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Vedanta Power Plant Boiler Blast: सक्ती वेदांता प्लांट ब्लास्ट में 17 मजदूरों की मौत, कई घायल’

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Vedanta Power Plant Boiler Blast: वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर में हुए धमाके से अब तक 17 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़े पैमाने पर श्रमिक घायल है। इन घायलों को रायगढ़ के अलावा बिलासपुर और रायपुर के अस्पतालों में दाखिल कराया गया हैं, जहाँ उनका उपचार जारी हैं।

(Vedanta Power Plant Boiler Blast Live Updates) वही बात लाशों की शिनाख्त की करें तो उनकी पहचान करने में प्रशासन काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। ब्लास्ट की आग से ज्यादातर शव बुरी तरह झुलस गए है। यही वजह है कि 17 लाशों में से अब तक सिर्फ 11 की ही शिनाख्त की जा सकी हैं, जबकि 6 अन्य की पहचान नहीं हो पा रही है।

मृतकों में दीगर राज्यों के श्रमिक भी शामिल

जिले के कलेक्टर अमृत विकास तोपने ने बताया है कि, जान गंवाने वाले श्रमिकों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मजदूर भी शामिल है। प्रशासन अब मृत मजदूरों के परिजनों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है।

सीएम ने ली कलेक्टर से जानकारी

राहत और बचाव अभियान के बीच प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय ने जिले के कलेक्टर अमृत विकास तोपने से फोन पर हालात की जानकारी ली और उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए। सीएम साय ने जिला कलेक्टर को घायलों के बेहतर से बेहतर उपचार कराने और मृतकों के पोस्टमार्टम, परिजनों को शव सौंपने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने कहा है।

(Vedanta Power Plant Boiler Blast Live Updates) बता दें कि, घटना के बाद कल भी मुख्यमंत्री ने फोन पर हादसे की जानकारी ली थी। इस पूरे हादसे की मॉनिटरिंग प्रदेश लेवल पर हो रही है।  उच्चाधिकारी खुद भी पल-पल के हालात पर नजर बनाये हुए है।

कलेक्टर ने किया मौके का दौरा

जिले के कलेक्टर अमृत ​​विकास ने कहा कि हाल ही में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए, प्रभावित परिवारों को अधिकतम संभव सहायता प्रदान करना, उनके स्वास्थ्य, कल्याण और सहायता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। साथ ही, प्रत्येक मृतक के लिए 35 लाख रुपये, घायलों के लिए 15 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है, और संयंत्र प्रबंधन द्वारा चिकित्सा संबंधी सभी खर्चों का वहन किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि मंगलवार को शक्ति जिले के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए।

जिले के एसपी ने बताया, राहत और बचाव कार्य पूरा, सभी अस्पताल दाखिल

जिले के एसपी प्रफुल ठाकुर ने बताया, “यह घटना दोपहर लगभग 2:30 बजे घटी। वेदांता पावर प्लांट में स्थित बॉयलर में विस्फोट हो गया। सूचना मिलते ही मैंने सबसे पहले डबरा थाना प्रभारी के अगुवाई में एक टीम मौके पर भेजी और इसके बाद मैं स्वयं घटनास्थल पर पहुंचा। एसडीओपी, कलेक्टर और अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। हमने घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया और उनका इलाज शुरू करवाया। रायगढ़ इस स्थान के निकट होने के कारण सभी पीड़ितों को वहां के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अब तक कुल 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 लोगों का इलाज चल रहा है। कुछ जिंदल अस्पताल में, कुछ मेडिकल कॉलेज में और अन्य अंबेडकर अस्पताल में भर्ती हैं। इस प्रकार, कुल 20 लोगों को चिकित्सा देखभाल मिल रही है और उनमें से पांच को आगे के इलाज के लिए अन्य स्थानों पर रेफर किया गया है।” उन्होंने बताया कि कलेक्टर के साथ एक टीम ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ‘ग्राउंड जीरो’ स्थल का दौरा किया।

बढ़ाई गई प्लांट की सुरक्षा, थ्री लेयर पर बेरिकेडिंग

किसी भी तरह के आशंका को देखते हुए प्लांट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्लांट को तीन लेयर में बैरिकेडिंग कर दिया गया है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति अंदर न जा सके। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और प्लांट के अंदर आने-जाने पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

(Vedanta Power Plant Boiler Blast Live Updates) प्रशासन को आशंका है कि इस घटना को लेकर आंदोलन या प्रदर्शन हो सकता है, इसलिए पहले से ही अलर्ट जारी कर दिया गया है।

राष्ट्रपति ने जताया दुःख, कहा, “गहरा दुःख हुआ”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में वेदांता लिमिटेड के एक विद्युत संयंत्र में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट में हुई मौतों पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस हादसे में अब तक 14 श्रमिकों की मौत हो चुकी है जबकि 15 अन्य घायल है। सभी का उपचार रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर और खरसिया के अस्पतालों में जारी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वह इस दुखद घटना से “बेहद दुखी” हैं और उन्होंने घायलों के जल्दी स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करती है।

मंगलवार को X पर साझा किए गए एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक विद्युत संयंत्र में हुई मौतों के बारे में जानकर मुझे गहरा दुख हुआ है। इस दुखद दुर्घटना में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”

पीएम मोदी ने किया सहायता राशि का ऐलान

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए बॉयलर विस्फोट में हुई घटना पर दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख जबकि घायलों को 50-50 हजार रूपये सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की।

(Vedanta Power Plant Boiler Blast Live Updates)  एक्स पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने घटना के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है।

पीएम मोदी ने लिखा, “छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में स्थित विद्युत संयंत्र में हुई दुर्घटना बेहद दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ की ओर से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।”

टीएस सिंहदेव बोले, “दिल दहला देने वाली घटना”

इस बीच, छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने इस घटना को “दिल दहला देने वाली और दुखद” बताया। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम ने “शक्ति जिले के सिंहित्राई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भयावह हादसे की खबर बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली है। बॉयलर विस्फोट में कई श्रमिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत और कई अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की खबरें दिल को बेहद परेशान कर रही हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और पीड़ित परिवारों को इस दुख को सहने की शक्ति दें। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ-साथ, मैं इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।”

डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि…

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डॉ. आंबेडकर की जयंती पर श्रद्धांजलि

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर देश के प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। संसद भवन के परिसर में स्थित डॉ. आंबेडकर के प्रेरणा स्थल पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पुष्पांजलि दी।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य राजनीतिक हस्तियों ने भी उन्हें नमन किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बीआर आंबेडकर प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता और महान समाज सुधारक बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर, मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।’ उन्होंने डॉ. आंबेडकर को एक न्यायविद, अर्थशास्त्री और समतावादी सामाजिक व्यवस्था के समर्थक के रूप में याद किया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘डॉ. आंबेडकर ने न केवल असमानताओं को दूर करने का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत किया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता दी। उनके योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस अवसर पर, आइए हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लें।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण में उनके प्रयास प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन और कार्य हमें एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।

‘प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘दुनिया की फार्मेसी’ से नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा फार्मा क्षेत्र’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत का फार्मा क्षेत्र “दुनिया की फार्मेसी” से आगे बढ़कर अब नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत का फार्मा क्षेत्र “दुनिया की फार्मेसी” से आगे बढ़कर अब नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

देश में शोध-आधारित विकास पर बढ़ते जोर को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब सस्ती दवाओं के वैश्विक आपूर्तिकर्ता से आगे बढ़कर फार्मास्यूटिकल इनोवेशन के उभरते केंद्र के रूप में परिवर्तित हो रहा है।

उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि भारत का फार्मा क्षेत्र धीरे-धीरे वैल्यू चेन में ऊपर जा रहा है, जिसमें शोध और विकास, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अगली पीढ़ी की चिकित्सा पर मजबूत जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “दुनिया की फार्मेसी से लेकर नवाचार के केंद्र तक, भारत का फार्मा क्षेत्र वैल्यू चेन में ऊपर जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान सरकार के तहत आरएंडडी, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अत्याधुनिक उपचारों पर व्यापक ध्यान दिया जा रहा है।”

पीएमओ की ओर से साझा की गई पोस्ट में नड्डा के लेख को देश के फार्मा क्षेत्र की दिशा को समझने के लिए “जरूर पढ़ा जाने वाला विश्लेषण” बताया गया।

पीएमओ ने कहा, “केंद्रीय मंत्री नड्डा का यह लेख इस बात पर एक महत्वपूर्ण पुनरावलोकन है कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नेतृत्व के लिए कैसे तैयार हो रहा है।”

लेख में बताया गया है कि हाल के वर्षों में नीतिगत समर्थन और सरकार के निरंतर फोकस ने इस क्षेत्र की दिशा को बदल दिया है।

इसमें कहा गया है कि भारत अब केवल जेनेरिक दवाओं के बड़े पैमाने पर उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उन्नत शोध क्षमताओं और जटिल दवा विकास में भी निवेश कर रहा है।

लेख के अनुसार, सरकार ने आरएंडडी निवेश को प्रोत्साहित कर और एक ऐसा इकोसिस्टम बनाकर नवाचार-आधारित विकास को प्राथमिकता दी है, जो अत्याधुनिक उपचारों को समर्थन देता है।

इसमें बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर बढ़ते जोर का भी उल्लेख है, जिन्हें वैश्विक फार्मा उद्योग के अगले चरण के विकास का प्रमुख चालक माना जा रहा है।

लेख में नड्डा ने कहा, “भारत, जिसे लंबे समय से जेनेरिक दवाओं में नेतृत्व के कारण ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता रहा है, अब पैमाने से नवाचार की ओर बढ़ने के लिए तैयार है।”

राहुल गांधी का मोदी पर तीखा हमला, पश्चिम बंगाल चुनाव में गरमाई सियासत…

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पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मालदा में एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया। उन्होंने पीएम मोदी को ‘देशद्रोही’ करार देते हुए कहा कि उनकी नीतियां देश के हित में नहीं हैं। राहुल ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इससे भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों को गंभीर नुकसान होगा। उनके अनुसार, यह डील रोजगार संकट को जन्म दे सकती है और लाखों लोगों की आजीविका पर असर डाल सकती है।

SIR और वोटर लिस्ट पर उठे सवाल

राहुल गांधी ने अपने भाषण में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जो असंवैधानिक है। उन्होंने लोकतंत्र में वोट देने के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यदि जानबूझकर नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है। राहुल ने वादा किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो ऐसे लोगों के नाम फिर से जोड़े जाएंगे।

भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र

राहुल ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक लगभग 4000 किलोमीटर की यात्रा की थी। उनका कहना था कि इस यात्रा का उद्देश्य देश में नफरत के माहौल को समाप्त करना और ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ खोलना था। उन्होंने कहा कि नफरत से देश कमजोर होता है, जैसे परिवार में नफरत आने से परिवार टूट जाता है।

मोदी पर व्यक्तिगत हमला

राहुल गांधी ने पीएम मोदी के ’56 इंच की छाती’ वाले बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक नारा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वह पीएम मोदी की आंखों में देखते हैं, तो वह नजरें नहीं मिला पाते। उनके अनुसार, देश की असली ताकत लोगों की एकता और आपसी विश्वास में होती है, न कि ऐसे नारों में।

अडानी मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना

राहुल ने उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट और ठेके अडानी को दिए जाते हैं। राहुल ने भाजपा और अडानी के बीच करीबी संबंधों का आरोप लगाया और कहा कि सरकार की नीतियां कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।

ट्रंप का जिक्र

अपने भाषण में राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं और प्रधानमंत्री पर बाहरी दबाव भी है। बंगाल चुनाव के बीच राहुल गांधी का यह आक्रामक भाषण सियासी तापमान को और बढ़ा देता है। अब देखना होगा कि इन आरोपों का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।

भारत में सोने के ऋणों की वृद्धि: महिलाओं की भूमिका और बाजार का विस्तार…

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सोने के ऋणों का तेजी से बढ़ता बाजार

भारत में सोने के ऋणों ने तेजी से वृद्धि की है और यह अब खुदरा क्रेडिट उत्पादों में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। इस वृद्धि का कारण उधारकर्ताओं की बढ़ती संख्या, उच्च ऋण राशि, और विभिन्न ऋणदाताओं की भागीदारी है। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 से सोने के ऋणों का बैलेंस 3.8 गुना बढ़ गया है, और दिसंबर 2025 तक इसका हिस्सा खुदरा क्रेडिट पोर्टफोलियो में 5.9% से बढ़कर 11.1% हो गया है।

महिलाओं का योगदान

महिलाएं सोने के ऋणों के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 2025 में, महिलाओं ने सोने के ऋणों के 39% हिस्से का योगदान दिया, जो 2022 में 36% था। यह वृद्धि केवल दक्षिणी बाजारों में नहीं, बल्कि पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में भी देखी गई है। रिपोर्ट में तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं के बीच मजबूत वृद्धि का उल्लेख किया गया है।

ऋण की औसत राशि में वृद्धि

सोने के ऋणों की औसत राशि मार्च 2022 में 1.1 लाख रुपये से बढ़कर दिसंबर 2025 में 1.9 लाख रुपये हो गई है, जो इस क्षेत्र में उधारी के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है। सोने के ऋणों की उत्पत्ति की मात्रा में Q1 2022 से 2.3 गुना वृद्धि हुई है, जबकि उत्पत्ति मूल्य में 5.1 गुना वृद्धि हुई है।

बाजार में बदलाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उधारकर्ताओं की प्रोफाइल में बदलाव आ रहा है। प्राइम और ऊपर के प्राइम उधारकर्ताओं का हिस्सा 2022 में 43% से बढ़कर 2025 में लगभग 52% हो गया है। इसके अलावा, 2.5 लाख रुपये से अधिक के सोने के ऋण वाले उधारकर्ताओं की संख्या 2025 के अंत तक 14% हो गई, जो 2022 में 10% थी।

”डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती: समानता और न्याय के प्रतीक”

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डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती:

यह दिन हमें एक ऐसे महान व्यक्तित्व की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने ज्ञान और संघर्ष के माध्यम से भारतीय समाज को नई दिशा दी। बाबा साहेब का जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का संघर्ष पूरे देश की किस्मत को बदल सकता है, जिसने भेदभाव के अंधकार में

बराबरी की रोशनी का संचार

आज हम जो भी पढ़ाई कर पा रहे हैं और अपने सपनों को साकार करने का अधिकार रखते हैं, वह डॉ. अंबेडकर के संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए अधिकारों का परिणाम है। उन्होंने शिक्षा और समानता के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में उजाला लाया।

भारतीय समाज को नई दिशा

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन को समानता, न्याय और मानव अधिकारों की स्थापना के लिए समर्पित किया। कठिनाइयों और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हुए भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।

भारतीय संविधान के निर्माण में योगदान

डॉ. अंबेडकर का मानना था कि एक मजबूत समाज की नींव शिक्षा और जागरूकता पर आधारित होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों को शिक्षित होने, संगठित रहने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान अमूल्य है, जिसने हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान का हक दिया।

प्रारूप समिति के अध्यक्ष: 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने उन्हें ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिसके बाद उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संवैधानिक उपचारों का अधिकार: उन्होंने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को संविधान की “आत्मा और हृदय” बताया, जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।

उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे कठिनाइयाँ कितनी भी बड़ी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। डॉ. अंबेडकर केवल एक महान नेता नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत हैं, जिनके विचार आज भी समाज को आगे बढ़ने की दिशा दिखाते हैं।

इस अंबेडकर जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके आदर्शों का पालन करेंगे और एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो और हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिल सके।

Monsoon 2026 Forecast: इस साल देश में सामान्य से कम बरसेंगे बादल, El Niño इफेक्ट को लेकर वैज्ञानिकों की डराने वाली रिपोर्ट”

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देश के लिए मॉनसून के संबंध में एक महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, 2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से थोड़ा कम रहने की संभावना है।

अनुमान है कि जून और सितंबर के बीच पूरे देश में वर्षा ‘दीर्घकालिक औसत’ (LPA) के लगभग 92% के आसपास रह सकती है, जिसमें ±5% की मॉडल त्रुटि की गुंजाइश (error margin) हो सकती है। 1971 और 2020 के बीच दर्ज किए गए औसत के आधार पर-जिसे LPA के रूप में परिभाषित किया गया है-भारत में सामान्य मॉनसून वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। परिणामस्वरूप, इस वर्ष के मॉनसून को “सामान्य से कम” श्रेणी में रखा गया है, और कम या सामान्य से नीचे वर्षा होने की संभावना अधिक प्रतीत होती है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, IMD ने स्पष्ट किया कि इस बार समुद्री स्थितियाँ मॉनसून पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। वर्तमान में, प्रशांत महासागर में कमजोर ‘ला नीना’ जैसी स्थितियाँ बनी हुई हैं, जो धीरे-धीरे ‘ENSO-तटस्थ’ चरण की ओर बढ़ रही हैं। हालाँकि, मौसम के मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मॉनसून के मौसम के दौरान ‘अल नीनो’ की घटना उभर सकती है। आमतौर पर, अल नीनो भारत में वर्षा को कम करता है, जिससे मॉनसून पर दबाव पड़ सकता है।

फिर भी, हिंद महासागर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। ‘हिंद महासागर द्विध्रुव’ (IOD) वर्तमान में तटस्थ चरण में है; हालाँकि, इस बात की संभावना है कि मॉnson के मौसम के अंत तक यह सकारात्मक हो सकता है। यह बदलाव वर्षा के स्तर को कुछ हद तक सहारा दे सकता है और अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को संतुलित करने में मदद कर सकता है।

जनवरी से मार्च तक बर्फ की चादर में कमी

IMD ने यह भी बताया कि जनवरी और मार्च 2026 के बीच, उत्तरी गोलार्ध में बर्फ की चादर (snow cover) का स्तर सामान्य से थोड़ा कम रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, बर्फ की चादर और मॉनसून के बीच एक विपरीत संबंध होता है; यानी, बर्फ की चादर में कमी मॉनसून की तीव्रता को प्रभावित कर सकती है। क्षेत्रीय स्तर पर, देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है; हालाँकि, भारत के पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे भी अधिक वर्षा हो सकती है।

IMD ने यह पूर्वानुमान ‘एडवांस्ड मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल’ (MME) और ‘मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम’ (MMCFS) जैसे आधुनिक मॉडलों के आधार पर तैयार किया है। विभाग ने यह भी बताया है कि मई 2026 के आखिरी हफ़्ते में एक अपडेटेड पूर्वानुमान जारी किया जाएगा, जिससे मॉनसून की स्थिति और भी साफ़ हो जाएगी। कुल मिलाकर, संकेतों से पता चलता है कि इस साल का मॉनसून पूरी तरह से कमज़ोर नहीं रहेगा, हालाँकि इसके सामान्य स्तर से थोड़ा नीचे रहने की उम्मीद है; आखिरकार, अल नीनो और IOD के बीच का संतुलन ही पूरे देश में बारिश के असल पैटर्न को तय करेगा।

महिला आरक्षण : सरकार ने संशोधन विधेयक का मसौदा जारी किया, लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का लक्ष्य…

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया। यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य शामिल होंगे।

यह बिल राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या पर 815 की सीमा प्रस्तावित करता है।

केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के लिए बिल में कहा गया, “केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिनका चुनाव उस तरीके से किया जाएगा जैसा संसद कानून द्वारा निर्धारित करे।”

वर्तमान में राज्यों से लोकसभा के 530 सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हैं। हालांकि, एक परिसीमन आयोग ने यह संख्या 543 निर्धारित की थी। बिल में एक और जरूरी बदलाव आबादी की परिभाषा है, जिससे पार्लियामेंट को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। संविधान के आर्टिकल 81 के क्लॉज (3) में बदलाव के लिए बिल यह प्रस्ताव करता है, “(3) इस आर्टिकल में ‘आबादी’ का मतलब ऐसी जनगणना में पता लगाई गई आबादी है, जिसे पार्लियामेंट कानून बनाकर तय कर सकती है और जिसके जरूरी आंकड़े पब्लिश हो चुके हैं।”

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में उस विधेयक को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना है। साथ ही, इसके जरिए संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।

संशोधन विधेयक अनुच्छेद 82 में भी परिवर्तन प्रस्तावित करता है, जिसके तहत “प्रत्येक जनगणना के पूरा होने पर, सीटों का आवंटन” स्थान पर “सीटों का आवंटन” शब्द रखे जाएंगे।

प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य कोटे के कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना से अलग करना और इसके बजाय इसे 2011 की जनगणना पर आधारित करना है, जिससे 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके।

अनुच्छेद 82 में संशोधन विधेयक परिसीमन आयोग की भूमिका को भी शामिल करने का प्रस्ताव करता है।

यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं में रोटेशन के आधार पर सीटों के आरक्षण की बात भी करता है और इसमें उन अवधियों से संबंधित अनुच्छेद भी शामिल हैं, जिनके लिए महिलाओं का आरक्षण लागू रहेगा, बशर्ते संसद द्वारा इसे आगे बढ़ाया जाए। इससे पहले, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन में कुछ भी विवादित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण किए बिना इसका समर्थन करें।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण किसी भी रूप में राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इसे राजनीतिक रंग देते हैं, तो यह महिलाओं के साथ अन्याय होगा। प्रधानमंत्री ने दलीय राजनीति से ऊपर उठने की बहुत ही सरल और स्पष्ट अपील की है। नारी शक्ति अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) एक ऐसा कानून है, जिसका सभी दलों ने समर्थन किया और जिसे सर्वसम्मति से पारित किया। अब, हमने इसे लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है।

बता दें कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा करने और उसे पारित करने के लिए 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया है।

भाजपा ने लोकसभा और राज्यसभा में अपने सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है, जिसमें उन्हें आगामी संसद सत्र के दौरान 16 से 18 अप्रैल तक सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित;दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय…

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा। इस याचिका में केजरीवाल ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में सीबीआई की अपील की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग की थी। आम आदमी पार्टी के नेता ने स्वयं अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। सुनवाई के अंत में, न्यायमूर्ति शर्मा ने केजरीवाल से कहा कि उन्होंने प्रभावशाली दलीलें दी हैं और उनमें वकील बनने की क्षमता है। केजरीवाल ने उत्तर में कहा कि उन्हें अपने मार्ग का पता चल गया है और वे इससे संतुष्ट हैं। न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रखते हुए कहा कि यह उनके लिए पहली बार है जब किसी मामले से खुद को अलग करने के लिए कहा गया है।

न्यायमूर्ति शर्मा का अनुभव

लाइव लॉ के अनुसार, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि उन्होंने खुद को अलग करने के कानूनी नियमों के बारे में बहुत कुछ सीखा है। यह उनके जीवन में पहली बार है जब किसी ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे एक उचित निर्णय देंगी।

केजरीवाल की पक्षपात की आशंका” केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा पर उठाए सवाल

अपनी दलील में, अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि वे आमतौर पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर अपीलों की सुनवाई करती हैं। केजरीवाल ने अदालत को बताया कि उन्हें लगभग दोषी ठहराया गया था और केवल सजा सुनाना बाकी था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को इस मामले से अलग करने का आवेदन इसलिए दिया क्योंकि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई न मिलने का उचित डर था।

‘मध्य पूर्व में तनाव का असर! कच्चे तेल की मांग में अगली तिमाही में आ सकती है गिरावट’

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इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने मंगलवार को कहा कि कच्चे तेल की मांग में 2026 की दूसरी तिमाही में गिरावट आने की उम्मीद है। यह कोविड महामारी के बाद ईंधन की मांग में आई कमी के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी। ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल आउटलुक में आए बदलावों के चलते इस वर्ष तेल की मांग में प्रतिदिन 80,000 बैरल (किलो बैरल/दिन) की कमी आने की आशंका है।

एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा,”2026 की दूसरी तिमाही में मांग में 15 लाख बैरल प्रति दिन की गिरावट का पूर्वानुमान है, जो कोविड-19 के कारण ईंधन की खपत में आई भारी कमी के बाद से सबसे तेज गिरावट होगी।” रिपोर्ट में बताया गया कि तेल की मांग में कमी मध्य पूर्व और एशिया प्रशांत क्षेत्रों में देखने को मिलेगी, जो कि मुख्यत: से नेफ्था, एलपीजी और जेट ईंधन के रूप में होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वैश्विक कच्चे तेल उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे वैश्विक उत्पाद बाजारों में मांग बढ़ रही है। इतिहास के सबसे भीषण तेल आपूर्ति संकट के बाद मार्च में तेल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी मासिक वृद्धि दर्ज की गई।

इस स्थिति से तेल आयात करने वाले देश पर आपूर्ति सुरक्षित करने का दबाव बढ़ा, जिससे फिजिकल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस दौरान फ्यूचर्स और फिजिकल मार्केट की कीमतों में जुड़ाव का अभाव था।

होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रवाह को फिर से शुरू करना ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि रिफाइनिंग कंपनियां और देश तेल संकट के निपटने के लिए अपने रिजर्व का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ऑयल इंन्वेंट्री में गिरावट आई है।