मैं किसी रेल सा, तू पटरी के किनारे का घर जब भी गुजरती है तो बच्चा बाहर आता है और हाथ हिलाता है. अब बच्चे के हाथ हिलाने का मतलब क्या है, दिल का धड़कना. इन खूबसूरत लाइनों जैसी ही खूबसूरत है ये फिल्म.इन दिनों लव स्टोरीज का ट्रेंड खूब है.
सैयारा के बाद कई तरह की लव स्टोरीज आई लेकिन ये है असली सैयारा जो प्रेम का असली मतलब समझाती है.
कहानी – ये कहानी है एक सीवर साफ करने वाले लड़के और सब्जी बेचने वाली लड़की की, दोनों प्यार करते हैं. ट्रेन में मिलते हैं लेकिन इनकी मोहब्बत आसान नहीं है, यहां मोहब्बत का दुश्मन को इंसान नहीं कोई और है. वो क्या है, ये जानने थिएटर चले जाइए.
कैसी है फिल्म – ये एक दिल को छू लेने वाली फिल्म है,फिल्म आपको कई जगह इमोशनल करती है. आपको चौंकाती है, आपको सोचने पर मजबूर करती है. लड़की जब लड़के से कहती है कि तुम ये काम क्यों करते हो तो वो कहता है कोई भी कोई काम क्यों करता है.पैसों के लिए तो आप सीवर साफ करने वालों का दर्द समझते हैं. ये लड़का बड़े आराम से कहता है कि सीवर साफ करने वालों का 40 की उम्र के बाद शरीर खराब हो जाता है तो आप इन कर्मचारियों के दर्द को खुद फील करते हैं. ये लड़की जब कहती है कि कभी कभी ऐसा लगता है कि मेरे बाप ने मुझे रखा ही इसलिए है कि मैं सब्जी बेचने में उसकी मदद कर सकूं तो आप इस लड़की की कहानी में उसके साथ हो लेते हैं. फिल्म अच्छी पेस पर चलती है, कहीं खींची हुई नहीं लगती. म्यूज़िक अच्छा है और फिल्म के फील को और बढ़ाता है. इनके रोमांस के सीन दिल को छूते हैं, क्लाइमैक्स चौंकाता है और फिल्म एंड में आपको कुछ सोचने पर मजबूर करती है.
एक्टिंग – इशिता सिंह ने कमाल का काम किया है.उन्होंने इसके लिए अपना लुक बदला है. स्किन टोन डार्क की है, और इस किरदार में जान डाल दी है.उनके गजब का कॉन्फिडेंस दिखता है, संजय बिश्नोई एक सीवर साफ करने वाले के दर्द को जैसे दिखते हैं. उससे आपको लगता है कि उनके अलावा ये किरदार कोई कर ही नहीं सकता. एक सीन में उनके शरीर से बदबू आती है, वो सीन इतना कमाल का है कि आप उनके कायल हो जाएंगे.हनुमान सोनी ने बढ़िया काम किया है.
राइटिंग और डायरेक्शन – Rudra jadon ने फिल्म को कमाल तरीके से लिखा है और डायरेक्शन भी अच्छा है. कहीं कोई सीन एकस्ट्रा नहीं लगता, फिल्म की पेस अच्छी रखी गई है ताकि दर्शक कहीं बोर न हो.कुल मिलाकर ये दिल को छू लेने वाली फिल्म जरूर देखिए.



