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क्या कभी देखें हैं ऐसे बादल! एक फोटो जो पल भर में बना देगी दीवाना.

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बादलों के भी कितने सारे रंग-रूप होते हैं न… आसमान में दिखाई देने वाले ये बादल जाने कितने तरह की आकृतियों के होते हैं. हर बादल किसी-न-किसी अलग तरह के आकार में ही होता है. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर वायरल हो रही है, जो देखने में सच में एक बेहद खूबसूरत सीनरी की तरह लग रही है.

एमी क्रिस्टी हंटर नाम की एक फेसबुक यूजर ने अपने अकाउंट पर यह फोटो शेयर की है. तस्वीर में बादलों से बनती लहर दिख रही है. ऐसा लग रहा है मानो बादलों में समंदर की लहरें उठ रही हों. लहर मकानों से टकरा रही हों. फेसबुक पोस्ट के मुताबिक यह नजारा मंगलवार का है.

बादलों की लहरें स्मिथ माउंटेन पर नजर आई. एमी ने इसे अपने कैमरे में कैप्चर कर लिया. एमी ने इन्हें सुनामी क्लाउट का नाम दिया. मौसम जानकारों के मुताबिक ये बेहद दुर्लभ तस्वीर हैं. केल्विन हेल्महोल्त्ज़ अस्थिरता के तौर पर जाना जाता है.

जानकारों के मुताबिक यह तब बनता है जब हवा की दो परतें अलग-अलग होकर तेजी से चलती हैं. जिसकी वजह से हवा की ऊपरी परत में निचली परत की अपेक्षा तेजी से हलचल होती है. जिससे बादल रोलिंग लहर की तरह से दिखाई देने लगते हैं.

जल्द ही रेल में क्यूआर कोड से जान पाएंगे कैसा है आपका खाना

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सालों में रेलवे में सुधार हो रहा है लेकिन खाने को लेकर अब भी सबसे ज्यादा शिकायत रहती है. खाने की गुणवत्ता को सुधारने के लिए लगातार सुझाव दिए जा रहे हैं. इन पर धीरे-धीरे अमल हो रहा है. शनिवार को रेलमंत्री पीयूष गोयल ने पश्चिम और मध्य रेलवे के साथ रिव्यू मीटिंग की. इस मीटिंग में कैटरिंग से जुड़े मुद्दों को जल्द निपटाने पर जोर दिया गया.

आईआरसीटीसी द्वारा संचालित बेस किचन में कई प्रीमियम ट्रेनों का खाना बनता है. रेलमंत्री ने इन बेस किचन से लाइव फीड देने का इंतजाम जल्द करने का आदेश दिया है. लाइव फीड के जरिए यात्रियों को पता चलेगा उनका खाना कैसे बना है, कितनी हाइजीन रखी गई है.

बेस किचन से पैक होने वाले खाने में जल्द ही क्यूआर कोड लगाना होगा. इस क्यूआर कोड के जरिए यात्री को खाने से जुड़ी सभी जानकारियां मिल जाएंगी. मसलन खाना कौन से बेस किचन में, कितने बजे पैक किया गया है. खाने का वास्तविक दाम भी क्यूआर कोड के जरिए यात्री को बताया जाएगा ताकि उतना ही भुगतान किया जाए.

मुंबई में शुरू की गई नो-बिल, नो-पेमेंट की योजना को अब ट्रेनों में भी सख्ती से लागू किया जाएगा. पीयूष गोयल ने मीटिंग में अधिकारियों से कहा कि नो-बिल, नो-पेमेंट के निर्देश मेटल शीट पर प्रिंट करके ट्रेनों में जल्द से जल्द लगाए जाए. इन शीट पर टी.सी. द्वारा रसीद नहीं दिए जाने पर की जाने वाली कार्रवाई का भी ब्योरा होगा.

रेलवे में पारंपरिक रेक का उत्पादन बंद हो चुका है. अब राजधानी की तर्ज पर एलएचबी रेक ही बन रहे हैं. रिव्यू मीटिंग के दौरान रेलमंत्री ने अधिकारियों को पेंट्रीकार वाली ट्रेनों को जल्द ही एलएचबी रेक में बदलने के निर्देश दिए हैं. एलएचबी रेक की पेंट्रीकार वातानुकूलित होती हैं, जिसमें भोजन की गुणवत्ता को बरकरार रखना आसान होता है.

रेलवे में फिलहाल विभिन्न प्रकार की सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन दी गई हैं. रेलमंत्री ने निर्देश दिया है कि सुरक्षा के लिए आरपीएफ की हेल्पलाइन 182 और अन्य सेवा के लिए कोई एक ही हेल्पलाइन होनी चाहिए. इससे यात्रियों को सुगमता होगी.

घर से सारे मच्छर भगा देगी ये देशी नुस्खा, बस इस्तेमाल करना होगा ये एक चीज

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अगर आप भी घर में मच्छरों के आतंक से परेशान हैं तो ये कुछ आसान उपाय करके मच्छरों को भगा सकते हैं. जिस तरह सेहत के लिए नींबू फायदेमंद होता है उसी तरह इससे मच्छरों को भी भगाया जा सकता है. इसके लिए नींबू और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिक्स कर लें और इसे शरीर पर रगड़े इसका असर लगातार 8 घंटे तक रहता है. 

इसके अलावा कमरे में कोइल की जगह कपूर जलाएं और 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दीजिए. इस उपाय को करने से कमरे से सारे मच्छर भाग सकते हैं. इसके अलावा बराबर मात्रा में नींबू के तेल और नीलगिरी के तेल लेकर एक मिश्रण तैयार कर लीजिए. अब इसे शरीर पर लगाएं इसकी महक से मच्छर आपके पास भी नहीं आएगा. तुलसी के पौधे को कमरे की खिड़की या दरवाजे के पास रखने से मच्छर भाग जाते हैं.

तुलसी मच्छरों को घर में घुसने से रोकती है. तुलसी के अलावा आप नींबू और गेंदे का पौधा भी इस्तेमाल कर सकते हैं. लहसुन की महक से मच्छर आस पास नहीं आते इसके लिए इसे पीस लीजिए और पानी में उबालकर कमरे में छिड़क दें इससे कमरे से मच्छर भाग सकते हैं.

यहाँ सिर्फ 13 रुपए में किराए पर मिल रही है गर्लफ्रेंड, बस है ये छोटी शर्त

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आज के समय हर युवा की गर्लफ्रेन्ड होती ही है। जो लोग कॉलेज में पढ़ते हैं उन सभी को गर्लफ्रेन्ड बनाना बहुत पसन्द है। इस दुनिया में कब क्या हो जाए किसी को पता नहीं। आजकल हमें देश विदेशों से ऐसी अजीबो गरीब खबरें सुनने को मिल जाती है जिन्हें सुनकर हैरानी होती है। आजकल लोग पैसे कमाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं हर प्रकार का धंधा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन चौंका देने वाली बात यह है कि लोग ऐसे शॉपिंग सेन्टर भी खोलने लगे हैं जहां पर किराए पर गर्लफ्रेन्ड मिलती है। आपको सुनकर हैरानी हो रही होगी पर ये सच है।

चीन में मिल रही है किराए पर गर्लफ्रेंड-

हर लड़के का सपना होता है कि उसकी कोई गर्लफ्रेन्ड हो जो उसे साथ रहे उससे प्यार भरी बातें करें और हंसी मजाक करे। लेकिन जरूरी नहीं कि सभी लड़कों की गर्लफ्रेन्ड हो। ऐसे में अब हमारे पड़ोसी देश चीन में एक ऐसा शापिंग सेन्टर खुला है जो आपके लिए गर्लफ्रेन्ड मुहैया कराता है।

दरअसल रिपोट। के मुताबिक चीन के शहर हुआन में एक शॉपिंग सेंटर ने 15 लड़कियों को किराए पर उपलब्ध कराया है। यहां वाइटैलिटी सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मे मेन गेट पर आपको कई खूबसूरत लड़कियां मिल जाएंगी आप इनमें से जिसे चाहें डेट पर ले जा सकते हैं इसके लिए आपको पबस एक छोटी सी शर्त पूरी करनी पड़ेगी।

ये है शर्त-

आपको लड़की के साथ समय बिताने के लिए मात्र 13 रूपये खर्च करने पड़ेगे। आपको कीमत बहुत कम लग रही होगी पर सबसे बड़ी शर्त यह है कि आप लड़की को उसकी इच्छा के बिना कहीं भी छू नहीं सकते हैं।

बहुत खूबसूरत है इन 4 बॉलीवुड अभिनेत्रियों की छोटी बहनें, नंबर 1 है सबकी फेवरेट

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1. कैटरीना कैफ:

35 वर्षीय अभिनेत्री कैटरीना कैफ को आज बॉक्स ऑफिस क्वीन के नाम से भी जाना जाता है. अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर कैटरीना कैफ की छोटी बहन इसाबेल कैफ उन्ही की तरह ही बहुत खूबसूरत है. आपकी जानकारी के लिए बता दे इसाबेल उम्र में कैटरीना से करीब सात साल छोटी है.

2. कृति सेनन:

आपकी जानकारी के लिए बता दे कृति बॉलीवुड के अलावा साउथ की फिल्मों में भी काम कर चुकी है. कृति सेनन बॉलीवुड की सफल अभिनेत्रियों में से एक है. आपको बता दे कृति सेनन की एक छोटी बहन भी है, जिसका नाम नूपुर सेनन है. नूपुर अपनी बड़ी बहन से करीब पांच साल छोटी है.

3. श्रुति हासन:

आपको बता दे श्रुति हासन भारत के सुपरस्टार कमल हासन की बड़ी बेटी है. साल 2009 की बॉलीवुड फिल्म लक से अभिनय करियर का शुरू करने वाली अभिनेत्री श्रुति हासन एक्टर के साथ साथ एक अच्छी गायिका भी है. आपकी जानकारी के लिए बता दे श्रुति हासन की एक छोटी बहन भी है, जिसका नाम अक्षरा हासन है. अक्षरा दिखने में बहुत खूबसूरत है और फिल्मों में अभिनय भी करती है.

4. नेहा शर्मा:

तेरी मेरी कहानी, क्रूक, क्या सुपर कूल हैं हम जैसी हिट फिल्मों में काम कर चुकी नेहा शर्मा बॉलीवुड की खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री रह चुकी है. साउथ की कई हिट फिल्मों में भी नेहा काम कर चुकी है. आपको बता दे नेहा की एक छोटी बहन भी है जो उनकी तरह ही बहुत खूबसूरत है. नेहा शर्मा की बहन का नाम आयशा शर्मा है.

जेनिफर लोपेज का ये कैसा स्टाइल, लोगों का सिर चकराया

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हॉलीवुड एक्ट्रेस और सिंगर जेनिफर लोपेज अपने गानों की चलते हमेशा ही सुर्खियों में बनी रहती हैं। लेकिन इन दिनों इनका गाना नहीं, बल्कि इनका अजीबो-गरीब स्टाइल सोशल मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है। दरअसल, हाल ही में जेनिफर लोपेज ने अपना 49 वां जन्मदिन मनाया। अपने जन्मदिन के दौरान उन्होंने अलग ही लुक में देखा गया। 

जेनिफर लोपेज के स्टाइल को देख उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। जेनिफर ने हाल में डेनिम शूज पहने थे, जिसके हर कोई देखता ही रह गया। जेनिफर के यह अनोखे जूते देख अच्छे-अच्छे लोगों का सिर चकरा जाए। 

स्टोर में 27 लाख के जूते देखकर दंग रह गए ऋषि कपूर, कहा-ये तो पागलपन है

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नई दिल्ली। अगर आप महंगे जूते पहनने के शौकीन है तो जरा इस खबर को ध्यान से पढ़िए। आपने अब हजार, दस हजार या फिर 1 लाख के जूते महंगे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी 27 लाख के जूतों के बारे में सुना है। न्यूयार्क में कैंसर का इलाज करवा रहे बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर भी 27 लाख के जूते देख हैरान हो गए।

बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर ने न्यूयॉर्क के एक स्टोर में जब 27 लाख के जूते देखें तो वो भी हैरान हुए बिना नहीं रह सके। उन जूतों की कीमत जानकर दंग रह गए। स्टोर में करीब 12000 जूतों का कलेक्शन हैं,लेकिन जब उनकी नजर 27 लाख रुपए की कीमत वाले जूते पर गई तो उनकी आंखें फटी की पटी रह गई।

ऋषि कपूर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी साझा की। देखते ही देखते उनका ये ट्वीट वायरल हो गया। ऋषि कपूर के ट्वीट के मुताबिक उस स्टोर में जूतों की शुरुआत 5000 डॉलर यानी की 3.4 लाख रुपए से है और 40 हजार डॉलर यानी करीब 27 लाख रुपए है।

ऋषि कपूर ने लिखा कि न्यूयॉर्क के सबसे बड़े जूतों के स्टोर में 12 हजार से ज्यादा स्टाइल के जूते हैं। जूते की कीमत को लेकर उन्होंने लिखा कि जूता सोने का हो या चांदी का, पहना जाता है पांव में ही है। ऋषि कपूर के मुताबिक 27 लाख के जूते पागलपन है । गौरतलब है कि स्नीकर मिलियन्स डॉलर की ग्लोबल इंडस्ट्री है। इसकी कीमत ही इसकी पहचान है।

AIIMS Recruitment 2019: नर्सिंग ऑफिसर के लिए निकली वैकेंसी, पढ़ें पूरी डिटेल

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AIIMS Recruitment 2019: ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) रायपुर ने भर्तियां निकाली हैं. AIIMS नर्सिंग ऑफिसर (स्टाफ नर्स ग्रेड II)के पदों पर नियुक्‍तियां करेगा. कुल 200 पदों पर भर्तियां की जाएंगी. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट aiims raipur.edu.in पर जाकर पूरा नोटिफिकेशन अच्‍छी तरह पढ़कर अप्‍लाई कर सकते हैं.

इन पदों पर आवेदन प्रकिया शुरू हो चुकी है और 21 जुलाई तक चलेगी. वहीं उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष पदों के अनुसार निर्धारित की गई है. ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों  वैलिड ई-मेल आई.डी और उम्मीदवार के हाल के पासपोर्ट आकार की तस्वीर (स्कैन की हुई) होनी चाहिए. इन डॉक्‍यूमेंट्स के साथ उम्‍मीदवार ऑफशियिल वेबसाइट पर आवेदन कर पाएंगे. वहीं इन पदों पर आवेदन करने के लिए सामान्य, ओबीसी, भूतपूर्व सैनिक उम्मीदवारों के लिए 1000 रुपये फीस का भुगतान करना होगा, जबकि एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए 800 रुपये का शुल्‍क देना होगा. वहीं दिव्‍यांगों को कोई फीस नहीं देनी होगी.

ये होगी सैलरी:
इन पदों पर चयनित होने वाले अभ्‍यर्थियों को 7, 44900-142400 तक सैलरी मिलेगी.

जरूरी तारीख:
उम्‍मीदवार इन पदों पर 21 जुलाई को शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं.

योग्‍यताएं: 

इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से नर्सिंग में बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग/ बी.एससी किया हो. राज्‍य या इंडियान नर्सिंग काउंसिल में नर्स और मिडवाइफ से रजिस्‍टर हो. या इंडियन काउंसिल के संबद्ध बोर्ड या संस्‍थान से डिप्‍लोमा इन जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी किया हो. किसी भी 50 बेड की क्षमता वाले अस्‍पताल में दो साल काम करने का अनुभव हो.

AIIMS Raipur Jobs 2019: उम्र सीमा
पदों पर 18-30 साल के उम्‍मीदवार आवेदन कर सकते हैं.

AIIMS Raipur Jobs 2019: ऐसे आवेदन करें
इसके लिये ऑनलाइन आवेदन AIIMS रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट www.aiimsraipur.edu.in पर जाकर 28 जून से 21 जून 2019 तक किया जा सकता है.

देश में पानी का संकट हुआ विकराल, आग लगने पर कुआं खोदने वाला है मोदी सरकार का हाल

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देश इस समय पानी के विकराल संकट से जूझ रहा है। झीलें और जलाशय सूख रहे हैं, लाखों लोग पानी की कमी से त्रस्त होकर पलायन कर रहे हैं। नदियां सूख रही हैं और कृषि बर्बाद हो रही है- इन सबके बीच प्रधानमंत्री ने 25 जून को संसद में बताया कि वे और एनडीए पानी के संकट को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस वक्तव्य को भी मीडिया ने इस तरह पेश किया मानो कहीं कोई संकट नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इस समस्या के प्रति इतने गंभीर हैं कि अलग से एक जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। उन्होंने लोहिया जी का एक वक्तव्य भी पढ़ा- ‘महिलाएं सबसे अधिक शौचालय की कमी और पानी की कमी से प्रभावित होती हैं’। प्रधानमंत्री ने राजस्थान और गुजरात का उदाहरण भी इस संदर्भ में दिया, लेकिन सबसे अधिक प्रभावित राज्यों- तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र का नाम भी नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी दूर कर सामान्य लोगों की जान बचाई जा सकती है और इसका फायदा सबसे अधिक गरीबों को मिलेगा।

जाहिर है, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जनता और मीडिया की पसंद के हरेक विषय- शौचालय, महिला, गरीब सबको शामिल कर लिया। सदन में मेजें भी थपथपाई गईं, लेकिन इससे देश को क्या मिला? कहा जा रहा है कि इस बार का जल संकट 1972 के संकट से भी भयानक है, जिसमें लगभग 3 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और पिछले पांच साल से तो एनडीए ने ही राज किया है। ऐसे में मोदी जी किस प्राथमिकता की बात कर रहे हैं और अगर प्राथमिकता के बाद भी ऐसा संकट आया है तब तो अच्छा है कि प्राथमिकता हो ही नहीं।

कुछ दिन पहले राज्यसभा में पानी की समस्या को लेकर छोटी चर्चा की गई। मानसून के बादल देर से ही सही, पर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने लगे हैं। जाहिर है कम या ज्यादा बारिश तो होगी ही। इससे पानी की समस्या से कुछ छुटकारा मिलेगा और यह समस्या मीडिया से और संसद से गायब हो जाएगी। फिर अगली गर्मियों में यही सिलसिला चलेगा।

नीति आयोग ने देश में पानी की समस्या पर एक बेहतरीन रिपोर्ट दो साल पहले तैयार की थी, लेकिन संसद में कभी इस पर चर्चा नहीं की गई। एक कहावत है, आग लगने पर कुआं खोदना, जो प्रधानमंत्री, इन नेताओं और मीडिया पर पूरी तरह सही बैठती है। जब लोग पानी की कमी से मरने लगते हैं और जब फसलें झुलस जातीं हैं तभी यह समस्या नजर आती है।

इस समय आधे से ज्यादा भारत सूखे का सामना कर रहा है और इस बीच मौसम विभाग ने कहा है कि 22 जून तक देश में औसत की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। आगे के भी आसार बहुत अच्छे नहीं हैं। इस समय लगभग एक करोड़ किसान पानी की किल्लत से जूझ रहे है। प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो के अनुसार 20 जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश के 91 बड़े जलाशयों में कुल क्षमता की तुलना में महज 17 प्रतिशत पानी ही बचा है। पश्चिमी और दक्षिणी भारत के जलाशयों में तो महज 10 प्रतिशत पानी ही बचा है।

‘वाटर ऐड’ नामक संस्था की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 4 अरब आबादी पानी की कमी से जूझ रही है, इसमें एक बड़ी आबादी भारत में है। साल 2050 तक पानी की कमी से 5 अरब आबादी का सामना होगा। साल 2040 तक दुनिया के 33 देश पानी की भयानक कमी का सामना करेंगे। इन देशों में भारत, चीन, साउथ अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। दुनिया में भूजल में 22 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि हमारे देश में यह कमी 23 प्रतिशत है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके अनुसार 2030 तक पूरी आबादी को साफ पानी उपलब्ध कराना है।

भारत के नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के 54 प्रतिशत हिस्सों में भूजल कम हो रहा है, नदियों का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रदूषित है, तालाब और झीलें दम तोड़ रही हैं। वाटर क्वालिटी इंडेक्स में कुल 122 देशों की सूची में हमारा देश 120वें स्थान पर है। पानी की कमी से हम वर्तमान में ही जूझ रहे हैं और साल 2030 तक पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी। हरेक साल देश में 2 लाख व्यक्तियों की मौत गंदे पानी या फिर बिना पानी के चलते होती है। यही नहीं, पानी की कमी से देश के सकल घरेलू उत्पाद में 6 प्रतिशत की कमी हो जाती है।

इन सबके बाद भी पानी को लेकर सरकार कहीं से गंभीर नहीं दिखती। जल संकट से सबसे अधिक गांव के लोग जूझते हैं और इसके बाद शहर की आबादी। खेती पर भी इसका असर पड़ता है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई उद्योग पानी की कमी से बंद हो गया। ऐसा होता ही नहीं है, क्योंकि पानी की बर्बादी और पानी के प्रदूषण के मुद्दे पर उद्योगों से कोई नहीं पूछता। नदी का जल हो या फिर जमीन के अंदर का जल, उद्योगों के लिए यह हमेशा उपलब्ध रहता है।

पानी हमारी सरकारों के लिए कभी कोई मुद्दा नहीं रहा और न तो निकट भविष्य में इसके मुद्दा बनने की कोई उम्मीद है। समस्या जब गंभीर होती है, तभी जनता कराहती है, मीडिया दिखाती है और नेता भाषण देते हैं और प्राथमिकता बताते हैं।

हर जिले को हाईवे से जोड़ना संभव नहीं : नितिन गडकरी

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देश में बेहद तेजी से सड़कों का जाल बिछाने के लिए चर्चित हुए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में अपने कार्य प्रदर्शन से बिलकुल इतर बोलते हुए कहा कि हर जिले को हाईवे से जोड़ना संभव नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से संबंधित प्रोजेक्ट की लंबाई और लागत दोनों बढ़ जाती है। दरअसल इस बाबत प्रश्नकाल के दौरान राजस्थान से भाजपा सांसद सी.पी.जोशी ने केंद्रीय मंत्री से प्रश्न किया था। जिसमें उन्होंने दिल्ली-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग के रूट में उनके संसदीय क्षेत्र के एक जिले को भी शामिल करने की मांग की थी।

इसके जवाब में गडकरी बोले, पहले ही यह परियोजना देश के पांच राज्यों के जनजातीय और पिछड़े जिलों से होकर गुजर रही है।इसके बनकर तैयार हो जाने के बाद दिल्ली से मुंबई जाने में सड़क मार्ग से 12 घंटे का वक्त लगेगा। लेकिन जैसे ही इसमें और जिलों को भी शामिल किया जाएगा तो इस परियोजना की लंबाई और उसके साथ लागत 6 से 7 करोड़ रुपए बढ़ जाएगी। इसलिए यह संभव नहीं है। उन्होंने सदन से उद्योगपतियों से आवाहान किया कि इस प्रोजेक्ट पर ध्यान दें और इसके आसपास लॉजिस्टिक पार्क और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट बनाएं।

खत्म हुई प्राथमिकता

महाराष्ट्र के वर्धा से भाजपा सांसद रामदास तड़स के प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा, भारतमाला परियोजना के जरिए देश में 24 हजार किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग बनाया जाना है। इसमें प्राथमिकता के हिसाब से सड़क बनाने का निर्णय अब समाप्त कर दिया गया है। यह केवल लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू रहने तक ही प्रभावी था। नई सरकार के गठन के तुरंत बाद ही मैंने अधिकारियों को निर्देश दे दिया है कि अब सभी परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।

इसके अलावा एक अन्य नीति में भी बदलाव किया गया है, जिसमें मैंने निर्देशित किया है कि बायपास बनाते वक्त किसी भी पुरानी सड़क को पहले ठीक किया जाएगा और उसके बाद उसे डिनोटिफाई कर संबंधित राज्य सरकार या उसकी प्रशासनिक बॉडी को सौंपा जाएगा। अधिकारियों के स्तर पर इसमें कुछ कोताही बरती गई है। लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा। सांसद द्वारा प्रश्न में पूछे गए पुलगांव से करंजा तक के सड़क निर्माण कार्य पर उन्होंने कहा कि मैंने अधिकारियों को उक्त प्रोजेक्ट से जुड़ा डीपीआर दो महीने में बनाकर जमीन अधिग्रहण कर काम की शुरूआत करने को कहा है।