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Rain Alert : उमस भरी गर्मी के बाद लौट आए बादल, 29 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट; जानें अपने शहर के मौसम का हाल

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All India Rain Forecast : मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी मध्य भारत में 26 से 27 को भारी बारिश की भविष्यवाणी की है. इस दौरान 26 से 27 जुलाई के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी हरियाणा तेज बरसात होगी.

जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश में 28 से 30 जुलाई के बीच भारी बरसात (Today Weather Update) का दौर चलेगा. इस दौरान पूर्वी भारत में भी भारी बारिश होने की उम्मीद है.

इन राज्यों में भारी वर्षा का अलर्ट

मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 26 जुलाई तक पश्चिमी तट पर और 26-27 जुलाई के दौरान तेलंगाना व आंध्र प्रदेश में बहुत भारी वर्षा (Today Weather Update) होने की संभावना है. आईएमडी के अनुसार, 26 से 29 जुलाई तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना है. इस दौरान कहीं हल्की बारिश होगी तो कहीं भारी से भी भारी बरसात होगी.

उत्तर पश्चिम भारत में, उत्तराखंड (Uttarakhand Rain Alert), पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश होने की उम्‍मीद है. हिमाचल प्रदेश में भी बुधवार से शुक्रवार तक भारी बारिश होगी. राज्य में 26 और 27 जुलाई को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. पूर्वी राजस्थान में 26 से 27 तारीख तक और पश्चिमी राजस्थान में 26 जुलाई को बारिश होगी.

जम्मू-कश्मीर में भी होगी बरसात

जम्मू और कश्मीर में 26 और 27 जुलाई को बारिश होगी. कुछ स्थानों पर भारी बारिश के आसार हैं. मध्य भारत में भी भारी बारिश की उम्मीद जताई गई है. विदर्भ और छत्तीसगढ़ में बुधवार से शुक्रवार तक बारिश (Today Weather Update) का दौर रहेगा. दोनों जगहों पर 26 और 27 जुलाई को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होगी.
पूर्वी मध्य प्रदेश में 26 से 28 जुलाई तक बारिश होगी, वहीं 27 जुलाई को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होगी.

पश्चिम भारत, कोंकण, गोवा जैसे क्षेत्रों और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में मंगलवार से शनिवार तक व्यापक वर्षा होगी. साथ ही 26 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा (Today Weather Update) होगी. इस अवधि के दौरान दक्षिण भारत में भी व्यापक वर्षा होगी. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल और माहे में 27 जुलाई तक बारिश होगी.

पूर्वोत्तर भारत में भी बरसेंगे बदरा

तटीय और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 26 जुलाई को बारिश होगी. इस दौरान कई इलाकों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.’ पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 29 जुलाई तक और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 28 और 29 जुलाई को काफी व्यापक वर्षा होगी. वहीं ‘अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 27 और 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.

दिल्ली में अब भी यमुना का जलस्तर खतरे से ऊपर

दिल्ली की बात करें तो यमुना के जलस्तर (Today Weather Update) में गिरावट जारी है हालांकि वह अभी भी खतरे के निशान 205.33 मीटर से ऊपर है. माना जा रहा है कि हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड में भारी बरसात हुई तो दिल्ली में फिर बाढ़ जैसे हालात हो सकत हैं. इसलिए दिल्ली के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है. मौसम विभाग के अनुमान है कि आज दिल्ली-एनसीआर में भी बरसात हो सकती है.

इस सरकारी ऐप पर आधे दाम पर मिल रहे हैं टमाटर! जानिए कैसे कर सकते हैं ऑर्डर

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Tomato Crisis In India : मॉनसून में देरी, फिर तेज बारिश, सप्लाई में कमी और कई फैक्टर्स के कारण टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं. दिल्ली सहित कई राज्यों में टमाटर की कीमत 150 रुपये किलो तक पहुंच गई है.

ऑनलाइन देखें तो इसकी कीमत 200 से 250 तक पहुंच गई है. लोगों को टमाटर खरीदने में पसीने छूट रहे हैं. कुछ लोगों ने तो किचन से टमाटर की विदाई कर दी है. इस बीच ONDC (Open Network For Digital Commerce) और Paytm कुछ राहत लेकर आए हैं.

मिल रहे 70 रुपये किलो
पेटीएम ई-कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में यूटर्स के लिए नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनसीसीएफ) के माध्यम से टमाटर की बिक्री की घोषणा की, जिसमें 70 रुपये प्रति किलोग्राम कीमत निर्धारित की गई. इस पहल के तहत, प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को हर हफ्ते 140 रुपये के भीतर दो किलोग्राम टमाटर की खरीद पर मुफ्त डिलीवरी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है. इसके अलावा, टमाटर की कीमतों में एनसीसीएफ के निर्देशों के अनुसार और भी गिरावट हो सकती है.

इस कदम से अब बहुत से लोग फायदा हो सकते हैं, खासकर जिन्हें देखकर पता चला है कि कुछ शहरों में टमाटर की खुदरा कीमतें 200 रुपये प्रति किलोग्राम से भी ज्यादा हो गई हैं. इस ऑफर के बारे में बात करते हुए, पेटीएम ई-कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा, ‘टमाटर जैसी रसोई में उपयोगी चीजों की बढ़ती हुई कीमतें देश के अनेक लोगों को प्रभावित कर रही हैं. एनसीसीएफ और ओएनडीसी के साथ मिलकर, दिल्ली एनसीआर के उपयोगकर्ताओं को अब सस्ते दामों पर टमाटर आसानी से प्राप्त करने का मौका मिलेगा.’

PayTM ONDC से ऐसे ऑर्डर करें टमाटर

– पेटीएम ऐप ओपन करें.
– सर्च बार में, “ONDC” टाइप करें और “ONDC फ़ूड” रिजल्ट पर टैप करें.
– ओएनडीसी फूड पेज पर, “एनसीसीएफ से टमाटर” पर टैप करें.
– टमाटर की वह मात्रा चुनें जिसे आप ऑर्डर करना चाहते हैं.
– अपना डिलीवरी एड्रेस दर्ज करें.
– अपनी भुगतान विधि चुनें और अपने ऑर्डर के लिए भुगतान करें.
– आपका ऑर्डर दे दिया जाएगा और आपको एक पुष्टिकरण संदेश प्राप्त होगा.

लेकिन ध्यान दें कि ऑर्डर देते समय, यूजर Paytm ऐप पर ONDC के माध्यम से मुफ्त डिलीवरी के साथ केवल 140 रुपये प्रति सप्ताह पर दो किलोग्राम टमाटर खरीद सकते हैं. एनसीसीएफ के निर्देशों के अनुसार टमाटर की कीमतों में और गिरावट आ सकती है.

Chhattisgarhi Olympics 2023 : 26 जुलाई दूसरे चरण में जोन स्तर पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आयोजित छत्तीसगढ़िया ओलंपिक प्रतियोगिता

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रायपुर : Chhattisgarhi Olympics 2023 : हरेली तिहार के दिन शुरू हुए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के दूसरे चरण जोन स्तर की शुरूआत आज 26 जुलाई से हो रही है। इसमें 8 राजीव युवा मितान क्लब को मिलाकर 01 जोन बनाया गया है।

जोन स्तर की इस प्रतियोगिता का समापन 31 जुलाई को होगा। पहले चरण में राजीव युवा मितान क्लब स्तर की प्रतियोगिता ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में 17 जुलाई से 22 जुलाई तक आयोजित की गई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने, खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने, खिलाड़ियों को मंच प्रदान करने और खेल भावना का विकास करने के उद्देश्य से शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को अभूतपूर्व लोकप्रियता मिली। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों ने इस ओलंपिक में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस वर्ष चल रही छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में भाग लेने को लेकर लोगों में भारी उत्साह है।

जोन स्तर पर होगी छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की शुरुआत

Chhattisgarhi Olympics 2023 : दूसरे चरण में जोन स्तर पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आयोजित छत्तीसगढ़िया ओलंपिक प्रतियोगिता में 08 राजीव युवा मितान क्लब क्षेत्रों का एक जोन बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जोन बनाने का दायित्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को एवं शहरी क्षेत्रों में नगरीय प्रशासन विभाग के द्वारा नामांकित अधिकारी को दिया गया है। मुकाबला नॉक आऊट पद्धति से राजीव युवा मितान क्लब के विजेता प्रतिभागी एवं दलों के मध्य होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विजेता प्रतिभागी एवं दल आयुवार एवं वर्गवार विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में एवं शहरी क्षेत्रों में विजेता प्रतिभागी दल आयुवार एवं वर्गवार नगरीय क्लस्टर स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेंगे।

7 अगस्त से शुरू होगा तीसरा चरण

Chhattisgarhi Olympics 2023 : राजीव युवा मितान क्लब स्तर एवं जोन स्तर के समापन के बाद तीसरे चरण विकासखंड एवं नगरीय क्लस्टर स्तर पर आयोजन 7 अगस्त से 21 अगस्त तक, चौथे चरण जिला स्तर पर आयोजन 25 अगस्त से 04 सितंबर तक, पांचवे चरण संभाग स्तर पर आयोजन 10 सितंबर से 20 सितंबर तक और अंतिम में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। जिसका आयोजन 25 सितंबर से 27 सितंबर तक होगा।

छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में शामिल है ये खेल

Chhattisgarhi Olympics 2023 : छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेल प्रतियोगिता दलीय व एकल दो श्रेणी में आयोजित की जा रही है। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में दलीय श्रेणी में गिल्ली डंडा, पिट्टूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी (कंचा) जैसी खेल विधाएं शामिल की गई हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा, 100 मीटर दौड़, लम्बी कूद, रस्सी कूद एवं कुश्ती शामिल हैं।

रायपुर : संविदा कर्मचारियों की संवाद रैली: संविदा कर्मचारी नियमितिकरण की मांग को लेकर अनिश्चितक़ालीन हड़ताल पर

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रायपुर : Contract employees strike in CG : संविदा कर्मचारी नियमितिकरण की मांग को लेकर 3 जुलाई से अनिश्चितक़ालीन हड़ताल पर हैं। सरकार ने मुख्यमंत्री ने संविदा कर्मचारियों को सौगात देते हुए उनके वेतन में जबरदस्त बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी।

सरकार ने संविदा कर्मचारियों के वेतन मान में 27% की वृद्धि की थी। इसके बाद भी संविदा कर्मचारी अपनी मांगो को लेकर अड़े हुए है और लगातार 24वे दिन भी हड़ताल पर है। इसी बीच संविदा कर्मचारी आज संवाद रैली निकालेंगे। इस दौरान सभी संविदा कर्मचारी घुटनों के बल चलकर दंडवत प्रणाम कर सरकार से संवाद करने की अपील करेंगे।

संविदा कर्मचारियों की संवाद रैली आज

Contract employees strike in CG : बता दें कि, नियमितिकरण नहीं किए जाने से नाराज संविदा कर्मचारी बुधवार को संवाद रैली के माध्यम से सरकार को संवाद करने की अपील करेंगे। संवाद रैली में कर्मचारी घुटनों के बल और दंडवत प्रणाम करके मुख्यमंत्री से जन घोषणा पत्र के वादे संविदा नियमितिकरण को पूरा करने की अपील करेंगे। संविदा कर्मचारियों की हड़ताल अपने संगठन की एकजुटता, अनुशासन, अनोखे प्रदर्शन और कड़े संघर्ष के लिए पहले ही प्रदेश स्तर पर सुर्खियों में है। इन्होंने इन बीस दिनों में एस्मा कानून के विरोध में सामूहिक त्यागपत्र, हजारों की संख्या में जेल भरो आंदोलन और आमरण अनशन कर आमजन की सहानुभूति अर्जित किए हैं।

बिना संवाद के कार्रवाई करना चाहती है सरकार

Contract employees strike in CG : प्रांतीय मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता सूरज सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि, इस कार्रवाई का संविदा कर्मचारी महासंघ पुरजोर विरोध करती हैं। कल (बुधवार) को हम संवाद रैली करने जा रहे हैं, जिसमें घुटनों के बल और दंडवत चलकर शासन से संवाद करने की अपील करेंगे। 23 दिनों से चली आ रही आंदोलन में सरकार बिना संवाद किए 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि कर दी, उसके बाद 3 दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शासन इन 23 दिनों में यदि संविदा कर्मचारियों से संवाद स्थापित करती तो निश्चित रूप से एक रास्ता निकल सकता था। लेकिन सरकार के इस कार्रवाई से स्पष्ट हो रहा है कि वो बिना संवाद के कार्रवाई करना चाहती हैं, जिसका महासंघ विरोध करता हैं। यह गैर लोकतांत्रिक हैं।

26 जुलाई कारगिल विजय दिवस : देश 24 वां ‘कारगिल विजय दिवस’

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26 जुलाई को देश 24 वां ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जा रहा है. हमारे जांबाज सिपाहियों ने 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों को कारगिल से खदेड़कर दुर्गम चोटियों पर भारत का ध्‍वज फहराया था.

18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल का यह युद्ध तकरीबन दो माह तक चला, जिसमें 527 सैनिकों की शहादत हुई तथा 1300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए. कारगिल वार के इन्हीं वीरों की गाथाएं हमारी स्‍मृतियों में ही नहीं बल्कि कुछ किताबों में भी दर्ज है. इन किताबों में उन खतों की कहानियां दर्ज हैं जो कभी पढ़े ही नहीं गए. इनमें उस इंतजार को लिखा गया है जो कभी पूरा नहीं होगा. ये किताबें बहादुरी की गाथाएं तो प्रस्‍तुत करती ही हैं, मानव मन की संवेदनाओं से भी कोमल अंदाज में रूबरू करवाती हैं. इनमें शहीदों की वीरता के किस्‍से हैं और घर रह गए माता-पिता, पत्‍नी, बच्‍चों के मनोभाव भी रेखांकित किए गए हैं.

कैप्टन विक्रम बत्रा जब पहली जून 1999 को कारगिल युद्ध के लिए गए तो उनके कंधों पर राष्ट्रीय श्रीनगर-लेह मार्ग के बिलकुल ठीक ऊपर महत्वपूर्ण चोटी 5140 को दुश्मन फौज से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी थी. यह दुर्गम क्षेत्र मात्र एक चोटी ही नहीं थी यह तो करोड़ों देशवासियों के सम्मान की चोटी थी जिसे विक्रम बत्रा ने अपनी व अपने साथियों की वीरता के दम पर 20 जून 1999 को लगभग 3 बजकर 30 मिनट पर अपने कब्जे में ले लिया. उनका रेडियो से विजयी उद्घोष ‘यह दिल मांगे मोर…’ जैसे ही देश वासियों को सुनाई दिया हर एक भारतीय की नसों में विजय नाद और अपने सैनिकों पर फख्र बढ़ गया.

अगला पड़ाव चोटी 4875 का था यह अभियान भी विक्रम बत्रा की ही अगुवाई में शुरू हुआ. विक्रम बत्रा बहुत से पाकिस्तानी सैनिकों को मारते हुए आगे बढ़े लेकिन इस बीच वह अपने घायल साथी लेफ्टिनेंट नवीन को बचाने के लिए बंकर से बाहर निकल आए. ‘तुम बीबी-बच्चों वाले हो यहीं रुको बाहर मैं जाता हूं’ मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण वीर योद्धा कैप्टन विक्रम बत्रा के ये शब्द अपनी ही टीम के एक सुबेदार के लिए थे.

घायल लेफ्टिनेंट नवीन को बचाते हुए जब एक गोली विक्रम बत्रा के सीने में लगी तो भारत मां के इस लाल ने भारत माता की जय कहते हुए अंतिम सांस ली, इससे आहत सभी सैनिक गोलियों की परवाह किए बिना दुश्मन पर टूट पड़े और चोटी 4875 को आखिरकार फतह किया. इस वीरता के चलते 15 अगस्त 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से नवाजा गया.

लेखक-पत्रकार हरिंदर बवेजा की एक किताब ‘अ सोल्जर्स डायरीः कारगिल, द इनसाइड स्टोरी’ की प्रस्तावना में शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा लिखते हैं कि हमने कल्पना भी नहीं की थी कि एक सुपुत्र कभी अपने अभिभावकों को इतना सम्मान दिला सकता है, जितना हमें उसकी शहादत के बीस साल बाद भी देश के लोगों से मिल रहा है. एक परमवीर चक्र प्राप्त सुपुत्र के गौरवांवित अभिभावक के रूप में उसने हमारा मान-सम्मान बढ़ा दिया.”

सूरत (गुजरात) के बाशिंदों द्वारा किए गए स्वागत-सम्मान का जिक्र करते हुए शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा लिखते हैं कि जब बग्घी पर सवार कोई 20 किलोमीटर लंबे मार्ग से हम गुजरे तो रास्तों के दोनों ओर खड़े लगभग चार लाख सूरतवासी पंखुड़ियों की वर्षा कर स्वागत करते रहे. इसने मुझे भावुक कर दिया. भीगी पलकों के सामने विक्रम आ गया. मैंने सोचा काश, यह सम्मान देखने के लिए मेरे बेटे को और जीवन मिला होता.

पत्रकार हरिंदर बवेजा ने ‘ए सोल्जर्स डायरी: कारगिल इनसाइड स्टोरी’ एक सैनिक की डायरी की शक्ल में लिखी है. जब कारगिल-द्रास में घुसपैठियों की हलचल का पता चला, तो शुरू में इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया था. दहलीज पर आ गए दुश्मन के बारे में काफी देर से पता चला. भारतीय जवानों के पास ढंग के हथियार, दूरबीन यहां तक कि बर्फीली पहाड़ियों पर चलने के लिए जरूरी जूते, दूरबीन, कंबल और स्लीपिंग बैग तक का अभाव था. उनके पास दुर्गम पहाड़ियों के पर्याप्त और अद्यतन नक्शे तक नहीं थे. इस डायरी ने हमारे बेहद मार्मिक क्षणों को भी दर्ज किया है. मोर्चे पर जाने की तैयारी कर रहे एक मेजर को खत मिलता है, बिना पढ़े ही वह उसे जेब में रख लेते हैं. अड़तालीस घंटे बाद वह शहीद हो जाते हैं. यह पत्र उनकी पत्नी का था!

एक अन्‍य पत्रकार रचना बिष्ट रावत की पुस्तक ‘Kargil : Untold Stories From The War’ का हिंदी अनुवाद ‘कारगिल’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है. इस युद्ध को लड़नेवाले जवानों और शहीदों के परिवारवालों से बात कर रचना बिष्ट रावत ने अदम्य मानवीय साहस दिखानेवाली ये कहानियां लिखी हैं. रचना बिष्‍ट रावत के अनुसार कारगिल युद्ध के दौरान वे अहमदाबाद में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार में रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत थी. उसी दौरान कैप्टन मनोज रावत से मेरा विवाह हुआ था, जो 3 इंजीनियर रेजीमेंट में तैनात थे. मेरे पति की यूनिट सेना की उन यूनिटों में एक थी, जिसे संभावित खतरे को देखते हुए राजस्थान की सीमा पर तुरंत तैनात कर दिया गया था. कारगिल पर पुस्तक लिखते हुए मैं सिपाहियों के कई पिताओं से मिली. मैं कारगिल शहीदों के उन बच्चों से भी मिली, जो अपने पिता की शहादत के समय इतने छोटे थे कि उनके दिमाग में अपने पिता से जुड़ी बहुत ज्यादा यादें शेष नहीं हैं. इन बच्चों के लिए अपने पिता गहरे हरे रंग के कपड़े पहने एक अजनबी से ज्यादा नहीं थे, जो एक दिन घर छोड़कर चले गए और फिर कभी वापस नहीं लौटे. जब मैंने कारगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक बचन सिंह की पत्‍नी कामेश बाला ने उन्‍हें बताया कि यूं तो उनके विवाह को सात साल हो चुके थे, लेकिन उन्होंने अपने पति के साथ मुश्किल से पांच महीने ही बिताए. उनके पति को उम्मीद थी कि उनकी अगली पोस्टिंग किसी शांतिप्रिय जगह पर होगी, इसलिए उन्होंने उनसे वादा किया था कि ऐसा होने पर वह उनको और दोनों बच्चों को अपने साथ ले जाएंगे, लेकिन वह दिन कभी नहीं आया. बचन सिंह 29 वर्ष की उम्र में तोलोलिंग के युद्ध में शहीद हो गए थे.

22 वर्षीय कैप्टन सौरभ कालिया ने कमीशन प्राप्त करने के ठीक बाद जीवन में पहली बार चेक पर हस्ताक्षर किए थे और गर्व के साथ उसे अपनी मांं को देते हुए कहा था, अब पैसों की चिंता मत करो. अब मैं कमाने लगा हूं. सौरभ की मां ने बताया था कि वह खारिज हुआ चेक मुझे दिखाया. वह चेक कभी भी भुनाया ही नहीं जा सका, क्योंकि सौरभ कालिया पहला वेतन बैंक खाते में आने से पहले ही शहीद हो गए थे.

लेखिका रचना बिष्‍ट रावत बताती हैं कि मैं कैप्टन हनीफुद्दीन की मां श्रीमती हेमा अजीज से भी मिली. तुरतुक में हनीफुद्दीन का शव 43 दिनों तक यूं ही बर्फ पर पड़ा रहा था. जब तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक ने श्रीमती अजीज के घर जाकर उन्हें बताया कि दुश्मन की तरफ से लगातार हो रही गोलीबारी के कारण वह उनके बेटे का शव तुरतुक से वापस नहीं ला पा रहे हैं तो श्रीमती अजीज ने जनरल मलिक को कहा कि वह अपने बेटे के शव के लिए किसी और जवान की जान को जोखिम में नहीं डालना चाहतीं. हनीफ की शहादत पर मिलनेवाले पेट्रोल पंप को लेने से भी उन्होंने इनकार कर दिया था.

जनरल वी.पी. मलिक कारगिल युद्ध के दौरान भारत की थलसेना के अध्यक्ष थे. अपनी पुस्तक ‘कारगिल: फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी’ में जनरल मलिक ने बताया है कि इस युद्ध में भारत की शानदार जीत के लिए सेना ने क्या-क्या रणकौशल अपनाए, किस-किस तरह की कुर्बानियां दीं. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वैसे तो कारगिल युद्ध पर अब तक बहुत सी किताबें लिखी गई हैं. लेकिन उनमें से ज्यादातर सुनी-सुनाई घटनाओं पर आधारित हैं. कारगिल पर मैं दो प्रामाणिक पुस्तकों का जिक्र करना चाहूंगा. एक तो खुद की किताब ‘कारगिल: फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी’ और दूसरी लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी की किताब ‘कारगिल: टर्निंग द टाइड’.

कारगिल युद्ध के समय लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी 8-माउंटेन डिवीजन के प्रमुख थे. इस डिवीजन को द्रास और मुश्कोह सेक्टर से दुश्मनों को खदेड़ने का काम सौंपा गया था. अपनी किताब में लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना के शौर्य और धैर्य का आंखों देखा हाल बयान किया है. लेफ्टिनेंट जनरल पुरी के अनुसार, तोलोलिंग पर कब्जा करने के लिए हमने कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली. वह लिखते हैं, “कई बार नाकाम रहने के बाद एक दिन मैंने अपने सैनिकों से शाम को फिर हमला करने को कहा. लेकिन सैनिकों को आदेश देने के बाद जब तक मैं अपने मुख्यालय पहुंच पाता, भारत तोलोलिंग चोटी पर कब्जा कर चुका था.” लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने 2-राजपूताना राइफल्स के कर्नल एमबी रवींद्रनाथ से पूछा कि यह सब कैसे हुआ? इस पर उन्होंने बताया कि बस एक हल्की-सी संभावना दिखी और हमने ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया.

रचना बिष्‍ट अपनी किताब में उल्‍लेख करती हैं कि अपने पिता को लिखे अपने अंतिम पत्र में लेफ्टिनेंट विजयंत थापर ने उम्मीद जताई थी कि उनके साथी जवानों का त्याग कभी भी भुलाया नहीं जाएगा. क्‍या जनता अपने इन जांबाजों को की यादों को जीवित नहीं रखेगी? देश के लिए अपने प्राण प्रस्‍तुत करनेवाले जवानों के लिए हम कम-से-कम इतना तो कर ही सकते हैं. उम्मीद है कि कारगिल युद्ध के 527 शहीद हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे.

छत्‍तीसगढ़ मौसम विभाग : बारिश की संभावना अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस

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रायपुर। CG Weather Update : बारिश न होने से उमस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और मंगलवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।

प्रदेश भर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान एआरजी सक्ती का 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का कहना है कि मानसूनी तंत्र के प्रभाव से बुधवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी। साथ ही बस्तर क्षेत्र में भारी वर्षा के आसार हैं। मालूम हो कि इस वर्ष एक जून से लेकर 24 जुलाई तक की स्थिति में प्रदेश में 11 फीसद कम वर्षा हुई है। बालोद में सर्वाधिक और सरगुजा में सबसे कम वर्षा हुई है।

मंगलवार को रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आंशिक रूप से बादल छाए,साथ ही तेज धूप भी निकली। इसके चलते उमस में काफी बढ़ोतरी रही,बढ़ती उमस से लोग हलाकान रहे। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बुधवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार है,साथ ही कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के भी आसार है।

इन क्षेत्रों में हुई वर्षा

बस्तर 11 सेमी, जगदलपुर 6 सेमी, बीजापुर 5 सेमी, लोहांडीगुड़ा 4 सेमी वर्षा हुई। इनके साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा हुई।

यह बन रहा सिस्टम

मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, गुना, रायपुर, भवानीपटना निम्न दाब के केंद्र से होते हुए पूर्व दक्षिण पूर्व की ओर पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी तक 1.5 किमी ऊंचाई तक है। इसके प्रभाव से बुधवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी। दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा के आसार बने हुए हैं।

Gold Silver Price in Raipur : सोना-चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव, जानिए रायपुर में कितना है 10 ग्राम गोल्‍ड का रेट

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रायपुर। Gold Silver Price in Raipur : अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आने लगी है। बीते तीन दिनों में सोना 200 रुपये सस्ता हुआ है। वहीं चांदी की कीमतों में भी 1800 रुपये की गिरावट आ गई है।

22 जुलाई को रायपुर सराफा बाजार में सोना 61300 रुपये प्रति दस ग्राम (स्टैंडर्ड) और चांदी प्रति किलो 75500 रुपये रही। मंगलवार सुबह रायपुर सराफा बाजार में सोना प्रति दस ग्राम (स्टैंडर्ड) 61100 रुपये और चांदी प्रति किलो 73700 रुपये रही।

उपभोक्ताओं को गोल्ड की कीमतों में गिरावट का इंतजार

सराफा विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कीमती धातुओं में इस प्रकार से उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। इन दिनों सराफा बाजार में ग्राहकी की रफ्तार बिल्कुल सुस्त है। उपभोक्ताओं को भी अब कीमतों में गिरावट का इंतजार बना हुआ है।

मालूम हो कि इस वर्ष शादी सीजन में सराफा में जबरदस्त कारोबार हुआ। पिछले वर्ष की तुलना में यह कारोबार 30 फीसद ज्यादा रहा। इन दिनों सराफा संस्थानों में गहनों के पारंपरिक व फैशनेबल कलेक्शन के साथ ही लाइटवेट ज्वेलरी की भी रेंज है।

उपभोक्ताओं द्वारा लाइटवेट ज्वेलरी की रेंज भी काफी पसंद की जा रही है। इस वर्ष गोल्ड लोन की मांग भी काफी ज्यादा बढ़ी है। इस वर्ष जनवरी से लेकर जून माह तक प्रदेश में लगभग 200 करोड़ का गोल्ड लोन बांटा जा चुका है। बैंकों के साथ ही गोल्ड लोन देने वाली संस्थानों द्वारा आकर्षक आफर भी दिया जा रहा है।

युवक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन बैंगलोर-छत्तीसगढ़ माडल, 250 से अधिक कांग्रेसी होंगे शामिल

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रायपुर।  युवक कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन 26 से 28 जुलाई तक कर्नाटक के बंगलुरु में होगा। देशभर के युवा कांग्रेसियों के जमावड़े के बीच राष्ट्रीय अधिवेशन में छत्तीसगढ़ माडल की गूंज सुनाई देगी।

अधिवेशन स्थल पर छत्तीसगढ़ को एक स्थान मिला है, जिसमें प्रदेश सरकार की योजनाओं का जिक्र किया गया है।

प्रदेश से 250 से ज्यादा युवक कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होने जा रहे हैं। मिशन 2024 को देखते हुए अधिवेशन का प्रवेश शुल्क 2024 रुपये रखा गया है। प्रदेश में युवक कांग्रेस के नौ लाख कार्यकर्ता हैं। जबकि सदस्यता शुल्क के रूप में 15 लाख से ज्यादा की राशि छत्तीसगढ़ से एकत्र हुई है।

युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले साढ़े चार साल में छत्तीसगढ़ में आए बदलाव की जानकारी दी जा रही है। इतना बदला छत्तीसगढ़ थीम से जानकारी दी गई है। इसमें कर्जमाफी, नरवा, गरुवा घुरवा बाड़ी का जिक्र हैं। इसके साथ ही डीएमएफ की राशि से आदिवासी क्षेत्रों में हुए बदलाव, शिक्षा की भाजपा सरकार में स्थिति का तुलनात्मक आंकड़ा भी पेश किया गया है।

छत्तीसगढ़ माडल के पोस्टर में बताया गया है कि बस्तर में भाजपा ने शिक्षा व्यवस्था की यह दुर्दशा कर रखी थी कि आज बस्तर फाइटर के लिए पांचवीं पास लोग नहीं मिल रहे हैं। लागत में कमी और उत्पादन की कीमत मिलने से आज छत्तीसगढ़ का किसान खुशहाल है। अब गरीब बच्चे भी शानदार स्कूलों में पढ़ रहे हैं, यह परिवर्तन छत्तीसगढ़ में आया है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक हर कोई अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को महसूस कर रहा है।

ब्रिटिश राजघराने से 16 गुना अमीर यह परिवार! बांट दें संपत्ति तो मिट जाए कई देशों की गरीबी, खजाने में इतनी दौलत

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दुनिया के कई देशों में लोकतंत्र लागू होने से पहले राजा और शाही परिवारों की हुकूमत चला करती थी. हालांकि, यह दौर खत्म हो गया है लेकिन इन रॉयल फैमिली की शान ओ शौकत आज भी कायम है. दुनिया की सबसे रॉयल फैमिली के तौर पर ब्रिटिश राजघराने को जाना जाता है, जिसने कई मुल्कों पर राज किया.

लेकिन, दुनिया का सबसे अमीर शाही परिवार कोई और है. (Image- Twitter @RoyalFamily)

‘द रॉयल फैमिली ऑफ सऊदी’ दुनिया का सबसे दौलतमंद शाही परिवार है. इस रॉयल फैमिली के खजाने में सोना-चांदी और बेशकीमती हीरे से लेकर बहुत कुछ है. भव्य महल में करोड़ों की लग्जरी कारों का काफिला, अरबों के क्रूज और प्राइवेट जेट तक शामिल हैं. सऊदी अरब में 1932 से सऊद राजवंश का राज है.

यह दुनिया के सबसे अमीर और सबसे शक्तिशाली परिवारों में से एक है, जिसकी अनुमानित कुल संपत्ति 1.4 खरब अमेरिकी डॉलर है. ये संपत्ति ब्रिटिश रॉयल फैमिली से 16 गुना गुना ज्यादा है. इस वक्त इस फैमिली के मुखिया यानी राजा हैं सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद हैं. वहीं, इस शाही परिवार में लगभग 15000 लोग शामिल हैं. (Image- Twitter @KSAmofaEN)

वर्तमान में अलवलीद बिन तलाल अल सऊद परिवार के सबसे धनी सदस्य हैं और उनकी अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर है. सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी दौलतमंद हैं लेकिन उनकी संपत्ति का खुलासा नहीं किया गया है.

सऊदी अरब के राजा अल यामामा पैलेस में रहते हैं. यह उनका आधिकारिक निवास है. इस शाही परिवार के पास दुनिया भर में कई शानदार और फैंसी घर हैं. 1983 में रियाद में बना अल यामामा पैलेस 4 मिलियन वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसे स्थानीय नजदी शैली में बनाया गया है. इस पैलेस में एक हजार कमरे हैं और इसके साथ साथ एक मूवी थियेटर, कई स्विमिंग पूल और एक मस्जिद भी है.

सऊदी राजपरिवार के पास कई लग्जरी क्रूज शिप हैं. प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के पास 400 मिलियन डॉलर का सेरेन सुपरयाच है. इस विशाल क्रूज में 2 हेलीपैड और स्पोर्ट्स ग्राउंड समेत कई सुविधाएं हैं. (Image- Twitter @earthescope)

इस शाही परिवार के पास एक विशाल बोइंग 747-400 प्लेन है. यह दुनिया का सबसे बड़ा कमर्शियल प्लेन है. इस स्पेशल प्लेन में महल जैसे शाही इंतजाम हैं.

शाही परिवार के सदस्य तुर्की बिन अब्दुल्ला के पास 22 मिलियन डॉलर की कई महंगी कारें हैं. इनमें लेम्बोर्गिनी एवेंटाडोर सुपरवेलोस, रोल्स-रॉयस फैंटम कूप, मर्सिडीज जीप और बेंटले शामिल हैं. इन सुपरकारों की कीमत 1.2 मिलियन डॉलर है.

Uniform Civil Code: समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा जारी

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नई दिल्ली, Uniform Civil Code। समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा जारी है और संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस कानून बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है, वहीं कई विपक्षी दल समान नागरिक संहिता का जमकर विरोध कर रहे हैं।

Uniform Civil Code की समीक्षा कर रहे विधि आयोग ने भी इस कानून के बारे में सुझाव देने की डेडलाइन को अब आगे बढ़ा दिया है। आयोग ने आम जनता के लिए सुझाव देने की डेडलाइन अब 14 जुलाई 2023 से बढ़ाकर 28 जुलाई 2023 कर दी है।

आपको बता दें कि विधि आयोग ने दूसरी बार Uniform Civil Code पर सुझाव मांगे है। इससे पहले 21वें विधि आयोग ने धार्मिक संगठनों और आम जनता से 2018 तक के कार्यकाल के दौरान सुझाव आमंत्रित किए थे। इसके बाद 22वें विधि आयोग ने कहा कि काफी ज्यादा समय बीत जाने के कारण समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर दोबारा से विचार-विमर्श करने की जरूरत है।

जानें क्या है UCC, क्या खत्म होंगे पर्सनल लॉ

Uniform Civil Code (UCC) देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की वकालत करता है, जो किसी धर्म पर आधारित कानून नहीं होगा। Uniform Civil Code के आने के बाद पर्सनल लॉ के साथ-साथ गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।

अभी किन समुदायों के है पर्सनल लॉ?

पर्सनल लॉ को पारिवारिक कानून के रूप में भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत कानूनी प्रावधानों का एक समूह है, जो विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने, संरक्षकता और अन्य पारिवारिक मुद्दों से संबंधित मामलों को नियंत्रित करता है। पर्सनल लॉ कानून, किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं पर अलग-अलग होते हैं और धार्मिक ग्रंथों, रीति-रिवाजों और परंपराओं से प्राप्त होते हैं।

हिंदू पर्सनल लॉ और मुस्लिम पर्सनल लॉ

देश में पर्सनल लॉ को विभिन्न धार्मिक समुदायों पर लागू होने वाले अलग-अलग कानूनों के आधार पर विभक्त किया गया है। हिंदू पर्सनल लॉ को हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम और अन्य द्वारा संचालित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और हदीस से लिए गए हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट के जरिए संचालित होते हैं। इसके अलावा ईसाइयों, पारसियों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए भी अलग-अलग कानून मौजूद हैं।

शादी के लिए अलग-अलग धर्म में ये कानून

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955

हिंदू मैरिज एक्ट 1955 हिंदू धर्म के युवक-युवतियों के अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया था। हिंदू मैरिज एक्ट 1955 ऐसे लोगों पर लागू होता है, जो खुद को वीरशैव, लिंगायत और ब्रह्म, प्रार्थना या आर्य समाज का अनुयायी बताते हैं। इसके अलावा बौद्धों, सिखों और जैन धर्म से जुड़े लोगों पर भी हिंदू मैरिज एक्ट 1955 लागू होता है। हिंदू मैरिज एक्ट दरअसल हिंदू कोड बिल के हिस्से के रूप में पारित महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है। हिंदू कोड बिल में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम 1956 और हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम 1956 जैसे कई एक्ट हैं। ये सभी एक्ट सामूहिक रूप से हिंदू समुदाय के भीतर उत्तराधिकार, संरक्षकता और गोद लेने से संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872

1872 के भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम के तहत भारत में ईसाइयों के बीच विवाह के नियम तय करता है। ईसाई विवाह अधिनियम के अंतर्गत तलाक के लिए विशिष्ट आधार परिभाषित किए गए हैं। भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872 के अंतर्गत एक पति अपनी पत्नी द्वारा किए गए व्यभिचार के आधार पर तलाक मांग सकता है। आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, पत्नी दूसरे धर्म में परिवर्तन के साथ-साथ अनाचार पूर्ण गलत विचार, दूसरा विवाह, दुष्कर्म और पाशविकता के मामलों में भी तलाक की मांग कर सकती है।

पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936

पारसी समुदाय के जुड़े विवाह व तलाक के मामलों में पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936 काम करता है। इस अधिनियम में बहुविवाह पर रोक लगाते हुए केवल एक पत्नी विवाह की अनुमति दी गई है। साल 2001 में इस अधिनियम के प्रावधानों को हिंदू विवाह अधिनियम के साथ जोड़ने के लिए कानून में संशोधन किया गया था। तलाक से संबंधित एक उल्लेखनीय संशोधन में कहा गया है कि लंबित गुजारा भत्ता (अस्थायी भरण-पोषण) या नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा के लिए आवेदन को मामले के आधार पर पत्नी या पति को नोटिस देने की तारीख से 60 दिनों के भीतर हल किया जाना चाहिए।

भारत में मुस्लिम विवाह अधिनियम

देश में मुस्लिम विवाह अधिनियम, हिन्दू मैरिज एक्ट से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह इस्लामी धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के आधार पर संचालित होता है। संसद ने समय-समय पर मुस्लिम विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह सहमति, उम्र, तलाक, विरासत और अन्य पहलुओं से संबंधित मामलों से निपटने के लिए कई संशोधन और अधिनियम पारित किए हैं। इसमें हाल ही में सबसे ज्यादा चर्चित तीन तलाक कानून था, जिसे मोदी सरकार ने हटाकर सामान्य तलाक का कानून लागू किया।

पर्सनल लॉ में ये कानून भी शामिल

  • 1869 का भारतीय तलाक अधिनियम
  • 1929 का बाल विवाह निरोधक अधिनियम
  • 1969 का विदेशी विवाह अधिनियम
  • 1880 का काजी अधिनियम
  • 1925 का भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम
  • 1909 का आनंद विवाह अधिनियम।

विरासत को लेकर भी अलग-अलग कानून

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम साल 1956 में लाया गया था। इसमें किसी व्यक्ति को बिना वसीयत की छोड़ी गई संपत्ति को नियंत्रित करने के लिए अधिनियमित किया गया है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 5-29 बिना वसीयत की संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित है। इसमें संपत्ति का वितरण तब शामिल होता है, जब कोई व्यक्ति वैध वसीयत छोड़े बिना मर जाता है। गौरतलब है कि पहले हिंदू कानून के तहत महिलाओं को पुरुषों के बराबर हक नहीं दिया गया था और उन्हें संपत्ति और विरासत में समान अधिकार नहीं मिलता था, लेकिन साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन के जरिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इस संशोधन के बाद संपत्ति और विरासत के मामलों में महिलाओं को अब समान अधिकार दिए जाने लगे हैं।

मुसलमानों में विरासत का शरिया कानून

मुस्लिम कानून के तहत विरासत को लेकर फैसला शरिया कानून के आधार पर किया जाता है। शरिया कानून मुसलमानों के लिए कानूनी ढांचे को नियंत्रित करता है। कानून के तहत यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति बिना वसीयत छोड़े मर जाता है तो ऐसी परिस्थिति में मृत व्यक्ति की संपत्ति, खर्चों और देनदारियों में कटौती के बाद कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच वितरित की जाती है। इस संपत्ति वितरण को विरासत योग्य संपत्ति के रूप में जाना जाता है।