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TMC Political Crisis : भाजपा के ‘ग्रीन सिग्नल’ के इंतजार में 20 से ज्यादा सांसद!

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टीएमसी के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक विस्फोट होने की आहट सुनाई दे रहा है. बंगाल की सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी की ‘महा-मुश्किल’ का दौर शुरू हो चुका है.

टीएमसी को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है. विधानसभा चुनाव में भाजपा से परास्त हुईं ममता के अच्छे दिन कभी लौट भी पाएंगे, इसमें संदेह का बीजारोपण हो गया है. सत्ता की हनक गई, समर्थक साथ छोड़ रहे, पार्षद भाग रहे और अब सांसदों-विधायकों के भागने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. कौन है टीएमसी सांसद काकोली घोष, जिसने ममता की नींद उड़ा रखी है.

बंगाल में बदलाव हो गया. अब बदलाव के दायरे का विस्तार हो रहा है. बंगाल में 206 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बना ली. ममता बनर्जी की टीएमसी 80 पर ही अटक गई. ममता अब भी मानने को तैयार नहीं कि उनकी हार स्वाभाविक है. यह 15 साल से जनता के भीतर पनप रहे असंतोष और आक्रोश की स्वाभाविक परिणति है. पर, ममता टीएमसी की हार को भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश मानती हैं. वे अपनी हार पर रोज ही विलाप के अंदाज में दोनों को खरी-खोटी सुनाती हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि टीएमसी के उनके साथी भी भरोसेमंद नहीं रहे. नगर निकायों के पार्षद थोक में इस्तीफा दे रहे हैं. टीएमसी के ज्यादातर सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. पार्टी की बैठकों-कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी इसका संकेत है. ममता को भी अब लगने लगा है कि उनके लोग जान-बूझ कर दूरी बना रहे हैं. तभी तो उन्हें कहना पड़ रहा है कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं. बचे-खुचे लोगों से वे टीएमसी को पुनर्जीवित कर लेंगी.

पार्षदों के थोक में इस्तीफे

विधानसभा चुनावों में हार के बाद नगरपालिकाओं में टीएमसी पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है. आधा दर्जन से अधिक नगरपालिकाओं में थोक के भाव टीएमसी पार्षदों के इस्तीफे हुए हैं. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. फालता सीट पर आए नतीजे के बाद डायमंड हार्बर में भी पार्षदों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. पार्षदों के इस्तीफे की शुरुआत उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा से हुई थी. कुल 35 में 30 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफे सौंप दिए. इसी तरह हालीशहर के 23 पार्षदों में 16 ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. उत्तर बैरकपुर, गारुलिया और डायमंड हार्बर में इस्तीफों का सिलसिला जारी है. कई और नगरपालिकाओं और निगमों में भी टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफे दिए हैं. कोलकाता नगर निगम में भी टीएमसी के पार्षद पाला बदलने को बेताब दिखते हैं.

बैठकों व कार्यक्रमों से दूरी

ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से अब तक जितनी बैठकें की हैं, उनमें पार्टी के सभी विधायक नहीं शामिल हुए. शामिल न होने की कोई वजह बताना भी विधायकों ने मुनासिब नहीं समझा. चूंकि बैठकें टीएमसी चीफ ममता ने बुलाई थीं, इसलिए सबकी उपस्थिति जरूरी थी. खासकर तब, जब पार्टी के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है. टीएमसी के सांसद भी ममता से दूरी बनाने लगे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता की बुलाई पहली ही बैठक से 10-12 नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे. विरोध प्रदर्शनों में सभी विधायकों की भागीदारी ममता बनर्जी सुनिश्चित नहीं कर पाईं.

अभिषेक के नेतृत्व पर प्रश्न

इतना ही नहीं, अब तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सांसद-विधायक खुल कर सवाल उठाने लगे हैं. टीएमसी के सामने 2021 के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है. कालीघाट में हुई समीक्षा बैठकों में कुणाल घोष, रितुव्रत बनर्जी जैसे वरिष्ठ विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए. विधायकों का मानना है कि बंद कमरों में रणनीति बनाने से पार्टी फिर से मजबूत नहीं होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा. बागी नेताओं का आरोप है कि बंद कमरे में आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले जबरदस्ती नेताओं पर थोपे गए, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और पार्षदों ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है

MP काकोली के तल्ख तेवर

टीएमसी के संकट को इससे भी समझा जा सकता है. ममता ने 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीन कर कल्याण बनर्जी को दे दिया. इससे काकोली की नाराज हुईं. ममता का यह फैसला उन्हें पार्टी के भीतर अपना अपमान लगा. भाजपा ने उनकी नाराजगी को भुना लिया. केंद्र सरकार ने काकोली को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह सुरक्षा दी गई है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब टीएमसी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया है. काकोली की नाराजगी सामान्य बात इसलिए नहीं है कि यह सांसदों में भगदड़ का संकेत हो सकता है. उनकी तरह और भी कई सांसद हैं, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं.

सांसदविधायक साथ छोड़ेंगे?

टीएमसी के एक सांसद की बातों पर भरोसा करें तो आने वाले कुछ दिनों में ममता बनर्जी को जोर का झटका लगने वाला है. लोकसभा में टीएमसी के अभी 29 सांसद हैं. लोकसभा में सर्वाधक सांसदों वाली विपक्ष की यह दूसरी पार्टी है. पर, अब यह स्थिति बदलने वाली है. भाजपा से ग्रीन सिग्नल मिला तो झटके में 20-25 लोग पाला बदल सकते हैं. कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य एक-दो सांसदों को छोड़ कर बाकी को साथ लेने के लिए भाजपा तैयार है. चर्चा है कि अगले ही महीने भाजपा इसे मूर्त रूप दे सकती है. लोकसभा में अभी भाजपा के 240 सांसद हैं. बहुमत का आंकड़ा 272 का है. अगर टीएमसी के सांसद टूट कर भाजपा के साथ जाते हैं तो भाजपा सांसदों की लोकसभा में संख्या बहमत के आंकड़े के करीब हो सकती है. अभी केंद्र में भाजपा के ही नेतृत्व में सरकार है, लेकिन अकेले बहुमत न रहने के कारण उसे एनडीए के साथी दलों के सहारे सरकार बनानी पड़ी है.

Mayawati : उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और इसकी प्रमुख मायावती चर्चा का विषय…

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और इसकी प्रमुख मायावती चर्चा का विषय बनी हुई हैं. चर्चा है कि मायावती आगामी यूपी चुनाव 2027 में कुछ बड़ा करने जा रही हैं. इसी बीच यह भी चर्चा है कि क्या बीएसपी 2027 के यूपी चुनाव में गठबंधन करके उतरेंगी. हालांकि वह गठबंधन किसके साथ और कब होगा यह केवल अनुमानों में है. करीब 12 साल से राजनीतिक रूप से शांत हो चुकीं मायावती और बीएसपी को लेकर इस तरह की चर्चाएं क्यों शुरू हुई, आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं.

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख ने मायावती ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी सुप्रीमो ने 24 मई को अपनी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ गहन समीक्षा बैठक की, जिसके बाद से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में चर्चाओं का बाजार गरम हो चला है. इस बैठक के बाद मायावती ने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कीं, बल्कि उन्होंने सोशल मीडिया पेज एक्स से दो पेज की प्रेस विज्ञप्ति जारी करके छोड़ दीं. मायावती के प्रेस के सामने नहीं आने के बाद लोगों के मन में कई और सवाल उठने लगे हैं.

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से बिलकुल खामोश हो गई हैं. 2007 से 2012 तक पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के बाद ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में बीएसपी का जनाधार लगातार गिर रहा है. पार्टी के लगातार खराब प्रदर्शन के बाद भी मायावती किसी भी चुनाव में खास सक्रिय नहीं दिखती हैं. अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मायावती के ऐक्टिव होने से अनुमानों का बाजार गरमाने लगा है. मायावती की ओर से जारी दो पन्ने के प्रेस नोट में दो तीन बातें गौर करने लायक है, जिसको लेकर चर्चाएं शुरू होना लाजिमी है.

  1. बीएसपी की गहन समीक्षा बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में कहीं भी खुलकर नहीं कहा गया है कि पार्टी आगामी यूपी चुनाव में अकेले दम पर लड़ेगी. आमतौर पर देखा गया है कि बीएसपी प्रमुख मायावती हमेशा इस बात को लेकर क्लियर रहती हैं कि उन्हें गठबंधन में चुनाव लड़ना है या अकेले. 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों को याद करें तो मायावती ने करीब एक साल पहले ही स्पष्ट रूप से बता दिया था कि उनकी पार्टी अकेले ही राज्य के सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. इस बार ऐसी स्पष्टता नहीं दिखने के चलते चर्चा शुरू हो चुकी है कि क्या बीएसपी किसी पार्टी के साथ गठबंधन में रहकर आगामी यूपी चुनाव लड़ेगी.
  2. यह चर्चा इसलिए और भी ज्यादा जोर पकड़ रही है क्योंकि पिछले दिनों जब राहुल गांधी जब अमेठी और रायबरेली में जनसभाएं कर रहे थे उसी दौरान कांग्रेस के दो दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम और तनुज पूनिया अचानक लखनऊ के मॉल रोड स्थित मायावती से मिलने उनके घर पहुंचे थे. हालांकि मायावती ने दोनों कांग्रेसी नेताओं को मिलने का वक्त नहीं दिया, जिसके बाद इन्होंने कहा कि वह पार्टी की तरफ से नहीं बल्कि व्यक्तिगत तौर पर बहनजी का हालचाल जानने पहुंचे थे. दूसरी तरफ फजीहत के बाद कांग्रेस ने इन दोनों नेताओं से लिखित में ऐसा करने की वजह पूछ ली है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि आमतौर पर ऐसी घटनाओं पर मायावती स्पष्टता के साथ मीडिया के सामने आकर कहती रहीं कि फलां पार्टी उनसे रिश्ते जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगी. इस बार मायावती के घर पहुंचे दोनों कांग्रेसी नेताओं की घटना पर बीएसपी या मायावती की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है.
  3. गहन समीक्षा बैठक के प्रेस नोट में एक बात और करने वाली है कि इसमें किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया गया है. इसमें मायावती की तरफ से या तो सत्तापक्ष या विपक्ष शब्द कहकर संबोधित किया गया है. ऐसे में ये कयास लगाया जाना जरूरी हो जाता है कि जो मायावती मीडिया के सामने साफगोई से किसी भी राजनीति दल का नाम लेकर हमला करती रही हैं, उन्होंने इस बार ऐसा क्यों किया है.

मायावती के लिए 2027 में गठबंधन करना क्यों है जरूरी?

मौजूदा समय में मायावती की पार्टी के केवल एक विधायक हैं. बीएसपी लोकसभा, राज्यसभा, यूपी विधान परिषद में शून्य पर है. 2014 के लोकसभा में बीएसपी का खाता नहीं खुला. 2019 में बीएसपी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया जिसके चलते उनके 10 सांसद जीते. 2024 में फिर अकेले लड़ी तो एक बार फिर से पार्टी का रिजल्ट शून्य ही रहा. इसी यूपी में विधानसभा चुनावों की बात करें तो 2012 में जब मायावती सत्ता से बाहर गईं तो उनके 80 विधायक जीते थे. 2017 के चुनाव में जब बीजेपी 325 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता पर काबिज हुई तब बीएसपी के केवल 19 विधायक जीते. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी यूपी में केवल एक विधायकों तक सिमट गई.

वोट हासिल करने के मामले में भी बीएसपी का प्रदर्शन लगातार गिरता रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को उत्तर प्रदेश में लगभग 19.6% और देश स्तर पर लगभग 4.2% वोट मिले. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को यूपी में लगभग 19.3% वोट मिले. वहीं राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 3.6% वोट मिले. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का वोट प्रतिशत काफी घटा और यूपी में लगभग 9.3% और पूरे देश में लगभग 2.07% रहा. जहां तक यूपी विधानसभा चुनावों की बात है तो 2017 में 22.23% और 2022 में केवल 12.88% पर सिमट गया. यानी मायावती की पार्टी लगातार रसातल में जाती रही.

बीएसपी के राष्ट्रीय पार्टी के तमगे पर खतरा

फिलहाल बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) देश की राष्ट्रीय पार्टी है. लेकिन चुनाव दर चुनाव उसके घटते जनाधार के चलते वह राष्ट्रीय पार्टी बनने रहने के किसी भी नियम को फॉलो नहीं कर पा रही है.

  • राष्ट्रीय पार्टी के लिए कम से कम 4 राज्यों में एक ‘राज्य स्तरीय दल’ (State Party) के रूप में मान्यता.
  • अगर किसी पार्टी ने लोकसभा के आम चुनाव में कुल सीटों की कम से कम 2% सीटें (वर्तमान में 543 में से 11 सीटें) जीती हों. ये 11 सीटें किसी एक राज्य से नहीं, बल्कि कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से जीतकर आनी चाहिए.
  • अगर किसी पार्टी को लोकसभा चुनाव या राज्यों के विधानसभा चुनाव में 4 या उससे अधिक राज्यों में कुल वैध मतों का न्यूनतम 6% वोट मिला हो.
  • इसके साथ-साथ पार्टी को किसी भी राज्य या राज्यों से लोकसभा की कम से कम 4 सीटों पर जीत दर्ज करनी जरूरी है.

बहुजन समाज पार्टी राष्ट्रीय पार्टी का तमगा बरकार रखने के किसी भी नियम शर्त का पालन नहीं कर पा रही है. ऐसे में 2017 का यूपी विधानसभा चुनाव मायावती के लिए करो या मरो वाली स्थिति हो गई है. ऐसे में राजनीति के जानकार मानते हैं कि मायावती अपनी पार्टी का प्रदर्शन सुधारने के लिए पूरी संभावना है कि वह किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती हैं. प्रेस नोट में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा का ना होना इस अनुमान को और भी ज्यादा बल देता है. हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा कब और कहां होगी ये तो वक्त ही बताएगा.

बीएसपी पर बी टीम होने के लगते रहे आरोप

पिछले चार चुनावों में बीएसपी और मायावती का जिस तरह का रवैया रहा उसे देखकर उनपर कभी बीजेपी की बी टीम तो कभी इंडिया गठबंधन की बी टीम होने के आरोप लगते रहे. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह से मायावती ने अपने घोषित उम्मीदवार ऐन मौके पर बदले और उसके बाद वहां के जातीय समीकरण के हिसाब से प्रत्याशी दिए उससे यही आरोप लगे कि वह पूरे चुनाव में समाजवादी पार्टी को नुकसान और बीजेपी को फायदा पहुंचाने का काम कर रही हैं. ठीक उसी तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में मायावती ने कई सीटों के जातीय समीकरण को देखते हुए इस तरह से उम्मीदवार उतारे जिससे कुछ जगहों पर बीजेपी को तो ज्यादातर जगहों पर इंडिया गठबंधन को फायदा होता हुआ दिखा. इसी तरह जब उनके भतीजे और बीएसपी में उत्तराधिकारी माने जा रहे आकाश आनंद ने अग्रेसिव तरीके से चुनावी रैलियों में बोलना शुरू किया तो मायावती ने खुद उन्हें पद से हटाकर शांत कर दिया. यानी मायावती को जिस जुझारूपन और जनता के मुद्दों पर लड़ाके के तरह राजनीति के लिए जाना जाता रहा, वह बिल्कुल सरेंडर मूड में दिखीं. ऐसे में इस बार यूपी चुनाव से पहले मायावती ने जिस तरह की सक्रियता दिखाने की कोशिश की हैं, उसको लेकर अनुमानों का दौर शुरू होना लाजिमी है.

साल 2015 पड़ा था सबसे घातक नौतपा, सड़कें सूनी, अस्पताल भरे, इस बार क्या होगा….

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आमतौर पर मई के आखिर में जब सूर्य कर्क रेखा में आता है तो भारत में नौ दिनों के लिए जबरदस्त गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ जाता है. इसका समय हर साल 25 मई से 2 जून के बीच होता है. वर्ष 2015 के नौतपा को उसकी घातक प्रवृत्ति के लिए जाना जाता है. जिसमें काफी लोग मारे गए थे.

कहा जाता है कि उस साल देश में सबसे घातक नौतपा पड़ा था. हाहाकार मच गया था. दोपहर में सड़कें सूनी. अस्पताल भर गए. पानी और बिजली की किल्लत. आमतौर पर माना जाता है कि जिस साल नौतपा जितना जबरदस्त होता है, मानसून उतना बेहतर आता है, वैसा भी नहीं हुआ. इस साल का नौतपा भी भीषण लू के साथ शुरू हुआ है.

वास्तव में नौतपा के दौरान सबसे ज्यादा तपिश कर्क रेखा और उसके आस-पास के क्षेत्रों यानी मुख्य रूप से भारत और उपमहाद्वीप के इलाकों में होती है.

मई 2015 के आखिरी हफ्ते में नौतपा के दौरान पूरे उत्तर और मध्य भारत सहित दक्षिण भारत के कुछ हिस्से विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भयंकर लू की चपेट में थे. देश के कई हिस्सों में पारा 47°C से 48°C को पार कर गया. ये भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक ग्रीष्म कहर बन गया. भीषण लू चल रही थी. जिससे देश भर में लगभग 2,500 से अधिक लोगों की जान चली गई. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की बाढ़ आ गई.

आमतौर पर नौतपा 25 मई से शुरू होता है. सूर्य की किरणें सीधे तीव्रता से पृथ्वी की ओर आती हैं. वर्ष 2015 में इसी दौरान दक्षिण और मध्य भारत में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

– हैदराबाद में तापमान 47°C से ऊपर गया
– तेलंगाना के खम्मम में 48°C दर्ज किया गया
– इलाहाबाद में 47.7°C तक तापमान पहुंचा
– दिल्ली में 46°C के आसपास गर्मी रही।

नासा ने बाद में अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मई 2015 में भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5.5°C तक अधिक था, जो असामान्य स्थिति थी.

जीवन मुश्किल हो गया

उस समय के अखबारों और टीवी रिपोर्टों में जो तस्वीरें आईं, वे बेहद चिंताजनक थीं. दोपहर में सड़कें खाली हो जाती थीं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में दोपहर के समय बाजार करीब बंद जैसे दिखते थे. लोग सुबह जल्दी और शाम को ही बाहर निकलते थे. हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बेहोशी के मामलों की बाढ़ आ गई थी. सरकारी अस्पतालों में अतिरिक्त बेड लगाने पड़े.

नासा और अन्य रिपोर्टों के अनुसार सबसे अधिक मौतें निर्माण मजदूरों, रिक्शा चालकों, खेतिहर मजदूरों, बुजुर्गों और बेघरों की हुईं. दिनभर खुले आसमान के नीचे काम करना जानलेवा हो गया.

बिजली और पानी पर दबाव

कई शहरों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. कूलर, पंखे और एयर-कंडीशनर लगातार चल रहे थे. कुछ इलाकों में पानी की कमी की खबरें भी आईं.

मौतों का आंकड़ा

भारत में 2,500 से अधिक लोगों की मौत हुई. सबसे ज्यादा मौतें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हुईं. अकेले आंध्र प्रदेश में 1,700 से अधिक और तेलंगाना में लगभग 600 मौतें दर्ज की गईं. उस समय अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे दुनिया की सबसे घातक हीटवेव घटनाओं में एक बताया. अखबारों ने लिखा,

– दोपहर में शहर भूतिया लग रहे हैं
– सड़कों पर लोग गिरकर बेहोश हो रहे हैं
– श्मशानों और कब्रिस्तानों में भीड़ बढ़ गई है
– अस्पतालों में ORS और ड्रिप की मांग बढ़ी

24-25 मई 2015 की रिपोर्टों में बताया गया कि कई जिलों में लोग 47°C तापमान में अचानक गिरकर मर रहे हैं. प्रशासन लोगों को दोपहर में घरों से न निकलने की सलाह दे रहा था.

क्या उस साल मानसून अच्छा रहा

ये माना जाता रहा है कि जिस तरह नौतपा जितना जबरस्त होता है. उस साल मानसून अच्छा होता है लेकिन भयंकर गर्मी के बावजूद 2015 का मानसून अच्छा नहीं माना जाता.

भारत में 2015 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से लगभग 14% कम रहा. ये लगातार दूसरा कमजोर मानसून वर्ष था. 2014 भी कमजोर रहा. जून में अंत तक मानसून आने से दक्षिण भारत को गर्मी से राहत मिली. हालांकि पूरे सीजन में बारिश की कमी बनी रही. कई राज्यों में सूखे जैसी स्थितियां बनीं.

क्या 2015 का नौतपा सबसे गर्म था?

रिकॉर्ड के हिसाब से “सबसे गर्म” कहना तो कठिन है लेकिन सबसे घातक नौतपा का साल तो ये जरूर था. मौतों की संख्या, गर्मी की अवधि, प्रभावित आबादी और सामाजिक असर को देखें तो 2015 का नौतपा भारत के इतिहास के सबसे कठिन और त्रासद नौतपों में एक था.

इस बार क्या होगा

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा अनुमानों और अलर्ट के मुताबिक, इस साल का नौतपा दो बिल्कुल अलग-अलग मौसम प्रणालियों का मिलाजुला रूप रह सकता है.

नौतपा की शुरुआत भीषण और रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव के साथ हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में धूल भरी आंधी और बारिश से आंशिक राहत मिलने की भी उम्मीद है. मैदानी इलाकों में तापमान 44°C से 47°C के बीच बना हुआ है. यूपी और राजस्थान के हॉटस्पॉट इलाकों में तापमान 48°सेंटीग्रेड के स्तर को भी छू चुका है.

मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली बेहद शुष्क पश्चिमी हवाएं मैदानी राज्यों में सीधी धूप के साथ मिलकर हवा को भट्टी की तरह तपा रही हैं. हालांकि उत्तर भारत में एक स्थानीय चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र सक्रिय हो रहा है, जिसके कारण देश के करीब 20 राज्यों में मौसम बदलेगा.

दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में 26 और 27 मई को आसमान में बादल छाने और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है.

मौसम विभाग ने 29 मई को उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है, जो तपते हुए नौतपा के बीच कुछ समय के लिए राहत देगी. हालांकि उमस बढ़ सकती है.

Iran-US War 2.0:  शुरू हो गया महायुद्ध 2.0! ईरान ने दिया अमेरिकी हमले का जवाब, मार गिराया MQ-9, F-35 को खदेड़ने का दावा…

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IRGC Shot Down MQ-9 Forces to leave F-35: ईरान-अमेरिका के युद्ध का दूसरा चरण लगभग शुरू हो गया है. भले ही सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान हो चुका है लेकिन अमेरिका की दक्षिण ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद अब आईआरजीसी ने बड़ा दावा किया है. ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक उसने अमेरिकी ड्रोन मार गिराया है और F-35 को अपने एयरस्पेस से खदेड़ दिया है.

खाड़ी में चल रहे बवाल के खत्म होने के आसार नजर आ ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की ओर से हुए हमले ने एक बार फिर से खाड़ी में गोले-बारूद की आवाज गुंजा दी है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है. IRGC ने ये भी दावा किया हैहा कि उसने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. अल जजीरा के मुताबिक खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा. बकरीद के मौके पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि समय को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे हालात स्वीकार नहीं करेंगे. ईरानी सरकारी टीवी और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का प्रभाव पश्चिम एशिया में लगातार कमजोर हो रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उसकी स्थिति पहले से कम होती जा रही है.

हमलों के साथ वार्ता भी है जारी

इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ती दिख रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौता ज्ञापन पर कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि अंतिम समझौता अभी दूर है. बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध रोकना और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.

दरअसल परमाणु मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी मतभेद जारी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक अगर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि खामेनेई पहले ही इस समझौते की व्यापक रूपरेखा को समर्थन दे चुके हैं.

भारत के हाथ लग गई होर्मुज की चाबी, 1 जून से मिल सकता है नया रास्‍ता, खाड़ी देशों से अफ्रीका और यूरोप तक बेधड़क एंट्री!

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भारत और ओमान के बीच 1 जून से मुक्‍त व्‍यापार समझौता लागू होने जा रहा है. इस समझौता सिर्फ सामान की अदला-बदली का नहीं होगा, बल्कि यह भारत के लिए नया कॉरिडोर खोल सकता है. होर्मुज के मौजूदा संकट से निपटने के लिए यह काफी मददगार साबित हो सकता है.

भारत पिछले कुछ दशक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे युद्ध ने तेल और गैस सहित तमाम सेक्‍टर पर जबरदस्‍त असर डाला है. चौतरफा मुश्किलों से घिरे भारत के लिए अगले महीने की शुरुआत से एक राहत भरी खबर आ रही है. भारत और खाड़ी देश ओमान के बीच मुक्‍त व्‍यापार समझौता 1 जून, 2026 से लागू हो जाएगा. इस समझौते की सबसे खास बात ये है कि ओमान होर्मुज के दायरे से बाहर है तो इस समझौते से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को क्‍या फायदा मिलने वाला है.

भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर, 2025 को कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) हुआ था, जो 1 जून से प्रभावी हो जाएगा. भारत ने पिछले कुछ समय से ओमान के अलावा कई देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता किया है. जाहिर है कि इस समझौते से दोनों ही देशों को एक-दूसरे के बाजार में बिना टैरिफ चुकाए अपने सामान बेचने का मौका मिलेगा, लेकिन ओमान इस मामले में कुछ खास है. इसकी सबसे बड़ी वजह उसका होर्मुज के दायरे से बाहर होना. इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच बिना होर्मुज की बाधा के ही कारोबार किया जा सकता है.

एफटीए से क्या होगा फायदा
इस मुक्‍त व्‍यापार समझौते में ओमान ने भारत के 98.08 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दिया है. इससे भारत का ओमान को किया जाने वाला 99.38 फीसदी एक्‍सपोर्ट पूरी तरह टैरिफ फ्री हो जाएगा. इसका मतलब है कि भारत का लगभग पूरा ही निर्यात टैरिफ फ्री हो जाएगा. भारत ने भी ओमान से आने वाले 77.79 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दी है, जो कुल आयात का 94.81 फीसदी होता है. भारत ने कुछ संवेदनशील सेक्‍टर जैसे डेयरी प्रोडक्‍ट, चॉकलेट और ज्‍वैलरी सेक्‍टर को इस एफटीए से बाहर रखा है.

भारत के किस सेक्‍टर को होगा फायदा

  • टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर, फुटवेयर
  • जेम्स एंड ज्वेलरी
  • इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल्स, प्लास्टिक, फर्नीचर
  • फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज
  • एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (चावल, अनाज आदि)
  • भारतीय प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी आसान होगी और IT, हेल्थकेयर, एजुकेशन, लॉजिस्टिक्स आदि में बेहतर एक्सेस मिलेगा.
  • ओमान में 100% FDI की सुविधा कई सेक्टरों में मिलेगी.
  • दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार अभी करीब 10.6 अरब डॉलर है, जबकि इस समझौते से यह बढ़कर 12.5 अरब डॉलर पहुंच सकता है.

होर्मुज संकट में कैसे मददगार
होर्मुज से आवाजाही पर असर की वजह से भारत का आयात काफी प्रभावित हो रहा है. अभी शिपिंग रूट बदलने पड़ रहे, जिससे इंश्‍योरेंस की कॉस्‍ट बढ़ रही है और आयात महंगा हो रहा है. ओमान के साथ समझौता होने से वहां के पोर्ट खासकर सलालाह और दुक्‍म को भारत अपने हब के रूप में इस्‍तेमाल कर सकता है. यह दोनों पोर्ट होर्मुज स्‍ट्रेट से बाहर हैं और हिंद महासागर के रास्‍ते सीधे जुड़े हुए हैं. भारत इन पोर्ट के जरिये खाड़ी देश, अफ्रीका और यूरोप को अपना सामान भेज भी सकता है और वहां से मंगवा भी सकता है.

कम हो जाएगी होर्मुज पर निर्भरता
ट्रेड मार्केट एक्‍सपर्ट तो इस समझौते को ओमान ट्रेड कॉरिडोर भी कहने लगे हैं. उनका कहना है कि पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तमाम सामान को ओमान के रास्‍ते डायवर्ट करके निर्यात अथवा आयात किया जा सकता है. इससे होर्मुज पर निर्भरता कम हो जाएगी और भारत को व्‍यापार का नया रास्‍ता मिलेगा. ओमान हमेशा से न्‍यूट्रल और मीडिएटर की भूमिका निभाता है. इस समझौते से उसका भारत के साथ संबंध तो बेहतर होगा ही, सामान के साथ व्‍यापार के नए कॉरिडोर को खोलने में भी मदद मिलेगी.

अपनापन के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक’
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहाजनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं’

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ श्री चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

‘सीएम हेल्पलाइन 1076Ó के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन…

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– सीएम हेल्पलाइन शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के फीडबैक के तौर पर उपयोगी एवं कारगर : कलेक्टर’
– कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित जिला प्रशासन प्रशिक्षण में रहे मौजूद’
– संवेदनशीलता, तत्परता एवं सक्रियता से जनमानस की समस्याओं का करें निराकरण’
– जनमानस की सेवा की दिशा में एक अभिनव पहल’
– शासन-प्रशासन की सेवाएं बनेंगी अधिक सशक्त’

राजनांदगांव: शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं से संबंधित जनमानस से प्राप्त शिकायतों के त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणालीÓ के रूप में ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जहां जनता की आवाज सीधे शासन तक पहुंचेगी। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव की उपस्थिति में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में ‘सीएम हेल्पलाइन 1076Ó के प्रभावी क्रियान्वयन, शिकायतों के समयबद्ध निराकरण तथा जमीनी स्तर पर सुचारू संचालन सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन उपस्थित रहे। विकासखंड स्तरीय अधिकारी वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े रहे। कलेक्टर ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के फीडबैक के तौर पर प्रक्रियाओं के पालन के लिए उपयोगी एवं कारगर साबित होगी। मुख्यत: जनमानस से प्राप्त विभिन्न प्रकार के शिकायतों के निराकरण की प्रणाली जिनमें सीएम जनदर्शन, जनदर्शन, पीजी पोर्टल, पीजीएन, जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन्हीं सभी शिकायतों के समेकित स्वरूप में सीएम हेल्पलाईन होगी। उन्होंने कहा कि जनमानस की सेवा की दिशा में यह एक अभिनव पहल है।

कलेक्टर ने कहा कि सुशासन सरकार में इसके लिए प्रतिक्रिया आधारित एक मजबूत और जवाबदेह फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि हर शिकायत का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। लोगों को शासन तक सीधी पहुंच की सुविधा मिलेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और शासन-प्रशासन की सेवाएं अधिक सशक्त बनेंगी। सीएम हेल्पलाईन संजीवनी की तरह कार्य करेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संवेदनशीलता, तत्परता एवं सक्रियता से जनमानस की समस्याओं का निराकरण करें। इसमें जनसामान्य के शिकायतों के बाद मिले फीडबैक का भी रिकार्ड रखें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस प्रशिक्षण में अपनी जिज्ञासाओं एवं प्रश्रों का अच्छी तरह समाधान करें। शिक्षा, पुलिस, पंचायत अन्य विभाग जहां स्टॉफ अधिक हैं, वहां सजगतापूर्वक शिकायतों के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध टीम बनाएं। जिले में सीएम हेल्पलाईन के बेहतरीन क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारी अच्छा कार्य करेंगे। जिस तरह से सभी अधिकारियों ने ई-ऑफिस सीख लिया है, इसी तरह एक नए कार्यप्रणाली को अपनाएं और अच्छी तरह सीखें। देश के 14 राज्यों में यह व्यवस्था लागू है। कुछ चुनौतियां आएगी, लेकिन सीखते हुए उनका निराकरण करते हुए आगे बढ़ें।

सीएम हेल्पलाइन सुशासन अभिसरण विभाग के सलाहकार श्री आरएस शर्मा ने बताया कि सीएम हेल्पलाईन अंतर्गत शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता का फीडबैक लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नागरिकों का फीडबैक इस पूरी प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है। समाधान होने के बाद संबंधित नागरिक से सीधे संपर्क कर उसकी प्रतिक्रिया ली जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि समस्या का वास्तव में समाधान हुआ है या नहीं। व्यक्ति अगर समाधान से संतुष्ट होता है, तभी शिकायत का पूर्ण निराकरण माना जाएगा। लेकिन यदि कोई असंतुष्ट है तो शिकायत स्वत: सक्रिय हो जाएगी। सीएम हेल्पलाइन के प्रावधान, संचालन एवं समस्याओं के निराकरण किये जाने हेतु प्रेजेन्टेशन के माध्यम से जिला स्तरीय अधिकारियों को विस्तार पूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।

सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ श्री सौरभ श्रीकांत ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली के तहत प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 सहित वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप जैसे आधुनिक मल्टी चैनल किसी भी माध्यम से कॉल करके, 24*7 अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी। जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत की पूरी स्थिति किस विभाग में, किस अधिकारी के पास लंबित है और कार्यवाही हुई या नहीं, इसके साथ ही समाधान में कितना समय लगेगा इसके बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग और अधिकारी तक तुरंत पहुंचाया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़ी होगी। जिसमें हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और शिकायतों के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना नहीं होगी। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी। रियल टाइम मॉनिटरिंग की इस व्यवस्था से प्रशासन अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और सक्रिय बनेगा। जिससे आम नागरिकों की समस्याओं का तेजी से निराकरण सुनिश्चित होगा। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम श्री गौतम पाटिल सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन विषय पर शिविर का हुआ आयोजन…

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राजनांदगांव: भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्काउट भवन स्टेट स्कूल परिसर राजनांदगांव में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन विषय पर शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में माहवारी नहीं कोई बीमारी, माहवारी की जानकारी महिला का है सम्मान सूत्र के माध्यम से किशोरियों को जागरूक कर उनकी झिझक शंका का समाधान किया गया। साथ ही महिला सम्मान एवं महिला स्वास्थ्य जागरूकता पीरियड्स पर खुलकर भ्रांतियां पर चर्चा कार्यक्रम आयोजित की गई। सभी ने अपने कार्य क्षेत्र सहित घर परिवार आस-पड़ोस से इस विषय पर खुलकर चर्चा करने का संकल्प लिया। जिससे महिला स्वास्थ्य के प्रति सजगता सहित सामाजिक भ्रांतियों को दूर किया जा सके।

कार्यशाला का संचालन एवं प्रशिक्षण जिला संगठन आयुक्त स्काउट, श्री मयूख श्रीवास्तव श्रीमती भारती रजक जिला संगठन आयुक्त गाइड श्रीमती पूजा शर्मा गाइडर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में राज्य उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र गोलछा, जिला मुख्य आयुक्त श्री महेश खंडेलवाल, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बघेरा श्रीमती सैमुअल मैडम, जिला सचिव श्री देवेंद्र अम्बादे, विकास खण्ड सचिव स्काउट गाइड श्री टोमन लाल पटेल, श्री रामलाल चंद्रवंशी, श्री रामनारायण साहू, श्री प्रवीण साव, विकासखण्ड सह सचिव श्रीमती सुनीता चंद्राकर, श्री मनीष कुमार सोनी सहित सभी विकासखंड राजनांदगांव, छुरिया, डोंगरगढ़, डोंगरगांव विभिन्न शालाओं से स्काउटर-गाइडर स्काउट, गाइड प्रभारी डॉ आंबेडकर ओपन रोवर क्रू सरोजनी ओपन रेंजर टीम के रोवर रेंजर ने प्रशिक्षण लिया।

जिला अस्पताल एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्मी के दृष्टिगत सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई…

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राजनांदगांव: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि गर्मी के दृष्टिगत जिला अस्पताल राजनांदगांव के सभी वार्डों में एसी एवं कूलर की व्यवस्था की गयी है। साथ ही अस्पताल परिसर में पर्याप्त पंखों तथा शुद्ध व शीतल पेयजल व्यवस्था की गयी है। इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व उप स्वास्थ्य केन्द्रों में भर्ती मरीजों तथा ओपीडी हेतु पंखे एवं कूलर की व्यवस्था की गयी है। साथ ही आवश्यकता अनुसार जीवनदीप समिति से पंखे एवं कूलर की पूर्ति की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को लू से बचाव सहित अन्य स्वास्थ्य जागरूक किये जाने हेतु अलर्ट जारी किया गया है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में हीट स्ट्रोक संबंधी आईसी प्रदर्शित की गयी है। हीट स्ट्रोक संबंधी दैनिक रिपोर्टिंग आईएचआईपी पोर्टल के माध्यम से सभी संस्थानों से की जा रही है।

प्राक्चयन परीक्षा के मॉडल उत्तर के संबंध में दावा-आपत्ति 30 मई तक आमंत्रित…

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राजनांदगांव: मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजनांतर्गत प्रयास आवासीय विद्यालयों अंतर्गत सत्र 2026-27 के कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु आयोजित प्राक्चयन परीक्षा का मॉडल उत्तर विभागीय वेबसाईट https://eklavya.cg.nic.in पर प्रदर्शित किया गया है। जारी मॉडल उत्तर के संबंध में 30 मई 2026 तक कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजनांदगांव में स्वयं उपस्थित होकर दस्तावेजों (प्रमाण) सहित दावा आपत्ति प्रस्तुत कर सकते है। बिना प्रमाण के दावा-आपत्ति को पूर्णत: अमान्य किया जाएगा। प्राप्त दावा आपत्ति के परीक्षण पश्चात विशेषज्ञों द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दावा आपत्ति के संबंध में विषय विशेषज्ञों का अंतिम निर्णय ही अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। डाक द्वारा दावा-आपत्ति स्वीकार नहीं किया जाएगा।