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Weather: इन इलाकों में चलेगी शीतलहर, पड़ेगी कड़ाके की ठंड, कैसा रहने वाला है मौसम का हाल…

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मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटे उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के एक दो स्थानों पर शीतलहर की चेतावनी जारी की है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदल चुका है। ठंड ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। प्रदेश में सुबह और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इसी बीच मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटे उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के एक दो स्थानों पर शीतलहर की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने ठंड को ले कर येलो अलर्ट जारी किया है।

प्रदेश में सबसे न्यूनतम तापमान अम्बिकापुर में 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं राजनांदगांव में 8.5 डिग्री सेल्सियस, दुर्ग में 10.2 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर में 13.2 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रा रोड में 10.4 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर 14.3 डिग्री सेल्सियस और राजधानी रायपुर रायपुर माना एयरपोर्ट 10.5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण छत्तीसगढ़ में तापमान में गिरावट हो रही है। उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना है। इन जिलों में रायपुर, कोरिया, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे जिले शामिल है।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में बीते कुछ दिनों में औसतन तापमान में गिरावट दर्ज हुई है और आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। अंबिकापुर में 7.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किय गया है। मौसम विभाग का कहना है कि, उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना है।

लाल आतंक पर एक और बड़ा वार, मुठभेड़ में तीन खूंखार नक्सली ढेर, कई बड़ी वारदातों में थे शामिल…

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सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। यहां जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं। वहीं जवानों और नक्सलियों के बीच अब भी मुठभेड़ जारी है। सुकमा एसपी लगातार जवानों के संपर्क में हैं और मुठभेड़ के अपडेट ले रहे हैं।

मुठभेड़ के बीच जानकारी निकलकर सामने आई है कि, मारे गए तीनों नक्सलियों की पहचान हो चुकी है। मरने वाले नक्सलियों में जनमिलिसिया कमांडर स्नाइपर स्पेशलिस्ट एरिया कमेटी सदस्य माड़वी देवा, CNM कमांडर पोड़ियम गंगी और किस्टाराम की एरिया कमेटी सदस्य (इंचार्ज सचिव) सोड़ी गंगी शामिल है। तीनों ही नक्सली कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

DRG जवानों और नक्सलियों के बीच भेज्जी चिंतागुफा के बीच के इलाके में मुठभेड़ हुई है। वहीं इस मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं। नक्सलियों के मरने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। सुकमा एसपी किरण चव्हाण लगातार जवानों के संपर्क में हैं और पल-पल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि, मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। गृहमंत्री शाह की घोषणा पर छत्तीसगढ़ सरकार अमल कर रही है। गृहमंत्री शाह के ऐलान के बाद से जवान सक्रीय हो गए हैं और नक्सलियों को मौत के घाट उतार रहे हैं। जवानों ने अब तक कई बड़े नक्सलियों को मौत की नींद सुला दिया है। वहीं जवानों की कार्रवाई को देखते हुए कई बड़े नक्सलियों ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है।

धान खरीदी का महाअभियान शुरू, 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा किसानों को मूल्य…

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छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू कर दी है। इस वर्ष भी किसानों को प्रति क्विंटल ₹3,100 प्रति क्विंटल तय किया गया है। धान खरीदी का महाअभियान राज्य के सभी जिलों में 31 जनवरी तक चलेगा।

रायपुर। राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू कर दी है। इस वर्ष भी किसानों को प्रति क्विंटल ₹3,100 प्रति क्विंटल तय किया गया है। धान खरीदी का महाअभियान राज्य के सभी जिलों में 31 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर धान खरीदी के लिए चाक-चौबंद और पारदर्शी व्यवस्था की गई है। इस साल राज्य में 2,739 धान खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, भुगतान की सुविधा सुगम बनाने के लिए माइक्रो एटीएम भी स्थापित किए गए हैं। खरीदी के पहले दिन प्रदेश के 195 उपार्जन केन्द्रों में 19,464 क्विंटल धान की खरीदी की गई।

खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने सख्ती दिखाते हुए एस्मा एक्ट 1979 लागू कर दिया है। धान खरीदी को अतिआवश्यक सेवा मानते हुए, सरकार ने 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक पूरी अवधि के लिए कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 लागू कर दिया है। आदेश के मुताबिक, खरीदी में ड्यूटी पर लगाए गए सभी कर्मचारियों (समिति प्रबंधक, आरईओ, पटवारी, पंचायत विभाग के कर्मचारी आदि) को काम करना अनिवार्य होगा। लापरवाही बरतने या काम करने से इनकार करने वाले कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी और उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है।

विपणन संघ द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से 2,739 डेटा एंट्री ऑपरेटरों की व्यवस्था करके धान खरीदी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी कलेक्टरों एवं धान उपार्जन से संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उपार्जन कार्य को व्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी रूप से संचालित किया जाए।

धान खरीदी के पहले दिन राज्यभर के खरीदी केंद्रों में किसानों का स्वागत फूल-मालाओं के साथ किया गया। विभिन्न जिलों में मंत्री, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने धान खरीदी का विधिवत् शुभारंभ किया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बिलासपुर जिले के सेंदरी धान खरीदी केंद्र में खरीदी की शुरुआत की, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के महाराजपुर धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी का शुभारंभ किया। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सूरजपुर जिले के चंद्रपुर धान खरीदी केंद्र में विधि-विधान के साथ खरीदी प्रारंभ की और किसानों का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने बलरामपुर जिले के डौरा-कोचली धान खरीदी केंद्र में पहुंचकर किसानों का स्वागत करते हुए खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत की।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर जिले के पल्ली धान खरीदी केंद्र में पूजा-अर्चना कर खरीदी अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इसी क्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कांकेर जिले के मालगांव धान खरीदी केंद्र में इलेक्ट्रानिक तौल मशीन और किसानों द्वारा लाए गए धान की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर खरीदी का आरंभ किया। कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने महासमुंद जिले के झालखमरिया धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी की औपचारिक शुरुआत की। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने रायगढ़ जिले के कोड़ातराई उपार्जन केंद्र में धान खरीदी योजना का विधिवत शुभारंभ किया।

जननायक बिरसा मुंडा की शहादत अविस्मरणीय : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

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– वनवासी क्षेत्रों का हो रहा विकास, दूरस्थ क्षेत्रों में बिछाया जा रहा सड़कों का जाल
– छत्तीसगढ़ में दिखाई दे रहा परिवर्तन
– प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 18 लाख आवास बनाए गए
– वनवासी परिवारों को मिले 7 लाख आवास
– विधानसभा अध्यक्ष जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

राजनांदगांव। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में सम्मलित हुए। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े रहे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वाईसन हॉर्न मुकुट पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया गया।

उन्होंने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं महिलाओं को सम्मानित किया। अपने उद्बोधन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सभी को जनजातीय दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज देश के 700 जिलों में इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश पहुंच रहा है कि हम जननायक बिसरा मुंडा की शहादत को नहीं भुलेंंगे और उनकी याद को अक्षुण्य बनाए रखेंगे। अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ झारखंड में बिरसा मुंडा ने विद्रोह किया।

उन्होंने झारखंड के युवाओं को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। बिरसा मुण्डा को भगवान की उपाधि दी गई है और लोकगीत, लोककथाओं एवं जनश्रुतियों में उनका वर्णन मिलता है। उनकी अद्भुत शक्ति के कारण छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में उनका व्यापक प्रभाव पड़ा। बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ वनवासी युवाओं ने विद्रोह कर युद्ध की घोषणा की। जिसे दबाने के लिए अंग्रेजों ने भीषण नरसंहार किया। बिरसा मुंडा ने देश के लिए अपनी शहादत दी। उनके संघर्षों को हम आज नमन करते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के अनुरूप वनवासी क्षेत्रों का विकास हो रहा है तथा दूरस्थ क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। प्रदेश में कुपोषण, गरीबी एवं पलायन को रोकने के लिए खाद्यान्न सुरक्षा योजना लाई गई, जिसके माध्यम से वनवासी लाभान्वित हुए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वनवासियों के लिए तेंंदूपत्ता संग्राहकों को 4000 रूपए से बढ़ाकर 5500 रूपए पारिश्रमिक कर दिया है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 12 हजार करोड़ रूपए की लागत से 18 लाख आवास बनाए गए, जिनमें से 7 लाख आवास वनवासियों को मिला है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

हर गांव में पेयजल, बिजली एवं अन्य सुविधाओं का विकास हो रहा है। वनवासी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या होने पर धरती आबा योजना अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों में पेयजल, शिक्षा, राशन, स्वास्थ्य एवं विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए किया जा रहा है। हमारा देश, गौरव, अस्मिता, स्वाभिमान, हमारी संस्कृति, मिट्टी से जुड़ा है। संस्कृति एवं संस्कार की रक्षा के लिए वीरों ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है। इतिहास में ऐसे महानायक जो कही न कही विस्मृत हो गए, ऐसे पूर्वजों को याद करने के लिए आज का यह दिन महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर समाज के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने बिरसा मुण्डा के जीवन यात्रा के संबंध में जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल श्री योगेशदत्त मिश्रा, जिला पंचायत सदस्य श्री प्रशांत कोड़ापे, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती बिरम मंडावी, जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल सिंह भुआर्य, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनिता मंडावी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती देवकुमारी, पार्षद श्री सेवक उईके, समाज सेवी श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री सचिन बघेल, श्री सुमित उपाध्याय, श्री भावेश बैद, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सुश्री दीक्षा गुप्ता, जनजातीय समाज के प्रतिनिधि श्री आत्माराम चंद्रवंशी, श्री एमडी ठाकुर, श्री नीलकंठ गढ़े, श्रीमती सुशीला नेताम, श्री एचआर ठाकुर, श्री राहुल नेताम, श्री गेमू लाल कुंजाम, श्री आरएस नायक, श्रीमती पुष्पा उईके, श्री ललित कुमरे, श्री आरपी ठाकुर, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, समाज के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने धान उपार्जन केन्द्र भानपुरी में पूजा-अर्चना कर धान खरीदी का किया शुभारंभ… 

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– किसानों से खेती-किसानी के संबंध में चर्चा कर धान विक्रय के लिए दी शुभकामनाएं
– शासन द्वारा समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी से किसानों में हर्ष व्याप्त

राजनांदगांव। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज राजनांदगांव विकासखंड के धान उपार्जन केन्द्र भानपुरी में इलेक्ट्रानिक कांटा बाट मशीन में धान का बारदाना रखकर पूजा-अर्चना कर धान खरीदी का शुभारंभ किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किसानों को फूल माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह धान खरीदी केन्द्र में धान की बिक्री के लिए पहुंचे किसानों से रूबरू हुए। उन्होंने किसानों से खेती-किसानी के संबंध में चर्चा की और किसानों को धान विक्रय के लिए शुभकामनाएं दी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 अंतर्गत आज से पूरे प्रदेश में धान खरीदी की शुरूआत हो रही है और प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक धान खरीदी की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक के मान से धान खरीदी की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा किसानों को धान का वाजिब कीमत देने, समय पर खरीदी करने, समय पर उठाव करने तथा अन्य कार्यों के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी के संबंध में किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से संपर्क कर सकते है।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने जिले में शुरू की गई धान खरीदी के संबंध में जानकारी दी। कलेक्टर ने बताया कि जिले में सभी 96 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी की जाएगी। धान खरीदी हेतु इस वर्ष 1 लाख 28 हजार 410 कृषकों का पंजीयन किया गया है। सभी उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त संख्या में बारदाने उपलब्ध है। धान खरीदी के लिए मानव संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। धान खरीदी हेतु टोकन जारी किया जा रहा है। किसान टोकन के माध्यम से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक धान ब्रिकी कर सकते है। इस अवसर पर समाज सेवी श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री सचिन बघेल, श्री सुमित उपाध्याय, श्री भावेश बैद, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, एडीएम राजनांदगांव श्री गौतमचंद पाटिल, खाद्य अधिकारी श्री रविन्द्र सोनी, केन्द्रीय सहकारी समिति के सीईओ श्री सोनी सहित सहकारी समितियों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

“PM नरेंद्र मोदी ने देवमोगरा मंदिर में किए दर्शन, जानें यहां किसकी पूजा होती है और इतिहास?”

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बिहार में विधानसभा चुनाव में मिली जीत के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी अनेक स्थानों पर गए। इनमें से सबसे खास जगह थी नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में स्थित देवमोगरा मंदिर।

बहुत कम लोग इस मंदिर से जुड़ी बातें जानते हैं जैसे यहां किसकी पूजा होती है और इस मंदिर का इतिहास क्या है और मंदिर इसी दिन क्यों देवमोगरा मंदिर गए? आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

देवमोगरा मंदिर में किसकी पूजा होती है?

नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में स्थित देवमोगरा मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में पंडोरी माता को समर्पित है। पंडोरी माता को गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी लोग अपनी कुलदेवी मानते हैं। इसलिए यहां दिन भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। 15 नवंबर को आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ने वाले नायक बिरसा मुंडा की जयंती होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवमोगरा धाम पहुंचकर पंडोरी माता के दर्शन किए।

क्यों खास है देवमोगरा धाम?

आदिवासी समुदाय की कुलदेवी का मंदिर होने के कारण देवमोगरा धाम बहुत ही प्रसिद्ध है। बाहर से देखने पर ये नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर जैसा दिखाई देता है। ये मंदिर सतपुड़ा की पर्वतमालाओं में प्रकृति की गोद आस्था व श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व राजस्थान के आदिवासी जनजाति के लोग यहां भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

कौन हैं आदिवासियों की कुलदेवी पंडोरी माता?

पंडोरी माता से जुड़ी एक प्रचलित कथा है, उसके अनुसार, हजारों साल पहले पृथ्वी पर भीषण अकाल पड़ा। इंसान तो क्या पशु-पक्षियों के लिए अनाज और पानी की समस्या पैदा हो गई। उस समय गोर्या कोठार नाम के व्यक्ति ने अपने अनाज भंडार से लोगों को अन्न देना शुरू किया, लेकिन कुछ समय बाद उसका अन्न भंडार भी खाली होने लगा। तब उनकी पुत्री याहा पांडोरी ने कणी-कंसरी का रूप धारण कर अन्न वितरण का काम संभाला। इसके बाद उस अनाज के भंडार में कोई कमी नहीं आई। पांडोरी को आदिवासियों ने अपनी कुलदेवी स्वीकार कर उनकी पूजा करना शुरू की। तभी ये ये परंपरा चली आ रही है।

यहां देखी जाती है आदिवासी संस्कृति की झलक

आदिवासी समुदाय द्वारा समय-समय पर देवमोगरा धाम में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर यहां 5 दिनों तक एक मेला लगता है, जिसमें हजारों आदिवासी अपनी कुलदेवी के दर्शन करने आते हैं। इस दौरान वे नई फसल को बांस की टोकरी में रखकर देवी को समर्पित करते हैं। महिला-पुरुष रंग-बिरंग वस्त्र पहनकर जुलूस निकालते हैं, जिसे होब यात्रा कहते हैं। कुछ लोग तो सवा महीने का व्रत-उपवास करने के बाद यहां दर्शन करने आते हैं। होली के मौके पर भी यहां की रौनक देखते ही बनती है।

इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

Eid Al Etihad UAE? देशभर में जमकर चल रही तैयारियां”

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यूएई को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. देश में इस समय जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं. यह सभी तैयारियां देश के नेशनल डे के सेलिब्रेशन के लिए चल रही हैं. जिसे Eid Al Etihad भी कहा जाता है.

इस मौके पर शारजाह में जश्न मनाया जाएगा.

शारजाह संयुक्त अरब अमीरात की एकता, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की यात्रा को याद करते हुए 54वें ईद अल इत्तिहाद के भव्य उत्सव की तैयारी कर रहा है. 19 नवंबर से 2 दिसंबर 2025 तक देश भर में पार्कों, ऐतिहासिक स्थलों में रंगीन परेड, आकर्षक प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक प्रदर्शन और इंटरएक्टिव गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. परिवारों, युवाओं और समुदायों के लिए यह ऐसा मौका होगा जहां वो अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए राष्ट्र की उपलब्धियों का जश्न मना सकेंगे.

पार्कों में होंगे कार्यक्रम आधिकारिक उद्घाटन बुधवार, 19 नवंबर को शाम 5:00 बजे अल सियूह फैमिली पार्क में होगा, जिसमें पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां सभी आयु वर्गों के लिए प्रतियोगिताएं कलात्मक और ड्रामा युवाओं की चर्चा पैनल सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियां होंगी.

खशीशा पार्क और शारजाह नेशनल पार्क भी पूरे उत्सव के पीरियड के दौरान दैनिक गतिविधियों की मेजबानी करेंगे, जिनमें युवाओं के पैनल, बच्चों के शो और पारंपरिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी.

पहली बार, अल लैयाह कैनाल भी 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक उत्सव स्थलों में शामिल होगा, जहां राष्ट्रीय प्रस्तुतियां और पारिवारिक व्यवसाय प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी, जिससे उत्सवों का दायरा नए दर्शकों तक बढ़ेगा.

कई सितारे करेंगे परफॉर्म शारजाह के उत्सवों में कई प्रमुख कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनमें: खोरफक्कान एम्फीथिएटर (29 नवंबर): देश के सितारों हुसैन अल जस्मी और फुआद अब्देलवाहद का शो होगा खोरफक्कान (21 नवंबर): ओपरेट्टा (Operetta) पल्स ऑफ द नेशन कल्बा (22 नवंबर से):वार्षिक ओपरेट्टा, आतिशबाजी के साथ दिब्बा अल हसन (22 नवंबर): राष्ट्रीय परेड और आतिशबाजी

ये कार्यक्रम देशभक्ति की भावना और सांस्कृतिक गौरव से भरपूर शामों का वादा करते हैं, जो यूएई की कलात्मक प्रतिभा को उजागर करेंगे.

कई जगह की जाएगी परेड

पूरे शारजाह में विभिन्न मोहल्लों और ऐतिहासिक स्थलों पर कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:

अल बतायेह (2729 नवंबर): परेड, लोक प्रस्तुतियां अल धैद (2630 नवंबर): भव्य परेड और हेरिटेज मार्केट अल हमरिया हेरिटेज विलेज (2022 नवंबर): पारंपरिक गीत और क्लासिक कार प्रदर्शनी वाडी अल हिलो (23 नवंबर): कविता पाठ और छात्र प्रस्तुतियां अल ख्रूस उपनगर (28 नवंबर): परेड अल मदाम (2223 नवंबर): सांस्कृतिक चर्चाएं और वीडियो स्क्रीनिंग मलैहा हेरिटेज विलेज (2021 नवंबर): रेगिस्तानी माहौल में मिलिट्री बैंड और लोक नृत्य मुगैदर उपनगर (अल रिफा पार्क, 2122 नवंबर): साइकिल परेड और पारंपरिक कार्यक्रम.

इन सभी कार्यक्रमों का मकसद शारजाह की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना, समुदायों को जोड़ना और एकता, निष्ठा और राष्ट्रीय गर्व के मूल्यों को मजबूत करना है.

क्यों कहा जाता है ईद अल इत्तिहाद?

सवाल उठता है कि देश के नेशनल डे को ईद अल इत्तिहाद क्यों कहा जाता है. दरअसल, ईद अल इत्तिहाद शब्द का अर्थ अरबी में फेस्टिवल ऑफ द यूनियन होता है. इसमें इत्तिहाद यानी यूनियन/एकता पर जोर दिया गया है-जो यूएई की राष्ट्रीय पहचान का मूल है. यह नाम देश की स्थायी विरासत, शक्ति और गर्व के मूल्यों का प्रतीक है.

ईद अल इत्तिहाद हर साल 2 दिसंबर को आधिकारिक रूप से मनाया जाता है. यह 1971 के उस ऐतिहासिक दिन की याद है जब 7 अमीरात एकजुट होकर संयुक्त अरब अमीरात बने. 2024 में, यूएई के नेशनल डे समारोहों को आधिकारिक रूप से ईद अल इत्तिहाद का नाम दिया गया.

“छठ को यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने से क्या-क्या बदलेगा? PM मोदी के बयान से चर्चा शुरू”

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बिहार विधान सभा चुनाव से गदगद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक आस्था के पर्व छठ पर्व को यूनेस्को की हेरिटेज सूची में शामिल कराने के प्रयासों के बारे में बात की. वे नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कांग्रेस और आरजेडी पर तंज भी कसा कि इनके नेताओं ने अभी तक छठ मैया से माफी भी नहीं मांगी है.

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अगर केंद्र सरकार छठ पर्व को यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल करवा पाती है तो असल में क्या-क्या बदलेगा? तब इसका स्वरूप कैसा हो जाएगा? आइए, पीएम की इस घोषणा के बहाने समझते हैं.

लोक आस्था का पर्व छठ

छठ पर्व आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रह गया है, बल्कि यह लोक आस्था, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक समरसता का अनोखा उदाहरण है. साल-दर-साल इस पर्व की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. पर्व विस्तार ले रहा है. देश का शायद ही कोई राज्य हो जहां छठ पर्व न मनाया जाता हो. इसे यदि यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में (इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज / अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर) की सूची में शामिल किया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल बिहार या पूर्वी भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सकारात्मक बदलाव दिखेंगे.

यूनेस्को सूची में शामिल करने का मतलब

यूनेस्को (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र की वह संस्था है जो शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करती है. जब कोई त्योहार, लोक-कला, परंपरा या ज्ञान प्रणाली यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल होती है, तो इसका अर्थ होता है कि वह परंपरा मानव सभ्यता के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है. उसे बचाने, संजोने और आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी केवल उस क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की मानी जाती है. उस परंपरा के दस्तावेज़ीकरण, शोध और संरक्षण के लिए अतिरिक्त सहयोग और ध्यान मिलता है. यदि छठ पर्व को यह दर्जा मिलता है, तो इसे एक वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी मान्यता मिलेगी.

छठ पर्व के यूनेस्को हेरिटेज बन जाने से क्या-क्या बदलेगा?

  • वैश्विक पहचान और सम्मान में वृद्धि:

अभी छठ मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और प्रवासी भारतीय समुदायों के बीच मनाया जाता है. यूनेस्को की सूची में आने के बाद दुनिया के अलग-अलग देशों के लोग इस पर्व के बारे में जानेंगे. छठ को केवल स्थानीय या क्षेत्रीय त्योहार नहीं, बल्कि विश्व-स्तरीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाएगा. यह बिहार और पूर्वी भारत की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करेगा.

  • संरक्षण और शुद्धता पर ज़्यादा ध्यान:

छठ की खासियत इसकी सादगी, पवित्रता और अनुशासन है. यूनेस्को दर्जा मिलने के बाद सरकार और समाज दोनों पर यह नैतिक दबाव बढ़ेगा कि छठ की मूल भावना और पारंपरिक रूप बरकरार रहे. नदी-घाटों की साफ-सफाई, प्रदूषण पर नियंत्रण, कृत्रिम रंग और प्लास्टिक के उपयोग पर रोक जैसे कदमों पर अधिक गंभीरता से काम किया जाएगा. पारंपरिक गीत, लोककथाएं, मान्यताएं और छठ से जुड़े लोक-संगीत का व्यवस्थित रिकॉर्ड और दस्तावेज़ तैयार किया जा सकेगा.

  • पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:

जब कोई पर्व या स्थान यूनेस्को की सूची में आता है, तो देश-विदेश से पर्यटक और शोधकर्ता उससे जुड़ने आते हैं. छठ के समय पटना, गया, देव (औरंगाबाद), भागलपुर, मुज़फ्फरपुर जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ सकता है. स्थानीय कारीगरों, दुकानदारों, फल-सब्जी विक्रेताओं, परिवहन सेवा और होटल-धंधे को आर्थिक लाभ होने की संभावना बनेगी. पर्यटन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं.

  • शोध, अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण में तेजी:

विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों में छठ पर शोध कार्य बढ़ेगा. छठ के ऐतिहासिक विकास, लोकविश्वास, गीत-संगीत, महिला-केन्द्रित भूमिका और पर्यावरणीय दृष्टिकोण पर गंभीर अध्ययन होंगे. इससे नई पीढ़ी के लिए छठ केवल करने वाला पर्व नहीं, बल्कि समझने और सीखने वाली परंपरा बन सकेगा.

  • प्रवासी भारतीय समुदायों के लिए गर्व का विषय:

दुनिया भर में बसे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग छठ को बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. यूनेस्को की मान्यता उन्हें अतिरिक्त सांस्कृतिक आत्मविश्वास देगी. विदेशों में छठ-समारोह अधिक व्यवस्थित और मान्यता प्राप्त रूप में हो सकेंगे.

क्या बिहार का कोई स्थान या इमारत पहले से यूनेस्को की सूची में है?

हां, बिहार के कुछ बेहद महत्वपूर्ण स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में पहले से शामिल हैं. यह दिखाता है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से कितना समृद्ध है.

बोधगया  एक:

महाबोधि मंदिर, बोधगया यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. इसे साल 2002 में शामिल किया गया था. यही वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था. यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विश्व का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. मंदिर की स्थापत्य कला, शांति का वातावरण और ऐतिहासिक महत्व इसे वैश्विक स्तर पर अत्यंत विशिष्ट बनाते हैं. यूनेस्को सूची में शामिल होने के बाद यहां पर्यटन, संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले से अधिक बढ़ा है.

नालंदा. दो:

नालंदा महाविहार (पुरातात्त्विक अवशेष): नालंदा का प्राचीन विश्वविद्यालय, जिसे नालंदा महाविहार कहा जाता है, भी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. इसे साल 2016 में शामिल किया गया. यह प्राचीन काल में विश्व के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक था. यहां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन करने आते थे. आज नालंदा के खंडहर हमें उस गौरवशाली शैक्षिक परंपरा की याद दिलाते हैं, जो ज्ञान के मुक्त आदान-प्रदान पर आधारित थी. यूनेस्को दर्जा मिलने के बाद नालंदा के संरक्षण, व्यवस्थित खुदाई, संग्रहालय और पर्यटन सुविधाओं में सुधार हेतु लगातार काम हो रहा है.

यूनेस्को हेरिटेज लिस्ट और बिहार की छवि

महाबोधि मंदिर और नालंदा महाविहार के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने से बिहार की यह पहचान बनी है कि यह केवल एक पिछड़ा या प्रवासी-आधारित राज्य नहीं, बल्कि प्राचीन ज्ञान, अध्यात्म, बौद्ध धर्म, शिक्षा और संस्कृति का वैश्विक केन्द्र रहा है. यदि छठ पर्व भी यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल हो जाता है, तो यह बिहार की आधुनिक सांस्कृतिक पहचान को भी उतनी ही मजबूती से सामने रखेगा, जितनी ऐतिहासिक स्थल रखते हैं.

छठ और यूनेस्को, समाज के स्तर पर संभावित बदलाव

यदि छठ को यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया जाए, तो समाज में कुछ और सकारात्मक बदलाव भी देखे जा सकते हैं. छठ में जाति, वर्ग, धर्म, अमीरी-गरीबी का भेद कम हो सकता है. यूनेस्को की मान्यता के बाद यह पर्व समावेशी समाज का वैश्विक उदाहरण बन सकता है. महिलाओं की भूमिका पर नया विमर्श संभावित है. छठ में व्रत धारण करने वाली महिलाएँ परिवार और समाज के केन्द्र में रहती हैं. इस पर्व के अध्ययन से महिलाओं की सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका पर नई सकारात्मक बहसें जन्म लेंगी. पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ सकती है. छठ का मूल भाव सूर्य, जल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता है. यदि इसे वैश्विक मंच पर पर्यावरण-उन्मुख त्योहार के रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो लोगों में नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति अधिक जागरूकता पैदा होगी.

“Petrol Diesel Price: फटाफट से करवा लें टंकी फुल! हो गया पेट्रोल-डीजल सस्ता, जानें किन शहरों में घटे दाम”

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वीकेंड आ चुका है। अगर आप सैटरडे और संडे को कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो गाड़ी में तेल भरवाने से पहले आज के लेटेस्ट रेट्स ज़रूर देख लें। तेल विपणन कंपनियों ने आज 15 नवंबर 2025 के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें जारी कर दी हैं।

देश के बड़े महानगरों नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में आज कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि कई शहरों में दाम घटे हैं वहीं कुछ शहरों खासकर पटना में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

क्यों घटते-बढ़ते हैं ईंधन के दाम?

तेल विपणन कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन की कीमतों को अपडेट करती हैं। यह बदलाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुसार किया जाता है। कंपनियां पारदर्शिता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को सटीक दरें सुनिश्चित करने के लिए रोज़ाना भाव जारी करती हैं।

आज पेट्रोल की कीमत (₹ प्रति लीटर)

यहां कल के मुकाबले पेट्रोल के दाम में हुए बदलाव दिए गए हैं:

शहर कीमत (₹/लीटर) बदलाव (₹ में)

नई दिल्ली 94.77 0.00

कोलकाता 105.41 0.00

मुंबई 103.50 0.00

चेन्नई 100.90 +0.10

गुड़गांव 95.36 -0.29 (सस्ता)

नोएडा 94.77 -0.10 (सस्ता)

बैंगलोर 102.92 0.00

भुवनेश्वर 100.94 -0.17 (सस्ता)

चंडीगढ़ 94.30 0.00

हैदराबाद 107.46 0.00

जयपुर 104.38 -0.34 (सस्ता)

लखनऊ 94.57 -0.16 (सस्ता)

पटना 106.11 +0.88 (महंगा)

तिरुवनंतपुरम 107.48 -0.01 (सस्ता)

आज डीजल की कीमत (₹ प्रति लीटर)

यहां कल के मुकाबले डीजल के दाम में हुए बदलाव दिए गए हैं:

शहर मत (₹की/लीटर) बदलाव (₹ में)

नई दिल्ली 87.67 0.00

कोलकाता 92.02 0.00

मुंबई 90.03 0.00

चेन्नई 92.48 +0.09

गुड़गांव 87.82 -0.28 (सस्ता)

नोएडा 87.89 -0.12 (सस्ता)

बैंगलोर 90.99 0.00

भुवनेश्वर 92.52 -0.17 (सस्ता)

चंडीगढ़ 82.45 0.00

हैदराबाद 95.70 0.00

जयपुर 89.90 -0.31 (सस्ता)

लखनऊ 87.67 -0.19 (सस्ता)

पटना 92.32 +0.83 (महंगा)

तिरुवनंतपुरम 96.48 0.00

“Earthquake: भारत के इस पड़ोसी देश में कांपी धरती, महसूस किए गए भूकंप के जोरदार झटके”

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भारत के पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत (Tibet) में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। राष्ट्रीय भूगर्भ विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई है।

भूकंप की गहराई और पिछली घटना

भूकंप का केंद्र जमीन के काफी भीतर था जिससे सतह पर इसका प्रभाव हल्का रहा।

गहराई: NCS ने बताया कि भूकंप की गहराई जमीन के लगभग 60 किलोमीटर भीतर थी।

पिछला भूकंप: आपको बता दें कि तिब्बत में यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी 11 नवंबर को यहां भूकंप आया था जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.8 थी।