अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अपना मून मिशन आर्टेमिस II लॉन्च कर दिया है. 4 अंतरिक्षयात्रियों ने अमेरिका के फ्लोरिडा से उड़ान भरी. 3 साल की ट्रेनिंग के बाद अंतरिक्ष यात्री इस मिशन पर भेजे गए हैं.
10 दिन का यह मिशन कई मायने में बहुत खास है. दिलचस्प बात है कि चांद के चक्कर लगाकर भी ये अंतरिक्षयात्री वहां की सतह पर नहीं उतरेंगे.
नासा के इस मिशन का लक्ष्य चांद पर उतरना है ही नहीं. इस मिशन के जरिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी यहां पर बेस बनाना चाहती है. लक्ष्य सिर्फ इतना ही नहीं है.
जब चांद पर उतरना ही नहीं, तो क्यों करोड़ों डॉलर खर्च किए?
नासा चांद पर अपना बेस बनाना चाहती है. आर्टेमिस II मिशन इसी लक्ष्य का हिस्सा है. नवंबर 2022 में लॉन्च हुए और चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करने वाले आर्टेमिस I मिशन का उद्देश्य रॉकेट और मानवरहित कैप्सूल का परीक्षण करना था. अब भेजे गए आर्टेमिस II मिशन में SLS रॉकेट और ओरियन लाइफ सपोर्ट सिस्टम की क्षमता को जांचना भी लक्ष्य है.
नासा ने अपने मिशन को बताते हुए लिखा है कि ‘आर्टेमिस II मिशन यह पुष्टि करेगा कि अंतरिक्षयान के सभी सिस्टम चालक दल के साथ अंतरिक्ष की गहराई में ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं. इस मिशन के अनुभवों से मून मिशन के अगले चरण का रास्ता साफ होगा.
नासा का आर्टेमिस III मिशन पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग की टेस्टिंग करेगा. वहीं, 2028 में लॉन्च होने वाले आर्टेमिस IV मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे.
नासा के मिशन एनालिसिस एंड इंटीग्रेटेड असेसमेंट के डिप्टी लीड पैटी कैसास हॉर्न ने सीएनएन को बताया, मिशन का मुख्य उद्देश्य चालक दल को सुरक्षित और स्वस्थ वापस लाना है. स्पेस व्हीकल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, और उसके बाद नेविगेशन और ऑनबोर्ड सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा.
आर्टेमिस II सिर्फ एक मिशन नहीं बल्कि एक लम्बी प्लानिंग का हिस्सा है. इसे भविष्य में चंद्रमा पर उतरने और अंतरिक्ष की गहन खोज के लिए जरूरी सिस्टम को टेस्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.
कितना खर्च हुआ?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में नासा के महानिरीक्षक के अनुमान के अनुसार, 2025 तक इस कार्यक्रम की कुल लागत लगभग 93 अरब डॉलर बताई गई थी. भारतीय करंसी में इसकी वैल्यू 7,719,000,000,000 रुपए है. आर्टेमिस मिशन को अमेरिकी सरकार से फंडिंग मिलती है. यानी अमेरिकी करदाता ही फंडिंग का स्रोत हैं. निजी एयरोस्पेस कंपनियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं.
रॉयटर्स के अनुसार, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियां रॉकेट और अंतरिक्ष यान सहित मिशन के प्रमुख हिस्सों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं. इन कंपनियों को सरकारी अनुबंधों के माध्यम से भुगतान किया जाता है.
नासा के पहले मून मिशन ने चांद के कितने राज खोले थे? आज आर्टेमिस-II से इतिहास रचने की तैयारी
जब आज से करीब 50 या 60 वर्ष पहले नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर चला गया था तो अब क्या दिक्कत आ रही है इसका मतलब है कि नील आर्मस्ट्रांग को चंद्रमा पर भेजने की कहानी झूठी थी रूस ने तो इसे कभी मान्यता दी ही नहीं यह थ्योरी बिल्कुल गलत और बकवास थी की चंद्रमा पर कोई आदमी पहुंच गया है जब से आज तक फिर दूसरा कोई आदमी अमेरिका का चंद्रमा पर नहीं गया आज भी अमेरिका चंद्रमा पर यंत्र भेज रहा है।



