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भारत और जीसीसी के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत शुरू: क्या हैं इसके फायदे?

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भारत और जीसीसी के बीच महत्वपूर्ण समझौता

भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता आरंभ करने के लिए आवश्यक शर्तों पर सहमति जताई है। यह महत्वपूर्ण निर्णय 5 फरवरी 2026 को लिया गया, जिसकी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी।

जीसीसी में यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान शामिल हैं।

टीओआर पर हस्ताक्षर का महत्व

यह हस्ताक्षर लंबे समय से रुकी हुई वार्ता को पुनः आरंभ करने का अवसर प्रदान करता है। 2006 और 2008 में दोनों पक्षों के बीच दो दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन उसके बाद प्रक्रिया ठप हो गई थी। अब टीओआर पर सहमति से समझौते की रूपरेखा, दायरा और नियम निर्धारित हो गए हैं।

गोयल ने कहा कि यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करेगा, निवेश को आकर्षित करेगा और दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।

भारत के लिए फायदेमंद समझौता

यह समझौता भारत के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि जीसीसी देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा आयात होता है। गोयल ने बताया कि यह भारत की ऊर्जा स्रोतों को विविधता प्रदान करने में सहायक होगा। वर्तमान में, भारत और जीसीसी के बीच व्यापार लगभग 179 अरब डॉलर का है। समझौते के बाद निवेश, रोजगार और खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।

पहले से मौजूद द्विपक्षीय समझौते

भारत ने पहले ही 2022 में यूएई के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू किया है। इसी तरह, ओमान के साथ 18 दिसंबर 2025 को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये समझौते जीसीसी के साथ बड़े समझौते की नींव तैयार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद की भारत यात्रा

यह कदम यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों के बाद उठाया गया है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की हालिया भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए हैं। कुछ समय पहले, यूएई ने पाकिस्तान के साथ एक हवाई अड्डा समझौते को रद्द किया था, जिसे भारत के साथ बढ़ते रिश्तों से जोड़ा जा रहा है।

भारत टैक्सी ऐप: सहकारी राइड-हेलिंग सेवा का नया विकल्प…

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भारत टैक्सी ऐप का लॉन्च

केंद्रीय गृह और सहकारी मंत्री अमित शाह गुरुवार को भारत टैक्स ऐप का उद्घाटन करेंगे। यह ऐप भारत में पहली सहकारी राइड-हेलिंग सेवा है। सरकार का उद्देश्य इस ऐप के माध्यम से यात्रियों को उबर, ओला और रैपिडो जैसी कैब सेवाओं के मुकाबले एक किफायती विकल्प प्रदान करना है।

सहकारी टैक्सी सेवा का मॉडल

सहकारिता मंत्रालय द्वारा समर्थित और सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित, भारत टैक्सी को एक ड्राइवर-स्वामित्व वाली परिवहन सेवा के रूप में पेश किया जा रहा है। यह सेवा अपने प्रारंभिक चरण में जीरो-कमीशन मॉडल पर कार्य करेगी, जिसमें सवारी का पूरा भुगतान सीधे ड्राइवरों को मिलेगा। मंत्रालय ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म चालकों के लिए मुफ्त होगा और उन्हें ‘सारथी’ कहा जाएगा। इसका उद्देश्य चालकों को राइड-हेलिंग ऐप्स की शोषणकारी नीतियों से बचाना है।

किराया संरचना और सेवाएं

इस ऐप में चार किलोमीटर तक का किराया 30 रुपए प्रति किलोमीटर, 4-12 किलोमीटर के लिए 23 रुपए प्रति किलोमीटर और 12 किलोमीटर से अधिक के लिए 18 रुपए प्रति किलोमीटर होगा। अन्य ऐप्स की तरह, भारत टैक्सी को भी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं जैसे मेट्रो से जोड़ा जाएगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही ऐप से यात्रा पूरी करने में मदद मिलेगी।

भविष्य की योजनाएं

शुरुआती चरण में, चालकों को 100 प्रतिशत भुगतान मिलेगा। बाद में, सहकारी संस्था लगभग 20 प्रतिशत शुल्क अपने पास रखेगी, जिसे चालकों को प्रोत्साहन के रूप में पुनर्वितरित किया जाएगा। भारत टैक्सी सर्ज प्राइसिंग से बचने की योजना बना रही है, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में डायनामिक प्राइसिंग लागू हो सकती है।

महिला ड्राइवरों की भागीदारी

अब तक 150 से अधिक महिला ड्राइवर भारत टैक्सी से जुड़ चुकी हैं। ऐप पर पंजीकरण में तेजी से वृद्धि हो रही है, पिछले दो दिनों में प्रतिदिन लगभग 40,000 से 45,000 नए उपयोगकर्ता जुड़ रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, भारत टैक्सी के पंजीकृत ग्राहकों की संख्या चार लाख से अधिक हो चुकी है। यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर उपलब्ध है।

सुरक्षा सुविधाएं और लाभ

इस ऐप में सुरक्षा सुविधाओं में आपातकालीन संपर्कों को सूचित करने, सुरक्षा टीम से संपर्क करने और ऐप के भीतर से सायरन सक्रिय करने के विकल्प शामिल हैं। साइन-अप प्रक्रिया के लिए केवल मोबाइल नंबर, नाम और ईमेल जैसी बुनियादी जानकारी की आवश्यकता होती है।

भारत टैक्सी की योजना हवाई अड्डों पर विशेष पिकअप और ड्रॉप जोन बनाने की है, और भविष्य में अन्य परिवहन केंद्रों तक विस्तार करने की भी योजना है। इसके अलावा, सरकार द्वारा ड्राइवरों को 5 लाख रुपए का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख रुपए का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा भी प्रदान किया जाएगा।

एलन मस्क ने बनाया नया आर्थिक रिकॉर्ड, बने इतिहास के सबसे अमीर व्यक्ति…

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एलन मस्क का नया आर्थिक कीर्तिमान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के संस्थापक और टेस्ला तथा स्पेसएक्स के CEO एलन मस्क ने एक नया आर्थिक मील का पत्थर स्थापित किया है।

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क अब न केवल दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, बल्कि इतिहास में भी सबसे धनी व्यक्ति बन गए हैं। उनकी कुल संपत्ति 850 अरब डॉलर से अधिक आंकी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 77 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मस्क की संपत्ति में यह अभूतपूर्व वृद्धि उनकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप xAI के विलय के बाद हुई। एक ही दिन में उनकी नेटवर्थ में 84 अरब डॉलर (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी देखी गई।

अर्थव्यवस्था से अधिक संपत्ति

एलन मस्क की कुल संपत्ति अब पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों की पूरी जीडीपी से भी अधिक मानी जा रही है। फोर्ब्स बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, मस्क की मौजूदा नेटवर्थ लगभग 852 अरब डॉलर है, जो भारत के शीर्ष 40 अमीरों की संयुक्त संपत्ति से भी ज्यादा है।

नए कीर्तिमान की श्रृंखला

मस्क ने हाल के महीनों में लगातार नए रिकॉर्ड बनाए हैं। अक्टूबर 2025 में, वह पहले व्यक्ति बने जिनकी संपत्ति 500 अरब डॉलर तक पहुंची। इसके बाद, दिसंबर में स्पेसएक्स के मूल्यांकन में वृद्धि के कारण उनकी संपत्ति 600 अरब डॉलर को पार कर गई। 19 दिसंबर को टेस्ला से जुड़े स्टॉक विकल्पों के संबंध में अदालत के फैसले के बाद, मस्क ने 700 अरब डॉलर का आंकड़ा भी पार किया। जनवरी 2026 में, उन्होंने इतिहास के सबसे अमीर व्यक्ति बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

अन्य अमीरों से आगे

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति, गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज की नेटवर्थ लगभग 281 अरब डॉलर है। इस प्रकार, मस्क उनसे लगभग 578 अरब डॉलर आगे निकल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से एलन मस्क की संपत्ति बढ़ रही है, उसे देखते हुए वह जल्द ही दुनिया के पहले ‘ट्रिलियनेयर’ यानी 1,000 अरब डॉलर की संपत्ति वाले व्यक्ति बन सकते हैं।

बॉलीवुड में दहशत: गैंगस्टर के सहयोगी ने पांच हस्तियों को दी धमकी…

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मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ी चिंता

मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री एक बार फिर से भय और आतंक के साए में है। जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी सहयोगी शुभम लोनकर का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, शुभम लोनकर ने बॉलीवुड की कम से कम पांच प्रमुख हस्तियों को निशाना बनाया है और उनसे रंगदारी वसूलने के लिए धमकी भरे कॉल किए हैं।

फिल्मी हस्तियों में डर का माहौल

हालांकि, इस डर के माहौल के चलते अब तक किसी भी फिल्मी हस्ती ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पिछले रविवार को प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित बंगले पर फायरिंग की गई थी, जिसमें शुभम लोनकर का नाम मुख्य संदिग्ध के रूप में सामने आया। इस घटना ने पूरे फिल्म उद्योग को हिला कर रख दिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली है कि कई फिल्मी सितारों को धमकी भरे फोन कॉल आए हैं, लेकिन कोई भी शिकायत करने के लिए आगे नहीं आया है।

सोशल मीडिया पर धमकी

इस बीच, शुभम लोनकर की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी पुलिस के हाथ लगी है, जिसमें उसने रोहित शेट्टी को खुली धमकी दी थी। लोनकर ने लिखा, ‘राम-राम, जय बजरंग बली। हमने रोहित शेट्टी को कई बार संदेश भेजकर कहा था कि हमारे काम में दखल न दें, लेकिन वह नहीं समझे। यह तो सिर्फ ‘ट्रेलर’ था। अगर अब भी नहीं माने, तो अगली गोली सीधे उनके सीने में लगेगी। यह पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री के लिए चेतावनी है, समय रहते सुधर जाओ।’

रोहित शेट्टी का बयान

हालांकि, रोहित शेट्टी ने पुलिस को बताया है कि उन्हें किसी भी प्रकार का धमकी भरा कॉल या संदेश नहीं मिला है। क्राइम ब्रांच की कई टीमें देश के विभिन्न हिस्सों में शुभम लोनकर की तलाश कर रही हैं।

संसद के बजट सत्र में हंगामे का दौर जारी, विपक्ष ने उठाए सवाल…

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संसद में हंगामे का प्रभाव

बजट सत्र के दौरान संसद में लगातार हंगामे ने कार्यवाही को प्रभावित किया है। गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने सदन में हुए हंगामे पर चिंता व्यक्त की और इसे सदन की मर्यादा का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार व्यवधान लोकतंत्र की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं।

राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा

विपक्ष ने राज्यसभा में भी जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। खरगे ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया और सदन में अपनी बात रखने की मांग की।

इससे पहले, लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी दलों के फ्लोर लीडरों की एक महत्वपूर्ण बैठक संसद परिसर में मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए। इस बैठक में विपक्ष ने आगे की रणनीति पर चर्चा की, जिसमें निलंबित सांसदों के मुद्दे और अन्य प्रमुख मुद्दों पर हंगामा जारी रखने की योजना बनाई गई।

हंगामे के कारण बजट सत्र के इस सातवें दिन हंगामे का मुख्य कारण विपक्ष के निलंबित सांसदों का विरोध, पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब पर बहस और अन्य राजनीतिक मुद्दे बताए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार उन्हें सदन में अपनी बात रखने से रोक रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सदन की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश बता रहा है।

भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार संबंधों में नई गति…

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भारत का खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक संबंध

यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में तेजी लाने के बाद, खाड़ी देश भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। यह केवल एक संयोग नहीं है, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा, आत्मविश्वासी विदेश नीति और मजबूत आर्थिक स्थिति का परिणाम है।

अब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक साझेदार के रूप में देख रही हैं।

भारत और खाड़ी सहयोग परिषद के छह देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में दोनों पक्ष वार्ता की रूपरेखा पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जो आगामी बातचीत के दायरे और प्राथमिकताओं को निर्धारित करेगा। लगभग दो दशकों से रुकी हुई यह प्रक्रिया अब फिर से गति पकड़ने जा रही है। खाड़ी सहयोग परिषद में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू कर चुका है और ओमान के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर हो चुके हैं।

भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार का मुख्य आधार ऊर्जा रहा है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा इन देशों से प्राप्त करता है, जबकि सऊदी अरब और कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। दूसरी ओर, भारत इन देशों को कीमती पत्थर, धातु, कृत्रिम आभूषण, बिजली उपकरण, लोहा, इस्पात और रसायन भेजता है। आंकड़ों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में भारत का निर्यात लगभग 57 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 121 अरब डॉलर से अधिक हो गया। कुल द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जो इस संबंध की गहराई को दर्शाता है।

भारतीय प्रवासी श्रमिकों का योगदान

खाड़ी देश भारतीय प्रवासी श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं। लगभग तीन करोड़ भारतीय जो विदेश में रहते हैं, उनमें से बड़ी संख्या इसी क्षेत्र में कार्यरत है। ये श्रमिक हर वर्ष भारी धनराशि भारत भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा है। पहले भी भारत और खाड़ी देशों के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी थी, लेकिन 2008 के बाद यह प्रक्रिया रुक गई थी। शुल्क में कटौती, निवेश सुरक्षा और आंतरिक प्राथमिकताओं पर मतभेद के कारण बातचीत ठंडी पड़ गई थी। अब निवेश संधि और व्यापार समझौते को अलग-अलग रास्तों पर रखकर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

नई व्यापारिक पहल का महत्व

हाल के समय में भारत ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में प्रगति दिखाई है। ऐसे माहौल में खाड़ी क्षेत्र के साथ नई पहल यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब व्यापार समझौतों को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी देख रही है।

खाड़ी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बढ़ता कदम केवल बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत है। अब दुनिया की ताकत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बाजार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा मार्गों से तय हो रही है। जो देश स्थिर ऊर्जा स्रोत और खुले बाजार सुरक्षित कर लेगा, वही आने वाले दशकों में मजबूती से खड़ा रहेगा। भारत ने लंबे समय तक सतर्क और कभी-कभी संकोची व्यापार नीति अपनाई है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

चुनौतियाँ और सावधानियाँ

हालांकि, इस उत्साह में आंख मूंद लेना भी उचित नहीं होगा। मुक्त व्यापार समझौते का अर्थ है अपने बाजार को खोलना। यदि घरेलू उद्योग तैयार नहीं हुए, तो सस्ता आयात कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए सरकार को केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने की जल्दी नहीं करनी चाहिए, बल्कि घरेलू उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को मजबूत करने की भी चिंता करनी होगी। सामरिक दृष्टि से यह कदम पश्चिम एशिया में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करेगा, जहां चीन भी तेजी से अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है।

सोना और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट, जानें कारण…

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सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट

हाल ही में सोने और चांदी की कीमतों में दो दिनों के उछाल के बाद अचानक गिरावट आई है। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतें तेजी से गिर गईं।

MCX पर चांदी का वायदा भाव एक झटके में 24,000 रुपये प्रति किलो तक कम हो गया, जबकि सोने की कीमत में भी 4500 रुपये से अधिक की गिरावट आई।

चांदी की कीमत में गिरावट की बात करें तो, गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 2,68,850 रुपये पर बंद हुई थी। कारोबार की शुरुआत में यह अचानक गिरकर 2,44,654 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिससे चांदी की कीमत में 24,196 रुपये की कमी आई।

चांदी की कीमतें पिछले महीने के अंत में 29 जनवरी को 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। हाल के दिनों में आई गिरावट के बाद, चांदी की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से 1,75,394 रुपये सस्ती हो गई हैं।

अब सोने की कीमतों पर नजर डालें तो, यह भी चांदी की तरह गुरुवार को गिरावट का सामना कर रहा है। 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का रेट 1,53,046 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को यह गिरकर 1,48,455 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस प्रकार, सोने की कीमत में 4,591 रुपये की कमी आई है।

सोने की कीमतें भी 29 जनवरी को अपने उच्चतम स्तर 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंची थीं, लेकिन उसके बाद से इसमें भी गिरावट आई है। हाल के दिनों में आई उछाल के बाद, सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से 44,641 रुपये सस्ती हो गई हैं।

तमिलनाडु में भाषा विवाद: मंत्री के बयान से राजनीतिक हलचल…

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राजनीतिक विवाद की शुरुआत

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले, एक मंत्री के बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। डीएमके के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने कहा कि उत्तर भारतीय प्रवासी राज्य में केवल टेबल क्लीनर और पानी पूरी विक्रेता के रूप में काम करने आते हैं।

यह बयान महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले ‘हिंदी थोपने’ के मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा कर रहा है।

मंत्री के बयान का संदर्भ

पन्नीरसेल्वम ने यह भी कहा कि उत्तर भारत से आए लोगों के पास केवल हिंदी जानने के कारण सीमित रोजगार के अवसर हैं, जिससे उन्हें निम्न स्तर के काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि तमिल वासियों को राज्य की दो-भाषा नीति का लाभ मिलता है, जिससे वे विदेशों में बेहतर नौकरियों के लिए जा सकते हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भाजपा ने मंत्री के बयान को लापरवाह और खतरनाक बताते हुए इसे राज्य में प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ हिंसा से जोड़ा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। विवाद बढ़ने पर, डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी को इन टिप्पणियों से अलग करने की कोशिश की।

चुनावों पर प्रभाव

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह विवाद तमिलनाडु के चुनावी माहौल में नई जान फूंक रहा है। भाषा की राजनीति, प्रवासी मजदूरों और उत्तर-दक्षिण तनाव के मुद्दे फिर से डीएमके और भाजपा के बीच राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस बयान को ‘घटिया’ बताते हुए उत्तर भारत का अपमान कहा।

रवनीत बिट्टू ने राहुल गांधी की ‘गद्दार’ टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी…

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संसद में तीखी बहस

रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा की गई ‘गद्दार’ टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को परिवारवाद का प्रतीक बताया।

संसद के बाहर, राहुल गांधी और भाजपा के एक नेता के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें राहुल ने बिट्टू को गद्दार कहा। केंद्रीय मंत्री ने राहुल को जवाब देते हुए कहा कि वह देश के दुश्मन हैं। उल्लेखनीय है कि बिट्टू, जो पहले कांग्रेस में थे, अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

कांग्रेस के परिवारवाद पर टिप्पणी

रवनीत बिट्टू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कांग्रेस इसलिए छोड़ी क्योंकि पार्टी अब असली कांग्रेस नहीं रही। उन्होंने कहा कि जब वे कांग्रेस में थे, तब पार्टी के लिए सीटें जीतने में सफल रहे थे। लेकिन अब जब पार्टी परिवारवाद की ओर बढ़ गई है, तो कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। बिट्टू ने कहा कि अगर यह असली कांग्रेस होती, तो राहुल और प्रियंका गांधी खुद सदन से निलंबित हो जाते।

सिख समुदाय का अपमान

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को सिख समुदाय का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयान देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। यह पहली बार है जब राहुल गांधी के एक मुद्दे पर अड़े रहने के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा पूरी तरह से ठप हो गई।

जुबानी जंग का आगाज़

बुधवार को, जब बिट्टू वहां से गुजरे, तो गांधी ने कहा, “देखो, एक गद्दार यहीं से गुजर रहा है।” राहुल ने उनसे हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन केंद्रीय राज्य मंत्री ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और राहुल को देश का दुश्मन कहा। यह जुबानी जंग तब शुरू हुई जब बिट्टू ने विरोध कर रहे सांसदों पर टिप्पणी की कि वे ऐसे बैठे हैं जैसे उन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो।

असम चुनावों में राजनीतिक संघर्ष तेज, मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता के बीच आरोप-प्रत्यारोप…

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मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच तीखी बहस

असम विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच राजनीतिक संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है, जिसमें तीखे आरोप और प्रत्यारोप तेजी से चल रहे हैं।

गोगोई ने सरमा के परिवार पर लगभग 12,000 बिघा भूमि हड़पने का आरोप लगाया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की घोषणा की। सरमा ने गुरुवार को आरोप लगाया कि राजीव भवन, जो राज्य कांग्रेस का मुख्यालय है, एक “सबसे बड़ा असम विरोधी केंद्र” बनता जा रहा है।

सरमा ने कहा, “गौरव गोगोई के साथ एक व्यक्ति है जिसने एक किताब लिखी है जिसमें कहा गया है कि असमिया लोग राज्य से बाहर से आए हैं और मियास मूल निवासी हैं। इस किताब का लेखक गौरव गोगोई का करीबी सहयोगी है। मैं 8 फरवरी को इस बारे में धीरे-धीरे सब कुछ बताऊंगा।”

सरमा ने यह भी दावा किया कि गोगोई के परिवार के सदस्यों के पाकिस्तान में सक्रिय बैंक खाते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ एक संकेत दे रहा हूं। आपको गौरव गोगोई से पूछना चाहिए कि उनके परिवार के पास पाकिस्तान में कितने बैंक खाते हैं। उनके परिवार के बैंक खाते अभी भी पाकिस्तान में चल रहे हैं, और मैं इस बारे में 8 फरवरी को बात करूंगा।”

कांग्रेस द्वारा उनके संपत्तियों की जानकारी के लिए ‘हू इज एचबीएस’ नामक वेबसाइट लॉन्च करने पर सरमा ने इसे पुराना बताया। “वेबसाइटों के दिन खत्म हो गए हैं। यह एआई और ऐप का युग है। कांग्रेस अभी भी सोचती है कि असमिया लोग पिछड़े हैं,” उन्होंने कहा।

कांग्रेस के विकास के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि पार्टी असम के लिए किस तरह का विकास चाहती है।

“हमने गैंडे की हत्या को रोक दिया है। क्या वे ऐसा विकास चाहते हैं जहां गैंडे का शिकार फिर से शुरू हो? हमने बिना रिश्वत के नौकरियां दी हैं। वे किस विकास की बात कर रहे हैं? अगर उन्हें मौका मिले, तो वे विकास को उलट देंगे,” सरमा ने आरोप लगाया।

चुनाव की तैयारियों के तहत, सरमा ने जलुकबाड़ी में बूथ विजय अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया, यह बताते हुए कि यह अभियान राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ चलाया जा रहा है।

“इस अभियान के तहत, भाजपा कार्यकर्ता स्टिकर, पार्टी झंडे और सरकार की 50 उपलब्धियों का बुकलेट वितरित करेंगे। यदि कोई परिवार इन्हें नहीं चाहता है, तो हमारे कार्यकर्ता उन पर दबाव नहीं डालेंगे। हम पहले अनुमति मांगेंगे,” सरमा ने कहा।

चुनावों के नजदीक आते ही, यह आदान-प्रदान असम में राजनीतिक लड़ाई की रेखाओं को और तेज करता है, क्योंकि दोनों पक्ष चुनावों से पहले अपनी पहुंच और बयानबाजी को बढ़ा रहे हैं।