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छत्तीसगढ़ : वाहन में निकला हड्डियों का जखीरा, संगठनों ने किया बवाल

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शहर के प्रतापपुर रोड में बुधवार की देर शाम उस वक्त हंगामा मच गया जब दोपहिया सवार महिला को टक्कर मारकर तेज गति से भागते पिकअप वाहन को लोगों ने पकड़ा और उसकी जांच की। वाहन के अंदर भारी मात्रा में मवेशियों की हड्डी निकली। वाहन में आन ड्यूटी सीएसईबी भी लिखा हुआ है। सामाजिक संगठनो ने इसे लेकर जमकर हंगामा मचाया है। पुलिस ने लोगों को समझाबुझाकर वाहन को कब्जे में लिया है और मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार अम्बिकापुर नगर के प्रतापपुर रोड स्थित एक पेट्रोल पंप के पास बुधवार की देर शाम एक पिकअप वाहन ने एक महिला को टक्कर मार दी। वाहन पर यूपी का नंबर अंकित था। लोगों ने वाहन को पकड़ा और उसकी जांच की तो उसके अंदर से काफी मात्रा में मवेशियों की हड्डी निकली। खबर मिलते ही घटनास्थल पर काफी लोग इकट्ठे हो गये। वहां पहुंचे कुछ सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पिकअप वाहन पर हमला कर तोड़-फोड़ की। हालांकि बाद मे पुलिस ने मामले को शांत करा लिया। हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

मौके पर पहुंचे विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी विपिन कुमार पाण्डेय की माने तो पुलिस की इतनी गश्ती के बाद हड्डी यहां तक लाना संभव नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की जांच पड़ताल मौके पर करने की मांग भी की। उल्लेखनीय है कि जिस पिकअप में ये हड्डियां बरामद हुई हैं उसमें आन ड्यूटी सीएसईबी लिखा है। मतलब अवैध व्यापार वाला कोई शातिर और नापाक मंसूबों वाला अपराधी भी हो सकता है.

मामले को लेकर हिंदूवादी संगठन, स्थानीय लोग और पुलिस के बीच जमकर तनातनी भी हुई। इसी दौरान पुलिस ने जब वाहन को थाने ले जाकर जांच की बात कही तो लोगों का आक्रोश और बढ गया। हालांकि बाद में काफी संख्या में पहुंचे पुलिस बल ने भीड़ को शांत किया। नगर पुलिस अधीक्षक आर एन यादव ने बताया कि उक्त पिकअप वाहन को जब्त कर थाना गांधीनगर ले जाकर जांच की जाएगी।

पुलिस ने बताया कि प्रतापपुर रोड में बुधवार की शाम को एक पिकअप का ड्राइवर सरगवां पेट्रोल पंप के पास बाइक सवार को टक्कर मारने के बाद भाग रहा था। भागने के चक्कर में रास्ते में पिकअप से कुछ हडि्डयां गिर गई। इससे लोगों ने सरगवां से पिकअप का पीछा किया। पकड़े जाने के डर से ड्राइवर गोधनपुर के पास नवापारा रोड में पिकअप को छोड़कर भाग गया।

सूचना पर उसकी तलाश की गई लेकिन उसका पता नहीं चला। इससे पिकअप में लोड हड्डियां कहां से लाई जा रही थी इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई। उधर हादसे में घायल बाइक सवार को मामूली चोट आई है। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया है।

झारखंड से सटे होने के कारण पिछले एक दशक से सरगुजा के रास्ते मवेशी तस्करी के मामले तो पहले भी सामने आते रहें हैं. लेकिन मवेशी के हड्डियों के परिवहन और व्यापार का ये पहला मामला सामने आया है, जिसके बाद चर्चा इस बात कि है कि सरगुजा संभाग के किसी ना किसी इलाके मे, अवैध कत्लखाना संचालित है। जहां, इस तरह मवेशियों की हड्डी का संग्रह कर उसका व्यापार किया जा रहा है।

प्रियंका गांधी को क्यों करना पड़ा चंद्रशेखर से मिलने के लिए 15 मिनट का इंतजार

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आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में लगातार नया सियासी घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को देखने को मिला जब कांग्रेस महासचिव और पूर्वांचल की प्रभारी प्रियंका गांधी अचानक मेरठ पहुंची और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया और यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर भी थे। हालांकि प्रियंका गांधी जब चंद्रशेखर से मिलने के लिए पहुंची तो उन्हें करीब 15 मिनट का इंतजार करना पड़ा। जानिए, ऐसा क्या हुआ जो प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं को चंद्रशेखर से मिलने के लिए 15 मिनट इंतजार करना पड़ा?

चंद्रशेखर से मुलाकात में इसलिए लगे 15 मिनट

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, प्रियंका गांधी जब भीम आर्मी के मुखिया से मिलने के लिए पहुंची तो चंद्रशेखर के समर्थकों ने उनका रास्ता रोक दिया। आखिरकार काफी समझाने के बाद चंद्रशेखर के समर्थक मानें और प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत बाकी नेता भीम आर्मी चीफ से मिलने अस्पताल में जा सके। इस पूरे घटनाक्रम में करीब 15 मिनट का समय लगा। चंद्रशेखर से मुलाकात को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “मैं यहां उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने आई हूं। वह एक युवा नेता हैं, वह बोलना चाहते हैं, लेकिन ये सरकार इतनी अहंकारी है, कि वो एक युवा नेता की आवाज को दबाना चाहती है।”

 

चंद्रशेखर के समर्थकों ने रोक लिया था कांग्रेस नेताओं रास्ता

प्रियंका गांधी ने आगे कहा, “इस मुलाकात को राजनीति से जोड़कर नहीं देख जाना चाहिए। चंद्रशेखर युवा हैं, संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए था, उन्हें बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि उनका ये दौरा सिर्फ एकजुटता दिखाने का इशारा है।” भले ही प्रियंका गांधी ने इस मुलाकात को राजनीति से अलग बताया हो, लेकिन सियासी जानकार कांग्रेस के इस कदम को काफी अहम मान रहे हैं।

 

चंद्रशेखर ने कहा- पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाराणसी जाऊंगा

वहीं प्रियंका गांधी से मुलाकात के तुरंत बाद भीम आर्मी चीफ का बड़ा बयान सामने आया। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, प्रियंका गांधी से मिलने के बाद चंद्रशेखर ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए वाराणसी जाऊंगा।”

 

प्रियंका गांधी की चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद गरमाई सियासत

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेता इमरान मसूद की पहल पर प्रियंका गांधी चंद्रशेखर से मिलने मेरठ पहुंची थीं। भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद को मंगलवार को सहारनपुर में बिना इजाजत रैली निकालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी के बाद प्रियंका गांधी मेरठ में चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाकात के लिए पहुंची।

देखें विडिओ : केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गोद लिए गांव में किया करोड़ों का भ्रष्टाचार, दें इस्तीफा- कांग्रेस

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कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर भष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला स्मृति ईरानी द्वारा गोद लिए गए गुजरात के आणंद जिले के माघरोल गांव से जुड़ा है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एमपीएलएडी फंड के जरिए किए गए काम में करोड़ों का भ्रष्टाचार किया है। पार्टी का कहना है कि यही नहीं ईरानी ने नियमों की भी अनदेखी की।

इस मुद्दे पर दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि स्मृति इरानी ने भ्रष्टाचार किया है। इस संबंध में कलेक्टर की जांच रिपोर्ट भी है, जिसमें भ्रष्टाचार की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यही नहीं सीएजी ने भी इस संबंध में अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है।

सुरजेवाला ने कहा, “2018 की सीएजी रिपोर्ट नंबर 4 ने भ्रष्टाचार उजागर किया है। इसके मुताबिक, बिना किसी निविदा प्रक्रिया के एमपीएलएडी फंड से करीब 6 करोड़ का भुगतान किया गया, जिसमें 84,53,000 का फर्जी भुगतान शामिल है।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि स्मृति ईरानी ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने कहा की कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो, और पूरे मामले की जांच की जाए। उन्होंने स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग की।

 

छत्तीसगढ़ के मुखिया CM भूपेश बघेल का बयान बोले मायावती नहीं चाहती हैं कि केन्द्र में बने विपक्ष की सरकार

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर सीधा हमला किया. उन्होंने कहा कि मायावती हमेशा कांग्रेस को नुकसान पहुचाने का काम करती हैं और भाजपा को फायदा पहुचाती हैं. बसपा ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में भाजपा को फायदा पहुचाया है. उन्होंने कहा कि भाजपा विरोधी वोट को बांटने का काम बसपा सुप्रीमो मायावती करती रही हैं.

सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि ईडी और सीबीआई के दबाव में मायावती भाजपा की जबान बोल रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा नहीं चाहती है केन्द्र में विपक्ष की सरकार बने. ईडी के दबाव में मायावती वोट को बांट रही हैं और इस तरह के फैसले ले रहीं हैं. उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाले सेमीफाइनल हार चुके हैं. अब फाइनल भी हारेंगे.

सीएम भूपेश ने कहा कि भाजपा दंगा कराएगी, राम मंदिर और पाकिस्तान से लड़ाई कराएगी. भाजपा भवनात्मक मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी. उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 15 मार्च को ओडिशा जाते हुए रायपुर रुकेंगे और यूनिवर्सल हेल्थ केयर के मामले पार्टी नेताओं से बात करेंगे. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन के बस्तर दौरे पर उन्होंने कहा कि बस्तर ने भाजपा को पहले ही नकार दिया है. अब कुछ भी कर ले, छत्तीसगढ़ में भाजपा की दाल नहीं गलेगी.​

लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ बीजेपी को झटका, 16 लोगों ने दिया इस्तीफा

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लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। पूर्व डीजी राजीव श्रीवास्तव, सेवानिवृत आईएएस आरसी सिन्हा समेत 16 लोगों ने बीजेपी का दामन छोड़ दिया है। सभी लोगों ने पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी को पत्र लिखकर अपना त्याग पत्र सौंपा है। यह उल्लेखनीय है कि इन सभी नेताओं ने छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव-2018 से ठीक पहले ही भाजपा का दामन थामा था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इन सभी को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाया था। विधानसभा में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद इन नेताओं ने हवा का रूख देखते हुए अब भाजपा का दामन छोड़ दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी को लिखे पत्र में यह नहीं बताया गया है कि वे कांग्रेस या अन्य किसी पार्टी की सदस्यता ले रहे हैं। पत्र में लिखा गया है, अपरिहार्य कारणों से हम भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देते हैं। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले सभी लोग राज्य में अलग-अलग सेवाओं से जुड़े रहे हैं और सेवानिवृत हैं। इस्तीफा देने वाले लोगों में राज्य के सेवानिवृत डीजी राजीव श्रीवास्तव, सेवानिवृत आईएएस आर सी सिन्हा, सेवानिवृत आईपीएस एन के एस ठाकुर, आकाशवाणी दूरदर्शन के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक विमल चंद गुप्ता, एनटीपीसी के पूर्व महाप्रबंधक एच के धागमवार, पूर्व वन अधिकारी आर के तिवारी, पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बंशीलाल कुर्रे, सेवानिवृत पूर्व सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अधीक्षक आर के शर्मा, भोजेंद्र उइके, प्रदीप मिश्रा, शमशीर खान, अजीत चौबे, सेवानिवृति पुलिस अधिकारी व इतिहास शोधकर्ता डा. हेमू यदू, संगीत के शिक्षक रहे घनश्याम शर्मा, होम्योपैथिक मनोचिकित्सक डा. नीता शर्मा और सेवानिवृत जेल अधिकारी सुभाष वर्मा के नाम शामिल हैं। हालांकि पार्टी में इनकी सक्रियता ना के बराबर रही है।

Chhattisgarh : राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की संपूर्ण वीडियोग्राफी अनिवार्य : कलेक्टर

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कलेक्टर डॉ. बसवराजु एस. ने कलेक्टोरेट के रेडक्रास सभाकक्ष में लोकसभा निर्वाचन के लिए गठित विभिन्न दलों को दिये गये प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के निर्बाध एवं सुचारू संचालन के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों के तहत तैयारी पहले से पूर्ण कर लिया जाये। राजनीतिक दलों एवं उनके द्वारा घोषित प्रत्याशियों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किये गये व्यय की जानकारी व्यय पर्यवेक्षक को प्रतिदिन देना अनिवार्य है। लोकसभा निर्वाचन के लिए जिले में गठित सभी दल गंभीरता से कार्य करें। लोकसभा निर्वाचन के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का संपूर्ण वीडियोंग्राफी अनिवार्य रूप से किया जाना है। राजनीतिक दलों द्वारा रैली, सभा आदि में उपयोग किये जाने वाले वाहन, खाद्य सामग्री का संपूर्ण वीडियोंग्राफी किया जाना है। इसी वीडियोग्राफी के मदद से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दर के अनुसार व्यय को जोड़ा जायेगा। आज लोकसभा निर्वाचन 2019 के लिए गठित सहायक व्यय प्रेक्षक, वीडियों निगरानी दल, उड़नदस्ता तथा स्थैतिक निगरानी दल वीडियों दर्शन दल, लेखांकन दल, शिकायत अनुवीक्षण नियंत्रण कक्ष के अधिकारी कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजीव कुमार पाण्डेय सहित सभी दलों के प्रभारी अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में गांधी शांति पुरस्कार के लिए नामांकन प्रस्ताव 5 अप्रैल तक

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भारत सरकार द्वारा शांति, अंहिसा एवं सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्ति एवं संस्था को गांधी शांति पुरस्कार प्रदान किया जाता है। गांधी शांति पुरस्कार हेतु इच्छुक व्यक्ति और संस्था निर्धारित प्रारूप में आगामी 05 अप्रैल तक नामांकन प्रस्ताव जमा कर सकते है। इस संबंध में अधिक जानकारी भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली की वेबसाइट अथवा जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास कार्यालय रायपुर से प्राप्त की जा सकती है।

शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी को टिकट दे सकती है सपा, इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी

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लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को चयन को लेकर माथापच्ची शुरू कर दी है। इस बीच निगाहें इस बात पर टिकी हैं आखिर बीजेपी से नाराज चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की रणनीति क्या होगी? क्या शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी बदलेंगे या फिर बीजेपी के ही टिकट से फिर चुनाव मैदान में उतरेंगे? हालांकि उनके बगावती तेवरों को देखते हुए इस बात की संभावना कम ही नजर आ रही कि बीजेपी उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाएगी। शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर भले ही अभी तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हुई है, इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा राजनीति में एंट्री कर सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूनम सिन्हा को यूपी की हाईप्रोफाइल सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

लखनऊ से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी पूनम सिन्हा?

जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी इस चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को उम्मीदवार बना सकती है। ऐसी खबरें हैं कि उन्हें लखनऊ लोकसभा सीट से उतारा जा सकता है। इस बात के कयास इसलिए भी लग रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले ही शत्रुघ्न सिन्हा ने अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि उस मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी, हालांकि अभी इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

 

शत्रुघ्न सिन्हा ने की थी अखिलेश से मुलाकात, इसलिए लग रही अटकलें

हालांकि माना ये भी जा रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी पूनम सिन्हा को लखनऊ सीट से उम्मीदवार बनाती है तो यहां मजबूत मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लखनऊ से राजनाथ सिंह वर्तमान सांसद हैं। सूत्र बता रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने पूनम सिन्हा की उम्मीदवारी को लेकर लखनऊ की लोकल पार्टी यूनिट से रिपोर्ट मांगी है और बूथ लेवल तक क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर भी रिसर्च कर रही है। फिलहाल इस पर आखिरी फैसला पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ही करेंगे।

 

सपा ने अब तक 11 उम्मीदवारों के नाम का किया है ऐलान

बता दें कि समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक उम्मीदवारों की तीन लिस्ट जारी की गई हैं। जिनमें 11 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। इस लिस्ट में तीन महिला उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हैं, इनमें कन्नौज से डिंपल यादव, लखीमपुर खीरी से डॉ. पूर्वी वर्मा और हरदोई (सुर) सीट से ऊषा वर्मा को टिकट दिया गया है। इनके अलावा मिर्जापुर से राजेंद्र एस विंद और हाथरस (सुरक्षित) सीट से रामजी लाल सुमन को सपा ने टिकट दिया है। वहीं पहली सूची में समाजवादी पार्टी ने यूपी की 6 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया। इस सूची के मुताबिक सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। जिन 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों का ऐलान किया गया है, उनमें मैनपुरी, बदायूं, फिरोजाबाद, इटावा, रॉबर्ट्सगंज और बहराइच सीट शामिल हैं। बता दें कि यूपी में इस बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किया है, इसमें राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल है।

सक्रिय राजनीति में उतरने के बावजूद प्रियंका अभी क्यों नहीं लड़ना चाहतीं चुनाव?

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कांग्रेस की पहली लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम आने से ही तय लग रहा था कि प्रियंका कम से कम इसबार तो चुनाव नहीं लड़ने जा रही हैं। वैसे तो वो चुनावी राजनीति के लिए नई नहीं हैं, फिर भी सक्रिय राजनीति में कूदने के बावजूद अगर चुनाव नहीं लड़ रही हैं, तो इसके पीछे एक नहीं कई कारण नजर आ रहे हैं। शायद राहुल-सोनिया और खुद प्रियंका को भी ये लग रहा है कि उनके चुनावी मैदान में उतरने से जितना फायदा होगा, उससे ज्यादा पार्टी और परिवार को नुकसान न हो जाए। क्योंकि, मौजूदा परिस्थितियों में गांधी-नेहरू परिवार के किसी नए सदस्य को चुनाव में लॉन्च करना और सफल हो जाना पहले जितना आसान भी नहीं रहा। खास कर, तब जब अमेठी जैसे परिवार के गढ़ में खुद राहुल गांधी को ही कड़ी टक्कर मिलने लगी है।

संगठन को संभालना है

प्रियंका गांधी वाड्रा को पिछले 23 जनवरी को ही कांग्रेस महासचिव बनाकर पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले वो पिछले चुनावों में अमेठी और रायबरेली लोकसभा क्षेत्रों में मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार तक ही सीमित रहती थीं। वो उस इलाके में ज्यादा आई-गई हैं, इसलिए भाई ने उन्हें पूर्वी यूपी में ही संगठन को चुनाव के लिहाज से मजबूत करने को कहा है। चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है और संगठन को सत्ताधारी बीजेपी से मुकाबले के लिए तैयार करने की चुनौती है। ऐसे में अगर प्रियंका खुद अपने क्षेत्र में प्रचार करने में जुट जाएंगी, तो यूपी में कांग्रेस के अकेले दम पर चुनाव लड़ने की गंभीरता खतरे में पड़ जाएगी। क्योंकि, केंद्र में सरकार बनाने की चाहत रखने वाली पार्टी यूपी की लड़ाई को हल्के में लेगी,तो उसकी सारी संभावनाएं भी हल्की पड़ जाएंगी।

परिवार के लिए सुरक्षित सीट भी तो हो

पिछले दो दशकों से अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट सोनिया परिवार की पहचान बनी हुई है। उन दोनों सीट पर परिवार का ऐसा दबदबा है कि एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने के बावजूद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने वहां उम्मीदवार न उतारने की परंपरा बना ली है। रायबरेली प्रियंका की मां सोनिया और अमेठी से उनके भाई और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उम्मीदवारी की घोषणा हो चुकी है, ऐसे में प्रियंका के चुनाव लड़ने के लिए कौन सी सीट सुरक्षित हो सकती है। मां और भाई के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाल चुकीं प्रियंका को पूरा इल्म है कि पिछले दफे अमेठी का संघर्ष जीतना कितना कठिन हो गया था। ऐसे में किसी नई सीट से भाग्य आजमाने का जोखिम लेना गांधी परिवार के लिए बहुत ही मुश्किल हो सकता था।

 

परिवारवाद के आरोपों से भी बचना है

गांधी-नेहरू परिवार की जिस विरासत पर सोनिया और राहुल की राजनीति टिकी है, उसके खिलाफ बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आक्रमकता जगजाहिर है। ऐसे में परिवार के तीसरे सदस्य को भी चुनाव मैदान में उतारना और वो भी उत्तर प्रदेश में, यह बड़ा ही सियासी जोखिम का सवाल बन सकता था। अगर सोनिया अपनी जगह अपनी सीट बेटी के लिए छोड़ देतीं, तब भी बात बन सकती थी। वैसे तो प्रियंका अगर पार्टी संगठन के लिए कार्य करेंगी और चुनाव प्रचार भी करेंगी, तब भी बीजेपी परिवारवाद पर उन्हें घेरने का मौका नहीं छोड़ेगी। लेकिन, अगर खुद उम्मीदवार बन कर उतर गई होतीं, तो बीजेपी के हमले की तल्खी और बढ़ सकती थी, जिसका जवाब देना बहुत ही भारी हो सकता था।

 

वाड्रा नाम का डर

प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव नहीं लड़ने का एक कारण उनके पति रॉबर्ट वाड्रा भी हो सकते हैं। उनके खिलाफ जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग तक के मामले चल रहे हैं। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय उनसे कई दौर की पूछताछ कर चुका है। वो अदालत से जमानत लेकर गिरफ्तारी से बचते रहे हैं। ऐसे में अगर प्रियंका चुनाव लड़ेंगी, तो उन्हें अपने पति के बारे में जवाब भी देना पड़ेगा। वैसे तो वह कह सकती हैं, कि मोदी सरकार सियासी दुश्मनी के चलते उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है, लेकिन चुनाव मैदान में उनपर विपक्ष को और तीखा पलटवार करने का मौका मिल जाएगा। शायद इसलिए भी प्रियंका ने यह चुनाव छोड़ देने का मन बनाया है।

 

राहुल पर भारी न पड़ जाएं!

जब राहुल गांधी ने राजनीति में एंट्री नहीं ली थी, तभी से प्रियंका गांधी वाड्रा कार्यकर्ताओं की पहली पसंद थीं। लेकिन, प्रियंका ने भाई राहुल को आगे बढ़ाने के लिए खुद को सार्वजनिक तौर पर राजनीति से पीछे रखा। अलबत्ता, पर्दे के पीछे राजनीतिक समीकरण बिठाने में उनका रोल हमेशा से प्रभावी माना जाता है। इस बार कांग्रेस राहुल गांधी को औपचारिक तौर पर प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में प्रियंका के मैदान में सीधे उतरने से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उम्मीद बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। परिवार के शुभचिंतकों को लगता है कि अगर प्रियंका अपने भाई राहुल के साथ मैदान में होंगी, तो लोग कांग्रेस अध्यक्ष की जगह उन्हें सुनना ज्यादा पसंद करेंगे। हालांकि, राहुल की अगुवाई में कांग्रेस ने पिछले साल ही तीन राज्यों में बीजेपी से सत्ता छीनी है, लेकिन जब प्रियंका गांधी सामने होंगी, तो फिर वो निश्चित तौर पर राहुल पर भारी पड़ सकती हैं। इसके कारण राहुल को आगे रखने का सारा गुणा-भाग ही चौपट हो सकता है।

J&K: एलओसी के पास तक पहुंचे पाकिस्तान के फाइटर जेट, हाई अलर्ट पर भारतीय वायुसेना

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भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में एय़र स्ट्राइक किए जाने के बाद पाकिस्तान की वायुसेना लगातार भारत की सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रही है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि, बीती रातइंडियन एयर डिफेंस रडार्स ने पुंछ सेक्टर में एलओसी से 10 किमी की दूरी पर दो पाकिस्तानी जेट विमान घूमते हुए पकड़ा है। पाकिस्तान की इस नापाक हरकत के बाद सभी भारतीय वायु रक्षा और रडार सिस्टम हाई अलर्ट पर हैं।

जम्मू के पुंछ सेक्टर में एलओसी पर मंगलवार रात पाकिस्तान के दो लड़ाकू विमान देखे गए थे। कल रात को इस क्षेत्र से जोरदार धमाके की आवाज सुनाई पड़ी थी। सूत्रों ने बताया कि ये तेज आवाजें सोनिक बूम की थी। पाकिस्तान के इन दोनों लड़ाकू विमानों को भारतीय रडार सिस्टम ने भी पकड़ा। पाकिस्तानी वायुसेना की इस हिमाकत के बाद भारतीय वायुसेना और रडार सिस्टम को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।