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“Rangbhari Ekadashi 2026: 26 या 27 फरवरी कब है रंगभरी एकादशी? जानें सही डेट, पूजा विधि और महत्व”

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सनातन धर्म में रंगभरी एकादशी का बहुत विशेष महत्व माना जाता है. हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन आमलकी एकदाशी मनाई जाती है. इसे ही रंगभरी एकादशी कहा जाता है.

इस दिन का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से बताया जाता है. खासतौर पर वाराणसी (काशी) में रंगभरी एकादशी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है.

इस दिन से ही काशी में होली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है. रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में रंगभरी एकादशी को लेकर संशय है कि ये पर्व 26 को मनाया जाएगा या 27 फरवरी को. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल रंगभरी एकादशी की सही तारीख. साथ ही जानते हैं इसकी पूजा विधि और महत्व.

रंगभरी एकादशी कब है? Rangbhari Ekadashi 2026 Kab Hai)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को रात 12 बजकर 33 मिनट पर हो रही है. ये तिथि इसी दिन रात में 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, इसी साल 27 फरवरी, शुक्रवार को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इसी दिन रंगभरी एकादशी भी मनाई जाएगी. रंगभरी एकादशी का पारण 28 फरवरी को सुबह 6 बजकर 47 से लेकर 9 बजकर 6 मिनट के बीच किया जा सकता है.

रंगभरी एकादशी पूजा विधि (Rangbhari Ekadashi Puja Vidhi)

रंगभरी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. एक लोटे में जल, चंदन, बेलपत्र और अबीर-गुलाल लेकर शिव मंदिर जाएं. शिवलिंग पर पहले चंदन लगाएं. फिर बेलपत्र और जल अर्पित करें. अंत में अबीर-गुलाल चढ़ाएं. अंत में भगवान शिव से जीवन की परेशानियों को दूर कर देने की प्रार्थना करें.

रंगभरी एकादशी का महत्व (Rangbhari Ekadashi Significance)

धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही विवाह के बाद महादेव मां पार्वती के साथ पहली बार काशी आए थे. उस समय देवताओं और गणों ने उनका स्वागत में दीप जालकर किया था. साथ ही फूल, गुलाल और अबीर उड़ाया था. तभी से रंगभरी एकादशी मनाई जाने लगी.

देश में 1 अप्रैल से बिकेगा E20 पेट्रोल, गाड़ियों के माइलेज पर होगा इतना असर…

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सरकार ने आदेश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में बिकने वाला पेट्रोल E20 होगा और उसमें कम से कम RON 95 (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) होना जरूरी होगा. इसका मतलब है कि पेट्रोल में अधिकतम 20% एथेनॉल मिलाया जाएगा.

यह फैसला तेल आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और गन्ना व मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ाने के लिए लिया गया है, क्योंकि एथेनॉल इन्हीं फसलों से बनाया जाता है.

इस पहल से ईंधन ज्यादा साफ जलेगा और प्रदूषण कम होगा. उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 2023-25 के बाद भारत में बनने वाली ज्यादातर गाड़ियों को E20 पेट्रोल पर चलने के हिसाब से ही बनाया गया है. इसलिए नई गाड़ियों में किसी बड़ी दिक्कत की संभावना नहीं है. लेकिन पुरानी गाड़ियों में माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

RON 95 की शर्त क्यों?

सरकार ने यह फैसला पहले की सफलता को देखते हुए लिया है, जब 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया गया था. RON 95 की शर्त इसलिए रखी गई है ताकि इंजन में प्री-इग्निशन जैसी समस्या से बचा जा सके और इंजन की परफॉर्मेंस सुरक्षित रहे. बता दें कि RON एक माप है, जो बताता है कि पेट्रोल इंजन में समय से पहले जलने (नॉकिंग) से कितना बचाव करता है. नॉकिंग तब होती है जब ईंधन सही समय से पहले या असमान रूप से जल जाता है. इससे इंजन में पिंग जैसी आवाज आती है और लंबे समय में इंजन को नुकसान हो सकता है. RON जितना ज्यादा होगा, पेट्रोल उतना ही बेहतर तरीके से नॉकिंग से बचाएगा और इंजन की सुरक्षा करेगा.

सभी जगह मिलेगा एथनॉल मिक्स पेट्रोल

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की एक अधिसूचना में कहा, केंद्र सरकार निर्देश देती है कि पेट्रोलियम कंपनियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय मानक ब्यूरो के विनिर्देशों के अनुसार 20 प्रतिशत तक एथनॉल के साथ मिश्रित मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) की बिक्री करेंगी, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) 95 होगा. केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में कुछ क्षेत्रों में सीमित समय के लिए छूट दे सकती है.

मुंबई के बजट ने बड़े-बड़े राज्यों को छोड़ा पीछे! क्या 81,000 करोड़ से बदलेगी मायानगरी की सूरत?

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बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) यानी मुंबई का इलाका, जहां दुनिया के टॉप अमीरों में शुमार कुछ लोगों की रिहाइश है. जहां पर दुनिया के सबसे अमीर फिल्म स्टार्स में से एक रहते हैं. जिस शहर को भारत की इकोनॉमिक कैपिटल कहा जाता है.

उसी शहर के म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन का बजट पेश किया. खास बात तो ये है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीएमसी का बजट 80 हजार करोड़ रुपए के पार यानी करीब 9 बिलियन डॉलर पहुंच गया है.

मुंबई का इतना बजट होना भी कोई बड़ी बात इसलिए नहीं है, क्योंकि दुनिया के मानचित्र में इस इलाके का काफी महत्व है. खास बात तो ये है कि अकेले बीएमसी का बजट देश के 5 राज्यों से काफी ज्यादा है. कुछ राज्यों के मुकाबले में ये 4 से 5 गुना के करीब पहुंच गया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर बीएमसी ने कितना बजट पेश किया है, साथ ही देश के वो कौन से 5 राज्य है, जिनका बजट बीएमसी के मुकाबले में काफी कम है.

कितना है बीएमसी का बजट

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 80,952.56 करोड़ रुपए के बजट का ऐलान कर दिया है. जोकि वित्त वर्ष 2025-26 के मुकाबले 8.77 प्रतिशत अधिक है. बीएमसी के आयुक्त भूषण गगरानी ने बजट पेश किया, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 48,164.28 करोड़ रुपए तय किए गए हैं. यह राशि 2025-26 के मुकाबले 11.59 प्रतिशत अधिक है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू एक्सपेंडिचर 32,698.44 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के 28,257.91 करोड़ रुपए के संशोधित अनुमान से लगभग 15.71 प्रतिशत अधिक है. बजट में अनुमानित कमाई 51,510.94 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 19.35 प्रतिशत अधिक है. प्रॉपर्टी टैक्स रेवेन्यू , जो बीएमसी की आय के प्रमुख स्रोतों में एक है, 2026-27 के लिए 7,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 में 6,200 करोड़ रुपए था.

इन राज्यों का बजट है छोटा?

BMC का करीब 81 हजार करोड़ रुपए का बजट देश के कई राज्यों के मुकाबले में काफी बड़ा है. खास बात तो ये है कि बीएमसी एशिया की सबसे बड़ी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन है. वैसे जिन राज्यों का जिक्र हम करने जा रहे हैं, उनका अगले वित्त वर्ष का बजट सामने नहीं आया है. जब भी उन राज्यों का बजट आएगा, वो बीएमसी के बजट से छोटा ही रहेगा, ये बात तय है.

पहले बात गोवा की करें तो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल बजट 28,162 करोड़ रुपए था. जो अगले वित्त वर्ष में अधिक से अधिक 32 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. वहीं अरुणाचल प्रदेश का वित्त वर्ष 26 के लिए बजट 39,842 करोड़ रुपए था जो नए वित्त वर्ष के लिए 42 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है.

हिमाचल प्रदेश बड़ा राज्य है, उसके बाद भी उसका बजट मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 58,514 करोड़ रुपए रखा गया था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 62 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं होगा. वहीं सिक्किम का कुल बजट अनुमान 16,196 करोड़ रुपए था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 19 से 20 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. वहीं दूसरी ओर त्रिपुरा बजट वित्त वर्ष 2026 के लिए 31,412 करोड़ रुपए था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए 33 हजार करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है.

कहां कहां पैसा खर्च करेगा बीएमसी?

अगले फिस्कल ईयर के लिए कैपिटल खर्च का एक बड़ा हिस्सा कोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखा गया है. A, B, E, G और T.A. हेड्स के तहत कैपिटल खर्च, जिसमें इम्प्रूवमेंट स्कीम, एजुकेशन फंड, वॉटर सप्लाई और सीवरेज और ट्री अथॉरिटी शामिल हैं, Rs 30,069.89 करोड़ तय किया गया है.

इसमें से 13,990 करोड़ रुपए कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR), सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दिए गए हैं. स्पेशल प्रोजेक्ट्स के लिए 4,104.39 करोड़ रुपए का कैपिटल खर्च प्रपोज किया गया है. आने वाले फिस्कल ईयर में इंटरनल टेम्पररी ट्रांसफर 13,765.74 करोड़ रुपए तय किए गए हैं.

कहां और कैसे होगी कमाई

रेवेन्यू की बात करें तो, BMC को 2026-27 में कुल 51,510.94 करोड़ रुपए की रेवेन्यू इनकम की उम्मीद है, जो 2025-26 के 43,159.40 करोड़ रुपए के बजट अनुमान से 19.35 प्रतिशत ज़्यादा है और 46,778.12 करोड़ रुपए के रिवाइज़्ड अनुमान से भी ज़्यादा है.

ऑक्ट्रोई खत्म करने के बदले मुआवजा सबसे बड़ा रेवेन्यू सोर्स बना हुआ है, और 2026-27 के लिए इसके 15,550.02 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह 14,398.16 करोड़ रुपए था.

31 जनवरी, 2026 तक इस मद में असल रसीदें 11,981.84 करोड़ रुपए थीं. डेवलपमेंट प्लान (DP) फीस और प्रीमियम 2026-27 में 12,050 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के 11,153.75 करोड़ रुपए के रिवाइज्ड अनुमान से ज़्यादा है.

प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन का बजट 2026-27 के लिए 7,000 करोड़ रुपए है, जबकि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए रिवाइज्ड अनुमान 6,200 करोड़ रुपए है.

दूसरे मुख्य योगदान देने वालों में पानी और सीवेज चार्ज, 2,393.46 करोड़ रुपए, इन्वेस्टमेंट पर ब्याज 2,572.23 करोड़ रुपए, सुपरविज़न चार्ज 3,298.45 करोड़ रुपए, और राज्य सरकार से 1,461.57 करोड़ रुपए का ग्रांट-इन-एड शामिल है.

बजट पेपर्स के मुताबिक, फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट से 827 करोड़ रुपए, सड़कों और पुलों से 575.66 करोड़ रुपए, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से 505.51 करोड़ रुपए, लाइसेंस डिपार्टमेंट से 381.55 करोड़ रुपए और “अन्य” से 4,895.49 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है.

बजट में 2026-27 के लिए 89.84 करोड़ रुपए का सरप्लस बताया गया है, जबकि 2025-26 के अनुमान में यह 60.65 करोड़ रुपए और मौजूदा फिस्कल ईयर के रिवाइज्ड अनुमान में 97.98 करोड़ रुपए था.

2026 में सिर्फ FD नहीं, ऐसे बनाएं बेहतर और संतुलित फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो…

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भारत में जब भी सुरक्षित निवेश की बात होती है, तो सबसे पहले बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) का नाम आता है। एफडी को आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता है. लेकिन बदलते ब्याज दर चक्र, बढ़ती महंगाई और टैक्स नियमों में बदलाव के कारण अब सिर्फ एफडी पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं माना जा रहा.

सिर्फ FD क्यों काफी नहीं?

एफडी में आपका पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न तय होता है. लेकिन असली सवाल यह है कि टैक्स काटने और महंगाई को जोड़ने के बाद आपके हाथ में क्या बचता है? अगर आप 30% या उससे ज्यादा टैक्स स्लैब में हैं, तो कई बार एफडी का रिटर्न टैक्स के बाद महंगाई से भी कम रह जाता है. यानी पैसा सुरक्षित दिखता है, लेकिन उसकी असली कीमत धीरे-धीरे घटती रहती है.

अगर आपका निवेश समय कम से कम 2 साल या उससे ज्यादा का है, तो एक विविध (डाइवर्सिफाइड) फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो बनाना समझदारी हो सकता है, जिसमें स्थिरता, लिक्विडिटी और टैक्स बचत का संतुलन हो.

फिक्स्ड इनकम में और क्या-क्या विकल्प हैं?

अब निवेशकों के पास एफडी के अलावा कई विकल्प हैं, जैसे:

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट

सरकारी बॉन्ड (G-Secs)

डेट म्यूचुअल फंड

इनकम + आर्बिट्राज फंड

आर्बिट्राज फंड

इक्विटी सेविंग्स फंड

G-Secs और डेट म्यूचुअल फंड

सरकारी बॉन्ड सुरक्षित माने जाते हैं और अच्छे ब्याज दर चक्र में दर लॉक करने का मौका देते हैं. वहीं, डेट म्यूचुअल फंड ब्याज दर और क्रेडिट जोखिम को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज करते हैं.

इनकम + आर्बिट्राज फंड

इन फंड्स में लगभग 50-60% हिस्सा डेट में और बाकी आर्बिट्राज रणनीति में लगाया जाता है. 2 साल से ज्यादा निवेश पर इन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (12.5%) लगता है, जो कई बार एफडी से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

आर्बिट्राज या इक्विटी सेविंग्स फंड

थोड़ा-सा जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ये फंड कम उतार-चढ़ाव के साथ एफडी से बेहतर पोस्ट-टैक्स रिटर्न देने की कोशिश करते हैं.

कितना और कहां निवेश करें?

कोई एक फॉर्मूला सब पर लागू नहीं होता. निवेश का फैसला आपकी उम्र, टैक्स स्लैब, जोखिम लेने की क्षमता और जरूरत पर निर्भर करता है. रिटायरमेंट के करीब लोग ज्यादा सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं, जबकि युवा निवेशक थोड़ा संतुलित जोखिम ले सकते हैं. एफडी को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन सिर्फ उसी पर निर्भर रहना सही नहीं. समझदारी इसी में है कि संतुलित और सोच-समझकर बना हुआ फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो तैयार किया जाए, जो पूंजी सुरक्षित रखे और महंगाई को भी मात दे सके.

सीमांचल सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय समीक्षा. गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे की खास बातें…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से बिहार के सीमांचल क्षेत्र का तीन दिवसीय दौरा शुरू कर रहे हैं. इस दौरान वो भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे.

इसमें एसएसबी, ईडी, आईबी सहित कई केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. सीमा पर वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में भी अमित शाह शामिल होंगे.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार पहुंच गए हैं. वो बिहार के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे. सीमा पर घुसपैठ और कथित अवैध धार्मिक ढांचों के कारण राज्य के सीमांचल क्षेत्र में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे. अमित शाह तीनों दिन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहेंगे.

कानून-व्यवस्था की स्थिति और सीमा प्रबंधन का जायजा लेंगे

इस दौरान वह सात सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे. साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति और सीमा प्रबंधन का जायजा भी लेंगे. अधिकारियों के मुताबिक, बैठक के दौरान गृह मंत्री सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्मित अवैध धार्मिक ढांचों और स्थानीय अधिकारियों की ओर से उन घुसपैठियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट तलब कर सकते हैं, जो कथित तौर पर क्षेत्र की जनसांख्यिकी बदल रहे हैं.

भूमि पत्तन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक करेंगे

इसके साथ ही वो किशनगंज समाहरणालय में भूमि पत्तन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक भी करेंगे. अधिकारियों ने बताया कि अगले दिन वह लेट्टी और इंदरवा में सीमा चौकियों का उद्घाटन करने के साथ-साथ एसएसबी की विभिन्न परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शिलान्यास भी करेंगे.

शाह के दौरे पर क्या बोले अशोक चौधरी?

गृह मंत्री अमित शाह के दौरे पर जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने कहा, हमारा बॉर्डर नेपाल से लगता है. हमारा बॉर्डर बांग्लादेश से लगता है, जिस पर अमित शाह आ रहे हैं. नेपाल से हमारे यहां ड्रग्स, नकली करेंसी, इन सबकी शिकायतें मिलती हैं क्योंकि वो ओपन बॉर्डर है. अमित शाह इस पर समीक्षा करेंगे. बांग्लादेश से बहुत से घुसपैठिए हमारे सीमांचल में आए हैं. अगर आप वोटर लिस्ट और आधार कार्ड का मिलान करेंगे तो सिर्फ किशनगंज में बड़ा अंतर दिखेगा.

“बुधवार विशेष: गणेश पूजा से मजबूत होगा बुध, बिजनेस में मिलेगी बड़ी सफलता”

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सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है. इस खास मौके पर भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध की श्रद्धापूर्वक करने से लाभ मिलता है.

बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

बुध की कृपा दृष्टि से बिजनेस में मनचाही सफलता मिलती है.

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कुंडली में बुध की मजबूत स्थिति से क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, व्यापार में तरक्की और समृद्धि पाने के लिए कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होना जरूरी है. भगवान गणेश की पूजा से बुध को प्रसन्न किया जाता है. बुध की कृपा होने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानें.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बुध की प्रबल स्थिति व्यक्ति को मधुर वाणी और कमाल का संचार करने वाला बनाता है, जो व्यापार में निपुण बनाती है. वहीं बुध की दुर्लभ स्थिति आमतौर पर फैसले लेने में विफलता का कारण भी बनती है, और कभी-कभी तो व्यक्ति गलत निर्णय तक ले लेता है.

ग्रहों के राजकुमार बुध दो राशियों के स्वामी

ग्रहों के राजकुमार बुध, मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं. भगवान गणेश दोनों ही राशियों के देवता भी हैं. ग्रहों के राजकुमार बुध कन्या राशि में उच्च होते हैं, इसलिए कन्या राशि के जातकों को सदैव शुभ फल प्राप्त होता है.

बुध ग्रह के आशीर्वाद से कन्या राशि के जातक सफल बिजनेसमैन बनते हैं. मिथुन राशि के जातक नौकरी और व्यापार दोनों ही क्षेत्रों में काफी तरक्की करते हैं.

मिथुन और कन्या राशि के जातकों को हर बुधवार भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास और मोदक अर्पित करें. इसके अलावा हरे रंग की वस्तुएं दान करना भी सही है.

पीएम किसान योजना में लाखों किसानों के नाम हटाए गए, चेक कर लें कहीं आपका भी तो नहीं शामिल…

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पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. अब तक इस योजना की 21 किस्तें जारी हो चुकी है. देश भर के करोड़ों किसान 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं.

किसानों के लिए 22वीं किस्त से पहले बड़ा अपडेट सामने आया है.

योजना में लाभ ले रहे लाभार्थियों की दोबारा जांच में लाखों नाम लिस्ट से हटाए गए हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप भी अपना स्टेटस समय रहते चेक कर लें. और जान लें किस वजह से हटाए जा रहे हैं किसानों के नाम और कहीं आपका नाम भी तो नहीं इस लिस्ट में शामिल.

क्यों हटाए जा रहे हैं नाम?

सरकार इस बात को लगातार सुनिश्चिच कर रही है कि योजना में सिर्फ पात्र किसानों को ही लाभ मिले. इसके लिए वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू की है. और जांच में दो बड़ी वजहें सामने आई हैं. पहला, जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव. जिन किसानों के नाम पर 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन दर्ज हुई है. नउनके दस्तावेजों की दोबारा जांच हो रही है. अगर तय तारीख से पहले मालिकाना हक साफ नहीं होता है. तो पात्रता पर सवाल उठ सकता है.

दूसरी वजह है परिवार से जुड़े नियम हैं. योजना के मुताबिक एक परिवार में सिर्फ एक सदस्य को ही लाभ मिल सकता है. कुछ मामलों में पति और पत्नी दोनों किस्त ले रहे थे. ऐसे केस में भुगतान रोक दिया गया है. अगर जांच में आप सही पाए जाते हैं तो रकम जारी हो सकती है. वरना रिकवरी भी हो सकती है.

कैसे चेक करें आपका नाम लिस्ट में है या नहीं?

पीएम किसान योजना स्टेटस जानने के लिए आप घर बैठे ऑनलाइन जांच कर सकते हैं. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन चुनें. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें, कैप्चा भरें और Get Data पर क्लिक करें.

स्क्रीन पर आपकी पूरी डिटेल दिखाई देगी. यहां e-KYC और Land Seeding जरूर देखें. अगर इनमें से कोई चीड पेंडिंग है. तो किस्त अटक सकती है. जरूरत हो तो नजदीकी CSC सेंटर या मोबाइल ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन से प्रोसेस पूरी करें.

22वीं किस्त कब आ सकती है?

सरकार ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक किस्त जल्द जारी हो सकती है. अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 2026 के पहले हफ्ते या होली से पहले 2000 रुपये खातों में ट्रांसफर किए जा सकते हैं. इसलिए अपनी जानकारी अपडेट रखें. आधार लिंक, बैंक डिटेल और e-KYC पूरी करें.

खाड़ी देशों से गहरे संबंधों के बीच क्यों हो रहा पीएम मोदी का इजरायल दौरा, जानिए इसके मायने…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में इजरायल पहुंचने वाले हैं, जहां वे भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. साल 2017 के बाद यह उनका पहला इजरायल दौरा है और कुल मिलाकर दूसरा दौरा.

इस यात्रा को पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका और मजबूत होती कूटनीतिक पकड़ के रूप में देखा जा रहा है.

पश्चिम एशिया में बढ़ती भारत की साख

पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत देश के रूप में पेश किया है. भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा दी है.

इजरायल के साथ नई ऊंचाई पर साझेदारी

साल 2017 में पीएम मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे. उसी दौरे से दोनों देशों के रिश्तों की नई शुरुआत हुई थी. अब भारत-इजरायल साझेदारी अपने अब तक के सबसे बेहतर स्तर पर पहुंच चुकी है.

खाड़ी और अरब देशों से मजबूत संबंध

पीएम मोदी हाल ही में जॉर्डन और ओमान की यात्रा कर चुके हैं. पिछले साल उन्होंने सऊदी अरब का दौरा किया था. जनवरी में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में आयोजित हुई थी. हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति भी भारत दौरे पर आए, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना गया.

निष्पक्ष नीति और दो-राष्ट्र समाधान पर कायम रुख

भारत पश्चिम एशिया में संतुलित और निष्पक्ष भूमिका निभाता है. 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए आतंकी हमले की प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत निंदा की थी. वहीं, भारत इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान के अपने रुख पर कायम है और गाज़ा में मानवीय सहायता भी भेज चुका है.

‘देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे राहुल, चीन-पाकिस्तान…’, कांग्रेस पर बरसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल…

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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस की ‘कॉम्प्रोमाइज’ राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी एक कॉम्प्रोमाइज परिवार, एक कॉम्प्रोमाइज राजनीतिक दल हैं. राहुल गांधी नकारात्मक राजनीति के प्रतीक बन गए हैं.’

भारत के हितों को भी खतरे में डालते हैं राहुल गांधी: गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘कॉम्प्रोमाइज राहुल गांधी येलो बुक प्रोटोकॉल की अनदेखी और उल्लंघन करते हुए 247 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं. वे सरकार की सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करते हैं और जब वे विदेश जाते हैं तो भारत और भारतीयों के हितों को भी खतरे में डालते हैं. उनके राष्ट्रविरोधी ताकतों से संबंध हैं. वे सोरोस की सहयोगी इल्हान उमर से कैसे मुलाकातें करवाते हैं, जिनके जॉर्ज सोरोस के साथ अवैध संबंध लगातार सामने आ रहे हैं. वे सीमा-संवेदनशील लद्दाख क्षेत्र की यात्रा करते हैं और भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले विदेशी व्यक्तियों, जैसे शाकिर मीर अली से संबंध स्थापित करते हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हम सभी बार-बार देखते हैं कि राहुल गांधी सोरोस, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से जुड़े लोगों के साथ मिलकर अपने देश के हितों को कैसे खतरे में डालते हैं. वे भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए ओसीसीआरपी जैसे संगठनों के टूलकिट का बार-बार इस्तेमाल कैसे करते हैं. उन्होंने एक तरह से देश और दुनिया के सामने मनमानी राजनीति का रवैया दिखाया है.’

भारत विरोधी सरकारों की कठपुतली हैं राहुल गांधी: गोयल

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा, ‘राहुल गांधी भारत विरोधी ताकतों, भारत विरोधी संगठनों और भारत विरोधी सरकारों की कठपुतली मात्र हैं. हमने प्रेस के साथ उनका व्यवहार देखा है. आप राहुल गांधी से कोई असहज सवाल भी नहीं पूछ सकते, वरना आपको बीजेपी से जुड़ा पत्रकार करार दिया जाएगा. वे सिर्फ सुनियोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस चाहते हैं. वे लिखित में दिए गए सवालों के अलावा कोई और सवाल का जवाब नहीं देता. ऐसा शख्स कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व कर रहा है और देश के साथ खिलवाड़ कर रहा है.’

पीयूष गोयल ने कहा, ‘वे देशवासियों के हितों को पूरी तरह से दांव पर लगा रहे हैं. शायद वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, नए भारत, उभरती अर्थव्यवस्था और उभरते विश्व में भारत के प्रभुत्व को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. यही कारण है कि वे बार-बार झूठ बोलकर देश के हितों से समझौता कर रहे हैं. सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही देश से समझौता करने वाले नहीं हैं. राजीव गांधी भी देश से समझौता करने से कभी पीछे नहीं हटे.’

PM Modi Israel Visit: पीएम मोदी के पहुंचने से पहले अमेरिका ने इजरायल में तैनात किए 11 F-22 रैप्टर लड़ाकू विमान, जानें क्यों किया ऐसा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2 दिवासीय इजरायल दौरे के दौरान अमेरिका ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाते हुए पहली बार अपने अत्याधुनिक F-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों को इजरायल में तैनात किया है.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब क्षेत्र में ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के नेगेव रेगिस्तान स्थित ओवदा एयरबेस पर अमेरिका के 11 F-22 रैप्टर जेट उतारे गए हैं. इसे ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी का संकेत भी हो सकती है.

F-22 रैप्टर की खासियत

बताया जा रहा है कि इतिहास में पहली बार अमेरिका ने बिना किसी संयुक्त अभ्यास या प्रशिक्षण कार्यक्रम के सीधे परिचालन या संभावित war-oriented missions के मकसद से इजरायली धरती पर अपने लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. यह कदम अमेरिका और इज़रायल के बीच गहरे होते सामरिक सहयोग को भी दर्शाता है. F-22 रैप्टर पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे दुनिया के सबसे घातक और एडवांस फाइटर जेट में गिना जाता है. इसकी खासियत इसकी अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज़ क्षमता और एडवांस वेपन सिस्टम है, जो इसे दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक हमले करने में सक्षम बनाती है.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने इस विमान को न तो इजरायल और न ही किसी अन्य नाटो देश को निर्यात किया है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है. इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है.

पीएम मोदी इजरायल की संसद को करेंगे संबोधित

अपनी इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत करेंगे. इजरायल की संसद (नेसेट) को संबोधित करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ बातचीत करेंगे. इजरायल यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत और इजरायल एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जिसमें उल्लेखनीय वृद्धि और प्रगति देखी गई है.