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“बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन में गांठ, इन सभी सीटों पर होगी फ्रेंडली फाइट”

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बिहार में चुनाव से पहले सीटों को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच मतभेद अब सतह पर है। यूं तो महागठबंधन में शामिल लगभग सभी दलों ने उन विधानसभा सीटों का ऐलान कर दिया है जहां वो इस बार ताल ठोक रहे हैं।

इनमें राजद ने सबसे ज्यादा 143 उम्मीदवारों का ऐलान किया है।

इसके बाद कांग्रेस ने 62 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। माले 20 सीट जबकि मुकेश सहनी के नेतृत्व वाली पार्टी वीआईपी ने 14 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हालांकि कई ऐसी विधानसभा सीटें भी हैं जहां महागठबंधन में शामिल घटक दलों के प्रत्याशी एक-दूसरे के खिलाफ ही ताल ठोक रहे हैं।

इन 8 सीटों पर फ्रेंडली फाइट है-

बछवाड़ा से सीपीआई के अवधेश राय और कांग्रेस के गरीब दास

चैनपुर से वीआईपी के गोविंद बिंद और आरजेडी के बृज किशोर बिंद

नरकटियागंज से राजद के दीपक यादव और कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय<

लालगंज में राजद की शिवानी शुक्ला और कांग्रेस के आदित्य कुमार राजा

वैशाली से राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के ई. संजीव सिंह

सुल्तानगंज से राजद के चंदन सिन्हा और कांग्रेस के ललन यादव

कहलगांव से राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा

सिकंदरा से राजद के उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी

इस बीच राजद ने कांग्रेस से सीधा टकराव टालने की कोशिश की और बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम के खिलाफ कुटुंबा (आरक्षित) से प्रत्याशी नहीं उतारा। हालांकि, पार्टी के उम्मीदवार लालगंज, वैशाली और कहलगांव में कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में हैं।

इससे पहले तारापुर सीट पर राजद का पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से आमना-सामना होने की संभावना थी, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को उतारा है। हालांकि, वीआईपी ने अपने उम्मीदवार सकलदेव बिंद को समर्थन देने से इनकार किया, जिसके बाद उन्होंने नाराज होकर नामांकन वापस ले लिया और चौधरी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए।

इधर निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण के चुनाव के लिए कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीटों पर छह नवंबर को मतदान होना है। इस चरण में नामांकन पत्रों की जांच के बाद 300 से अधिक प्रत्याशियों के पर्चे खारिज किए गए और 61 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए।

दिवाली के बाद निकला दिल्ली का दम! कई इलाकों में छाई धुंध की चादर…

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दिवाली के बाद दिल्लीवालों की सांसों पर प्रदूषण का पहरा लग गया है। सोमवार रात राजधानी में जमकर फटाखे फोड़े गए, जिसने हवा को जहरीला बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही ग्रीन फटाखों को रात 8 से 10 बजे तक फोड़ने की इजाजत दी थी, लेकिन दिल्लीवासियों का उत्साह समय की सीमा को पार करता दिखा।

इसके चलते शहर की हवा ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई और कई इलाकों में धुंध की चादर छा गई।

हवा हुई जहरीली, 36 स्टेशन लाल निशान में

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की SAMEER ऐप के मुताबिक, दिल्ली के 38 में से 36 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों ने ‘रेड जोन’ में प्रदूषण दर्ज किया। इसका मतलब है कि हवा ‘बेहद खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंच गई। मंगलवार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 347 था, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। कुछ जगहों पर एक्यूआई 400 को पार कर गया। दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गुरुग्राम में भी हवा जहरीली हो चुकी है।

कहां कितना AQI (सुबह 6 बजे तक)

बवाना- 418

वजीरपुर- 408

जहांगीरपुरी- 404

आईटीओ- 345

आया नगर- 349

चांदनी चौक- 347

आनंद विहार- 352

नोएडा-324

ग्रेटर नोएडा- 288

गाजियाबाद- 326

गुरुग्राम 338

GRAP-2 लागू

बढ़ते प्रदूषण के बीच CAQM ने रविवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप के दूसरे चरण को लागू कर दिया। GRAP के तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन फटाखों की अनदेखी ने इन कोशिशों पर पानी फेर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की हिदायत और हकीकत

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन फटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी थी। नियम के मुताबिक, फटाखे सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक फोड़े जा सकते थे। लेकिन, दिल्ली की सड़कों पर देर रात तक फटाखों की गूंज सुनाई दी, जिसने हवा को और जहरीला कर दिया।

“ये कनाडा का सिरदर्द है, भारत का नहीं; खालिस्तानियों पर भारतीय राजनयिक की दो टूक; ट्रूडो को भी संदेश”

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कनाडा में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने साफ तौर पर कहा है कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी समूहों से उत्पन्न खतरा वहां के लिए घरेलू चुनौती हैं, न कि भारतीय सरजमीं के लिए वह चुनौती हैं।

कनाडा के टीवी चैनल CTV न्यूज को दिए एक खास इंटरव्यू में पटनायक ने जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारतीय राजनयिकों को खालिस्तानी आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने के आरोपों को भी खारिज कर दिया और उसे बेतुका करार दिया।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में कनाडा का विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान जारी कर व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई क्षेत्रों में सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए आनंद ने कहा था कि जन सुरक्षा “कनाडा सरकार की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता” बनी हुई है। उन्होंने कनाडा की धरती पर किए गए अपराधों की स्वतंत्र कानूनी जाँच की जरूरत का मुद्दा भी उठाया था।

कनाडाई विदेश मंत्री के भारत दौरे पर सिख संघों की नाराजगी

उनकी यात्रा के बाद, कनाडा के सिख संघ ने ओटावा पर सामुदायिक सुरक्षा को सौदेबाजी के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। संघ के अध्यक्ष मोनिंदर सिंह ने कहा, “खालिस्तानियों को भारतीय एजेंटों से लगातार खतरों का सामना करते हुए आर्थिक और राजनयिक संबंधों को गहरा करना जिम्मेदार कूटनीति नहीं है।”

इन सबके बीच, पटनायक ने कहा कि ओटावा और नई दिल्ली के बीच हालिया चर्चा “संपूर्ण सुरक्षा स्थिति” पर केंद्रित रही है, जिसमें खालिस्तानी समूहों का प्रभाव भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम अभी इस देश में हो रहे विभिन्न सुरक्षा परिदृश्यों पर बात कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि ऐसे सुरक्षा परिदृश्य जहाँ लोगों का एक समूह वास्तव में आतंक फैला रहा है, रिश्तों को बंधक बना रहा है। तो उनसे कैसे निपटेंगे?

व्यक्तिगत सुरक्षा के मुद्दे पर जताई निराशा

इस पर पटनायक ने दो टूक कहा कि ‘यह कोई भारतीय समस्या नहीं है’। उन्होंने तर्क दिया कि खालिस्तान का मुद्दा केवल भारत की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा, “कनाडा इस स्थिति को भारतीय समस्या के रूप में नहीं देख सकता। यह कनाडा की समस्या है। कुछ कनाडाई लोग ही इस समस्या को पैदा कर रहे हैं।” पटनायक ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के मुद्दे पर भी निराशा जताई। खालिस्तानी चरमपंथियों से कथित धमकियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “मुझे यह अजीब लगता है कि यहाँ एक उच्चायुक्त को सुरक्षा में रहना पड़ता है। मैं सुरक्षा में हूँ। मुझे ऐसे देश में सुरक्षा में नहीं रहना चाहिए।” पटनायक ने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत में “भारत में कनाडाई लोगों की सुरक्षा” भी शामिल है, और इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा सहयोग पारस्परिक है।

2023 में भारत-कनाडा में बढ़ा तनाव

बता दें कि 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों और राजनयिकों की भूमिका का आरोप लगाते हुए संसद में कहा था कि उनके पास विश्वसनीय सबूत हैं लेकिन उसका कोई ठोससबूत नहीं दे पाए थे। भारत ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था। उसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेपटरी हो गए थे, जो अब धीरे-घीरे सामान्य हो रहे हैं।

“इन दो राज्यों में महीनेभर बाद मनाई जाएगी दीपावली, ‘बूढ़ी’ दिवाली नाम; अनोखी वजह और रिवाज”

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भारतभर में ही नहीं विदेशों में भी दिवाली धूमधाम से मनाई गई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमालयी प्रदेशों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिवाली महीनेभर बाद मनाई जाएगी।

स्थानीय इसे बूढ़ी दिवाली बुलाते हैं। इस दिवाली को मनाने के भी अनोखे रिवाज और परंपराएं हैं। इसमें रस्साकशी, मशाल जुलूस और अन्य पारंपरिक रिवाज शामिल हैं।

उत्तराखंड में तो दीपावली मुख्य रूप से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह यानी 20 या 21 अक्टूबर को मनाई जा रही है, लेकिन पर्व के कुछ रीति-रिवाज और लोक-कथाएं हिमालयी क्षेत्रों में इस बूढ़ी दिवाली के पर्व को अलग महत्व देती हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्सों में 11 दिन बाद भी दिवाली मनाई जाएगी। स्थानीय लोग इसे बग्वाल कहते हैं। उत्तराखंड के जौनसार बावर और हिमाचल के कुल्लू में दिवाली नवंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में मनाई जाती है।

नामकरण की अनोखी कहानी

बूढ़ी दिवाली नामकरण के पीछे लोगों का विश्वास यह है कि यह दिवाली पारंपरिक दिवाली के लगभग एक महीने बाद आती है, जो खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में मनाई जाती है। इसे राम-रावण के युद्ध और भगवान राम के अयोध्या आगमन से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राम की जीत की खबर महीनेभर बाद मिली। इसलिए स्थानीय लोगों ने तब खुशी में दिवाली मनाई। लोग मानते हैं कि यह दिवाली जीवन के पुराने कष्ट और बुराइयों से मुक्ति का संदेश देती है।

पटाखे नहीं फोड़ते

जौनसार बावर में बूढ़ी दीपावली कई दिनों तक मनाई जाती है। इस दिवाली का खास रीति है कि इसमें पटाखे नहीं जलाए जाते, बल्कि भीमल की लकड़ी की मशालें जलाई जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा पहनकर गांव के पंचायती आंगन या खलिहान में इकट्ठा होते हैं। वहां ढोल-दमाऊ की थाप पर रासो, तांदी, झैंता, हारुल जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।

इस पर्व की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होता है और यहां के लोग इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। बूढ़ी दिवाली की मान्यता जौनसार बावर के बुजुर्गों के अनुसार भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर इस जनजातीय क्षेत्र में देर से पहुंचने के कारण महीनेभर बाद मनाई जाती है। इसके अलावा, जौनसार बावर कृषि प्रधान क्षेत्र है, इसलिए फसल कटाई के बाद ही लोग इस त्योहार को मनाने की परंपरा रखते हैं।

“अपने MP पर लगाएं लगाम, वरना… महाराष्ट्र NDA में घमासान; BJP के खिलाफ शिवसेना-NCP एक क्यों?”

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महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्ताधारी NDA गठबंधन की गांठ ढीले पड़ गए हैं और गठबंधन के अंदर ही घमासान छिड़ गया है। हालात, यहां तक पहुंच गए हैं कि दो सहयोगी दलों (शिवसेना और NCP) ने भाजपा को अपनी ही सांसद पर लगाम लगाने की नसीहत दे डाली है।

दरअसल, ये विवाद एक शुद्धिकरण समारोह से जुड़ा हुआ है, जिसे अंजाम दिया है भाजपा की राज्यसभा सांसद मेघा कुलकर्णी ने। कुलकर्णी ने रविवार को पुणे के शनिवार वाड़ा में ‘शुद्धिकरण समारोह’ आयोजित किया था।

पुणे के ऐतिहासिक शनिवार वाड़ा में मुस्लिम महिलाओं द्वारा पेशवाओं के गढ़ रहे पुणे के किले में नमाज पढ़े जाने के विरोध में भाजपा सांसद की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं और हिन्दूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने वहां गोमूत्र छिड़क कर उसका शुद्धिकरण किया था। इस घटना की दोनों उप मुख्यमंत्री यानी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने निंदा की है और बाजपा सांसद मेघा कुलकर्णी की इस हरकत की आलोचना की है। दोनों ही सहयोगी दलों ने भाजपा सेअपनी राज्यसभा सांसद पर लगाम लगाने को कहा है।

भाजपा सांसद पर FIR दर्ज करने की मांग

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, NCP प्रवक्ता रूपाली पाटिल थोम्ब्रे ने कहा, “हम भाजपा से उन पर लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं। हम पुलिस से भी मांग कर रहे हैं कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश के लिए उन पर मामला दर्ज किया जाए। वह हिंदू बनाम मुस्लिम का मुद्दा उठा रही हैं, इसलिए उनके खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए, भले ही वह सांसद ही क्यों न हों। पुणे में हिंदू और मुसलमान भाई-भाई की तरह रहते हैं और उन्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।” थोम्ब्रे ने सोमवार की शाम पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कुलकर्णी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर एक आंदोलन भी चलाया।

अल्पसंख्यक समुदाय पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश

दरअसल, महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय चुनावों से पहले एनसीपी अल्पसंख्यक समुदाय पर अपनी पकड़ फिर से बनाने की कोशिश कर रही है, जिसे भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल होने के बाद झटका लगा है। भाजपा सांसद के किलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग NCP की इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है।

गलतफहमी न पालें कि सरकार में हैं

दूसरी तरफ, भाजपा के हिंदुत्व विचारों की सहयोगी शिवसेना ने भी मेघा कुलकर्णी पर निशाना साधा है। शिवसेना नेता नीलम गोरहे ने कहा, “शनिवार वाड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके कुछ नियम हैं और इन नियमों का पालन किया जाना चाहिए। अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो राज्य पुलिस और जिला कलेक्टर को कार्रवाई करनी चाहिए।” उन्होंने दो टूक कहा कि किसी को भी यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वह सरकार में हैं।

भाजपा सांसद का अल्टीमेटम

गोरहे और थोम्ब्रे की यह आलोचना उस घटना के बाद आई है जब कुलकर्णी ने कुछ हिंदू संगठनों के साथ मिलकर रविवार को उस जगह पर गोमूत्र छिड़का जहाँ मुस्लिम महिलाएँ नमाज़ पढ़ रही थीं। इतना ही नहीं कुलकर्णी ने शनिवार वाड़ा के बाहर स्थित एक मज़ार और दरगाह को एक सप्ताह के भीतर हटाने का अल्टीमेटम भी दिया था। दूसरी तरफ, भाजपा सांसद के आंदोलन के बाद, पुलिस ने संरक्षित स्थल पर नमाज़ अदा करने के आरोप में अज्ञात महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कांग्रेस का तंज और सवाल

कांग्रेस ने भी भाजपा के शुद्धिकरण कार्यक्रम और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, “शनिवार वाड़ा को शुद्ध करने का कार्य वास्तव में हास्यास्पद है। शनिवार वाड़ा कोई धार्मिक स्थल नहीं है।” उन्होंने कहा, “यह दरगाह पेशवा काल से ही वहाँ मौजूद है। पेशवाओं ने खुद इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।” कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “शनिवार वाड़ा में इतना कुछ हो चुका है कि भाजपाइयों, आपके तर्क के अनुसार, तो पूरे वाड़ा को ही गोमूत्र से धोना चाहिए। इस तरह जनता को भी पता चल जाएगा कि आपकी मानसिकता कितनी पिछड़ी है।”

“दिवाली पर देश के नाम पीएम मोदी का पत्र, ऑपरेशन सिंदूर और GST पर कही बड़ी बात”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के पावन अवसर पर देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने प्रकाश के इस त्योहार को एकता, समृद्धि व अंधकार पर विजय का प्रतीक बताता और राष्ट्र की प्रगति पर जोर दिया।

पत्र में लिखा गया, ‘ऊर्जा और उमंग से भरी दीपावली के इस पावन पर्व पर आप सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। अयोध्या में राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद ये दूसरी दीपावली है। प्रभु श्रीराम हमें मर्यादा का पालन करना सिखाते हैं। साथ ही हमें अन्याय से लड़ने की भी सीख देते हैं। इसका जीवंत उदाहरण हमने कुछ महीने पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखा। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने मर्यादा का पालन भी किया और अन्याय का बदला भी लिया।’

पीएम मोदी की ओर से कहा गया, ‘इस बार की दीपावली इसलिए भी विशेष है क्योंकि देश के अनेक जिलों में, दूर-दराज के क्षेत्रों में पहली बार दिवाली के दीप जलेंगे। ये वो जिले हैं, जहां नक्सलवाद और माओवादी आतंक को जड़ से मिटा दिया गया है। बीते दिनों में हमने देखा है कि कैसे अनेक व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए और उन्होंने देश के संविधान के प्रति आस्था जताई है। देश की ये बहुत बड़ी उपलब्धि है। इन ऐतिहासिक उपलब्धियों के बीते कुछ दिनों पहले देश में नेक्स्ट जनरेशन रिफॉरम्स्स की भी शुरुआत हुई है। नवरात्रि के पहले दिन GST की कम दरें लागू हुई हैं। GST बचत उत्सव में देशवासियों के हजारों करोड़ रुपये बच रहे हैं।’

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर क्या कहा

पत्र में आगे कहा गया, ‘अनेक संकटों से गुजर रहे विश्व में हमारा भारत स्थिरता और संवेदनशीलता दोनों का प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले कुछ समय में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनने वाले हैं। विकसित और आत्मनिर्भर भारत की इस यात्रा में एक नागरिक के तौर पर हमारा प्रमुख दायित्व है- हम देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाएं। हम स्वदेशी अपनाएं और गर्व से कहें- ये स्वदेशी है। हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ाएं। हम हर भाषा का सम्मान कें। हम स्वच्छता का पालन करें। हम अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। भोजन में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करें और योग को अपनाएं। ये सारे प्रयास हमें और गति से विकसित भारत की ओर ले जाएंगे।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली हमें यह भी सिखाती है कि जब एक दीप दूसरे दीप को जलाता है, तो उसका प्रकाश कम नहीं होता बल्कि और बढ़ता है। इसी भावना से हमें भी इस दीपावली पर अपने समाज में अपने आसपास, सन्द्राव, सहयोग और सकारात्मकता के दीप जलाने हैं। एक बार फिर आपको दीप पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं।

“गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब है? नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त”

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हिंदू धर्म में कार्तिक माह में कई त्योहार पड़ते हैं। दिवाली इस माह का प्रमुख त्योहार है। दिवाली का पर्व 5 दिनों तक मनाया जाता है। दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और इस पर्व का समापन भाई दूज पर होता है।

इस साल 18 अक्टूबर को धनतेरस था और 20 अक्टूबर को दिवाली का मुख्य पर्व यानी महालक्ष्मी पूजा हुई। आमतौर पर महालक्ष्मी के पूजा के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है, लेकिन इस बार एक दिन बाद गोवर्धन पूजा होगी। इस साल दिवाली का पर्व 6 दिनों तक मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज मनाया जाएगा।

आइए जानते हैं, गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब है…

गोवर्धन पूजा 2025- इस सालगोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को है। गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट या अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है, दीपावली के अगले दिन, कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके मवेशियों को इंद्रदेव की मूसलधार बारिश से बचाने की घटना की याद में मनाया जाता है गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत और गोवर्धन देव की पूजा की जाती है। इस दिन किसान और ग्रामीण समुदाय विशेष रूप से गोवर्धन की पूजा करके वर्ष भर की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। गोवर्धन पूजा को वर्षभर की समृद्धि, सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना के लिए मनाया जाता है।

प्रतिपदा तिथि की शुरुआत: 21 अक्टूबर, शाम 05:54 बजे

प्रतिपदा तिथि का समापन: 22 अक्टूबर, रात 08:16 बजे

प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:26 बजे से सुबह 08:42 बजे तक

सायाह्न काल मुहूर्त: दोपहर 03:29 बजे से शाम 05:44 बजे तक

भाई दूज 2025- इस सालभाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर 2025 को है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए तिलक करती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं। भाई दूज का दिन भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने और पारिवारिक प्रेम को बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

द्वितीया तिथि की शुरुआत: 22 अक्टूबर, रात 08:16 बजे

द्वितीया तिथि का समापन: 23 अक्टूबर, रात 10:46 बजे

भाई दूज का शुभ समय: दोपहर 01:13 बजे से दोपहर 03:28 बजे तक

यह विज्ञान है क्योंकि चंद्रमा गति पूरे 30 दिन की नहीं है इसलिए लगभग डेढ़ माह में एक दिन बढ़ाना पड़ता है, क्या कोई मन मर्जी से नहीं करता जिस दिन चंद्रमा का कालखंड आधे दिन से ऊपर बढ़ जाता है उस दिन बढ़ाया जाता है। अज्ञानी तो इसमें भी गलत कमेंट ही निकाल देते हैं.

दीपों की रोशनी से आपका जीवन जगमगाए, दीपों की झिलमिलाहट और मिठाइयों की मिठास, …दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ! —

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Devotional Wishes in Hindi: दीपों का त्योहार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। दीपावली के शुभ पर्व पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। दिवाली हिंदुओं सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है। हर साल दिवाली को लेकर भव्य तैयारियां की जाती हैं। देशभर में लगभग सभी मंदिरों को फूलों और लाइट्स से सजाया जाता है और बड़े हर्षोल्लास के साथ दीपोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस खास मौके पर आप भी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिजनों को दिवाली की खास शायरी, विशेज और कोट्स शेयर करके शुभकामना संदेश भेज सकते हैं।

CG : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को दीपावली और गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को दीपावली और गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली का पर्व प्रकाश, सत्य और सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपों का यह उत्सव हमारे जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना और आशा का संचार करता है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे दीपावली को स्वदेशी भावना के साथ, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए मनाएं और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर समाज में प्रेम और सौहार्द का संदेश फैलाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के प्रति हमारी श्रद्धा और आभार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति का संरक्षण ही समृद्धि का आधार है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दीपावली और गोवर्धन पूजा का यह पावन अवसर छत्तीसगढ़ राज्य में खुशहाली, समृद्धि और विकास की नई रोशनी लेकर आएगा तथा हर घर में आनंद, शांति और उजाला फैलाएगा।

CG : सोहरई करमा महोत्सव में शामिल हुए सीएम साय, रौतिया समाज की सांस्कृतिक पहचान बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले में अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद, प्रांतीय शाखा छत्तीसगढ़ द्वारा ग्राम कण्डोरा में आयोजित महासम्मेलन (सोहरई करमा महोत्सव 2025) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कुनकुरी में 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित रौतिया समाज के सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा ग्राम पंचायत कण्डोरा में 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाले रौतिया भवन निर्माण का भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री साय ने समाज की मांग पर ग्राम कण्डोरा में करमा अखरा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए तथा रायपुर में रौतिया भवन पहुँच मार्ग के लिए 25 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने मंच पर रौतिया समाज के वीर शहीद बख्तर साय और मुण्डल सिंह के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि करमा महोत्सव हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे सभी समाज मिलजुलकर मनाते हैं। यह पर्व हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि एकादशी करमा, दशहरा करमा जैसी परंपराएँ हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं। ये उत्सव समाज को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।

⁠मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को तीव्र गति से लागू कर रही है। सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रति मानक बोरा दर को 5500 रुपए कर दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने लोगों से वोकल फॉर लोकल अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल उन्मूलन की दिशा में तीव्रता से कार्य कर रही है। दो दिन पूर्व ही 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान स्थित आमा बगीचा के करमा पूजन स्थल पर करम वृक्ष की डाली की पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने करमा नर्तक दल के साथ गले में मांदर टाँगकर ताल मिलाते हुए करम वृक्ष की डाली के चारों ओर उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय तथा परिवारजन भी उपस्थित थे।

सोहरई करमा महोत्सव: रौतिया समाज की सांस्कृतिक पहचान

सोहरई करमा महोत्सव मूलतः रौतिया समाज द्वारा गोवर्धन पर्व के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस दिन नए फसल को पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ कर घर लाया जाता है। ग्राम कण्डोरा में आयोजित इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए कुल 52 मंडलों के नर्तक दलों ने सहभागिता की। विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।

इस अवसर पर सांसद राधेश्याम राठिया, अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ. पी. साय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दामोदर सिंह, राष्ट्रीय महासचिव आजाद सिंह, केंद्रीय संगठन मंत्री भुनेश्वर केसर, केंद्रीय महिला सदस्य उमा देवी सहित समाज के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे.