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cg” प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से यशवंत साहू बने बिजली के उत्पादक और उपभोक्ता…”

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– 3 किलोवाट सोलर रूफटॉप संयंत्र से बिजली बिल हुआ शून्य”
– केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली 1.08 लाख रूपए की सब्सिडी”

राजनांदगांव। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।

इस योजना का लाभ लेकर राजनांदगांव शहर के बसंतपुर वार्ड क्रमांक 46 निवासी श्री यशवंत साहू आज न केवल अपने बिजली खर्च से मुक्त हो गए हैं, बल्कि भविष्य में अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

श्री यशवंत साहू ने बताया कि उनके पड़ोस में लगे सोलर रूफटॉप को देखकर उन्हें भी योजना की जानकारी मिली और उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर की छत पर माह जनवरी 2026 में 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराया।

उन्होंने बताया कि सोलर संयंत्र की स्थापना पर लगभग 1 लाख 80 हजार रूपए की लागत आई। इसमें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए तथा राज्य सरकार से 30 हजार रूपए कुल 1 लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार उन्हें स्वयं केवल लगभग 72 हजार रूपए का व्यय करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि स्थापना के लिए किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया, बल्कि अपनी जमा बचत राशि का उपयोग किया है।

श्री यशवंत साहू ने बताया कि सोलर संयंत्र लगने से पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल 1500 से 1800 रूपए तक आता था और गर्मी के मौसम में 2200 रूपए तक बिजली बिल आता था। सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद से अब तक उनका बिजली बिल शून्य हो गया है।

इससे प्रतिवर्ष लगभग 15 हजार रूपए से अधिक की बचत होगी। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में उनकी स्वयं की लागत भी पूरी हो जाएगी। इसके बाद अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजने पर उन्हें उसका भुगतान भी मिलेगा। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि पहले वे केवल बिजली के उपभोक्ता थे, लेकिन अब बिजली के उत्पादक और उपभोक्ता दोनों बन गए हैं।

श्री साहू ने बताया कि ग्राम हल्दी में उनकी साइकिल की दुकान है तथा वे कृषि कार्य भी करते हैं। सोलर योजना से बिजली बिल में होने वाली बचत का उपयोग वे अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और व्यवसाय के विकास में कर रहे हैं। श्री यशवंत साहू ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।

उन्होंने बताया कि उनकी सफलता से प्रेरित होकर उनके पड़ोसी एवं मित्र ने भी अपने घर में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराया है। इसके अलावा आसपास के लोग भी उनके घर आकर योजना की जानकारी लेते हैं और सोलर संयंत्र लगाने में रूचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आर्थिक बचत के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली एक जनहितकारी पहल है।

कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा एल-नीनो के संभावित प्रभाव के दृष्टिगत किसानों को धान की बोनी एवं रोपा फसल में समय पर खरपतवार प्रबंधन के संबंध में दी गई समसामयिक सलाह…

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राजनांदगांव। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा खरीफ मौसम में एल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को धान की बोनी एवं रोपा फसल में समय पर खरपतवार प्रबंधन के संबंध में आवश्यक समसामयिक सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने बताया कि एल-नीनो के कारण वर्षा की अनियमितता एवं नमी की कमी की संभावना रहती है। जिससे खरपतवारों की बढ़वार तेज होती है और धान की उपज 30-40 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में अनुशंसित समय पर शाकनाशियों का प्रयोग, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना, जल संरक्षण एवं समुचित जल प्रबंधन अपनाने से खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है तथा फसल की उपज एवं गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

धान की बोनी फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए बोनी के 0-3 दिन बाद (प्री-इमर्जेन्स) पेंडीमेथालिन 30 ईसी 1000 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पायराजोसल्फ्यूरॉन-एथिल 80 ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं बोनी के 15-20 दिन बाद (पोस्ट-इमर्जेन्स) पिनोक्सुलम  37.5 ग्राम प्रति हेक्टेयर, ट्राइफ्लोक्सीसल्फ्यूरॉन + इथॉक्सीसल्फ्यूरॉन 90 ग्राम प्रति हेक्टेयर, संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 300-320 मिली प्रति हेक्टेयर, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए फिनॉक्साप्रॉप-इथाइल 250 मिली प्रति हेक्टेयर उपयोग करें। बोनी के 20-25 दिन बाद बिसपाइरीबैक सोडियम 80-100 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पिनोक्सुलम + सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 882 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा फ्लोरपायरॉक्सीफेन + पिनोक्सुलम 500 मिली प्रति हेक्टेयर, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए 2,4-डी अमाइन साल्ट 344-517 मिली प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।

धान की रोपा फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए रोपाई के 0-3 दिन बाद (प्री-इमर्जेन्स) पेंडीमेथालिन 1000 मिली प्रति हेक्टेयर, प्रीटिलाक्लोर 600 मिली प्रति हेक्टेयर, पायराजोसल्फ्यूरॉन-एथिल 80 ग्राम प्रति हेक्टेयर, बेन्सल्फ्यूरॉन मिथाइल +प्रीटिलाक्लोर 4.0 किग्रा प्रति हेक्टेयर एवं रोपाई के 15-20 दिन बाद पिनोक्सुलम 37.5 ग्राम प्रति हेक्टेयर, ट्राइफ्लोक्सीसल्फ्यूरॉन + इथॉक्सीसल्फ्यूरॉन 90 ग्राम प्रति हेक्टेयर तथा रोपाई के 20-25 दिन बाद बिसपाइरीबैक सोडियम 80-100 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा पिनोक्सुलम +सायहेलोफॉप-ब्यूटाइल 882 मिली प्रति हेक्टेयर उपयोग करे।

शाकनाशी का छिड़काव खेत में पर्याप्त नमी होने पर करें। अनुशंसित मात्रा में 375-500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें। छिड़काव के बाद 24-48 घंटे तक खेत का पानी बाहर न निकालें। आवश्यकता होने पर 20-25 दिन बाद हाथ से निराई भी करें। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा किसानों से एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों में वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन अपनाकर धान की फसल को खरपतवारों से सुरक्षित रखने तथा अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने की अपील की गई है।

cg” सरदार पटेल राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए ऑनलाइन प्रविष्टियां 31 जुलाई तक…”

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राजनांदगांव। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भारत की एकता और अखंडता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से सरदार पटेल राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 के लिए 31 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन के माध्यम से प्रविष्टियां आमंत्रित  की गई है।

सरदार पटेल राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने के लिए इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाईन प्रविष्टि प्रस्तुत कर सकते है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी जिला कार्यालय समाज कल्याण विभाग कलेक्टोरेट परिसर कंपोजिट बिल्डिंग कक्ष क्रमांक 5 राजनांदगांव से प्राप्त की जा सकती है।

cg” विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 11 एवं 12 जुलाई को जिले के प्रवास पर…

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राजनांदगांव ” विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 11 एवं 12 जुलाई 2026 को राजनांदगांव जिले के प्रवास पर रहेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 11 जुलाई को सुबह 10.30 बजे स्पीकर हाऊस शंकर नगर रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव पहुंचेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष दोपहर 12.15 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर राजनांदगांव विकासख्ंाड के ग्राम बाटगांव पहुंचकर वृक्षारोपण एवं नि:शुल्क पौधा वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष दोपहर 1.45 बजे ग्राम बाटगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 2.45 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव पहुंचेंगे एवं समय आरक्षित रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष शाम 5.15 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर शाम 5.25 बजे पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम पहुंचकर प्रतिभा सम्मान समारोह 2026 में शामिल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष शाम 6.25 बजे पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम से कार द्वारा प्रस्थान कर शाम 6.35 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव पहुंचेंगे एवं समय आरक्षित रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह 12 जुलाई को सुबह 11.50 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12 बजे मंडी परिसर राजनांदगांव पहुंचकर मंडी बोर्ड द्वारा स्वीकृत कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष दोपहर 1 बजे मंडी परिसर राजनांदगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 1.10 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव पहुंचेंगे एवं समय आरक्षित रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष दोपहर 2.50 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 3 बजे पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम पहुंचकर छत्तीसगढ़ श्री वैष्णव महासभा शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष शाम 4 बजे पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम से कार द्वारा प्रस्थान कर शाम 4.10 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव पहुंचेंगे एवं समय आरक्षित रहेंगा। विधानसभा अध्यक्ष शाम 4.30 बजे स्पीकर हाऊस राजनांदगांव से कार द्वारा स्पीकर हाऊस रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना” सौर ऊर्जा को लेकर वर्ल्ड बैंक से मिला बड़ा समर्थन…

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर लगातार अभियान चला रही है. सरकार की ओर से पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भी चलाई जा रही है. अब सौर ऊर्जा को लेकर वर्ल्ड बैंक से भी बड़ा समर्थन मिला है.

वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के बोर्ड ने अहम फैसले के तहत भारत के नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम को तेज करने के मकसद से आर्थिक मदद की मंजूरी दे दी है.

नेशनल सोलर रूफटॉप प्रोग्राम का मकसद लाखों घरों तक साफ ऊर्जा पहुंचाना और रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग, इंस्टॉलेशन और सर्विस वैल्यू चेन में 17 लाख (1.7 मिलियन) रोजगार के अवसर भी पैदा करना है. भारत ने अपने यहां 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने और 2035 तक अपने बिजली मिक्स में नॉन-फॉसिल-फ्यूल-बेस्ड ऊर्जा सोर्सेज को 60 फीसदी तक बढ़ाने का वादा किया है.

हालांकि देश में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का तेजी से विकास हुआ है, लेकिन घरों में अभी भी सौर ऊर्जा अपनाने की दर बहुत स्लो है. इस क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए, भारत सरकार ने 2 साल पहले ‘पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना’ शुरू की है. इसका मकसद देशभर के एक करोड़ ग्रामीण और शहरी घरों में सोलर रूफटॉप लगाने के लिए प्रोत्साहन देने के साथ-साथ घरों में बिजली का खर्च कम करना और सोलर रूफटॉप उपकरणों की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है.

अभियान के लिए 2 अरब डॉलर की मददः WB

वर्ल्ड बैंक में भारत के एक्टिंग कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा, “वर्ल्ड बैंक एक दशक से अधिक समय से भारत के सोलर रूफटॉप सेक्टर में बढ़ावा देने की मदद कर रहा है. वर्ल्ड बैंक ने यहां पर बिजली 500 MW से बढ़ाकर 27 GW से अधिक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी तक पहुंचाने के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक की राशि जुटाई है. यह नई वित्तीय मदद देश के घरों में सोलर एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद करेगी और साथ ही सप्लाई चेन और इंस्टॉलेशन इकोसिस्टम में रोज़गार के अवसर भी पैदा करेगी.”

इस प्रोग्राम के वित्तीय मदद में इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) से 820 मिलियन डॉलर का लोन, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड से 60 मिलियन डॉलर का रियायती लोन के साथ ही IBRD के लिवेबल प्लैनेट फंड से 10 मिलियन डॉलर की ग्रांट शामिल है. इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक कमर्शियल लोन के रूप में 4.2 अरब डॉलर की प्राइवेट फाइनेंसिंग भी जुटाएगा, जिससे घरों में सोलर रूफटॉप लगाए जा सकेंगे.

प्रोग्राम के टास्क टीम लीडर मोएज चेरिफ ने कहा, “यह प्रोग्राम आर्थिक बाधाओं को दूर करके और इंटीग्रेटेड सर्विस सॉल्यूशन देने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों, बैंकों और वेंडर्स की क्षमता बढ़ाकर घरों में सोलर एनर्जी के मार्केट को बदल देगा. लोग अब बिना गारंटी (कोलेटरल-फ्री) वाली मदद के जरिए, घर पर सोलर पावर सिस्टम लगवा सकते हैं और अपने मासिक बिजली बिल को काफी कम कर सकते हैं.”

साल 2024 में शुरू हुई पीएम सूर्य घर योजना

भारत सरकार भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में जुटी हुई है. घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के मकसद से पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना” शुरू की गई है. यह एक सरकारी योजना है. योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी, 2024 को किया था. इस योजना के जरिए, घरों को अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी. इससे सब्सिडी सौर पैनलों की लागत का 40% तक कवर करेगी.

माना जा रहा है कि इस योजना से देशभर में 1 करोड़ घरों को लाभ मिलने की उम्मीद है. यह अनुमान भी है कि इस योजना से सरकार को बिजली के खर्च में हर साल 75 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी.

85743 करोड़ की लागत! 8 लाख घरों के बराबर बिजली खाएगा Meta डेटा सेंटर…

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मेटा AI पर एक और बड़ा दांव लगा रही है. इस बार कंपनी कनाडा में एक नया डेटा सेंटर बना रही है, जो यह दिखाता है कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के लिए कितनी ज्यादा बिजली की जरूरत है.


कंपनी ने अल्बर्टा (कनाडा) में C$13 बिलियन (लगभग 9.17 बिलियन डॉलर) का डेटा सेंटर बनाने की योजना का ऐलान किया है. यह सेंटर इतनी बिजली इस्तेमाल करेगा जितनी लगभग 8 लाख घरों में होती है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट कनाडा में मेटा का पहला और दुनिया भर में 33वां डेटा सेंटर होगा. यह सुविधा स्टर्जन काउंटी में 1 गीगावाट की शुरुआती क्षमता के साथ बनाई जाएगी, जिसे बाद में AI कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के साथ 1.8 गीगावाट तक बढ़ाया जा सकेगा.

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब मेटा AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है. कंपनी एडवांस्ड AI मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए अपनी कंप्यूटिंग क्षमता को तेजी से बढ़ा रही है. वह उन दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल हो गई है जो नेक्स्ट जेनरेशन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सपोर्ट करने के लिए बड़े डेटा सेंटर बनाने की होड़ में लगी हैं.

एआई की वजह से पानी और बिजली की ज्यादा मांग

अल्बर्टा में डेटा सेंटर बनाने का मेटा का फैसला कई वजहों से लिया गया. इस प्रांत में नैचुरल गैस की भरपूर सप्लाई है, कई दूसरे इलाकों की तुलना में एनर्जी की लागत कम है और यहां का ठंडा मौसम बड़े सर्वर फार्म को ठंडा रखने का खर्च कम करने में मदद करता है. अल्बर्टा बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से निवेश आकर्षित करने की भी सक्रिय रूप से कोशिश कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने के कई और प्रस्ताव अभी समीक्षा के दौर में है.

अल्बर्टा के टेक्नोलॉजी मिनिस्टर नेट ग्लूबिश ने घोषणा के दौरान कहा, यह अपनी तरह का, अपने साइज़ और स्केल का पहला प्रोजेक्ट है, लेकिन यह आखिरी नहीं होगा. इस प्रोजेक्ट के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा बिजली की जरूरत को लेकर हो रही है. मेटा ने कहा कि इस फ़ैसिलिटी में लगभग उतनी ही बिजली इस्तेमाल होगी जितनी 800,000 घरों में होती है. प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी मौजूदा इंफ़्रास्ट्रक्चर पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय नई बिजली पैदा करने और इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड को अपग्रेड करने का खर्च उठाने की योजना बना रही है.

संस्कृत शिक्षा को आधुनिक आयुर्वेद से जोड़ने की दिशा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने बड़ा कदम…

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संस्कृत शिक्षा को आधुनिक आयुर्वेद से जोड़ने की दिशा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने बड़ा कदम उठाया है. विश्वविद्यालय ने एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट-पीए) की नोटिफेशन जारी कर दी है.

इस नई व्यवस्था के तहत 10वीं पास छात्र-छात्राएं प्री-आयुर्वेद प्रोग्राम में एडमिशन लेकर आगे बीएएमएस की पढ़ाई कर सकेंगे. यह कोर्स भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया गया है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुरुकुल आधारित शिक्षा के माध्यम से ऐसे आयुर्वेद एक्सपर्ट तैयार करना है, जो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का बेहतर समन्वय कर सकें.

इसके बाद निर्धारित स्टडी पूरी करने पर वो बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की पढ़ाई करेंगे और आयुर्वेद डॉक्टर बनने का अवसर प्राप्त करेंगे. इस प्रोग्राम को राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) की मंजूरी मिली है और इसे विश्वविद्यालय से संबद्ध अलग-अलग आयुर्वेद गुरुकुलों में संचालित किया जाएगा.

गुरुकुल मॉडल पर आधारित होगी पढ़ाई

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि यह कोर्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनका कहना है कि संस्कृत पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए आयुर्वेद के मूल ग्रंथों को समझना आसान होता है. गुरुकुल प्रणाली के माध्यम से स्टूडेंट्स को पारंपरिक ज्ञान और प्रैक्टिकल एजुकेशन का बेहतर अनुभव मिलेगा, जिससे आयुर्वेद को ग्लोबल लेवल पर नई पहचान मिल सकेगी.

जुलाई में आवेदन

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. पवन कुमार के अनुसार नीट-पीए के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होगी. प्रवेश परीक्षा अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में देशभर के परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी.

इस इंटीग्रेटेड करिकुलम की कुल अवधि साढ़े सात वर्ष होगी. इसमें दो वर्ष का प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम, साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस कोर्स और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल रहेगी.

जानें एलिजिबिलिटी और परीक्षा पैटर्न

आवेदन के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है. जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के कम से कम 50 प्रतिशत और रिजर्व कैटेगरी के अभ्यर्थियों के 40 प्रतिशत अंक होने चाहिए. 31 दिसंबर तक आयु 15 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए. परीक्षा ओएमआर शीट पर ऑफलाइन होगी. इसमें 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिन्हें हल करने के लिए 150 मिनट का समय मिलेगा. प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और गलत आंसकर पर कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी. प्रश्नपत्र संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध रहेगा.

E-20 पेट्रोल के साथ-साथ सामान्य पेट्रोल चुनने की भी सुविधा दी जाए…

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देशभर के पेट्रोल पंपों पर आने वाले समय में ग्राहकों को एक नया ऑप्शन मिल सकता है. सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि लोगों को E-20 पेट्रोल के साथ-साथ सामान्य पेट्रोल चुनने की भी सुविधा दी जाए.

इस प्रस्ताव का मकसद वाहन मालिकों को अपनी जरूरत और गाड़ी के अनुसार ईंधन चुनने का मौका देना है.

क्यों हो रही है इस पर चर्चा?

पिछले कुछ समय से E-20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं. कुछ वाहन चालकों का कहना है कि इससे माइलेज में हल्की कमी महसूस होती है. वहीं, कुछ लोगों ने अपनी पुरानी गाड़ियों में इसके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार अब सभी पक्षों से राय लेने की तैयारी कर रही है.

पहले भी हुआ था ऐसा विचार

जानकारी के मुताबिक, E-20 पेट्रोल को लागू करने से पहले भी सामान्य पेट्रोल का विकल्प बनाए रखने पर चर्चा हुई थी. हालांकि, उस समय तेल विपणन कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं थीं. अब बदलती परिस्थितियों और लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए इस विषय पर फिर से विचार किया जा रहा है.

क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां?

अगर दोनों तरह के पेट्रोल उपलब्ध कराने का फैसला होता है, तो सबसे बड़ी चुनौती उनकी कीमत तय करने की होगी. E-20 और सामान्य पेट्रोल की लागत अलग हो सकती है, इसलिए दोनों के दाम तय करना आसान नहीं होगा.

इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ईंधन के लिए अतिरिक्त डिस्पेंसर (फ्यूल मशीन) लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है. इससे पंप संचालकों को अतिरिक्त निवेश करना पड़ सकता है.

फिलहाल क्या मिल रहा है?

इस समय अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E-20 पेट्रोल उपलब्ध है. इसके अलावा कुछ तेल कंपनियां अपने प्रीमियम ईंधन जैसे स्पीड, टर्बोजेट और अन्य ब्रांड भी बेचती हैं. सामान्य पेट्रोल का अलग विकल्प फिलहाल उपलब्ध नहीं है.

कीमत में भी आ सकता है बदलाव

बताया जा रहा है कि तेल कंपनियां अभी E-20 पेट्रोल को कम लाभ पर बेच रही हैं. आने वाले समय में अगर हालात सामान्य होते हैं, तो इसकी कीमत में बदलाव देखने को मिल सकता है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम भी हो सकती है. E-20 वाले पेट्रोल को तेल कंपनियां फिलहाल अंडर-रिकवरी पर बेच रही हैं, जिसके दाम स्थितियां सामान्य होने पर 10 रुपये तक कम होंगे.

Indian Railway TTE : केरलम के उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे के खिलाफ एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया…

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अगर आप भी अक्सर ट्रेनों में सफर करते हैं और कंफर्म टिकट होने के बावजूद टीटीई (TTE) या रेलवे स्टाफ के अड़ियल रवैये से परेशान होते हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है.

केरलम के उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे के खिलाफ एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है. एक यात्री की आरक्षित (कंफर्म) सीट पर खुद कब्जा करने और विरोध करने पर यात्री व उसकी पत्नी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप में उपभोक्ता अदालत ने दक्षिणी रेलवे को दोषी पाया है. कोर्ट ने रेलवे को पीड़ित यात्री को 50,000 रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये अदालती खर्च देने का आदेश जारी किया है.

यह पूरा मामला केरलम के अलुवा से तिरुवनंतपुरम के बीच की रेल यात्रा से जुड़ा है. शिकायतकर्ता यात्री ने अपनी पत्नी के साथ अलुवा से तिरुवनंतपुरम जाने के लिए कंफर्म रेल टिकट बुक कराया था. लेकिन, जैसे ही वे ट्रेन में चढ़कर अपनी आवंटित सीट पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए. उनकी कंफर्म सीट पर ट्रेन के ही एक कर्मचारी (टीटीई) ने कब्जा कर रखा था.

हद तो तब हो गई जब TTE ने अपने निजी सूटकेस को उस सीट के नीचे बकायदा जंजीर (चेन) से लॉक करके रख दिया था. जब यात्री ने अपनी सीट मांगी, तो TTE ने सीट खाली करने के बजाय रौब दिखाते हुए उन्हें किसी दूसरी सीट पर जाने को कह दिया. इतना ही नहीं, ट्रेन के अन्य सह-यात्रियों के सामने TTE ने पति-पत्नी दोनों को बुरी तरह मानसिक रूप से परेशान और प्रताड़ित किया. इसके बाद पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा का मामला दर्ज कराया.

रेलवे ने दी अजीब दलील, अदालत में खुली पोल

मामले की सुनवाई के दौरान दक्षिणी रेलवे ने अपने बचाव में एक बेहद अजीब तर्क पेश किया. रेलवे ने कोर्ट में कहा कि पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बर्थ अलॉट हुई थीं, और TTE ने तो बस उन्हें एक साथ सफर करने में मदद की थी. रेलवे का दावा था कि TTE अपनी ड्यूटी के तहत हर स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए दरवाजे के पास वाली सीट का इस्तेमाल कर रहा था.

एर्नाकुलम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डी.बी. बिनु, सदस्य रामचंद्रन वी और श्रीविद्या टी.एन. की पीठ ने रेलवे के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट के सामने जब सफर के दौरान की तस्वीरें और पुख्ता सबूत पेश किए गए, तो साफ हो गया कि सीट पर TTE का ही सूटकेस जंजीर से बंधा था. रेलवे के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था.

45 दिनों में दें पैसे, वरना लगेगा ब्याज

उपभोक्ता अदालत ने इस मामले में भारतीय रेलवे को फटकार लगाते हुए बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की. आयोग ने साफ शब्दों में कहा कि एक आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से कंफर्म टिकट खरीदता है. ऐसे में यात्री की आरक्षित सीट का उपयोग रेलवे स्टाफ द्वारा अपने निजी फायदे के लिए करना ‘सेवा में घोर लापरवाही’ है. रेलवे कर्मचारियों का यह पहला दायित्व है कि वे यात्रियों के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा करें.

कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया है कि वह पीड़ित को 50,000 रुपये का मुआवजा, 3,000 रुपये मुकदमा खर्च और उनके टिकट की पूरी कीमत वापस करे. यह पूरी राशि आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी. अगर रेलवे तय समय में भुगतान करने में देरी करता है, तो उसे देय राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

विदेशी संपत्ति और संदिग्ध लेन-देन, ED की कल्याणी इम्पेक्स के ठिकानों पर रेड, कई दस्तावेज जब्त….

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केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने FEMA के तहत कल गुरुवार (9 जुलाई) को कलानी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक्टिव डायरेक्टर धर्मेश नरेंद्र सांगानी से जुड़े मामले में छापेमारी की.

जांच के दौरान ईडी को कई अहम दस्तावेज और सबूत भी मिले हैं, जिनमें विदेश में छिपाई गई कई संपत्तियों, विदेशी बैंक खातों और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय लेन- देन का खुलासा हुआ है. फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (FEMA) के प्रावधानों के तहत तलाशी की कार्रवाई की गई.

भारत आने वाला पैसा वापस आया ही नहीं

ईडी की जांच के दौरान यह पता चला कि जो पैसा भारत में आना चाहिए था, वह काफी समय बीतने के बाद भी वापस नहीं आया. कुछ विदेशी खरीदारों से एक्सपोर्ट से मिलने वाली रकम (Export Proceeds) भी नहीं मिली थी और न ही अधिकृत डीलर बैंक से समय बढ़ाने की मंजूरी ली गई. यहां तक की वसूली के लिए किसी तरह की कोई दस्तावेजी कोशिश नहीं की गई.

जांच में यह भी पता चला कि निर्यात का कुछ भुगतान उन विदेशी कंपनियों से लिया गया, जिनका नाम निर्यात दस्तावेजों या शिपिंग बिल में खरीदार के तौर पर दर्ज नहीं था. इससे लेन-देन पर संदेह और गहरा हो गया है.

कनाडा और अमेरिका भी कर रहीं जांच

कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी को बिना बताए विदेशी एसेट्स और विदेशी बैंक अकाउंट से जुड़े होने के सबूत भी मिले. ईडी को छापेमारी के दौरान धर्मेश सांगानी की कनाडा की एक कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी के सबूत मिले हैं, जिसकी जानकारी संबंधित भारतीय अधिकारियों को नहीं दी गई थी. इस कंपनी से जुड़े विदेशी बैंक खाते और लेन-देन भी सामने आए हैं. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक अघोषित कारोबारी इकाई का भी पता चला है.

अब तक की जांच में कनाडा, अमेरिका और यूएई में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों की पहचान की गई है. ईडी ने यह भी बताया कि धर्मेश सांगानी के कुछ लेन-देन की जांच अमेरिका और ब्रिटेन के सीमा शुल्क (कस्टम्स) अधिकारी भी कर रहे हैं. ईडी इस लेन-देन में FEMA के संभावित उल्लंघन की भी जांच की जा रही है.