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“न सिद्धारमैया-न DK. क्या कर्नाटक में ‘खरगे’ दांव चल सकती है कांग्रेस, ऐसे सध जाएंगे सारे समीकरण”

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कांग्रेस इस समय कर्नाटक के दो नेताओं की खींचतान के कारण खासी परेशान नजर आ रही है. राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों का बाजार गर्म है. मौजूदा सीएम सिद्धारमैया के हटाए जाने की चर्चा हो रही है.

तो वहीं दूसरी तरफ डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को नया सीएम बनाए जाने की चर्चा हो रही है. इसको लेकर दोनों ही नेताओं के समर्थक विधायक दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं. आलाकमान को अपनी पसंद के बारे में विस्तार से बता रहे हैं. इन दोनों नेताओं की खींचतान के बीच तीसरे विकल्प की चर्चा तेज हो चली है.

कर्नाटक की खींचतान के बीच ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी किसी तीसरे विकल्प पर भी फैसला ले सकती है. इस तीसरे विकल्प के तौर पर कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम की चर्चा हो सकती है. मंत्री शिवानंद पाटिल ने मांग की है कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को ही मुख्यमंत्री बनाया जाए. ऐसा करने से कोई भी विरोध नहीं करेगा. राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भी इस बात पर सहमति जाहिर की है. उन्होंने कहा कि खरगे योग्य हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को सीएम बनाने की चर्चा के पीछे की कई वजहें हैं.

खरगे खुद कई बार कह चुके हैं कि वे तीन बार कर्नाटक के सीएम बनते-बनते रह गए थे. इसके साथ ही वे गांधी परिवार के भी खास हैं. यही वजह है कि उनके नाम की चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि इन सब चर्चाओं को लेकर खरगे के बेटे प्रियांक ने कहा कि ये सब बेमतलब है.

कर्नाटक में कांग्रेस में खींचतान की वजह?

कर्नाटक में पिछले करीब 6 महीनों से सीएम बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं. इसके पीछे के कई कारण बताए जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि जब 2.5 साल पहले कांग्रेस सरकार का गठन हुआ था. उस समय ऐसा तय हुआ था कि आधे कार्यकाल के लिए सिद्धारमैया को सीएम बनाया जाएगा. बाकी के बचे आधे कार्यकाल के लिए डीके शिवकुमार सीएम रहेंगे. इस बात की पुष्टि खुद डीके शिवकुमार ने की है. उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि उसकी चर्चा उस समय बंद कमरे में 6-7 लोगों के बीच ही हुई थी.

कर्नाटक की मौजूदा सरकार ने अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया है. इसीलिए सीएम बदलने की चर्चा हो रही है. लंबे समय से डीके शिवकुमार के समर्थक लॉबिंग कर रहे हैं. वहीं सिद्धारमैया साफ कह चुके हैं कि अगले साल वे बजट पेश करेंगे. उनके इस बयान से साफ है कि वे इस पद से हटने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं. हाईकमान भी इस मामले को कई बैठकें कर चुका है. इसके साथ ही खुद पार्टी अध्यक्ष के साथ-साथ नेता कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं.

दावे पर मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे ने क्या कहा?

कर्नाटक में दो नेताओं की खींचतान के बाद तीसरे विकल्प के तौर पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम तेजी से सामने आया है. ऐसा कहा जा रहा है कि अगर आलाकमान खरगे को सीएम बनाने का फैसला करता है. तो दोनों ही नेता इसका विरोध नहीं करेंगे. इसके साथ ही अगले 5 सालों तक आसानी से सरकार भी चल सकती है.

खरगे की दावेदारी पर उनके बेटे प्रियांग खरगे ने इस तरह की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब भी यहां (कर्नाटक में) चुनाव होते हैं, तो वह CM बनने की रेस में होते हैं, जब भी पार्लियामेंट्री चुनाव होते हैं, तो वह PM बनने की रेस में होते हैं. ऐसी चर्चाएं अब बेमतलब हैं. भले ही प्रियांग ने इस तरह की बातों को खारिज कर दिया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चाएं तेज हैं.

हाईकमान देगा दखल: मल्लिकार्जुन खरगे

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को साफ किया कि मामले में हाईकमान दखल देगा. मैं इतना कहना चाहता हूं कि हम ऐसे मुद्दों को हल करेंगे. हाईकमान राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मैं बैठकर इस पर विचार करेंगे.

खरगे के इस बयान पर बीजेपी ने चुटकी ली थी और पूछा था कि आलाकमान कौन है? राष्ट्रीय अध्यक्ष होकर अगर वह ऐसा कह रहे हैं तो फैसला कौन लेगा? इससे पहले कर्नाटक बीजेपी की तरफ से भी एक वीडियो शेयर किया गया था. जिसमें डीके शिवकुमार पर तंज कसा गया था.

राहुल गांधी का डीके को मैसेज

डीके शिवकुमार पिछले लंबे समय से राहुल से मुलाकात की कोशिशें कर रहे हैं. उन्होंने राहुल को मैसेज भेजकर मिलने का समय मांगा था. इसके जवाब में राहुल ने टेक्स्ट मैसेज के जवाब में लिखा है कि मैं आपको कॉल करूंगा.

चर्चाओं पर क्या बोले सिद्धारमैया के मंत्री?

कर्नाटक के मंत्री सतीश जरकीहोली ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान से राज्य में लीडरशिप बदलने के सवाल पर जल्द फैसला लेने को कहा है. पब्लिक वर्क्स पोर्टफोलियो संभालने वाले जारकीहोली ने बताया कि वह इस मामले पर बात करने के लिए कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने का प्लान बना रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार का मुद्दा पार्टी की नेशनल लीडरशिप को सुलझाना चाहिए और बताया कि सिद्धारमैया भी जल्दी फैसला लेना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा, “जब CM ऐसा कहते हैं, तो पार्टी के सीनियर को इस पर ध्यान देना चाहिए.”

हालांकि, उन्होंने कहा कि लीडरशिप में संभावित बदलाव पर MLA के बीच कोई अंदरूनी बातचीत नहीं हुई है. जारकीहोली ने कहा, “पार्टी में लीडरशिप में बदलाव के बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है. एक बार जब यह सामने आएगा तो हम चर्चा करेंगे, लेकिन अभी पार्टी में इस बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है. ”

डीके शिवकुमार के बदले सुर?

कर्नाटक की चर्चा और कांग्रेस के गुटों को लेकर डीके शिवकुमार का एक बयान भी चर्चा में है. उन्होंने बुधवार को कहा कि कांग्रेस एकजुट है और 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों पर फोकस कर रही है.

डिप्टी चीफ मिनिस्टर ने कहा, “जो भी पार्टी के मुद्दे हैं, हम चार दीवारों के अंदर चर्चा करेंगे. मैं मीडिया में किसी भी पॉलिटिकल मुद्दे पर चर्चा नहीं करूंगा.” उन्होंने पार्टी के अंदर किसी भी तरह के कन्फ्यूजन या गुटबाजी से भी इनकार किया और कहा, किसी को कुछ भी मांगना नहीं चाहिए. पार्टी में कोई ग्रुप नहीं है; सिर्फ एक ग्रुप है, वह है कांग्रेस, हमारे ग्रुप में 140 MLA हैं.

कर्नाटक में चल रहे घमासान को लेकर ऐसा कहा जा रहा है कि जल्द ही आलाकमान फैसला लेगा. ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में कर्नाटक में क्या नया देखने को मिलता है.

“चीन में ट्रायल ट्रेन ने 11 मजदूरों को कुचला, रेल पटरी पर कर रहे थे काम”

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चीन में एक ट्रायल ट्रेन ने 11 मजदूरों को कुचल दिया है, जिससे सभी की मौत हो गई है. 2 मजदूरों के घायल होने की भी बात कही जा रही है. ट्रेन से भूकंप परीक्षण का सामान ले जाया जा रहा था.

घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया है. रेलवे और आपात विभाग के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं.

चीन की सरकारी मीडिया सीसीटीवी के मुताबिक भूकंपीय उपकरणों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ट्रायल ट्रेन कुनमिंग के लुओयांगझेन स्टेशन पर मजदूरों से टकरा गई. यहां मजदूर पटरी पर काम कर रहे थे.

घुमावदार ट्रैक पर हो गया हादसा

रेलवे के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा- ट्रेन भूकंप का पता लगाने वाले उपकरणों का परीक्षण कर रही थी. इसी दौरान जब ट्रेन शहर के लुओयांग टाउन रेलवे स्टेशन पर ट्रैक के घुमावदार हिस्से की तरफ गई, वहां हादसा हो गया.

अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है, लेकिन कहा जा रहा है कि सिग्नल फेल होने की वजह से यह हादसा हुआ है. ट्रेन के ड्राइवर यह नहीं जान पाए कि आगे ट्रैक पर काम हो रहा है.

चीन का रेल नेटवर्क

चीन का रेल नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. इसके ट्रैक की कुल लंबाई 160,000 किमी है. आखिरी बार चीन में इस तरह का हादसा साल 2021 में हुआ था. उस वक्त गांसु में एक ट्रेन ने-शिनजियांग रेलवे के एक हिस्से पर मजदूरों को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी.

“भारत दौरे पर आएंगे इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री, सुपरसोनिक स्पीड में होगी BrahMos डील?”

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इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफरी स्यामसुद्दीन (Sjafrie Sjamsoeddin) की भारत यात्रा से भारतइंडोनेशिया रक्षा सहयोग को बड़ा बढ़ावा मिलने वाला है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच BrahMos सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की संभावित डील पर विशेष जोर रहेगा.

रूस ने भी इस डील को लेकर पॉजिटिव संकेत दिए हैं, जिससे इसकी प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है.

सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब एडवांस चरण में है और इंडोनेशिया लंबे समय से BrahMos खरीदने में रुचि रखता आया है. जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई शिखर बैठक में यह मुद्दा सबसे ऊपर रहा था.

भारत बनेगा इंडोनेशिया का बड़ा MRO हब इंडोनेशिया अपनी एयरफोर्स और नौसेना के विमान और जहाजों के रखरखाव (Maintenance, Repair & Overhaul) के लिए भारत की विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहता है. भारत पहले से ही इंडोनेशिया को सुखोई लड़ाकू विमानों के रखरखाव में सहायता दे रहा है. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा.

“BrahMos” भारतरूस संयुक्त तकनीक का घातक हथियार

BrahMos दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है. इसकी तैनाती ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई स्तर पर बढ़ाया है.

रणनीतिक महत्व

तेज प्रतिक्रिया क्षमता BrahMos की 2.83 मैक की गति इसे दुश्मन के रडार पर पकड़ना बेहद कठिन बनाती है.

सटीक वार कम ऊंचाई पर समुद्र की सतह से उड़ान (sea-skimming) इसे लक्ष्य तक बेहद सटीक बनाती है.

बहु-भूमिकीय उपयोग इसे जमीन, समुद्र, और वायु तीनों से लॉन्च किया जा सकता है.

हिंद महासागर में शक्ति संतुलन भारतइंडोनेशिया सहयोग से दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन मजबूत होगा.

ऑपरेशन सिंदूर में प्रभाव पाकिस्तान में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, एयरबेस पर सटीक प्रहार में BrahMos ने अहम भूमिका निभाई, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा.

BrahMos मिसाइल की खासियत

गति (Speed) : 2.83 मैक (लगभग 3,700 km/h)

रेंज (Range) : 290450 किमी (नए संस्करण 500+ किमी तक सक्षम)

वारहेड: 200300 किलोग्राम (हाई-एक्सप्लोसिव/पेनिट्रेटर)

लॉन्च प्लेटफॉर्म: भूमि, समुद्र, पनडुब्बी, वायु

मार्गदर्शन प्रणाली: INS + GPS/GLONASS + Active Radar Seeker

ऊंचाई प्रोफ़ाइल: Sea-skimming (1015 मीटर तक)

सटीकता: 1 मीटर CEP तक

इंडोनेशिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BrahMos?

दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता का संतुलन

नौसेना के जहाजों और तटीय रक्षा को उन्नत बनाना

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के साथ संयुक्त सुरक्षा रणनीति

त्वरित और घातक प्रतिक्रिया क्षमता में वृद्धि

इंडोनेशिया की इस डील से न केवल रक्षा सहयोग मजबूत होगा, बल्कि भारत का रक्षा निर्यात भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा. BrahMos का निर्यात भारत की बढ़ती सैन्य तकनीकी ताकत का भी प्रतीक है. इससे पहले फिलीपींस ने भी चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए भारत से ब्रह्मोस की डील की है. दुनिया के कई देश अब इस कतार में हैं.

“सत्ता में वापसी नहीं करा पाते कांग्रेस CM, क्या कर्नाटक में ‘DK दांव’ बदलेगा कहानी? 2014 के बाद ऐसा है ट्रेंड”

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कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है. पिछले कुछ दिनों में बेंगलुरु के साथ-साथ दिल्ली में सियासी बैठकों को दौर जारी है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी से चर्चा के बाद इस मामले का समाधान करेंगे.

हालांकि माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में पार्टी नेतृत्व इस बारे में बड़ा फैसला ले सकता है. आलाकमान के फैसले में पार्टी डीके वाला दांव भी चल सकती है.

साल 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने कर्नाटक की सत्ता में वापसी की थी, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच जोरदार टक्कर रही. कई दौर की बातचीत और मान मनौव्वल के बाद सिद्धारमैया के नाम पर मुहर लगी और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा. हालांकि पार्टी की जीत में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में शिवकुमार की अहम भूमिका रही थी.

बार-बार मुख्यमंत्री नहीं बदलती कांग्रेस

ऐसे में दावा किया गया कि 2.5-2.5 साल वाले फॉर्मूले पर सहमति बनी और इसके तहत शुरुआती 2.5 साल के लिए सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बनेंगे और फिर अंतिम 2.5 साल के लिए शिवकुमार के हाथों में सत्ता आएगी. पिछले हफ्ते 20 नवंबर को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पहले ढाई साल पूरे हो गए, ऐसे में कयासों का दौर पूरी तरह से गरमा गया है. मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तो पिछले सालभर से लगातार जारी है.

हालांकि कांग्रेस की रणनीति बार-बार मुख्यमंत्री बदलने वाली नहीं रही है. वह अपने एक ही मुख्यमंत्री के साथ कार्यकाल पूरा करने की नीति पर चलती है. एक बात यह भी है कि कांग्रेस की पकड़ केंद्र ही नहीं राज्यों में भी लगातार ढीली हुई है. उसका ग्राफ सिकुड़ता जा रहा है. साल 2014 में केंद्र की सियासत में नरेंद्र मोदी युग शुरू होने के बाद से कांग्रेस को न सिर्फ केंद्र बल्कि ज्यादातर राज्यों में हार ही मिलती रही है.

सत्ता बचाने में लगातार मिली नाकामी

मई साल 2014 के वक्त कांग्रेस की सत्ता कर्नाटक समेत 13 राज्यों में हुआ करती थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सत्ता महज 7 राज्यों में ही थी. तब कांग्रेस आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, और उत्तराखंड जैसे राज्यों में की सत्ता में थी.

लेकिन कांग्रेस के लिए यह चीज बहुत बुरी साबित हुई कि इस दौरान पार्टी की जिन राज्यों में सत्ता थी, उसके मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार जीत हासिल नहीं कर सके. कांग्रेस धीरे-धीरे इन राज्यों में सत्ता गंवाती चली गई. 2014 के शुरू होने से पहले कांग्रेस ने दिल्ली में 15 साल पुरानी सत्ता गंवा दी और एक तरह से पार्टी के लिए हार की शुरुआत यहीं से हुई.

दिल्ली की तरह महाराष्ट्र-हरियाणा खोया

महाराष्ट्र (पृथ्वीराज चव्हाण) और हरियाणा (भूपिंदर सिंह हुड्डा) में कांग्रेस सत्ता में थी, लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद साल के अंत में कराए गए विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी सत्ता में आई. पहली बार दोनों राज्यों में बीजेपी मुख्यमंत्री बनाने में कामयाब रही. यही हाल अरुणाचल प्रदेश का भी रहा और यहां भी उसे हार मिली. सत्ता बीजेपी के मिली.

असम में तरुण गोगोई की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन 2016 में उसने बीजेपी के हाथों सत्ता गंवा दी. कर्नाटक में कांग्रेस ने 2013 के चुनाव में सत्ता में वापसी की थी, तब सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन 2018 के चुनाव में उनकी अगुवाई में कांग्रेस को हार मिली और बीजेपी सत्ता में लौटने में कामयाब रही.

लंबे इंतजार के बाद लौटे और गंवाई भी

केरल में ओमन चंडी की अगुवाई में कांग्रेस ने 2016 के चुनाव में वाम मोर्चा के हाथों सत्ता गंवा दी और अब तक वह यहां पर वापसी नहीं कर सकी है. पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर, मेघालय, मिजोरम में भी कांग्रेस ने धीरे-धीरे अपनी सत्ता गंवा दी.

उत्तराखंड में 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन यहां पर कई बार राजनीतिक अस्थिरता का दौर चला और जब 2017 में चुनाव कराए गए तो उसे शिकस्त मिली. यहां भी बीजेपी ने सत्ता में वापसी की. कांग्रेस का अब तक सत्ता में वापसी का इंतजार आज भी है.

बाद के सालों में कांग्रेस ने राजस्थान (2018), मध्य प्रदेश (2018), छत्तीसगढ़ (2018), हिमाचल प्रदेश (2022) और पंजाब (2017) जैसे राज्यों में सत्ता में वापसी भी की.

पंजाब में CM बदला, नहीं मिली जीत

हालांकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार (2017 से 2022) के कार्यकाल के अंदरुनी विवाद काफी गहराया रहा. कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले मुख्यमंत्री बनाए गए. फिर अमरिंदर का नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मुख्यमंत्री पद को लेकर संघर्ष चला. बाद में कांग्रेस आलाकमान ने अपनी नीति के उलट सत्ता बचाए रखने की कवायद के तहत अंतिम समय में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया. लेकिन उसका यह दांव काम नहीं आया और 2022 के चुनाव में पार्टी को आम आदमी पार्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

यही हाल राजस्थान का भी रहा जहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबी खींचतान चली, लेकिन आलाकमान ने गहलोत पर ही भरोसा जताया और राज्य में नेतृत्व नहीं बदला. हाल यह हुआ कि जब फिर से 2023 में चुनाव कराए गए तो कांग्रेस को करारी हार मिली. मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने लंबे इंतजार को खत्म किया, लेकिन कमलनाथ की सरकार महज 15 महीने ही चल सकी. छत्तीसगढ़ में भी नेतृत्व परिवर्तन की जोरदार मांग उठी थी, लेकिन भूपेश बघेल पर भरोसा जताया गया था.

दिल्ली के बाद लगातार जीत का सपना

अब देखना है कि कर्नाटक में जिस तरह से नेतृत्व को लेकर संघर्ष चल रहा है, उस पर पार्टी आलाकमान कैसा फैसला लेता है. पिछले 11 सालों में जिस तरह का ट्रेंड रहा है वह यही बताता है कि कांग्रेस एक ही मुख्यमंत्री पर भरोसा करती है. लेकिन सच्चाई भी यही है कि वह पार्टी को लगातार जीत भी नहीं दिला सका है. शीला दीक्षित ने आखिरी बार कांग्रेस को दिल्ली में लगातार जीत दिलवाई थी.

कांग्रेस की ओर से साल 2022 में लंबे संघर्ष और कवायद के बाद पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन कर जीत हासिल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वहां हालात इतने बिगड़ गए थे कि पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. खुद मुख्यमंत्री चन्नी को शिकस्त मिली. कर्नाटक को लेकर अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी के फैसले का इंतजार है. क्या 2023 में कर्नाटक में जीत के नायक माने गए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को मौका देकर कांग्रेस लगातार दूसरी जीत हासिल करने का एक दशक पुराना सपना पूरा करने की कोशिश करेगी.

“IND vs SA: टीम इंडिया गुवाहाटी टेस्ट हारी, गुवाहाटी की पिच पर क्या बोले गांगुली?

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भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपनी जमीन पर एक और टेस्ट सीरीज का अंत बेहद निराशाजनक और शर्मिंदगी भरा रहा. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन साउथ अफ्रीका ने अपनी उपलब्धि और खिताब को सही साबित करते हुए टीम इंडिया को टेस्ट सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप कर दिया.

जहां इस नतीजे ने टीम, फैंस और पूर्व खिलाड़ियों को निराश किया तो वहीं पूर्व कप्तान सौरव गांगुली इस मैच के बाद काफी खुश नजर आए. मगर उनकी खुशी की वजह टीम इंडिया की हार नहीं थी, बल्कि ये था गुवाहाटी स्टेडियम का टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू और एक अच्छे मुकाबले लायक पिच पेश करना.

टीम इंडिया को 408 रन के बड़े अंतर से हरा दिया. ये टेस्ट क्रिकेट में रन के लिहाज से टीम इंडिया की सबसे बड़ी हार है. इस हार के साथ ही भारतीय टीम ने सीरीज भी 0-2 से गंवा दी. इसके बाद से ही कोच गौतम गंभीर और पूरी टीम इंडिया की लगातार छीछालेदार हो रही है और वो सवालों के घेरे में हैं लेकिन इन सबके बीच गुवाहाटी स्टेडियम की पिच ने हर किसी को हैरान किया है.

गुवाहाटी की पिच पर क्या बोले गांगुली?

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और BCCI के पूर्व अध्यक्ष गांगुली बरसापारा स्टेडियम की पिच से प्रभावित नजर आए. गुवाहाटी टेस्ट खत्म होने के बाद गांगुली ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘पहले टेस्ट के लिए बधाई गुवाहाटी. शानदार टेस्ट पिच. स्टेडियम की सुविधाओं को लेकर मेरा अनुभव अच्छा रहा. हर किसी के लिए कुछ न कुछ था. यानसन के 5 विकेट, बल्लेबाजों ने रन बनाए और चौथे-पांचवें दिन स्पिन की भूमिका दिखी.’ गांगुली ने साथ ही साउथ अफ्रीका की तारीफ की, जबकि टीम इंडिया का हौसला बढ़ाया. उन्होंने लिखा, ‘साउथ अफ्रीका बहुत खास थी. युवा भारतीय टीम बदलाव से गुजर रही है. वो आगे बेहतर होंगे.’

ईडन गार्डन्स पर करना होगा काम

असल में गुवाहाटी में पहली बार टेस्ट मैच खेला गया था. ये भारत का 30वां टेस्ट वेन्यू बन गया. यहां मैच पूरे 5 दिन चला और फैंस का अच्छा खासा एंटरटेनमेंट हुआ. ये इसलिए भी खास था क्योंकि इससे ठीक पहले कोलकाता के ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेला गया टेस्ट मैच सिर्फ ढाई दिन में खत्म हो गया था, जिसके कारण यहां की पिच की आलोचना हो रही थी. संयोग से गांगुली ही इस वक्त बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी यही कोशिश होगी कि अगली बार ईडन गार्डन्स की पिच बेहतर खेले और उस पर सवाल न उठें.

“Thailand Flood: 33 मौतें.थाईलैंड में तबाही मचाने वाली बाढ़ क्यों आई? 300 साल में पहली बार दिखा ऐसा मंजर”

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थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से, खासकर हाट याई (Hat Yai) शहर में बाढ़ तबाही मचा रही है. मौसम विभाग ने इस बारिश को तीन सौ साल में एक बार होने वाली घटना कहा. सड़कों पर 22.5 मीटर तक पानी भर गया, अस्पतालों के निचले माले डूब गए, लाखों लोग प्रभावित हुए और पड़ोसी देशों वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया तक इसका असर देखा गया.

हाट याई में 21 नवंबर को सिर्फ 24 घंटे में 335 मिमी बारिश हुई, जिसे वहां की रॉयल इरिगेशन डिपार्टमेंट ने पिछले 300 सालों में सबसे ज्यादा दर्ज की गई बारिश बताया. ऐसे में सवाल उठता है कि हाल वर्षों में थाईलैंड में ऐसा क्या बदल गया कि सामान्य मॉनसून सीज़न ऐतिहासिक आपदा में बदल गया? आइए, कारणों को समझने की कोशिश करते हैं.

300 साल में एक बार का असली मतलब क्या है?

सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि तीन सौ साल में पहली बार के क्या मायने हैं? मौसम के संबंध में अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं. मानो कोई रहस्यमयी चक्र चल रहा हो. असलियत थोड़ी अलग है. मौसम वैज्ञानिक किसी घटना को 300-Year event कहते हैं तो उसका मतलब है कि हर साल उस स्तर की बारिश होने की संभावना लगभग 1/300 यानी 0.3% है. यह सांख्यिकीय अनुमान है, कोई निश्चित चक्र नहीं.

हाट याई में 19 से 21 नवंबर में करीब 630 मिमी बारिश हुई, जो 2010 की बड़ी बाढ़ (लगभग 428 मिमी) से बहुत ज्यादा थी. द नेशन लिखता है कि 21 नवंबर को अकेले एक दिन में 335 मिमी बारिश हुई. इसी को 300 साल के रिटर्न पीरियड वाली घटना माना जा रहा है. सरल भाषा में कहें तो, इस बार की बारिश सामान्य मौसम की सीमा से बहुत ज्यादा थी.

21 नवंबर को यहां एक दिन में 335 मिमी बारिश हुई, जिसने रिकॉर्ड बना दिया.

बाढ़ की सबसे बड़ी वजहें

थाईलैंड की रॉयल इरिगेशन डिपार्टमेंट और मौसम एजेंसियों के अनुसार, इस बार बाढ़ के पीछे दो बड़े तात्कालिक कारण थे. तेज़ और सक्रिय मॉनसून ट्रफ. यह कम दबाव की एक लंबी पट्टी होती है, जो दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में भारी बारिश का मुख्य कारण बनती है. नवंबर में यह ट्रफ असामान्य रूप से मजबूत थी और कई दिनों तक दक्षिणी थाईलैंड के ऊपर टिकी रही.

एक अलग कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Cell) भी ठीक उसी इलाके में बना रहा. जब यह लो प्रेशर सेल मॉनसून ट्रफ से जुड़ा, तो लगातार और व्यापक बारिश शुरू हो गई. नतीजा यह हुआ कि चुम्फोन से लेकर नाखोन सी थम्मारात, सोंगख्ला, याला और नाराथिवात तक देश के बड़े हिस्से में 24 घंटे के भीतर 300500 मिमी तक बारिश दर्ज की गयी. थाईलैंड का मीडिया समूह द नेशन लिखता है कि इसी वजह से हाट याई जैसे शहर, जो पहले ही बाढ़ प्रवण इलाके में हैं, सीधे इसका निशाना बने.

बाढ़ पीड़ित शहर हाट याई पुराने समय से ही नदियों और निचले मैदानों के किनारे बसा है.

बाढ़ में जलवायु परिवर्तन की कितनी भूमिका?

केवल एक लो प्रेशर या मॉनसून ट्रफ से इतनी ऐतिहासिक बाढ़ नहीं बनती, अगर पृष्ठभूमि में पूरा सिस्टम न बदला हो. यहीं पर क्लाइमेट चेंज तस्वीर में आता है. जलवायु वैज्ञानिक सालों से चेतावनी दे रहे हैं कि धरती के गरम होते वातावरण का सीधा असर बारिश के पैटर्न पर पड़ेगा. जैसे-जैसे औसत तापमान बढ़ता है, हवा में नमी रखने की क्षमता लगभग 7% प्रति 1°C बढ़ जाती है.

इसका मतलब यह है कि एक ही बादल अब पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा पानी समेट सकता है. इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्टों का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जो घटनाएं पहले सदियों में एक बार होने की मानी जाती थीं, वे अब धीरे धीरे न्यू नॉर्मल बनती जा रही हैं. इस साल दक्षिण पूर्व एशिया में दो बड़े जलवायु पैटर्न असामान्य रूप से एक साथ सक्रिय पाए गए.

ला नीना (La Niña): प्रशांत महासागर के मध्य भाग के ठंडा होने से हवा और नमी पश्चिम की ओर पहुंच गयी, जिससे इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड जैसे देशों में सामान्य से ज्यादा बारिश होती हुई देखी गई.

निगेटिव इंडियन ओशन डाइपोल (Negative IOD):

हिंद महासागर में ऐसा तापमान पैटर्न जिसमें पूर्वी हिस्से यानी इंडोनेशिया के पास समुद्र की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है. नतीजा, वहां बादल और बारिश बढ़ जाती है.

सिंगापुर बेस्ड चैनल न्यूज एशिया में छपे एक विश्लेषण में जलवायु वैज्ञानिक और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ मलेशिया के एमेरिटस प्रोफेसर फ्रेडोलिन टांगंग के हवाले से कहा गया है कि Moisture is fuel for extreme rainfall. Simple as that यानी नमी ही अतिवृष्टि का ईंधन है, बात इतनी ही सीधी है.

ला नीना और नेगेटिव IOD ने समुद्र की सतह को ज्यादा गर्म और नम बना दिया. ऊपर से मॉनसून ट्रफ और लो प्रेशर सेल ने इस नमी को एक जगह समेट कर छोड़ दिया और इसके परिणाम भयंकर हुए.

ज़मीन पर हमारी गलतियां भी कम नहीं

आसमान में घटने वाली प्रक्रियाएं अपनी जगह, लेकिन धरती पर इंसानी फैसले भी आपदा की गंभीरता तय करते हैं. थाईलैंड के मामले में कई मानवीय कारक सामने आते हैं. बाढ़ पीड़ित शहर हाट याई पुराने समय से ही नदियों और निचले मैदानों के किनारे बसा है. लेकिन हाल के दशकों में जहां नालों, जलभराव क्षेत्रों और प्राकृतिक जलमार्गों को खुला रहना चाहिए था, वहां सड़कों, मार्केट कॉम्प्लेक्स और घनी आवासीय बस्तियों ने जगह ले ली. सरकार ने पिछली बाढ़ों से सबक लेकर Khlong R.1 नाम की नई निकासी नहर बनाई, जो लगभग 1,200 क्यूबिक मीटर/सेकंड पानी निकालने की क्षमता रखती है लेकिन इस बार पड़ी बारिश उसकी डिज़ाइन क्षमता से भी आगे निकल गई. यानी इंफ्रास्ट्रक्चर उस पुराने मौसम को ध्यान में रखकर बना था, जो अब बदल चुका है.

पहाड़ी ढलानों पर निर्माण, पेड़ों की कटाई, और मिट्टी को पकड़ने वाली जड़ों का कम होना जैसे अनेक कारणों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि बारिश का पानी धीरे धीरे रिसने के बजाय तेज़ी से बहकर नीचे शहरों में पहुंचे. ब्रॉडशीट एशिया साफ साफ लिखता है कि शहरी विस्तार और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर ने लाखों लोगों को खुले खतरे के सामने खड़ा कर दिया.

थाई और क्षेत्रीय विशेषज्ञों की चेतावनी

थाई जलवायु विशेषज्ञ और रंगसित यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड डिज़ास्टर्स के डायरेक्टर सेरी सुप्रतित (Seree Supratid) ने सीएनए से बातचीत में कहा कि यह बाढ़ दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार, सरकारों और समाजों की तैयारी से तेज़ है. दूसरी ओर, थाई अख़बार द नेशन के एक विश्लेषण में आंकड़ों के साथ दिखाया गया कि जून 2025 में मध्य थाईलैंड में बारिश सामान्य से 37% कम थी जबकि नवंबर में वही क्षेत्र 358% ज्यादा बारिश झेल रहा है. यानी अब जोखिम यह नहीं कि सिर्फ सूखा या सिर्फ बाढ़ आएगी, बल्कि यह कि दोनों चरम स्थितियां तेज़ी से और बारी बारी से सामने आएँगी, जो समाज, कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कठिन चुनौती है.

थाई बाढ़ हमें क्या सबक देती है?

थाई बाढ़ के बारे में 300 साल में पहली बार कहना, केवल एक डरावना शीर्षक भर नहीं है. यह हमें कुछ गहरे सबक दे रही है. जलवायु परिवर्तन अब किताबों से निकलकर हमारे भूगोल में उतर चुका है. IPCC की जो चेतावनियाँ रिपोर्टों में पढ़ी जा रही थीं, वे अब हाट याई, वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया की बाढ़ के रूप में ज़मीन पर दिख रही हैं. केवल मौसम को दोष देना पर्याप्त नहीं, हमें अपने विकास मॉडल पर भी चर्चा करनी होगी. निचले इलाकों में शहर बसाना, नालों पर कब्ज़ा, मौजूदा बांध और ड्रेनेज सिस्टम मिलकर किसी भी चरम बारिश को तबाही में बदल देते हैं.

अब भी हम नहीं संभले तो आने वाले दिनों दुनिया मौसम का चरम आतंक देखेगी. समय आ गया है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर वैश्विक स्तर पर गंभीर कदम उठाए जाएँ, स्थानीय स्तर पर शहरों की योजना व इंफ्रास्ट्रक्चर को नई जलवायु हकीकत के मुताबिक ढालने की कोशिश हो. थाईलैंड की यह बाढ़ हमें एक साफ संदेश दे रही है कि मौसम बदल चुका है. अब हमें अपनी सोच, नीतियां भी बदलनी होंगी. यह समस्या केवल थाईलैंड की नहीं है, पूरी दुनिया मौसम के इस चरम स्थिति को लगातार महसूस कर रही है.

“इंडोनेशिया में कुदरत का कहर! भूस्लखन से परेशान सुमात्रा में अब लगे भूकंप के 2 बड़े झटके”

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दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में बैक टू बैक भूकंप के 2 बड़े झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप के दोनों ही झटके का केंद्र सुमात्रा के सिमुलुए नामक छोटे से द्वीप पर स्थित सिनाबंग शहर है.

पहला झटका सुबह 10 बजे के आसपास महसूस किया गया. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.6 दर्ज की गई. भूकंप का दूसरा झटका 12 बजे के आसपास महसूस की गई है. इसकी तीव्रता 4.4 दर्ज की गई है. भूकंप से कितना नुकसान हुआ है, इसकी कोई आधिकारिक रिपोर्ट अभी जारी नहीं की गई है.

इंडोनेशिया में इस साल का यह सबसे बड़ा भूकंप का झटका महसूस किया गया है. इंडोनेशिया रिंग ऑफ फायर की जद में है. यूएस जियोलॉजिकल विभाग के मुताबिक भूकंप की गहराई 16 मील मापी गई है. भूकंप करीब 7 सेकंड तक महसूस किया गया है.

लैंडस्लाइड से परेशान है इंडोनेशिया

इंडोनेशिया पहले से ही लैंडस्लाइड से परेशान है. बुधवार तक लैंडस्लाइड की वजह से सुमात्रा में 17 लोगों की मौत हो चुकी है. इंडोनेशिया मौसम विभाग के मुताबिक सुमात्रा इलाके में लगातार बारिश की वजह से भूस्खलन की घटना घटित हुई है. इस भूस्खलन में दर्जनों लोगों के गायब होने की खबर है.

इंडोनेशिया के पुलिस विभाग का कहना है कि भूस्खलन की वजह से कम से कम 4000 घरें ध्वस्त हो गई है. लोग सड़कों पर आ गए हैं. उन्हें फिलहाल के लिए राहत शिविर में भेजा गया है.

इंडोनेशिया और उसकी आबादी को जानिए

हिंद महासागर के किनारे पर स्थित इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया का एक अहम देश है. इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश भी है. इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्विपीय देश है और यहां पर करीब 17000 द्वीप स्थित हैं. रिंग ऑफ फायर की जद में स्थित इंडोनेशिया को काफी संवेदनशील माना जाता है.

इंडोनेशिया सरकार के मुताबिक देश की कुल आबादी 28 करोड़ के आसपास है. इंडोनेशिया में 87 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं.

“4.1 ट्रिलियन डॉलर का जैकपॉट! खुलेंगे करोड़ों नौकरी के दरवाजे, ‘हरित अर्थव्यवस्था’ बनाएगी ‘विकसित भारत'”

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भारत की ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (Green Economy) में 2047 तक 4.1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 340 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश आ सकता है. यह निवेश 4.8 करोड़ नए रोज़गार के अवसर भी पैदा करेगा.

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक स्टडी के मुताबिक ये बदलाव भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की राह में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. यह ग्रीन मार्केट 2047 तक सालाना $1.1 ट्रिलियन का हो सकता है.

इन सेक्टर्स में छिपी है खरबों की दौलत

अक्सर लोग हरित अर्थव्यवस्था को सिर्फ सौर ऊर्जा या इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित समझते हैं. लेकिन, CEEW की स्टडी ने 36 ऐसे विशिष्ट ग्रीन वैल्यू चेन की पहचान की है जो भारत के लिए 2047 का रोडमैप तैयार करते हैं. यह अवसर ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition), सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy), बायो-इकोनॉमी और प्रकृति-आधारित समाधानों तक फैला हुआ है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और एवरेस्टोन ग्रुप के अध्यक्ष जयंत सिन्हा ने साफ कहा है कि भारत का हरित संक्रमण विशुद्ध रूप से सकारात्मक है. यह रोज़गार, तेज़ विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूती देगा. उन्होंने ज़मीन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और निवेश के जोखिम को कम करने के लिए “ब्लेंडेड फाइनेंस” जैसे साधनों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया है.

सबसे ज़्यादा नौकरियां कहां?

स्टडी के अनुसार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हरित अर्थव्यवस्था के भीतर सबसे बड़ा नियोक्ता बनकर उभरेगा. अकेले ऊर्जा संक्रमण (Renewables, Storage, Distributed Energy, and Clean Mobility Manufacturing) से 1.66 करोड़ FTE (फुल-टाइम इक्विवेलेंट) नौकरियां और 3.79 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आएगा.

लेकिन असली गेमचेंजर ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में छिपा है. बायो-इकोनॉमी और प्रकृति-आधारित समाधान मिलकर करोड़ों नौकरियां पैदा कर सकते हैं . इस सेगमेंट में सबसे अधिक नौकरी देने वाले वैल्यू चेन में ये शामिल हैं.

रासायनिक-मुक्त कृषि और बायो-इनपुट्स: 72 लाख FTE नौकरियां

एग्रोफोरेस्ट्री और टिकाऊ वन प्रबंधन: 47 लाख FTE नौकरियां

वेटलैंड प्रबंधन (Wetland Management): 37 लाख FTE नौकरियां

पूर्व G20 शेरपा और NITI आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है. उनका मानना है कि 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए, भारत पश्चिम के विकास मॉडल का अनुसरण नहीं कर सकता. हमारे पास अपने शहरों, उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को शुरुआत से ही सर्कुलरिटी (Circular Economy) और स्वच्छ ऊर्जा के इर्द-गिर्द डिज़ाइन करने का एक अद्वितीय मौका है. यह ‘पोल वॉल्ट’ छलांग हमें विश्व में ग्रीन ग्रोथ के लिए एक नया मानदंड स्थापित करने की ताकत देगी.

CEEW के अभिषेक जैन ने इसे भारत के लिए ‘ज़रूरी’ बताया है. आज हम अपनी ज़रूरत का 87% कच्चा तेल आयात करते हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और बायोएथेनॉल के साथ शून्य हो सकता है. लिथियम, निकल, और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का 100% आयात भी सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से खत्म किया जा सकता है. यहां तक कि उर्वरक आयात पर हमारी भारी निर्भरता भी बायो-इनपुट्स के साथ समाप्त हो सकती है.

“एनटीटीएम ने पेश किया भारत का पहला वैज्ञानिक मॉडल, पानीपत में 28 नवंबर को होगा कार्यक्रम”

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कपड़ा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) ने एक परिवर्तनकारी परियोजना का समर्थन किया है जो तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में स्थिरता को नया स्वरूप प्रदान करता है।

इस परियोजना के परिणामस्वरूप आईआईटी दिल्ली के अंतर्गत पानीपत में अटल वस्त्र पुनर्चक्रण एवं स्थायित्व केंद्र की स्थापना हुई, जिसने दो अग्रणी पहलों, राष्ट्रीय ध्वज पुनर्चक्रण पहल और अरामिड फाइबर पुनर्चक्रण कार्यक्रम के माध्यम से प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं राष्ट्रीय उद्देश्य को एकीकृत किया है।

पंजाब, हरियाणा एंड दिल्ली चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) इन नवाचारों और वास्तविक दुनिया पर उनके प्रभावों को प्रदर्शित करने के लिए 28 नवंबर को पानीपत में एक समर्पित प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम परियोजना के अंतर्गत विकसित तकनीकों पर प्रकाश डालेगा, उद्योग एवं सरकार के हितधारकों को एक मंच पर लाएगा तथा तकनीकी वस्त्रों में नवाचार, स्थिरता और औद्योगिक एकीकरण को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की भूमिका को मजबूत करेगा।

भारत में पहली बार, सेवानिवृत्त राष्ट्रीय ध्वजों का गरिमापूर्ण पुनर्चक्रण करने के लिए एक संरचित एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। उद्योग साझेदार द्वारा लागू की गई यह परियोजना सुनिश्चित करती है कि तिरंगे के कपड़े और संरचनात्मक अखंडता सुरक्षित रहें या बिना गरिमा को नुकसान पहुंचाए इनका जिम्मेदारीपूर्वक पुनः उपयोग हो। यह मॉडल दर्शाता है कि स्थिरता को राष्ट्रभक्ति मूल्यों के साथ किस प्रकार जोड़ा जा सकता है और यह हर घर तिरंगा अभियान की भावना के साथ दृढ़ता से मेल खाता है।

इसके साथ ही, परियोजना के अरामिड फाइबर पुनर्चक्रण कार्यक्रम ने उच्च प्रदर्शन वाले अरामिड अपशिष्ट के प्रबंधन को महत्वपूर्ण समाधान प्रदान किया है, जो रक्षा, एयरोस्पेस और सुरक्षात्मक वस्त्रों में उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण सामग्री है। कई तकनीकी वस्त्र उद्योगों ने पहले ही इन अनुसंधान एवं विकास परिणामों को अपनाना शुरू कर दिया है, जो मजबूत उद्योग विश्वास को दर्शाता है और अनुसंधान को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने में मिशन की सफलता को रेखांकित करता है।

“‘बिहार चुनाव में 5 पांडवों की तरह एकजूट लड़ीं NDA की 5 पार्टिंयां’, जेपी नड्डा के आवास पर सम्मानित हुए नेता”

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बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की बड़ी जीत का जश्न मनाने और BJP की स्पेशल 45 टीम को सम्मान देने के लिए, दिल्ली में BJP प्रेसिडेंट जेपी नड्डा के घर पर डिनर मीटिंग रखी गई। डिनर में सेंट्रल नेताओं ने अपने अनुभव शेयर किए और बंगाल समेत आने वाले चुनावों की तैयारी के लिए हिम्मत बढ़ाई।

जेपी नड्डा के घर पर हुई डिनर मीटिंग में विजय सिन्हा, नरोत्तम मिश्रा, सिद्धार्थ नाथ सिंह, नित्यानंद राय, शलभ मणि त्रिपाठी और सुब्रत पाठक समेत कई नेता शामिल हुए। डिनर में बुलाए गए सभी BJP नेताओं को मिथिला का मशहूर मखाना, गया का तिलकुट और मधुबनी पेंटिंग से सजा शॉल गिफ्ट में दिया गया।

डिनर मीटिंग में होम मिनिस्टर ने क्या कहा

आज की मीटिंग में होम मिनिस्टर अमित शाह ने कहा कि बिहार चुनाव में NDA की जीत पूरे देश की जीत है। बिहार की जीत देश से घुसपैठियों को निकालने के हर भारतीय के इरादे को दिखाती है। लोगों का मोदी की लीडरशिप पर अटूट प्यार और भरोसा है। बिहार के लोगों ने मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी को दिल से सपोर्ट किया। बिहार चुनाव NDA की एकता और ताकत की जीत है। बिहार चुनाव में NDA के पांचों दलों ने पांच पांडवों की तरह जो एकता दिखाई, वह तारीफ के काबिल थी। बिहार के लोगों ने दिखा दिया कि मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार, जो न सिर्फ वादे पूरे करती है बल्कि उन्हें पूरा भी करती है, लोगों की पसंद है। इस जीत में जेडीयू कार्यकर्ताओं की मेहनत की जितनी तारीफ की जाए कम है।

गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत ने अपनी मेहनत से बिहार चुनाव के नतीजों को ऐतिहासिक बनाया। उन्होंने हर कार्यकर्ता को सलाम किया। उन्होंने सभी नेताओं की कड़ी मेहनत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि चुनाव में 1 परसेंट योगदान भी ज़रूरी है, लेकिन किसी भी नेता को यह नहीं सोचना चाहिए कि जीत इसी वजह से हुई है, क्योंकि इससे घमंड आता है। आपकी ज़िम्मेदारी चुनाव लड़ना नहीं थी, बल्कि “जहां कम, वहां हम” की भूमिका निभानी थी। हम सभी को बंगाल में होने वाली लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। हमेशा वर्कर मोड में रहें, आप कहीं भी पोस्टेड हो सकते हैं।