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‘सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है’, राष्ट्रपति ने अभिभाषण में UGC नियमों का किया जिक्र…

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उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर कई वर्गों की ओर से चिंता और विरोध जताया गया है. इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को कहा कि सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, वंचितों और आदिवासी समुदायों के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है.

आज देश के 95 करोड़ लोगों को मिला सामाजिक सुरक्षा का कवचः राष्ट्रपति

बजट सत्र की शुरुआत के मौके पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास की परिकल्पना देश के सभी नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है. उन्होंने कहा कि साल 2014 की शुरुआत में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सिर्फ 25 करोड़ नागरिकों तक ही पहुंच पाती थीं, लेकिन मेरी सरकार के निरंतर कोशिशों से आज देश के करीब 95 करोड़ भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा का कवच मिला है.

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, वंचितों और आदिवासी समुदायों के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. हालाकिं, इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया.

बाबा साहेब अंबेडकर ने हमेशा समानता पर दिया जोरः राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया. हमारा संविधान भी हमें इसी भावना से प्रेरित करता है.’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय का मतलब है कि हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने पूरे अधिकारों का इस्तेमाल करने का मौका मिले.

उन्होंने कहा, ‘सरकार सामाजिक न्याय के वास्तविक अर्थ को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसके नतीजे के तौर पर पिछले एक दशक में 25 करोड़ नागरिक गरीबी से बाहर निकले हैं. मेरी सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान और तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ा है. मेरी सरकार सभी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी को संस्थागत रूप दे रही है.’

भारत को टैरिफ का राजा बताने वाले अमेरिका के बदल गए सुर, EU के साथ डील के बाद बोला- इंडिया टॉप पर..

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अमेरिका का रिएक्शन सामने आया है. चूंकि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिस वजह से ट्रंप प्रशासन का बयान कई मायनों में अहम माना जा रहा है.

अमेरिकी ट्रेड अधिकारी और ट्रंप के करीबी जैमीसन ग्रीर ने कहा कि EU के साथ डील में सबसे बड़ा फायदा भारत का होने वाला है.

EU के साथ डील में टॉप पर भारत: जैमीसन ग्रीर

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘मैंने अब तक इस डील के कुछ डिटेल्स देखे हैं. ईमानदारी से कहूं तो इसमें भारत को फायदा मिलता दिख रहा है. भारत को यूरोप के बाजार में ज्यादा पहुंच मिल रही है. कुल मिलाकर भारत टॉप पर रहेगा. ऐसा भी हो सकता है कि इस डील में कुछ इमिग्रेशन राइट्स भी दे दिए जाएं, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स और वर्कर्स को यूरोपीय देशों में काम करने के ज्यादा मौका मिल जाए.’ उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका की बदलती ट्रेड पॉलिसी की वजह से भारत-EU के बीच फ्री ट्रेड डील हुआ है.

‘अमेरिका के कारण यूरोपी खोज रहा दूसरा मार्केट’

अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘यह समझना जरूरी है कि जब अमेरिका अपने बाजार को सीमित कर रहा है तब यूरोपीय यूनियन जैसे ट्रेड-डिपेंडेंट ब्लॉक को दूसरा ऑप्शन खोजने पड़ रहे हैं. यही कारण है कि यूरोपीय यूनियन भारत जैसे बड़े बाजार की ओर रुख कर रहा है.’

ग्रीर ने यूरोपीय संघ की आलोचना करते हुए कहा कि जब अमेरिका वैश्वीकरण की कुछ समस्याओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, तब नाटो वैश्वीकरण पर और जोर दे रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देते हुए अन्य देशों से हमारे बाजार में आने वाले सामानों पर टैरिफ लगाना शुरू किया. यही कारण है कि ये देश अपने सामान के लिए अन्य बाजार तलाश रहे हैं. यूरोपीय यूनियन ट्रेड पर इतना निर्भर है कि उसे अन्य बाजारों की जरूरत है इसलिए वह अपना सारा सामान अमेरिका को नहीं भेज सकता.’

‘रूसी तेल को लेकर यूरोप ने भारत पर नहीं बनाया दवाब’

जैमीसन ग्रीर के बयान की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले की अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूसी तेल को लेकर भारत पर दवाब नहीं डालने के लिए यूरोपीय यूनियन पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा, अमेरिकी टैरिफ के कारण ही भारत ने रूसी तेल की खरीद कम की क्योंकि यूरोपीय देश ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. वे (EU) भारत के साथ एक बड़ा ट्रेड डील करना चाहते थे.

Budget 2026: बजट के पीछे की ताकत, जानिए कौन तैयार कर रहे हैं देश के विकास का रोडमैप?

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Union Budget 2026 Team: देश का आम बजट तैयार करना एक बड़ी और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया होती है. जिसमें कई अनुभवी अफसरों की अहम भूमिका रहती है. इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट को पेश करने वाली है.

इस काम में वित्त मंत्रालय की एक मजबूत टीम उनका साथ दे रही है. यह टीम मौजूदा आर्थिक हालात और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बजट का खाका तैयार कर रही है.

गौरतलब है कि वित्त मंत्री 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी. जो मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट होगा. इस बार के बजट में सबसे खास बात यह है कि इस बार बजट तैयार करने की जिम्मेदारी एक महिला अधिकारी के कंधों पर हैं. आइए जानते हैं कि बजट 2026-27 को तैयार करने वाली इस टीम में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं…

बजट की तैयारी में अनुराधा ठाकुर की अहम भूमिका

बजट 2026-27 की तैयारियों में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है. विभाग की प्रमुख होने के नाते संसाधनों के सही बंटवारे और देश के व्यापक आर्थिक ढांचे को तय करने की जिम्मेदारी वे संभाल रही हैं. उनके नेतृत्व में बजट विभाग पूरा बजट दस्तावेज तैयार कर रहा है. जिससे उन्हें इस प्रक्रिया की ‘चीफ आर्किटेक्ट’ कहा जाता है.

हिमाचल प्रदेश कैडर की 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर के लिए यह पहला बजट है, क्योंकि उन्होंने 1 जुलाई 2025 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. खास बात यह है कि वह इस विभाग का नेतृत्व करने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी भी हैं.

बजट टीम के अन्य प्रमुख सदस्य

बजट 2026-27 की तैयारी में शामिल प्रमुख अधिकारियों में अरविंद श्रीवास्तव (राजस्व सचिव), एम. नागराजू (वित्तीय सेवा सचिव) और वुमलुनमंग वुअलनाम (व्यय सचिव) शामिल हैं. ये सभी वरिष्ठ स्तर पर बजट प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं.

इसके अलावा अरुणिष चावला (सचिव), के. मोसेस चालई (सार्वजनिक उद्यम विभाग सचिव) और वी. अनंत नागेश्वरन (चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर) भी इस टीम का अहम हिस्सा हैं.

उर्सुला फॉन डेर लायन की भारत यात्रा: फैशन और आधिकारिक कार्यक्रमों…

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यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष का भारत दौरा

“यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन भारत यात्रा के दौरान केवल अपनी उपस्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहने गए उनके आकर्षक परिधानों के लिए भी चर्चा में रहीं।

उनकी शालीन और आधुनिक वेशभूषा ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि इस पर व्यापक चर्चा भी हुई। उनके कपड़े भारतीय परंपरा और यूरोपीय आधुनिकता का एक सुंदर संतुलन प्रस्तुत करते हैं।

गणतंत्र दिवस समारोह में उपस्थिति

ईयू की नेता ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, जहां उन्होंने कत्थई और सुनहरे रंग के रेशमी ब्रोकेड का परिधान पहना था।

ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

मंगलवार को, जब भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो उन्होंने हैदराबाद हाउस में एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इस दौरान उर्सुला ने नीले रंग की पोशाक और सफेद पैंट पहनी हुई थी।

फैशन डिजाइन काउंसिल का ध्यान

भारत में आयोजित कार्यक्रमों में यूरोपीय संघ की प्रमुख के पहनावे ने फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (एफडीसीआई) का भी ध्यान आकर्षित किया। एफडीसीआई ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में इसे भारतीय फैशन के लिए वैश्विक मंच पर गौरव का क्षण बताया।

छत्तीसगढ़ में गौमाता के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री की पहल…

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गौमाता के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है। अधिकारियों ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गौमाता पर आधारित पहली फिल्म ‘गोदान’ का ट्रेलर लॉन्च किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गौमाता केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने घोषणा की कि फिल्म ‘गोदान’ को छत्तीसगढ़ में कर मुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में गौ संवर्धन के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। गौशालाओं में गायों के चारे के लिए अनुदान राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 35 रुपए किया गया है, और अब गौशालाओं को 25 लाख रुपए की सहायता भी दी जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा गोधाम का निर्माण भी किया जा रहा है, जहां घुमंतू गौवंश की उचित देखभाल की जा रही है। साय ने कहा, ‘गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। हर अनुष्ठान से पहले पंचगव्य का उपयोग किया जाता है। यह खुशी की बात है कि गौमाता पर केंद्रित पहली फिल्म ‘गोदान’ का ट्रेलर आज लॉन्च किया गया है।’

उन्होंने इस फिल्म के माध्यम से गौमाता के महत्व को समझने का अवसर मिलने की बात कही और फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। यह फिल्म 6 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

मध्यप्रदेश में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से बिजली उत्पादन के लिए समझ…

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मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए नए समझौते

मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को राज्य में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश के तहत 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन और आपूर्ति के लिए तीन निजी बिजली कंपनियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

समझौतों का आदान-प्रदान ‘मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी’ के प्रबंध निदेशक विशेष गडपाले और ‘टोरेंट पावर लिमिटेड’ के जिगिश मेहता, ‘अडानी पावर लिमिटेड’ के एस बी ख्यालिया तथा ‘हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के रतुल पुरी के बीच हुआ।

भोपाल के समत्व भवन (मुख्यमंत्री आवास) में मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में इन बिजली आपूर्ति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। यादव ने इन समझौतों की सराहना करते हुए कहा कि ये राज्य के सतत विकास की आधारशिला रखेंगे।

उन्होंने बताया कि इससे मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता में वृद्धि होगी और राज्य की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यादव ने कहा कि ये नए बिजली संयंत्र डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (डीबीएफओओ) मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जिससे लगभग 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

ये संयंत्र अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे। यादव ने यह भी बताया कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और सुशासन के कारण, मध्यप्रदेश भारत और विदेशों में निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बन रहा है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता संपन्न…

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भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब आधिकारिक रूप से हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल थे।

इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक GDP का लगभग 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोगों का बाजार शामिल है।

समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

भारत के 99% से अधिक निर्यात को EU बाजार में शून्य या न्यूनतम टैरिफ पर पहुंच मिलेगी।

EU से आयात होने वाले 97% उत्पादों पर टैरिफ में कमी या समाप्ति, जिससे EU को हर साल 4 अरब यूरो की बचत होगी।

टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरोस्पेस, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।

संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री और कुछ फल-सब्जियों को सुरक्षित रखा गया है।

सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और भौगोलिक संकेतकों (GI) पर मजबूत प्रावधान किए गए हैं।

सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा भारतीय प्रतिभा की मोबिलिटी पर अलग समझौतों का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘भारत के इतिहास का सबसे बड़ा FTA’ बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट है, जो वैश्विक अस्थिरता के समय दुनिया को स्थिरता प्रदान करेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सभी सौदों की जननी’ कहा और जोर दिया कि यह 2 अरब लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।

शेयर बाजार पर प्रभाव

इस समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। कई सेक्टर्स के शेयरों में तेजी देखी गई:

टेक्सटाइल कंपनियों (जैसे अरविंद, वेलस्पन, ट्रेंट) में 10-20% तक की वृद्धि।

फार्मा (सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला) और केमिकल्स (उल्ट्राटेक, टाटा केमिकल्स) में मजबूत खरीदारी।

ऑटो (टाटा मोटर्स, महिंद्रा) और आईटी-सर्विसेज में भी सकारात्मक रुख।

निर्यात-उन्मुख कंपनियों जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी (टाइटन) और लेदर (बाटा, मिरजा) के शेयरों में रिकॉर्ड वृद्धि।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजन (विशेषकर टेक्सटाइल में 60-70 लाख नौकरियां) करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच यह भारत-EU के लिए एक रणनीतिक कदम है।

सोने की कीमतें $5200 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ी मांग…

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आज बुधवार को सोने की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वैश्विक बाजार में सोने का भाव  $5,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

यह वृद्धि मुख्यतः बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, व्यापार युद्ध की चिंताओं, अमेरिकी नीतियों में अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण हुई है।

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स और अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, सोने का स्पॉट प्राइस आज $5,232.87 प्रति औंस तक पहुंच गया, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग 1% की वृद्धि दर्शाता है। इस वर्ष अब तक सोने की कीमत में लगभग 20% की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वर्ष की तुलना में यह 89% से अधिक बढ़ा है।

फरवरी 2026 के लिए गोल्ड फ्यूचर्स भी $5,200 के स्तर को पार कर चुके हैं।

सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण

जियोपॉलिटिकल और व्यापार तनाव: अमेरिका द्वारा कुछ देशों पर नए टैरिफ लगाने की खबरों और वैश्विक संघर्षों ने निवेशकों को डॉलर और बॉंड्स से दूर कर सोने की ओर आकर्षित किया है।

नीतिगत अनिश्चितता: अमेरिकी सरकार के शटडाउन की आशंका, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वित्तीय चिंताओं ने सुरक्षित संपत्तियों की मांग को बढ़ावा दिया है।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे डिमांड मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही ETF में निवेश और प्राइवेट सेक्टर की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है।

डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर में गिरावट ने सोने को और अधिक आकर्षक बना दिया है।

भारत में सोने की कीमतें

भारत में भी सोने के दाम वैश्विक तेजी के साथ ऊंचे स्तर पर हैं। हालांकि, घरेलू बाजार में आज मामूली गिरावट देखी गई है, जहां दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,62,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। मुंबई में यह 1,61,940 रुपये पर है। चांदी की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो 1 किलो पर 3.70 लाख रुपये के पार पहुंच गई हैं।

विशेषज्ञों की भविष्यवाणी

एक्सपर्ट्स की राय: प्रमुख बैंकों जैसे ड्यूश बैंक, गोल्डमैन सैक्स और सोसाइटी जनरल ने 2026 के अंत तक सोने की कीमत $6,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली जारी रहेगी, क्योंकि निवेशक मुद्रा अवमूल्यन और मैक्रो रिस्क्स से बचाव के लिए सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मायावती ने नए UGC नियमों का समर्थन किया, सवर्णों के विरोध को बताया…

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मायावती का बयान

बसपा की प्रमुख मायावती ने नए UGC नियमों के संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इनका समर्थन किया है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले नियमों का स्वागत किया, लेकिन यह भी कहा कि इनका कार्यान्वयन करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना आवश्यक था।

मुख्य प्रतिक्रिया

मायावती ने बताया कि इन नियमों का विरोध मुख्यतः

सामान्य वर्ग (सवर्ण) के कुछ व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है, जिनकी जातिवादी सोच है। उन्होंने इसे ‘नाजायज’ और ‘जातिवादी’ करार दिया, क्योंकि ये लोग नियमों को एक साजिश या भेदभाव के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि ये नियम सरकारी और निजी कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, सामाजिक तनाव से बचने के लिए नियमों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।

मायावती ने दलितों और OBC वर्गों से अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों से प्रभावित न हों, जो गंदी राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।

UGC के नए नियम

UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” अधिसूचित किए, जो 2012 के पुराने नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं। इसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (सरकारी और निजी) में इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य है।

कमेटी में OBC, SC, ST, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।

उद्देश्य: कैंपस में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना और शिकायतों का त्वरित निपटारा (24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करना)।

हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC), 24/7 हेल्पलाइन, Equity Squads आदि का गठन आवश्यक है।

नियमों का पालन न करने पर UGC द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी, जैसे डिग्री रोकना या फंडिंग बंद करना।

विरोध का कारण

छात्रों और कुछ संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। आलोचकों का कहना है कि कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है, भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट है, और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान कमजोर है, जिससे दुरुपयोग की संभावना है। कई स्थानों पर #UGCRollback ट्रेंड हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि ये नियम किसी के खिलाफ नहीं हैं और भेदभाव के नाम पर गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।

भारत ऊर्जा सप्ताह 2026: ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा…

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत ऊर्जा सप्ताह (IEW) 2026 के उद्घाटन पर कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता एक बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है और यह राष्ट्रीय स्थिरता का मुद्दा है।

उन्होंने बताया कि भारत ने हाल की वैश्विक उथल-पुथल के दौरान स्रोतों का विविधीकरण, आपूर्तिकर्ताओं के भूगोल का विस्तार और ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में सुधार करके कोई कमी नहीं आने दी।

एक उच्च-स्तरीय मंत्री पैनल ने ‘अनिश्चितता के बीच मार्ग प्रशस्त करना: एक उथल-पुथल भरे विश्व में सस्ती, सुलभ और स्थायी ऊर्जा की सुरक्षा’ विषय पर चर्चा की। इस पैनल में वरिष्ठ नीति निर्माताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव को कैसे संभाला जाए, इस पर विचार-विमर्श किया।

पुरी के साथ इस पैनल में कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा फोरम के महासचिव जसीम अल शिरावी शामिल थे। चर्चा में यह बात सामने आई कि विश्वभर में ऊर्जा प्रणालियाँ भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक गतिशीलता में बदलाव और संक्रमण की तेज गति के कारण दबाव में हैं। वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बढ़ती मांग ने ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती कीमत और स्थिरता को प्राथमिकता दी है, और कोई एकल समाधान सभी देशों के लिए उपयुक्त नहीं है।

पुरी ने भारत की महत्वाकांक्षा को उजागर करते हुए प्राकृतिक गैस के हिस्से को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और वैश्विक सहयोग, निवेश और यथार्थवादी संक्रमण मार्गों की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि विश्व की ऊर्जा संक्रमण को अचानक प्रतिस्थापन के बजाय जोड़ने के माध्यम से प्रबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि पूर्वानुमानित बाजारों का हित दोनों उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए साझा है।

कनाडा के टिम हॉजसन ने बताया कि एक विखंडित व्यापारिक वातावरण ने विश्वसनीय साझेदारियों और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा, जो तेल, गैस और महत्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख उत्पादक है, भारत के साथ LNG, महत्वपूर्ण खनिजों, तेल आपूर्ति और दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य शक्तियों को मुक्त व्यापार और विश्वसनीय ऊर्जा संबंधों को बनाए रखने के लिए एक साथ काम करना चाहिए।