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बेरोजगार युवाओं के लिए शानदार मौका, 500 से अधिक पदों पर होगी बंपर भर्ती…

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छत्तीसगढ़ में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है।

युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), बेमेतरा में 20 अगस्त 2026, दिन गुरुवार को रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।

रोजगार मेले में विभिन्न निजी क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा 500 से अधिक विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी।

जिला रोजगार कार्यालय द्वारा निजी क्षेत्र के नियोजकों एवं रोजगार के इच्छुक आवेदकों के बीच एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाता है।

रोजगार मेले के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां निजी क्षेत्र की संस्थाओं में रोजगार के लिए होंगी।

विभिन्न पदों के लिए निर्धारित योग्यता, कार्य की प्रकृति, वेतनमान, संस्था एवं अन्य आवश्यक जानकारी अभ्यर्थियों को रोजगार मेले में उपस्थित नियोजक अथवा उनके प्रतिनिधियों से प्राप्त होगी।

ये है जरुरी दस्तावेज

रोजगार के इच्छुक अभ्यर्थी अधिसूचित रिक्त पदों पर अवसर प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ रोजगार मेले में शामिल हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को रोजगार कार्यालय का पंजीयन पत्रक, छत्तीसगढ़ निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र तथा समस्त शैक्षणिक मूल प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य है। (CG Job News)

कितने बजे से आयोजित होगा रोजगार मेला?

रोजगार मेला 20 अगस्त 2026 को सुबह 10ः00 बजे से दोपहर 3ः00 बजे तक शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, बेमेतरा में आयोजित होगा।

जिला रोजगार कार्यालय ने निजी क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे जिले के इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थियों से अधिक से अधिक संख्या में रोजगार मेले में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

“Police Transfer: रायपुर ग्रामीण पुलिस में थाना और चौकी प्रभारियों का बड़ा फेरबदल”

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“Police Transfer: एक साथ कई थाना-चौकी के प्रभारियों का ट्रांसफर… रेंज SP मुख्यालय ने जारी किया आदेश”

रायपुर ग्रामीण पुलिस में थाना और चौकी प्रभारियों का बड़ा फेरबदल हुआ है। पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा ने नई तैनाती के आदेश जारी किए।

ग्रामीण पुलिस रायपुर में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अफसर-कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने रायपुर ग्रामीण पुलिस की पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा के द्वारा महकामने में बड़ा बदलाव किया गया है।

रेंज पुलिस मुख्यालय के द्वारा करी छह थाने और चौकी के प्रभारियों को हटते हुए उन्हें नई जगहों पर पदस्थापित किया गया है। इस संबंध में सूची के साथ आदेश भी जारी कर दिया है।

इन अफसरों का किया गया तबादला

जारी आदेश के मुताबिक़ पुलिस लाइन में पदस्थ निरीक्षक प्रेमप्रकाश अवधिया को राखी थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह राखी के प्रभारी आशीष सिंह को पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

आदेश में खरोरा थाने के प्रभारी कृष्ण कुमार कुशवाहा को भी पुलिस लाइन भेजा गया है।

प्रदीप बिसेन को उपरवारा चौकी का प्रभारी बनाया गया है। विद्याभूषण भारद्वाज को खरोरा थाना जबकि कमलेश कुमार को सिलतरा चौकी का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

सीएम साय ने स्रोत महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ…

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इन 5 आधारों के जरिए छत्तीसगढ़ की नदियों को किया जाएगा संरक्षित**

सीएम साय ने स्रोत महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ**

नीर-नारी-निधि पुस्तक का भी विमोचन**

नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है।

कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा।

इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता।

हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा नदी संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है – इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

नदी संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।

उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है।

नदियों ने पीढ़ियों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू

कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा।

प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।

‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

जलस्रोतों की पहचान और संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी : डॉ. विनोद तारे

सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है।

वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके। डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।

साइंस बेस्ड और साइट स्पेसिफिक समाधान तैयार होंगे : जल संसाधन विभाग सचिव

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे।

इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा। टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है।

कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

Public Holiday: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान!

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Public Holiday on 28 August रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस दिन राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं के साथ-साथ कोषालय और बैंकों में भी अवकाश रहेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि राज्य शासन ने रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर 28 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों और संस्थाओं में कामकाज बंद रहेगा। अवकाश के कारण स्कूल-कॉलेज समेत अन्य सरकारी संस्थानों में भी नियमित गतिविधियां संचालित नहीं होंगी।

बैंकों में भी रहेगी छुट्टी

अधिसूचना में भारत सरकार, गृह मंत्रालय की अधिसूचना तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 25 के स्पष्टीकरण के तहत प्रदत्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए 28 अगस्त 2026 को कोषालय एवं बैंकों के लिए भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

सरकार के इस निर्णय से रक्षाबंधन के दिन प्रदेशवासियों को सार्वजनिक अवकाश का लाभ मिलेगा। बैंक और कोषालय बंद रहने के कारण लोगों को बैंकिंग से जुड़े जरूरी कार्यों की योजना अवकाश को ध्यान में रखकर बनाने की सलाह दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद खत्म हुआ इंतजार: जानिए यह कब सिनेमाघरों में आएगी…’महाप्रभु जगन्नाथ’

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एनिमेटेड फ़िल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाना था, लेकिन कानूनी दिक्कतों के कारण इसे टाल दिया गया था। अब, सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद, इस बहुप्रतीक्षित एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म की देशभर में रिलीज़ का रास्ता साफ़ हो गया है।

जानिए यह कब सिनेमाघरों में आएगी। ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ कब रिलीज़ होगी?

ओडिशा की पहली एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म कही जाने वाली ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ अब 28 अगस्त, 2026 को सिनेपोलिस (Cinepolis) के ज़रिए पूरे भारत में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। एक काल्पनिक कहानी के तौर पर बनाई गई इस फ़िल्म का मकसद युवाओं में भक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को जगाना है। गौरतलब है कि यह फ़िल्म लोकप्रिय एनिमेटेड सीरीज़ ‘जय जगन्नाथ’ का ही एक बड़ा सिनेमाई रूप है, जिसे YouTube पर एक अरब (100 करोड़) से ज़्यादा बार देखा जा चुका है।

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज़ क्यों टाल दी गई थी?

इस फ़िल्म को मूल रूप से 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाना था; लेकिन ओडिशा हाईकोर्ट ने फ़िल्म के कंटेंट की कानूनी समीक्षा की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) के बाद इसकी देशभर में रिलीज़ पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए फ़िल्म निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। अपनी याचिका में उन्होंने CBFC से मिले ‘U’ सर्टिफ़िकेट और देश भर के 300 से ज़्यादा सिनेमाघरों में बुकिंग के कारण हुए भारी वित्तीय नुकसान का ज़िक्र किया।

अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म की देशभर में रिलीज़ को मंज़ूरी दे दी है, तो निर्माता और डिस्ट्रीब्यूटर एक नई रिलीज़ रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पूरे भारत में इसकी पहुँच को ध्यान में रखते हुए, प्रमुख थिएटर चेन सिनेपोलिस ने 28 अगस्त, 2026 को फ़िल्म रिलीज़ करने का फ़ैसला किया है।

एनिमेटेड फ़िल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ के बारे में

इस फ़िल्म को ‘एले एनिमेशन’ (Elle Animation) के संस्थापक दुर्गा प्रसाद दलाई ने प्रोड्यूस किया है और इसका निर्देशन श्रीपाद वारखेड़कर ने किया है। फ़िल्म की कहानी और पटकथा पल्लवी शर्मा ने लिखी है। इसके ओरिजिनल गाने अरिजीत श्रीवास्तव ने कंपोज़ किए हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर अविरल कुमार ने दिया है और गाने के बोल अतुल कुमार वर्मा ने लिखे हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक…

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को छोड़कर बाकी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की। एक याचिका में मांग की गई है कि जंतर-मंतर की जगह धरना-प्रदर्शन के लिए कोई और जगह तय की जाए।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “जिन प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड में हत्या, रेप, पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध के मुकदमे हैं, उन्हें छोड़कर बाकी के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस बात से सहमति जताई।

सीजेआई ने कहा कि जहां तक छात्रों की बात है, वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रोटेस्ट में हिस्सा ले रहे थे। उनका मकसद कुछ मुद्दों पर कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना था। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आदतन आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की ही जांच होनी चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पुलिस ने अब तक 2873 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस झड़प में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

सीजेआई ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “प्रदर्शनकारियों में निर्दोष छात्र भी थे। उन्होंने अपना भविष्य बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है। उनके अभिभावकों ने अपनी जी-तोड़ मेहनत और खून-पसीने की कमाई उनकी पढ़ाई में लगाई है।”

पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक हाईपावर कमेटी बनाने का ऐलान किया। कोर्ट ने कहा कि यह कमेटी पूर्व जजों और डीजीपी स्तर के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। यह कमेटी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करेगी।

सीजेआई ने कहा कि कमेटी सिर्फ एक गोपनीय रिपोर्ट जमा नहीं करेगी। जैसे-जैसे नए मामले सामने आएंगे, कमेटी उनकी जांच करेगी और समय-समय पर रिपोर्ट देगी, ताकि कोर्ट आगे के निर्देश दे सके। जरूरत पड़ने पर अंतरिम निर्देश भी जारी किए जा सकेंगे।

सीजेआई ने बताया कि कमेटी में सीबीआई के एक पूर्व डायरेक्टर जनरल, जो कुछ साल पहले रिटायर हुए हैं और एक राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने की सहमति ली गई है। दोनों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हम अभी ओपन कोर्ट में नाम नहीं बताना चाहते, ताकि किसी अधिकारी को दिक्कत न हो। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह बुधवार को कमेटी की आधिकारिक घोषणा कर देगा।

कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि वे एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। सभी सबूत और सामग्री नोडल अधिकारी को सौंपी जाए, जो उसे कोर्ट तक पहुंचाएगा। इससे सुनवाई आसान हो जाएगी।

याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायल हुए और अन्य लोगों का जिक्र किया। वहीं घायल पुलिसकर्मियों की वकील ने कहा कि पुलिस पर पथराव किया गया था। एक याचिकाकर्ता ने पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश के साथ हुई प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया। याचिकाकर्ता के वकील रिजवान अहमद ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और वृंदा ग्रोवर दोनों ने अपनी बातें स्पष्टता से रख दी हैं। अब आगे की कार्यवाही तय की जाए।

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सरकार के उस प्रस्ताव का जिक्र किया जिसमें जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल को शिफ्ट करने की बात कही गई है। इस पर सीजेआई ने कहा कि यह असल में एक एडमिनिस्ट्रेटिव मुद्दा है। एक्सपर्ट देख सकते हैं कि यह मुमकिन है या नहीं।

सीजेआई ने कहा कि कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। वहीं गाइडलाइन और प्रोटोकॉल बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार करना होगा। अब कोर्ट बुधवार को कमेटी के गठन और उसके सदस्यों के नामों की घोषणा करेगा।

IND vs SL Live Score: श्रीलंका के स्पिनर्स ने मचाया कहर, भारत के लगातार गिर रहे विकेट…

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भारत ने पहले टेस्ट मैच में बड़ी बढ़त बना ली है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक, श्रीलंका की दूसरी पारी 284 रनों पर सिमट गई, जिससे भारत को पहली पारी के आधार पर 178 रनों की बड़ी बढ़त मिल गई।

बारिश से प्रभावित इस मैच में तीसरे दिन निरोशन डिकवेला और सोनल धिनास ने भारतीय गेंदबाजों को काफी परेशान किया, लेकिन बाद में स्पिनरों ने टीम इंडिया की मैच में वापसी कराई। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक दोनों टीमें एक-एक बार बल्लेबाजी कर चुकी हैं और भारत के पास 178 रनों की बढ़त है।

चौथा दिन श्रीलंका के लिए बहुत अहम होगा, क्योंकि उन्हें जल्दी-जल्दी विकेट लेने होंगे। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाज दूसरी पारी में 200 रन भी बना लेते हैं, तो जीत की संभावना काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि गेल इंटरनेशनल स्टेडियम में टेस्ट मैच में कभी भी 342 से ज़्यादा का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल नहीं किया गया है।

एक तरफ, कप्तान शुभमन गिल अपने टेस्ट करियर में 3,000 रन पूरे करने से सिर्फ़ 15 रन दूर हैं; वह पहली पारी में ही यह उपलब्धि हासिल कर सकते थे लेकिन सिर्फ़ 16 रन पर आउट हो गए। दूसरी ओर, केएल राहुल अपने इंटरनेशनल करियर में 10,000 रन पूरे करने से 170 रन दूर हैं।

चौथे दिन भारतीय बल्लेबाज बड़ा स्कोर बनाकर पारी घोषित कर सकते हैं। मैच के दौरान लगातार बारिश के कारण, टीम इंडिया की कोशिश होगी कि वे तेज़ी से रन बनाएं ताकि उन्हें चौथी पारी में श्रीलंका को आउट करने के लिए पर्याप्त ओवर मिल सकें।

7 भारतीय बल्लेबाज आउट

दूसरी पारी में सात भारतीय बल्लेबाज आउट हो चुके हैं। रवींद्र जडेजा सिर्फ़ 9 रन पर आउट हुए। सातवां विकेट 179 रन पर गिरा और अब टीम इंडिया के लिए 200 रनों के आंकड़े तक पहुँचना भी मुश्किल लग रहा है। हालाँकि, भारत की कुल बढ़त पहले ही 350 रनों के पार पहुँच चुकी है।

ऋषभ पंत आउट

ऋषभ पंत 66 रन बनाकर आउट हो गए। इस पारी के दौरान, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड बनाया। उन्हें लाहिरू कुमारा ने आउट किया। भारत ने 174 रन पर अपना छठा विकेट गंवाया। ऋषभ पंत के 100 छक्के

ऋषभ पंत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं। उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ते हुए टेस्ट में सबसे तेज़ी से 100 छक्के लगाने वाले बल्लेबाज़ का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

 

बैंक ऑफ बड़ौदा में 2,482 एलबीओ पदों पर बंपर भर्ती शुरू, जानें योग्यता और सैलरी…

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बैंकिंग सेक्टर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने रेगुलर आधार पर लोकल बैंक ऑफिसर (स्थानीय बैंक अधिकारी) के कुल 2,482 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आवेदन मांगे हैं।

इनमें जनरल के 981, एससी के 358, एसटी के 240, ओबीसी के 600 और ईडब्ल्यूएस के 303 पद शामिल हैं।

बीओबी की ओर से राज्यवार एलबीओ (जेएमजी/एस-आई) पोस्ट के लिए जारी 2,482 रिक्तियों में आंध्र प्रदेश में 80, अरुणाचल प्रदेश में 20, असम में 40, गोवा में 21, गुजरात में 1,185, जम्मू-कश्मीर में 15, कर्नाटक में 418, केरल में 49, महाराष्ट्र में 218, मणिपुर में 15, मेघालय में 15, मिजोरम में 15, नगालैंड में 15, ओडिशा में 100, पंजाब में 34, सिक्किम में 10, तमिलनाडु में 132, तेलंगाना में 50, त्रिपुरा में 8 और पश्चिम बंगाल में 42 पद शामिल हैं।

इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 18 अगस्त से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर तय की गई है। ऐसे में एलबीओ पोस्ट पर नियुक्ति के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार बीओबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरा कर सकते हैं।

आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की दूसरी अनुसूची में शामिल किसी भी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक में अधिकारी के तौर पर क्वालिफिकेशन के बाद कम से कम 1 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स उस राज्य की स्थानीय भाषा में माहिर (पढ़ना, लिखना, बोलना और समझना) होना चाहिए, जिसके लिए वे आवेदन कर रहे हैं।

आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अगस्त के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन परीक्षा/कई राउंड के टेस्ट, साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन (जीडी) और/या पर्सनल इंटरव्यू (पीआई), डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और स्थानीय भाषा प्रवीणता परीक्षा (एलपीटी) के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 48,480 से 85,920 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।

फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ईडब्ल्यूएस/ओबीसी के लिए 850 रुपए और एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, ईएसएम/डीईएसएम और महिलाओं के लिए 175 रुपए तय किया गया है।

सोने- चांदी! आज 24K, 22K और 18K गोल्ड का भाव…

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सोमवार के ट्रेंड को देखते हुए, आज मंगलवार को देश में सोने की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं। 24-कैरेट सोने की कीमत ₹1,55,890 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गई है। कल 24-कैरेट सोने की कीमत में ₹530 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी के बाद, आज इसमें ₹230 प्रति 10 ग्राम की और बढ़ोतरी हुई है।

22-कैरेट और 18-कैरेट सोने की कीमतें

कल (17 अगस्त) 22-कैरेट सोने की कीमत में ₹500 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई थी और आज इसमें ₹200 की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कीमत ₹1,42,900 प्रति 10 ग्राम हो गई है। इसी तरह, 18-कैरेट सोने की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है; कल ₹410 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी के बाद, आज इसमें ₹160 की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹1,16,920 प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया है।

कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

आज सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच हालिया 60-दिन के शांति समझौते का खत्म होना है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का डर फिर से पैदा हो गया है। इसके अलावा, लेबनान पर इज़राइल के हालिया हमलों ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है। नतीजतन, निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) के तौर पर देख रहे हैं। अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने अगले महीने फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को काफी कम कर दिया है। जब ब्याज दरें कम या स्थिर रहती हैं तो निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं, क्योंकि सोने पर कोई निश्चित ब्याज नहीं मिलता है।

चांदी की कीमत क्या है?

आज भारत में चांदी की कीमत ₹250 प्रति ग्राम और ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम है। कल की तुलना में आज चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे और अहमदाबाद जैसे कई शहरों में आज चांदी की कीमत ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम है। वहीं, चेन्नई, केरल और हैदराबाद में कीमत ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम है।

सिंगापुर मॉडल पर आधारित एक शानदार, हाई-टेक शहर – “तीसरा मुंबई” – बनाने की तैयारी…

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मुंबई और नवी मुंबई जैसे सपनों के शहरों के बाद, अब सिंगापुर मॉडल पर आधारित एक शानदार, हाई-टेक शहर – “तीसरा मुंबई” – बनाने की तैयारी चल रही है। मुंबई, जो लगभग 200 साल से मौजूद है और बांद्रा, अंधेरी और वर्ली-कुर्ला से लेकर मीरा रोड, विरार और वसई तक फैली हुई है, उसे तो आप शायद जानते ही होंगे, लेकिन अब एक नया शहर आकार ले रहा है।

“मुंबई 3.0” नाम के इस प्रोजेक्ट को करनाला-साई-चिरनेर (KSC) न्यू टाउन या तीसरा मुंबई के नाम से जाना जाता है। यह स्मार्ट शहर महाराष्ट्र सरकार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) और प्राइवेट कंपनियों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। यह नया शहर रायगढ़ जिले के उरण, पेन और पनवेल तालुका के 124 गांवों को मिलाकर बनाया जाएगा – यह इलाका नवी मुंबई से सटा हुआ है। यह नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 25 किलोमीटर के दायरे में होगा। 21 किलोमीटर लंबे अटल सेतु की वजह से, इस इलाके तक दक्षिण मुंबई से सिर्फ़ 20 से 25 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।

मुंबई 3.0 कहां स्थित होगा?

टाउनशिप और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर 104 वर्ग किलोमीटर में फैले होंगे, जबकि बाकी ज़मीन पर जंगल, ग्रीन ज़ोन और ग्रामीण बस्तियां होंगी। दक्षिण-मध्य मुंबई से बड़ा और नवी मुंबई से ज़्यादा हाई-टेक और हाई-स्पीड वाला यह शहर सिंगापुर या हांगकांग की तरह एक ग्लोबल इकोनॉमिक हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। सिंगापुर की अर्बन डेवलपमेंट कंसल्टेंट सुरबाना जुरोंग इसका मास्टर प्लान तैयार कर रही है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की तरह, इस इलाके में भी एक बड़ा कमर्शियल और फाइनेंशियल हब होगा। यहां डेटा सेंटर पार्क, IT हब, लॉजिस्टिक्स और पोर्ट हब (JNPT के पास) के साथ-साथ ग्लोबल एजुकेशन हब और हेल्थकेयर सेंटर भी होंगे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद दावोस इकोनॉमिक फोरम में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।

मुंबई का क्षेत्रफल कितना है?

मुंबई: 437.71 वर्ग किमी – 1.5 करोड़ (15 मिलियन) आबादी
नवी मुंबई: 343.7 वर्ग किमी – 30-35 लाख (3-3.5 मिलियन) आबादी
थर्ड मुंबई: 323.44 वर्ग किमी
(2040 के लिए आबादी का अनुमान)

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अटल सेतु से जुड़ी हुई है।

मुंबई शहर में साउथ मुंबई, सेंट्रल मुंबई और पूर्वी व पश्चिमी उपनगर शामिल हैं। नवी मुंबई को ‘मुंबई 2.0’ भी कहा जाता है; इसमें नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और पनवेल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले शहरी इलाके शामिल हैं। इसके उलट, ‘मुंबई 3.0’ (थर्ड मुंबई) में उरण, पेन और पनवेल तालुका के 124 गांवों का इलाका शामिल होगा।

अनुमान बताते हैं कि 2040 तक मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) के अधिकार क्षेत्र में आने वाली आबादी 1.5 करोड़ (15 मिलियन) से ज़्यादा हो जाएगी। अगर पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) – जिसमें ठाणे, कल्याण, पालघर और रायगढ़ शामिल हैं – को ध्यान में रखा जाए, तो 2040 तक आबादी 3.2 करोड़ से 3.5 करोड़ (32-35 मिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है। नवी मुंबई की मौजूदा आबादी 15 से 20 लाख के बीच है, लेकिन 2040 तक इसके बढ़कर 35-40 लाख होने की उम्मीद है। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चालू होने और नए मेट्रो व रेलवे कॉरिडोर के बनने से इस इलाके में आबादी का बसना तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे एक नए शहर की ज़रूरत महसूस हो रही है।

‘थर्ड मुंबई’ (KSC न्यूटाउन) को 25 से 30 लाख लोगों की आबादी को बसाने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। एयरोट्रोपोलिस, डेटा सेंटर, कमर्शियल सेंटर और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की मौजूदगी के कारण, इस इलाके में रोज़ाना 10 से 15 लाख लोगों के वर्कफोर्स (काम करने वाले लोगों) की ज़रूरत होगी। ऊंची इमारतों पर निर्भर रहने के बजाय, इसे ’15-मिनट स्मार्ट सिटी’ और ‘ग्रीनफील्ड’ मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि 25-30 लाख लोगों की आबादी को बिना ट्रैफिक जाम या भीड़-भाड़ के कुशलता से संभाला जा सके।

मुंबई 3.0 के लिए कनेक्टिविटी

अटल सेतु (MTHL) के ज़रिए मुंबई शहर (खासकर शिवरी) से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) शहर का मुख्य केंद्र होगा।
यह पनवेल-कर्जत रेल कॉरिडोर के ज़रिए लोकल ट्रेन कनेक्टिविटी भी देगा।

यह विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर के ज़रिए उत्तर-दक्षिण MMR नेटवर्क से जुड़ेगा।

‘तीसरी मुंबई’ (Third Mumbai) की ज़रूरत क्यों है?

मुंबई में ज़मीन की कमी और ज़्यादा आबादी के घनत्व की वजह से रिहायशी और कमर्शियल ज़मीन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं।

नवी मुंबई के मौजूदा इलाकों जैसे वाशी, बेलापुर, खारघर और पनवेल में नए, बड़े पैमाने के इंडस्ट्रियल और बिज़नेस पार्क के लिए खाली ज़मीन की कमी है।

21.8 किलोमीटर लंबे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (अटल सेतु) ने दक्षिण मुंबई और रायगढ़ ज़िले (उरण-पेन-पनवेल) के बीच यात्रा का समय घटाकर सिर्फ़ 20 मिनट कर दिया है।

यह नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आस-पास लॉजिस्टिक्स, एविएशन हब और ग्लोबल बिज़नेस हब की भारी मांग को पूरा करेगा।

मुंबई 3.0 पर अपडेट

ज़मीन को इकट्ठा करने (लैंड पूलिंग) और टाउन प्लानिंग स्कीम पर अभी काम चल रहा है। एयरपोर्ट के चालू होने और अटल सेतु से इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, बिजली और पानी के नेटवर्क) के जुड़ने के साथ, ‘तीसरी मुंबई’ का पहला चरण 2028 और 2030 के बीच पूरा हो सकता है। इसे ‘मेगा-सिटी’ के तौर पर विकसित होने में 2038-2040 तक का समय लग सकता है। मुंबई के उलट, इस इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसमें स्मार्ट ड्रेनेज और वॉटर रिचार्जिंग सिस्टम शामिल हैं, और प्रदूषण कम करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।