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भारत और जीसीसी के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत शुरू: क्या हैं इसके फायदे?

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भारत और जीसीसी के बीच महत्वपूर्ण समझौता

भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता आरंभ करने के लिए आवश्यक शर्तों पर सहमति जताई है। यह महत्वपूर्ण निर्णय 5 फरवरी 2026 को लिया गया, जिसकी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी।

जीसीसी में यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान शामिल हैं।

टीओआर पर हस्ताक्षर का महत्व

यह हस्ताक्षर लंबे समय से रुकी हुई वार्ता को पुनः आरंभ करने का अवसर प्रदान करता है। 2006 और 2008 में दोनों पक्षों के बीच दो दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन उसके बाद प्रक्रिया ठप हो गई थी। अब टीओआर पर सहमति से समझौते की रूपरेखा, दायरा और नियम निर्धारित हो गए हैं।

गोयल ने कहा कि यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करेगा, निवेश को आकर्षित करेगा और दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।

भारत के लिए फायदेमंद समझौता

यह समझौता भारत के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि जीसीसी देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा आयात होता है। गोयल ने बताया कि यह भारत की ऊर्जा स्रोतों को विविधता प्रदान करने में सहायक होगा। वर्तमान में, भारत और जीसीसी के बीच व्यापार लगभग 179 अरब डॉलर का है। समझौते के बाद निवेश, रोजगार और खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।

पहले से मौजूद द्विपक्षीय समझौते

भारत ने पहले ही 2022 में यूएई के साथ मुक्त व्यापार समझौता लागू किया है। इसी तरह, ओमान के साथ 18 दिसंबर 2025 को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये समझौते जीसीसी के साथ बड़े समझौते की नींव तैयार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद की भारत यात्रा

यह कदम यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों के बाद उठाया गया है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की हालिया भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए हैं। कुछ समय पहले, यूएई ने पाकिस्तान के साथ एक हवाई अड्डा समझौते को रद्द किया था, जिसे भारत के साथ बढ़ते रिश्तों से जोड़ा जा रहा है।