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1 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा के लिए अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बल तैनात

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 दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ की तीर्थयात्रा शांतिपूर्ण रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए इस साल जम्मू-कश्मीर को अतिरिक्त केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल उपलब्ध कराया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक एम के सिन्हा ने कहा कि पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा बल उपलब्ध कराए जाने से घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत करने में, पूरे राजमार्ग पर किसी तरह का अवरोध दूर करने वाले दस्ते की तैनाती और तीर्थयात्रियों के शिविरों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि पुलिस, एसडीआरएफ और मजिस्ट्रेट वाले छह विशेष दलों को रामबण जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास उन इलाकों में तैनात किया जाएगा जहां भूस्खलन की आशंका अधिक होती है ताकि यात्रा के दौरान कम से कम अवरोध उत्पन्न हो।

सिन्हा ने कहा, यात्रा पर किसी तरह के खतरे के बारे में कोई विशिष्ट सूचना नहीं मिली है। लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान चूंकि ऐसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। हमें पिछले सालों की तुलना में इस बार अतिरिक्त केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल मिला है और उसी अनुसार पक्के इंतजाम किए गए हैं।

वहीं, अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर जम्मू रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि श्रद्धालु बिना किसी डर के धार्मिक यात्रा पर आएं क्योंकि राज्य में सुरक्षा स्थिति देश के बाकी क्षेत्रों जितनी ही अच्छी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रेलवे, रंजीत सिंह साम्बयाल ने यह भी कहा कि सभी आने और जाने वाली ट्रेनों तथा यात्रियों के सामान की जांच की जाएगी। इसके लिए विस्फोटकों का पता लगाने के काम में विशेष रूप से प्रशिक्षित श्वान दल को लगाया गया है।
कुल 46 दिन तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा दो रास्तों से शुरू हो रही है। इनमें से पहला अनंतनाग जिले में परंपरागत पहलगाम मार्ग और दूसरा गंदेरबल जिले का बालटाल मार्ग है जो पहलगाम मार्ग से छोटा है।

एंटीगुआ रद्द करेगा मेहुल चोकसी की नागरिकता

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एंटीगुआ में छिपा भगोड़े मेहुल चोकसी की नागरिकता को वहां की सरकार खारिज करने वाली है। इसे भारत के लिए बड़ी सफलता की नजर से देखा जा रहा है।
बता दें कि मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक से करीब 14,00 करोड़ी रुपए का घोटाला कर देश से फरार हो गया था। इसके बाद उसे भारत लाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन वो अपने स्वास्थ्य का हवाला देकर एंटीगुआ में रह रहा था। उसने बंबई हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि, उसकी सेहत सही नहीं रह रही है और वो जांच में सहयोग करना चाहता है। लेकिन वो भारत नहीं आ सकता।
इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मेहुल चोकसी के हलफनामे के खिलाफ एक हलफनामा दायर कर कहा था कि, मेहुल चोकसी अपनी सेहत से जुड़ी गलत जानकारी दे कर कोर्ट की कार्रवाई में सहयोग करना नहीं चाह रहा है। बता दें, मेहुल चोकसी की नागरिकता रद्द होने वाली खबर एंटीगुआ के एक स्थानीय अखबार ने बताया है।
एंटिगुआ के प्रधानमंत्री के मुताबिक, मेहुल चोकसी को पहले यहां की नागरिकता मिली हुई थी। लेकिन अब इसे रद्द किया जा रहा है और भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है। हम किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने देश में नहीं रखा जाएगा, जिसपर किसी भी तरह के आरोप लगे हों। प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन के अनुसार, अब एंटिगुआ में मेहुल चोकसी पर किसी तरह का कानूनी रास्ता नहीं बचा है, जिससे वह बच निकले इसलिए उसकी भारत वापसी लगभग तय है।
उन्होंने कहा कि अभी मेहुल चोकसी से जुड़ा पूरा मामला कोर्ट में है, इसलिए हमें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसको लेकर भारत सरकार को पूरी जानकारी दे दी है। हालांकि, मेहुल चोकसी को सभी कानूनी प्रक्रिया पूरा करने का समय दिया जाएगा। जब उसके पास कोई भी कानून ऑप्शन नहीं बचेगा, तो उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।

CM भूपेश बघेल की माताजी की हालत नाजुक, सीएम का दिल्ली दौरा रद्द

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सोमवार को ​गरियाबंद और दिल्ली दौरा टल गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता विंद्धवेश्वरी देवी की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें राजधानी रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल में सोमवार को भर्ती कराया गया है. मुख्यमंत्री अपने सभी कामकाज छोड़ रामकृष्ण अस्पताल पहुंचे. तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण सीएम भूपेश बघेल का दिल्ली दौरा टल गया है. सीएम बघेल के अलावा वरिष्ठ मंत्री और कांग्रेस नेता भी अस्पताल पहुंच गए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक चिकित्सकों ने सीएम की मां को आईसीयू में रखा है और वहीं इलाज चल रहा है.

सीएम भूपेश बघेल की माताजी की तबीयत को लेकर मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया है. वरिष्ठ डॉक्टर अब्बास नकवी और प्रवाश चौधरी ने बुलेटन जारी किया है. बिंदेश्वरी बघेल की तबीयत को बताया बेहद नाजुक बताया है. बुलेटिन में कहा गया है कि कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था. सांस लेने में तकलीफ और किडनी में भी इंफेक्शन है. डॉक्टरों की एक विशेष टीम उपचार कर रही है.

पीसीसी अध्यक्ष को लेकर मंथन
छत्तीसगढ़ सरकार के एक मंत्री और नए पीसीसी चीफ को लेकर दिल्ली में मंथन होना है. बताया जा रहा है कि इस मंथन के लिए भूपेश बघेल को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुलाया था. इसके लिए ही आज सीएम बघले दिल्ली जाने वाले थे. संकेत हैं कि मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार कर दिया जाएगा. माना जा रहा है कि बदले समीकरण के बाद सरगुजा संभाग के अमरजीत सिंह सरकार के 13वें मंत्री हो सकते हैं. जबकि बस्तर के विधायक मनोज मंडावी या मोहन मरकाम में से किसी एक को पीसीसी चीफ की कमान सौंपी जा सकती है. मनोज मंडावी अभी दिल्ली में हैं जबकि मोहन मरकाम के हाल ही में दिल्ली से लौटने की जानकारी है. इनके साथ फूलो देवी नेताम और विधायक शिशुपाल सोरी के नाम सीएम के पसंद के रूप सामने आया है.

मॉब लिंचिंग पीड़ितों को मुआवजा देगी सरकार, सीएम भूपेश और रमन सिंह में जुबानी जंग

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छत्तीसगढ़ सरकार मॉब लिंचिंग यानी भीड़ जनित हिंसा पीड़ितों को मुआवजा देगी. इसके लिए सरकार ने 2011 में बने पीड़ित क्षतिपूर्ति कानून में संशोधन किया है. इस तरह की घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकार तीन लाख रुपये की सहायता देगी. इसको लेकर सरकार ने अधिकारियों को भी आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं.

गृह विभाग के अफसरों के पीड़ितों को अधिकतम तीन लाख से 25 हजार स्र्पये तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है. मानसिक पीड़ा, शैक्षणिक अवसर और जीविकोपार्जन की क्षति पर भी मुआवजा मिलेगा. नियमानुसार घटना के 30 दिन के भीतर पीड़ित को 25 फीसद अंतरिम राहत राशि दी जाएगी.

50 फीसद अधिक मुआवजा
मॉब लिंचिंग पीड़ित के अवयस्क (नाबालिग) होने की स्थिति में 50 फीसद अतिरिक्त राहत राशि दी जाएगी. अफसरों ने बताया कि पीड़ित के 80 फीसद दिव्यांग होने की स्थिति दो लाख स्र्पये का मुआवजा दिया जाएगा। यदि वह अव्यस्क है तो यह राशि तीन लाख स्र्पये हो जाएगी. भीड़ जनित हिंसा पीड़ितों के इलाज की भी व्यवस्था सरकार करेगी. पीड़ित को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. शुल्क लेने की आवश्यकता भी पड़ी तो केवल वास्तविक मूल्य ही लिया जाएगा.

सीएम और पूर्व सीएम में जुबानी जंग
बीते 22 जून को धरने के दौरान पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के लगाए गए नारे “चारों ओर अंधेरा है पहरेदार लुटेरा है” पर सीएम भूपेश बघेल ने पलटवार किया है. रमन के नारे के जवाब में उन्होंने पूर्व सीएम को “चौकीदार ही लुटेरा है” कहा. सीएम बघेल ने कहा कल बिजली को लेकर बहुत हल्ला हुआ, सारे घोटाले रमन सिंह के समय हुए हैं. एक हवा का झोंका आता है और बिजली चली जाती है, व्यवस्था तो रमन सिंह के समय की ही है.

ट्रांसफार्मर घोटाले से लेकर सारे घोटाले मड़वा में जो हुआ सब रमन सिंह के समय के हैं. इन सबके जिम्मेदार रमन सिंह जी है. भाजपा की केंद्र सरकार ने सर्टिफाइड किया है कि यहां 97 % बिजली दी जा रही है, भाजपा के लोग ही अफवाह उड़ाते हैं तो मैं कहता हूं चारों ओर अंधेरा है और चौकीदार ही लुटेरा है. यहां 15 साल तक रमन सिंह जी ने चौकीदारी की है और लूटा भी उन्होंने ही है. इस खबर को दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका सहित अन्य मुख्य अखबरों ने प्रकाशित किया है.

13वें मंत्री पर मंथन
छत्तीसगढ़ सरकार के एक मंत्री और नए पीसीसी चीफ को लेकर दिल्ली में सोमवार को मंथन होगा. इसके लिए सीएम भूपेश बघेल खुद दोपहर दिल्ली जा रहे हैं. उन्हें राहुल गांधी ने बुलवाया है. संकेत हैं कि मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार कर दिया जाएगा. माना जा रहा है कि बदले समीकरण के बाद सरगुजा संभाग के अमरजीत सिंह सरकार के 13वें मंत्री हो सकते हैं जबकि बस्तर के विधायक मनोज मंडावी या मोहन मरकाम में से किसी एक को पीसीसी चीफ की कमान सौंपी जा सकती है. मनोज मंडावी अभी दिल्ली में हैं. जबकि मोहन मरकाम के हाल ही में दिल्ली से लौटने की जानकारी है. इनके साथ फूलो देवी नेताम और विधायक शिशुपाल सोरी के नाम सीएम के पसंद के रूप सामने आया है.

ऑनलाइन शॉपिंग में फ्रॉड से बचाने के हैं ये तरीके, हरदम रखें याद

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 ऑनलाइन शॉपिंग आजकल तेजी से बढ़ रही है। देश में अब ऑनलाइन शॉपिंग 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। लेकिन जिस तेजी से ऑनलाइन शापिंग बढ़ रही है उसी तेजी से ऑनलाइन फ्रॉड भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि जब भी ऑनलाइन शॉपिंग की जाए तो कुछ जरूरी सावधानियां जरूरी वरती जाएं। अगर इन सावधानियों को ध्यान रखा जाए तो ऑनलाइन फ्रॉड से आसानी से बचा जा सकता है।

पहले जानते हैं ऑनलाइन शॉपिंग के फायदे

ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पर एक ही सामान की ढेरों रेज मिल जाती हैं, जिससे अपनी पसंद का सामान लेना आसान हो जाता है। वहीं रे को लेकर ठगने का खतरा नहीं रहता है। हर सामान का रेट साफ साफ लिखा होता है। इसलिए मोलभाव करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। इसके अलावा पेमेंट के भी कई ऑप्शन मिलते हैं। आइये अब जानते हैं कि कौन सी सावधानी आपको नुकसान से बचा सकती है ….कार्ड का डिटेल कभी वेबसाइट पर न सेव करें

कई बार बड़ी ई-कामर्स कंपनियों पर खास सामान लेने पर कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन नहीं मिलता है। ऐसे में आपको ऑनलाइन पेमेंट करना मजबूरी होता है। ऐसी स्थिति में आपको सबसे पहले यह चेक करना चाहिए कि जिस वेबसाइट से सामान ले रहे हैं वह भरोसेमंद है या नहीं। अगर यह वेबसाइट भरोसेमेंद है तो पेमेंट करने में कुछ सावधानी जरूर रखें। इन सावधानी में सबसे जरूरी है कि पेमेंट के वक्त क्रेडिट या डेबिट कार्ड का डिटेल साइट पर सेव न करें। वेबसाइट पेमेंट के वक्त आपको ऐसी जानकारी सेव करने का ऑप्शन देती हैं। ऐसा आप्शन जब भी दिखे सबसे पहले उसमें नहीं का विक्लप चुनें फिर पेमेंट करें। इस सावधानी से आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड की आशंका काफी कम हो जाएगी।

भुगतान का सबसे अच्छा तरीका कैश ऑन डिलीवरी

ऑनलाइन साइट से सामान लेते वक्त भुगतान के कई विकल्प मिलते हैं। इनमें सबसे सेफ तरीका कैश ऑन डिलीवरी का होता है। इस तरीके में आपको वेबसाइट पर किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं देनी होती है। ऐसे में फ्रॉड की आशंका नहीं रहती है। ऐसे में अगर सामान खरीदने के दौरान यह सुविधा मिलती है, तो इसी को चुनना चाहिए।

फर्जी वेबसाइट से बचें

आजकल ठगी करने वाले मिलते जुलते नाम की फर्जी वेबसाइट बना लेते हैं, और ग्राहक इन वेबसाइट पर सामान खरीदते वक्त अपना डिटेल छोड़ते हैं। इसके बाद फर्जी वेबसाइट बनाने वाले लोगों का पैसा उड़ा देते हैं। सोशल मीडिया पर आजकल अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के नाम से फर्जी लिंक शेयर किए जाते हैं। इन पर फर्जी विज्ञापन दिखाए जाते हैं और इन विज्ञापन में सामानों को काफी सस्ता दिखाया जाता है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी फर्जी वेबसाइट से बचें।

ये है फर्जी वेबसाइट पहचानने का तरीका

किसी भी ऑनलाइन सामान बेचने वाली वेबसाइट पर जानें से पहले यह जरूर देखें कि यह सिक्योर है या नहीं। अगर यह अन सिक्योर वेबसाइट तो इस से बचें क्योंकि ऐसी वेबसाइट पर पेमेंट करना खतरे से खाली नहीं है। यदि किसी वेबसाइट के यूरआएल की शुरुआत में हरे रंग के लॉक का निशान या उसमें https नहीं है, तो ऐसी वेबसाइट पर भरोसा न करें। ये वेबसाइट्स फर्जी हो सकती हैं। इन वेबसाइट से क्रेडिट या डेबिट कार्ड या बैंक से संबंधित जानकारी चोरी हो सकती है, जिसका बाद में आपको खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

ऐसे पहचाने सोशल मिडिया पर आने वाले फर्जी लिंक

आमतौर पर लोग सोशल मीडिया पर लिंक शेयर करते हैं। अक्सर यह बिना देखे ही शेयर कर दिए जाते हैं। इन लिंक में कई बार काफी सस्ता सामान बेचने का ऑफर भी होता है। यह ऑफर इतना आकर्षक होता है कि लोग खुद को रोक नहीं पाते हैं और अक्सर फर्जी वेबसाइट के जाल में फंस जाते हैं। इसलिए आगे से जब भी आपको ऐसे लिंक मिलें उनके यूआरएल जरूर चेक करें। अक्सर ऐसा होता है कि जो लिंक आपको सोशल मिडिया पर दिया जाता है, खोलने पर उसकी जगह कोई दूसरा यूआरएल खुलता है। इसलिए लिंक में दिए यूआरएल और खुलने वाले यूआरए को जरूर मिलाएं।

बिकता है नकली सामान, ये है बचने का तरीका

कई बार बड़ी बड़ी वेबसाइट पर भी नकली सामान मिल जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि नामी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर कुछ सेलर्स फर्जी प्रोडक्ट्स को लिस्ट शेयर कर कर देते हैं। ये सेलर्स सामान की कीमत को कम से कम बताते हैं, जिससे उनकी बिक्री बढ़े। ऐसे में जरूरी है कि किसी भी वेबसाइट से सामान लेने के पहले उस पर लगे लेबल को देखें। अगर आप फ्लिपकार्ट से सामान लेते हैं तो उस पर फ्ि फ्लिपकार्ट एश्योर्ड और अमेजन पर अमेजन फुलफिल्ड का लेबल होता है। ऐसे लेबल लगे सामान की ये कंपनियां जिम्मेदारी लेती हैं। लेकिन जिन सामान पर यह लेबल नहीं लगा होता है, कंपनियां उनकी जिम्मेदारी नहीं लेती हैं।

सबसे फुर्तीले हैं टीम इंडिया के खिलाड़ी, अब तक सिर्फ 1 कैच छोड़ा, पाकिस्तान ने टपकाए 14 कैच

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विश्व कप 2019 में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम इंडिया खिताब जीत की प्रबल दावेदार है। टीम इंडिया के क्रिकेटरों ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ ही फिल्डिंग में भी शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने सबसे कम सिर्फ 1 कैच छोड़ा और 15 कैच पकड़े हैं।

आंकड़े बताते हैं कि अब तक भारत ने सिर्फ एक कैच छोड़ा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान का क्षेत्ररक्षण सबसे खराब रहा है। 10 टीमों में से पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा 14 कैच छोड़े हैं।

कैच छोड़ने वाली टीमों में सबसे पहले पाकिस्तान है। 30 मैचों में आंकड़ों को देखा जाए तो पाकिस्तान ने 26 कैच लिए, जबकि 14 कैच छोड़े। इंग्लैंड ने 42 कैच लिए और 10 कैच छोड़े। साउथ अफ्रीका ने 31 कैच लिए और 7 कैच छोड़े। न्यूजीलैंड ने 33 कैच लिए और 6 कैच छोड़े। ऑस्ट्रेलिया ने 35 कैच लिए और 6 कैच छोड़े। श्रीलंका ने 15 कैच लिए और 2 कैच छोड़े। बांग्लादेश ने 24 कैच लिए और 3 कैच छोड़े। अफगानिस्तान ने 18 कैच लिए और 2 कैच छोड़े, वहीं वेस्टइंडीज ने 27 कैच लिए और 3 छोड़े हैं।।

गुजरात राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने भी घोषित किए अपने दो उम्मीदवार

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गुजरात की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने वाली है. बीजेपी के बाद अब कांग्रेस ने भी राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों को उतारने का फैसला किया है. आज कांग्रेस के दो प्रत्याशी गौरव पंड्या और चंद्रिका चुडासमा नामांकन दाखिल करेंगे.

बता दें, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था. इसके बाद उपचुनाव हो रहे हैं. चुनाव आयोग ने अलग-अलग सीट के लिए अलग-अलग वोटिंग करने का आदेश दिया है. अगर वोटिंग अलग-अलग होती है तो दोनों सीट बीजेपी जीतेगी.

चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. आज यानी मंगलवार को इस मामले में सुनवाई हो सकती है. अगर एक ही बैलेट पेपर पर वोटिंग होती है तो एक सीट पर बीजेपी और एक सीट पर कांग्रेस जीत सकती है.

बता दें कि गुजरात की दो राज्यसभा सीटों पर 5 जुलाई को होने वाले चुनाव को लेकर विवाद चल रहा है. राज्य में कांग्रेस के नेता विपक्ष परेशभाई धनानी ने दोनों सीटों पर एक साथ चुनाव कराए जाने पर आपत्ति जताई और चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. अब अदालत ने उनकी याचिका मंजूर कर ली है, इस सुनवाई होनी है.

दरअसल, गुजरात कांग्रेस के नेता परेशभाई धनानी ने चुनाव आयोग की अधिसूचना को चुनौती दी है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं, ऐसे में उनकी सीट खाली हुई है जिसपर चुनाव होना है.

याचिका में कहा गया है कि एक ही दिन दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना असंवैधानिक और संविधान की भावना के खिलाफ है. चुनाव आयोग की अधिसूचना के मुताबिक, अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई तो वहीं स्मृति को 24 मई को मिला था.

इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया, इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन मतदान एक ही दिन होना है. कांग्रेस का तर्क है कि ऐसा होने से अब दोनों सीटों पर बीजेपी को जीत मिल जाएगी क्योंकि, वहां प्रथम वरीयता वोट नए सिरे से तय होंगे. लेकिन एक साथ चुनाव होते तो कांग्रेस को एक सीट मिल जाती.

गौरतलब है कि संख्या बल के हिसाब से गुजरात में राज्यसभा का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 61 वोट चाहिए. एक ही बैलेट पर चुनाव होने से उम्मीदवार एक ही वोट डाल पाएगा. इस स्थिति में कांग्रेस एक सीट आसानी से निकाल लेती क्योंकि उसके पास 71 विधायक हैं.

नसबंदी के 5 साल बाद महिला हुई प्रेग्नेंट, अफसर बोले- 30 हज़ार लो और अबॉर्शन करा लो

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नसबंदी के पांच साल बाद एक महिला गर्भवती हो गई। इस पर स्वस्थ्य अधिकारी का शर्मनाक बयान सामने आया। मामला पंजाब के हलवारा का है। गांव अकालगढ़ निवासी महिला सिविल अस्पताल सुधार में 5 साल पहले नसबंदी करवाई। लेकिन इसके बाद दोबारा गर्भवती हो गई है।

पीड़िता का आरोप है कि वह अपनी शिकायत लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों के पास पहुंची तो कार्रवाई करने की जगह अफसर 30 हजार रुपये हर्जाना लेकर गर्भपात करवाने की सलाह दे रहे हैं। पीड़िता ने सिविल सर्जन दफ्तर को शिकायत भेज उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

सिविल सर्जन को भेजी शिकायत में पीड़िता नीशा ने बताया कि 12 सितंबर 2014 को सिविल अस्पताल सुधार में उसका परिवार नियोजन के तहत नसबंदी का ऑपरेशन हुआ था। वह गरीब परिवार से हैं। उसके पहले से तीन बच्चे है। इसलिए उसने नसबंदी करवाने का फैसला लिया था। आशा कार्यकर्ता कर्मजीत कौर उसे अस्पताल लेकर आईं थीं।

करगिल युद्ध के 20 साल: इज़राइल ने ऐसे की थी भारतीय सेना की मदद

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भारतीय वायुसेना (IAF) करगिल युद्ध में विजय के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रही है. यही वह मौका था, जब भारत ने ऑपरेशन सफेद सागर के जरिए पाकिस्तान को उसके दुस्साहस का सबसे बड़ा सबक सिखाया था. करगिल के लिए सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाया था. इस युद्ध में इज़राइल ने भारत की खास मदद की थी. जुलाई 1999 में भारतीय सेना ने जंग में दुश्मन का सामना करने के लिए मिराज विमानों में इजराइली किट का इस्तेमाल किया था, जिसे इजरायल लिटनिंग लेजर डिज़ाइनर पॉड कहते हैं. ये एक अदृश्य बीम के साथ लक्ष्य को भेदता था. इस बीम के रास्ते को अनिवार्य तौर पर लेजर-निर्देशित बम द्वारा फॉलो किया जाता था. बम लेजर को ट्रैक करते हैं और प्रभाव के सटीक पॉइंट पर उड़ान भरते हैं. 

आइए जानते हैं, करगिल युद्ध में इज़राइल ने कैसे की थी भारत की मदद:-

कब शुरू हुई थी जंग?

24 जून 1999 को विंग कमांडर रघुनाथ नाम्बियार के नेतृत्व में मिराज 2000 विमानों ने टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना की तरफ लिटनिंग पॉड के जरिए बम गिराए. भारतीय वायुसेना के इस हमले के कुछ मिनट बाद लक्ष्य को ध्वस्त कर दिया गया. इस जंग में भारतीय वायुसेना ने पहली बार लेजर निर्देशित मूनिशन का इस्तेमाल किया था, जिसे इज़राइल ने मुहैया कराया था.

यह पहला मौका था, भारतीय वायुसेना ने लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया. इसी दिन एक और मिशन में एयरफोर्स ने अनगाइडेड बम भी गिराए. इस हमले ने पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचाया. तोलोलिंग पहाड़ी को मुक्त कराने के अलावा टाइगर हिल पर एयरफोर्स का अभियान ऐसा था, जिसे भारतीय खेमे को सबसे ज्यादा बढ़त थी.

जंग के दो साल पहले इज़राइल से हुई थी डील
उस दिन को याद करते हुए भारतीय वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान के एयर मार्शल नाम्बियार बताते हैं, ‘लिटेनिंग पॉड और 1,000 पाउंड लेजर निर्देशित बमों के यूनीफिकेशन (एकीकरण) को 12 दिनों में पूरा किया गया था.’ नाम्बियार आगे बताते हैं, ‘इज़राइल ने करगिल वॉर शुरू होने के दो साल पहले 1997 में भारत के साथ इजराइल पॉड के लिए एक डील की थी. इसके तहत जगुआर विमा के लिए 15 और मिराज 2000 के लिए 5 पॉड खरीदे जाने थे. इनका इस्तेमाल अमेरिका की ओर से सप्लाई की गई पेववे लेजर गाइडेड बम किट के साथ किया जाना था.

हालांकि, 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिए. ऐसे में भारत कभी भी उन फ्यूज को पा नहीं सका, जिन्हें पेववे बमों के काम करने के लिए हासिल करना बहुत जरूरी थी.

सिर्फ 90 सेकेंड्स में IAF ने पूरा किया था बालाकोट मिशन, 25 फरवरी को हथियार से लैस किए गए थे मिराज

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26 फरवरी को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में जो एयर स्‍ट्राइक की थी, उसमें आतंकियों के कैंप्‍स को तबाह करने में बस 90 सेकेंड्स का समय लगा था। यानी सिर्फ डेढ़ मिनट में ही जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकियों का काम तमाम हो गया था। इस ऑपरेशन में शामिल आईएएफ के दो पायलट्स के हवाले से अंग्रेजी डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने यह जानकारी दी है। आपको बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के जवाब में आईएएफ ने एयरस्‍ट्राइक की थी। इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

परिवारवालों को भी नहीं थी कुछ खबर

आईएएफ के 12 मिराज2000 फाइटर जेट्स 48 वर्षों में पहली बार पाकिस्‍तान के एयरस्‍पेस में दाखिल हुए थे। एक पायलट ने बताया, ‘सिर्फ 90 सेकेंड्स लगे, हमने बम ड्रॉप किए और वापस आ गए।’ पायलट ने आगे कहा, ‘किसी को भी इस स्‍ट्राइक यहां तक कि हमारे परिवारवालों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। अगले दिन जब सुबह खबरें आनी शुरू हुईं तो मेरी पत्‍नी ने मुझसे पूछा कि क्‍या मैं भी इस एयर स्‍ट्राइक का हिस्‍सा था। मैं चुप रहा और सोने चला गया।’ किसी को भी बालाकोट ऑपरेशन के बारे में पता न चले इसके लिए सीनियर आईएएफ ऑफिशियल्‍स ने भी अपना डेली रूटीन बिल्‍कुल भी नहीं बदला था।

लगातार हो रही थी LoC पर पैट्रोलिंग

एक दूसरे पायलट ने इस ऑपरेशन के बारे में और ज्‍यादा जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि आईएएफ ने एलओसी पर भारी संख्‍या में कॉम्‍बेट एयर पैट्रोल्‍स यानी कैप को अंजाम दिया। इस गश्‍त की वजह से पाकिस्‍तान के किसी भी हवाई हमले को नाकाम करने में भारत सफल रहा। इस पायलट की मानें तो बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बारे में हमले से दो दिन पहले संकेत किया गया था। पायलट्स को मालूम था कि कुछ होने वाला है लेकिन किसी को भी यह नहीं पता था कि आखिर क्‍या होगा। पायलट्स की सॉर्टीज कई गुना बढ़ गई थीं और कई बार तो एक-एक पायलट को कई-कई बार फ्लाइंग करनी पड़ रही थी। सॉर्टीज और कैप्‍स बिना हथियार के हो रही थीं।

शाम चार बजे जेट्स में लैस किए गए स्‍पाइस बम

25 फरवरी को शाम चार बजे मिराज 2000 को स्‍पाइस बमों से लैस किया गया। रात दो बजे पायलट्स ने हमले के लिए टेक ऑफ किया था। पायलट्स की मानें तो उन्‍होंने जानबूझकर लंबा रास्‍ता हमले के लिए चुना और देश के पूर्वी हिस्‍से से होते हुए कश्‍मीर पहुंचे। जैसे ही कश्‍मीर में मिराज2000 जेट्स दाखिल हुए पायलट्स रेडियो साइलेंस में चले गए यानी कि किसी भी तरह की फ्रिक्‍वेंसी या कैसा भी शोर नहीं था। पाकिस्‍तान एयरस्‍पेस में दाखिल होते हुए उनके आसपास दुश्‍मन का एक भी फाइटर जेट नहीं था। आईएएफ के इन जाबांज पायलट्स की मानें तो मिशन सफल था और हथियारों का निशाना बिल्‍कुल नहीं चूका था।

ऑपरेशन को दिया गया खास कोडनेम

इस पूरे ऑपरेशन को आईएएफ ने ‘ऑपरेशन बंदर’ नाम दिया था। मिराज 2000, लेसर गाइडेड बम, मैट्रा मैजिक क्‍लोज कॉम्‍बेट मिसाइल, लाइटनिंग पॉड, नेत्रा एयरबॉर्न वॉर्निंग जेट्स, आईएल 78 एम, हेरॉन ड्रोन की मदद से बालाकोट में हमले किए गए थे। इस ऑपरेशन में इंडियन एयरफोर्स ने सुखोई-30एमकेआई और मिग-21 को भी शामिल किया था। सुखोई और मिग-21 भी ऑपरेशन में थे लेकिन उन्‍होंने एलओसी पार नहीं की थी। इन जेट्स को प्‍लान बी के तहत रेडी रखा गया था।