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फायदे जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान ‘अनार के छिलके’ के

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अब अनार खाने के तो अनगिनत फायदे हैं, पर क्या आपको पता है कि सेहत के लिए जितना फायदेमंद अनार है, उतना ही उसके छिलके. अनार का छिलका इतना गुणकारी होता है कि अगली बार आप जब भी अनार खाएंगे, उसके छिलके कचरे के डब्बे में फेंकने से पहले 20 बार सोचेंगे.

  • जिन महिलाओं के साथ अनियमित पीरियड्स की शिकायत रहती है और इस दौरान पेट में असहनीय दर्द होता है, उनके लिए ये सबसे कारगर है. बस आप अनार के सूखे छिलकों को पीसकर एक चम्मच पानी के साथ लें. इससे रक्तस्त्राव कम होगा और पेट दर्द में राहत भी मिलेगी.
  • जिन्हें बवासीर की शिकायत है वे 4 भाग अनार कके छिलके और 8 भाग गुड़ को कूटकर छान लें और बारीक-बारीक गोलियां बनाकर कुछ दिन तक सेवन करें.
  • अनार का छिलका गले का टॉन्‍सिल, हृदय रोग, मुंहासे, झुर्रियों, मुंह की बदबू, बवासीर, खांसी और नकसीर जैसी बीमारियों से राहत दिलाने में लाभदायक है.
  • अनार के छिलके को सुखाकर इसका पाउडर बनाकर इसमें गुलाब जल एड कर के चेहरे पर लगाने से झुर्रियां दूर हो जाती हैं.
  • मुंह से बदबू आती है तो इसके छिलके के सूखे पाउडर को एक ग्लास पानी में मिलाकर पिएं.
  • अनार के छिलको को सनस्‍क्रीन के तौर पर भी लगाया जा सकता है. सूखे छिलके को किसी भी तेल के साथ मिक्‍स कर के चेहरे पर लगाने से यह सन टैनिंग से रोकता है.

नाम जान कर चौंक जाएंगे आप, जल्द इस मुस्लिम एक्टर से शादी कर सकती हैं सोनाक्षी सिन्हा

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सोनाक्षी सिन्हा बॉलीवुड इंडस्ट्री की एक लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत “दबंग” फिल्म से की थी। इस फिल्म में उनके किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा था। सोनाक्षी सिन्हा पिछले काफी समय से अपने अफेयर को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में आज हम आपको एक मुस्लिम एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे सोनाक्षी सिन्हा जल्दी शादी कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं वह एक्टर कौन है। 

उस एक्टर का नाम जहीर इकबाल है। जहीर इकबाल एक बॉलीवुड अभिनेता है, जो “नोटबुक” फिल्म में नजर आए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल एक दूसरे को काफी समय से डेट कर रहे हैं। सोनाक्षी सिन्हा फिलहाल अपनी आने वाली फिल्म “खानदानी शफाखाना” के प्रचार में जुटी हुई है। इसी दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि वह जल्द शादी कर सकती हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जहीर इकबाल और सोनाक्षी सिन्हा जल्दी शादी कर सकते हैं। इन दोनों को कई बार एक साथ समय बिताते हुए भी देखा गया है। सोशल मीडिया पर भी यह दोनों एक दूसरे को फॉलो करते हैं। 

बचेंगे आपके इतने पैसे, आज से सस्ते मिलेंगी ये 5 चीजें

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आज से अगस्त का महीना शुरू हो गया है ये महिना आम लोगों के लिए खुशियां लेकर आने वाला है. पहली अगस्त से कई चीजें बदलने वाली हैं. जहां पैसों के लेन-देन से जुड़ी सर्विस फ्री होने जा रही है. वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे कार और बाइक खरीदना सस्ता हो जाएगा. इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदना भी सस्ता हो जाएगा. यानी इस महीने लोगों को इन सर्विसेज का इस्तेमाल करने पर पैसे बचेंगे.

SBI ने मुफ्त की पैसों से जुड़ी ये सर्विस 
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आईएमपीएस चार्ज को खत्म करने का ऐलान किया है, जो 1 अगस्त, 2019 से लागू होगा. अब SBI की योनो ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से फंड ट्रांसफर करने वाले यूजर्स से अब किसी तरह का आईएमपीएस चार्ज नहीं वसूला जाएगा. इससे पहले एसबीआई ने 1 जुलाई से आरटीजीएस और एनईएफटी चार्ज खत्म कर दिया था. अब आईएमपीएस चार्ज खत्म होने के बाद एसबीआई के खाताधारकों को ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए कोई फीस नहीं चुकानी होगी.

अब आपको बिना सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर लेते समय 574.50 रुपये ही देने होंगे. इससे पहले 14.2 किलो वाले गैस सिलिंडर के लिए 637 रुपये देने होते थे. ये नई कीमतें बुधवार आधी रात के बाद से लागू हो गईं. गैर सब्सिडी वाले LPG गैस सिलेंडर की कीमत में बुधवार को 62.50 रुपये की कटौती की गई है. ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों की कमी के चलते किया गया है. इस मामले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने कहा है कि बिना सब्सिडी या बाजार की कीमत वाले LPG सिलेंडर की कीमत 574.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो चुकी है

दिल्ली में सस्ती हुई बिजली
दिल्ली में बिजली सस्ती होने जा रही है. बिजली की नई दर एक अगस्त से मान्य होगी. दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने बुधवार को नई दरों की घोषणा की. नई दरों के मुताबिक दो किलोवाट तक के लोड वाले मीटर के लिए फिक्स्ड चार्ज के रूप में सिर्फ 20 रुपए देने होंगे जबकि पहले यह चार्ज 125 रुपए थे. यानी कि 2 किलोवाट के लोड वाले मीटर के लिए फिक्स्ड चार्ज में 100 रुपए की राहत दी गई है. वहीं 2 किलोवाट से अधिक लेकिन 5 किलोवाट से कम क्षमता वाले मीटर के लिए फिक्स्ड चार्ज के रूप में अब 50 रुपए लिए जाएंगे. पहले इस नाम पर 140 रुपए देने पड़ते थे. 5 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले मीटर के फिक्स्ड चार्ज को 175 रुपए से घटाकर 100 रुपए कर दिया गया है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल हो जाएंगी सस्ती
एक अगस्त से इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदना सस्ता हो जाएगा. दरअसल, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल ने बैटरी से चलने वाली कार और स्कूटर पर लगने वाली जीएसटी की दर में कटौती की है. जीएसटी काउंसिल की बैठक में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर टैक्स की दरें 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी है. वहीं, चार्जर पर जीएसटी दरें 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी कर दी है. नई दरें 1 अगस्त से लागू होंगी. इस फैसले से कार खरीदना करीब 70 हजार रुपये तक सस्ता हो हो सकता है.

अगर आप 10 लाख रुपए तक की इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं तो 1 अगस्त के बाद 7 फीसदी की कमी होने पर आपको 70 हजार रुपए की बचत होगी. वहीं मान लीजिए आप 1 लाख रुपए की कीमत वाली इलेक्ट्रिक बाइक खरीदते हैं तो आपको 7 हजार रुपए कम खर्च करने होंगे.

नोएडा, ग्रेटर नोएडा में सस्ता हुआ प्रॉपर्टी खरीदना
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी खरीदना अब सस्ता हो गया है. नए फैसले के तहत ग्रुप हाउसिंग में 6 फीसदी और कामर्शियल में 25 फीसदी सरचार्ज समाप्त कर दिया गया है. वहीं, कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के सर्किल रेट में 21 फीसदी की कमी हुई है. नोएडा के शॉपिंग मॉल्स में एस्केलेटर्स और एसी की वजह से लगने वाला 6 फीसदी सरचार्ज हटाया गया है. नए रेट 1 अगस्त से लागू होंगे.

25 देशों का 1.2 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा भारत में चोरी-छिपे खपाया गया

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आपको जानकर यह हैरानी होगी कि भारत में 25 से ज्यादा देशों का करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा खपाया गया। इस प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल (दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाना) करने वाली कंपनियों ने आयात किया था। गैर सरकारी संगठन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच ने अपनी एक रिपोर्ट में यह चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरणविदों का कहना है कि कंपनियों के इस कदम से प्लास्टिक प्रदूषण घटाने की पहल को बड़ा झटका लग सकता है। संगठनों का कहना है कि यह दुर्भाग्य की बात है कि कंपनियां चोरी छिपे प्लास्टिक कचरे का आयात कर रही हैं। सरकार को ऐसे जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, 55 हजार मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का आयात तो सिर्फ पाकिस्तान और बांग्लादेश से ही किया गया था। मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका समेत 25 से ज्यादा देशों से ऐसे कचरे का आयात किया जा रहा है।

भारतीय प्रदूषण नियंत्रण संगठन के चेयरमैन आशीष जैन के मुताबिक, एक ओर तो सरकार प्लास्टिक पर पाबंदी लगा रही है, वहीं दूसरी ओर निजी कंपनियां चोरी-छिपे विदेशों से प्लास्टिक कचरे का आयात कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रिसाइक्लिंग कंपनियां इसलिए भी कचरे का ज्यादा आयात करती हैं, क्योंकि बाहरी देशों से इन्हें मुफ्त में यह कचरा मिलता है। सिर्फ इसकी ढुलाई का ही खर्च आता है।

कचरे में सबसे ज्यादा प्लास्टिक की बोतलें अप्रैल, 2018 से फरवरी, 2019 के बीच किए गए एक अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, प्लास्टिक कचरे में सबसे ज्यादा आयात की जाने वाली वस्तु है प्लास्टिक की बेकार बोतलें, जो बडे़-बडे़ ढेर में आती हैं। यह भी कहा गया है कि स्थानीय कचरा जुटाने के मुकाबले आयातित कचरा ज्यादा सस्ता पड़ता है। सैकड़ों टन ऐसा कचरा धरती और समुद्र में दफनाया जा रहा है।

प्लास्टिक कचरे में सबसे आगे यूपी 

रिपोर्ट के मुताबिक, प्लास्टिक कचरे के मामले में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है, जहां 28,846 मीट्रिक टन कचरा आयात किया गया। वहीं इस मामले में 19,517 मीट्रिक टन के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर है। 19,375 मीट्रिक टन कचरे के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। जबकि 18,330 मीट्रिक टन के साथ गुजरात चौथे और 10, 689 मीट्रिक टन कचरे के आयात के साथ तमिलनाडु पांचवें स्थान पर है।

आयात पर रोक लगे तो 99 फीसदी कचरे की रिसाइक्लिंग 99 फीसदी 

रिपोर्ट में कहा गया हे कि अगर विदेशों से प्लास्टिक कचरे के आयात पर रोक लगा दी जाए तो कंपनियां स्थानीय तौर पर प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग करने पर मजबूर होंगी। इससे बेकार हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने की दर 99 फीसदी बढ़ जाएगी और कूड़ा बीनने वाले 40 लाख लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।

पाकिस्तान की जीवन रेखा कपास पर संकट से बिखर रही

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जून माह के उत्तरार्ध में जब ईरान की तरफ से टिड्डियों का विशाल दल पाकिस्तान की ओर चला, तो पाकिस्तान के सिंध और पंजाब के लाखों किसानों के सिर पर भय और आशंका के बादल मंडराने लगे. पाकिस्तान की सरकार के लिए एक आसन्न संकट दस्तक देने लगा. इसका कारण था कि टिड्डियों के इस हमले ने पंजाब और सिंध में लगभग 2,00,000 एकड़ कपास की फसल पर संकट उत्पन्न कर दिया. पाकिस्तान में टिड्डियों के आखिरी बड़े हमले 1993 और 1997 में हुए थे. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जनवरी में सूडान और इरिट्रिया से लगे लाल सागर के तट से टिड्डियों का यह काफिला रवाना हुआ और पाकिस्तान के बलूचिस्तान में प्रवेश करने से पूर्व सऊदी अरब और ईरान को अपनी चपेट में लिया. बलूचिस्तान में टिड्डियों के इस प्रकोप से वहां अनार, तरबूज और कपास जैसी फसलों को नुकसान उठाना पड़ा है. पाकिस्तान के कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस हमले से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. हालांकि नुकसान की सही सीमा का खुलासा होना बाकी है. कपास पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है जो प्राथमिक और द्वितीयक दोनों ही क्षेत्रों में एक बड़ा भाग रखती है. साथ ही साथ, यह एक बहुत बड़े वर्ग की जीविका का आधार है. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान कपास की फसल को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता है. खासकर ऐसे समय में जब उसने अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बेलआउट पैकेज हासिल किया है.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कपास का महत्व
कपास जो पाकिस्तान की सबसे बड़ी नगदी फसल है, देश के आधे से अधिक जिलों में पैदा होती है. इसके उत्पादन क्षेत्र बलूचिस्तान के अंदरूनी इलाकों से लेकर मरदान घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों तक फैले हुए हैं. इसका सर्वप्रमुख उत्पादन क्षेत्र पाकिस्तान का पंजाब प्रांत है जहां इस देश के कुल कपास उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत पैदा किया जाता है. इसमें से लगभग 95 प्रतिशत का योगदान इस प्रान्त के सिर्फ 14 जिलों से आता है.

पंजाब के कपास बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में कपास, चावल और गन्ने की प्रतिस्पर्धा वाली फसलों को पीछे छोड़कर सबसे बड़ी खरीफ फसल बन गई है. पाकिस्तान में कपास उत्पादन का यह ‘हार्टलैंड’ भौगोलिक रूप से सिंधु बेसिन के मध्य में स्थित है, जो पंजाब की पश्चिमी सीमा के पास मियांवाली और भाक्कर से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व में साहीवाल और बहावलनगर तक और दक्षिण में राजनपुर तक फैला हुआ है.

पाकिस्तान दुनिया में कपास का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है और कच्चे कपास का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. यह विश्व में कपास का चौथा सबसे बड़ा उपभोक्ता और सूती धागे का सबसे बड़ा निर्यातक है. पाकिस्तान में लगभग 13 लाख किसान 30 लाख हेक्टेयर भूमि में कपास की खेती करते हैं, जो देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 15 प्रतिशत है. कपास और कपास के उत्पादों का पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत और देश की कुल विदेशी मुद्रा आय में 55 प्रतिशत योगदान है. पाकिस्तान में उत्पादित कपास और उसके उत्पादों की 30 से 40 प्रतिशत तक की घरेलू खपत होती है. शेष को कच्चे कपास, यार्न, कपड़े और तैयार कपड़ों के रूप में निर्यात कर दिया जाता है.कपास उत्पादन पाकिस्तान के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र का आधार है. पाकिस्तान में कपास के संसाधन से लेकर इसके विविध उत्पादों के निर्माण हेतु बड़ी संख्या में उद्योगों का नेटवर्क स्थापित किया गया है. आज पाकिस्तान में लगभग 400 कपड़ा मिलें, 70 लाख स्पिंडल, मिल क्षेत्र में 27,000 करघे (15,000 शटल रहित करघे सहित), गैर-मिल क्षेत्र में 2,50,000 करघे, 700 निटवेयर इकाइयां, 4,000 परिधान निर्माण इकाइयां, 650 रंगाई और परिष्करण इकाइयां (जिनकी परिष्करण क्षमता प्रति वर्ष 12 करोड़ वर्ग मीटर की है), लगभग 1,000 जिनिग इकाइयां, कपास के बीजों से तेल निकालने हेतु लगभग 300 इकाइयां और इसके साथ-साथ असंगठित क्षेत्र में 15,000 से 20,000 स्वदेशी, छोटे पैमाने पर तेल निकालने वाले संयत्र अस्तित्व में हैं. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र पाकिस्तान के किसी भी अन्य आर्थिक क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

पाकिस्तान का बहुत बड़ा कपास उत्पादक क्षेत्र बहुत कम वर्षा (155 से 755 मिमी) वाले क्ष्रेत्र में आता है, जिसके कारण कपास की फसल सिंचाई पर निर्भर है. इसमें पानी की अत्यधिक मात्रा खर्च होती है जो गन्ने और चावल की तुलना में सिंचाई का तीसरा सबसे बड़ा भाग है. पानी की कमी दक्षिणी पंजाब और सिंध में कपास की फसल के लिए संकट का सबसे कारण बन चुकी है.

एक ओर जहां पाकिस्तान दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक क्षेत्रों मे से एक है, वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्र सतत होने वाले पर्यावरण परिवर्तन के लिए सबसे अधिक असुरक्षित है. पाकिस्तान में कपास उत्पादन, मुख्य रूप से हिमालय की नदियों और उनके फीडर के माध्यम से पानी पर पूरी तरह से निर्भर रहता है. आमतौर पर जून और जुलाई के महीने में तापमान अधिक होने पर तिब्बती और हिमालयी पहाड़ों पर बर्फ के पिघलने के कारण इन नदियों में पानी की प्रचुरता होती है. लेकिन पाकिस्तान में बांधों की समुचित व्यवस्था न होने के कारण इस जाल का बहुत बड़ा हिस्सा बहकर समुद्र में चला जाता है.

पाकिस्तान में घटते जलस्तर और पानी की लगातार बढ़ती कमी कपास उत्पादन के लिए संकट बनती जा रही है. पाकिस्तान के कृषि भूमि उपयोग के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान का अधिकतर कपास उत्पादन छोटी जोतों से उत्पादित होता है, जिनमें से 85 फीसदी खेत दस हेक्टेयर से भी बहुत छोटे होते हैं. छोटे किसान लागत लगाने की दृष्टि से कमजोर होते हैं, जिसका एक महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव उत्पादन की अस्थिरता में दिखाई देता है.

जलवायु परिवर्तन भी पाकिस्तान के कपास उत्पादन के लिए खतरे का संकेत दे रहा है, जिसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है तापमान में भारी वृद्धि. वर्षा में कमी के साथ यह एक घातक समिश्र बनाती है. आमतौर पर कपास के विकास के लिए अधिकतम तापमान 28.5 से 35 डिग्री का तापमान उपयुक्त होता है परन्तु कपास की फसल के चरम समय पर पाकिस्तान के इन क्षेत्रों का तापमान 41 डिग्री से 47 डिग्री के बीच होता है. नवाबशाह जैसी जगहों पर यह 50 डिग्री तक देखा गया है जो न केवल फसल बल्कि मानव के अस्तित्व के लिए घातक है.

पाकिस्तान अपने कपड़ा उद्योग के लिए मुख्यत: घर में उगने वाली कपास पर निर्भर है. परन्तु इसमें भारत से आयातित कपास की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग की वृद्धि और भारत के साथ भौगोलिक निकटता और कीमतों में अपेक्षाकृत कमी के कारण पाकिस्तान द्वारा भारत से कपास की खरीद हाल के वर्षों में बढ़ी है. इस बार फसल के ख़राब हो जाने के कारण इसके उत्पादन में गिरावट आई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जून से जून में उत्पादन 18 प्रतिशत घटकर 9.86 मिलियन गांठ रह गया है, जो कम से कम 17 वर्षों में सबसे कम है. इसकी कमी की सबसे बड़ी आपूर्ति भारत से होने वाला आयात से ही की जानी है.

परन्तु पुलवामा के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बन्धों में आए तनाव के कारण इन सौदों पर शंका के बादल मंडरा रहे हैं. भारत द्वारा पाकिस्तान को MFN दर्जे की समाप्ति के चलते पाकिस्तान को भारत में अपने सूती कपड़े खपाने में बड़ी दिक्कत आने वाली है. वहीं दूसरी ओर भारतीय कपास, जो कीमत में तुलनातमक रूप से सस्ती है, की पाकिस्तान के व्यापार जगत द्वारा उपेक्षा नहीं की जा सकती. अगर भारत से कपास आयात पर पाकिस्तान द्वारा शुल्क में जवाबी वृद्धि की जाती है तो यह पाकिस्तान के लिए ही हानिकारक सिद्ध होगा क्योंकि कपास की कमी से इसके कपड़ा उद्योग की वृद्धि बुरी तरह बाधित हो सकती है.

विगत वर्षों से कपास के बाज़ार में एक नया और विरोधाभाषी ट्रेंड देखा जा रहा है कि कपास उत्पादन में कमी के बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कपास की कीमतें नहीं बढ़ रही हैं. इसका एक महत्वपूर्ण कारण अन्य स्थानापन्न संश्लेषित धागों का चलन का बढ़ना है. विशेषकर कम कीमत वाले क्षेत्र में. परन्तु कपास की कीमतों में गिरावट जहां पाकिस्तान द्वारा कच्चे कपास के निर्यात में मुनाफे की मात्रा में कटौती कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के कपड़े के निर्यात को उसका परम मित्र चीन ही गहरा आघात पहुंचा रहा है.

चीन का शिनजियांग चीन का कपास उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है जहां इस देश का 60 प्रतिशत कपास पैदा किया जाता है. साथ ही साथ चीन ने यहां इसके संसाधन और वस्त्र निर्माण की विशाल इकाइयां स्थापित की हैं. चीन का निर्यात न केवल बाहर के देशों में बल्कि पाकिस्तान के अन्दर भी, उसके स्वदेशी उत्पादन को प्रतिस्पर्धा से बाहर करने में जुटा हुआ है. प्रकृति और प्रतिस्पर्धा के ताने-बाने के बीच उलझा पाकिस्तान कैसे अपने इस महत्वपूर्ण संसाधन को जीवनक्षम बनाये रख पाता है यह भविष्य के गर्भ में निहित है.

7th Pay Commission:कर्मचारियों के लिए चौंकाने वाली खबर, खत्म होगा वेतन आयोग, इस फॉर्मूले से होगी सैलरी बढ़ोतरी

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7th Pay Commission के तहत सैलरी बढ़ोतरी की राह देख रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए झटके वाली खबर है। दर असल सातवां वेतन आयोग आखिरी वेतन आयोग हो सकता है, क्योंकि सरकार इस वेतन आयोग को खत्म करने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार अब वेतन आयोग को खत्म करने की तैयारी कर रही है। यानी सातवां वेतन आयोग आखिरी वेतन आयोग होगा। ऐसे में 68 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 52 लाख पेंशनभोगियों के लिए सरकार वेतन बढ़ोतरी की नई व्यवस्था की जाएगी।

सरकार वेतन आयोग को खत्म करने की तैयारी में है। केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी के लिए नई व्यवस्था की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को रिवाइज करने की जरूरत न पड़े। सरकार इसके लिए दो फॉर्मूले पर विचार कर रही है। वर्तमान में 10 साल में एक बार वेतन आयोग कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों को लेकर सिफारिशें रखता रहा है, लेकिन सरकार अब इसके लिए नया सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ‘ऑटोमैटिक पे रिवीजन’ सिस्टम और दूसरा एक्रॉयड फॉर्मूला पर विचार किया जा रहा है।

कैसे होगी वेतन बढ़ोतरी

ऑटोमैटिक पे रिवीजन सिस्टम के तहत एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा डीए होने पर सैलरी खुद रिवाइज हो जाए। वहीं दूसरे फॉर्मूले एक्रॉयड के तहत कर्मचारियों की सैलरी महंगाई की स्थिति और उनके परफॉर्मेंस से जोड़कर निकाली जाएगी।

क्या है केंद्रीय कर्मचारियों की मांग

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 28 जून 2016 को मंजूर कर दी गई, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को 7000 रुपए से बढ़ाकर 18000 रुपए किया गया, लेकिन कर्मचारियों की मांग है कि इसे 18000 रुपए से बढ़ाकर 26000 रुपए किया जाए। नएए वेतन आयोग के पे-बैंड और ग्रेड के मुताबिक भुगतान कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष बने

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष बनाए गए है।  उपाध्यक्ष का उनका यह कार्यकाल 7 जुलाई 2019 से आगामी एक साल के लिए होगा। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अन्तर्राज्यीय परिषद सचिवालय द्वारा इसकी सूचना जारी कर दी गई है।

 गौरतलब है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत उत्तर, मध्य, दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया है। वर्तमान में मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तप्रदेश, उत्तराखण्ड और मध्यप्रदेश राज्य शामिल है। केन्द्रीय गृह मंत्री सभी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष होते है। प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्य के मुख्यमंत्री को रोटेशन में परिषद का उपाध्यक्ष बनाया जाता है। जिनका कार्यकाल एक वर्ष का होता है। वर्तमान में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष थे जिनका कार्यकाल बीते 6 जुलाई को समाप्त हो गया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भपूूेश बघेल अब मध्य क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष होंगे। क्षेत्रीय परिषदें संबंधित क्षेत्रों के संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ ही अंतर राज्यीय समस्याओं को हल करने में परिषद में शामिल राज्यों के बीच और केन्द्र के साथ स्वस्थ वातावरण निर्माण में एक उच्च स्तरीय सलाहकार मंच स्थापित करता है।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री ने माँ की गोद में रोती बच्ची को चॉकलेट दे कर चुप कराया

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जनचौपाल ‘भेंट-मुलाकात‘ के कार्यक्रम एक रोचक नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री लोगों के पास जाकर उनकी समस्याएं सुन रहे थे। महासमुंद जिले के ग्राम सिंघोड़ा की श्रीमती समुन्द टंडन भी अपना आवेदन देने आगे बढ़ी, उनकी गोद में उनकी बेटी थी। कुछ देर से उनकी बेटी रो रही थी। मुख्यमंत्री ने पूछा क्यों रो रही हो और जब मुख्यमंत्री ने स्नेह से बच्ची को चॉकलेट दिया तो बच्ची एकटक होकर मुख्यमंत्री को देखने लगी और अपना रोना भूल गई।

मुख्यमंत्री आज बिलासपुर और दुर्ग जिले के दौरे पर रहेंगे

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एक अगस्त को बिलासपुर और दुर्ग जिले के भ्रमण पर रहेंगे। निर्धारित दौरा कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सवेरे 11.30 बजे रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर दोपहर 12 बजे बिलासपुर जिले के तहसील तखतपुर के ग्राम गनियारी पहंुचेंगे। वे गनियारी में ग्रामीण औद्योगिक संस्थान और मल्टी स्किल सेन्टर का लोकार्पण करेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री बघेल ग्राम गनियारी से कार से रवाना होकर दोपहर 1 बजे ग्राम नेवरा पहंुचेंगे और वहां गौठान का लोकार्पण कर हरेली त्यौहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद वे वापस ग्राम गनियारी जाएंगे और वहां से हेलीकॉप्टर से रवाना होकर दोपहर 3 बजे दुर्ग जिले के पाटन तहसील के ग्राम पाहंदा पहंुचेंगे। मुख्यमंत्री ग्राम पाहंदा में गौठान का लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4.40 बजे रायपुर लौट आएंगे। इसके बाद वे शाम 6 बजे तेलीबांधा तालाब पहंुचेंगे और स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ : अगस्त माह से 12.89 लाख राशनकार्डधारियों को मिलेगा फायदा : शहरी गरीबों को भी मिलेगा अब केरोसिन

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प्रदेश के शहरी गरीबों को भी अब केरोसिन मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा इसकी अनुमति जारी कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के 12 लाख 89 हजार राशन कार्डधारियों को केरोसिन का फायदा मिलेगा। इन कार्डधारियों को अगस्त 2019 से केरोसिन प्रदाय किया जाएगा।

        गौरतलब है कि पहले गैर अनुसूचित क्षेत्रों में गैस कनेशनधारी राशनकार्डधारियों को केरोसिन का आबंटन बंद कर दिया गया था। राज्य सरकार के इस निर्णय से अब आगामी अगस्त माह से गैर अनुसूचित क्षेत्र के गैस कनेशनधारी राशनकार्डधारियों को भी केरोसिन प्रदाय किया जाएगा।