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SAIL Recruitment 2026: प्रोफेशनल पदों पर भर्ती, उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये सैलरी….

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कंपनी ने यंग प्रोफेशनल के पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें चयन होने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये तक की सैलरी दी जाएगी.

अगर आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है और किसी बड़ी सरकारी कंपनी में शानदार सैलरी वाली नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी अपडेट सामने आई है. देश की मशहूर महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited यानी SAIL ने युवाओं के लिए बंपर भर्ती निकाली है. कंपनी ने यंग प्रोफेशनल के पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें चयन होने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये तक की सैलरी दी जाएगी.

यह भर्ती खास तौर पर पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के बड़े स्टील प्लांट्स के लिए की जा रही है. सरकारी नौकरी के साथ शानदार सैलरी, बड़े संस्थान में काम करने का मौका और बेहतर करियर ग्रोथ की वजह से यह भर्ती इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए काफी खास मानी जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस भर्ती में कौन आवेदन कर सकता है, कितनी वैकेंसी हैं, चयन कैसे होगा और आवेदन करने का तरीका क्या है.

किन पदों पर हो रही भर्ती?

SAIL ने यह भर्ती यंग प्रोफेशनल के पदों के लिए निकाली है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 48 पद भरे जाएंगे.ये पद पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के तीन बड़े प्लांट्स के लिए हैं.  जिसमें दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP), आईआईएससीओ स्टील प्लांट (IISCO) और अलॉय स्टील प्लांट (ASP) शामिल है.

कितनी मिलेगी सैलरी?

इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार सैलरी है. चयनित उम्मीदवारों को हर महीने अधिकतम 1.40 लाख रुपये तक का वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं.

कौन कर सकता है आवेदन?

उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से फुल टाइम B.E. या B.Tech की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही ग्रेजुएशन में कम से कम 65 प्रतिशत अंक होना जरूरी है. यह भर्ती मुख्य रूप से इन इंजीनियरिंग ब्रांच के उम्मीदवारों के लिए है. जिसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्र आवेदन कर सकते हैं. वहीं जिन उम्मीदवारों के पास B.E./B.Tech के अलावा M.Tech, M.E. या MBA जैसी अतिरिक्त डिग्री होगी, उन्हें चयन प्रक्रिया में फायदा मिल सकता है.

चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

SAIL इस भर्ती के लिए कई चरणों में उम्मीदवारों का चयन करेगी. जिसमें सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन फॉर्म की जांच की जाएगी. इसके बाद जरूरत पड़ने पर कंपनी CBT यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा या एप्टीट्यूड टेस्ट आयोजित कर सकती है.फिर शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इसमें उम्मीदवारों के तकनीकी ज्ञान, व्यवहार और निर्णय क्षमता को परखा जाएगा. लास्ट  चयन से पहले उम्मीदवारों की मेडिकल जांच होगी.

आवेदन शुल्क कितना है?

इस भर्ती के लिए सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. फीस का भुगतान ऑनलाइन मोड में करना होगा.बिना शुल्क जमा किए गए आवेदन फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे.

आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 जून 2026 तय की गई है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आखिरी समय का इंतजार न करें, क्योंकि उस दौरान वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी दिक्कत आ सकती है.

ऐसे करें आवेदन

  1. सबसे पहले SAIL की आधिकारिक वेबसाइट https://www.sail.co.in/en पर जाएं.
  2. वेबसाइट के Careers सेक्शन पर क्लिक करें.
  3. अगर आप नए यूजर हैं, तो पहले One Time Registration करें.
  4. इसके बाद लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें.
  5. अपनी फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
  6. ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क जमा करें.
  7. फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी ध्यान से जांच लें.
  8. फाइनल सबमिट के बाद आवेदन फॉर्म की प्रिंट कॉपी सेव करके रख लें.

RCB vs GT Qualifier 1 Rain Chances:  बारिश से रद्द हो गया क्वालीफायर 1, तो क्या होगा.किसको मिलेगा फाइनल का टिकट’

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आज IPL 2026 का पहला क्वालीफायर मैच खेला जाएगा. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और गुजरात टाइटंस की भिड़ंत धर्मशाला में होगी. यह मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से शुरू होगा. बेंगलुरू और गुजरात ने पॉइंट्स टेबल के टॉप-2 में फिनिश किया था बेशक यह एक हाई-वोल्टेज मुकाबला साबित होगा. मगर मैच में बारिश आ जाती है, तो क्या होगा? मैच बारिश या किसी अन्य कारण से शुरू ही नहीं हो पाया तो विजेता का फैसला कैसे होगा? यहां जान लीजिए इसके बारे में सबकुछ.

सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि इंडियन प्रीमियर लीग में केवल फाइनल मैच के लिए रिजर्व डे का नियम है. बाकी प्लेऑफ मैच यानी क्वालीफायर 1, क्वालीफायर 2 और एलिमिनेटर मैच के लिए रिजर्व डे नहीं होता है.

बारिश से रद्द हो गया क्वालीफायर 1, तो क्या होगा

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और गुजरात टाइटंस के बीच पहला क्वालीफायर मैच धर्मशाला में खेला जाएगा. अगर मैच में बारिश आ जाती है तो बताते चलें कि क्वालीफायर 1 के लिए कोई रिजर्व डे नहीं होता है. मैच ऑफिशियल्स आज ही मैच को पूरा करवाने का पूरा प्रयास करेंगे.

बारिश आने पर 120 मिनट का अतिरिक्त समय भी जोड़ा जाएगा. अगर 120 मिनट का अतिरिक्त समय जोड़े जाने तक भी पांच-पांच ओवर का मैच शुरू नहीं हो पाता है तो मुकाबले को रद्द घोषित कर दिया जाएगा. चूंकि क्वालीफायर 1 जीतने वाली टीम फाइनल में जाती है, लेकिन बारिश के कारण मैच शुरू ही नहीं हो पाया तो फाइनल में कौन सी टीम जाएगी?

किसको मिलेगा फाइनल का टिकट

क्वालीफायर 1 मैच रद्द होने पर विजेता का फैसला पॉइंट्स टेबल में बेहतर पोजीशन के आधार पर किया जाएगा. इसका मतलब पॉइंट्स टेबल में जो टीम ऊपर थी, उसे फाइनल का टिकट मिलेगा. याद दिला दें कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू अंक तालिका में सबसे ऊपर थी, इसलिए आज क्वालीफायर 1 मैच बारिश के कारण शुरू नहीं हो पाता है तो RCB फाइनल में पहुंच जाएगी.

SSC GD परीक्षा: एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंचे हजारों युवाओं के लिए आयोग ने कुछ शिफ्टों की परीक्षा रद्द…

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एसएससी जीडी कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर क्षमता से अधिक अभ्यर्थियों के पहुंचने और अव्यवस्था के कारण आयोग ने कुछ शिफ्टों की परीक्षा रद्द कर दी है.

एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंचे हजारों युवाओं के लिए पिछले दो दिन किसी झटके से कम नहीं रहे. कई परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थी सुबह से उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए. कहीं सीटों से ज्यादा उम्मीदवार मौजूद थे, तो कहीं व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी. बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और हंगामे के बीच आखिरकार कर्मचारी चयन आयोग (SSC) को बड़ा फैसला लेना पड़ा और कुछ केंद्रों पर आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया गया.

26 मई 2026 को जारी आधिकारिक नोटिस में आयोग ने साफ किया कि जिन केंद्रों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी, वहां परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराना संभव नहीं था. ऐसे में प्रभावित शिफ्टों की परीक्षा रद्द कर दी गई है और अब उसे दोबारा आयोजित किया जाएगा.

परीक्षा केंद्रों पर क्या हुआ?

जानकारी के मुताबिक कई शहरों में परीक्षा केंद्रों पर क्षमता से कहीं ज्यादा अभ्यर्थियों को बुला लिया गया था. जिस केंद्र पर 250 उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था थी, वहां लगभग दोगुनी संख्या में छात्र पहुंच गए. ऐसे में न सिर्फ बैठने की समस्या पैदा हुई बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो गई.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों से लगातार शिकायतें सामने आईं. कई जगह उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया. कुछ स्थानों पर गुस्साए अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि कहीं सड़क जाम और हंगामे की स्थिति भी बन गई. बिहार के मुजफ्फरपुर में भी परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद छात्रों का गुस्सा देखने को मिला.

परीक्षा देने आए कई उम्मीदवारों का कहना था कि उन्होंने महीनों तैयारी की थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा. यही कारण रहा कि सोशल मीडिया पर भी पूरे दिन एसएससी जीडी परीक्षा चर्चा का विषय बनी रही.

आयोग ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला?

एसएससी का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है. जब किसी केंद्र पर क्षमता से अधिक उम्मीदवार पहुंच जाएं और व्यवस्था प्रभावित हो जाए, तो परीक्षा को सही तरीके से आयोजित करना मुश्किल हो जाता है. आयोग के सामने लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि कुछ केंद्रों पर उम्मीदवारों की संख्या निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा थी. ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद से बचने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया.

परेशान हों, दोबारा मिलेगी परीक्षा देने की मौका

जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 25 और 26 मई को प्रभावित हुई है, उनके लिए राहत की खबर है. एसएससी ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा.कर्मचारी चयन आयोग के सेंट्रल रीजन के अनुसार, प्रभावित उम्मीदवारों की परीक्षा अब 27 मई 2026 से दोबारा आयोजित की जाएगी. यानी किसी भी उम्मीदवार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

नए एडमिट कार्ड होंगे जारी

परीक्षा दोबारा होने के कारण उम्मीदवारों को पुराने एडमिट कार्ड के बजाय नया हॉल टिकट डाउनलोड करना होगा.  उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें.

परीक्षा तारीख में भी हुआ बदलाव

एसएससी ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. पहले कुछ उम्मीदवारों की परीक्षा 28 मई को निर्धारित थी, लेकिन अब उसे 27 मई को आयोजित किया जाएगा. आयोग के अनुसार यह बदलाव सरकारी अवकाश में हुए संशोधन के कारण किया गया है. ऐसे में सभी उम्मीदवारों को अपने नए एडमिट कार्ड में दी गई तारीख और समय का विशेष ध्यान रखना होगा.

गर्मी में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना सेहत के लिए सही है या नहीं? यहां जानें डॉक्टर्स की सलाह…

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गर्मी में बाहर से घर लौटते ही फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी पीना ज्यादातर लोगों की आदत होती है. तेज धूप और पसीने के बाद ठंडा पानी तुरंत राहत जरूर देता है, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता. खासकर जब शरीर तेज गर्मी से पहले ही गर्म हो चुका हो, तब अचानक बर्फ जैसा पानी पीना कई लोगों में असहजता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है.

क्यों अचानक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, जब हम धूप से आते हैं तो शरीर खुद को ठंडा करने की प्रक्रिया में लगा होता है. इस दौरान ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है और शरीर का तापमान सामान्य करने की कोशिश चल रही होती है. ऐसे समय में अचानक बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को टेम्परेचर शॉक लग सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे ब्लड वेसल्स अचानक सिकुड़ सकते हैं, जिससे सिरदर्द, चक्कर या असहज महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

क्या हो सकती है दिक्कत?

डॉक्टर्स बताते हैं कि ठंडा पानी मुंह और गले को तुरंत ठंडक पहुंचाता है, इसलिए लोग इसे राहत मानते हैं. लेकिन अंदरूनी तौर पर शरीर को धीरे-धीरे ठंडा होने की जरूरत होती है. बहुत ज्यादा ठंडा पानी डाइजेशन सिस्टम की गति को कुछ समय के लिए धीमा कर सकता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स और पारंपरिक चिकित्सा एक्सपर्ट का कहना है कि इससे डाइजेस्टिव एंजाइम्स की गतिविधि कम हो सकती है और पेट को भोजन पचाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है. कुछ लोगों में पेट फूलना, अपच और पेट दर्द जैसी शिकायतें भी देखी जाती हैं.

पसीना आने के तुरंत बाद चिल्ड पानी पीने से क्या होती है दिक्कत?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पसीना आने के तुरंत बाद बर्फ जैसा पानी पीने से गले में जलन हो सकती है. इससे गले में खराश, बलगम बढ़ना, खांसी और गले में तकलीफ जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. जिन लोगों को ठंडी चीजों से जल्दी परेशानी होती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है.

आपको क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ लोगों में बहुत ठंडा पानी ब्रेन फ्रीज यानी अचानक सिरदर्द भी ट्रिगर कर सकता है. ऐसा तब होता है जब ठंडा पानी मुंह और गले की संवेदनशील नसों पर अचानक असर डालता है. वहीं जिन लोगों को पहले से हार्ट की समस्या है, उनके लिए भी बर्फ जैसा ठंडा पानी सही नहीं माना जाता. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अचानक तापमान बदलने से वेगस नर्व प्रभावित हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट या ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है. डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि धूप से आने के बाद तुरंत बहुत ठंडा पानी पीने के बजाय कुछ मिनट आराम करें और फिर सामान्य तापमान या हल्का ठंडा पानी धीरे-धीरे पिएं. मिट्टी के घड़े का पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस जैसे विकल्प शरीर को बेहतर तरीके से हाइड्रेट करने में मदद करते हैं.

Bihar Vidhan Parishad Chunav: विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव का ऐलान…

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11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे जबकि 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा. 20 जून 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त कर ली जाएगी.

बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खाली हुई एक सीट पर उपचुनाव होगा. इसके लिए आज (मंगलवार) चुनाव आयोग की ओर से तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. अधिसूचना एक जून 2026 को जारी होगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है. 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी.

चुनाव आयोग के अनुसार, 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे जबकि 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा. मतगणना 18 जून को शाम 5 बजे से शुरू होगी. 20 जून 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया समाप्त कर ली जाएगी.

जिन 10 सीट पर चुनाव उनमें से पांच जेडीयू के पास

बता दें कि 28 जून को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं. जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें फिलहाल पांच सीटें जेडीयू के पास हैं. बीजेपी के पास 2 और आरजेडी के पास से दो सीटें हैं जबकि एक सीट कांग्रेस के पास है.

कौनकौन सी खाली हो रहीं 9 सीटें?

28 जून को बिहार में 9 नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिसके चलते ये 9 सीटें खाली हो रही हैं. इनमें गुलाम गौस, कुमुद वर्मा, मो. फारुख, भगवान सिंह कुशवाहा, भीष्म साहनी, संजय मयूख, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह का कार्याकल पूरा हो रहा है. दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद हो गए हैं तो उनकी सीट पर उपचुनाव होगा.

एनडीए को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत मिली थी. विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर देखा जाए तो विधान परिषद की जिन सीटों पर चुनाव होना है उसके नतीजे काफी हद तक तय माने जा रहे हैं. अब देखने वाली बात होगी कि उम्मीदवारों को लेकर क्या तस्वीर बनती है.

पेट्रोल में 30 फीसदी तक मिलाया जाएगा एथेनॉल, जानिए क्या है सरकार का पूरा प्लान…

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इस पूरे बदलाव के लिए भारत की संस्था BIS ने इन नए फ्यूल मिक्स के लिए तकनीकी नियम और मानक तय कर दिए हैं. आइए इससे जुड़ी सारी डिटेल्स जान लेते हैं.

क्या है सरकार का पूरा प्लान?

भारत सरकार लगातार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. ऐसा इसलिए ताकि फ्यूल की लागत कम हो जाए, विदेशी तेल पर निर्भरता घटे और पर्यावरण को भी फायदा मिले. अभी तक भारत में ज्यादातर जगहों पर E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अब सरकार ने इससे आगे बढ़ने की योजना तैयार कर ली है.

सरकार ने अब पेट्रोल के लिए नए स्टैंडर्ड तय कर दिए हैं जिनमें E22, E25, E27 और E30 जैसे फ्यूल शामिल हैं. इन नामों का मतलब बहुत सरल है कि पेट्रोल में कितने प्रतिशत एथेनॉल मिलाया गया है. उदाहरण के लिए E22 में 22% एथेनॉल और 78% पेट्रोल होगा, जबकि E30 में 30% एथेनॉल और 70% पेट्रोल होगा. यानी धीरे-धीरे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जाएगी.

भारत की इस संस्था ने तय किए मानक

इस पूरे बदलाव के लिए भारत की संस्था BIS (Bureau of Indian Standards) ने इन नए फ्यूल मिक्स के लिए तकनीकी नियम और मानक तय कर दिए हैं. इसका फायदा यह होगा कि आने वाले समय में तेल कंपनियों और कार कंपनियों को पहले से पता रहेगा कि किस तरह के ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने वाला है और वे उसके हिसाब से तैयारी कर सकेंगी.

आपके लिए यह समझना जरूरी है कि अभी तुरंत E22 या E30 पेट्रोल बाजार में नहीं आ रहा है. फिलहाल देश में मुख्यतौर पर E20 पेट्रोल ही मौजूद है और नए लेवल केवल भविष्य की योजना यानी एक रोडमैप की तरह हैं. सरकार ने अभी सिर्फ दिशा तय की है कि आने वाले सालों में एथेनॉल की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी.

क्या हैं बड़े कारण?

इस कदम के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे पहला कारण यह है कि भारत बहुत ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है, जिससे देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है. एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से यह निर्भरता कम हो सकती है. दूसरा बड़ा कारण किसानों की आमदनी बढ़ाना है क्योंकि एथेनॉल गन्ना और मक्का जैसी फसलों से बनाया जाता है, जिससे कृषि क्षेत्र को सीधा फायदा मिलता है. इसके अलावा इसे पेट्रोल की तुलना में थोड़ा ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है.

इस बदलाव का असर गाड़ियों पर भी पड़ सकता है. पुरानी गाड़ियां सीमित एथेनॉल मिश्रण के हिसाब से बनी होती हैं, इसलिए ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल से उनकी परफॉर्मेंस या माइलेज पर असर पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले समय में कार कंपनियों को ऐसे इंजन बनाने होंगे जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें.

इन राज्यों में 100 रुपए से कम में बिक रहा पेट्रोल. जानिए टैक्स….

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Low Petrol Price: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच देश में पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और कई राज्यों में दाम 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुके है. जानिए कहा मिल रहा है सबसे सस्ता तेल.

अमेरिका ईरान के बीच जंग का असर पूरी दुनिया में देखा जा सकता है. इस जंग का सबसे ज्यादा असर सीएनजी, एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है. देश में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी गाड़ी की रफ्तार से भी तेज आगे बढ़ रही है. हाल यह है कि बीते 8 दिनों में तीसरी बार पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.

गौरतलब है कि, 15 मई को पेट्रोल में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर, 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर और 23 मई को पेट्रोल में 87 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी. वर्तमान में ज्यादातर राज्यों में पेट्रोल 100 रूपये प्रति लीटर से ज्यादा पहुंच चुका है. बावजूद अरुणाचल प्रदेश और अंडमान एंड निकोबार में अभी भी पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से कम है.

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा पेट्रोल की कीमत आंध्र प्रदेश में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल 117.88 प्रति लीटर तक पहुंच गया है. बावजूद इसके उलट सबसे कम कीमत अरुणाचल प्रदेश में 97.70 प्रति लीटर और अंडमान एंड निकोबार में 88.66 प्रति लीटर दर्ज की गई है. कम टैक्स रेट की वजह से यहां लोगों को बाकी राज्यों के मुकाबले पेट्रोल दरों पर छूट है. जो देश में ईंधन कीमतों की असमानता पर रोशनी डालता है.

कीमतों में क्यों होता है फर्क ?

दरअसल, पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह राज्यों की तरफ से लगाया जाने वाला टैक्स है. जिससे लॉजिस्टिक और डीलर कमीशन पर असर पड़ता है. डबल तरीके से टैक्स वसूले जाने के बाद पेट्रोल की कीमतों बढ़ोतरी होगी ही. ऐसे में यह सिलसिला आगे भी बना रहा तो देश में पेट्रोल और महंगा हो जाएगा.

राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा दाम 

एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जहां सबसे ज्यादा पेट्रोल दर बढ़ोतरी हुई है, वह राज्य आंध्र प्रदेश है. इसके साथ तेलंगाना, केरल, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पेट्रोल के दाम 100 रूपये प्रति लीटर के भी पार हो चुकें है. साथ ही देश में ईंधन कीमतों की गैर बराबरी को दिखाता है.

एक्सपर्ट के अनुसार, फरवरी के आखिर से अब तक दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई पर बैन होने की आशंका है.

Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक में सिद्दारमैया की जगह डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की चर्चा…

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: कर्नाटक में सिद्दारमैया की जगह डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की चर्चा जोरों पर है. इसको लेकर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक चल रही है. लेकिन, इस पूरे संकट में रणदीप सिंह सुरजेवाला की अग्नि परीक्षा दाव पर है. वह सिद्दारमैया और शिवकुमार दोनों गुटों के बीच संतुलन की बड़ी जिम्मेदारी उठा रहे हैं.

कर्नाटक कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से ज्यादा अंदरूनी सियासत को लेकर चर्चा में है. राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है. चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान अब सिद्दारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने की तैयारी कर रहा है. इसी मुद्दे पर दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठक चल रही है, जिसमें दोनों दिग्गज नेता मौजूद हैं. लेकिन इस पूरी कवायद के केंद्र में एक और चेहरा है. वो हैं रणदीप सिंह सुरजेवावला.

कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी के तौर पर सुरजेवाला पिछले कई महीनों से सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अब जबकि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सत्ता परिवर्तन हो भी जाए तो पार्टी टूटे नहीं और सरकार स्थिर बनी रहे.

दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ही मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान सामने आ गई थी. सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. आखिरकार हाईकमान ने समझौते का रास्ता निकाला और सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री, जबकि डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया गया. उसी समय यह चर्चा भी चली थी कि ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लागू हो सकता है, हालांकि पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की.

अब सरकार के कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा हो गया है तो एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. डीके शिवकुमार समर्थक खुलकर यह दावा कर रहे हैं कि अब वादा निभाने का समय आ गया है. दूसरी तरफ सिद्दारमैया खेमे का मानना है कि उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक पकड़ अभी भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा आधार है. ऐसे में उन्हें हटाना राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता है.

यहीं से रणदीप सुरजेवाला की असली परीक्षा शुरू होती है. अगर वह दोनों गुटों को संतुष्ट रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन कराने में सफल हो जाते हैं, तो यह उनकी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी. इससे यह संदेश भी जाएगा कि कांग्रेस हाईकमान अब भी राज्यों में संगठन और सत्ता दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम है.

लेकिन अगर मामला बिगड़ता है, तो इसके दूरगामी असर हो सकते हैं. सिद्दारमैया केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि कर्नाटक में कांग्रेस का सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले नेता माने जाते हैं. विशेष रूप से ओबीसी, अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है. अगर उन्हें अपमानजनक तरीके से हटाया गया या उनकी सहमति के बिना फैसला लिया गया, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है.

दूसरी तरफ डीके शिवकुमार भी कांग्रेस के लिए बेहद अहम हैं. संगठन को मजबूत करने, संसाधन जुटाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही है. कांग्रेस की 2023 की जीत में उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में अगर उन्हें फिर इंतजार करने को कहा गया, तो उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है. कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह नेतृत्व परिवर्तन राजस्थान जैसी स्थिति न पैदा कर दे, जहां सत्ता और संगठन की लड़ाई लंबे समय तक पार्टी को नुकसान पहुंचाती रही. पार्टी हाईकमान इस बार कोई खुला टकराव नहीं चाहता. इसलिए सुरजेवाला लगातार दोनों नेताओं से संवाद बनाए हुए हैं.

असल चुनौती केवल मुख्यमंत्री बदलने की नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन बनाए रखने की है. कांग्रेस जानती है कि कर्नाटक फिलहाल दक्षिण भारत में उसका सबसे मजबूत राज्य है. अगर यहां भी गुटबाजी खुलकर सामने आई, तो इसका असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पार्टी की छवि प्रभावित होगी. इसलिए दिल्ली में चल रही बैठकों को केवल नेतृत्व परिवर्तन की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि रणदीप सुरजेवाला इस संकट को सुलझाने में सफल होते हैं या फिर कर्नाटक कांग्रेस एक नए शक्ति संघर्ष की ओर बढ़ती है.

अमित शाह ने ब‍िछाया चक्रव्यूह, महारथी भी तय, अब एक-एक घुसपैठिया….

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बंगाल जीतने के बाद सरकार अब घुसपैठ‍ियों को बाहर न‍िकालने के ल‍िए चक्रव्‍यूह रच चुकी है. गृहमंत्री अमित शाह ने खुद इसका ऐलान क‍िया. उन्‍होंने बताया क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज‍िस हाई पावर कमेटी का ऐलान क‍िया था, उसका गठन कर द‍िया गया है. अब एक्‍शन तेज होगा.

जो लोग भारत की सीमाओं में चोरी-छिपे घुसकर, यहां का राशन खाकर और फर्जी कागज बनवाकर इस देश की डेमोग्राफी बदलने का सपना देख रहे थे, उनकी उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है. मोदी सरकार ने देश के भीतर छिपे इस साइलेंट टाइम बम को डिफ्यूज करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा चक्रव्यूह रच दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले से जिस महा-मिशन का संकल्प लिया था, आज गृह मंत्री अमित शाह ने उस पर मुहर लगाते हुए ‘हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज’ के गठन का एलान कर दिया है. खुद गृहमंत्री अमित शाह ने इसका ऐलान क‍िया. साफ है क‍ि हिंदुस्तान की छाती पर अवैध रूप से पल रहे एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर चिह्नित किया जाएगा और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को सीधा रास्ता दिखाया जाएगा.

गृहमंत्री अमित शाह ने बताया क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से जिस हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज की घोषणा की थी, सरकार ने अब उस हाई-पावर कमेटी का आधिकारिक गठन कर लिया है. यह कमेटी सिर्फ कागजी कार्रवाई के लिए नहीं बनी है, बल्कि इसका सीधा मकसद देश की सीमाओं में सेंध लगाकर घुसे अवैध प्रवासियों की पहचान करना, डेमोग्राफी में आ रहे असामान्य और अप्राकृतिक बदलावों को रोकना और भारत की संप्रभुता की रक्षा करना है.

अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, डेमोग्राफिक चेंज हमारी संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज का व्यापक मूल्यांकन करेगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को विदेशी घुसपैठियों के दम पर बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती. चाहे वो असम के आदिवासी इलाके हों, झारखंड का संथाल परगना हो या फिर देश के अन्य हिस्से…जहां-जहां भी असामान्य रूप से आबादी का संतुलन बिगड़ा है, वहां अब सरकार का हंटर चलने वाला है.

दिल्‍ली कैबिनेट ने राशन योजना के नियमों में बड़ा बदलाव…

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दिल्‍ली कैबिनेट ने राशन योजना के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए एलिजिबिल्‍टी के लिए सालाना आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी है. इससे देश के लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. इसके अलावा, राशन वितरण में होने वाले भ्रष्टाचार और धांधली को रोकने के लिए केवल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी.

दिल्‍ली कैबिनेट की बैठक में आज राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और बेहद अहम फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राशन कार्ड के लिए जरूरी सालाना आय की सीमा को सीधे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है. दिल्‍ली सरकार का मानना है कि पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय की सीमा बहुत कम थी, जिससे कई जरूरतमंद परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे. मत्रभ्‍ मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से दिल्‍ली के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके साथ ही, राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और हर तरह की धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब राशन के लेन-देन में केवल डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है.

रेखा गुप्‍ता कैबिनेट फैसले की 5 मुख्य बातें
• आय की सीमा में भारी बढ़ोतरी: राशन कार्ड के लिए एलिजिबिल्‍टी की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है.
• लाखों नए परिवारों को लाभ: इस फैसले के बाद मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लाखों नए लाभार्थी इस सरकारी राशन योजना के दायरे में आ जाएंगे.
• डिजिटल करेंसी से सीधा भुगतान: राशन योजना में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए अब केवल डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल किया जाएगा.
• सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: डिजिटल करेंसी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे सिर्फ राशन खरीदने के लिए कर सकेंगे.
• बिचौलियों और धांधली पर लगाम: इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से कोटेदारों की मनमानी, राशन की कालाबाजारी और फर्जी लाभार्थियों की धांधली पूरी तरह बंद हो जाएगी.

क्यों खास है यह फैसला और क्या होगा इसका असर?

सरकार का यह फैसला दोहरे मोर्चे पर काम करने वाला है—पहला सामाजिक कल्याण का विस्तार और दूसरा तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था का शुद्धीकरण.

अब तक 1 लाख रुपये की सालाना आय की सीमा बेहद व्यावहारिक नहीं रह गई थी क्योंकि महंगाई के इस दौर में इतनी आय वाला परिवार भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है. आय की सीमा को ढाई लाख करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग (जैसे सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार) को मुफ्त या किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी.

दूसरा और सबसे क्रांतिकारी कदम है डिजिटल करेंसी (e-RUPI या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी – CBDC) का अनिवार्य इस्तेमाल. अभी तक कई जगहों पर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार राशन डकार जाते हैं या लाभार्थियों को बाजार में बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में राशन की डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो लाभार्थी उसका इस्तेमाल केवल राशन की दुकान पर ही कर पाएगा. इससे कैश की हेराफेरी खत्म होगी और राशन वितरण प्रणाली 100% पारदर्शी हो जाएगी.

सवाल-जवाब
सरकार को राशन के लिए आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये क्यों करनी पड़ी?

सरकार के अनुसार, पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय सीमा बहुत कम थी. वर्तमान आर्थिक स्थितियों और महंगाई को देखते हुए बुनियादी आय को कम आका गया था, जिससे कई वास्तविक जरूरतमंद राशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. अब ढाई लाख की सीमा होने से लाखों छूटे हुए परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा.

राशन वितरण में डिजिटल करेंसी कैसे काम करेगी और लाभार्थियों को इससे क्या फायदा होगा?

सरकार लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशन के मूल्य के बराबर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी. यह करेंसी डायरेक्ट अकाउंट में जाएगी, जिससे लाभार्थी राशन की अधिकृत दुकान पर जाकर भुगतान कर सकेंगे. इससे लाभार्थियों को अपनी जेब से नकद खर्च नहीं करना पड़ेगा और वे बिना किसी कटौती के पूरा राशन ले सकेंगे.

इस नई व्यवस्था से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर कैसे लगाम लगेगी?

डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ (विशेष उद्देश्य के लिए) होती है. यानी राशन के लिए मिली डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किसी अन्य काम या सामान को खरीदने में नहीं किया जा सकता. इससे राशन की कालाबाजारी, कोटेदारों द्वारा फर्जी अंगूठा लगवाना और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बंद हो जाएगा.