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Human Survival Limits: बिना खाए-पिए कितने दिन तक जिंदा रह सकता है इंसान, क्या है ह्यूमन बॉडी की कैपेसिटी?

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पानी खून के सर्कुलेशन, तापमान कंट्रोल और गंदगी निकालने के लिए जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानी शरीर का लगभग 60% से 70% हिस्सा पानी से बना होता है. इस वजह से डिहाइड्रेशन जल्दी से अंगों के काम को बिगाड़ देता है.

एक इंसान बिना पानी के सिर्फ तीन से पांच दिनों तक ही जिंदा रह सकता है. कुछ मामलों में जिंदा रहना एक हफ्ते तक भर सकता है लेकिन गंभीर किडनी फेलियर और अंगों का काम बंद होना आमतौर पर काफी पहले ही हो जाता है.

बिना पानी के खून गाढ़ा हो जाता है. इसी के साथ किडनी टॉक्सिन को फिल्टर करना बंद कर देती है और शरीर का तापमान बेकाबू होकर बढ़ जाता है. दिमाग पर भी असर पड़ता है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट का बैलेंस बिगड़ जाता है. डिहाइड्रेशन से मौत अक्सर भूख से मौत की तुलना में ज्यादा तेज और ज्यादा दर्दनाक होती है. यही वजह है कि पानी को हमेशा जिंदा रहने के लिए सबसे जरूरी प्राथमिकता माना जाता है.

अगर कोई इंसान पानी पीता रहता है तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है. एनर्जी बनाने के लिए सबसे पहले जमा फैट का इस्तेमाल होता है, उसके बाद मांसपेशियों के टिशु का. ऐसे मामलों में एक स्वस्थ व्यस्क बिना खाने के 3 से 8 हफ्ते तक जिंदा रह सकता है. मेडिकल मामलों से ऐसा पता चलता है कि जिंदा रहना 70 दिनों तक बढ़ सकता है. लेकिन ऐसे मामले में शरीर काफी कमजोर हो जाता है.

जिन लोगों के शरीर में ज्यादा फैट होता है वह आमतौर पर बिना खाने के ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फैट एनर्जी रिजर्व का काम करता है. जैसे-जैसे भूख बढ़ती है इम्यून सिस्टम कमजोर होता जाता है, मांसपेशियों का वजन कम होता जाता है और अंगों का काम धीमा हो जाता है. अंत में दिल और दिमाग को काम करने के लिए पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती.

इंसानी सहनशक्ति को समझने के लिए 3 के नियम को समझना जरूरी है. बिना ऑक्सीजन के 3 मिनट, बिना पानी के 3 दिन, बिना खाने के तीन हफ्ते.

ज्यादा गर्मी डिहाइड्रेशन को बढ़ाती है. ठंडा माहौल एनर्जी की खपत को बढ़ाता है. शारीरिक मेहनत से पानी और एनर्जी रिजर्व तेजी से खत्म हो जाते हैं. इससे जीवित रहने का समय भी कम हो जाता है.