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महापौर मधुसूदन यादव ने किया वार्ड निरीक्षण, साफ-सफाई और जल समस्या पर दिए दिशा-निर्देश

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राजनांदगांव। महापौर श्री मधुसूदन यादव ने आज सुबह वार्ड नं. 29, 30 और 31 का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कैलाश नगर, कंचनबाग और जनता कालोनी का दौरा कर स्थानीय निवासियों से संवाद किया और क्षेत्र की साफ-सफाई, उद्यानों की स्थिति तथा पानी की आपूर्ति की समस्या पर चर्चा की।

वार्ड निरीक्षण के दौरान महापौर ने पार्षद श्रीमती न्यामत हुद्दा, श्री चंद्रशेखर लश्करे और श्रीमती रीना सिन्हा, पूर्व पार्षद श्री अमीन हुद्दा तथा श्री विट्ठल पटेल के साथ मिलकर वार्डवासियों से फीडबैक लिया। महापौर ने स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी को लेकर वार्डवासियों से सहयोग की अपील की और कहा कि शहर की सफाई में सुधार लाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिसे वार्डवासियों का पूरा सहयोग चाहिए। उन्होंने निवासियों से अपने घरों के आसपास सफाई रखने और कचरे को सही तरीके से अलग-अलग करके स्वच्छता दीदियों को सौंपने की समझाईश दी।

कैलाश नगर में जलाराम मंदिर के पास स्थित उद्यान में लाइट लगाने और मरम्मत की आवश्यकता के बारे में महापौर ने संबंधित इंजीनियर को निर्देश दिए। वहीं कंचनबाग के अटल आवास के पास पानी निकासी की समस्या को लेकर उन्होंने अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही।

जनता कालोनी में पानी की कमी की शिकायत पर महापौर ने पानी टैंकर भेजने और पाइपलाइन की जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही, जनता कालोनी के उद्यान का भी निरीक्षण किया और उसकी मरम्मत के साथ-साथ वहां आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने की बात कही।

इस मौके पर महापौर के साथ प्र. सहायक अभियंता श्रीमती गरिमा वर्मा, सुश्री सुषमा साहू, उप अभियंता श्रीमती पिंकी खाती, श्रीमती रीतू श्रीवास्तव, प्र. स्वास्थ्य अधिकारी श्री राजेश मिश्रा और निगम का तकनीकी व स्वास्थ्य अमला भी उपस्थित था।

महापौर ने सभी वार्डवासियों से नगर निगम के साथ मिलकर अपने शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

बम्हनी चारभाठा में विशाल हिंदू सम्मेलन : जातिगत भेदभाव छोड़ एकजुट होने का आह्वान, 15 गांवों से पहुंचे लोग

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छुरिया। विकासखंड के ग्राम बम्हनी चारभाठा के हाई स्कूल मैदान में सर्व हिंदू समाज बम्हनी मंडल द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। उक्त सम्मेलन में आसपास के लगभग 12 से 15 गांव के हिन्दू भाई-बहन, माताएं एवं आम जनमानस अधिक से अधिक संख्या में पहुंचे थे।
कार्यक्रम का प्रारंभ शीतला माता मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात भव्य कलश यात्रा निकाली गई। उक्त कलश यात्रा ग्राम के विभिन्न गलियों से होते हुए प्रमुख चौक-चौराहों एवं मार्गो से गुजरकर बस स्टैंड होते हुए हाईस्कूल मैदान में स्टेडियम के सामने आयोजन स्थल पर पहुंचा, जहां पर मां भारती एवं भारत माता की पूजा-अर्चना करने के पश्चात विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सर्वप्रथम रामायण मानस गायन का आयोजन किया गया। रामायण मानस गान के माध्यम से यह बताया गया कि हमारा हिंदू समाज विभिन्न जातियों में बंटा हुआ है। ऐसे में हमें जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ रहना होगा तथा अपने देश एवं धर्म की रक्षा करनी होगी। सदियों से भारत भूमि पर विदेशी आक्रमणकारों ने यहां हमला बोला। यहां आकर देश के हमारे भोले-भाले गरीब हिंदू परिवार के लोगों को पैसे का लालच एवं विभिन्न बीमारियों का भय दिखाकर हजारों लाखों लोगों को धर्म परिवर्तन कराया तथा हिंदू धर्म को तोड़ने की असफल कोशिश किया है।
सम्मेलन में हिन्दू धर्म के अंतर्गत विभिन्न समाजों के जिला/तहसील/क्षेत्रीय समाज प्रमुखों/प्रतिनिधियों का नारियल श्रीफल, गमछा भेंट कर, तिलक लगाकर एवं हार पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया गया। संत रविदास समाज, गुरु घासीदास समाज, बौद्ध समाज, पाल समाज, वैष्णव समाज, आदिवासी नागवंशी समाज, आदिवासी धु्रवंशीय समाज, साहू समाज, सेन समाज, सिन्हा समाज, चंद्रवंशी समाज, विश्वकर्मा समाज, ब्राह्मण समाज, यादव समाज, पटेल मरार समाज, निर्मलकर समाज सहित समस्त समाजों के समाज प्रमुखों रविन्द्र वैष्णव, शेखर भरतद्वाज, नैनसिंग पटेल, रविन्द्र टांडेकर, धनुष राम मंडावी, हुकुमचंद साहू, राजकुमार टेम्बुरकर, घासीराम पाल, रमेशर चंद्रवंशी, कृष्णा लाल विश्वकर्मा, टीकम पांडे, जोहित लाल देशलहरे आदि।
इसके साथ ही स्थानीय सरपंच मीना धु्रवे, अंजू धनकर, विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों अजय पटेल अध्यक्ष नगर पंचायत, भुवनेश्वर साहू, सिख समाज के प्रतिनिधि के तौर पर जगजीत सिंह लक्की भाटिया, बिमला सिन्हा समाजसेविका, उभय राम जनपद सदस्य, भान बाई मंडावी जनपद सदस्य, खेमचंद साहू, टीकम साहू सहित अनेक समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों का आयोजन समिति के सदस्यों भूखन लाल धनकर, राजकुमार मिश्रा, जाकेश साहू, विजय बहादुर सिंह, शिवा मिश्रा, तोरण दास वैष्णव, प्रमोद वर्मा, उभय राम मंडावी, यादो दास वैष्णव, सतीश यादव, गौतम चंद साहू, अवधेश राजपूत, घासीराम पाल, पद्मभूषण साहू, पुना राम वर्मा, शेखर साहू, रमेश कटेंगा, हृदय राम नेताम, डॉक्टर अनिल सुरसावंत आदि ने स्वागत अभिनंदन किया।
बीच-बीच में स्कूली बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। जिसमें मां भारती एवं भारत माता की पूजा-आरती, स्वागत गीत, वंदे मातरम, भारत का बच्चा-बच्चा जय-जय श्रीराम बोलेगा…जोत जवांरा गीत, छत्तीसगढ़ी लोक कला एवं संस्कृति से संबंधित गीतों पर छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक नित्य प्रस्तुत किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आए हुए प्रमुख अतिथियों एवं वक्ताओं ने सभा में उपस्थित आम जनमानस को अपना उद्बोधन दिया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अभय वाजपेई विभाग सेवा प्रमुख, अनिल श्रीवास्तव सह प्रांत सेवा प्रमुख, बसराम साहू मानस प्रेमी एवं शंकर साहू मानस प्रेमी आदि प्रमुख थे। वक्ताओं ने देश, धर्म, विश्वपटल की वर्तमान परिस्थितियो पर आधारित समस्याओं एवं उनके समाधान पर बाते कहीं। पारिवारिक संस्कार, देश के पूर्व में हुए विदेशी आक्रमण, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, अल्पसंख्यक हिंदुओं की मारकाट एवं आगजनी, उत्पीड़न आदि की चर्चा करते हुए भारत देश में हिंदुओं की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त की गई। सम्मेलन में पहुंचे सभी आम जनमानस के लिए सर्व हिन्दू समाज मंडल बम्हनी द्वारा भोजन प्रसादी की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। भोजन भंडारा दोपहर एक बजे से लेकर शाम छह बजे तक चलते रहा।
वक्ताओं ने हम सभी हिंदू समाज के लोगों को एक होकर और मिल-जुलकर रहने पर बल दिया गया। छोटी-छोटी बातों पर आपस में नहीं लड़ने, आपसी पारिवारिक मुद्दों को मिल बैठकर घर परिवार में ही हल करने की बाते कही गईं।
विधर्मियों के लालच और षड्यंत्र में नहीं फंसने तथा धर्म परिवर्तन नहीं करने हेतु आग्रह किया गया। हमें अपने इष्ट देवी देवताओं की विधि सम्मत पूजा-अर्चना करने, प्रत्येक शनिवार अथवा मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने, गांवों में बाहरी आगंतुकों पर नजर रखने तथा अपने पूर्वजों एवं देश के विभिन्न महापुरुषों द्वारा सनातन धर्म के बताए हुए मार्ग पर चलने की सलाह दी गई, जिससे हमारा देश को परम वैभव की प्राप्ति होगी। भारत विश्व का सिरमौर बनेगा। उक्त कार्यक्रम में क्षेत्र एवं आपपास से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न सामाजिक बंधुजन, माताएं-बहनें, वरिष्ठ नागरिकगण एवं आम जनमानस पहुंचे थे।

खतरे की घंटी! लोग बिना सोचे-समझे मान रहे हैं AI चैटबॉट की हर बात, नई स्टडी ने उड़ाए होश…

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic की एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्च के मुताबिक, बड़ी संख्या में यूजर्स अब AI चैटबॉट की सलाह को बिना सोचे-समझे मानने लगे हैं और कई बार अपनी इंसानी समझ व अंतर्ज्ञान को नजरअंदाज कर रहे हैं.

यह अध्ययन खासतौर पर Anthropic के AI चैटबॉट Claude पर केंद्रित है.

रिसर्च का मकसद और दायरा

यह अध्ययन Who’s in Charge? Disempowerment Patterns in Real-World LLM Usage नाम के रिसर्च पेपर में प्रकाशित हुआ है जिसे Anthropic और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया. इसका उद्देश्य यह समझना था कि AI चैटबॉट्स से बातचीत करते समय यूजर्स किस हद तक अपनी स्वतंत्र सोच खो सकते हैं और किन हालात में यह नुकसानदेह बन सकता है.

कैसे बदल सकता है AI यूजर्स की सोच और फैसले

रिसर्च में बताया गया है कि AI चैटबॉट कुछ स्थितियों में यूजर की सोच या व्यवहार को नकारात्मक दिशा में प्रभावित कर सकता है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई यूजर किसी साजिश या अप्रमाणित थ्योरी पर विश्वास करता है तो AI द्वारा उसे सही ठहराना रियलिटी डिस्टॉर्शन माना गया है. इसी तरह, गलत रिश्तों को सही बताना या यूजर को अपने मूल्यों के खिलाफ कदम उठाने के लिए प्रेरित करना भी गंभीर जोखिम के रूप में सामने आया.

लाखों बातचीत का विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने Claude के साथ हुई करीब 15 लाख से ज्यादा वास्तविक और गुमनाम बातचीत का अध्ययन किया. इसमें पाया गया कि हर 1,300 बातचीत में से एक में वास्तविकता से जुड़ी गड़बड़ी के संकेत दिखे जबकि हर 6,000 बातचीत में से एक में यूजर के गलत कदम उठाने की आशंका नजर आई. संख्या भले ही कम लगे लेकिन Anthropic का मानना है कि AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को देखते हुए इसका असर काफी लोगों पर पड़ सकता है.

समय के साथ बढ़ रहा है खतरा

रिसर्च में यह भी सामने आया कि समय के साथ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है जहां AI यूजर की स्वतंत्र सोच को कमजोर कर सकता है. कुछ आकलनों के अनुसार, हर 50 से 70 बातचीत में से एक में कम से कम हल्के स्तर का जोखिम मौजूद रहता है. यहां डिसएंपावरमेंट का मतलब है जब AI यूजर के फैसलों, विश्वासों और मूल्यों पर इतना हावी हो जाए कि उसकी खुद की सोच प्रभावित होने लगे.

भावनात्मक रूप से कमजोर यूजर्स सबसे ज्यादा प्रभावित

Anthropic के अनुसार, ये जोखिम खासतौर पर उन यूजर्स में ज्यादा दिखे जो भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे थे या बार-बार व्यक्तिगत और संवेदनशील फैसलों के लिए AI पर निर्भर हो रहे थे. दिलचस्प बात यह है कि ऐसे यूजर्स बातचीत के दौरान AI की सलाह से संतुष्ट दिखे लेकिन बाद में फैसलों के नतीजों से असंतोष भी जताया.

AI साइकोसिस को लेकर बढ़ती चिंता

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब AI साइकोसिस को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है. यह शब्द उन हालात के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां AI से लंबी बातचीत के बाद यूजर्स में भ्रम, गलत धारणाएं या मानसिक अस्थिरता देखी जाती है. कुछ मामलों में गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की भी रिपोर्ट सामने आई है.

सलाह मानने के पीछे ये हैं बड़े कारण

स्टडी में चार ऐसे प्रमुख कारण बताए गए, जिनकी वजह से यूजर्स AI की बातों को बिना सवाल किए मानने लगते हैं. इसमें AI को अंतिम और सर्वोच्च authority मानना, उससे भावनात्मक जुड़ाव बन जाना, निजी संकट के दौर से गुजरना और बार-बार फैसलों की जिम्मेदारी AI पर छोड़ देना शामिल है.

रिसर्च की सीमाएं भी मानी गईं

Anthropic ने यह भी साफ किया कि यह अध्ययन संभावित जोखिमों को दर्शाता है, न कि हर मामले में वास्तविक नुकसान को. साथ ही, AI और यूजर के बीच यह एक दोतरफा प्रक्रिया है जहां कई बार यूजर खुद ही अपनी निर्णय क्षमता AI को सौंप देता है.

2026 में ये शेयर करवाएंगे निवेशकों पर पैसों की बरसात; ब्रोकरेज फर्म ने जताया है भरोसा, 50 % रिटर्न मिलने की उम्मीद…

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भारतीय निवेशक हमेशा से लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने वाले शेयरों की तलाश में रहते हैं. साल 2026 के लिए ब्रोकरेज हाउसेज की ताजा रिपोर्ट्स कुछ खास सेक्टरों की ओर इशारा कर रहे हैं.

जहां आगे बेहतर रिटर्न की उम्मीद जताई जा रही है

डिफेंस, हाउसिंग फाइनेंस, एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों की कुछ कंपनियों में कमाई की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. कंपनी शेयरों में 10 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक बढ़त की संभावना बताई जा रही है. आइए जानते हैं, ऐसे ही कुछ चुनिंदा शेयरों के बारे में…..

टीमलीज सर्विसेज पर ब्रोकरेज का भरोसा

ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने टीमलीज सर्विसेज को साल 2026 के लिए अपनी पसंदीदा कंपनियों की लिस्ट में शामिल किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के शेयर का लक्ष्य मूल्य 2,400 रुपये तय किया गया है, जबकि फिलहाल इसका बाजार भाव करीब 1,503 रुपये के आसपास है.

इस आधार पर इसमें करीब 49 फीसदी तक बढ़त की संभावना जताई जा रही है. जिसे देखते हुए निवेशकों के लिए यह शेयर आकर्षक माना जा रहा है.

देवयानी इंटरनेशनल शेयर

ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने देवयानी इंटरनेशनल पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग जारी रखी है और इसका लक्ष्य मूल्य 185 रुपये तय किया है. फिलहाल शेयर करीब 123 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं. जिससे इसमें 50 फीसदी से अधिक की तेजी की संभावना बनती है.

ब्रोकरेज का मानना है कि क्विक सर्विस रेस्टोरेंट सेक्टर में कंपनी तेजी से ग्रो कर रही है. आने वाले क्वार्टर में विस्तार और बेहतर संचालन का असर इसके प्रदर्शन में साफ नजर आने की उम्मीद है.

इमामी शेयर

एफएमसीजी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी इमामी को लेकर सिटी ब्रोकरेज का भरोसा बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, इमामी के शेयर के लिए 665 रुपये का लक्ष्य तय किया गया है. जबकि इसका मौजूदा बाजार भाव करीब 488 रुपये है.

इस हिसाब से इसमें लगभग 34 फीसदी तक बढ़त की संभावना जताई जा रही है. ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत ब्रांड पहचान, विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और स्थिर मांग के चलते इमामी लंबी अवधि के निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है.

सोलर इंडस्ट्रीज शेयर

ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने सोलर इंडस्ट्रीज पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग को बरकरार रखा है. लेकिन ब्रोकरेज ने इसके लक्ष्य मूल्य में कटौती की है. पहले जहां इसका टारगेट 18,000 रुपये था, अब इसे घटाकर 15,800 रुपये कर दिया गया है.

फिलहाल शेयर करीब 13,566 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है. जिससे इसमें लगभग 16 फीसदी तक की बढ़त की संभावना दिखाई दे रही है.

Nissan Gravite की लॉन्च डेट हुई कंफर्म, कई हाईटेक फीचर्स से होगी लैस, जानें संभावित कीमत…

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निसान ने अपनी नई फैमिली कार Nissan Gravite की लॉन्च डेट को फाइनल कर दिया है. यह कार भारतीय बाजार में 17 फरवरी 2026 को लॉन्च की जाएगी. पहले इसे जनवरी में ही लाने की तैयारी थी, लेकिन अब कंपनी ने इसकी नई तारीख तय कर दी है.

Nissan Gravite एक तीन रो वाली एमपीवी होगी, जिसकी लंबाई चार मीटर से कम रखी जाएगी. इसे खासतौर पर भारतीय परिवारों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि यह कम कीमत में ज्यादा स्पेस और आराम दे सके. लॉन्च के बाद यह कार सीधे मारुति सुजुकी एर्टिगा और रेनॉल्ट ट्राइबर जैसी पॉपुलर एमपीवी को टक्कर देगी.

Nissan Gravite का डिजाइन और लुक

Nissan Gravite को रेनॉल्ट ट्राइबर के CMF-A प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है, लेकिन इसका लुक पूरी तरह निसान जैसी होगी. सामने की तरफ इसमें उल्टे L-आकार की डीआरएल, नया डिजाइन किया गया ग्रिल और सिल्वर इंसर्ट वाला स्पोर्टी बंपर देखने को मिलेगा. इसके अलॉय व्हील्स भी ट्राइबर से अलग होंगे, जिससे कार ज्यादा प्रीमियम लगेगी. पीछे की ओर ‘Gravite’ बैजिंग, क्रोम बार से जुड़े नए टेललैंप और सिल्वर C-Shape के इंसर्ट वाला रियर बंपर इसे अलग पहचान देंगे.

फीचर्स और केबिन

Nissan Gravite का केबिन लेआउट काफी हद तक रेनॉल्ट ट्राइबर जैसा हो सकता है, लेकिन इसमें निसान के कुछ खास टच दिए जाएंगे. इसमें 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 7-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले, क्रूज कंट्रोल और ड्राइवर सीट की ऊंचाई एडजस्ट करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा कूल्ड ग्लव बॉक्स और ऑटो-फोल्डिंग ओआरवीएम जैसे फीचर्स भी दिए जा सकते हैं.

इंजन, माइलेज और कीमत

इंजन की बात करें तो Nissan Gravite में 1.0 लीटर का तीन सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है, जो 72 बीएचपी की पावर और 96 एनएम का टॉर्क जनरेट करता है. बेहतर ड्राइविंग अनुभव के लिए निसान इस इंजन को थोड़ा रीट्यून कर सकती है. कीमत की बात करें तो इसके बेस वेरिएंट की कीमत करीब 6 लाख रुपये और टॉप वेरिएंट की कीमत करीब 9 लाख रुपये हो सकती है, जिससे यह एक किफायती फैमिली कार साबित होगी.

‘अब तो पंडित को भी घुसपैठिया…’, फिल्म घूसखोर पंडत के टाइटल पर भड़कीं BSP सु्प्रीमो मायावती…

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नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही भारी विवादों में घिर गई है. फिल्म के टाइटल को लेकर देशभर में विरोध देखने को मिल रहा है. विरोध करने वालों का आरोप है कि यह नाम जातिसूचक है और एक विशेष समुदाय की छवि को जानबूझकर अपमानित करता है.

अब यह मामला सियासत और अदालत तक पहुंच गया है

फिल्म के टाइटल पर बढ़ते विरोध के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी कड़ा रुख अपनाया है. मायावती ने शुक्रवार (6 फरवरी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर फिल्म के टाइटल की कड़े शब्दों में निंदा की और केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की.

मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा, “यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ‘पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है. ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बीएसपी की यह मांग.”

फिल्म के टाइटल को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस चल रही है. कई यूजर्स इसे धार्मिक और जातिगत भावनाओं पर हमला बता रहे हैं. उनका कहना है कि ‘पंडित’ जैसे शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ना पूरे समुदाय को बदनाम करने जैसा है. वहीं कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर विरोध करने वालों की आवाज ज्यादा तेज दिखाई दे रही है.

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस विवाद ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है. अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है. याचिका में फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि ‘घूसखोर पंडित’ टाइटल ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और इसे जानबूझकर अपमानजनक तरीके से चुना गया है.

विनीत जिंदल का कहना है कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है और ‘पंडित’ शब्द को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाया जा रहा है. उनके मुताबिक, इससे ब्राह्मण समाज की छवि को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचेगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म से सामूहिक मानहानि, हेट स्पीच और सांप्रदायिक तनाव पैदा होने का खतरा है. इसी आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की गई है.

नेटफ्लिक्स की चुप्पी

अब तक इस पूरे विवाद पर न तो नेटफ्लिक्स और न ही फिल्म के निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है. ऐसे में सबकी निगाहें कोर्ट और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.

France Rafale Deal: 30 की मार ही झेल नहीं पाया पाकिस्तान! अब भारत के पास होंगे 150 राफेल, 12 दिन बाद खून के आंसू रोएंगे मुनीर…

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फरवरी के तीसरे सप्ताह में भारत आ रहे हैं. उनके 18 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है. फ्रेंच प्रेसीडेंट के दौरे को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं.

भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति का भारत दौरा बेहद खास है. मैक्रों के इस दौरे में भारत-फ्रांस के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में राफेल की खरीद का प्रस्ताव भी शामिल है. इस डील में इंडियन एयरफोर्स के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की जानी है, जिसमें करीब 3.25 लाख करोड़ खर्च होने हैं.

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक प्रस्ताव पर बीते महीने ही भारत का रक्षा खरीद बोर्ड प्रारंभिक सहमति जता चुका है, जिस पर अगले हफ्ते भारत के रक्षा मंत्री की हाई लेवल मीटिंग में चर्चा की संभावना है. मौजूदा सुरक्षा हालात को लेकर इंडियन एयरफोर्स की जरूरतों और ऑपरेशन के लिहाज से इस डील को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

अभी भारत के पास कितने राफेल?

फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद की चर्चा का समय बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय वायु सेना के बेड़े में मौजूदा समय में करीब 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत क्षमता 42 स्वाड्रन से काफी कम हैं. डिफेंस एक्सपर्ट बांग्लादेश और पाकिस्तान के अलावा पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक और सैन्य गठजोड़ को भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाले फैक्टर के तौर पर दिखाते हैं.

क्यों खास है राफेल?

राफेल प्रोजेक्ट इंडियन एयरफोर्स के लिए बेहद खास है. 4.5 जेनेरेशन से ज्यादा ताकत वाले मल्टीरोल फाइटर एयरक्रॉफ्ट मिलने से भारत की आक्रामक हवाई ताकत बढ़ेगी. लंबे समय से वायुसेना में घातक लड़ाकू विमानों की कमी खल रही थी, जो राफेल वाली इस डील से पूरी होगी. प्रस्ताव के मुताबिक भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत, 114 राफेल विमानों में से 80 फीसदी का निर्माण भारत में ही पूरा किया जाना है.

इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में होंगे 150 राफेल

सूत्रों के मुताबिक इंडियन एयरफोर्स 88 सिंगल सीटर और 26 ट्विन सीटर विमान खरीदेगी. ज्यादातर का प्रोडक्शन फ्रांस की निर्माता कंपनी द सॉल्ट और भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनी करेंगी, जो भारत में ही होगा. डील पूरी होने के बाद भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े में एयरक्राफ्ट की संख्या बढ़कर लगभग 150 हो जाएगी.

ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने पाकिस्तान की हालत की खराब

114 राफेल का सौदा इस मायने में भी खास हैं, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने शानदार प्रदर्शन किया था. इस दौरान भारत के सटीक हमलों के चलते पाकिस्तान घुटने टेकने पर मजबूर हो गया था. राफेल 4.5 जेन का फाइटर जेट है, जो पाकिस्तानी जेएफ-17 से कहीं बेहतर माना जाता है. यही नहीं अभी भारतीय वायुसेना के बेड़े में 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं, जबकि नौसेना भी 36 राफेल के लिए नए वेरिएंट का ऑर्डर दे चुकी है.

‘राहुल ने पूछा सवाल तो क्यों लगी मिर्ची…’, मल्लिकार्जुन खरगे का भाजपा पर पलटवार, PM मोदी को लेकर क्या कहा?

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार (6 फरवरी) को भारतीय जनता पार्टी पर करारा हमला किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की रक्षा पर नहीं बोलते हैं, लेकिन राहुल गांधी सवाल पूछते हैं तो भाजपा को मिर्ची लग जाती है.

खरगे ने संसद के बजट सत्र से इतर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों को उठाया. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सिख धर्म का भी जिक्र किया.

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, ‘देश की रक्षा पर पीएम नहीं बोलते हैं. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कोई खास बात नहीं की. पीएम ने हम लोगों की बात का एक भी जवाब नहीं दिया.’ उन्होंने कहा, ‘सिखों का अपमान नहीं किया गया था जो बात हो रही थी, दोस्ती में हो रही थी. सिख धर्म बहुत बड़ा धर्म है. कांग्रेस ने दो बार सिख को प्रधानमंत्री बनाया. कांग्रेस सिख का अपमान नहीं करती है.’

पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर लगाया था सिखों के अपमान का आरोप

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर सिख गुरुओं का अपमान करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा था कि इस सदन के एक सांसद को कांग्रेस के युवराज ने गद्दार कह दिया. सोचिए, इनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच चुका है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने (कांग्रेसी युवराज) उन्हें गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे सिख थे. खरगे ने पीएम मोदी की इसी बात का जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया.

Human Survival Limits: बिना खाए-पिए कितने दिन तक जिंदा रह सकता है इंसान, क्या है ह्यूमन बॉडी की कैपेसिटी?

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पानी खून के सर्कुलेशन, तापमान कंट्रोल और गंदगी निकालने के लिए जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानी शरीर का लगभग 60% से 70% हिस्सा पानी से बना होता है. इस वजह से डिहाइड्रेशन जल्दी से अंगों के काम को बिगाड़ देता है.

एक इंसान बिना पानी के सिर्फ तीन से पांच दिनों तक ही जिंदा रह सकता है. कुछ मामलों में जिंदा रहना एक हफ्ते तक भर सकता है लेकिन गंभीर किडनी फेलियर और अंगों का काम बंद होना आमतौर पर काफी पहले ही हो जाता है.

बिना पानी के खून गाढ़ा हो जाता है. इसी के साथ किडनी टॉक्सिन को फिल्टर करना बंद कर देती है और शरीर का तापमान बेकाबू होकर बढ़ जाता है. दिमाग पर भी असर पड़ता है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट का बैलेंस बिगड़ जाता है. डिहाइड्रेशन से मौत अक्सर भूख से मौत की तुलना में ज्यादा तेज और ज्यादा दर्दनाक होती है. यही वजह है कि पानी को हमेशा जिंदा रहने के लिए सबसे जरूरी प्राथमिकता माना जाता है.

अगर कोई इंसान पानी पीता रहता है तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है. एनर्जी बनाने के लिए सबसे पहले जमा फैट का इस्तेमाल होता है, उसके बाद मांसपेशियों के टिशु का. ऐसे मामलों में एक स्वस्थ व्यस्क बिना खाने के 3 से 8 हफ्ते तक जिंदा रह सकता है. मेडिकल मामलों से ऐसा पता चलता है कि जिंदा रहना 70 दिनों तक बढ़ सकता है. लेकिन ऐसे मामले में शरीर काफी कमजोर हो जाता है.

जिन लोगों के शरीर में ज्यादा फैट होता है वह आमतौर पर बिना खाने के ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फैट एनर्जी रिजर्व का काम करता है. जैसे-जैसे भूख बढ़ती है इम्यून सिस्टम कमजोर होता जाता है, मांसपेशियों का वजन कम होता जाता है और अंगों का काम धीमा हो जाता है. अंत में दिल और दिमाग को काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती.

इंसानी सहनशक्ति को समझने के लिए 3 के नियम को समझना जरूरी है. बिना ऑक्सीजन के 3 मिनट, बिना पानी के 3 दिन, बिना खाने के तीन हफ्ते.

ज्यादा गर्मी डिहाइड्रेशन को बढ़ाती है. ठंडा माहौल एनर्जी की खपत को बढ़ाता है. शारीरिक मेहनत से पानी और एनर्जी रिजर्व तेजी से खत्म हो जाते हैं. इससे जीवित रहने का समय भी कम हो जाता है.

आ गई कमाल की टेक्नोलॉजी, स्मार्ट रिंग बन जाएगी रिमोट कंट्रोल, आपके इशारे पर चलेंगे फोन और कारें…

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कई शानदार फीचर्स के साथ आने वाली स्मार्ट रिंग को अब और भी स्मार्ट बनाने की तैयारी चल रही है. एक कंपनी ने स्मार्ट रिंग्स के लिए नई टच एंड जेस्चर कंट्रोल टेक्नोलॉजी का ऐलान किया है, जो फ्यूचर मॉडल में टैप एंड स्वाइप कंट्रोल देने के काम आ सकती है.

इस टेक्नोलॉजी को UltraTouch RG1 नाम दिया गया है और इसे अल्ट्रासेंस सिस्टम नाम की की कंपनी ने डेवलप किया है. आइए जानते हैं कि यह टेक्नोलॉजी किस काम आ सकती है.

कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी?

UltraTouch RG1 टेक्नोलॉजी मेटल और सिरामिक कोटिंग वाली रिंग्स के साथ काम कर सकती है. इसमें कई ऐसे जेस्चर मिलते हैं, जिससे फीचर्स को एक्टिवेट और दूसरे डिवाइसेस को कंट्रोल किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर इस टेक्नोलॉजी से लैस स्मार्ट रिंग की मदद से आप स्मार्ट ग्लास, अपने फोन और यहां तक कि अपनी कार को भी कंट्रोल कर सकेंगे. ऐसे में आपकी रिंग एक रिमोट कंट्रोल की तरह काम करेगी. इस पर टैप, स्लाइड और प्रेस जेस्चर की मदद से आप इसे कमांड दे पाएंगे. इसकी खास बात यह भी है कि इसके लिए कोई हार्डवेयर बटन, ग्लास या दूसरे मैटेरियल की जरूरत नहीं पड़ती.

इसका फायदा क्या होगा?

दरअसल, मार्केट में ऐसे स्मार्टग्लासेस हैं, जिनके डिस्प्ले को स्मार्ट रिंग से कंट्रोल किया जा सकता है. यह कॉन्सेप्ट शानदार है, लेकिन इसके लिए स्मार्ट रिंग में फिजिकल बटन की जरूरत पड़ती है, जिन्हें प्रेस करना काफी मुश्किल हो सकता है. इसी तरह इनका टच सेंसेटिव पैनल भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है. इस समस्या से निपटने में नई टेक्नोलॉजी काम आ सकती है. बता दें कि दूसरी कंपनियां भी ऐसे कॉन्सेप्ट पर काम कर रही है. Oura ने स्मार्टग्लासेस के लिए एक पेटेंट दायर किया है, जिसमें स्मार्ट रिंग इंटीग्रेटेड है. इसी तरह मेटा भी अपने मेटा रे-बेन डिस्प्ले ग्लासेस को कंट्रोल करने के लिए रिस्ट बैंड दे रही है.