कफ सिरप मामले में हिमाचल प्रदेश में ताबड़तोड़ छापे, पांच यूनिट्स पर एक्शन, राजस्थान-MP में फिर मौत
SCS “Shakhti” over northwest Arabian Sea
moved west-southwestwards with a speed of 15 kmph during last 6 hours and lay centered at
2330 hrs IST of 4th October over the same region near latitude 21.3°N
and longitude 62.7°E, about 320 km east-southeast of Ras Al Hadd (Oman).— India Meteorological Department (@Indiametdept) October 4, 2025rtfgvb
छत्तीसगढ़ में सड़क बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिली है. राज्य को पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग (लेफ्ट हैंड साइड) प्राप्त हुई है, जिसका निर्माण मात्र 12 महीनों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पूरा किया. यह उपलब्धि राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “पहाड़ों के पार अब उम्मीदों की राह बनी!” उन्होंने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और NHAI टीम को धन्यवाद दिया, इसे “समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़” के विजन का हिस्सा बताया.
इस पृष्ठभूमि में, छत्तीसगढ़ का सड़क नेटवर्क लंबे समय से विकास की बाधा बन रहा था. राज्य में घने जंगल, आदिवासी क्षेत्र और भौगोलिक चुनौतियां होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार मुश्किल था. 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से सरकारें सड़कों पर फोकस कर रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की पहल से तेजी आई है.
नितिन गडकरी के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता दी है. सितंबर 2024 में 11,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली, जिसमें चार प्रमुख राजमार्गों के DPR शामिल हैं. नवंबर 2024 में 20,000 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान हुआ, जिसमें धमतरी-जगदलपुर, रायपुर-बलौदाबाजार जैसे फोरलेन प्रोजेक्ट हैं.
जुलाई 2025 में सीएम साय और गडकरी की मुलाकात में आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया, जो लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म उन्मूलन के लक्ष्य से जुड़ा है.
यह सुरंग पहाड़ी इलाकों में यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाएगी, मौसमी बाधाओं को कम करेगी. राज्य में वर्तमान में 20 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, कुल 3,575 किमी लंबे, लेकिन नई परियोजनाओं से यह अमेरिकी स्तर का हो जाएगा, जैसा गडकरी ने वादा किया.
यह आर्थिक विकास, पर्यटन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा. सीएम साय ने अंजोर विजन 2047 के तहत एकीकृत परिवहन प्रणाली पर बल दिया. केंद्र-राज्य सहयोग से छत्तीसगढ़ अब विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जहां सड़कें न केवल कनेक्टिविटी का माध्यम हैं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक भी.
तमिलनाडु में एक्टर विजय के इलेक्शन कैंपेन से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है. वह बस, जो हाल ही में हिट एंड रन हादसे में शामिल थी, उसे अब जब्त किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, बस के अंदर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ हादसे की जगह का पूरा वीडियो रिकॉर्ड भी जब्त किया जाएगा.
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है. इसकी कमान उत्तरी जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) असरा गर्ग संभालेंगे. SIT में नामक्कल की पुलिस अधीक्षक (SP) आईपीएस विमला और CSCID की पुलिस अधीक्षक श्यामलादेवी को भी शामिल किया गया है.
अदालत ने टीवीके नेताओं को लगाई फटकार
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को करूर भगदड़ हादसे को लेकर तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) नेताओं को कठोर शब्दों में फटकार लगाई थी. अदालत ने कहा कि पार्टी प्रमुख और अभिनेता-राजनेता विजय घटना के समय मौके से चले गए और उनकी पार्टी ने अब तक इस हादसे पर खेद तक नहीं जताया. यह विजय की मानसिकता को दिखाता है.
पुलिस से भी पूछा सवाल
जस्टिस सेंथिलकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि भगदड़ में 41 लोगों की जान गई और पूरी घटना अव्यवस्थित प्रबंधन का नतीजा थी. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार विजय के मामले में नरमी बरत रही है, जबकि पूरे देश ने इस हादसे की तस्वीरें और वीडियो देखे हैं.
अदालत ने आयोजकों के साथ-साथ पुलिस से भी सवाल पूछा कि आखिर इतनी बड़ी घटना की जिम्मेदारी किसकी है? न्यायमूर्ति ने सख्त लहजे में कहा, ‘एक कार्यक्रम आयोजक होने के नाते क्या आप अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं?’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार दोपहर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया. इस अवसर पर पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की युवा-केंद्रित विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ भी किया.
प्रधानमंत्री ने देश भर के आईटीआई छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को सराहा और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने युवाओं को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया जो देश के विकास में उनकी भूमिका को मजबूत करेगा.
62,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ
उधर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी ने बिहार समेत कई राज्यों में युवाओं के लिए तैयार की गई 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की शुभारंभ/ शिलान्यास किया. इन योजनाओं में रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली पहल शामिल हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस अवसर पर बिहार में इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन का आश्वासन दिया.
भारत में कौशल को प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, ‘कुछ साल पहले हमारी सरकार ने आईटीआई के विद्यार्थियों के लिए व्यापक स्तर पर दीक्षांत समारोह की नई परंपरा शुरू की. इसी परंपरा की कड़ी के एक और साक्षी हम सभी बन रहे हैं. मैं इस कार्यक्रम में जुड़े सभी आईटीआई के सभी युवाओं को शुभकामनाएं देता हूं. साथियों आज का ये विशेष समारोह इस बात का प्रतीक है. आज का भारत कौशल को इतनी प्राथमिकता देता है. आज देश भर के नौजवानों के लिए शिक्षा और कौशल विकास की दो बड़ी योजनाएं जुड़ गई हैं.’
‘ITI के छात्रों में पैदा हो विश्वास’
उन्होंने आगे कहा कि जब तक हम श्रम को प्रतिष्ठित नहीं देंगे, हुनर के लिए जो लोग काम करते हैं अगर उनका सार्वजनिक सम्मान नहीं होगा. तो शायद वो अपने आप को कम महसूस करेगा, ये मानसिकता बदलने एक अभियान है. हम श्रमेव जयते भी कहते हैं और श्रमेव पूजते भी कहता हैं इसलिए उसी भाव को लेकर देश भर में आईटीआई के शिक्षार्थी हैं उनमें भी एक विश्वास पैदा हो कि कहीं नहीं जा पाए तो यहां आए हैं, बल्कि यहां भविष्य बहुत अच्छा है इसलिए आए हैं. और राष्ट्र निर्माण में कौशल का योगदान बहुत है.
पीएम ने कहा, ’21वीं सदी की मांग है कि हम देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, लोकल टैलेंट, लोकल रिसोर्सेस और लोकल नॉलेज को तेजी से आगे बढ़ाएं और इसमें हमारे हजारों ITIs की बहुत बड़ी भूमिका है.’
PM-SETU का शुभारंभ
पीएम ने ‘युवा संवाद’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 60,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केंद्र प्रायोजित योजना पीएम- सेतु योजना का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य बिहार के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री निश्चय और सहायता भत्ता योजना का भी शुभारंभ किया गया. ये योजनाएं बिहार के युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके कौशल विकास पर केंद्रित है. इस योजना में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल में उन्नत करने की परिकल्पना की गई है, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं.
PM ने कहा, ‘आज PM-SETU योजना की शुरुआत की गई है. देशभर में हमारे 1,000 से ज्यादा ITIs को इसका लाभ मिलेगा. PM-SETU के माध्यम से इन ITIs को अपग्रेड किया जाएगा. PM-SETU योजना दुनिया की SKILL DEMAND से भारत के युवाओं को जोड़ेगी.’
कर्पूरी ठाकुर स्किल यूनिवर्सिटी का उद्घाटन
पीएम मोदी ने जन नायक कर्पूरी ठाकुर स्किल्ड यूनिवर्सिटी परियोजना का भी उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना है. इसके अलावा उच्च शिक्षा के अवसरों को बेहतर बनाने के दृष्टिकोण के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री PM-USHA (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत बिहार के चार विश्वविद्यालयों- पटना विश्वविद्यालय, मधेपुरा में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, छपरा में जय प्रकाश विश्वविद्यालय और पटना में नालंदा ओपन विश्वविद्यालय में नई शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं की आधारशिला रखी.
PM ने कहा कि भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर ने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और शिक्षा के विस्तार में लगाया. उनके नाम पर बनने वाली स्किल यूनिवर्सिटी, उसी सपने को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनेगी. आज भारत, दुनिया के युवा देशों में से एक है और बिहार उन राज्यों में शामिल है, जहां आबादी के अनुपात में सबसे ज्यादा युवा हैं. इसलिए जब बिहार के युवाओं का सामर्थ्य बढ़ता है तो देश की ताकत भी बढ़ती है. बिहार के युवाओं के सामर्थ्य को और बढ़ाने के लिए NDA सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चल रहा है. हालांकि खबर आ रही है कि पाक सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगे मान ली हैं पर ऐसे आंदोलन कभी खत्म नहीं होते हैं.
यह धीरे धीरे ऐसा विकराल रूप ले रहा है जो लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर विवाद को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है. अवामी एक्शन कमिटी (AAC) के नेतृत्व में सितंबर 2025 से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन आर्थिक शोषण, बुनियादी अधिकारों की अनदेखी और पाकिस्तानी सेना की क्रूरता के खिलाफ है. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, दुकानें बंद हैं, चक्का-जाम हड़ताल हो रही है, और मुजफ्फराबाद, कोटली, बाघ जैसे जिलों में हिंसा भड़क चुकी है, जिसमें कम से कम 12 नागरिक मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए हैं.
पाकिस्तानी सेना ने पंजाब से यहां हजारों सैनिक तैनात किए हैं. इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं गई हैं, और गोलीबारी की, लेकिन प्रदर्शनकारी ‘लॉन्ग मार्च’ जारी रखे हुए हैं. यह आंदोलन पाकिस्तान की ‘आजाद कश्मीर’ की जबरन बनाई छवि को चूर-चूर कर रहा है, और भारत के लिए PoK को वापस लेने, आतंकवाद पर लगाम लगाने, और क्षेत्रीय वर्चस्व स्थापित करने की संभावनाएं खोल रहा है. हालांकि, ये अवसर जोखिम से भरे हो सकते हैं, जैसे पाकिस्तान का और आक्रामक होना या अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप आदि पर नामुमकिन भी नहीं है.
PoK में यह विद्रोह अचानक नहीं उभरा; यह दशकों की असंतोष की परिणति है. 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान ने PoK पर कब्जा किया, लेकिन स्थानीय लोगों को कभी वास्तविक स्वायत्तता नहीं दी. AAC ने 38 मांगें रखीं, जिनमें मुख्य हैं पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करना, जो स्थानीय प्रतिनिधित्व को कमजोर करता है; जलविद्युत परियोजनाओं (जैसे मंगला डैम और नीलम-झेलम) से उत्पन्न बिजली का लाभ PoK को मिलना, क्योंकि 60% बिजली पंजाब को चली जाती है; आटा और बिजली पर सब्सिडी; और सेना का हस्तक्षेप समाप्त करना.
प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं, कश्मीर हमारा है, हम इसका फैसला करेंगे. पाक सेना और रेंजर्स हर संभव प्रयास इस आंदोलन को दबाने के लिए कर रहे हैं. पीओके में कर्फ्यू लगा दिया गया है. इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया गया है. X पर तमाम ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं,जो वहां की खराब स्थिति को बयां कर रहे हैं. नागरिक सैनिकों पर हमला कर रहे हैं और कंटेनर हटा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि भारत के लिए यह एक सुनहरा मौका हो सकता है.पर क्या यह भारत के लिए इतना आसान है?
कश्मीर पर पाकिस्तान को बेनकाब करने का मौका यह आंदोलन भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता को चुनौती देने का अवसर देता है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में PoK के मुद्दे उठाए जा सकते हैं, जहां यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने पाकिस्तान की दमनकारी कार्रवाई की निंदा की और वैश्विक हस्तक्षेप की मांग की है.
भारत PoK में पाकिस्तानी अत्याचारों को हाइलाइट कर सकता है, जैसा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने UNGA में पाकिस्तान को ‘वैश्विक आतंकवाद का केंद्र’ बताया था.हालांकि पाकिस्तान भारत को दोष दे रहा है, लेकिन वीडियो और स्थानीय बयान इसकी पोल खोल रहे हैं. भारत कूटनीतिक रूप से PoK के लोगों के अधिकारों का समर्थन कर सकता है, जो पाकिस्तान की ‘आजाद कश्मीर’ की झूठे प्रचार को कमजोर करेगा. X पर तमाम ऐसे पोस्ट दिखते हैं कि PoK युवा पाकिस्तानी सेना के प्रॉक्सी युद्ध के खिलाफ हैं, जो भारत के आतंकवाद विरोधी नैरेटिव को मजबूत करता है .
यदि भारत UN, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ PoK को मानवाधिकार मुद्दा बनाता है, तो पाकिस्तान पर GSP (यूरोपीय संघ का एक व्यापारिक कार्यक्रम है, जो विकासशील देशों को कम या शून्य शुल्क पर EU बाजारों में निर्यात की सुविधा देता है. यह मानवाधिकार, श्रम, पर्यावरण और सुशासन के मानकों के पालन पर आधारित है. पाकिस्तान को इसका लाभ मिलता है) जैसे कई अन्य संगठनों के व्यापार लाभों पर दबाव बढ़ सकता है. इससे भारत की वैश्विक छवि मजबूत होगी और कश्मीर पर पाकिस्तानी दावों को कमजोर करेगा. इसके अलावा, आंदोलन PoK में आतंकवादी भर्ती को प्रभावित कर सकता है.
सैन्य और सुरक्षा संबंधी संभावनाएं
सैन्य दृष्टि से, PoK में अस्थिरता पाकिस्तानी सेना को कमजोर कर रही है, जो भारत के लिए LoC पर दबाव कम करने का मौका है. पाकिस्तान ने पंजाब से सैनिक भेजे, लेकिन यदि विद्रोह फैलता है, तो सेना का ध्यान आंतरिक दमन पर केंद्रित हो जाएगा.
भारत सर्जिकल स्ट्राइक या ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदमों से आतंकी ठिकानों को निशाना बना सकता है, जैसा कि 2025 में पहलगाम हमले के बाद हुआ. PoK में संसाधनों (जल, खनिज) का शोषण बंद होने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, जो भारत को सिन्धु जल संधि पर मजबूत स्थिति देगा.
हालांकि, यदि पाकिस्तान दमन बढ़ाता है, तो शरणार्थी भारत की ओर आ सकते हैं, जो मानवीय संकट पैदा करेगा लेकिन भारत के लिए बांग्लादेश जैसी कार्रवाई करने का मौका भी दे सकता है. भारत को अपनी सेना को सतर्क रखना चाहिए, क्योंकि LoC पर गोलीबारी बढ़ सकती है.
आर्थिक और सामरिक लाभ
PoK भारत के लिए जल संसाधनों का खजाना है. मंगला डैम जैसी परियोजनाएं पाकिस्तान को लाभ पहुंचाती हैं, लेकिन आंदोलन से ये प्रभावित हो सकती हैं. CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) पर असर पड़ेगा, जो भारत के लिए सामरिक लाभ है, क्योंकि यह ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से चीन को गल्फ तक पहुंच देता है. यदि PoK में विद्रोह बालोचिस्तान से जुड़ता है, तो पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा कमजोर होगी.
भारत को मानवीय सहायता प्रदान कर PoK लोगों को आकर्षित करना चाहिए, लेकिन सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए जब तक आवश्यक न हो.
भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने यूरोपीय कंपनियों का रुझान तेजी से अपनी ओर खींचा है. अब यूरोप भारत को न सिर्फ निवेश, बल्कि रोजगार और विनिर्माण साझेदारी का अहम केंद्र मान रहा है.
इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों के बीच FTA वार्ता का 14वां दौर 6 अक्टूबर को ब्रसेल्स में शुरू होगा.
दिल्ली में आयोजित फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेस इन इंडिया (FEBI) की दूसरी वार्षिक आम बैठक में यूरोपीय संघ (EU) के भारत में राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि भारत पहले से ही बड़ी संख्या में यूरोपीय कंपनियों की मौजूदगी का गवाह है और अगर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होता है तो संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी.
FEBI के नए सर्वे के मुताबिक, भारत में 6,000 से अधिक यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जिन्होंने अब तक 30 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं. ये कंपनियां न केवल निवेश करती हैं, बल्कि भारत से निर्माण, इनोवेशन और निर्यात भी करती हैं, जो सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टि से जुड़ा है.
ईयू भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार
यूरोपीय संघ वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. दोनों के बीच वस्तु व्यापार 120 अरब यूरो तक पहुंच गया है, जो अमेरिका और चीन से भी आगे है. सेवाओं को जोड़ने पर यह आंकड़ा 180 अरब यूरो तक जाता है.
भारत को ईयू राजदूत ने बताया चुनौतीपूर्ण बाजार
डेल्फिन ने कहा, “भारत को ईयू व्यवसाय एक आकर्षक लेकिन चुनौतीपूर्ण बाजार मानते हैं. यहां बड़े अवसर हैं और कंपनियां इसका लाभ उठाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में सीधा योगदान देती हैं. वे नौकरियां बनाती हैं, निवेश करती हैं, विनिर्माण और इनोवेश करती हैं. संक्षेप में कहें तो वे ‘मेक इन इंडिया’ करती हैं.”
EU पक्ष का मानना है कि समझौते के बाद निवेश प्रवाह और सप्लाई चेन सहयोग में बड़ी वृद्धि होगी. ईयू के राजदूत ने कहा, “अगर FTA हो गया तो 80% यूरोपीय कंपनियां भारत में निवेश और रोजगार बढ़ाने की योजना बना रही हैं.”