Home Blog Page 2962

दुबई से आए यात्री के प्राइवेट पार्ट से 893 ग्राम सोना जब्त

0

अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास इंटरनैशनल (एस.जी.आर.डी.) एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग के एयर इंटैलीजैंस यूनिट ने दुबई से अमृतसर आने वाली फ्लाइट में सवार एक यात्री के प्राइवेट पार्ट से 893 ग्राम सोना जब्त किया है। जानकारी के अनुसार कर्नाटक निवासी अदीब ने सोने का पाऊडर बनाकर उसको प्लास्टिक टेप में पैक करके अपने प्राइवेट पार्ट में छिपाया हुआ था जिसकी सूचना विभाग को मिल गई।

सोना इस प्रकार से छिपाया गया था कि एक्सरे मशीन में भी न आ सके लेकिन विभाग ने सोना तस्करों की इस योजना को नाकाम कर दिया। कस्टम कमिश्नर दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है। पकड़ा गया तस्कर एक बड़ी सोना तस्करी की चेन का हिस्सा है

प्रेस रिव्यू: आने वाले बीस साल में बूढ़ी हो जाएगी दिल्ली

0

आर्थिक समीक्षा 2018-19 के अनुसार, साल 2041 में राजधानी का हर पांचवां शख़्स 60 के पार होगा.

यह ख़बर दैनिक हिंदुस्तान ने प्रकाशित की है. अख़बार के मुताबिक़, दो दशक बाद दिल्ली का हर पांचवां शख़्स बुजुर्ग होगा. आर्थिक समीक्षा 2018-19 के अनुसार, साल 2041 तक बच्चों और किशोरों की संख्या बुजुर्गों के मुक़ाबले बहुत कम हो जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीस साल बाद 21 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग साठ से अधिक उम्र के होंगे.

हालांकि बीस साल बाद देश में सबसे अधिक बुजुर्ग तमिलनाडु में होंगे.

इसी अख़बार की एक अन्य ख़बर है कि अगर लेन-देन में आधार का ग़लत विवरण देने पर दस हज़ार रुपये का हर्जाना देना पड़ेगा. सरकार कानून संशोधन पर विचार कर रही है ताकि आधार के लिए दंड प्रावधान को भी बढ़ाया जाए.

सरकार ने बड़े लेन-देन के लिए पैन कार्ड के स्थान पर आधार नंबर देने का विकल्प दिया है, लेकिन अगर ये नंबर ग़लत दिया तो हर्जाना देना पड़ सकता है. इस प्रावधान के एक सितंबर 2019 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है.

हिरासत में मौ

इंडियन एक्सप्रेस ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है. घटना राजस्थान राज्य के चुरू ज़िले की है. 35 वर्षीय महिला के परिवार का आरोप है कि कुछ पुलिसवालों ने उसके साथ गैंगरेप किया.

उनका आरोप है कि पुलिसवालों ने महिला को चोरी के एक मामले में ग़ैर-कानूनी तरीके से आठ दिनों के लिए नज़रबंद करके रखा था.

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस महिला के देवर को छह जुलाई के दिन हिरासत में लिया गया था और फिर उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई. जिसके लिए न्यायिक जांच के आदेश दे दिये गए हैं.

शी जिनपिंग और मोदी की मुलाक़ात

द हिंदू की ख़बर के मुताबित चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 अक्टूबर को वाराणसी में मुलाक़ात करेंगे.

यह एक अनौपचारिक मुलाक़ात होगी. उम्मीद की जा रही है कि इससे दोनों देशों के बीच संबंध और बेहतर होंगे.

बाहुबली के सहारे चांद का सफ़र

भारत आज अपनी महत्वाकांक्षी योजना चंद्रयान-2 को साकार करेगा.

श्रीहरिकोटा से बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 रात 2:51 बजे चंद्रयान-2 को लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर उड़ेगा.

यह पहली बार होगा, जब भारत का कोई स्पेस मिशन चंद्रमा पर उतरेगा. 2008 में गया चंद्रयान-1 चांद पर उतरा नहीं था, लेकिन चांद पर पानी खोज निकाला था. अब मिशन-2 चांद के इस अंधेरे हिस्से में पानी के साथ खनिज भी खोजेगा.

राहुल गांधी की कांग्रेस इन वजहों से चरमरा रही है: नज़रिया

0

11 सितंबर, 2001 को जब अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर चरमपंथी हमला हुआ तब दुनियाभर को सदमा पहुंचा था.

उसी शाम, एक यूरोपीय नीति निर्माता भी ख़बरों में थे जिन्होंने यह सलाह दी कि मौजूदा समय किसी भी अलोकप्रिय फ़ैसले को लागू करने का सबसे बेहतरीन समय है, क्योंकि हर किसी का ध्यान चरमपंथी गतिविधियों की ओर होगा. मतलब अलोकप्रिय फ़ैसले पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा.

दरअसल, यह भी एक तरह की राजनीतिक रणनीति ही है कि आप संकट के समय कुछ वैसा फ़ैसला कर लें जिसे कर पाना शांति के दौर में संभव ही नहीं होगा. इसी सिद्धांत को 2007 में कनाडाई लेखक नेओमी क्लाइन ने अपनी पुस्तक ‘शॉक डॉक्ट्रिन’ में विस्तार से समझाया है.

कांग्रेस पार्टी के अंदर बीते 23 मई से क्या कुछ चल रहा है, इसे समझने का एक जरिया ‘शॉक डॉक्ट्रिन’ भी है. 2019 के आम चुनावों में मिली करारी हार और उस हार के सदमे ने कांग्रेस पार्टी को बीते सात सप्ताह से नेतृत्व के स्तर पर भी भ्रम में डाल दिया है. इस स्थिति के चलते पार्टी के आलोचकों को, चाहे वो पार्टी के भीतर के हों या फिर बाहरी, पार्टी के अस्तित्व पर हमले करने का मौका मिल गया है.

हालांकि, इस दौरान आम लोगों की इस बात में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनका ध्यान दूसरे मुद्दों की ओर है.

आप अगर सर्च इंजन में ‘कांग्रेस मेल्टडाउन’ टाइप करें तो महज 0.3 सेकेंड के अंदर तकरीबन 90 हज़ार लिंक दिखाई देने लगते हैं. हर रात टीवी पर कांग्रेस की स्थिति मांस के उस टुकड़े की तरह हो जाती है, जिसे भेड़ियों के आगे फेंका जाना है.

बीजेपी का ‘कांग्रेसविहीन भारत’

विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के साथ जो कुछ हो रहा है, उन सबमें एक बात समान है- उसकी स्थिति की वजह भारतीय जनता पार्टी है और स्थिति का फ़ायदा भी बीजेपी को ही हो रहा है.

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले पांच साल के शासन के दौरान बीजेपी ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाई, इसलिए मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में ‘कांग्रेस विहीन भारत’ बनाने की कृत्रिम कोशिश की जा रही है.

कर्नाटक, गोवा और तेलंगाना में उन कांग्रेसियों को अपने पाले में लाया जा रहा है जिन्हें लग रहा है कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है.

बहरहाल, कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलों के बीच सात चीजें ऐसी हैं जिससे यह समझा जा सकता है कि कांग्रेस इस हाल तक क्यों पहुंची है, इसमें कुछ अप्रत्याशित नहीं हैं लेकिन ये कांग्रेस की चरमराती स्थिति की तस्वीर को पेश करती है.

क्या हैं कारण

बीजेपी ने हाल के चुनाव में जिस जोरदार अंदाज़ में जीत हासिल की है, उससे उसे दक्षिण हिस्सों में अपनी पहुंच को बढ़ाने के लिए नए सिरे से कोशिश करने का उत्साह मिला है. मौजूदा चुनाव में उत्तर भारत में अपनी कामयाबी के बावजूद बीजेपी कर्नाटक को अपवाद मान ले तो दक्षिण भारत में उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर पाई.

केरल और तमिलनाडु में पार्टी का खाता नहीं खुला. आंध्र प्रदेश में पार्टी अपनी दो सीटें भी नहीं बचा पाई, लेकिन तेलंगाना में उसे चार सीटें ज़रूर मिलीं. अब बीजेपी कांग्रेस खेमे को और भी झटका देने की कोशिश कर रही है- अपने दम पर और अप्रत्यक्ष तौर पर भी.जहां-जहां कांग्रेस की यूनिट मजबूत है, वहां उसमें तोड़-फोड़ कर पाने की आशंका कम है. केरल का उदाहरण सामने है, जहां कांग्रेस नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, 20 लोकसभा सीटों में 19 जीतने में कामयाब रही. ऐसे में केरल कांग्रेस में कोई हलचल नहीं दिख रही है.

वहीं, दूसरी ओर, कर्नाटक दक्षिण भारत का इकलौता ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर गठबंधन की सरकार है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन 28 में महज दो सीटें जीत पाईं और इसके बाद ही सरकार गिरने की कगार तक पहुंची है.

कांग्रेसियों में निश्चित तौर पर पार्टी के भविष्य और अपने भविष्य को लेकर चिंताएं हैं. लेकिन यह भी देखना होगा कि पार्टी में अवसरवाद और निजी महत्वाकांक्षा भी चरम पर है.

कर्नाटक में जिन कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया है और मुंबई में ठहरे हुए हैं उनमें कई की निष्ठा पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रति रही है, जो राहुल गांधी के इस्तीफ़े से बिना किसी नेतृत्व के एक बार फिर पार्टी में अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं.

इसके अलावा कांग्रेस आर्थिक मोर्चे पर भी बीजेपी के सामने पिछड़ती जा रही है. साल 2016 से 2018 के बीच, बीजेपी को 985 करोड़ रुपये का चंदा कॉरपोरेट जगत से मिला है. यह कुल कॉरपोरेट चंदे का 93 प्रतिशत है. जबकि कांग्रेस को 5.8 प्रतिशत यानी महज 55 करोड़ रुपये का चंदा मिला है.

बेनामी इलेक्ट्रॉल बॉन्ड से भी बीजेपी को ही फ़ायदा पहुंचा. इसके चलते भी बीजेपी वह सब कर पा रही है जो कांग्रेस नहीं कर सकती.

गोवा कांग्रेस के प्रभारी के चेलाकुमार ने ऑन रिकॉर्ड यह कहा कि कांग्रेस विधायकों ने उन्हें बताया कि उन्हें बीजेपी कितना पैसा ऑफ़र कर रही है.

क़ानून से खिलवाड़

इस लड़ाई में कांग्रेस इसलिए भी हार रही है क्योंकि क़ानून के जानकार कानून का ठेंगा दिखाने के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं.

उदाहरण के लिए तेलंगाना में, कांग्रेस के 18 में से 12 विधायक तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल हो गए, जिसके चलते उन पर दल-बदल क़ानून लागू नहीं हो पाया. गोवा में भी कांग्रेस के 15 विधायकों में से 10 विधायक बीजेपी में शामिल हुए हैं, यहां भी दो-तिहाई सदस्य होने के कारण क़ानून लागू नहीं हो सकता.

कर्नाटक में कांग्रेसी विधायकों ने केवल विधायकी से इस्तीफ़ा दिया है, पार्टी से इस्तीफ़ा नहीं दिया है, ताकि उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सके.बीजेपी खुद के लिए ‘पार्टी विद ए डिफरेंस’ दावा भले करती रही हो, लेकिन वह कांग्रेसियों को अपने पाले में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है.

सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति में, सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल भी कांग्रेस विधायकों पर किया जा रहा है ताकि वे पाला बदल सकें.

गोवा में बीजेपी ने एक कांग्रेसी विधायक पर रेपिस्ट होने का आरोप लगाया था, लेकिन उस विधायक को अपनी पार्टी में शामिल करने से पहले पार्टी ने इस आरोप पर विचार करना तक जरूरी नहीं समझा.

हालांकि, बीते दो साल के दौरान कांग्रेस ने गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में प्रभावी प्रदर्शन किया है. बावजूद इसके, पार्टी गुजरात के अल्पेश ठाकोर जैसे महत्वाकांक्षी विधायकों पर अंकुश नहीं रख पाई या फिर राजस्थान में समय-समय पर उभर आने वाले असंतोष पर काबू नहीं कर पाई.

कर्नाटक का मौजूदा नाटक जारी है, ऐसे में निश्चित तौर पर, जीतने वालों पर भरोसा करके उन्हें उम्मीदवार बनाने की बड़ी कीमत कांग्रेस चुका रही है.

वहीं दूसरी ओर, आम चुनावों में जोरदार जीत हासिल करने के बाद, बीजेपी सत्ता की ठसक में सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है और इसके लिए किसी राजनीतिक नैतिकता की परवाह भी नहीं कर रही है. ऐसे में तय है कि वह कांग्रेस को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी.

लेकिन जब मौजूदा उठापठक का दौर थमेगा, स्थिरता का दौर आएगा तब यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि बीजेपी के इस खेल के लिए भारतीय लोकतंत्र को क्या कीमत चुकानी पड़ी

मत्स्य पालकों के लिये बड़ी खुशखबरी, मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड

0

उत्तर प्रदेश मे अब मत्स्य पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा। सरकार चालू वित्त वर्ष में 10,357 मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करायेगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य के मत्स्य विभाग द्वारा इस वर्ष 10,357 मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मत्स्य पालकों को अपने व्यवसाय में वृद्धि के लिए आसानी से ऋण मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर किसान क्रेडिट कार्ड का वितरण अभियान चलाकर करने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड के लिए किसानों से आगामी 30 सितम्बर तक आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये हैं। मत्स्य विभाग के निदेशक एस0के0 सिंह ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मत्स्य पालकों को अपने व्यवसाय में वृद्धि के लिए आसानी से ऋण मिल सकेगा।

उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने के लिये इच्छुक मत्स्य पालक अपने जिला मत्स्य कार्यालय से सम्पर्क स्थापित करना होगा।श्री सिंह ने बताया कि पट्टाधारक मत्स्य पालक, निजी क्षेत्र के मत्स्य पालक, पंजीकृत मत्स्य जीवी सहकारी समितियां, हैंचरी एवं मत्स्य बीज उत्पादक, महिला समूह एवं स्वयं सहायता समूह को वार्षिक निवेश के लिये एक लाख पचास हजार रूपये से दो लाख रूपये तक की फसली ऋण के रूप में किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा वार्षिक ब्याज दरों पर उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 से मत्स्य पालकों को मत्स्य निवेश एवं मत्स्य तालाब जलक्षेत्रों के वार्षिक रखरखाव एवं अनुरक्षण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा सुलभ करायी जाती है।

ताजमहल की एक मीनार पर शुरू हुई मरम्मत जानिये कब होगी पूरी ?

0

ताजमहल की चार मीनारों में से पीछे की एक मीनार पर कुछ दिन पहले शुरू हुई मरम्मत विश्व पर्यटन दिवस से पहले ही 15 सितम्बर तक पूरी कर ली जायेगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। संरक्षक सहायक और मरम्मत का काम देख रहे अमर नाथ गुप्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मीनार की मरम्मत का काम जल्द पूरा हो जायेगा।

उन्होंने कहा कि कुछ पत्थरों को बदला जा रहा है और काले पत्थरों की पंक्ति दुरूस्त की जा रही है। इमारत के प्रभारी नामदेव ने बताया कि 17वीं सदी की इस मीनार पर काम शुरू हो गया है और मरम्मत के लिए मचान बनाई गई है। इससे पहले भारतीय पुरातत्व विभाग के उत्तर सर्किल के प्रमुख वसंत स्वर्णकार ने बताया कि ”यह सामान्य मरम्मत नहीं अपितु यह विशिष्ट कार्य है।”

कुछ खबरों में कहा गया है कि सीढ़ियों के पत्थर भी टूट गए हैं और उन्हें बदला जाना चाहिये। लोहे के कुछ क्लैंपों पर भी जंग लग गई है।
इस बीच ताज महल के टूरिस्ट गाइडों ने इस बात पर चिंता जताई है कि इस इमारत के यमुना की तरफ वाले हिस्से पर हरे रंग के धब्बे दिखाई दे रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस 27 दिसम्बर को मनाया जाता है।

मुंबई के ‘ताज होटल’ में काम करने वाले वेटर की सैलरी जान पैरो तले जमीन खिसक जाएगी

0

कहते हैं दुनियां में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता हैं. आप किसी भी फिल्ड में हो यदि आप उसमे महारात हासिल कर लो और हमेशा टॉप पोजीशन पर जाने की कोशिश करते रहो तो आप एक सफल और अमीर व्यक्ति कहला सकते हैं. पैसा एक ऐसी चीज हैं जो हर क्षेत्र में खूब होता हैं. बस आपको उसे सही ढंग से कमाते आना चाहिए. मसलन यदि आप किसी होटल में वेटर का काम करना चाहो तो परिवार और समाज में कई लोग आपके ऊपर हंसेंगे और आपका मजाक भी उड़ाएंगे. हालाँकि इस फिल्ड में भी आप मजाक उड़ने वाले लोगो से कही ज्यादा पैसे कमा सकते हैं. इसके लिए आपके अंदर टेलेंट और कुछ अन्य खूबियां होनी चाहिए. जैसा कि हमने आपको बताया हर फिल्ड में एक टॉप पोजीशन होती हैं. ऐसे में वेटरों की बात करे तो मुंबई के ताज होटल में काम करने वाले इन वेटरों की मासिक आय जान आप भी अहिरान रह जाएंगे.

मुंबई एक ऐसा शहर हैं जहां रोजाना लाखों लोग अपनी आँखों में सपने संजोय आते हैं. इसलिए इसे सपनो की नगरी भी कहा जाता हैं. यहां एक गरीब से लेकर बेहद अमीर तक हर तरह के लोग रहते हैं.

आपको कई ऐसे उदाहरण भी मिल जाएंगे जिसमे मुंबई आने वाले छोटे मोटे या मिडल क्लास के लोग बाद में अपने हुनर और मेहनत के दम पर अमीर बन गए. विदेश से भी जब कोई भारत घुमने आता हैं तो ज्यादातर केस में पहले मुंबई ही आना पसंद करता हैं. जहां एक तरफ मुंबई में कई स्लम एरिया हैं जो गरीबी में बुरी तरह डूबे हुए हैं तो वहीं दूसरी और ऐसे आलिशान जगहें भी हैं जहां सिर्फ शहर के अमीर लोग ही जाते हैं. मुंबई में अमीरों की ऐसी ही एक फेवरेट जगह हैं ‘ताज होटल’.

ताज होटल मुंबई का सबसे फेमस होटल हैं. इसका नाम सिर्फ मुंबई में ही नहीं बल्कि देश विदेश में भी चलता हैं. कई बड़ी बड़ी हस्तियाँ यहां आकर रूकती हैं, खाना खाती हैं और एन्जॉय करती हैं. इसे आप बेहद अमीर लोगो का होटल भी कह सकते हैं.

यहां मिलने वाली हर चीज की कीमत सामान्य होटल से कई गुना ज्यादा होती हैं. एक तरह से ये अमीरी और रिच स्टेटस का सिम्बोल होता हैं. जब यहां आने वाले लोग एक दिन में ही लाखो रुपए खर्च कर जाते हैं तो यक़ीनन इसमें काम करने वाले लोगो को भी अच्छी खासी सैलरी मिलती होगी. ताज होटल में काम करने वाले वेटर में कई सारी खूबियाँ देखी जाती हैं.

जैसे उसकी एजुकेशन, कम्युनिकेशन स्किल्स, अंग्रेजी, नेचर इत्यादि. फिर कई तरह के इंटरव्यू भी होते हैं जिसके बाद कहीं जाकर उन्हें इस आलिशान होटल में वेटर की नौकरी करने का मौका मिलता हैं. इस होटल में काम करने का सपना कई सारे लोग देखते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह होटल में मिलने वाली मोटी सैलरी होती हैं.

ये हैं ताज होटल में काम करने वाले वेटरों की सैलरी

चलिए अब हम सस्पेंस ख़त्म करते हुए आपको बताते हैं कि ‘ताज’ होटल में काम करने वाले वेटर को 1 लाख 30 हजार रुपए से लेकर 1 लाख 50 हजार रुपए तक की सैलरी मिलती हैं. इतना पैसा कई लोग बड़ी बड़ी डिग्री लेने के बाद भी नहीं कमा पाते हैं जितना यहाँ के वेटर कमा लेते हैं.

तांबे के बर्तन में ये चीज़ें बन जाती है जहर

0

जैसा की आप सभी जानते है की सुबह-सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना शरीर के लिए पूरी तरह अमृत माना जाता है। और यह हमारे शरीर को कई तरह की गंभीर बीमारियों से बचाता हैं। यह बात हम सभी अच्छी तरह जानते हैं और शायद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते भी है।

लेकिन कई लोगों को ऐसा लगता है कि जैसे तांबे के बर्तन में रखा पानी हमें बहुत अधिक फायदा देता है, वैसे कोई भी चीज इसमें रखकर खाने से अत्यधिक फायदे होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। क्‍या आप जानते हैं कि कुछ चीजों को तांबे के बर्तन में रखकर खाने से वह चीजें पूरी तरह जहर के सामान बन सकती है।

दही – यूं तो दही में पाए जाने वाले कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन डी, विटामिन B12, विटामिन B6 और कोलेस्ट्रॉल जैसे कई सारे पोषक तत्व हमारे शरीर की बीमारियों के लिए पूरी तरह रामबाण का काम करते है लेकिन अगर दही को तांबे के बर्तन में रखा जाए तो इससे मिलने वाले फायदे होने की जगह विल्कुल उल्टा होता है।

दही में मौजूद पोषक तत्व तांबे के साथ रिएक्ट करते हैं जिस वजह से लोगों को फूड पॉइजनिंग की गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए दही को कभी भी तांबे के बर्तन में नहीं जमाना चाहिए।

सिरके वाला अचार –सिरके वाला अचार भी ताम्बे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए क्योंकि सिरका मेटल के साथ मिलकर प्रतिक्रिया करने लगता है जिस वजह से कॉपर पॉइजनिंग भी हो सकती है।

नींबू का जूस –नींबू के जूस में मौजूद एसिड तांबे के साथ मिलकर पूरी तरह रिएक्ट करते हैं जो आपकी सेहत के लिए अत्यधिक नुकसानदेह होता है। इसकी वजह से लोगों में गैस बनना, पेट में दर्द जैसी गंभीर समस्या होती है।

खट्टी चीजे –किसी भी तरह की खट्टी चीजों को तांबे के बर्तन में रखने से पूरी तरह बचना चाहिए। तांबे के बर्तन में रखने के बाद इन चीजों को खाने से अत्यधिक कमजोरी और आलस आने लगता है।

अचार –साथ ही अगर आप बहुत लंबे समय तक तांबे में रखी चीजें खाते हैं तो आपको चक्कर और बेहोशी भी आने लगती हैं। अचार को खासकर तांबे के बर्तन में रखने से हमें अवश्य बचना चाहिए। दरअसल, अचार में खट्टापन होने की वजह से यह तांबे के बर्तन में पूरी तरह खराब हो जाता है।

बड़ी से बड़ी बीमारी भी आपसे रहेगी कोसों दूर, मानसून में करें इस सब्जी का सेवन

0

इस समय मानसून का मौसम शुरू हो चुका है, इस मौसम में कई संक्रामक बीमारियाँ होने का खतरा रहता है, इसीलिए आज हम आपको एक ऐसी सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मानसून के मौसम में आसानी से मिल जाती और ये सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी होती है, हम जिस सब्जी की बात कर रहे हैं, उस सब्जी का नाम है कंटोला।

कंटोला में भरपूर मात्रा में फाइटोकेमिकल्स, एक्टीऑक्सीडेंट आदि पाया जाता है, जो कि मीट से भी कई गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है, चलिए जान लेते हैं कंटोला की सब्जी खाने के बेमिसाल फायदों के बारे में।

कंटोला की सब्जी खाने के फायदे

1- सर्दी खांसी में

कंटोला में एंटीएलर्जिक और एनाल्जेसिक गम पाए जाते हैं, इस सब्जी के सेवन से सर्दी खांसी की समस्या दूर रहती है। 2- आँखों की रोशनी के लिए

कंटोला में विटामिन A भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए इस सब्जी का नियमित सेवन करने से आँखों की रोशनी तेज होती है और आँखों की कई परेशानियां दूर रहती हैं।

3- ब्लडप्रेशर में

कंटोला में फाइबर और मोमोरडीसिन अधिक मात्रा में होते हैं, जो बीपी के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

4- वजन कंट्रोल करने में

कंटोला वजन को कंट्रोल करने में भी सहायक है, कंटोला में आयरन और प्रोटीन अधिक मात्रा में जबकि कैलोरी कम मात्रा में पाया जाता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है।

5- पाचन दुरुस्त रखने में

कंटोला में फाइबर होता है, जो अपच की समस्या को खत्म करने में और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए बेहद लाभकारी होता है।

1 किलोमीटर चलने के लिए ट्रेन को कितना डीजल चाहिए? जवाब सुनते ही उड़ जाएंगे आपके होश

0

भारतीय रेलवे भारत के यातायात का एक प्रमुख साधन है. रेलगाड़ी के कारण भारत का विकास बहुत तेजी से हुआ है. ट्रेन के कारण ही बहुत सारे लोग एक साथ बहुत लंबी-लंबी दूरियां तय कर सकते हैं. इसका किराया भी कम होता है. ट्रेन में एक विशाल इंजन लगा हुआ रहता है जो काफी शक्तिशाली होता है. ट्रेन बहुत सारे डिब्बों को एक साथ खींच सकता है और काफी तेज़ चल सकता है. ट्रेन का इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों के आवागमन के लिए ही नहीं बल्कि भारी-भारी सामानों को ढोने के लिए भी किया जाता है. ट्रेन में लोग आराम से सफ़र करते हैं. पहले पुराने ज़माने में जहां एक जगह से दूसरी जगह जाने में हफ्ते लग जाते थे, अब वहीं दूरियां ट्रेन की वजह से कुछ घंटों में तय कर सकते हैं. रेलगाड़ी के कारण ही बहुत सारे गांव और शहर एक दूसरे से जुड़ पाए. भारत कि तरक्की में ट्रेन का एक महत्वपूर्ण योगदान है.

लोग ट्रेन में तो सफ़र करते हैं, पर क्या आपने कभी ट्रेन की एवरेज के बारे में सोचा है? अपनी पर्सनल गाड़ी चलाने पर हम एवरेज का बहुत ख्याल रखते हैं.

हर वक़्त हमारी नज़रें पेट्रोल के कांटे पर टिकी हुई होती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं एक रेलगाड़ी को एक किलोमीटर चलने के लिए कितना डीज़ल चाहिए? शायद आपने इस बारे में कभी सोचा न हो. कोई बात नहीं, हम आज आपको बतायेंगे कि एक किलोमीटर चलने के लिए एक ट्रेन को कितने लीटर डीज़ल की आवश्यकता पड़ती है.

एक किलोमीटर चलने पर कितना डीज़ल लगता है इस बात का अंदाज़ा लगाना आमतौर पर मुश्किल है. लेकिन काफी रिसर्च करने के बाद इस बात का जवाब मिल चुका है. कोरा पर राजन प्रधान नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि एक रात वह औरंगाबाद के स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था. वहां पर उसने देखा कि ट्रेन का ड्राइवर ट्रेन के इंजन को खुला छोड़कर चाय-पानी पीने चला गया.

उस वक़्त मेरे मन में सवाल आया कि क्या ट्रेन डीज़ल नहीं खाती, जो ये लोग उसे बंद किये बिना चले जाते हैं? दूसरा सवाल यह आया कि ट्रेन आखिर कितना एवरेज देती है? मैं जहां नाश्ता कर रही थी वहीं पर लोको पायलट भी नाश्ता करने आया. फिर मैंने उससे आखिर पूछ ही लिया कि वह इंजन को चालू छोड़कर क्यों आया है और क्या उसमें डीज़ल नहीं लगता?

सवाल सुनकर लोको पायलट जिसका नाम पवन कुमार था और ग्वालियर का रहने वाला था, ने कहा कि ट्रेन के इंजन को बंद करना तो आसान है पर इसे चालू करना बहुत मुश्किल होता है. इसे दोबारा चालू करने में कम से कम 25 लीटर डीज़ल खर्च हो जाता है. वहीं ट्रेन की बात करें तो एक किलोमीटर चलने में यह 15 से 20 लीटर डीज़ल खाता है. उसके द्वारा दी गयी यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण थी

जानें कब क्या होगा, चंद्रयान-2 की लांचिंग के लिए उल्टी गिनती शुरू

0

चंद्रयान-2 को ले जाने वाले भारत के भारी रॉकेट की 15 जुलाई को तड़के लांचिंग की उल्टी गिनती रविवार सुबह 6.51 बजे शुरू हो गई। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के. सिवन ने बताया कि रविवार तड़के 6.51 बजे उल्टी गिनती शुरू हो गई।

लगभग 44 मीटर लंबा 640 टन का जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क तृतीय (जीएसएलवी-एमके तृतीय) एक सफल फिल्म के हीरो की तरह सीधा खड़ा है। रॉकेट में 3.8 टन का चंद्रयान अंतरिक्ष यान है। रॉकेट को ‘बाहुबली’ उपनाम दिया गया है। अपनी उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपए के चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पार्किं ग में 170 गुणा 40400 किलीमीटर की कक्षा में रखेगा। धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3.844 किलोमीटर है। चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे।

लैंडर-विक्रम छह सितंबर को चांद पर पहुंचेगा और इसके बाद प्रज्ञान यथावत प्रयोग शुरू करेगा।
16 दिनों बाद चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलेगा। इस दौरान चंद्रयान-2 से रॉकेट अलग हो जाएगा। 5 दिनों बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इस दौरान उसकी गति 10 किलोमीटर प्रति सेकंड और 4 किलोमीटर प्रति सेंकंड रहेगी।

चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद चंद्रयान चंद्रमा के चारो और चक्कर लगाते हुए उसकी सतह की ओर बढ़ेगा। चंद्रमा की कक्षा में 27 दिनों तक चक्कर लगाते हुए चंद्रयान उसकी सतह के नजदीक पहुंचेगा। इस दौरान उसकी अधिकतम गति 10 किलोमीटर/प्रति सेकंड और न्यूनतम स्पीड 1 किलोमीटर/सेकंड रहेगा।