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जनसेवा ही हमारा संकल्प – मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जनदर्शन में सुनी जनता की समस्याएँ, त्वरित निराकरण के दिए निर्देशI]K,

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महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री और भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जनसेवा ही हमारा संकल्प है, जनता की प्रत्येक समस्या का समाधान सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने आज अपने निवास बीरपुर जिला सूरजपुर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुँचे नागरिकों की समस्याएँ और सुझाव सुनी। उन्होंने अधिकारियों को हर आवेदन पर आवश्यक और त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का निराकरण स्थल पर ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से जनता तक पहुँच सके।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की अध्यक्षता में आज जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) सूरजपुर की शासी परिषद की बैठक भी जिला पंचायत कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में सांसद श्री चिंतामणि महराज, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती कुसुमलता राजवाड़े, कलेक्टर सहित जिले के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में खनिज न्यास निधि से संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई और विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने निर्देश दिए कि खनिज न्यास निधि से संचालित सभी योजनाएँ जनजीवन के उत्थान में सार्थक योगदान दें, तथा उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि खनिज क्षेत्र से प्राप्त संसाधनों का अधिकतम लाभ स्थानीय जनता को मिले और इन योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, सड़क एवं रोजगार के क्षेत्र में स्थायी सुधार हो।

Global Summit 2025: जर्मनी से दुनिया ने सुनी भारत की दहाड़, एक्सपर्ट्स बोले- निवेश करना है तो हिंदुस्तान से बेहतर कोई जगह नहीं!”

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Global Summit 2025: जर्मनी के स्टटगार्ट शहर में भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक नेतृत्व की गूंज सुनाई दी. ग्लोबल समिट’ के दूसरे संस्करण का, जहां दुनिया भर के दिग्गजों ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत और जर्मनी के मजबूत होते रिश्तों पर मंथन किया.

इस खास समिट में एक सत्र ऐसा भी रहा जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से लेकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तक पर खुलकर चर्चा हुई और यह समझने की कोशिश की गई कि इस दौर में भारत और जर्मनी मिलकर दुनिया को कैसे एक नई राह दिखा सकते हैं.

भारत-जर्मनी के लिए सुनहरा मौका

समिट के एक बेहद अहम सत्र का विषय था ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स एंड टैरिफ वॉर्स:

द इंडिया-जर्मनी एडवांटेज’. इसमें LBBW के प्रबंध निदेशक मंडल के सदस्य जोआचिम एर्डले, लार्सन एंड टुब्रो के समूह मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ला, स्टेट काउंसलर कास्पर सटर और प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा जैसे दिग्गजों ने अपनी बेबाक राय रखी. चर्चा का सार यह था कि जब दुनिया संरक्षणवादी नीतियों और टैरिफ की लड़ाइयों से जूझ रही है, तब भारत और जर्मनी स्थिरता और विकास के दो मजबूत स्तंभ बनकर उभर सकते हैं. एक तरफ भारत का विशाल बाजार और बढ़ती उपभोक्ता शक्ति है, तो दूसरी तरफ जर्मनी की औद्योगिक और तकनीकी महारत. विशेषज्ञों का मानना था कि दोनों लोकतांत्रिक देश मिलकर न केवल सप्लाई चेन के झटकों का सामना कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार को एक नई, भरोसेमंद दिशा भी दे सकते हैं.

30 साल में 13 गुना बढ़ी इकोनॉमी

इस दौरान लार्सन एंड टुब्रो के समूह मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ला ने भारतीय अर्थव्यवस्था की शानदार तस्वीर पेश की. उन्होंने दमदार आंकड़ों के साथ बताया, “पिछले 30 सालों में भारत की अर्थव्यवस्था 6% से बढ़ी है. इसका सीधा मतलब है कि 30 साल में हमारी इकोनॉमी 13 गुना बड़ी हो गई है.” उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान प्रति व्यक्ति आय में भी 9 गुना का जबरदस्त उछाल आया है, जबकि इसी अवधि में अमेरिका में यह आंकड़ा 4.7 गुना ही बढ़ा. ये आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि भारत ने विकास की कितनी लंबी और तेज छलांग लगाई है और आज वह दुनिया की नजरों में क्यों एक चमकता सितारा बना हुआ है.

“Bihar Vidhan Sabha Chunav: कब होगी CEC की बैठक, कब आएगी BJP के उम्मीदवारों की लिस्ट? ये रहा पूरा अपडेट”

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बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 12 या 13 अक्टूबर को हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि इसमें बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगेगी.

एनडीए में सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए आज और कल का दिन भी महत्वपूर्ण है. 11 अक्टूबर को बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक दिल्ली में संभावित है, जिसमें बीजेपी उम्मीदवारों के नाम पर मंथन होगा. उसके बाद ये नाम केंद्रीय चुनाव समिति के सामने रखे जाएंगे.

सभी गठबंधन सहयोगियों के बीच अब अंतिम समझौते पर सहमति बनने की उम्मीद है. राज्य स्तर की वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं. बीजेपी ने प्रत्येक सीट के लिए तीन नामों का एक पैनल तैयार किया है, जिस पर शनिवार को कोर ग्रुप में चर्चा होगी और फिर उसे केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के लिए रखा जाएगा. जदयू (JDU) ने एनडीए के सहयोगियों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी बीजेपी को सौंपी है.

13 अक्टूबर को आएगी पहली लिस्ट!

सूत्रों का ये भी कहना है कि उम्मीदवारों की पहली सूची संभवतः 13 अक्टूबर को जारी हो सकती है. उम्मीदवारों की पहली सूची के संयुक्त एनडीए सूची होने की उम्मीद है, जिसमें केवल बीजेपी नहीं बल्कि सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो सकते हैं.

उधर, एनडीए के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान को विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है. लोजपा (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा कि पदाधिकारियों में सहमति बनी है कि सभी 243 विधानसभा सीटों पर चिराग पासवान जो भी फैसला लेंगे, वो सभी के लिए स्वीकार्य होगा.

चिराग पासवान लेंगे हर फैसला

लोजपा सांसद शंभवी चौधरी ने कहा कि हमने राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान जी को चुनाव से जुड़े सभी फैसलों का अधिकार सौंप दिया है. सूत्रों का कहना है कि पहले लोजपा (रामविलास) ने 20-22 सीटों पर सहमति जताई थी, लेकिन अब पार्टी कम से कम 25 और सीटों की मांग कर रही है. वहीं, पार्टी के कई नेताओं का तो ये भी मानना है कि कम से कम 45 सीटें मिलनी चाहिए.

सही जानकारी, क्वालिटी इलाज. भारत के मरीज अस्पतालों से क्या चाहते हैं? रिपोर्ट में खुलासा…

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अब ज्यादातर भारतीय मरीज इलाज के मामले में खुली और भरोसेमंद जानकारी चाहते हैं. एफआईसीसीआई (FICCI) और ईवाई-पार्थेनॉन (EY-Parthenon) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 83% मरीज चाहते हैं कि उन्हें अस्पतालों और इलाज की सही और साफ जानकारी आसानी से मिले, जबकि लगभग 90% मरीज बेहतर क्वालिटी की गारंटी मिलने पर थोड़ा ज्यादा खर्च करने को भी तैयार हैं.

ट्रू अकाउंटेबल केयर: मैक्सिमाइजिंग हेल्थकेयर डिलीवरी इम्पैक्ट, एफिशियंटली रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे भारत की

”हेल्थकेयर व्यवस्था को बेहतर, सस्ती और भरोसेमंद बनाया जा सकता है. भारत में इलाज अब भी महंगा”

”रिपोर्ट कहती है कि भारत की हेल्थ सेवाएं दूसरे देशों के मुकाबले सस्ती हैं, लेकिन आम लोगों के लिए इलाज की लागत अब भी बोझ बनी हुई है.”

बड़े निजी अस्पतालों में एक मरीज पर रोजाना 30,000 से 40,000 रुपए तक खर्च आता है. मेट्रो शहरों के बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में ये खर्च 70,000 रुपए तक पहुंच जाता है. फिर भी, इस सेक्टर में निवेश पर रिटर्न सिर्फ 13% फीसदी है, जबकि बाकी सेक्टरों जैसे एफएमसीजी या रिटेल में ये 25% से ज्यादा है.

रिपोर्ट के अनुसार एक निजी अस्पताल में औसत इलाज का खर्च करीब 58,000 रुपए है, जो देश के आधे परिवारों के सालभर के खर्च से भी ज्यादा है. ग्रामीण इलाकों में तो हाल और भी मुश्किल है. करीब 2530% लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है, यानी उन्हें इलाज के लिए अपनी जेब से पैसे देने पड़ते हैं.

”मरीजों को चाहिए पारदर्शिता, डॉक्टर भी तैयार”

ईवाई-पार्थेनॉन के हेल्थकेयर लीडर कैवान मूवडावाला ने कहा, भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था ने काफी तरक्की की है, लेकिन आने वाले सालों में बुजुर्ग आबादी और बढ़ती बीमारियों की वजह से नए दबाव आएंगे. अच्छी बात ये है कि अब मरीज पारदर्शिता चाहते हैं और डॉक्टर भी इलाज के नतीजे साझा करने के लिए तैयार हैं.

ईवाई-पार्थेनॉन के दूसरे पार्टनर अक्षय रवि ने कहा कि अब सरकार और प्राइवेट अस्पताल दोनों ही गुणवत्ता और मरीजों के अनुभव को लेकर गंभीर हैं. उनका कहना है कि अब वक्त है कि हम संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर ध्यान दें.

एफआईसीसीआई हेल्थ सर्विस कमेटी के सह-अध्यक्ष वरुण खन्ना ने कहा, यह रिपोर्ट दिखाती है कि हम कहां तक पहुंचे हैं और आगे किस दिशा में जाना चाहिए. अच्छी बात ये है कि 90% डॉक्टर मानते हैं कि इलाज के लिए एक समान मानक और नतीजे तय करना जरूरी है.

एफआईसीसीआई के चेयरमैन डॉ हर्ष महाजन ने कहा, अगर हम जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण इलाज को बढ़ावा दें, तो भारत एक ऐसा हेल्थकेयर सिस्टम बना सकता है जो भरोसेमंद भी हो और सस्ता भी.

”जानें रिपोर्ट क्या-क्या है खास”

”साल 2000 से अब तक भारत में अस्पतालों की बेड क्षमता लगभग दोगुनी हुई है. मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटें पांच गुना बढ़ी हैं.”

एडवांस इलाज जैसे कैथ लैब और कैंसर मशीनों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. अगर मौजूदा स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो 2047 तक अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या तीन गुना हो सकती है, जिसके लिए 2030 लाख नए बेड की जरूरत होगी.

अगर इलाज का तरीका नतीजा-आधारित (Outcome-based) बना, तो अस्पताल में भर्ती 2030% तक घटाई जा सकती है.

सिर्फ एक-तिहाई मरीजों को ही अस्पतालों की गुणवत्ता से जुड़ी असली जानकारी मिल पाती है. ज्यादातर लोग डॉक्टर की सिफारिश या पहचान पर भरोसा करते हैं.

10% से भी कम निजी अस्पतालों को NABH की मान्यता है और सिर्फ 2% लैब्स NABL प्रमाणित हैं.

रिपोर्ट कहती है कि अब भारत को डिजिटल और डेटा-आधारित हेल्थ सिस्टम की ओर बढ़ना चाहिए. इसके लिए VALUE Framework नाम की योजना दी गई है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, एआई टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम डाटा शेयरिंग जैसी चीजों पर जोर है.

इसके साथ ही, रिपोर्ट ने 7C Framework भी सुझाया है – यानी क्वालिटी, लागत पर नियंत्रण, इलाज में तालमेल, मरीज को सशक्त बनाना और *डिजिटल जुड़ाव जैसे कदम उठाने की जरूरत है.

“बाडेन-वुर्टेमबर्ग और महाराष्ट्र के बीच गठबंधन ‘आर्थिक महाशक्तियों’ का एक मॉडल, ग्लोबल समिट में बोले स्टेट सेक्रेटरी फ्लोरियन हैस्लर”

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ग्लोबल समिट 2025 के मंच पर भारत के अलावा जर्मनी के कई दिग्गज हस्तियों ने अपनी बात रखी. बाडेन-वुर्टेमबर्ग के स्टेट सेक्रेटरी, फ्लोरियन हैस्लर ने कहा कि 10 साल पहले महाराष्ट्र के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत हुई थी और इसने भारत और जर्मनी जैसे 2 आर्थिक महाशक्तियों को एकजुट करने का काम किया.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी सिर्फ विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आपसी समृद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी है.

ग्लोबल समिट के दूसरे एडिशन में अपने भाषण में बाडेन-वुर्टेमबर्ग के राजनीतिक समन्वय और यूरोप मामलों के स्टेट सेक्रेटरी, फ्लोरियन हैस्लर (Florian Hassler) ने जर्मन राज्य (Baden-Württemberg) और महाराष्ट्र के बीच रणनीतिक साझेदारी की कामयाबी पर रोशनी डाली.

हैस्लर ने कहा, “आज से 10 साल पहले, हमने महाराष्ट्र के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की थी, जिसने भारत और जर्मनी जैसे 2 आर्थिक महाशक्तियों को एकजुट किया.”

बाडेन-वुर्टेमबर्ग में 50 से अधिक भारतीय कंपनियां हैस्लर

साथ ही उन्होंने उद्योग, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में एक दशक के मजबूत सहयोग का जिक्र भी किया. अपने संबोधन में उन्होंने गहरे आपसी विश्वास, ठोस आर्थिक आदान-प्रदान और एक साझा भविष्य के लिए एक कॉमन फ्यूचर पर आधारित संबंधों की बात की.

स्टेट सेक्रेटरी हैस्लर ने आज गुरुवार को इस द्विपक्षीय सहयोग के असरदार विस्तार का विवरण देते हुए कहा कि बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्य की करीब 350 कंपनियां वर्तमान में महाराष्ट्र में सक्रिय हैं, जबकि 50 से अधिक भारतीय कंपनियों ने बाडेन-वुर्टेमबर्ग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. भारत और जर्मनी के बीच स्थापित हुए जीवंत आर्थिक गलियारे का उदाहरण देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा, “यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों में कितना अटूट विश्वास है.”

जर्मनी में संभावित स्किल गैप को दूर कर सकता है भारत

यह साझेदारी वाणिज्य के क्षेत्र से आगे निकलकर शिक्षा और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसे अहम क्षेत्रों तक पहुंचती है. राजनीतिक समन्वय और यूरोप के स्टेट सेक्रेटरी हैस्लर ने बताया कि बाडेन-वुर्टेमबर्ग के यूनिवर्सिटीज भारतीय संस्थानों के साथ 100 से ज्यादा साझेदारियां करती हैं, जिनमें से अच्छी खासी संख्या महाराष्ट्र में है, जो विविध क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान करने वाले सहयोगात्मक अनुसंधान (collaborative research) को बढ़ावा देती है.

इसके अलावा, हैस्लर ने अपने संबोधन के दौरान कुशल व्यवसायों और व्यावसायिक प्रशिक्षण में “ब्रिज” के महत्व पर प्रकाश डाला, जो एक पारस्परिक रूप से लाभकारी अवसर पेश करता है और महाराष्ट्र के टैलेंटेड लोग बाडेन-वुर्टेमबर्ग में काम करने के लिए आ सकते हैं. यह पहल न केवल जर्मनी में संभावित स्किल गैप को दूर करती है, बल्कि भारत के युवा प्रोफेशनल्स के लिए अमूल्य अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी प्रदान करती है.

साझेदारी सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी प्रतीक

हैस्लर ने जोर देते हुए कहा कि भारत और जर्मनी की साझेदारी सिर्फ विज्ञान और प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं है; बल्कि यह एक समृद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी प्रतीक है. दो दशकों से भी अधिक समय से, बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्य की राजधानी स्टटगार्ट भारतीय फिल्म महोत्सव की मेजबानी कर रही है, इसे उन्होंने पूरे यूरोप में सबसे बड़ा भारतीय फिल्म महोत्सव घोषित करते हुए गर्व महसूस किया, जो प्रभावी रूप से संस्कृतियों को जोड़ता है और गहरी समझ को बढ़ावा देता है.

“Happy Karwa Chauth 2025 Wishes: करवा चौथ की टॉप 10 शुभकामनाएं, 7वीं वाली है सबसे बेस्ट”

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Happy Karwa Chauth 2025 Wishes: हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी पर करवा चौथ का पावन पर्व मनाया जाता है जोकि इस साल शुक्रवार 10 अक्टूबर को है. इस दिन विवाहित स्त्रियां पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं.

यह दिन विवाहित जोड़ों के लिए बहुत ही खास माना जाता है जोकि शादीशुदा दंपति के बीच प्रेम, भरोसा, और समर्पण भाव को दिखाता है.

अगर आप करवा चौथ की बधाई देने के लिए शुभकामनाएं संदेश सर्च कर रहे हैं तो यहां देखिए टॉप 10 करवा चौथ शुभकामनाएं संदेश, शायरी, इमेज, कोट्स

Happy Karwa Chauth 2025 Wishes Messages 

चांद की रोशनी जैसा तुम्हारा प्यार चमके,
वे व्रत तुम्हारे रिश्ते में खुशियां भर दे.
साथ और मिठास हर दिन बढ़ता रहे,
करवा चौथ का ये दिन हर बार की तरह ही दमके.
हैप्पी करवा चौथ 2025

भूख-प्यास से थकी नहीं वो,
उसके मन में बस एक आस है.
साजन की लंबी उम्र मिले,
यही उसका विश्वास है.
करवा चौथ 2025 की शुभकामनाएं

इस व्रत गहरा हो जाए प्यार तुम्हारा,
खुशियों से जगमगाए संसार तुम्हारा.
साथ और भरोसा यूं ही बढ़ता रहे,
चांद भी आज हो जाए दीवाना तुम्हारा.
करवा चौथ 2025 की शुभकामानएं

सजी है हाथों में लाल चूड़ियां,
माथे पर सुहागन के सजा है सिंदूर.
भरा रहे हमेशा आपका जीवन, रहे खुशियां भरपूर.
हैप्पी करवा चौथ 2025

सजनी ने थाली सजा ली है,
दीपों की लौ जला ली है.
पिया के नाम का व्रत रखा,
सिंदूर से मांग सजा ली है.
करवा चौथ की शुभकामनाएं

मांग में सिदूंर, हाथों में चूड़ियां,
सजधज कर बैठी हूं मैं,
चांद की एक झलक पाने को,
तेरी लंबी उम्र की दुआ मांगने को.
करवा चौथ 2025 की शुभकामना

करवा चौथ का ये पावन व्रत,
आपके जीवन में लाए सुख-समृद्धि अपार.
पति-पत्नी के रिश्ते में लाए और भी प्यार,
मुबारक हो आपको ये खास त्यौहार.
करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 2025

करवा चौथ का ये पावन व्रत,
आपके जीवन में लाए सुख-समृद्धि अपार.
पति-पत्नी के रिश्ते में लाए और भी प्यार,
मुबारक हो आपको ये खास त्यौहार.
करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 2025

नयनों में उम्मीद चमक रही,
मन में बस एक पुकार है.
चांदनी रात में झूम उठे वो,
जब दिखे पिया का दीदार है.
करवा चौथ की शुभकामनाएं

वो कहती है, ‘मेरे सजना की लम्बी उम्र हो’
माथे की बिंदी, मांग में सिंदूर हो.
करवा चौथ का ये पवित्र त्योहार,
हर सुहागन के दिल का गुरूर हो.
करवा चौथ की शुभकामनाएं

“मेड इन इंडिया Ulaa ब्राउजर में हैं गजब के फीचर्स, क्रोम यूज करने वाले भी हो जाएंगे दीवाने”

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पिछले कुछ दिनों से जोहो के प्रोडक्ट्स खूब पॉपुलर हुए हैं. पहले Arattai ऐप ने अपना जलवा बिखेरा और फिर Ulaa ब्राउजर भी ऐप्पल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर में टॉप पर पहुंच गया था. प्राइवेसी पर खास फोकस वाला यह ब्राउजर एंड्रॉयड, iOS, विंडोज, मैक और Linux जैसे सभी प्लेटफॉर्म के लिए अवेलेबल है.

इसमें कई ऐसे फीचर्स हैं, जिन्हें देखकर क्रोम ब्राउजर यूज करने वाले लोग भी इसके दीवाने हो जाएंगे. आइए इस मेड इन इंडिया ब्राउजर के गजब के फीचर्स के बारे में जानते हैं.

प्राइवेसी पर पूरा फोकस

Ulaa ब्राउजर में यूजर प्राइवेसी पर पूरा ध्यान दिया गया है. इसे बनाने वाले कंपनी जोहो का कहना है कि यह ब्राउजर न तो यूजर डेटा ट्रैक करता है और न ही बेचता है. इसमें यूजर की पर्सनल जानकारी गोपनीय रहती है और विज्ञापनदाता उसे ट्रैक नहीं कर पाते. गूगल क्रोम में ऐसा नहीं होता. गूगल का ब्राउजर ऐड दिखाने के लिए यूजर डेटा कलेक्ट करता है.

इन-बिल्ट ऐड ब्लॉकर

कई बार ब्राउजिंग के दौरान बार-बार आने वाले विज्ञापन परेशान कर लेते हैं, लेकिन अगर आप Ulaa ब्राउजर यूज करेंगे तो यह दिक्कत नहीं आएगी. इसमें इन-बिल्ट ऐड ब्लॉकर मिलता है. इस कारण ब्राउजिंग के दौरान आपको कोई विज्ञापन नहीं दिखेंगे और वेब पेज भी तेजी से लोड होंगे.

काम के हिसाब से अलग-अलग मोड

Ulaa ब्राउजर में वर्क, पर्सनल, किड्स और डेलवपर्स मोड समेत कई मोड मिलते हैं. हर मोड में अलग-अलग प्राइवेसी सेटिंग और कंटेट फिल्टर होता है. ऐसे में आपको अपने लिए या अपने बच्चों के लिए इसे यूज करते समय बार-बार सेटिंग नहीं बदलनी पड़ेगी.

सरकार से अवॉर्ड जीत चुका है यह ब्राउजर

Ulaa ब्राउजर ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय की तरफ से आयोजित इंडियन वेब ब्राउजर डेवलपमेंट चैलेंज को जीता था. इस चैलेंज में सरकार ने भारतीय कंपनियों से वर्ल्ड क्लास ब्राउजर तैयार करने को कहा था.

“देश में रहकर ही पूरा होगा विदेश से पढ़ाई करने का सपना, भारत आ रहीं ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटी”

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इस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भारत दौरे पर हैं. इस दौरे का भारत के स्टूडेंट्स को बड़ा फायदा होता दिख रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी दी है.

उन्होंने बताया कि यूनाइटेड किंगडम (UK) की नौ प्रमुख विश्वविद्यालय जल्द ही अपने कैंपस भारत में खोलने जा रहे हैं.

इस घोषणा का मौका ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के भारत दौरे के दौरान मिला. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल भारत और ब्रिटेन के संबंधों में नई ऊर्जा और सहयोग की दिशा को दर्शाती है, खासकर हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद. पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री स्टार्मर के साथ आए शिक्षा जगत के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावशाली था.

इस कदम से भारतीय छात्रों को विदेश में पढ़ाई के भारी खर्च के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे. साथ ही यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा. गुरुग्राम में पहला कैंपस पहले ही खुल चुका है. साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी का पहला कैंपस गुरुग्राम में संचालित है और यहां पहले बैच के छात्रों ने अपनी कक्षाएं शुरू कर दी हैं. यह इस नई पहल की सफल शुरुआत का संकेत है.

बैंगलोर में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, मुंबई में यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ अबरडीन और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के कैंपस खुल सकते हैं. जबकि अन्य यूनिवर्सिटी के कैंपस की जानकारी जल्द सामने आ सकती है. इस योजना के जरिए भारतीय छात्रों को न केवल शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि उनके कौशल और करियर संभावनाओं में भी वृद्धि होगी. साथ ही यह पहल ब्रिटेन और भारत के बीच शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग की शुरुआत भी मानी जा रही है.

“Vitamin D Deficiency In India: प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी से  भारतीयों को हो रहा तगड़ा नुकसान, बॉडी में घट रहा यह विटामिन”

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इंसान के जीवन में जो चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं, उनमें से एक है धूप. अगर आपको सही से धूप न मिले तो कई तरह की बीमारी हो सकती है. गर्मियों में चटक धूप और सर्दियों में हल्की धूप लोगों की दिनचर्या का हिस्सा रही है.

लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. शहरों में फैले प्रदूषण ने न सिर्फ हवा को खराब किया है बल्कि धूप की चमक भी फीकी कर दी है. इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है. खासकर उस विटामिन पर, जिसे हम “सनशाइन विटामिन” यानी विटामिन-डी के नाम से जानते हैं. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

प्रदूषण धूप को क्यों रोक रहा है?

हवा में मौजूद धूल, धुआं और जहरीले कण सूरज की किरणों को धरती तक सही से पहुंचने नहीं देते. स्किन पर पड़ने वाली UVB किरणें ही वो ताकत होती हैं, जिनसे शरीर विटामिन-डी बनाता है. लेकिन जब ये रोशनी प्रदूषण की परतों से टकराकर कमजोर पड़ जाती है, तो शरीर को उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोग धूप में खड़े होने के बावजूद विटामिन-डी की कमी से जूझ रहे हैं.

भारत में समस्या इतनी बड़ी क्यों है?

सवाल ये उठता है कि जहां सालभर धूप रहती है, वहां लोग इसकी कमी से कैसे जूझ रहे हैं? वजहें कई हैं. जैसे कि लोग सुबह-शाम के बजाय दिनभर ऑफिस या घर के अंदर रहते हैं. फैशन और सनस्क्रीन के चलते धूप से बचने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा अब प्रदूषण ने तो बची-खुची रोशनी भी कम कर दी है. रिसर्च बताती है कि प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वालों को धूप में ज्यादा समय बिताना पड़ता है, फिर भी उतना विटामिन-डी नहीं बन पाता, जितना साफ-सुथरे माहौल में थोड़ी देर धूप लेने से बन जाता है.

विटामिन-डी की कमी से क्या होता है?

विटामिन-डी हड्डियों के लिए बेहद जरूरी है. इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स (हड्डियां टेढ़ी होना) और बड़ों में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं. लगातार थकान रहना, मांसपेशियों में दर्द, डिप्रेशन और बार-बार बीमार पड़ना भी इसके लक्षण हो सकते हैं. हैरानी की बात है कि भारत जैसे देश में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग किसी न किसी स्तर पर इसकी कमी से जूझ रहे हैं.

क्या करना जरूरी है?

अगर आपको इससे बचना है, तो कोशिश करें कि सुबह की हल्की धूप में 20 से 30 मिनट जरूर बैठें. अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं तो पार्क या खुले स्थानों में धूप लेने की आदत डालें. अपनी डाइट में अंडे, मछली और दूध जैसी चीजें खाएं, जिनमें विटामिन-डी पाया जाता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है.

महागठबंधन पर पप्पू यादव का बड़ा बयान, ‘मुसलमान भी हो सकता है डिप्टी CM'”

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पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव का महागठबंधन को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गठबंधन में सबका सम्मान करते हैं. राहुल गांधी माले और सीपीआई का भी सम्मान करते हैं.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में डिप्टी सीएम दलित भी हो सकता है, मुसलमान भी हो सकता है.

पप्पू यादव से जब पूछा गया कि महागठबंधन को जीत मिलती है तो क्या डिप्टी सीएम मुकेश सहनी ही बनेंगे? इस पर उन्होंने कहा, ”मुकेश सहनी के डिप्टी सीएम बनने का यहां कोई मुद्दा ही नहीं है. सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है. दलित भी डिप्टी सीएम बनेंगे, ऊंची जाति में भी डिप्टी सीएम बनेंगे. माइनॉरिटी को भी ये मांगने का अधिकार है, सभी का ये अधिकार बनता है. उसमें क्या दिक्कत है?”

राहुल गांधी इस देश के आइकॉन- पप्पू यादव

पूर्णिया के सांसद ने आगे कहा, ”यहां सीएम और डिप्टी सीएम का मुद्दा कहां है? यहां मुद्दा है राहुल गांधी जी का विचार. अत्यंत पिछड़ी जातियों, एससी-एसटी के लिए हमें क्या करना है. राहुल गांधी जी इस देश के आइकॉन हो गए हैं. वो आम आदमी की आवाज हैं और हमलोग वर्कर्स. बिहार में जो ग्राउंड रियलिटी है, हम वही बात करते हैं. हमने तो सीपीआई और सीपीएम की भी बात की है कि उनको भी सम्मान मिलना चाहिए.”

नेतृत्व करने वालों को दिल बड़ा करना चाहिए- पप्पू यादव

पप्पू यादव ने ये भी कहा, ”नेतृत्व करने वालों को तो दिल बड़ा करना चाहिए और उनको सहने की भी क्षमता होनी चाहिए. अगर अपने गठबंधन को साथ लेकर राहुल गांधी चल रहे हैं तो वो सीपीआई, माले को सम्मान देते हैं, आरजेडी को भी सम्मान देते हैं. वैसे ही जो पार्टी ये कह रही है कि मैं ही नेतृत्व करूंगा तो उनको भी एडजस्टमेंट करना चाहिए.”

बिहार में कब है मतदान?

बता दें कि बिहार में विधानसभा के चुनाव दो फेज में 6 नवंबर और 11 नवंबर को होंगे, जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी. 10 अक्टूबर से पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.