर ने लिखा कि “हरीश साल्वे की शादी में फर्क हैं। साल्वे ने तीसरी शादी पहली दो पत्नियों को तलाक देकर की है। मुस्मिल एक साथ तीन रखते हैं।”</p>

हरीश साल्वे की 38 साल चली थी पहली शादी<>बता दें कि हरीश साल्वे की पहली शादी 38 सालों तक चली थी। उनकी पहली पत्नी का नाम मीनाक्षी था। साल 2020 में दोनों अलग हो गए थे। इस शादी से उनकी दो बेटियां हैं। मीनाक्षी से अलग होने के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने ब्रिटिश कलाकार कैरोलिन से दूसरी शादी की थी। दोनों ने अक्टूबर 2020 में शादी कर ली थी।</

इन मामलों में निभा चुके हैं अहम भूमिका<>हरीश साल्वे कई हाई-प्रोफाइल केस का हिस्सा रह चुके हैं।<

जानिए,देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली शराब ब्रांड के बारे में

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भारत में वाइन की बिक्री दिन बा दिन बढ़ती जा रही है और यह कई वाइन प्रेमियों का पसंदीदा बन गया है।शराब पीने का शौक सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी मशहूर है।शराब का सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक है।भारत में कई व्हिस्की ब्रांड है जो बिक्री के मामले में आगे है।

जानिए,देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली शराब ब्रांड के बारे में

भारतीय ब्रांडो में नंबर एक : मेक्डॉवेल्स
व्हिस्की के मामले में भारत का एकमात्र ब्रांड मेक्डॉवेल्स दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला व्हिस्की ब्रांड है।भारतीय ब्रांड यूनाइटेड व्हीकल्स द्वारा निर्मित है और प्रति वर्ष 2776.3 मिलियन लीटर बेचता है।यह अपनी उच्च गुणवत्ता और अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है।

धिकारी की पसंद
ऑफिसर चॉइस भारत में एक और प्रसीद व्हिस्की ब्रांड है जो हर साल 275.4 मिलियन लीटर बेचता है।यह ब्रांड एलाइड ब्लेंडर्स एन्ड डिस्टलरीज द्वारा बनाया गया है और यह उनके मानव क्ष्रम और क्ष्रम से बना है।

इंपीरियल ब्लू
भारतीय ब्रांड इंपीरियल ब्लू भी व्हिस्की सेकटर में अपनी पहचान बना रहा है।ब्रांड साल 239.7 मिलियन लीटर बेचता है और अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए मशहूर है।शराब की खपत की मात्रा सावधानीपूर्वक निर्धारित की जनि चाहिए,क्युकी ज्यादा शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है।अगर आप शराब का सेवन करते है तो मात्रा में सयम बनाये रखे।भारत में बिकने वाले व्हिस्की ब्रांड यहाँ की आर्थिक वृद्धि का प्रतीक हो सकते है,लेकिन सेहत के लिए सतर्क रहना भी जरुरी है।

केंद्र सरकार जल्द बढ़ाने वाली है सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता सामने आई जानकारी

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सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को लेकर एक और अपडेट सामने आया है. केंद्र सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंगाई भत्ता 3 फीसदी बढ़ने से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा होगा.

यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2023 से प्रभावी होगी.केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार महंगाई भत्ता 3 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. डीए में तीन फीसदी की बढ़ोतरी से महंगाई भत्ता बढ़कर 45 फीसदी हो जाएगा. केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को डीए में बढ़ोतरी का तोहफा मिलेगा. इस साल यह दूसरी बार होगा जब सरकार इसमें बढ़ोतरी करेगी. इससे पहले डीए और डीआर में 1 जनवरी से बढ़ोतरी की गई थी.

DA बढ़ोतरी का फैसला किस आधार पर लिया जाता है?
डीए बढ़ोतरी का फैसला श्रम मंत्रालय की श्रम ब्यूरो शाखा के मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक डेटा के आधार पर किया जाता है। मंत्रालय ने अब तक जुलाई का डेटा जारी किया है, जो 3.3 अंक बढ़कर 139.7 हो गया है। इन आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 फीसदी तक बढ़ा सकती है. हालांकि, अंतिम फैसला सरकार ही लेगी.

कब बढ़ेगा महंगाई भत्ता?
केंद्र सरकार डीए में कब बढ़ोतरी करने जा रही है, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सितंबर में किसी भी वक्त महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है. सरकारी कर्मचारियों और डीआर पेंशनभोगियों को डीए दिया जाता है और साल में दो बार जनवरी, जुलाई में बढ़ाया जाता है।

पिछली बार DA में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी
पिछली बार मार्च 2023 में DA में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे मौजूदा DA 42 फीसदी है. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद कई अन्य राज्यों ने भी महंगाई भत्ता बढ़ा दिया था. इसमें मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।

‘भारत पहले एक अरब भूखों के देश के तौर पर जाना जाता था, आज यह एक अरब दिमागों वाला देश’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत आज एक अरब आकांक्षी दिमागों वाला देश है। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीयों के पास आज मौका है कि वह ऐसे विकास की आधारशिला रखें, जिसे अगले हजारों सालों तक याद रखा जाए।

बता दें कि न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि ‘गैरजिम्मेदार आर्थिक नीतियों और लोक-लुभावन नीतियों से कम वक्त में राजनीतिक फायदा मिल सकता है लेकिन लंबे समय में इसकी बड़ी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है। इनकी वजह से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।’

भारत एक अरब दिमागों वाला देश
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘लंबे समय से भारत को एक अरब भूखे पेटों वाले देश के तौर पर देखा जाता है, लेकिन आज यह एक अरब आकांक्षी दिमागों और दो अरब कुशल हाथों वाला देश है।’ जी20 की अध्यक्षता को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि जी20 की अध्यक्षता मिलने से भारत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इनमें से कुछ मेरे दिल के बेहद करीब हैं। गैरजिम्मेदार आर्थिक नीतियों और लोक-लुभावन नीतियों से कम वक्त में राजनीतिक फायदा मिल सकता है लेकिन लंबे समय में इसकी बड़ी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है। इनकी वजह से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

’20वीं सदी की सोच 21वीं सदी में नहीं चलेगी’
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पास लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और विविधता है और अब हम इसमें एक और डी जोड़ रहे हैं और वो डी है डेवलेपमेंट (विकास)। संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20वीं सदी की सोच 21वीं सदी में नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि यदि बहुपक्षीय बड़े संस्थान समय के साथ नहीं बदलते हैं तो छोटे क्षेत्रीय मंच ज्यादा अहम हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को बदलती हकीकत को समझना चाहिए और अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से गौर करना चाहिए ताकि सभी को प्रतिनिधित्व मिल सके।

‘भारत ने 2070 तक नेट जीरो बनने का लक्ष्य रखा है। सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि फर्जी खबरें और डीप फेक अराजकता फैला सकती हैं और साथ ही इससे समाचार स्त्रोतों की विश्वसनीयता भी खो सकती है। इससे सामाजिक तौर पर अशांति फैल सकती है। कर्ज संकट दुनिया के लिए गंभीर संकट है और खासकर विकासशील देश इससे ज्यादा प्रभावित हैं। हम जी20 अध्यक्ष रहें या ना रहें, हम दुनिया भर में शांति स्थापित होने का समर्थन करते रहेंगे।’

‘भारत यात्रा का है इंतजार’, जी20 सम्मेलन को लेकर बोले अमेरिकी राष्ट्रपति, लेकिन इस बात से हैं निराश

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वह जी20 सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत यात्रा का इंतजार कर रहे हैं। जो बाइडन सात सितंबर को भारत दौरे पर आएंगे। जहां आठ सितंबर को वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे।

इसके बाद 9 और 10 सितंबर को जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

जो बाइडन बोले- भारत यात्रा का इंतजार
जो बाइडन के भारत दौरे को लेकर पत्रकारों ने उनसे सवाल किया था। इस सवाल के जवाब में जो बाइडन ने कहा कि वह भारत यात्रा का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन मैं इस बात से निराश हूं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित हो रहे सम्मेलन में शामिल नहीं हो रहे हैं। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत नहीं आ रहे हैं।

अभी लिखित पुष्टि का इंतजार
जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के विशेष सचिव मुक्तेश परदेशी ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी की सम्मेलन में सहभागिता को लेकर अभी तक लिखित पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। बता दें कि कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि शी जिनपिंग दिल्ली नहीं आ रहे हैं और उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग भारत आएंगे। इस पर मुक्तेश परदेशी ने कहा कि ‘हमने अखबारों में ये रिपोर्ट्स देखी हैं लेकिन हम लिखित पुष्टि के आधार पर ही काम करते हैं। अभी तक हमें यह नहीं मिली है, जब तक पुष्टि नहीं हो जाती तो वह इस पर कुछ नहीं कह पाएंगे।’

ये बड़े नेता होंगे शामिल
बता दें कि नई दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां, ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बानीज, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा समेत अन्य नेता शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन में 10 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी जी20 की अध्यक्षता ब्राजील को सौपेंगे।

क्यों अहम है जी20 समूह
जी20 समूह कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि जी20 देश दुनिया की कुल जीडीपी का 85 प्रतिशत हिस्सा हैं। वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत और दुनिया की कुल जनसंख्या की दो तिहाई जनता जी20 देशों में रहती है। जी20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किए, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ की एनिवर्सरी मनाएगी कांग्रेस, 7 सितंबर को देशभर में निकाली जाएगी यात्रा!

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कांग्रेस द्वारा पिछले वर्ष सात सितंबर को कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के एक वर्ष पूरा होने के मौके पर पार्टी की जिला स्तर पर यात्राएं निकालने की योजना है।

पार्टी नेता राहुल गांधी ने पार्टी के कई नेताओं के साथ 3500 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की थी और इस दौराऩ उन्होंने समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से बातचीत की थी। यात्रा के एक वर्ष पूरे होने पर पार्टी इस उपलब्धि को बड़े स्तर पर मनाने की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि यात्रा कितनी लंबी होगी तथा यात्रा के संबंध में अन्य तैयारियों पर काम चल रहा है।  राहुल ने सात सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से यात्रा की शुरुआत की थी, जो इस वर्ष 30 जनवरी को श्रीनगर में समाप्त हुई थी। यह यात्रा 145 दिन चली थी।

उन्होंने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में अपने संबोधन में कहा था,‘‘ मैंने ये (यात्रा) अपने लिए या कांग्रेस के लिए नहीं की, बल्कि देश के लोगों के लिए की है। हमारा मकसद उस विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना है, जो देश की बुनियाद को नष्ट करना चाहती है। ”  यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने 12 जन सभाओं, 100 से अधिक नुक्कड़ सभाओं और 13 संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था। उन्होंने 275 से अधिक बार बातचीत पैदल चलते हुए और 100 से अधिक बातचीत बैठकर की थी।

कई विशेषज्ञों ने कहा था कि कांग्रेस के लिए इस यात्रा की बड़ी उपलब्धि गांधी की छवि में बदलाव के तौर पर रही। इस यात्रा से उनकी छवि एक अनिच्छुक और अंशकालिक राजनेता से एक ऐसे व्यक्ति की बनी, जो परिपक्व है और विरोधियों द्वारा गंभीरता से लिया जाता है।  कहा जाता है कि यात्रा का विचार कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश तथा पार्टी नेता दिग्विजय सिंह का था। रमेश ने तब कहा था कि यात्रा का मकसद गांधी की छवि में बदलाव लाना नहीं है, बल्कि यह उसका परिणाम है। रमेश ने कहा था कि कांग्रेस को यात्रा से काफी लाभ हुआ। साथ ही उन्होंने कहा था कि पार्टी यात्रा के संदेशों — आर्थिक असमानता, सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तानाशाही से गणतंत्र को खतरे– को लोगों तक पहुंचाने में सफल रही।

Bageshwar Bypoll: बागेश्वर उपचुनाव के लिए थम गया प्रचार, कल जनता तय करेगी प्रत्याशियों का भविष्य

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Bageshwar Bypoll 2023: उत्तराखंड के बागेश्वर में पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के स्वर्गवास के बाद खाली हुई विधानसभा सीट पर अब उपचुनाव होना है. जिसके लिए चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है, अब प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से वोट करने की अपील कर रहे हैं.

बागेश्वर विधानसभा सीट पर चंदन रामदास की पत्नी पार्वती दास को भारतीय जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं आम आदमी पार्टी से पूर्व में चुनाव लड़े बसंत कुमार कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए गए हैं.

फिलहाल मतदान से पूर्व बागेश्वर जिले की सीमाएं तीन दिन के लिए सील कर दी गई हैं, ताकि चुनाव में कोई गड़बड़ न हो सके. बागेश्वर में 5 सितंबर मंगलवार के दिन वोट डाले जाएंगे और आठ सितंबर को मतगणना होगी. इसके लिए प्रशासन ने सभी इंतजाम कर लिए हैं. सोमवार को सभी 188 मतदान स्थलों के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना कर दी गई हैं.

20 साल से चंदन रामदास का रहा दबदबा

बागेश्वर उपचुनाव में 1,18,311 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें 60,028 पुरुष और 58,283 महिला वोटर शामिल हैं. जो की बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे. बागेश्वर विधानसभा सीट पर चंदन रामदास परिवार का कब्जा पिछले 20 सालों से रहा है. चंदन रामदास पिछले 4 बार से बागेश्वर से विधायक रहे हैं.

चंदन रामदास की पत्नी को बीजेपी ने बनाया प्रत्याशी

बीजेपी विधायक चंदन रामदास की मृत्यु के बाद बीजेपी ने एक बार फिर से उन्हीं के परिवार पर भरोसा जताते हुए चंदन रामदास की पत्नी पार्वती दास को अपना उम्मीदवार बनाया है. फिलहाल उपचुनाव में 5 प्रत्याशी मैदान में है, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. जिसमें दोनों ही पार्टी जीत का दावा कर रही हैं.