Home Blog Page 330

Mardaani 3 Promotion Controversy: मर्दानी-3 का प्रमोशन निकला दिल्ली से 800 लोगों के लापता होने का केस, ऐसे करना कितना बड़ा गुनाह?

0

हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया जा रहा है कि सिर्फ 15 दिनों के अंदर दिल्ली से 800 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं. इस तरह के आंकड़े तेजी से फैले.

इसके बाद माता-पिता, यात्री और राजधानी के निवासियों में डर फैल गया. हालांकि जब दिल्ली पुलिस ने दखल दिया तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई. ऐसा कहा जा रहा है कि यह कुछ और नहीं बल्कि मर्दानी 3 फिल्म की पब्लिसिटी थी. आइए जानते हैं कि इस तरह की खबरों को फैलाना कितना बड़ा गुनाह है.

क्या दावा किया गया था

दरअसल वायरल पोस्ट के मुताबिक जनवरी की शुरुआत में दिल्ली में 807 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई थी. इसे एक बड़ी अपराध लहर के तौर पर देखा जा रहा था. दिल्ली पुलिस ने बाद में है साफ किया कि यह संख्या पुराने और संचयी डेटा थे और इन्हें बिना किसी संदर्भ के पेश किया गया था. यह आंकड़े नए या फिर अचानक लापता होने का कोई भी प्रमाण नहीं रखते और कथित तौर पर दहशत फैलाने के लिए सनसनीखेज तरीके से इस्तेमाल किए गए थे.

पुलिस ने इस घटना को पेड प्रमोशन का मामला बताया, जो कथित तौर पर अपराध और लापता व्यक्तियों पर केंद्रित फिल्म मर्दानी 3 के पब्लिसिटी अभियान से जुड़ा हुआ था.

क्यों है यह एक गंभीर अपराध

झूठी जानकारी का इस्तेमाल करके सार्वजनिक दहशत फैलाना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सीधा खतरा माना जाता है. कानून प्रवर्तन एजेंसी इस बात पर जोर देती है कि जब डर फैलता है तो इससे अराजकता, भीड़ द्वारा हिंसा और संस्थानों में विश्वास की कमी हो सकती है.

लागू होने वाले कानूनी प्रावधान

अगर यह साबित हो जाता है कि व्यक्तियों या फिर एजेंसियों ने जानबूझकर इस जानकारी को फैलाया है तो कई कानूनी धाराएं लगाई जा सकती हैं. इसमें सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए बीएनएस की धारा 353 लगाई जा सकती है. इस धारा के अंतर्गत 3 साल की कैद, जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती हैं. इसके अलावा भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए बीएनएस की धारा 197 भी लगाई जा सकती है. इसके तहत 3 से 5 साल की कैद हो सकती है. इतना ही नहीं बल्कि यह दावे ऑनलाइन वायरल हुए हैं इस वजह से गलत जानकारी, पहचान की चोरी या फिर डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े आईटी कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है.

पुलिस जांच और मौजूदा स्थिति

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने डिजिटल सबूत, इनफ्लुएंसर पेमेंट्स और प्रमोशन लीड्स की जांच शुरू कर दी है. ऐसा पता लगाया जा रहा है कि इन दावों को किसने और क्यों फैलाया है. अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति या फिर कंपनी फायदे के लिए डर फैलाने कि दोषी पाई जाती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा.

‘घूसखोर पंडत’ वेबसीरीज पर सियासत तेज, स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- ‘पंडित का ब्राह्मणों से…’

0

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रीलिज होने वाली वेबसीरिज ‘घूसखोर पंडित’ पर नाम के विवाद के बाद इसे निर्माता ने वापस ले लिया. लेकिन अब इस पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है. मायावती समेत कई नेताओं ने इसे ब्रहामणों को बदनाम करने वाला बताया तो अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह कहकर सनसनी फैला दी है, “फिल्म का ब्राह्मणों से कोई रिश्ता नहीं है.’

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फेसबुक पर यही टिप्पणी की है.

स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी के मुताबिक पंडित कोई भी हो सकता है, जिसे ज्ञान हो, उन्होंने अभिनेता और निर्देश को भी ब्राह्मण होने की बात कही और बोले कि फिर ब्राह्मणों का कैसे अपमान हो सकता है. उनकी ये पोस्ट अब वायरल है.

स्वामी प्रसाद मौर्य की टिपण्णी

शनिवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने लिखा, ‘ ‘फिल्म घूसखोर पंडत’ को लेकर कुछ लोग ब्राह्मणों के अपमान के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रहे है. जबकि फिल्म के नाम से ब्राह्मणों का कोई रिश्ता नहीं है. पंडित शब्द का भी प्रयोग नहीं किया गया है यदि ऐसा होता भी तो बकौल R S S प्रमुख मोहन भागवत जी, पंडित का मतलब ब्राह्मण नहीं, ‘विद्वान’ होता है’. पंडत किसी व्यक्ति का नाम भी हो सकता है. वैसे भी घूसखोर पंडत फिल्म के प्रोड्यूसर और निर्माता नीरज पांडे एवं फिल्म के हीरो मनोज बाजपेई है, यानि फिल्म के प्रोड्यूसर/ निर्माता तथा हीरो सभी ब्राह्मण ही है तो ‘ब्राह्मण’ ब्राह्मण का अपमान कैसे कर सकता है.

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुआ है मुकदमा

इससे पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म को समाज में विद्वेष फैलाने वाला करार देते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए. जिसके बाद लखनऊ में फिल्म निर्माताओं के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. ब्राहमण संगठनों के साथ कई राजनीतिक दलों ने भी फिल्म के नाम पर ऐतराज जताया है.

फिल्म के नाम अपर विवाद होते देख निर्देश नीरज पांडेय ने फिल्म का टीजर सभी प्लेटफ़ॉर्म से हटा लिया है. और बयान जारी कर कहा कि फिल्म किसी की भावनाएं आहत करने के लिए नहीं है.

नियमित निवेश और धैर्य की ताकत; SIP कैसे बदल सकता है आपकी आर्थिक किस्मत, जानें स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का तरीका…

0

आज के समय में सिर्फ पैसे बचा लेना ही समझदारी नहीं मानी जाती, बल्कि उसे सही जगह और सही तरीके से निवेश करना ज्यादा जरूरी हो गया है. अगर निवेश बिना योजना के किया जाए, तो उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता.

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश आज लोगों की पसंद बनती जा रही है.

एसआईपी के जरिए नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी बचत करके लंबे समय में अच्छी रकम तैयार की जा सकती है. वहीं अनुशासन, संतुलन और सही सोच के साथ आगे बढ़ने से यह निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न देता है. जिससे भविष्य की आर्थिक स्थिति और मजबूत होती है. आइए जानते हैं, इस बारे में….

निवेश में संतुलन बनाना है जरूरी

निवेश करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सारे पैसे एक की जगह पर नहीं लगाने चाहिए. निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की सलाह दी जाती है. 5 फिंगर फ्रेमवर्क इसी सोच पर काम करता है. जिसमें अपनी बचत को पांच भागों में बांटकर निवेश किया जाता है.

इसमें भरोसेमंद और मजबूत विकल्प, कम कीमत पर मिलने वाले भविष्य के मौके, ग्रोथ और वैल्यू का संतुलन, मिड और स्मॉल लेवल के विकल्प और विदेशी बाजारों में निवेश शामिल होता है. इस तरह की रणनीति से नुकसान का खतरा कम होता है और बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है.

बाजार में टिके रहना है सफलता का मंत्र

ऐसा अक्सर देखा जाता है निवेशक एसआईपी में दिख रहे नुकसान से घबरा जाते हैं और इसे बेचने का फैसला उठा लेते हैं. हालांकि, अगर आप लंबे समय तक निवेश करने के लिए तैयार हैं तो, ऐसा हो सकता है कि आपको अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न मिले. इसलिए ऐसी स्थिति में बाजार में टिके रहना ही सफलता का मंत्र है.

लंबे समय में मिलता है बेहतर नतीजा

निवेश के शुरुआती दौर में बाजार की हलचल कई बार निवेशकों को परेशान कर देती है. कभी तेजी तो कभी गिरावट देखकर धैर्य बनाए रखना आसान नहीं होता. लेकिन जब कोई निवेश करीब 7 साल तक लगातार जारी रहता है, तो उस पर कंपाउंडिंग का असर साफ नजर आने लगता है.

इस दौरान पैसा धीरे-धीरे बढ़कर खुद नई कमाई बनाने लगता है. यही वजह है कि लंबे समय तक निवेश में बने रहना जरूरी माना जाता है. क्योंकि समय के साथ छोटे उतार-चढ़ाव बेअसर हो जाते हैं और रिटर्न ज्यादा स्थिर होने लगता है.

क्या बिना टावर चलेगा मोबाइल? Starlink फोन को लेकर Elon Musk ने तोड़ी चुप्पी, सच जानकर उड़ जाएंगे होश!

0

हाल ही में एलन मस्क को लेकर यह चर्चा तेज हो गई थी कि वह जल्द ही Starlink ब्रांड के नाम से एक स्मार्टफोन लॉन्च कर सकते हैं. शुरुआत में खुद मस्क ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था लेकिन अब उन्होंने इन खबरों पर साफ जवाब दे दिया है.

फिलहाल, Starlink फोन के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

सोशल मीडिया पर अफवाह और मस्क की प्रतिक्रिया

X (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने Reuters की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि SpaceX, Starlink नाम से एक फोन बना सकता है. इस पर एलन मस्क ने सीधे तौर पर इन अटकलों को नकार दिया. उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, ‘हम कोई फोन विकसित नहीं कर रहे हैं.’ इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अभी Starlink फोन पर कोई काम नहीं चल रहा है.

Starlink क्यों बना चर्चा का केंद्र?

Starlink, SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद हजारों सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, SpaceX की कुल कमाई का बड़ा हिस्सा Starlink से आता है. पिछले साल कंपनी ने करीब 8 बिलियन डॉलर का मुनाफा दर्ज किया था. हाल ही में SpaceX का xAI के साथ विलय भी हुआ है और आने वाले समय में IPO की भी चर्चा है.

एलन मस्क ने Starlink फोन को लेकर पहले क्या कहा था?

कुछ दिन पहले एलन मस्क ने एक पोस्ट के जवाब में कहा था कि भविष्य में Starlink फोन की संभावना पूरी तरह नकारा नहीं जा सकती. उस वक्त उन्होंने लिखा था, किसी समय यह असंभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया था कि इस दिशा में फिलहाल कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है.

कैसा हो सकता था Starlink फोन?

मस्क के मुताबिक, अगर कभी Starlink फोन आया तो वह आज के iPhone या Android फोन से बिल्कुल अलग होगा. उनका फोकस पारंपरिक फीचर्स से ज्यादा ऑन-डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हो सकता है. मस्क ने इशारा किया था कि ऐसा फोन कम पावर में ज्यादा से ज्यादा AI परफॉर्मेंस देने के लिए डिजाइन किया जाएगा.

भविष्य में Starlink फोन की संभावना क्यों बनती है?

हालांकि अभी मस्क ने Starlink फोन की बात को टाल दिया है लेकिन आगे चलकर यह SpaceX के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. Starlink के दुनियाभर में करीब 90 लाख यूजर्स हैं और यह 30 से ज्यादा एयरलाइंस के साथ काम कर रहा है. इसके अलावा कंपनी के कई सरकारी और सैन्य कॉन्ट्रैक्ट भी हैं.

SpaceX की आगे की रणनीति

SpaceX का पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा है. कंपनी Stargaze जैसे स्पेस-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और T-Mobile जैसी कंपनियों के साथ मिलकर डायरेक्ट-टू-डिवाइस इंटरनेट सेवाओं की दिशा में भी आगे बढ़ रही है. पहले Starlink Mobile जैसे नामों से जुड़े ट्रेडमार्क और कनेक्टिविटी से जुड़े पेटेंट भी दर्ज किए जा चुके हैं.

इस्लाम पार्टी की नसरीन बानो शेख बनीं मालेगांव की मेयर, शिवसेना की लता घोडके को दी मात…

0

महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में हुए मेयर चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. स्थानीय राजनीतिक दल इस्लाम पार्टी की उम्मीदवार नसरीन बानो शेख मालेगांव की नई मेयर चुनी गई हैं.

उन्होंने शिवसेना की उम्मीदवार लता घोडके को 25 मतों के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की. इस चुनाव ने नगर निगम की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं और सेक्युलर फ्रंट की ताकत को भी साफ तौर पर दिखा दिया है.

नसरीन बानो शेख के पक्ष में कुल 43 नगरसेवकों ने डाले वोट

मतदान के दौरान नसरीन बानो शेख के पक्ष में कुल 43 नगरसेवकों ने वोट डाले. जबकि शिवसेना की लता घोडके को सिर्फ 18 मत ही मिल सके. नसरीन बानो शेख को इस्लाम पार्टी के सभी 35 नगरसेवकों का समर्थन मिला. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के 5 और कांग्रेस के 3 नगरसेवकों ने भी उनका साथ दिया, जिससे उनकी जीत मजबूत हो गई.

लता घोडके को पार्टी के 18 नगरसेवकों का मिला समर्थन

जानकारी के अनुसार, दूसरी ओर शिवसेना की उम्मीदवार लता घोडके को पार्टी के 18 नगरसेवकों का समर्थन मिला. लेकिन यह संख्या जीत के लिए काफी नहीं थी. इस चुनाव में एआईएमआईएम (एमआईएम) और बीजेपी के नगरसेवक तटस्थ रहे और उन्होंने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया. जिससे मुकाबले का रुख पहले से ही साफ होता चला गया.

मेयर पद के लिए मैदान में उतरे कुल तीन उम्मीदवार

मेयर पद के लिए कुल तीन उम्मीदवार मैदान में थे और पांच नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे. लेकिन अंत में मुकाबला नसरीन बानो शेख और लता घोडके के बीच ही रहा. परिणाम आने के बाद नगर निगम सभागृह में सेक्युलर फ्रंट के नगरसेवकों और समर्थकों ने जोरदार जश्न मनाया. ढोल-नगाड़ों, नारों और तालियों के साथ नसरीन बानो शेख की जीत का स्वागत किया गया.

Exclusive: नागरिकता मामले को लेकर सोनिया गांधी की तरफ से कोर्ट में जवाब दाखिल, जानें क्या है पूरा मामला…

0

बिना नागरिकता हासिल किए मतदाता सूची में कथित जालसाजी कर नाम शामिल कराए जाने के मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल रिवीजन पिटीशन पर राउज एवेन्यू कोर्ट में उनकी तरफ से जवाब दाखिल किया गया है.

कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दाखिल की गई है और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है. कोर्ट में दाखिल जवाब में साफ तौर पर कहा गया है कि नागरिकता से जुड़े मामलों का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, जबकि मतदाता सूची से जुड़े विवाद चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

‘आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित’

कांग्रेस नेता की तरफ से कहा गया कि ऐसे मामलों में आपराधिक अदालतों का दखल संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत प्रतिबंधित है. सोनिया गांधी की ओर से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं. शिकायतकर्ता यह तक स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन से दस्तावेज़ कथित रूप से जाली बनाए गए, कब बनाए गए और किसने बनाए. न तो किसी आवेदन की कॉपी लगाई गई और न ही यह बताया गया कि ऐसे किसी दस्तावेज़ को पाने के लिए कोई कानूनी प्रयास किया गया.

कोर्ट को बताया गया कि शिकायत जिन घटनाओं पर आधारित है, वे 1980-83 के दौर की बताई जा रही हैं. इतने लंबे समय बाद न तो विश्वसनीय साक्ष्य मिल सकते हैं और न ही ऐसे मामलों को आगे बढ़ाना कानूनन उचित है. सोनिया गांधी ने कहा कि 40 साल से ज्यादा पुराने आरोपों को उठाना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

जवाब में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने अखबारों की कतरनों के आधार पर मामला खड़ा करने की कोशिश की है, जिनका कोई कानूनी महत्व नहीं है. एक दस्तावेज़ पर तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शब्द का इस्तेमाल बताया गया जबकि यह शब्द 1991 के बाद प्रचलन में आया, जिससे उस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर सवाल उठता है.

21 फरवरी को अगली सुनवाई

इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि कानून के अनुसार धारा 175(3) के तहत दायर याचिका के साथ सही ढंग से सत्यापित हलफनामा अनिवार्य होता है, जो इस मामले में मौजूद नहीं है. ऐसे में मजिस्ट्रेट को इस शिकायत पर सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं बनता. सोनिया गांधी ने कोर्ट से मांग की कि यह आपराधिक रिविजन याचिका खारिज की जाए, क्योंकि यह न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि निराधार और दुर्भावनापूर्ण भी है. राउज एवन्यू कोर्ट 21 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगा.

“दवा से लेकर डायमंड तक, किस-किस पर लगेगा जीरो टैरिफ? वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया”

0

भारत और अमेरिका के बीच शनिवार (7 फरवरी) को हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद केंद्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे दोनों देशों के हित में बड़ी डील बताया है. केंद्रीय मंत्री ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने हमारे पड़ोसी देशों चीन पर 35 फीसदी और बांग्‍लादेश पर 20 फीसदी टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर केवल 18 फीसदी टैरिफ लगाएगा.

पीयूष गोयल ने कहा कि बहुत से ऐसे आइटम्‍स भी हैं, जिन पर अमेरिका कोई टैरिफ नहीं लगाएगा. इस समझौते के तहत अमेरिका कुछ भारतीय एक्सपोर्ट जैसे जेनेरिक दवाएं, रत्न-जवाहरात, हीरे और विमान के पार्ट्स-पर ये टैरिफ हटा देगा. उन्होंने कहा कि हमारे निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी के साथ खुलती है. कल देर रात जो भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त बयान तय हुआ, दुनिया के सामने रखा गया. इसका हर तरफ स्वागत हुआ है. गोयल ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा.

विकसित भारत 2047 को लेकर क्या कहा

केंद्रीय उद्योग मंत्री ने कहा कि आज का दिन विकसित भारत 2047 की राह में एक महत्वपूर्ण दिन है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी, जिसका लक्ष्य प्रति वर्ष 500 अरब डॉलर का निर्यात कारोबार हासिल करना था. उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हुए एक भव्य, दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की प्रशंसा की.

ये सामान होंगे टैरिफ फ्री

उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों, किसानों और मछुआरों के लिए अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कई प्रमुख वस्तुओं के अमेरिका को निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. रत्न और आभूषणों के साथ-साथ औषधीय उत्पादों को भी अब टैरिफ फ्री पहुंच प्राप्त होगी, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और मेक इन इंडिया को भी समर्थन मिलेगा.

पीयूष गोयल ने कहा कि डायमंड, फार्मा, कॉफी, आम और अन्य कई वस्तुएं अमेरिका को टैरिफ फ्री निर्यात की जाएंगी. कृषि क्षेत्र में कई भारतीय उत्पाद अब बिना किसी टैरिफ के अमेरिका को निर्यात किए जा सकेंगे. इनमें चाय, मसाले, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी, ब्राजील नट्स और कई प्रकार के फल और सब्जियां शामिल हैं. पीयूष गोयल के अनुसार सब्जी की जड़ें, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल के बीज, खसखस और खट्टे फलों के रस पर भी कोई रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगेगा और अब वे अमेरिकी बाजार में टैरिफ फ्री हो जाएंगे.

चीन और बांग्लादेश पर कितना टैरिफ

उन्होंने आगे बताया कि कई ऐसे सामान जिन पर पहले 50 फीसदी टैरिफ लगता था, अब जीरो टैरिफ के साथ अमेरिकी बाजार में जाएंगे. पीयूष गोयल ने नए भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी जीत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चीन पर 35 फीसदी टैरिफ लगाया गया है, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है.

पानी के नीचे कितनी देर रह सकता है वाटरप्रूफ फोन? जानिए क्या होता है IP68 और IP69 रेटिंग का मतलब…

0

आजकल कई लेटेस्ट फोन के वाटर-रजिस्टेंट होने का दावा किया जाता है. इसके लिए कंपनियां IP रेटिंग यूज करती है, जिसके जरिए यह दिखाया जाता है कि कोई फोन कितनी वाटर प्रोटेक्शन के साथ आ रहा है.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वाटर प्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या फर्क होता है और जो IP68, IP69 और IPX8 रेटिंग यूज की जाती है, उसका क्या मतलब होता है.

वाटरप्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या अंतर होता है?

वाटर रजिस्टेंट फोन पानी की बूंदों और बारिश आदि को झेल सकता है, लेकिन इसे ज्यादा समय तक पानी में रखने के लिए डिजाइन नहीं किया जाता है. दूसरी तरफ वाटरप्रूफ फोन को कड़े इमर्शन टेस्ट से गुजारा जाता है और यह एक निश्चित गहराई में लंबे समय तक रह सकता है. हालांकि, फिर भी स्विमिंग पूल आदि में ज्यादा समय तक पहने पर इसके खराब होने का खतरा बना रहता है.

रेटिंग का क्या मतलब?

क्या आपका फोन वाटरप्रूफ है? इसका जवाब उसकी IP रेटिंग से मिल जाएगा. IP का पूरा नाम इनग्रेस प्रोटेक्शन होता है और इसके आगे लिखे नंबर यह बताते हैं कि यह डस्ट और पानी के प्रति कितना रजिस्टेंट है. इस रेटिंग में दो नंबर होते हैं. पहला नंबर डस्ट के प्रति प्रोटेक्शन को दिखाता है और इसकी रेंज 0-6 होती है. दूसरा नंबर पानी और दूसरे लिक्विड के प्रति प्रोटेक्शन दिखाता है और इसकी रेंज 0-9 तक होती है.

IP68- इस रेटिंग में 6 का मतलब है कि डिवाइस फुल डस्ट प्रूफ है. वहीं 8 नंबर दिखाता है कि यह 30 मिनट तक 1.5 मीटर गहरे पानी में रह सकता है. हालांकि, कुछ फोन इससे भी ज्यादा समय और गहराई तक पानी में सुरक्षित रह सकते हैं. इस रेटिंग वाले फोन को पूल, बारिश और हल्के बहाव वाले पानी के नीचे फोटो लेने के लिए यूज किया जा सकता है.

IP69- इस रेटिंग का मतलब है कि यह फोन हाई प्रैशर और हाई टेंपरेचर वाले पानी को आसानी से झेल सकता है. मुश्किल कंडीशन में काम कर सकने वाले फोन में यह रेटिंग मिलती है, जहां फोन कई बार तेज बहाव के संपर्क में आ जाता है.

IPX8- इसमें पहले डिजिट की जगह X का इस्तेमाल किया गया है, जो दिखाता है कि इसे डस्ट प्रोटेक्शन के लिए टेस्ट नहीं किया गया है. वहीं 8 नंबर का मतलब है कि यह फोन लगभग 1.5 मीटर तक की गहराई में कुछ देर तक रह सकता है. ये फोन आमतौर पर स्विमिंग और बारिश के दौरान इस्तेमाल के लिए सेफ होते हैं.

US PoK Map: अमेरिका-भारत ट्रेड डील के साथ जारी नक्शे ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता, चीन को भी लिया लपेटे में, जानें पूरी बात…

0

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ एक और बात ने सबका ध्यान खींचा है. अमेरिका की ट्रंप सरकार की ओर से जारी भारत के नए नक्शे ने पाकिस्तान को असहज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है.

अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने ट्रेड डील की जानकारी देते समय जो नक्शा जारी किया, उसमें पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया है.

हालांकि भारत हमेशा से यह साफ कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इसके लिए किसी बाहरी देश की मंजूरी की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका की तरफ से इस तरह का नक्शा जारी किया जाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है.

क्यों अहम है यह नक्शा?

अब तक अमेरिका की सरकारी एजेंसियां नक्शों में PoK को लेकर संतुलित रुख अपनाती रही थीं, ताकि पाकिस्तान की आपत्तियों से बचा जा सके. लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस ताजा नक्शे में पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. यही वजह है कि यह कदम अमेरिका की पुरानी नीति से अलग माना जा रहा है. इसका समय भी काफी अहम है. हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबी बातचीत चली थी. पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जो सहयोगी देशों में सबसे ज्यादा था. अब अंतरिम समझौते के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है.

अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया

इस नक्शे की एक और खास बात यह है कि इसमें अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है. यह वही इलाका है जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है. पहले भारत ने कई बार विदेशी एजेंसियों द्वारा जारी गलत नक्शों पर आपत्ति जताई थी. ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत की उन्हीं आपत्तियों को मान्यता देने जैसा माना जा रहा है.

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

रणनीतिक मामलों के जानकारों ने इस कदम की सराहना की है. रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह अमेरिका का शानदार कदम है. कई लोगों का कहना है कि यह पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका है.

ट्रेड डील से भारत को फायदा

इस अंतरिम ट्रेड डील से भारत को स्टील, एल्युमिनियम, फार्मा, ऑटो और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में राहत मिली है. वहीं कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत ने अपने हितों की पूरी रक्षा की है.

कमाई का शानदार मौका! IPO लेकर आ रही है InCred Holdings, जानें इश्यू साइज से लेकर बाकी सभी डिटेल…

0

प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर समर्थित इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (InCred Holdings) अपना आईपीओ लेकर आ रही है. गुरुवार, 5 फरवरी को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से कंपनी को इस इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए फंड जुटाने की मंजूरी मिल गई है.

इससे पहले मामले से जुड़े लोगों के हवाले से पीटीआई ने 9 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फाइनेंशियल सर्विसेज प्लेटफॉर्म इनक्रेड ने पिछले नवंबर में प्री-फाइलिंग रूट के जरिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) जमा कराया था. इसका मतलब है कि कंपनी ड्राफ्ट पेपर्स में IPO की जानकारी का खुलासा बाद के चरणों तक रोक सकती है. यह बाजार की स्थितियों के आधार पर जरूरी जानकारियों का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस लेने का भी मौका देती है.

इन कंपनियों को भी मिली IPO लाने की मंजूरी

जिन दूसरी कंपनियों को रेगुलेटरी मंजूरी मिली है, उनमें लेजर पावर एंड इंफ्रा, सेडेमैक मेकाट्रॉनिक्स, आर्डी इंडस्ट्रीज, आर्मी इन्फोटेक, आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स और शंकरेश ज्वैलर्स शामिल हैं. इन कंपनियों ने भी पिछले साल सितंबर और नवंबर के बीच अपने ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और 2 से 6 फरवरी के बीच सेबी से ऑब्जर्वेशन मिले थे.

ये मंजूरी 2026 की शुरुआत में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और अमागी मीडिया लैब्स जैसे तीन बड़े IPOs के भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने के बाद मिली है.

इनक्रेड होल्डिंग के आईपीओ का साइज लगभग 3,000-4,000 करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है. आईपीओ में नए शेयरों के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल रहेगा.

क्या करती है कंपनी?

InCred NBFC InCred फाइनेंशियल सर्विसेज की सहायक कंपनी है. IIFL कैपिटल सर्विसेज ऑफर के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर है. साल 2016 में भूपिंदर सिंह ने इनक्रेड ग्रुप की शुरुआत की थी. इसके निवेशकों में अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, TRS (टीचर रिटायरमेंट सिस्टम ऑफ टेक्सास), KKR, ओक्स, एलेवर इक्विटी और मूर वेंचर पार्टनर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कंपनी अपने 3 वर्टिकल्स- इनक्रेड फाइनेंस, इनक्रेड कैपिटल और इनक्रेड मनी के जरिए अपना ऑपरेशन चलाती है. 2022 में इनक्रेड फाइनेंस को केकेआर इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ मर्ज किया गया.