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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पर्यटन को प्रमोट करने विशेष पहल…

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राज्य के 45 युवाओं को मिला पर्यटन प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण

बस्तर के युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर 

टूरिस्ट गाइड का गहन प्रशिक्षण लेकर लौटे छत्तीसगढ़ के युवा  

मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री ने दी बधाई और शुभकामनाएँ

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देनेे के लगातार प्रयास किए जा रहे है। छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुन्दरता और यहां के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए देश-दुनिया के लोग छत्तीसगढ़ आये, इसे लेकर देश के विभिन्न हिस्सों विशेषकर महानगरों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी एवं कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर लाना है।

मुख्यमंत्री श्री साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और इसके लिए नई औद्योगिक पॉलिसी में कई रियायतों का प्रावधान भी किया गया है। होम-स्टे पॉलिसी बनायी गई है ताकि छत्तीसगढ़ बस्तर और सरगुजा अंचल में पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए राज्य के युवाओं विशेषकर बस्तर अंचल के युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण की अभिनव पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप 45 युवाओं की टीम को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के सहयोग से भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान (आईआईटीटीएम) ग्वालियर में टूरिस्ट गाइड के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। युवाओं का यह दल वहां से एक माह का विशेष प्रशिक्षण हासिल कर छत्तीसगढ़ लौटा आया है। इन युवाओं को छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों में गाइड के तौर पर तैनात किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने टूरिस्ट गाइड का सफल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की प्राकृतिक सुन्दरता, यहां की हरी-भरी वादियां और मनोरम पर्यटन स्थल छत्तीसगढ़ को पर्यटन हब का स्वरूप देने में सक्षम हैं। पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में असीम संभावनाएं विद्यमान है, इससे रोजगार और व्यवसाय के नये द्वार खुलेंगे। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं से अपील की कि वे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और सुविधाओं के बारे में पर्यटकों को विशेष रूप से बताएं, ताकि पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो। इससे राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।

यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा 7 वर्षों के अंतराल के बाद टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण का यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अधिकांश युवा बस्तर संभाग के रहने वाले हैं। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को पर्यटक मार्गदर्शन, संप्रेषण कौशल, सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन प्रबंधन तथा फील्ड का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें। प्रशिक्षित युवा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का बेहतर प्रचार-प्रसार कर प्रदेश के पर्यटन उद्योग को ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम रोल अदा करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी की हर गारंटी को पूरा कर रही है छत्तीसगढ़ सरकार—मुख्यमंत्री श्री साय…

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पीएम आवास के 1073 हितग्राहियों को नये आवास की चाबी सौंपी

सुहेला में 195 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

सुहेला में खुलेगा शासकीय महाविद्यालय

बलौदाबाजार में कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल भवन, तिल्दा में नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम सुहेला में आयोजित कार्यक्रम में 195.26 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के 1073 हितग्राहियों को आवास की चाबी, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत तीन हजार महिलाओं को गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना अंतर्गत पाँच हजार किसानों को अधिकार अभिलेख तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री और राशि के चेक प्रदान किए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का ध्येय है कि हर घर में पक्का मकान, शौचालय, शुद्ध पेयजल और प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ पहुंचे। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए हमारी सरकार जनता के हित में वचनबद्ध होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य बने 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और हम रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। सरकार बनने से पहले प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी में जो वादे किए गए थे, उन्हें हम एक-एक कर पूरा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी हो रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये कर दी गई है। किसानों को दो वर्ष का बकाया बोनस भी प्रदान किया जा चुका है। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ बड़ी संख्या में महिलाओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत हर घर को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना में बड़ी मात्रा में सब्सिडी भी मिल रही है, इसलिए अधिक से अधिक लोग अपने घरों में सोलर पैनल स्थापित कर लाभ उठाएँ।

उन्होंने जिले में प्रशासन की ‘हम होंगे कामयाब’ पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार प्रशिक्षित कर उनके बेहतर भविष्य के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, उनसे अब तक 500 से अधिक युवाओं को लाभ मिला है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊँचाइयाँ छू रहा है और बड़े-बड़े कार्य सहजता से पूरे हो रहे हैं। राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने बताया कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अकेले 100 करोड़ रुपये से अधिक की सड़कों की  स्वीकृति मिली है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के दौरान सुहेला में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, तिल्दा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन, बलौदाबाजार में शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल भवन एवं नवीन व्यावसायिक परिसर का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने जिले के 50 धान उपार्जन केंद्रों में किसानों के लिए 10-10 लाख रुपये की लागत से शेड निर्माण तथा सुहेला तिगड्डे में तीनों सड़कों पर एक-एक किलोमीटर तक डिवाइडर निर्माण एवं लाइट लगाने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिन विकास कार्यों का लोकार्पण किया, उनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत 12.87 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 1073 आवास, तथा लगभग 7.74 करोड़ रुपये की लागत से आमाकोनी, हथबंद, पौसरी, सेम्हराडीह और खपराडीह में निर्मित जल प्रदाय योजनाएँ शामिल हैं।

भूमिपूजन के प्रमुख कार्यों में 49.17 करोड़ रुपये की लागत से बलौदाबाजार–रिसदा–हथबंद मार्ग मजबूतीकरण, 20.98 करोड़ रुपये की लागत से बलौदाबाजार के रिसदा बायपास मार्ग, 15.59 करोड़ रुपये की लागत से बलौदाबाजार में इंडोर स्टेडियम कॉम्प्लेक्स, 8.60 करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत 717 आवास तथा 8.04 करोड़ रुपये की लागत से कोल्हान नाले के पार सुंगेरा एनिकट निर्माण शामिल हैं।

कार्यक्रम में 5 करोड़ रुपये से अधिक की हितग्राहीमूलक सामग्री एवं चेक वितरण किया गया। इसमें मुख्य रूप से सायबर फ्रॉड प्रकरण के 27 लाख रुपये की वापसी, श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं में 83 लाख रुपये का वितरण, 8333 छात्रों को 4.25 करोड़ रुपये की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, महिला स्व सहायता समूहों एवं ‘सक्षम’ योजना अंतर्गत 16 महिलाओं को 25 लाख रुपये, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 10 हितग्राहियों को 9.69 लाख रुपये तथा ‘हम होंगे कामयाब’ योजना अंतर्गत 60 हितग्राहियों को 6.81 लाख रुपये का भुगतान शामिल है।

इस अवसर पर बलौदाबाजार-भाटापारा जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा, जनपद अध्यक्ष सिमगा दौलत पाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

“SIR के काम से सरकारी कर्मचारी नहीं कर सकते मना, जहां जरूरत हो वहां ज्यादा कर्मचारी उपलब्ध करवाए राज्य सरकार : सुप्रीम कोर्ट”

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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची सुधार यानी SIR के काम में लगे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने राज्य सरकारों से इस काम में लगे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विचार करने को कहा है.

 कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर किसी कर्मचारी को व्यक्तिगत कारणों से BLO की ड्यूटी करने में समस्या हो, तो मामले के तथ्यों को देखा जाए. इसके आधार पर सक्षम अधिकारी उसे इस काम से हटाने पर निर्णय लें

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कोर्ट ने यह आदेश तमिलनाडु की पार्टी टीवीके के आवेदन को सुनते हुए दिया है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि SIR चुनाव से जुड़ा आवश्यक काम है. सरकारी कर्मचारियों को इसे करना ही होगा. काम में कोताही बरतने वाले BLO पर FIR दर्ज होने पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा पहले भी होता रहा है. इस तरह की प्रक्रिया को एक समय सीमा में पूरा करना जरूरी है.

टीवीके ने तमिलनाडु में SIR से जुड़े काम के दबाव में कुछ BLO के आत्महत्या कर लेने का मामला उठाया था. इस पर जजों ने कहा कि अगर राज्य सरकार कर्मचारियों की संख्या बढ़ा दे, तो काम का दबाव घट सकता है. कोर्ट ने कहा, ‘तमिलनाडु सरकार ने लगभग 1 लाख 30 हजार कर्मचारी SIR के लिए दिए हैं. 30-40 हजार कर्मचारी और उपलब्ध करवाने में क्या समस्या है?’

कोर्ट ने साफ किया कि उसका आदेश उन सभी राज्यों के लिए है, जहां इस समय SIR चल रहा है. गुरुवार, 4 दिसंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिए हैं :-

जहां आवश्यक है राज्य सरकार ज्यादा संख्या में कर्मचारियों को SIR के लिए चुनाव आयोग को दे. इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव घटेगा.

जिन लोगों को व्यक्तिगत कारण से SIR का काम करने में समस्या आ रही है, उनके आवेदन पर सक्षम अधिकारी विचार करें. हर मामले के तथ्यों के हिसाब से हो निर्णय.

अगर किसी कर्मचारी को कोई विशिष्ट राहत चाहिए तो वह कोर्ट आ सकता है.

कोर्ट ने तीसरा निर्देश तब दिया जब टीवीके के लिए पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने SIR ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले BLO के परिजनों को मुआवजा समेत दूसरी मांगों का उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित पक्ष आवेदन दाखिल कर सकते हैं.

शंकरनारायणन ने यह दलील भी दी कि ज्यादातर BLO आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक हैं. वह इतने कम समय में SIR जैसे महत्वपूर्ण काम को कर पाने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं. BLO सुबह 5 बजे से लेकर देर रात तक काम कर रहे हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव आयोग खुद अपने सभी कार्य नहीं कर सकता. उसे राज्य के कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है. राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह अधिक कर्मचारी उपलब्ध करवाएं. अगर किसी कर्मचारी को कठिनाई है, तो राज्य सरकार उसे छूट देकर दूसरा कर्मचारी नियुक्त करे.

“गठबंधन टूटने, जन आंदोलन और वैश्विक तनाव की संभावना! 2026 में भारत की राजनीति में क्या होगा?”

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नया साल राजनीतिक दृष्टिकोण से उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित बदलावों से भरा साल साबित हो सकता है. ग्रहों की बदलती स्थिति और ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, भारत और दुनिया दोनों ही स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाएं उभरकर सामने आ सकती हैं.

आइए जानते हैं साल 2026 में भारत और वैश्विक स्तर की राजनीति में क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

नए साल में भारत की राजनीति में क्या खास?

नया साल भारतीय राजनीति के स्तर पर स्थिरता और अनिश्चित परिणामों का साल साबित हो सकता है. वर्ष की शुरुआत प्रशासनिक और सरकारी नीतियों के लिहाज से सुचारू रूप से चल सकती हैं, वहीं वर्ष के मध्य यानी मई से जुलाई के बीच अप्रत्याशित घटनाओं के कारण पक्ष-विपक्ष पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला देखने को मिल सकता है.

भारत के कई राज्यों में स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों का असर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर देखने को मिल सकता है. विपक्षी पार्टियों में गठबंधन के टूटने की खबर सामने आ सकती है.

सरकार की नीतियों को लेकर विरोध-प्रदर्शन की संभावना

सामाजिक और आर्थिक स्तर पर लोगों का आक्रोश देखने को मिल सकता है. सरकार की कुछ नीतियों को लेकर आम जनता विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर सकती है. आर्थिक हितों को लेकर संभावना है कि, आम जनता को विपक्षी पार्टियों को समर्थन मिल सकता है.

आधा वर्ष बीतने के साथ ही प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आने के साथ नई योजनाओं और प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो सकता है.

वैश्विक स्तर पर साल 2026 राजनीतिक तनाव के साथ सामरिक (Strategic) में कई तरह के बदलाव होंगे. वैश्विक स्तर पर महाशक्तियां के बीच टकराव और सहयोग दोनों को लेकर खींचातानी देखने को मिल सकती है.

वैश्विक स्तर की राजनीति पर क्या प्रभाव

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ने की संभावना है. इस संघर्ष के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

यूरोप जैसे देश ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति का सामना कर सकता है. सरकारें आर्थिक नितियों के साथ आंतिरक सुधारों को लेकर नए तरीके अपना सकती हैं.

मध्य पूर्व और एशिया के देशों में सीमावर्ती विवाद और स्ट्रेटजिक में गतिशीलता बनी रहेगी. सुरक्षा के लिहाज और राजनीतिक गठबंधन के क्षेत्र में सरकारें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका बाकी देशों के लिहाज से मजबूत होगी. दक्षिण एशिया और अफ्रीका जैसे देशों के साथ सहयोग और व्यापार में करीबी आने के साथ वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति बेहतर होगी.

कुल मिलाकर भारत और दुनिया दोनों के लिए साल 2026 चुनौतियों और अवसरों से भरा रहने वाला है. भारत में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के साथ प्रशासनिक निर्णय में पारदर्शिता और सामाजिक आंदोलनों में अप्रत्याशित बदलाव के संकेतों से भरा रहने वाला है. जबकि वैश्विक स्तर पर शक्तियों में टकराव और भू-रणनीतिक बदलावों से भरा साबित हो सकता है.

“आंध्र प्रदेश की सरकार ने अडानी को सौंप दी 480 एकड़ की जमीन, डेटा सेंटर बनाने का है प्लान”

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आंध्र प्रदेश ने विशाखापत्तनम और अनकापल्ली जिलों में 480 एकड़ की जमीन अडानी इंफ्रा (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड (Adani Infra (India) Private Limited) को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है.

अडानी इंफ्रा गूगल की कंपनी रेडेन इंफोटेक इंडिया का पार्टनर है. दोनों मिलकर यहां एक बड़ा डेटा सेंटर बनाने का प्रोजेक्ट चला रही है.

राज्य सरकार के मंत्रियों ने रेडेन इंफोटेक इंडिया के इस पर प्रस्ताव के बाद मंजूरी दी है, जिसका ऑफिशियल ऑर्डर 2 दिसंबर को जारी किया गया. जमीन के मिलने से आने वाले समय में यहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और टेक्नोलॉजी इंवेस्टमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा.

डेटा सेंटर बनाने में 87500 करोड़ खर्च

2 दिसंबर को जारी ऑर्डर में कहा गया, प्रस्ताव की ध्यान से जांच करने के बाद सरकार और मंत्रियों की काउंसिल ने 28/11/2025 की मीटिंग में इसे मंजूरी दी. इसके मुताबिक, विशाखापत्तनम और अनकापल्ली जिलों में 480 एकड़ की जमीन मेसर्स अडानी इंफ्रा इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी जाती है.

रेडेन इंफोटेक इंडिया पहले चरण में पूरे आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटर के डेवलपमेंट मेंब 87,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का इंवेस्टमेंट कर रही है. बदले में कंपनी को डिजिटल प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशों के तहत समय के साथ राज्य से 22,000 करोड़ रुपये के इंसेंटिव मिलेंगे.

रेडेन ने क्या थी डिमांड?

सरकारी आदेश के मुताबिक, रेडेन ने रिक्वेस्ट की है कि अडानी इंफ्रा समेत उसके नोटिफाइड पार्टनर्स को डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की सरकार द्वारा पहले वादा किए गए इंसेंटिव्स का फायदा उठाने के लिए ऑथराइज किया जाए. गूगल की कंपनी रेडेन इंफोटेक इस प्रोजेक्ट के मेन हिस्से के तौर पर 1 GW का AI डेटा सेंटर बनाएगी. कंपनी ने कई ‘नोटिफाइड पार्टनर्स’ की पहचान की है, जिनमें अडानी इंफ्रा, अडानीकॉनेक्स इंडिया, अडानी पावर इंडिया, भारती एयरटेल, नेक्सट्रा डेटा और नेक्सट्रा विजाग (भारती एयरटेल की सब्सिडियरी) शामिल हैं.

रेडेन ने खास तौर पर रिक्वेस्ट की है कि आंध्र प्रदेश इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (APIIC) द्वारा पहचाने गए सभी तीन जमीन के टुकड़े, सर्वे पूरा करने और कब्जा देने के बाद प्राइमरी नोटिफाइड पार्टनर के तौर पर अडानी इंफ्रा को अलॉट किए जाएं.

“पुतिन के दिल्ली पहुंचने से पहले आई बड़ी खबर, भारत-रूस के बीच 2 अरब डॉलर की डील पर मुहर; हिल जाएंगे PAK-चीन!”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत पहुंचने से पहले दोनों देशों के बीच बड़ी डिफेंस डील की खबर सामने आई है. भारत और रूस के बीच 2 बिलियन डॉलर (करीब 16,700 करोड़ रुपये) की न्यूक्लियर सबमरीन डील हुई है.

करीब 10 साल से इस डील को अंतिम रूप देने पर बात चल रही थी. दोनों देश इस सौदे पर सहमत हो गए हैं और भारतीय अधिकारी अगले साल नवंबर में एक रूसी शिपयार्ड का दौरा करेंगे.

भारत को 2027 तक मिल सकती है न्यूक्लियर सबमरीन

यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारत को अगले दो साल के भीतर इस पनडुब्बी की डिलीवरी मिल जाएगी. नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने बताया कि भारत चाहता है कि उसे यह न्यूक्लियर सबमरीन साल 2027 तक मिल जाए. ये दूसरी परमाणु पनडुब्बी है जो भारत को रूस से मिलने जा रही है. इससे पहले 2012 में रूस से आईएनएस चक्र सबमरीन 10 वर्षों के लिए लीज पर ली थी.

क्यों उड़ी पाकिस्तान और चीन की नींद?

परमाणु ऊर्जा से चलने वाली सबमरीन डीजल- इलेक्ट्रिक सबमरीन से कहीं बेहतर होती है. ये आमतौर पर बड़ी होती है, ज्यादा देर तक पानी के नीचे रह सकती है और अधिक शांत होती है, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है. खासकर हिंद और प्रशांत महासागर के विशाल क्षेत्रों में गश्त करते समय इसका पता लगाना मुश्किल होगा, जिससे चीन की नींद उड़ी हुई है.एनटीआई के अनुसार, भारत वर्तमान में 17 डीजल-चालित पनडुब्बियों का संचालन करता है.

अटैक सबमरीन का निर्माण कर रहा भारत

भारत परमाणु ऊर्जा चालित अटैक सबमरीन के निर्माण की भी तैयारी कर रहा है, जिन्हें दुश्मन की पनडुब्बियों और सतह पर मौजूद जहाजों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. अब तक केवल कुछ ही देशों अमेरिका, ब्रिटेन , फ्रांस , चीन और रूस के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाले सबमरीन को तैनात करने और संचालित करने की तकनीक थी. दक्षिण कोरिया परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां बनाने के लिए भी अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है.

नौसेना प्रमुख के अनुसार, भारत की तीसरी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी अगले साल परमाणु शक्ति से लैस सेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दो परमाणु ऊर्जा चालित हमलावर पनडुब्बियां भी बना रहा है.

“‘विदेशी नेता पर निर्भर करता है…’, राहुल गांधी के पुतिन से नहीं मिलने देने वाले आरोपों पर क्या बोली सरकार?”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत पहुंचने से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती की विपक्ष के लोग फॉरेन डेलिगेशन से मिले.

उनके आरोप पर सरकार सूत्र ने बताया कि भारत आने वाले विदेशी नेताओं पर यह निर्भर करता है कि वो किससे मिलना चाहते हैं? उनके प्लान के मुताबित विदेश मंत्रालय मीटिंग की व्यवस्था करता है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से कहा गया, “किसी विजिट के दौरान, MEA आने वाले डिग्निटरी के लिए सरकारी अधिकारियों और सरकारी बॉडीज के साथ मीटिंग ऑर्गनाइज़ करता है. यह विजिटिंग डेलीगेशन पर निर्भर करता है कि वह सरकार के बाहर मीटिंग ऑर्गनाइज करे .”

9 जून, 2024 से जब राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने, तब से ये नेता उनसे मिल चुके हैं:

  1. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना- 10 जून, 2024
  2. वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिंग- 1 अगस्त, 2024
  3. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम- 21 अगस्त, 2024
  4. मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम- 16 सितंबर, 2025
  5. न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन- 8 मार्च, 2025

“‘विदेशी मेहमानों से मुझे नहीं मिलने दिया जाता’, राहुल गांधी का आरोप, पुतिन की यात्रा पर सियासत तेज”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर 2025 को 2 दिन के दौरे पर भारत आने वाले हैं. इसको लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है. हालांकि, इस बीच विपक्षी पार्टी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ये परंपरा रही है कि विदेश से जो भी मेहमान आते है LoP से मिलवाया जाता है, लेकिन ये सरकार न मुझसे किसी को मिलने नही देती. मैं जब भी विदेश जाता हूं वहां भी मुझसे मिलने के लिए मना किया जाता है.

राहुल गांधी के बयान के बाद पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्ष श्रृंगला ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति का बहुत महत्वपूर्ण विजिट है. ये द्विपक्षीय व्यापार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण दौरा है. उन्होंने राहुल गांधी के मिलने वाले बयान पर आगे कहा कि ये डिग्निट्री का समय हो या उनका इंटीमेशन या अवेलेबिलिटी का हो. ये उसके आधार पर होता है. राहुल गांधी सदन में आते कहां है. राहुल गांधी के बात का सही जवाब विदेश मंत्रालय दे सकता है. इस बीच हर्ष श्रृंगला के बयान पर RJD नेता और लोकसभा सांसद मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी और कहा,” राहुल गांधी जो कह रहे है सही कह रहे है. विदेशी मेहमान से एलओपी मिलते थे . ये परंपरा क्यों खत्म किया जा रहा है.”

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा से पहले गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है. पुलिस ने कहा कि सुरक्षा मानकों के कारण उनके ठहरने के स्थान के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पुतिन के आगमन से लेकर प्रस्थान तक हर गतिविधि पर संयुक्त रूप से काम कर रहीं कई सुरक्षा इकाइयां नजर बनाए रखेंगी.

“Donald Trump: ‘यूक्रेन के साथ जंग का अंत चाहते हैं पुतिन’, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ट्रंप का बड़ा बयान”

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यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर US डेलीगेशन की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि व्लादिमीर पुतिन युक्रेन के साथ जारी जंग को खत्म करना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात अच्छी रही है। बातचीत के दौरान यह इंप्रेशन मिला कि पुतिन युद्ध खत्म करना चाहते हैं।

बुधवार को US के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद ने मॉस्को में रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के साथ पांच घंटे लंबी बातचीत की। बातचीत फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन विवाद को खत्म करने पर केंद्रित थी। ट्रंप ने से कहा, पुतिन की कल जेरेड कुशनर और स्टीव व्हिटकॉफ के साथ बहुत अच्छी मीटिंग हुई। उस मीटिंग से क्या निकला, मैं आपको नहीं बता सकता, मगर इतना जरूर बताना चाहूंगा कि पुतिन युद्ध खत्म करना चाहेंगे, ऐसा उनका इंप्रेशन था।

US डेलीगेशन की रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात

हालांकि, क्रेमलिन के सीनियर एडवाइजर यूरी उशाकोव ने बुधवार को कहा कि यह मीटिंग वाशिंगटन और मॉस्को के बीच विवाद शुरू होने के बाद से सबसे बड़ी बातचीत में से एक थी, लेकिन इलाके के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हुआ। दोनों डेलीगेशन ने समझौते के संभावित रास्तों पर विचार किया, लेकिन मुख्य विवाद अभी भी अनसुलझे हैं।

यूक्रेन संकट को हल करने के करीब-उशाकोव

उशाकोव ने कहा, हम यूक्रेन संकट को हल करने के करीब हैं मगर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी पक्ष ने कुछ नए प्रस्ताव रखे, जिन पर चर्चा हुई, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बैठक में रूस की तरफ से आरडीआईएफ (रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड) के प्रमुख किरील दिमित्रिएव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर बातचीत

उशाकोव ने आगे कहा कि इन्वेस्टमेंट दूत किरिल दिमित्रीव समेत रूस के सीनियर अधिकारी बातचीत के लिए मौजूद थे, जिसमें जंग खत्म करने के कई ऑप्शन पर बात हुई। उन्होंने कहा, बातचीत कॉन्फिडेंशियल थी। हम बातचीत की मुख्य बातें न बताने पर सहमत हुए।” उनके मुताबिक, अभी तक कोई खास तरक्की नहीं हुई है, लेकिन डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है। US डेलीगेशन से मिलने से पहले, पुतिन ने शांति प्रक्रिया में यूरोपियन इन्वॉल्वमेंट की आलोचना की और EU सरकारों पर ऐसे प्रपोजल देने का आरोप लगाया जिनका मकसद सिर्फ एक ही था, पूरी शांति प्रक्रिया को पूरी तरह से रोकना।

“Vladimir Putin India Visit: ब्रह्मोस मिसाइल अपग्रेड से ऑयल डील तक… राष्ट्रपति पुतिन के दो दिवसीय दौरे से भारत को क्या-क्या मिलेगा?”

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2 दिवसीय दौरे के लिए भारत पहुंच रहे हैं। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के मौके पर वो नई दिल्ली आ रहे हैं।

अपनी यात्रा के दौरान पुतिन 23वें द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वो पीएम मोदी के साथ वन-टू-वन मीटिंग करेंगे और राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। उनके दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई बड़ी डील हो सकती हैं।</p><p>पुतिन के साथ उनके 7 मंत्री भी दिल्ली आ रहे हैं। रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉफ, वित्त मंत्री एंतोन सिलुआनोव, कृषि मंत्री ऑक्साना, आर्थिक विकास मंत्री मक्सिम रेशेत्निकोव, स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को, आंतरिक मामलों के मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव, परिवहन मंत्री विताली सावेलेव शामिल हैं।

कई मायनों में अहम है पुतिन का भारत दौरा

पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन जब भी कही मिलते हैं, तो दोनों के बीच अलग ही केमिस्ट्री देखने मिलती है जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बन जाती हैं। दोनों एक-दूसरे को अपना अच्छा दोस्त बताते हैं। अब पुतिन 4 साल के बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये उनका पहला इंडिया का टूर है। ऐसे में उनकी ये यात्रा कई मायनों में काफी अहम मानी जा रही है। इसके साथ ही भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती में एक नया आयाम जुड़ने जा रहा है। पुतिन के दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई अहम समझौते भी होने वाले हैं।

व्यापार को लेकर दोनों देशों में हो सकती है डील

पुतिन के दौरे के दौरान रूस और भारत 2030 तक अर्थव्यवस्था में रणनीतिक सहयोग क्षेत्रों के विकास के लिए एक कार्यक्रम पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं। क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा कि रूसी डिप्लोमेट उशाकोव ने कहा कि PM मोदी और पुतिन के बीच बढ़ते ट्रेड और इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर बातचीत। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12% बढ़कर 63.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। भारत-रूस में ऊर्जा से लेकर रक्षा, स्पेस, हेल्थकेयर, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारी योजनाएं होंगी। 2030 तक दोनों के बीच के व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है।

रक्षा क्षेत्र में भी कई समझौतों की संभावना

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बड़ी डिफेंस डील को लेकर भी अटकलें हैं। इस दौरान S-400 और उसके उन्नत रूप S-500 समेत SU-57 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत हो सकती है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने हालिया बयान में कहा था कि S-400 और SU-57 एजेंडे में है। मैं बस यही कहूंगा कि हमारा सैन्य उद्योग बहुत अच्छा काम कर रहा है। हम उत्पादन बढ़ाने में कामयाब रहे हैं।

भारत और रूस के बीच ब्रह्मोस के नए वर्जन पर समझौता हो सकता है। दोनों देश ब्रह्मोस के हल्के और ज्यादा रेंज वाले नए वर्जन बनाने पर बात करेंगे, जो पहले से भी ज्यादा खतरनाक होगा।

तेल खरीद को लेकर हो सकती है चर्चा

पुतिन और पीएम मोदी की द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी अहम रह सकता है। रूस से तेल खरीदने की जवह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की है। बावजूद इसके भारत ने इस खरीद को जारी रखा। पुतिन का यही प्रयास रहेगा कि भारत इसे आगे भी जारी रखे।

भारत और रूस का RELOS समझौता

रूसी संसद ने इंडिया रूस रेसीप्रोसल एक्‍सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS) समझौते को मंजूरी दी है। इसके तहत दोनों देशों में सेनाओं को भेजने और एक-दूसरे के युद्धपोत को बंदरगाहों में प्रवेश करने की अनुमति के साथ ही हवाई स्‍पेस और एयरफील्‍ड के इस्‍तेमाल के नियम शामिल हैं।