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बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीबीआई या एनआईए से जांच का दिया आदेश…

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पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. यह अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR के काम में लगे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीधे-सीधे अपने अधिकार को चुनौती बताया है. कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के आला अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है.

इसके साथ ही कोर्ट ने घटना की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाने और न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय बलों की सुरक्षा उपलब्ध करवाने को भी कहा है. हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की तरफ से घटना का ब्यौरा देते हुए भेजी गई चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए हैं :-

चुनाव आयोग केंद्रीय बलों की मांग करे और पश्चिम बंगाल में उन्हें नियुक्त करे

जहां भी न्यायिक अधिकारी रुके हैं, वहां भी सुरक्षा दी जाए

अगर जरूरी हो तो उनके परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाए

चुनाव आयोग जरूरत के मुताबिक कदम उठाए. राज्य सरकार आयोग के निर्देशों के मुताबिक काम करे

जहां SIR से जुड़े दावों का निपटारा हो रहा है, वहां एक बार में 5 से ज्यादा लोगों को जमा न होने दिया जाए

मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है. यह अधिकारी बताएं कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न हो

यह अधिकारी 6 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में ऑनलाइन मौजूद रहें

चुनाव आयोग घटना की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाए. यह एजेंसी CBI या NIA हो सकती है

जांच करने वाली एजेंसी अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को दे

क्या है मामला?

बुधवार को मालदा में SIR प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया. उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायत की. इस दौरान 3 महिला अधिकारियों समेत कुल 7 न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया. प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे और प्रमुख ग्रामीण रास्तों को भी जाम कर दिया. इससे 5 विधानसभा क्षेत्रों में जनजीवन ठप हो गया.

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने क्या लिखा है?

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट को पढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मालदा के डीएम और एसएसपी घटनास्थल पर न्यायिक अधिकारियों की सहायता के लिए नहीं पहुंचे. इसके चलते हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी से संपर्क किया. तब कहीं जाकर रात 12 बजे के बाद न्यायिक अधिकारी बाहर निकल पाए. इसके बाद भी उन पर पथराव हुआ. चीफ जस्टिस ने बताया है कि राज्य के चीफ सेक्रेट्री का नम्बर व्हाट्सऐप पर उपलब्ध नहीं था. जिस तरह की घटना हुई है, उसका न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, ‘क्या आप सोचते हैं कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन थे? मैं रात 2 बजे तक स्थिति की जानकारी ले रहा था. ऐसा लगता है कि राज्य के अधिकारियों ने अपने कर्तव्य का त्याग कर दिया है. यह कोई सामान्य घटना नहीं है. यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और कानूनी प्रक्रिया को रोकने की एक सोची-समझी चाल है. हम इसकी अनुमति नहीं देंगे.’