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आधार से जुड़ा नया AI स्कैम! डिजिटल अरेस्ट के बाद अब ठगों का सबसे खतरनाक दांव, हो गया खुलासा…

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AI Cyber Fraud: यह मामला तब सामने आया जब थलतेज इलाके के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उनकी जानकारी के बदल दिया गया है.

AI Cyber Fraud: देश में साइबर ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बाद अब एक नया और ज्यादा खतरनाक तरीका सामने आया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधार डेटा से छेड़छाड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है. गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ जहां साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

कैसे सामने आया पूरा मामला

यह मामला तब सामने आया जब थलतेज इलाके के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उनकी जानकारी के बदल दिया गया है. यह बदलाव सामान्य नहीं था बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साइबर ठगी का खेल चल रहा था.

ऐसे दिया गया ठगी को अंजाम

जांच में पता चला कि आरोपियों ने आधार रिकॉर्ड में बदलाव करके पीड़ित का मोबाइल नंबर हटाकर अपना नंबर जोड़ लिया. इसके बाद उनके पास आने वाले OTP सीधे ठगों तक पहुंचने लगे. इसी के जरिए उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और डिजिलॉकर जैसे संवेदनशील अकाउंट्स तक पहुंच बना ली. इतना ही नहीं, ठगों ने KYC डिटेल्स में भी बदलाव किया जिससे पूरा कंट्रोल उनके हाथ में आ गया और असली यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगी.

AI का खतरनाक इस्तेमाल

इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगों ने AI टूल्स का भी सहारा लिया. उन्होंने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जिनमें चेहरे की हल्की हरकतें दिखाई देती थीं. इन क्लिप्स का इस्तेमाल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए किया गया जो आमतौर पर लाइवनेस डिटेक्शन पर आधारित होता है.

बैंक अकाउंट और लोन तक पहुंच

ठगों ने पीड़ित की जानकारी का इस्तेमाल करके तीन अलग-अलग बैंकों में e-KYC के जरिए अकाउंट खोलने की कोशिश की. इसके अलावा, उनके नाम पर जियो पेमेंट्स बैंक से 25,000 रुपये का लोन भी ले लिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आधार अपडेट किट का गलत इस्तेमाल किया. ये किट कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए इस्तेमाल की जाती हैं लेकिन इन्हें अवैध तरीके से हासिल कर आधार रिकॉर्ड में बदलाव किए जा रहे थे.

क्या करें अगर आप साइबर फ्रॉड का शिकार हों

अगर आपको किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी का शक हो तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है. आप 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. साथ ही, अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं और तुरंत बैंक से संपर्क करके अपने अकाउंट और कार्ड्स को सुरक्षित करें.

CBSE Class 12 Result 2026: क्या 10 से 15 मई के बीच आएगा CBSE 12वीं का रिजल्ट, जान लें ताजा अपडेट’

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CBSE Class 12 Result 2026: क्या CBSE 12वीं का रिजल्ट 10 से 15 मई के बीच आएगा? आइए जानते हैं लेटेस्ट अपडेट, पिछले सालों का ट्रेंड, रिजल्ट डेट की संभावनाएं क्या हैं.

CBSE Class 12 Result 2026: जहां Central Board of Secondary Education (CBSE) ने कक्षा 10 के नतीजे अप्रैल की शुरुआत में ही जारी कर दिया था, वहीं लाखों छात्र अभी भी कक्षा 12 के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. परीक्षा खत्म होने के बाद सबसे बडा सवाल यही होता है कि रिजल्ट कब आएगा? पिछले सालों के आंकड़े बताते हैं कि यह देरी कोई नई बात नहीं है और रिजल्ट आमतौर पर CBSE के तय समय के अनुसार ही आता है. साथ ही इस बार भी अलग अलग रिपोर्ट्स में रिजल्ट डेट को लेकर चर्चा तेज है. खासकर 10 से 15 मई के बीच रिजल्ट आने की संभावना को लेकर छात्रों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है.

10 से 15 मई क्यों मानी जा रही संभावित तारीख

इस साल कक्षा 12 की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थीं. परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपियों की जांच का काम अलग-अलग चरणों में शुरू किया गया. इसके लिए CBSE के डिजिटल मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कॉपियां जल्दी जांची जा सकें और सभी विषयों में एक जैसा मूल्यांकन हो सके. रिपोर्ट्स के अनुसार CBSE 12वीं का रिजल्ट 10 से 15 मई 2026 के बीच जारी हो सकता है. यह अनुमान पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखकर लगाया जा रहा है, क्योंकि बोर्ड अक्सर इसी समय के आसपास रिजल्ट जारी करता रहा है. साल 2024 और 2025 में रिजल्ट 13 मई को घोषित हुआ था, जबकि 2023 में यह 12 मई को आया था. इससे यह समझ आता है कि हर साल मई के बीच यानी 10 से 15 मई के बीच रिजल्ट आने का एक तय पैटर्न बन गया है. हालांकि अभी तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह समय सबसे ज्यादा संभावित माना जा रहा है.

तीसरे हफ्ते की भी जताई जा रही संभावना

कुछ आधिकारिक अपडेट्स में यह भी बताया गया है कि रिजल्ट मई के तीसरे हफ्ते में भी जारी किया जा सकता है. CBSE के अधिकारियों के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और रिजल्ट की तैयारी चल रही है. ऐसे में यह साफ है कि रिजल्ट मई के मध्य या तीसरे सप्ताह तक जारी होने की पूरी संभावना है.

रिजल्ट कहां और कैसे देख सकेंगे छात्र

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इसे CBSE की आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in पर जाकर देख सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी डालनी होगी. इसके अलावा DigiLocker और UMANG ऐप के जरिए भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. यह डिजिटल मार्कशीट अस्थायी होती है, जबकि ओरिजिनल मार्कशीट बाद में स्कूल से मिलती है.

Emergency Alert: सरकार ने पूरे देश में एक साथ भेजा अलर्ट मैसेज, क्या ऐसे आपके फोन में कुछ भी हो सकता है बदलाव?

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Emergency Alert: 2 मई को एक साथ कई लोगों के फोन पर इमरजेंसी अलर्ट आया था. इससे लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि क्या ऐसे दूर बैठे-बैठे फोन में और कोई बदलाव भी किए जा सकते हैं?

Emergency Alert: 2 मई की सुबह लगभग 11.40 बजे सरकार की तरफ से मोबाइल पर एक इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया था. यह सरकार के एक नए सिस्टम का ट्रायल था. यह अलर्ट सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को परखने के लिए भेजा गया था. किसी प्राकृतिक आपदा के समय लोगों को अलर्ट करने के लिए यह सिस्टम बनाया गया है. अगर कोई फोन साइलेंट है तो भी यह अलर्ट आने पर उसमें साउंड आएगी और यह फोन की स्क्रीन पर पॉप-अप होगा. ऐसे में कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी आ सकता है कि क्या अलर्ट भेजने की तरह दूर बैठकर फोन में कुछ भी बदलाव किया जा सकता है? आज हम इस सवाल का जवाब जानेंगे.

कैसे भेजे गया था इमरजेंसी अलर्ट?

2 मई को सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी की मदद से लोगों को अलर्ट किया गया था. यह सिस्टम किसी इलाके में एक साथ कई लोगों को एक साथ अलर्ट मैसेज भेजने के काम आती है. इस पर नेटवर्क कंजेशन का कोई असर नहीं होता और अलर्ट भेजते ही लोगों के मोबाइल पर पहुंच जाता है. इसे 1990 के दशक में यूरोपीय टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट ने डेवलप किया था और आज 30 से अधिक देशों में इसे यूज किया जा रहा है.

यह टेक्नोलॉजी काम कैसे करती है?

किसी इलाके में लगे मोबाइल टावर अपनी रीच में आने वाले फोन के साथ कम्युनिकेट करते रहते हैं और नेटवर्क भी प्रोवाइड करते हैं. जिस टेक्नोलॉजी के कारण टावर से मोबाइल के बीच इस कम्युनिकेशन होता है, उसे सेल ब्रॉडकास्ट कहा जाता है. इस टेक्नोलॉजी का यूज कर सरकार इमरजेंसी अलर्ट इश्यू कर सकती है. यह वन-वे कम्युनिकेशन होता है, जो एक टावर से कनेक्टेड सभी मोबाइल पर एक साथ मैसेज भेज सकता है. इसके लिए न तो इंटरनेट की जरूरत है और न ही सरकार के पास किसी मोबाइल यूजर का नंबर होना जरूरी है.

क्या इससे फोन में और बदलाव हो सकते हैं?

इस सवाल का जवाब है नहीं. यह टेक्नोलॉजी read-only communication channel को सपोर्ट करती है और इसके जरिए फोन की ऐप्स, फाइल्स और सेटिंग्स को एक्सेस नहीं किया जा सकता.

फिर फोन में रिमोटली चेंज कैसे किया जा सकता है?

अगर आप सोच रहे हैं कि आपको फोन में रिमोटली चेंजेज नहीं किए जा सकते तो भी आप गलत हैं. स्पाईवेयर की मदद से कोई भी दूर बैठकर आपके फोन को ऑपरेट कर सकता है. स्पाईवेयर इंस्टॉल होने के बाद आपके यूज न करने पर भी फोन लगातार यूज किया जा सकता है. इसकी मदद से फोन की हर फाइल, कैमरा और माइक्रोफोन तक को एक्सेस किया जा सकता है.

‘निशांत कुमार ने पटना से शुरू की ‘सद्भाव यात्रा’, पिता नीतीश कुमार से लिया आशीर्वाद’

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Nishant Kumar Sadbhav Yatra: निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू हो गई है. इस दौरान वह रथ से निकले हैं.

पश्चिम चंपारण की पावन धरा से प्रारंभ होने वाली ‘सद्भाव यात्रा’ के पहले दिन रविवार (3 मई) को निशांत कुमार ने पटना में पिता नीतीश कुमार से आशीर्वाद प्राप्त किया. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और जेडीयू नेता निशांत कुमार आज से बिहार यात्रा पर निकल रहे हैं.

निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू होगी. इस दौरान वह रथ से निकले हैं. जिस रथ से निशांत कुमार निकले हैं उसका नाम निश्चय रथ रखा गया है. निशांत कुमार के साथ उनके रथ पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार मौजूद हैं.

निशांत के लिए बड़ी चुनौती

निशांत के लिए यात्रा बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बिना किसी पद के वह यात्रा पर निकल पड़े हैं. उनकी यात्रा पर विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत जो पद चाहते वह उनको मिलता, लेकिन उन्होंने पद को ठुकराया और जनता के बीच जाने का निर्णय लिया.

श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत कुमार बिहार में नीतीश कुमार के काम को लोगों को बताएंगे और पहुंचाएंगे. उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं से निशांत खुद को कनेक्ट जोड़ने की कोशिश करेंगे. निशांत हमारे नेता हैं और अब उनकी यह यात्रा संगठन पार्टी को मजबूत करेगी.

यात्रा को लेकर क्या बोले निशांत कुमार?

जेडीयू नेता निशांत कुमार ने यात्रा को लेकर कहा कि इसका उद्देश्य अमीर हो या गरीब, दलित हो या गैर-दलित सभी को साथ लेकर चलना है. उन्होंने कहा कि सभी के बीच भाईचारे की भावना होनी चाहिए. महात्मा गांधी ने भी सत्याग्रह आंदोलन चंपारण से शुरू किया था और मेरे पिता ने भी वहीं से शुरुआत की थी. इसलिए मैं भी उसी राह पर चल रहा हूं.

इस यात्रा का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है. उन्होंने आगे कहा कि यह मेरी पहली राजनीतिक यात्रा है. निशांत ने कहा कि अपने कार्यकर्ता भाइयों से मिलना, उनके विचार सुनना और उनसे बातचीत करना है. मैं लोगों से मिलने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करूंगा.

किस देश का पासपोर्ट दुनिया में नंबर-1, भारत और पाकिस्तान किस पायदान पर? सामने आई 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग, देखें लिस्ट

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Passport Ranking 2026: 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग में सिंगापुर दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट बनकर उभरा है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं.

Passport Ranking 2026: आपका पासपोर्ट यह तय करता है कि आप दुनिया के कितने देशों में आसानी से जा सकते हैं. साल 2026 में सबसे ताकतवर और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच करीब 170 देशों का फर्क है. यह आंकड़े Henley Passport Index के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि किसी देश के नागरिक बिना वीजा कितनी जगहों पर जा सकते हैं.

सिंगापुर सबसे आगे, 192 देशों में बिना वीजा एंट्री

सिंगापुर इस लिस्ट में पहले स्थान पर है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. यह आंकड़ा सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के मुकाबले लगभग पांच गुना ज्यादा है. वहीं सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. यह अंतर दिखाता है कि भूगोल, कूटनीति और राजनीतिक स्थिरता वैश्विक यात्रा पर कितना असर डालती है.

एशिया और यूरोप के पासपोर्ट सबसे मजबूत

सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात हैं, जहां के नागरिक 187 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. संयुक्त अरब अमीरात पूर्वी एशिया के बाहर सबसे मजबूत पासपोर्ट रखता है, लेकिन एक कमी यह है कि यहां के नागरिकों को संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती, जबकि सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया को यह सुविधा है. इसके बाद यूरोप के देश इस सूची में आगे हैं, खासकर नॉर्वे और स्विट्जरलैंड, जिनके नागरिक 185 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं.

यूरोपीय संघ के 27 देशों का एक साझा पासपोर्ट सिस्टम है, लेकिन हर देश की वीजा-फ्री पहुंच अलग-अलग है. बुल्गारिया और रोमानिया के नागरिक 177 देशों में जा सकते हैं, जबकि स्वीडन के नागरिक 186 देशों में. औसतन यूरोपीय संघ की ताकत 183 देशों की है, जो मलेशिया और यूनाइटेड किंगडम के बराबर है. यह कनाडा (182) और संयुक्त राज्य अमेरिका (179) से भी थोड़ा आगे है.

सबसे कमजोर पासपोर्ट: 50 से कम देशों में एंट्री

रैंकिंग के निचले हिस्से में पासपोर्ट की ताकत काफी कम हो जाती है. सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में जा सकते हैं. इन देशों में अक्सर राजनीतिक अस्थिरता, ज्यादा पलायन या हाल के संघर्ष देखने को मिलते हैं, जिससे वीजा नियम सख्त हो जाते हैं. अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया (44), सोमालिया (32) और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (43) इस सूची में नीचे हैं. इन देशों की तेजी से बढ़ती आबादी और बड़े प्रवासी समुदाय भी वीजा प्रतिबंधों का कारण बने हैं.

पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में गिना जाता है. यह 98वें स्थान पर है और यह रैंक यमन के साथ साझा करता है. आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तानी पासपोर्ट रखने वाले लोग सिर्फ करीब 31 से 35 देशों में ही बिना वीजा या पहुंचने पर वीजा लेकर यात्रा कर सकते हैं, यानी उनके लिए दूसरे देशों में जाना काफी सीमित है.

पासपोर्ट की ताकत दिखाती है वैश्विक असमानता

पासपोर्ट रैंकिंग सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि वैश्विक असमानता को भी दिखाती है. आप किस देश में पैदा हुए हैं, इससे यह तय होता है कि आप दुनिया के किन हिस्सों में जा सकते हैं. अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के पासपोर्ट आमतौर पर यूरोप और पश्चिमी देशों के मुकाबले कमजोर हैं. हालांकि मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ अपवाद हैं, लेकिन इन्हें भी अमेरिका जैसे बड़े देशों में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती.

टॉप 20 सबसे ताकतवर पासपोर्ट (2026)

रैंक देश वीजा-फ्री गंतव्य
1 सिंगापुर 192
2 जापान 187
2 दक्षिण कोरिया 187
2 संयुक्त अरब अमीरात 187
5 नॉर्वे 185
5 स्विट्जरलैंड 185
7 यूरोपीय संघ (औसत) 183
7 मलेशिया 183
7 यूनाइटेड किंगडम 183
10 ऑस्ट्रेलिया 182
10 कनाडा 182
10 न्यूजीलैंड 182
13 लिकटेंस्टीन 180
14 आइसलैंड 179
14 संयुक्त राज्य अमेरिका 179
16 मोनाको 176
17 चिली 174
17 हांगकांग 174
19 एंडोरा 169
20 अर्जेंटीना 168
20 ब्राज़ील 168

भारतीय पासपोर्ट की स्थिति

भारत का पासपोर्ट इस साल 80वें स्थान पर है. भारतीय नागरिक 55 से 58 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं.

दिल्ली अग्निकांड पर CM रेखा गुप्ता ने जताया दुख, कहा- पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है सरकार…

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Delhi Vivek Vihar fire Live: इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद किए गए. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है.

पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक इमारत के अंदर आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई है. घटना के बाद मौके पर राहत-बचाव का काम जारी है. शाहदरा के विवेक विहार स्थित एक चार मंजिला इमारत में आग लग गई. आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की ओर से काबू पाने के प्रयास जारी हैं. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद हैं.

आग बिल्डिंग के छह फ्लैट्स के अंदर घरेलू सामान में लग गई थी. इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद कर लिए गए हैं. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है. दिल्ली पुलिस द्वारा सभी शवों को क्राइम टीम को सौंप दिया गया है. फिलहाल घटनास्थल पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है.

यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते कई फ्लोर इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के मुताबिक, यह आग विवेक विहार फेज-1 के एक बहुमंजिला मकान में लगी थी. फायर कंट्रोल रूम को इस हादसे की सूचना तड़के 3:48 बजे मिली थी, जिसके बाद तुरंत पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बिल्डिंग के दूसरे, तीसरे और चौथे फ्लोर पर आग लगी हुई थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल की करीब 12 से 14 गाड़ियां मौके पर लगाई गईं.

राहत-बचाव दलों ने शुरू किया प्रयास

फायर ब्रिगेड, पुलिस, क्राइम टीम, ट्रैफिक पुलिस और डीडीएमए की टीम ने मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया. करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इसके बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा, खासकर ऊपरी मंजिलों पर, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अंदर फंसा न रह जाए.

शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे आग लगने की कॉल मिली थी और तुरंत टीम मौके पर पहुंच गई थी. उन्होंने कहा कि आग पर काबू पाने में करीब दो घंटे लगे, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. बचाव कार्य के दौरान करीब 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेजा गया.

घायलों को अस्पताल में कराया भर्ती

वहीं, कुछ अन्य घायलों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस आग में कुल नौ लोगों की जान चली गई. यह संख्या और बढ़ भी सकती है, क्योंकि अभी सर्च ऑपरेशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग इतनी भयानक थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला. कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे, जबकि कुछ लोग अंदर ही फंस गए थे.फिलहाल आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं.

Scam Alert: एक सेकंड हैंड कार खरीदने का बना रहे प्लान? इस बड़े स्कैम से हो जाएं सावधान…

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Second Hand Car Scam: कोई भी ऑनलाइन डील करते समय सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि बिना जांच-पड़ताल के पैसे न भेजें, अजनबी लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें. आइए डिटेल्स जान लेते हैं.

आजकल ऑनलाइन स्कैम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. खासकर सेकेंड हैंड कार खरीदने-बेचने के नाम पर, कई लोग सस्ती डील के लालच में आकर ठगों के जाल में फंस जाते हैं. साथ ही अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि ये फ्रॉड कैसे होते हैं और अगर आपके साथ ऐसा हो जाए तो शिकायत कहां और कैसे करनी चाहिए?

इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को कार बेचने वाला या डीलर बताकर लोगों को भरोसे में लेते हैं. वे इंटरनेट या सोशल मीडिया पर कार की आकर्षक फोटो और कम कीमत डालते हैं, ताकि लोग जल्दी से संपर्क करें. फिर वे एडवांस पेमेंट या बुकिंग के नाम पर पैसे मांग लेते हैं.

इन स्कैम्स से रहें सावधान

कई बार स्कैमर्स फर्जी डॉक्यूमेंट्स, नकली वेबसाइट या पहचान भी दिखाते हैं, जिससे सब कुछ असली लगे. लेकिन जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, ठग गायब हो जाते हैं और खरीदार को समझ आता है कि उसके साथ धोखा हो गया है.

तुरंत कार्रवाई करना जरूरी

अगर आपके साथ ऐसा ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो सबसे जरूरी है कि तुरंत कार्रवाई करें. सरकार ने इसके लिए एक खास प्लेटफॉर्म बनाया है, जिसे National Cybercrime Reporting Portal कहा जाता है. यहां आप ऑनलाइन जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.  इसके अलावा, आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में भी शिकायत कर सकते हैं.

इस हेल्पलाइन नंबर पर करें कॉल

इसके साथ ही एक बहुत जरूरी हेल्पलाइन नंबर 1930 भी जारी किया गया है. अगर आपके साथ फ्रॉड हुआ है तो तुरंत इस नंबर पर कॉल करना चाहिए. खास बात यह है कि अगर आप जल्दी शिकायत कर देते हैं, तो कई बार ट्रांजैक्शन को रोका या पैसा वापस दिलाने की कोशिश की जा सकती है.

ऑनलाइन डील करते समय रहें सावधान

पुलिस का कहना है कि लोग अक्सर देर से शिकायत करते हैं, जिससे ठगों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. इसलिए जैसे ही आपको शक हो कि आपके साथ धोखा हुआ है तो तुरंत कार्रवाई करना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही कोई भी ऑनलाइन डील करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि बिना जांच-पड़ताल के पैसे न भेजें, अजनबी लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें और हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें.

एक बूथ पर कितना खर्च करता है चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल में रि-वोटिंग से कितना नुकसान?

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Kolkata West Bengal Re-Polling: पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर, मगराहाट पश्चिम और फलता में दोबारा मतदान से चुनाव आयोग को भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. चलिए जानें कि एक बूथ पर कितना खर्चा आता है.

लोकतंत्र का महापर्व यानी चुनाव कराने में भारी-भरकम सरकारी मशीनरी और करोड़ों रुपये का खर्च लगता है. एक-एक पोलिंग बूथ को सुरक्षित और चालू हालत में तैयार करने के लिए लाखों रुपये खर्च होते हैं. ऐसे में जब किसी धांधली या हिंसा की वजह से दोबारा मतदान यानी री-पोलिंग करानी पड़ती है, तो वह पूरा खर्च सीधे दोगुना हो जाता है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर, मगराहाट पश्चिम और फलता विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने के चुनाव आयोग के फैसले ने इस चुनावी खर्च और इसके आर्थिक नुकसान को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है.

फलता में दोबारा चुनाव का फैसला

पश्चिम बंगाल के चुनावी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा वोटिंग कराने के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं. आयोग ने यह कड़ा कदम चुनाव प्रक्रिया के दौरान मिलीं गंभीर शिकायतों और गड़बड़ियों की जांच के बाद उठाया है. आयोग का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए फलता में री-पोलिंग कराना बेहद जरूरी हो गया था. इस नए आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने तैयारियों को तेज कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और बढ़ गया है.

15 बूथों पर फिर से मतदान

इससे पहले पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों के 15 पोलिंग बूथों पर कड़ी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान संपन्न कराया गया. इसमें डायमंड हार्बर के 4 बूथ और मगराहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल थे, जहां 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर दिया गया था. इन सभी 15 बूथों पर 2 मई को दोबारा वोट डलवाए गए. चुनाव आयोग को यहां नई सिरे से व्यवस्थाएं करनी पड़ीं, क्योंकि पहले दिन हुई गड़बड़ियों के कारण जनता का भरोसा बहाल करना जरूरी था. इस री-पोलिंग ने प्रशासनिक अमले की मेहनत और समय दोनों को काफी बढ़ा दिया.

एक बूथ को सजाने का खर्च

आखिर एक पोलिंग बूथ को तैयार करने में कितना पैसा लगता है? चुनाव आयोग जब किसी एक बूथ को वोटिंग के लिए तैयार करता है, तो उसमें खर्चों की एक लंबी लिस्ट शामिल होती है. इसमें सबसे पहले ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनों का सुरक्षित प्रबंधन और ट्रांसपोर्टेशन आता है. इसके अलावा वहां तैनात होने वाले मतदान कर्मियों का यात्रा भत्ता, खाने-पीने का इंतजाम, स्टेशनरी और अब वेबकास्टिंग जैसी आधुनिक तकनीक का खर्च भी जुड़ता है. अनुमान बताते हैं कि देश में एक सामान्य चुनाव के दौरान प्रति बूथ औसतन 1 लाख रुपये या उससे अधिक का खर्च आता है.

सुरक्षा व्यवस्था में सबसे ज्यादा खर्च

एक सामान्य पोलिंग बूथ पर होने वाले खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सुरक्षा व्यवस्था में जाता है. चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए वहां भारी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों को तैनात किया जाता है. जवानों के ठहरने, आने-जाने और उनके भत्तों पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है. संवेदनशील राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल में तो यह सुरक्षा खर्च सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में जब किसी बूथ पर दोबारा चुनाव होता है, तो सुरक्षा बलों को फिर से वहां तैनात करना पड़ता है, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है.

री-वोटिंग से सरकारी खजाने को कितनी चोट?

जब भी किसी विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान होता है, तो वह सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालता है. चुनाव आयोग को री-पोलिंग के लिए नए सिरे से वैसी ही पूरी तैयारी करनी पड़ती है, जैसी सामान्य चुनाव में होती है. इसमें पोलिंग अधिकारियों को दोबारा ड्यूटी पर भेजना, नई मशीनों की टेस्टिंग और सबसे जरूरी, संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की फिर से तैनाती शामिल है. यह सारा अतिरिक्त खर्च सीधे सरकारी खजाने से जाता है, जिसका कोई दूसरा फायदा नहीं होता और यह पूरी तरह से पैसे का नुकसान है.

आम जनता की जेब पर असर

चुनाव में जो भी पैसा खर्च किया जाता है, वह देश के नागरिकों द्वारा चुकाए गए टैक्स से आता है. जब भी राजनीतिक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग या अन्य गड़बड़ियों की वजह से दोबारा मतदान होता है, तो वह आम जनता के पैसे की बर्बादी होती है. पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहां पहले से ही भारी सुरक्षा बलों की जरूरत होती है, वहां री-वोटिंग कराना प्रशासन के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन जाता है. इससे न सिर्फ लाखों रुपयों का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि सरकारी अमले को अपनी सामान्य ड्यूटी छोड़कर दोबारा चुनावी काम में जुटना पड़ता है.

‘आज के पहले मैच में SRH और KKR की भिड़ंत, जानें हैदराबाद-कोलकाता की प्लेइंग इलेवन, पिच रिपोर्ट और मैच प्रिडिक्शन’

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Sunrisers Hyderabad vs Kolkata Knight Riders: आईपीएल 2026 में आज दो मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स की भिड़ंत होगी. यहां जानें इस मुकाबले की A टू Z डिटेल्स.

आईपीएल का आज सुपर संडे है. यानी आज आईपीएल 2026 में दो मैच खेले जाएंगे. पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीमें भिड़ेंगी. यह मैच हैदराबाद को होम ग्राउंड राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा. केकेआर पिछले दो मैच जीतकर आई है. लखनऊ के खिलाफ उसे सुपर ओवर में जीत मिली थी. वहीं राजस्थान के खिलाफ केकेआर ने हारी हुई बाजी जीती थी. दोनों ही मैच में रिंकू सिंह ने अर्धशतक लगाया था. वहीं हैदराबाद ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 243 रन चेज किए हैं. दोनों ही टीमें जीत की सिलसिले को बरकरार रखना चाहेंगी. हालांकि, आज एक टीम की हार तय है.

पैट कमिंस की सनराइजर्स हैदराबाद प्वाइंट्स टेबल में तीसरे नंबर पर है. इस सीजन अब तक हैदराबाद ने 9 मैच खेले हैं. इस दौरान 6 मैचों में जीत मिली है तो तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. वहीं केकेआर के लिए यह सीजन कुछ खास नहीं बीता है. केकेआर ने अब तक आठ मैच खेले हैं. इस दौरान सिर्फ दो मैच ही जीते हैं. अंक तालिका में कोलकाता नाइट राइडर्स 8वें नंबर पर है.

हेड टू हेड में कौन आगे?

सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच हेड टू हेड में अजिंक्य रहाणे की केकेआर काफी आगे है. कोलकाता ने अब तक हैदराबाद को 20 बार हराया है. वहीं SRH अब तक केकेआर को सिर्फ 11 मैचों में हरा सकी है. हैदराबाद के मैदान पर हेड टू हेड का आंकड़ा 4-3 है, जिसमें भी केकेआर आगे है.

राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच रिपोर्ट  

हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए मुफीद मानी जाती है. यहां हाई स्कोरिंग मैच देखने को मिलते हैं. दिन का मैच है. ऐसे में गर्मी काफी रहेगी. टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला ले सकती है.

मैच प्रिडिक्शन 

हमारा मैच प्रिडिक्शन मीटर कह रहा है कि इस मैच में पहले बैटिंग करने वाली टीम की जीत की उम्मीद ज्यादा है. यानी आज डिफेंड होगा. इस वीक सभी मैचों में चेज करने वाली टीम जीती है. ऐसे में आज उलटफेर हो सकता है.

सनराइजर्स हैदराबाद की संभावित प्लेइंग इलेवन अभिषेक शर्मा, ट्रेविस हेड, ईशान किशन (विकेटकीपर), हेनरिक क्लासेन, नितीश कुमार रेड्डी, सलिल अरोड़ा, अनिकेत वर्मा, पैट कमिंस (कप्तान), हर्ष दुबे, साकिब हुसैन और प्रफुल्ल हिंगे

इम्पैक्ट प्लेयर- ईशान मलिंगा

कोलकाता नाइट राइडर्स की संभावित प्लेइंग इलेवन अजिंक्य रहाणे (कप्तान), टिम सीफर्ट/ फिन एलन, कैमरून ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), रोवमैन पॉवेल, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा और कार्तिक त्यागी

इम्पैक्ट प्लेयर- वरुण चक्रवर्ती

‘दूध की कीमतों में 4 रुपये की बढ़ोतरी, इस राज्य ने लिया बड़ा फैसला’

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देश में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से लोग परेशान हो रहे हैं तो वहीं दूसरी और अब दूध के दामों में भी बढ़ोत्तरी ने लोगों की चिताएं और बढ़ा दी हैं. ओडिशा मिल्क एंड डेयरी कोऑपरेटिव फेडरेशन (ओएमएफईडी) ने राज्य भर में दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है.