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India-France Deal: भारत के लिए जेट इंजन क्यों जरूरी, जिसे फ्रांस के साथ मिलकर बनाएगा?

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भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाते हुए नए करार की घोषणा की गई. पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सौदा हुआ. घोषणा हुई कि दोनों देश मिलकर हथियार और जेट इंजन बनाएंगे.

भारत का डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) और फ्रांस की साफरान (Safran) कंपनी मिलकर इसे तैयार करेंगे. इसकी शुरुआत इसी साल से होगी.

यह पहला मौका नहीं है जब भारत में जेट इंजन के निर्माण के लिए किसी देश के साथ करार किया गया है. फ्रांस से पहले भारत अमेरिका के साथ भी ऐसा ही एक करार कर चुका है. फ्रांस यात्रा के एक महीने पहले पीएम मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान यहां की दिग्गज कंपनी GE एरोस्पेस के साथ जेट डील की थी.

GE एरोस्पेस दुनिया की टॉप एयरक्राफ्ट सप्लायर कंपनी है. इस डील के तहत GE एरोस्पेस और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) मिलकर काम करेंगे. दोनों के जरिए तैयार होने वाले जीई-एफ-414 इंजन को भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किए जा रहे स्वदेशी फाइटर जेट में लगाया जाएगा.ऐसे में सवाल है कि भारत के लिए जेट इंजन क्यों इतना खास है और भारत के लिए कितनी जरूरी हैयह डील.

क्या है जेट इंजन और कैसे करता है काम, पहले इसे समझें?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, विमान के आगे तेज गति से आगे बढ़ने के लिए जेट इंजन ही जिम्मेदार होता है. जेट इंजन को गैस टर्बाइन के नाम से भी जाना जाता है. ये खास तरह से काम करते हैं. इंजन पंखे की मदद से हवा खींचता है और फिर एक कंप्रेसर से हवा का दबाव बढ़ाता है. इस हवा को ईधन और इलेक्ट्रिक स्पार्क के साथ मिलाया जाता है और दबाव पैदा किया जाता है.

एक जेट इंजन फैन, कम्प्रेसर, टर्बाइन, नॉजल और कम्बस्टर जैसे हिस्सों से मिलकर बनता है. पहला एयरक्राफ्ट इंजन हेनरी गिफार्ड ने बनाया. 3 हॉर्स पावर वाला यह इंजन उड़ाने भरने के लिहाज से काफी भारी था.

भारत को जेट इंजन की क्यों जरूरत?

पीएम मोदी का फोकस देश में जेट इंजन के निर्माण का है. ऐसा होने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो जेट इंजन का निर्माण कर रहे हैं. पहले अमेरिका और अब फ्रांस के साथ जेट इंजन डील से तीन बड़े फायदे होंगे. पहला, दुनियाभर में भारत का रुतबा बढ़ेगा. दूसरा- अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ेगा. तीसरा- चीन भी जेट इंजन के निर्माण की तैयारी में है और इस कदम से चीन को तगड़ा झटका मिलेगा.

आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस सेक्टर को खुद को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार कई प्रोजेक्ट चला रही है. जिसमें जेट इंजन का निर्माण करना भी शामिल है.

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट मार्क 2 पर काम किया जा रहा है. इस फाइटर जेट के लिए 99 इंजन बनाए जाने हैं. फिलहाल फाइटर जेट LCA-मार्क1 और मार्क 1A में GE एरोस्पेस के इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

नए प्रोजेक्ट के तहत अब स्वदेशी लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट मार्क 2 के लिए तैयारी की जा रही है. दूसरे फाइटर जेट के मुकाबले इसकी कैपिसिटी कहीं ज्यादा होगी, इसलिए इसके लिए एक पावरफुल इंजन की जरूरत है. जिसे तैयार करने के लिए करार किए गए हैं.

जेट इंजन की तकनीक के जरिए भारत में ऐसे इंजन का प्रोडक्शन बढ़ेगा. देश में इनका निर्माण बढ़ने से लागत बढ़ेगा. अमेरिका के मुकाबले भारत में इसकी लागत कम आएगी और इसका निर्यात करके भारत अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा.

कौन से फाइटर जेट हैं इंडियन एयरफोर्स के पास?

भारतीय वायुसेना के पास LCA मार्क-1 यानी तेजस फाइटर जेट था. इसके आया LCA- मार्क1ए. जिसमें कई अपडेट किए गए थे, लेकिन इंजन वही था. अब डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO)

LCA-मार्क-2 को विकसित करने में जुटा है. दावा किया गया है कि यह काफी खास होगा. दुनिया के दूसरे हल्के फाइटर जेट के मुकाबले अधिक हथियार ले जाए जा सकेंगे.

आसान भाषा में समझें तो ज्यादा हथियार का मतलब है ज्यादा खतरनाक फाइटर जेट. इसके लिए ज्यादा पावरफुल इंजन की जरूरत होगी, जिसके लिए ही यह कवायद चल रही है.

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अडानी बदलेंगे एशिया के सबसे बड़े स्लम की तस्वीर, मुंबई के धारावी की रिडेवलपमेंट की मिल गई मंजूरी

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एशिया के सबसे बड़े स्लम धारावी की तस्वीर बदलने वाली है. मुंबई के धारावी को रिडेवलप करने की मंजूरी महाराष्ट्र सरकार ने अडानी ग्रुप को दे दी है. अब जल्द ही अडानी ग्रुप धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को शुरू कर सकता है.

अब महाराष्ट्र सरकार ने भी इस आबादी वाले एरिया का काम अडानी ग्रुप को दे दिया है. प्रोजेक्ट के सीईओ SVR श्रीनिवास ने बताया कि रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए गवर्नमेंट रेजोल्यूशन जारी कर दिया गया है. अब जल्द ही लेटर ऑफ अवॉर्ड भी जारी किया जाएगा. जिसके बाद अडानी ग्रुप इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर सकेगा.

भोपाल : कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीका से लाए गए एक चीते की गई जान, 4 महीने में 8वीं मौत

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भोपाल: मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान में शुक्रवार को एक नर चीते सूरज की मौत हो गई। सूरज से पहले सात चीतों की मौत हो चुकी है। अफ्रीकी चीता सूरज शुक्रवार सुबह कुनो राष्ट्रीय उद्यान में मृत पाया गया।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि वे सूरज की मौत के सही कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को एक और नर चीता तेजस राष्ट्रीय उद्यान में मृत पाया गया था।

शव परीक्षण से पता चला था कि मादा चीता के साथ हिंसक लड़ाई के बाद चीता दर्दनाक सदमे से उबरने में असमर्थ था। 27 मार्च को साशा नामक मादा चीता की किडनी की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। 23 अप्रैल को उदय की कार्डियो-फुफ्फुसीय विफलता के कारण मृत्यु हो गई और 9 मई को मादा चीता दक्षा की संभोग प्रयास के दौरान एक नर के साथ हिंसक बातचीत के बाद मृत्यु हो गई।

25 मई को चरम मौसम की स्थिति और डीहाइड्रेशन के कारण दो चीता शावकों की मृत्यु हो गई। सूरज की मौत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले साल सितंबर में शुरू किए गए केंद्र के चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम के लिए एक और झटका है। इससे पहले केंद्र ने छह चीतों की मौत के पीछे किसी भी चूक से इनकार किया था।

मई में वन्यजीव विशेषज्ञ विंसेंट वैन डेर मेरवे ने अधिक चीतों की मौत की भविष्यवाणी की थी और कहा था कि पुनरुत्पादन परियोजना में और भी अधिक मृत्यु दर देखने को मिलेगी, जब चीते क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश करेंगे और पार्क में तेंदुओं और बाघों के साथ आमने-सामने आएंगे।

Rain Alert: 14 जुलाई तक इन जगहों पर होगी मूसलाधार बारिश ,जानें अपने शहर के मौसम का अपडेट

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भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 13 जुलाई को पूर्वोत्तर भारत और सिक्किम में भारी बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने कहा है कि गुरुवार को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है और आगे कुछ दिनों के बाद यह बारिश कम होगी।

यही नहीं विभाग ने आगे कहा है कि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी, लेकिन गंगा के मैदानों में अगले चार दिनों तक बारिश जारी रह सकती है। मध्य भारत और प्रायद्वीपीय भारत में 14 जुलाई तक सामान्य बारिश होगी, 15-16 जुलाई को बारिश कम होगी और फिर से वर्षा बढ़ेगी।

उत्तर-पश्चिम भारत जैसे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अगले एक दिन में हल्की, मध्यम या फिर तेज बारिश की संभावना है। यही नहीं कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। विभाग की अगर माने तो 13-16 जुलाई के दौरान पूर्वी राजस्थान और 15 और 16 जुलाई को हिमाचल प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

आईएमडी ने पूर्व और आसपास का पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, अगले एक दिन के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, असम और मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और बिहार में हल्की या फिर मध्यम से तेज बारिस हो सकती है। यही नहीं कुछ जगहों पर तेज बारिश होने की भी बात सामने आई है।

14 और 15 जुलाई को ओडिशा और 13-14 जुलाई को झारखंड में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 13 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है।

वहीं अगर बात हो मध्य भारत की तो अगले चार दिनों के दौरान मध्य प्रदेश में हल्की/मध्यम से व्यापक बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। 13-14 जुलाई को विदर्भ में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 13 जुलाई को पश्चिम मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने कहा है कि पश्चिम भारत में अगले चार दिनों के दौरान कोंकण और गोवा, सौराष्ट्र में हल्की/मध्यम से तेज बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश संभावना जताई गई है। 14-16 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों और 15-16 जुलाई को गुजरात क्षेत्र में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

वहीं अगर बात करेंगे दक्षिण भारत की तो यहां पर 13 और 14 जुलाई को तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल में हल्की/मध्यम से व्यापक बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

पीएम मोदी का इंटरव्यू: फ्रांस के अखबार से प्रधानमंत्री ने कहा- वैश्विक आधार बनेगी हमारी युवा शक्ति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों के 25 वर्ष पूर्ण होने पर फ्रांस यात्रा पर हैं. इस अवसर पर फ्रांस के अग्रणी दैनिक ‘लेस इकोस’ के नई दिल्ली प्रतिनिधि निकोलस बर्रे और क्लेमेंच पेरुचे को दिए गए उनके साक्षात्कार के संपादित अंश –

सवाल : भारत दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है. इससे विश्व पटल पर भारत की स्थिति कैसे बदलेगी?

प्रधानमंत्री मोदी : भारत में हजारों वर्ष पुरानी समृद्ध संस्कृति है. वह दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है. भारत का यह युवा और कुशल मनुष्य बल आगामी दशक में पूरी दुनिया के लिए एक आधार साबित होगा. यह कुशल मनुष्य बल खुलेपन से विचार करने वाला, लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजने वाला, नए तकनीकी ज्ञान को अपनाने वाला और बदलती दुनिया के साथ ताल से ताल मिलाने वाला है. आर्थिक मंदी, अन्न सुरक्षा, महंगाई और सामाजिक क्लेश के चलते विश्व स्तर पर फैली निराशा को देखते हुए भारत में एक नई ऊर्जा, भविष्य के प्रति आशावाद और विश्व में अपना उचित स्थान प्राप्त करने की उत्सुकता दिखाई देती है. विश्व अशांति और विखंडन के मुहाने पर है. ऐसे में पूरी दुनिया में यह भावना है कि एकता, अखंडता, शांति और समृद्धि के लिए भारत अपरिहार्य है. शांति, सौहार्द्र और सहअस्तित्व पर आधारित हमारे मूल्य, हमारे जीवंत लोकतंत्र की सफलता, भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा व तत्वज्ञान, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति के प्रति हमारी वचनबद्धता के कारण दुनिया को भारत में अपना तारणहार नजर आ रहा है. यह मुझे अत्यंत महत्वपूर्ण लग रहा है.

सवाल : क्या आपको ऐसा लगता है कि ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व स्वत: भारत के पास आ रहा है?

प्रधानमंत्री मोदी : भारत को किसी भी पद का अहंकार नहीं है. ‘ग्लोबल साउथ’ को शक्ति प्रदान करने के लिए सामूहिक शक्ति और सामूहिक नेतृत्व की जरूरत है. ‘ग्लोबल साउथ’ को काफी पहले से उसके अधिकारों से वंचित रखा गया है. यदि विश्व मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ को समान आदर, समान अधिकार मिले होते तो विश्व अधिक शक्तिशाली बन सकता था. इस क्षेत्र में भारत का स्थान इतना मजबूत है कि भारत के कंधे पर ‘ग्लोबल साउथ’ ऊंची उड़ान भर सकता है. ‘ग्लोबल साउथ’ के माध्यम से भारत ‘ग्लोबल नॉर्थ’ से उत्तम संबंध निर्मित कर सकता है. भारत इस मामले में एक पुल साबित हो सकता है.

सवाल : 2047 के भारत के बारे में आपका क्या दृष्टिकोण है? वैश्विक संतुलन में भारत के योगदान को आप कैसे देखते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी : 2047 में भारत की आजादी को सौ वर्ष पूर्ण हो जाएंगे. हमारी महत्वाकांक्षा है कि तब तक भारत एक विकसित राष्ट्र बन जाए. भारत सभी नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं एवं अवसर उपलब्ध करवाने वाला समावेशक देश बन जाएगा. सभी नागरिकों को उनके अधिकारों की गारंटी मिलेगी और देश में अपने स्थान तथा भविष्य के बारे में वो आश्वस्त रहेगा. भारत में शाश्वत जीवन शैली, स्वच्छ नदियां, जैव विविधता का संवर्धन करने वाले जंगल रहेंगे. भारतीय अर्थव्यवस्था अवसरों का केंद्र रहेगी, वैश्विक वृद्धि का इंजन बनेगी तथा कौशल व गुणवत्ता का स्रोत बन जाएगी. अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय नियमों के अनुसार संचालित एक संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में हम शक्ति प्रदान करेंगे.

सवाल : क्या आप मानते हैं कि पश्चिमी मूल्यों को अभी भी सभी स्थानों पर स्वीकारा जा रहा है?

प्रधानमंत्री मोदी : दुनिया के हर कोने से विचार प्रक्रियाएं और दर्शन विशेष कालखंड के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे. उसी आधार पर हम यहां तक पहुंच सके हैं. पश्चिम, पूर्व से बेहतर है या फिर फलां-फलां सोच उससे बेहतर है, मैं इसे उस नजरिये से नहीं देखता. हजारों साल पहले लिखे गए हमारे वेद हमें हर तरफ से अच्छे विचारों को स्वीकार करना सिखाते हैं. हम खुद को किसी बक्से में बंद नहीं करते. हमारे अंदर दुनिया में जो कुछ भी अच्छा है उसे स्वीकार करने और अपनाने की क्षमता होनी चाहिए. इसलिए हमारे जी-20 सम्मेलन की अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम्‌’ है! हमने कहा है ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’… लेकिन एक दर्शन नहीं.

सवाल : इस वर्ष भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं. आप इन दोनों देशों के बीच संबंधों को कैसे देखते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी : भारत और फ्रांस के बीच व्यापक साझेदारी है और इसमें राजनीतिक, रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक, मानव-केंद्रित विकास और स्थिरता सहयोग के सभी क्षेत्र शामिल हैं. यह एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है. जब समान दृष्टिकोण और मूल्यों वाले देश द्विपक्षीय या बहुपक्षीय व्यवस्थाओं या क्षेत्रीय संगठनों में एक साथ काम करते हैं तब वे किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम रहते हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ हमारी साझेदारी किसी देश के खिलाफ या विरोध में नहीं है. इस क्षेत्र में हमारे आर्थिक और संरक्षण हितों की रक्षा के लिए, व्यापारी और यात्री यातायात और व्यापार की दिशा सुनिश्चित करने के लिए हम प्रयासरत हैं. हमारा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानून को कायम रखना है. हम अन्य देशों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें स्वतंत्र संप्रभुता चुनने में मदद करने के लिए उनके साथ काम करते हैं. हमारे द्विपक्षीय संबंध मजबूत, विश्वसनीय और उत्कृष्ट हैं. यह अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बने हुए हैं और लगातार नए अवसरों की तलाश में हैं. दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्ध हैं. दोनों इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया बहुध्रुवीय होनी चाहिए.

Kanya Vivah Yojana: गरीब परिवार की बेटियों के लिए वरदान साबित हो रही सीएम कन्या विवाह योजना, राशि में दो बार हुई बढ़ोतरी

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Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से कई गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह से उनके माता-पिता के सपने साकार हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ में पिछले साढ़े चार साल में 25 हजार 302 बेटियों कि शादी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत हुई है.

योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6 हजार 800 जोड़ों का विवाह महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कराया गया है.

इस योजना के तहत जोड़ों को सरकार 50 हजार देती है
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक जोड़े की सहायता राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है. इस योजना के तहत 21 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता सामग्री के रूप में 21 हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट तथा सामूहिक विवाह आयोजन व्यवस्था पर अधिकतम 8 हजार रुपये तक व्यय का प्रावधान भी किया गया है.

इसके लिए बजट में 38 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है. इस साल 1 अप्रैल से बढ़ी हुई राशि से विवाह संपन्न कराए जा रहे हैं. योजना के तहत बढ़ाई गई राशि से अब तक 555 जोड़ों का विवाह कराया गया है. इससे कई परिवारों का बेटियों का विवाह का सपना पूरा हो रहा है.

वरदान साबित हो रही कन्या विवाह योजना
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने योजना के तहत राशि में दो बार वृद्धि की है. भुपेश बघेल ने मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले बजट में ही बेटियों के विवाह को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2019 में विवाह अंतर्गत दी जाने वाली अनुदान राशि को 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दिया था. अब यह राशि बढ़ाकर 50 हजार रूपए कर दी गई है. साल 2019 की तुलना में निर्धारित बजट राशि भी 19 करोड़ रूपए से दोगुना बढ़ाकर 38 करोड़ रूपए कर दी गई है. इससे कई परिवारों में बेटियों के विवाह को लेकर चिंता दूर हुई है.

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Chandrayaan-3 Launch: 40 दिनों में चांद तक, चंद्रयान-3 कैसे पूरा करेगा 3.84 लाख किमी का सफर, जानें

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Chandrayaan 3 Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सफलता की नई इबारत लिखने के लिए तैयार है. आज शुक्रवार (14 जुलाई) को इसरो का महत्वाकांक्षी मून मिशन प्रोजेक्ट अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा.

इसे दोपहर 2.35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाना है. 40 दिनों की यात्रा पूरी करने के बाद चंद्रयान-3 का रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. आइए जानते हैं कि चंद्रयान-3 चंद्रमा तक का सफर कैसे पूरा करेगा.

पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है. चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर पहुंचने की संभावित तिथि 23 अगस्त है. यानि चंद्रयान-3 को चांद की यात्रा पूरी करने में 40 दिनों का समय लगेगा. इस मिशन का पहला टारगेट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग है. ये मिशन का सबसे जटिल हिस्सा भी है. दूसरा टारगेट रोवर का चंद्रमा की सतह पर चहलकदमी करना और तीसरा लक्ष्य रोवर से जुटाई जानकारी के आधार पर चंद्रमा के रहस्यों से परदा उठाना है.

ऑर्बिटर नहीं होगा साथ

चंद्रयान-3 के जरिए इसरो का ये लक्ष्य एलवीएम3एम4 रॉकेट की सफल अंतरिक्ष यात्रा के साथ पूरा होगा. ये बाहुबली रॉकेट चंद्रयान-3 को लेकर अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. इसके साथ लैंडर और रोवर मौजूद होंगे. इस बार चंद्रयान के साथ ऑर्बिटर नहीं भेजा जा रहा है, क्योंकि चंद्रयान-2 के साथ भेजा गया ऑर्बिटर अभी भी वहां काम कर रहा है.

36,968 किमी प्रति घंटे तक होगी रॉकेट की रफ्तार

दोपहर 2.35 बजे जब रॉकेट बूस्टर को लॉन्च किया जाएगा तो इसकी शुरुआती रफ्तार 1627 किमी प्रति घंटा होगी. लॉन्च के 108 सेकंड बाद 45 किमी की ऊंचाई पर इसका लिक्विड इंजन स्टार्ट होगा और रॉकेट की रफ्तार 6437 किमी प्रति घंटा हो जाएगी. आसमान में 62 किमी की ऊंचाई पर पहुंचने पर दोनों बूस्टर रॉकेट से अलग हो जाएंगे और रॉकेट की रफ्तार 7 हजार किमी प्रति घंटा पहुंच जाएगी.

इसके बाद करीब 92 किमी की ऊंचाई पर चंद्रयान-3 को वायुमंडर से बचाने वाली हीट शील्ड अलग होगी. 115 किमी की दूरी पर इसका लिक्विड इंजन भी अलग हो जाएगा और क्रॉयोजनिक इंजन काम करना शुरू कर देगा. रफ्तार 16 हजार किमी/घंटा होगी. क्रॉयोजनिक इंजन इसे लेकर 179 किमी तक जाएगा और इसकी रफ्तार 36968 किमी/घंटे पहुंच चुकी होगी.

पृथ्वी से चांद की कक्षा का सफर

क्रॉयोजनिक इंजन चंद्रयान-3 को पृथ्वी के बाहरी ऑर्बिट में स्थापित करेगा. इसके बाद इसके सौर पैनर खुलेंगे और चंद्रयान पृथ्वी के चक्कर लगाना शुरू कर देगा. धीरे-धीरे चांद अपनी कक्षा को बढ़ाएगा और चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा. चंद्रमा के 100 किमी की कक्षा में आने के बाद लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग किया जाएगा और इसके बाद लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग होगी.

लैंडर के सफलतापूर्वक लैंड होने के बाद रोवर इसमें से बाहर आएगा और चंद्रमा की सतह पर चलेगा. यहां ये जानना जरूरी है कि इसके पूर्व में भेजे गए मून मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर ने चंद्रमा की सतह से 2 किमी पहले ही अपना संपर्क खो दिया था.

Chhattisgarh Weather Update : छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश के आसार, चल सकती हैं तेज हवाएं

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Chhattisgarh Weather : एक तरफ देश के कई इलाकों में भारी बारिश (Rain) ने तबाही मचाई हुई है. कई इलाकों में बाढ़ आ गई है तो कहीं भूस्खलन और नदियां अपने रौद्र रूप में आ चुकी है. जगह-जगह जलभराव की स्थिति सामने आ रही है .

वहीं छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से बारिश में कमी देखने को मिली है और इसबार छत्तीसगढ़ में सामान्य से कम वर्षा हुई है, लेकिन मौसम विभाग (Weather Department) ने संभावना जताई है कि, अब आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश होगी.

आज छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में होगी बारिश

छत्तीसगढ़ मौसम विभाग ने संभावना जताते हुए कहा है कि, 12 जुलाई को छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में मध्यम से हल्की बारिश होगी. इसके साथ ही गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. मौसम विभाग ने कहा कि, मानसून द्रोणिका जैसलमेर, सीकर, उरई, सुल्तानपुर, पटना, मालदा और उसके बाद पूर्व की ओर अरुणाचल प्रदेश तक 0.9 किमी ऊंचाई तक विस्तारित है. आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश होगी.

पिछले 24 घंटों में कहां कितनी बारिश हुई

पिछले 24 घंटों में छत्तीसगढ़ के रायपुर 9, उसूर 8, बालोद 7, कुरूद, डौंडीलोहारा, भैरमगढ़, डौंडी, राजिम-6, गुंडरदेही, धमतरी, छुरा, गुरुर, मानपुर, चारामा, पौंडीउपरोरा 5, मोहला, राजनांदगांव 4, लोरमी, मगरलोड, भोपालपटनम, पखांजूर, बीजापुर, कुआकोंडा, दरभा, मैनपुर, सरायपाली, लाभांडीह, तोकापाल, भानुप्रतापपुर – 3 सेंटीमीटर व कुछ और स्थानों में इससे कम बारिश दर्ज की गई.

आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में होगी अच्छी बारिश

मौसम में विभाग कहा कि, प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. मौसम विभाग चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि, छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात होने की संभावना है. इसके साथ ही मौसम विभाग ने संभावना जताते हुए कहा है कि, आने वाले दो दिनों में छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अच्छी बारिश होगी.

Chhattisgarh: बरसात के मौसम में शबाब पर अमृतधारा और रमदहा वाटरफॉल, पर्यटक उठा रहे लुत्फ

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छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में मानसून की दस्तक के साथ हुई भारी बारिश से अमृतधारा जलप्रपात पूरे शबाब पर है. एनएच 43 लाई पंचायत से 8 किमी दूर स्थित अमृतधारा जलप्रपात में पानी का बहाव तेज होने से यह प्रपात धुआंधार में बदल गया है.

यहां का खूबसूरत नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. छत्तीसगढ़ के साथ ही पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के पर्यटन भी यह वाटरफॉल को देखने बड़ी संख्या में पहुंच रहे है.

जलप्रपात की सुंदरता बारिश होते ही निखर आई है. यहां करीब 100 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है जो जलप्रपात का निर्माण करता है. जानकारी के अनुसार यह जलप्रपात मनेन्द्रगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम लाई से 8 किलोमीटर और मनेन्द्रगढ़ जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर स्थित है. इस जलप्रपात तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है.

100 फीट की ऊंचाई से गिरता है पानी
जिले के विशिष्ट पर्यटन केन्द्र के रूप में पहचान बना चुके अमृतधारा जलप्रपात में पानी 100 फीट की ऊंचाई से गिरता है. इतनी ऊंचाई से गिरती जलधारा की दुधिया अनुपम छटा देखते ही बनती है. आस पास के घने जंगल के बीच बना यह जलप्रपात मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. जलप्रपात के समीप जनजातियों से बसे गांव का नाम भी अमृतधारा है. इस जलप्रपात का पुराना नाम विसवाही था जिसे बाद में कोरिया रियासत के राजा ने अमृतधारा नाम दिया. अमृतधारा जलप्रपात में साल भर पर्यटक और सैलानी आते है, जो यहां की मनमोहक दृश्य का आनंद उठाते है. अमृतधारा जलप्रपात का मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य किसी को भी अपनी और बरबस आकृष्ट करने में सक्षम है, जो भी यहां इसकी मनोरम छटा को देखता है. वह यहां के सौंदर्य के प्रति आकर्षित होकर रह जाता है.

रमदहा जलप्रपात की बढ़ी खूबसूरती
बारिश शुरू होने के बाद जंगलों और जलप्रपातों की खूबसूरती में निखार आने लगे हैं, लोग इस सावन के महीने में खूबसूरत जगहों पर सैर सपाटे से नहीं चूक रहे है. गर्मी में पतझड़ की मार झेल चुके पेड़ों ने फिर से हरियाली की चादर ओढ़ ली है. वहीं झरने की खूबसूरती भी शबाब पर हैं. ऐसे में मनेन्द्रगढ़ जिले के रमदहा जलप्रपात की खूबसूरती की भी चर्चा भी जोरों पर है, बनास नदी पर स्थित ये जलप्रपात इन दिनों काफी मनमोहक लग रहा है. जिसे देखने के लिए हर दिन सैकड़ों लोग यहां पहुंच रहे हैं.

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जैन मुनि के 9 टुकड़े कर हुई थी हत्या, जैन समुदाय ने संतों के लिए मांगी सिक्योरिटी, निकाला मशाल जूलुस

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बागपत : कर्नाटक में नंदी पर्वत आश्रम से जैन संत का अपहरण के बाद 9 टुकड़े कर हत्या का मामला सामने आया था। ये हत्याकांड अब लगातार तूल पकड़ता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश के बागपत में आक्रोशित जैन समाज के लोगों ने कल रात मशाल जूलुस निकाला और साथ ही सरकार से आरोपितों को फांसी देने, इस हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने और संतों को सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की है।

मुनि की हत्या पर जैन समाज के लोगों में भारी रोष
बता दें कि 5 जुलाई की रात को दो आरोपियों ने कर्नाटक के बेलगांव जिले के चिकोड़ी थाना के हिरकोड़ी गांव स्थित नंदी पर्वत आश्रम में चातुर्मास कर रहे जैन सन्त आचार्य कामकुमार नंदी महाराज का अपहरण कर हत्या कर दी। हत्या के बाद जैन मुनि का शव एक बोरवेल में कई टुकड़ों में मिला। इस जघन्य घटना को लेकर जैन समाज में भारी रोष है। सोमवार को जैन समाज के लोगों ने एसडीएम को प्रधानमंत्री संबोधित ज्ञापन सौंपा था। बुधवार को छोटा बाजार स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बैठक कर घटना का विरोध किया। इसके बाद महिला और पुरुषों ने बड़ा जैन मंदिर से शुरू होकर गांधी प्याऊ, मैन बाजार, जैन कॉलेज होते हुए वापिस मंदिर तक मशाल जूलुस निकाला।

मशाल जुलूस में अन्य समाज के लोग भी शामिल
जैन समाज के लोगों ने सरकार से आरोपितों को फांसी देने के साथ, हत्याकांड की एजेंसी से जांच और संतों को सुरक्षा दिए जाने की मांग की है। इस मशाल जूलुस में जैन समाज के साथ अन्य समाज के लोग भी शामिल रहे। मशाल जुलुश में जैन समाज की ओर से मुनील जैन, सुमेर जैन, अजेश जैन, मनोज, चुनमुन, महेश, संजीव, रेणु जैन, प्राची जैन, ज्यारानी, कमलेश, रेखा, सरिता, वत्सल आदि शामिल रहे।