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HRA Exemption Rules:  अब इन 4 नए शहरों में भी मिलेगा 50% HRA क्लेम, सीधे बढ़ेगी ‘इन-हैंड’ सैलरी…

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1 अप्रैल, 2026 से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ‘आयकर नियम, 2026’ में अहम बदलाव करते हुए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है. अब तक जो फायदा सिर्फ चार महानगरों तक सीमित था, उसे अब 8 शहरों तक विस्तार दे दिया गया है. इसका मतलब यह है कि आपकी टैक्सेबल इनकम घटेगी और हर महीने आपके बैंक खाते में आने वाली ‘टेक-होम’ सैलरी में शानदार इजाफा होगा.

अब इन 4 शहरों में भी मिलेगा 50% क्लेम

दशकों से यह नियम चला आ रहा था कि केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे पारंपरिक महानगरों में रहने वाले कर्मचारी ही अपनी बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा HRA छूट के रूप में क्लेम कर सकते थे. बाकी पूरे देश के लिए यह सीमा महज 40 प्रतिशत तय थी. लेकिन, समय के साथ जमीनी हकीकत बदली है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस 50 प्रतिशत वाले खास क्लब में शामिल कर लिया है. दरअसल, इन नए शहरों में पिछले कुछ सालों के भीतर मकानों का किराया बेतहाशा बढ़ा है. आईटी हब और प्रमुख व्यापारिक केंद्र होने की वजह से यहां किराये का खर्च पुराने महानगरों के बराबर ही पहुंच गया है. इस ऐतिहासिक फैसले से किराये के बढ़ते बोझ और पुराने टैक्स नियमों के बीच की खाई को पाटने में बड़ी मदद मिलेगी.

टैक्स का बोझ होगा कम

जब आप अपनी बेसिक सैलरी का आधा हिस्सा किराए के खर्च के तौर पर दिखा पाएंगे, तो आपकी कुल कर योग्य आय (Taxable Income) में भारी गिरावट आएगी. टैक्स का बोझ कम होने से आपके हाथ में खर्च करने के लिए अधिक नकद पैसा बचेगा. आर्थिक जानकारों का भी यही मानना है कि इस अतिरिक्त पैसे से मध्यम वर्ग को महंगाई से लड़ने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने से इन आठ शहरों के शहरी इलाकों में रेंटल हाउसिंग मार्केट को भी एक नई रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद है.

पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए ‘डबल बोनान्ज़ा’

सरकार ने केवल HRA तक ही अपनी मेहरबानी सीमित नहीं रखी है. अगर आप पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के तहत अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, तो आपके लिए राहत की कुछ और खिड़कियां भी खोली गई हैं. बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्चों को ध्यान में रखते हुए उनकी शिक्षा और हॉस्टल अलाउंस पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ा दिया गया है. इसके साथ ही, कर्मचारियों को ऑफिस की तरफ से मिलने वाले फूड कूपन या मुफ्त भोजन जैसी सुविधाओं पर भी टैक्स में सहूलियत दी गई है. जो माता-पिता अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने की योजना बना रहे हैं या विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, उनके लिए भी अच्छी खबर है. ऐसे खर्चों पर कटने वाले टीसीएस (TCS) की दर को कम किया गया है, जिससे विदेश जाने का आपका बजट थोड़ा हल्का होगा.

HRA क्लेम की होगी पूरी जांच

जहां एक ओर सरकार ने करदाताओं को कई तरह की छूट दी है, वहीं नियमों के पालन को लेकर शिकंजा भी कसा है. अब एडवांस टेक्नोलॉजी के माध्यम से HRA क्लेम की बहुत सूक्ष्म स्तर पर जांच की जाएगी. इसका सीधा उद्देश्य उन लोगों पर नकेल कसना है जो टैक्स बचाने के लिए फर्जी या जाली रेंट एग्रीमेंट और रसीदों का इस्तेमाल करते हैं.

सावधान! Fake WhatsApp ऐप से किया जा रहा लोगों को टारगेट, अलर्ट हुआ जारी…

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Fake WhatsApp: अगर आप किसी अनजान व्यक्ति के भेजे हुए लिंक से WhatsApp डाउनलोड कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं. इन दिनों WhatsApp की फर्जी ऐप से लोगों को टारगेट किया जा रहा है. फर्जी ऐप के जरिए लोगों के डिवाइस में स्पाईवेयर इंस्टॉल करने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद मेटा के स्वामित्व वाली WhatsApp ने अलर्ट जारी किया है.

बताया जा रहा है कि करीब 200 लोगों के फोन में फर्जी ऐप डाउनलोड करवाई गई है, जिसमें मालवेयर एम्बेडेड है. आइए इस मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.

Fake WhatsApp को लेकर अलर्ट जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सऐप की फर्जी ऐप से लोगों को टारगेट करने के मामले अभी तक इटली में सामने आए हैं. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हमारी सिक्योरिटी टीम ने इटली में लगभग 200 यूजर्स का पता लगाया है, जिन्होंने अपने फोन में फर्जी ऐप डाउनलोड कर ली थी. हमने उन्हें लॉग-आउट करते हुए प्राइवेसी को लेकर अलर्ट कर दिया है. साथ ही उन्हें फर्जी ऐप के सुरक्षा खतरों के बारे में जानकारी दे दी गई है. हमने उन्हें फेक ऐप को हटाने और ऑफिशियल व्हाट्सऐप ऐप डाउनलोड करने को कहा है. कंपनी ने इन 200 यूजर्स के बारे में ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया है.

Fake WhatsApp ऐप के पीछे किसका हाथ?

WhatsApp का कहना है कि यूजर्स के मोबाइल पर फेक ऐप इंस्टॉल कराने के पीछे इटली की स्पाईवेयर बनाने वाली कंपनी SIO का हाथ है. कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इटैलियन कंपनी के खिलाफ लीगल एक्शन लेगी. बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब स्पाईवेयर इंस्टॉल करने के लिए फेक ऐप का सहारा लिया जा रहा है. सर्विलांस ऑपरेशन में यह तरीका बहुत आम है, जहां यूजर्स के फोन में ऐसे प्रोग्राम इंस्टॉल कर दिए जाते हैं, जो उसका पर्सनल डेटा हैकर्स तक भेजते रहते हैं.

अपने WhatsApp अकाउंट को कैसे सिक्योर करें?

  • स्पाईवेयर और मालवेयर आदि से बचने के लिए हमेशा गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर जैसी भरोसेमंद सोर्सेस से ऐप्स डाउनलोड करें.
  • किसी अनजान व्यक्ति के भेजे गए लिंक पर क्लिक कर ऐप्स डाउनलोड करने से बचें.
  • पर्सनल डेटा को सिक्योर करने के लिए हमेशा ऐप को दी गई परमिशन को चेक करते रहें.
  • WhatsApp अकाउंट की सिक्योरिटी के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन को यूज करें.
  • WhatsApp और अपने फोन के सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेटेड रखें. इससे साइबर अटैक का खतरा कम होता है.

“7719000000000 रुपए खर्च करके भी चांद पर क्यों कदम नहीं रखेंगे NASA के अंतरिक्ष यात्री?”

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अपना मून मिशन आर्टेमिस II लॉन्च कर दिया है. 4 अंतरिक्षयात्रियों ने अमेरिका के फ्लोरिडा से उड़ान भरी. 3 साल की ट्रेनिंग के बाद अंतरिक्ष यात्री इस मिशन पर भेजे गए हैं.

10 दिन का यह मिशन कई मायने में बहुत खास है. दिलचस्प बात है कि चांद के चक्कर लगाकर भी ये अंतरिक्षयात्री वहां की सतह पर नहीं उतरेंगे.

नासा के इस मिशन का लक्ष्य चांद पर उतरना है ही नहीं. इस मिशन के जरिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी यहां पर बेस बनाना चाहती है. लक्ष्य सिर्फ इतना ही नहीं है.

जब चांद पर उतरना ही नहीं, तो क्यों करोड़ों डॉलर खर्च किए?

नासा चांद पर अपना बेस बनाना चाहती है. आर्टेमिस II मिशन इसी लक्ष्य का हिस्सा है. नवंबर 2022 में लॉन्च हुए और चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करने वाले आर्टेमिस I मिशन का उद्देश्य रॉकेट और मानवरहित कैप्सूल का परीक्षण करना था. अब भेजे गए आर्टेमिस II मिशन में SLS रॉकेट और ओरियन लाइफ सपोर्ट सिस्टम की क्षमता को जांचना भी लक्ष्य है.

नासा ने अपने मिशन को बताते हुए लिखा है कि ‘आर्टेमिस II मिशन यह पुष्टि करेगा कि अंतरिक्षयान के सभी सिस्टम चालक दल के साथ अंतरिक्ष की गहराई में ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं. इस मिशन के अनुभवों से मून मिशन के अगले चरण का रास्ता साफ होगा.

नासा का आर्टेमिस III मिशन पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग की टेस्टिंग करेगा. वहीं, 2028 में लॉन्च होने वाले आर्टेमिस IV मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे.

नासा के मिशन एनालिसिस एंड इंटीग्रेटेड असेसमेंट के डिप्टी लीड पैटी कैसास हॉर्न ने सीएनएन को बताया, मिशन का मुख्य उद्देश्य चालक दल को सुरक्षित और स्वस्थ वापस लाना है. स्पेस व्हीकल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, और उसके बाद नेविगेशन और ऑनबोर्ड सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा.

आर्टेमिस II सिर्फ एक मिशन नहीं बल्कि एक लम्बी प्लानिंग का हिस्सा है. इसे भविष्य में चंद्रमा पर उतरने और अंतरिक्ष की गहन खोज के लिए जरूरी सिस्टम को टेस्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.

कितना खर्च हुआ?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में नासा के महानिरीक्षक के अनुमान के अनुसार, 2025 तक इस कार्यक्रम की कुल लागत लगभग 93 अरब डॉलर बताई गई थी. भारतीय करंसी में इसकी वैल्यू 7,719,000,000,000 रुपए है. आर्टेमिस मिशन को अमेरिकी सरकार से फंडिंग मिलती है. यानी अमेरिकी करदाता ही फंडिंग का स्रोत हैं. निजी एयरोस्पेस कंपनियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं.

रॉयटर्स के अनुसार, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियां रॉकेट और अंतरिक्ष यान सहित मिशन के प्रमुख हिस्सों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं. इन कंपनियों को सरकारी अनुबंधों के माध्यम से भुगतान किया जाता है.

नासा के पहले मून मिशन ने चांद के कितने राज खोले थे? आज आर्टेमिस-II से इतिहास रचने की तैयारी

जब आज से करीब 50 या 60 वर्ष पहले नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर चला गया था तो अब क्या दिक्कत आ रही है इसका मतलब है कि नील आर्मस्ट्रांग को चंद्रमा पर भेजने की कहानी झूठी थी रूस ने तो इसे कभी मान्यता दी ही नहीं यह थ्योरी बिल्कुल गलत और बकवास थी की चंद्रमा पर कोई आदमी पहुंच गया है जब से आज तक फिर दूसरा कोई आदमी अमेरिका का चंद्रमा पर नहीं गया आज भी अमेरिका चंद्रमा पर यंत्र भेज रहा है।

इधर नीतीश कुमार जा रहे दिल्ली, उधर निशांत ने भी ले लिया बड़ा ‘संकल्प’, कहा- ‘पार्टी से जुड़ने…

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली जाने की तैयारी में हैं. करीब एक सप्ताह बाद (09 अप्रैल) वे दिल्ली जाएंगे. वे राज्यसभा के लिए शपथ लेंगे. एक तरफ नीतीश कुमार की नई यात्री शुरू होगी तो वहीं दूसरी ओर उनके बेटे निशांत भी संकल्प लेकर अपने काम में लगे हैं.

गुरुवार (02 अप्रैल, 2026) को निशांत कुमार ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर अपने संकल्प के बारे में बताया है. कैसे उन्हें जिम्मेदारियों का एहसास हुआ है ये भी बताया है. अपने पोस्ट में वे लिखते हैं, “जनसेवा का रास्ता सीखने और समझने का निरंतर सफर है.”

जनसेवा का रास्ता सीखने और समझने का निरंतर सफर है।

पार्टी से जुड़ने के बाद से अब तक हर दिन कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से संवाद कर जो अनुभव मिला है, उसने जिम्मेदारियों को और गहराई से महसूस कराया है।

आम लोगों की खुशहाली के लिए के साथ कार्य करता रहूँगा, यही मेरा… Nishant Kumar – निशांत कुमार

‘आम लोगों की खुशहाली के लिए…’

एक्स पोस्ट में ही आगे लिखा, “पार्टी से जुड़ने के बाद से अब तक हर दिन कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से संवाद कर जो अनुभव मिला है, उसने जिम्मेदारियों को और गहराई से महसूस कराया है. आम लोगों की खुशहाली के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहूंगा, यही मेरा संकल्प है.”

दरअसल निशांत कुमार ने कुछ दिनों पहले ही पार्टी की सदस्यता ली है. इसके बाद से उन्हें एक भविष्य के नेता के तौर पर देखा जा रहा है. जेडीयू के कार्यकर्ताओं की मांग है कि उन्हें ही अगला मुख्यमंत्री बना दिया जाए. हालांकि ये कितना संभव हो सकता है देखने वाली बात होगी.

अब बस इतने दिन CM रहेंगे नीतीश कुमार! बिहार में कब बन रही नई सरकार? सब कुछ तय

निशांत से पार्टी कार्यकर्ताओं की बढ़ी उम्मीद

नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने जिस तरह से राजनीति में कदम रखा है और आते ही काम शुरू किया इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं की उम्मीद उनसे बढ़ गई है. पार्टी से जुड़े बड़े नेता भी कई बार कह चुके हैं कि निशांत में काबिलियत है.

चर्चा है कि निशांत कुमार भी पिता की राह पर चल रहे हैं. वे भी बिहार के विकास की बातें कर रहे हैं. अभी बीते बुधवार को ही निशांत ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा था, “मेरा सौभाग्य है कि मैं नीतीश जी का पुत्र हूं, जिन्होंने हमेशा राजनीति को जनसेवा का दायित्व माना.”

अमेरिका ने ईरान को 14 हज़ार करोड़ कैश हवाई जहाज में भरकर क्यों भेजे? ट्रंप ने इसे क्यों कहा फिरौती?

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ईरान से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज गुरुवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हुई ईरान की न्यूक्लियर डील और 1.7 अरब डॉलर की कैश भुगतान का खासतौर से जिक्र किया.

भारतीय रुपये के हिसाब से यह रकम करीब 14 हजार करोड़ रुपए बैठती है.

ट्रंप ने इस डील को बकवास करार दिया और ईरान को दी गई 1.7 अरब डॉलर की भुगतान राशि को ईरान को खरीदने की कोशिश बताया. हालांकि इस डील को ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में ही रद्द कर चुके हैं. ट्रंप ने कहा, “मैंने बराक हुसैन ओबामा के ईरान न्यूक्लियर डील को खत्म कर दिया. यह एक डिजास्टर था. ओबामा ने उन्हें 1.7 बिलियन डॉलर कैश दिया. “ग्रीन कैश” वर्जीनिया, डीसी और मैरीलैंड के बैंकों से पैसा निकालकर हवाई जहाजों से भेजा गया, ताकि ईरान का सम्मान और उसकी वफादारी खरीदी जा सके. लेकिन ईरान ने यह काम नहीं किया. उलटे ईरान ने हमारा मजाक उड़ाया और अपना न्यूक्लियर बम बनाने का मिशन जारी रखा.”

JCPOA डील क्या थी क्यों दिए पैसे

आज हम आपको बताते हैं कि JCPOA डील क्या थी और ओबामा प्रशासन की ओर से ईरान को 1.7 अरब डॉलर कैश हवाईजहाज में क्यों भरकर भेजे गए थे? इस डील का पूरा नाम है Joint Comprehensive Plan of Action 2015 यानी JCPOA 2015. यह डील ओबामा प्रशासन के समय अमेरिका, ईरान और P5+1 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी) के बीच हुई थी.

डील का मकसद युद्ध के बगैर ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था. बदले में ईरान से यह कहा गया कि उसे अपना यूरेनियम संवर्धन सीमित करना होगा, पुरानी मशीनें हटानी होगी, न्यूक्लियर साइट्स पर अंतरराष्ट्रीय जांच की अनुमति देना होगा और 15 साल तक सख्त नियम भी मानना होगा.

डील के बाद में ईरान पर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध (सैंक्शंस) हटाए गए, तेल निर्यात और वैश्विक व्यापार की छूट मिली और विदेश में फंसा पैसा वापस मिलने लगा.

इस पर ट्रंप का कहना है कि यह डील बहुत ही कमजोर थी. क्योंकि इसमें समयसीमा तय की गई थी (15 साल बाद नियम खत्म हो जाते), इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम शामिल नहीं किया गया था और ईरान को जो मिला पैसा वह उसका इस्तेमाल प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह) को सपोर्ट करने में कर सकता था. इसलिए 2018 में उन्होंने अमेरिका को इस डील से बाहर निकाल लिया और फिर से नए प्रतिबंध लगा दिए.

1.7 डॉलर बिलियन कैश का क्या मामला?

ट्रंप अक्सर इस पैसे का जिक्र करते हैं. साल 2016 में ओबामा प्रशासन ने ईरान को करीब 1.7 अरब डॉलर दिए थे? तो इसमें सच्चाई क्या है? यह कोई नई “मदद” या “रिश्वत” नहीं थी. बल्कि यह 1979 की ईरानी क्रांति से पहले का पुराना बकाया था. तब ईरान ने अमेरिका से मिलिट्री उपकरण खरीदने के लिए एडवांस पेमेंट किया था. लेकिन क्रांति के बाद यह डील रद्द हो गई, हथियार नहीं दिए गए और पैसा फंस गया.

समझौते के तहत कुल राशि 400 मिलियन डॉलर मूल राशि और इसमें 1.3 बिलियन डॉलर ब्याज जुड़ गया. उस समय ईरान पर बैंकिंग प्रतिबंध थे, इसलिए बैंक में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका. पैसा विदेशी मुद्रा (यूरो या स्विस फ्रैंक) में पैलेट्स (ढेर) भरकर हवाई जहाजों से भेजा गया. यहीं से “प्लेन फूल ऑफ कैश” वाली चर्चा शुरू हुई.

अब इस पर फिर विवाद क्यों?

डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक इसे “रैंसम” यानी फिरौती बताते हैं क्योंकि यह सब कुछ ईरान के कुछ बंधकों की रिहाई के समय हुआ था. ओबामा प्रशासन का कहना था कि यह कानूनी सेटलमेंट था. अगर कोर्ट केस हारते तो ज्यादा पैसा देना पड़ सकता था. दोनों डील्स को अलग-अलग बताया गया. हालांकि पैसा पुराना बकाया था, लेकिन जिस तरीके से कैश भेजा गया, उससे विवाद बढ़ गया.

ईरान में 1979 में हुई ईरानी क्रांति विवाद की मुख्य वजह बनी. ईरान क्रांति आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में मानी जाती है. इस क्रांति ने न सिर्फ देश की सत्ता बदली, बल्कि अमेरिका के साथ रिश्तों को भी पूरी तरह पलट कर दुश्मनी में बदल दिया.

क्रांति से पहले क्या थे ईरान में हालात?

साल 1979 से पहले ईरान पर शाह मोहम्मद रजा शाह पहलवी का शासन हुआ करता था. वह अमेरिका के करीबी माने जाते थे. जिमी कार्टर समेत अमेरिकी नेतृत्व के साथ उनके मजबूत संबंध थे. ईरान अमेरिका से हथियार और सैन्य उपकरण खरीद रहा था. इसी दौरान ईरान ने अमेरिका को बड़ी रकम एडवांस में दी थी, जो बाद में विवाद का कारण बनी.

शाह के शासन के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी. इसकी मुख्य वजहें थीं, तानाशाही और विरोधियों पर सख्ती, अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई, पश्चिमी असर और पारंपरिक मूल्यों में कमी शामिल थीं. कई लोगों को लगता था कि सरकार जनता के बजाय अमेरिका के हितों के लिए काम कर रही है.

कैसे हुई क्रांति?

1978-79 में देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू होने लगे और जल्द ही बड़े आंदोलन में बदल गया. इस आंदोलन का नेतृत्व धार्मिक नेता रुहोल्लाह खुमैनी ने किया. शाह को देश छोड़कर भागना पड़ा. खुमैनी सत्ता में आए और ईरान अब इस्लामिक रिपब्लिक बन गया. इस तरह से राजशाही सत्ता खत्म हो गई और धार्मिक नेतृत्व शुरू हुआ.

अमेरिका-ईरान रिश्ते क्यों बिगड़े?

क्रांति के बाद सबसे बड़ा घटनाक्रम था ईरान बंधक संकट. तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया गया. 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया. इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह टूट गए और प्रतिबंधों का दौर शुरू हो गया.

अरबों डॉलर का विवाद कैसे शुरू हुआ?

क्रांति से पहले ईरान ने अमेरिका को हथियार खरीदने के लिए एडवांस भुगतान किया था. लेकिन क्रांति के बाद डील रद्द हो गई. अमेरिका ने न तो हथियार दिए और न ही तुरंत पैसा लौटाया. यह पैसा दशकों तक फंसा रहा और बाद में 2016 में बराक ओबामा के समय इसे लौटाया गया.

ईरानी क्रांति सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि एक ऐसा मोड़ था जिसने देश ईरान की राजनीतिक व्यवस्था बदल दी. अमेरिका के साथ रिश्ते खराब कर दिए. आज तक जारी तनाव की नींव रख दी. यही वजह है कि आज भी ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की जड़ें 1979 की इसी क्रांति से जुड़ी हुई हैं.

राजस्थान के इस शख्स ने 15 रुपये के आंवले से कमाए करोड़ों, सक्सेस स्टोरी कर देगी इंस्पायर…

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Gooseberry Farming: राजस्थान के भरतपुर जिले के अमर सिंह ने वह कर दिखाया है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता. 15 रुपये किलो बिकने वाले आंवले ने आज उन्हें करोड़पति किसान बना दिया है.

अमर सिंह की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आप मॉडर्न माइंडसेट और सही बिजनेस स्ट्रैटेजी के साथ मिट्टी से जुड़ें.

तो कामयाबी कदम चूमती है. महज 100 पेड़ों से शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है. उनकी यह जर्नी केवल पसीने की नहीं. बल्कि स्मार्ट वर्क और इनोवेशन की दास्तां है जिसने पूरे राजस्थान के किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है. अमर सिंह आज न केवल लाखों कमा रहे हैं. बल्कि खेती में वैल्यू एडिशन का एक परफेक्ट मॉडल पेश कर रहे हैं. जान लीजिए अमर सिंह की पूरी कहानी.

छोटी शुरुआत से बड़ा बिजनेस एंपायर

अमर सिंह ने जब आंवले की खेती शुरू की थी. तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह मामूली सा फल उनकी किस्मत बदल देगा. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 100 पेड़ों के साथ रिस्क लियाय लेकिन उनकी दूरदर्शिता कमाल की थी. उन्होंने सिर्फ कच्चा आंवला बेचने पर फोकस नहीं किया. क्योंकि मंडी में उसका भाव काफी कम मिलता था. यहीं से उन्होंने अपनी स्ट्रैटेजी बदली और आंवले की प्रोसेसिंग पर ध्यान देना शुरू किया.

आज उनके पास आंवले के बाग का बड़ा एरिया है और वह खुद की प्रोसेसिंग यूनिट भी चला रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी क्वालिटी और ग्राहकों का भरोसा है. जिसकी बदौलत आज उनका टर्नओवर करोड़ों में पहुंच गया है. एक आम किसान से एक सफल एग्री-बिजनेस टाइकून बनने का यह सफर वाकई किसी को भी इंस्पायर करने के लिए काफी है.

महज 100 आंवले के पेड़ों से शुरू किया था अपना यह पूरा फार्मिंग सफर.

कच्चे फल की जगह उसकी प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को अपना मुख्य हथियार बनाया.

आज अपनी मेहनत के दम पर करोड़ों रुपये का सालाना टर्नओवर जनरेट कर रहे हैं.

बेचने के लिए अपनाया यह तरीका

अमर सिंह की असली सफलता का राज उनके आंवले बेचने के तरीके में छिपा है. जो आजकल के मॉडर्न एग्री-बिजनेस का मूल मंत्र है. उन्होंने महसूस किया कि अगर 15 रुपये के आंवले को मुरब्बा, कैंडी, जूस या पाउडर में बदल दिया जाए. तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है. इसी विजन के साथ उन्होंने आंवले के प्रोडक्ट्स तैयार करना शुरू किए और सीधे मार्केट में अपनी जगह बनाई. आज उनके बनाए प्रोडक्ट्स की डिमांड न सिर्फ लोकल मार्केट में है.

बल्कि दूर-दूर तक लोग उनके काम के कायल हैं. वह न केवल खुद लाखों कमा रहे हैं. बल्कि गांव के कई लोगों को रोजगार देकर एक सोशल एंटरप्रेन्योर की भूमिका भी निभा रहे हैं. अमर सिंह की यह कहानी सिखाती है कि खेती में अगर थोड़ा सा दिमाग और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का तड़का लगा दिया जाए. तो मुनाफे की कोई लिमिट नहीं है.

आंवले से मुरब्बा, कैंडी और जूस जैसे कई प्रीमियम प्रोडक्ट्स तैयार किए.

प्रोसेसिंग के जरिए कच्चे आंवले की मार्केट वैल्यू को कई गुना तक बढ़ा दिया.

आज कई परिवारों को रोजगार देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं.

कब खुलेगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे? सरकार ने संसद में दी ये जानकारी…

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दिल्ली के तीन मेन रास्ते सिग्नल फ्री होंगे, जिसके बाद 1 घंटे का सफर महज 15 मिनट में होगा. सरकार ने संसद में ये जानकारी दी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन प्रमुख मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत लिया गया है और उन्हें सिग्नल फ्री बनाया जाएगा.

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली-देहरादून राजमार्ग का लोकार्पण आगामी आठ से दस दिन के भीतर किया जाएगा.

मल्होत्रा ने लोकसभा में दक्षिण दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली में तीन मुख्य मार्ग हैं जिन्हें हाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत लिया गया है.

कौन से रास्ते होंगे सिग्नल फ्री?

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि राजधानी में आश्रम से बदरपुर, महरौली से गुड़गांव और पंजाबी बाग से टीकरी तक तीन व्यस्त मार्गों पर फ्लाईओवर बनाकर इन्हें सिग्नल फ्री किया जाएगा और एक घंटे से अधिक की दूरी को कम करके 15 मिनट से आधे घंटे तक किया जाएगा.

एक और रोड पर हो रहा काम

मल्होत्रा ने कहा कि गुड़गांव से दिल्ली आते समय हवाई अड्डे के पास एक क्षेत्र में अक्सर रहने वाली यातायात जाम की स्थिति से निजात पाने के लिए शिवमूर्ति से नेल्सन मंडेला मार्ग तक पांच किलोमीटर की सुरंग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी और इस पर काम प्रारंभ कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए यहां डीएनडी से फरीदाबाद तक एक एलिवेटिड रोड पर परिचालन अगले छह महीने में शुरू होने की संभावना है. मल्होत्रा ने कहा, हम दिल्ली-देहरादून राजमार्ग का लोकार्पण अगले आठ-दस दिन में करने जा रहे हैं.

बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीबीआई या एनआईए से जांच का दिया आदेश…

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पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. यह अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR के काम में लगे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीधे-सीधे अपने अधिकार को चुनौती बताया है. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के आला अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है.

इसके साथ ही कोर्ट ने घटना की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाने और न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय बलों की सुरक्षा उपलब्ध करवाने को भी कहा है. हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की तरफ से घटना का ब्यौरा देते हुए भेजी गई चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए हैं :-

चुनाव आयोग केंद्रीय बलों की मांग करे और पश्चिम बंगाल में उन्हें नियुक्त करे

जहां भी न्यायिक अधिकारी रुके हैं, वहां भी सुरक्षा दी जाए

अगर जरूरी हो तो उनके परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाए

चुनाव आयोग जरूरत के मुताबिक कदम उठाए. राज्य सरकार आयोग के निर्देशों के मुताबिक काम करे

जहां SIR से जुड़े दावों का निपटारा हो रहा है, वहां एक बार में 5 से ज्यादा लोगों को जमा न होने दिया जाए

मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है. यह अधिकारी बताएं कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न हो

यह अधिकारी 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में ऑनलाइन मौजूद रहें

चुनाव आयोग घटना की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाए. यह एजेंसी CBI या NIA हो सकती है

जांच करने वाली एजेंसी अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को दे

क्या है मामला?

बुधवार को मालदा में SIR प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया. उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायत की. इस दौरान 3 महिला अधिकारियों समेत कुल 7 न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया. प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे और प्रमुख ग्रामीण रास्तों को भी जाम कर दिया. इससे 5 विधानसभा क्षेत्रों में जनजीवन ठप हो गया.

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने क्या लिखा है?

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट को पढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मालदा के डीएम और एसएसपी घटनास्थल पर न्यायिक अधिकारियों की सहायता के लिए नहीं पहुंचे. इसके चलते हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी से संपर्क किया. तब कहीं जाकर रात 12 बजे के बाद न्यायिक अधिकारी बाहर निकल पाए. इसके बाद भी उन पर पथराव हुआ. चीफ जस्टिस ने बताया है कि राज्य के चीफ सेक्रेट्री का नम्बर व्हाट्सऐप पर उपलब्ध नहीं था. जिस तरह की घटना हुई है, उसका न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, ‘क्या आप सोचते हैं कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन थे? मैं रात 2 बजे तक स्थिति की जानकारी ले रहा था. ऐसा लगता है कि राज्य के अधिकारियों ने अपने कर्तव्य का त्याग कर दिया है. यह कोई सामान्य घटना नहीं है. यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और कानूनी प्रक्रिया को रोकने की एक सोची-समझी चाल है. हम इसकी अनुमति नहीं देंगे.’

Good Friday 2026: 3 अप्रैल को क्यों मनाया जाएगा गुड फ्राइडे? जानें यीशु के बलिदान से जुड़ी पूरी कहानी?

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Good Friday 2026: गुड फ्राइडे ईसाई धर्म ग्रंथों में सबसे पवित्र और आध्यात्मिक दिनों में से एक है, इस धर्म में आस्था रखने वालों के लिए विराम लेने, चिंतन करने और उस पल को याद करने के लिए आमंत्रित करता है, जिसने आस्था और इतिहास की दिशा तय की.

पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाने वाला यह दिन खासतौर पर यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ने और मृत्यु पर केंद्रित है, एक ऐसी घटना जिसका दुनियाभर में लाखों लोगों के लिए गहरी भावनात्मक और धार्मिक महत्व है.

इस दिन चर्च शांत हो जाते हैं, प्रार्थनाएं और अधिक गहन हो जाती हैं, और समुदाय एक साथ मिलकर स्मरण करते हैं, एक ऐसा दिन जो उत्सव नहीं, बल्कि चिंतन और श्रद्धा से परिभाषित होता है.

वर्ष 2026 में गुड फ्राइडे कब है?

2026 में गुड फ्राइडे 3 अप्रैल को मनाया जाएगा, जो ईस्टर संडे (5 अप्रैल) से ठीक दो दिन पहले है. यह हर वर्ष ईस्टर से पहले वाले शुक्रवार को मनाया जाता है और यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने के दिन की स्मृति है.

कई ईसाइयों के लिए यह मौन, प्रार्थना और चिंतन का समय होता है, क्योंकि वे ईस्टर की खुशी के लिए आध्यात्मिक रूप से तैयारी करते हैं, जो मसीह के पुनरुत्थान का उत्सव है.

गुड फ्राइडे से जुड़ा इतिहास

गुड फ्राइडे की उत्पत्ति की जड़े न्यू टेस्टामेंट के वृत्तांतों में गहराई से समाई है, जिनमें यीशु मसीह के जीवन के आखिरी पलों का विस्तृत वर्णन है. इन ग्रंथों के मुताबिक, यीशु पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया और उन्हें न्याय के लिए रोमन अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया.

आखिर मुकदमें के परिणामस्वरूप उन्हें सूली पर चढ़ाकर मृत्यु दंड दिया गया. इस फैसले के बाद यीशु को खुद अपना क्रूस उठाकर उस स्थान तक ले जाना पड़ा था, जहां उन्हें फांसी दी जानी थी.

क्रूस पर चढ़ाए जाने के दौरान उन्हें असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा, ईसाई धर्म में बलिदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कहा जाता है कि, इस कार्य के द्वारा यीशु ने मानवता के पापों को अपने ऊपर ले लिया और विश्वासियों को मुक्ति और क्षमा प्रदान की.

दुनिया भर में गुड फ्राइडे कैसे मनाते हैं?

दुनियाभर में गुड फ्राइडे को कई तरह की प्रथाओं के साथ मनाया जाता है, जो सांस्कृतिक और क्षेत्रीय परंपराओं को दर्शाती है, इसके साथ ही स्मरण पर साझा ध्यान केंद्रित करती हैं. कई लोग चर्च में प्रार्थना करने के साथ यीशु मसीह को याद करते हैं.

उपवास और संयम बरतना भी आम बात है, जिसमें कई लोग अनुशासन और सम्मान के प्रतीक के रूप में सादा खाना चुनते हैं और मांस या शराब का सेवन पूरी तरह से छोड़ देते हैं.

कई क्षेत्रों में सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें कुछ समुदायों को क्रूस पर चढ़ाने जाने से पहले की घटनाओं का नाट्य रूपांतरण करते हैं और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के जरिए से इतिहास को जीवंत रखते हैं.

घर में परिवार अक्सर प्रार्थना में समय बिताते हैं और साथ मिलकर धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, जिससे इस दिन की पवित्रता का अनुभव होता है. पालन-पोषण में विभिन्नताओं के बावजूद गुड फ्राइडे का सार वही रहता है, बलिदान का सम्मान करना, आस्था को गहरा रखना और ईस्टर रविवार को आने वाली आशा के लिए तैयारी करना.

“Israel vs IND: इजरायल के खिलाफ ODI सीरीज में खेली भारत की ये टीम, BCCI अधिकारी का बेटा था कप्तान”

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Israel XI vs India A: इजरायल इन दिनों चर्चा में है ईरान के साथ चल रहे विध्वंसक युद्ध को लेकर. महीना बीत चुका है पर लड़ाई अभी भी जारी है,. ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका की जारी लड़ाई का अंजाम क्या होगा?

ये कब तक थमेगा? फिलहाल पता नहीं. लेकिन, इस जारी भीषण युद्ध के बीच क्या आप जानते हैं कि भारत और इजरायल के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जा चुकी है. जी हां, इसके लिए भारत की ‘ए’ टीम ने 2008 में इजरायल का दौरा किया था, जिसमें चेतेश्वर पुजारा., ऋद्धिमान साहा, मुरली विजय जैसे नाम शामिल थे. इजरायल का दौरा करने वाली उस इंडिया ए की टीम के कप्तान BCCI अधिकारी रहे निरंजन शाह के बेटे जयदेव शाह थे.

इजरायल से वनडे सीरीज की खास बात

वनडे सीरीज में और भी हैरानी की बात ये थी कि उसमें इजरायल की टीम से खेलने वाले खिलाड़ियों में साउथ अफ्रीका के जोंटी रोड्स, एडम बाचर जैसे नाम शामिल थे. एक वनडे मुकाबला तो सिर्फ 12.3 ओवर में ही खत्म हो गया था. वहीं सीरीज के आखिरी मैच में भारतीय खिलाड़ियों को फ्लाइट पकड़ने की जल्दी दिखी, जिसके चलते वो मैच सिर्फ 40 ओवर का खेला गया. वो वनडे सीरीज इजरायल की 60वीं वर्षगांठ पर खेला गया था.

पहले वनडे में इजरायल 52 रन पर ढेर

भारतीय टीम ने सीरीज के पहले वनडे में इजरायल इलेवन को सिर्फ 52 रन पर ढेर कर दिया. इसमें जोंटी रोड्स ने सिर्फ 11 रन बनाए. भारत की ओर से मीडियम पेसर रजत भाटिया ने 5 रन देकर 4 विकेट लिए. जवाब में भारत ए ने 53 रन के लक्ष्य का पीछा 1 विकेट खोकर कर लिया. भारत की ओर से पहले वनडे में मुरली विजय ने 31 रन की पारी खेली.

दूसरा वनडे रहा था रनों से भरा

इजरायल और इंडिया ए के बीच सीरीज का दूसरा वनडे हाई-स्कोरिंग रहा. इंडिया ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 313 रन बनाए, जिसमें पुजारा ने 74 रन, मुरली विजय ने 76 रन जबकि रजत भाटिया ने 55 रन बनाए. इजरायल इलेवन को 314 रन का बड़ा लक्ष्य मिला, जिसका पीछा करते हुए इस बार उसने फाइट किया. इजरायल की ओर से एडम बाचर ने 57 गेंदों में 74 रन मारे, जिसमें 8 छक्के शामिल रहे. उनके अलावा जेसन मोलिन्स ने 55 रन की पारी खेली. हालांकि फिर भी इजरायल लक्ष्य को भेद नहीं पाई और 233 रन पर ऑल आउट हो गई.

40 ओवर का हुआ आखिरी वनडे

वनडे सीरीज का आखिरी मैच जो कि सिर्फ 40 ओवर का खेला गया क्योंकि भारतीय टीम को फ्लाइट पकड़नी थी, उसमें भारत ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 225 रन बनाए. जवाब में इजरायल इलेवन 129 रन बनाकर ऑल आउट हो गए. ऋद्धिमान साहा ने फाइनल वनडे में 85 रन बनाए, जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था. कप्तान जयदेव शाह और अशोक डिंडा ने सीरीज के आखिरी वनडे में 4-4 विकेट लिए थे.

जयदेव शाह की कप्तानी में 3-0 से जीती सीरीज

जयदेव शाह की कप्तानी में इंडिया ए ने इजरायल के साथ खेली 3 वनडे की सीरीज में क्लीन स्वीप किया और 3-0 से सीरीज जीती.