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परिवहन विभाग द्वारा स्कूल वाहनों की विशेष जांच कर की गई कार्रवाई…

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– अनियमितता पाए जाने पर श्रीवेद पब्लिक स्कूल मोहारा एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के स्कूल बसों एवं अन्य वाहनों को किया गया जप्त’

राजनांदगांव” परिवहन विभाग द्वारा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल वाहनों की विशेष जांच एवं प्रवर्तन की कार्रवाई की गई। अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी राजनांदगांव श्री आनंद शर्मा के बताया कि जांच एवं प्रवर्तन के दौरान स्कूल बसों एवं अन्य वाहनों में फिटनेस प्रमाण पत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, फायर सेफ्टी उपकरण सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं एवं दस्तावेजों की गहन जांच की।

जांच के दौरान वाहनों में खामियां पाए जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की गई। जांच के दौरान श्रीवेद पब्लिक स्कूल मोहारा की स्कूल बस सीजी 08 एजी 1365 एवं सीजी 08 एजी 1366 में वैध फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं कर (टैक्स) के दस्तावेज लंबित थे। संबंधित अनियमितताओं के कारण दोनों बसों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत जप्त कर पुलिस थाना मोहारा में सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित खड़ा किया गया है।

प्राप्त जानकारी अनुसार इससे पूर्व भी श्रीवेद पब्लिक स्कूल मोहारा की एक बस के विरूद्ध कार्रवाई की जा चुकी है, किंतु वाहन संचालकों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के नवीनीकरण के प्रति अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई।

इसी तरह दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के स्कूल बस सीजी 08 एम 0237, मैजिक सीजी 08 एएक्स 1835, मैजिक सीजी 08 वाय 1432 जांच के दौरान निर्धारित फिटनेस, बीमा एवं अन्य निर्धारित मानकों की शर्तों में कमी पायी गई।

इन वाहनों के विरूद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जप्त कर कार्यालय अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारी राजनांदगांव में सुरक्षार्थ सुरक्षित खड़ा किया गया है। संबंधित वाहन संचालकों को शीघ्र आवश्यक दस्तावेजों का नवीनीकरण कर नियमानुसार वाहन का संचालन करने के निर्देश दिए गए।

परिवहन विभाग द्वारा स्कूली वाहनों की सुरक्षा एवं वैधता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी इस प्रकार की सघन जांच एवं कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। कार्रवाही में निरीक्षक श्री प्रशांत शर्मा, उपनिरीक्षक श्री अनीश बघेल तथा उपनिरीक्षक श्रीमती प्रभा तिवारी शामिल थे।

पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केन्द्र के माध्यम से नागरिकों को सुगमता से मिल रही पासपोर्ट संबंधी सेवाएं…

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राजनांदगांव: डाक विभाग राजनांदगांव संभाग द्वारा प्रधान डाकघर राजनांदगांव में संचालित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केन्द्र के माध्यम से क्षेत्र के नागरिकों को सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ पासपोर्ट संबंधी सेवाएं प्रदान की जा रही है।

पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केन्द्र में नागरिकों के लिए पासपोर्ट आवेदन स्वीकार करना, दस्तावेज सत्यापन एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित समय पर पूर्ण की जा रही है।

जिससे नागरिकों को दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही पासपोर्ट संबंधी सुविधा प्राप्त हो रही है।

सभी नागरिक प्रधान डाकघर राजनांदगांव में संचालित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केन्द्र के माध्यम से प्रदान की जा रही पासपोर्ट संबंधी सेवाओं का निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए लाभ ले सकते है।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रधान डाकघर पासपोर्ट केंद्र से संपर्क कर प्राप्त की जा सकती है।

रोपणियों में रोपित आम फलबहार की नीलामी 15 एवं 20 अप्रैल को…

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राजनांदगांव” उद्यान विभाग अंतर्गत स्थापित राजनांदगांव विकासखंड के शासकीय उद्यान रोपणी पेण्ड्री में 15 अप्रैल 2026 एवं डोंगरगढ़ विकासखंड के शासकीय उद्यान रोपणी अछोली में 20 अप्रैल 2026 को आम फलबहार की नीलामी की जाएगी। इच्छुक बोलीकर्ता निर्धारित तिथि को दोपहर 12 बजे संबंधित रोपणी स्थल में उपस्थित होकर शर्ते के अनुसार नीलामी में भाग ले सकते है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी कार्यालय सहायक संचालक उद्यान राजनांदगांव कलेक्टोरेट के कमरा नंबर 73-77 से प्राप्त की जा सकती है।

“IPL 2026: राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच रोमांचक मुकाबला”

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राजस्थान रॉयल्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर मैच की जानकारी…

राजस्थान रॉयल्स (RR) 10 अप्रैल 2026 को आईपीएल 2026 के 16वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) का सामना करने के लिए तैयार हैं।

;”> यह मैच असम क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) स्टेडियम, बरसापारा, गुवाहाटी में खेला जाएगा। यह स्थान पर इस सीजन का अंतिम मैच होगा, क्योंकि RR अब अपने मूल घरेलू मैदान, सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में लौटेगा। RR इस मैच में शानदार फॉर्म में है, क्योंकि उन्होंने अब तक चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), गुजरात टाइटन्स (GT) और मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ सभी तीन मैच जीते हैं। वे इस समय टूर्नामेंट में एकमात्र टीम हैं जिसने सभी तीन मैच जीते हैं। RCB ने भी अपने खिताब की रक्षा में शानदार शुरुआत की है, उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और CSK के खिलाफ अपने पहले दो मैच जीते हैं। इस प्रकार, यह टूर्नामेंट की तीन अजेय टीमों के बीच मुकाबला होगा। जो भी टीम जीतती है, उसे तालिका में शीर्ष पर पहुंचने का मौका मिलेगा.

RR बनाम RCB मैच विवरण

  • तारीख: 10 अप्रैल 2026
  • स्थान: असम क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, बरसापारा, गुवाहाटी
  • टॉस का समय: शाम 7:00 बजे IST
  • मैच का समय: शाम 7:30 बजे IST

RR बनाम RCB आमने-सामने +RCB का RR के खिलाफ पिछले 19 वर्षों में मुकाबलों में बढ़त है।

  • मैच: 34
  • RCB जीत: 17
  • RR जीत: 14
  • कोई परिणाम नहीं: 3

RR बनाम RCB मैच भविष्यवाणी

गुवाहाटी में एक उच्च स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद की जा सकती है। जबकि RR के विस्फोटक ओपनर्स और घरेलू लाभ खतरनाक हैं, RCB की गहरी बल्लेबाजी में थोड़ी बढ़त है।

RR बनाम RCB टीम

राजस्थान रॉयल्स: यशस्वी जायसवाल, वैभव सूरीयवंशी, ध्रुव जुरेल(w), रियान पराग(c), शिमरोन हेटमायर, डोनोवन फेरेरा, रविंद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर, नंदरे बर्गर, तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, रवि बिश्नोई, लुहान-ड्रे प्रेटोरियस, ब्रिजेश शर्मा, रवि सिंह, शुभम दुबे, एдам मिल्ने, दासुन शनाका, कुलदीप सेन, सुषांत मिश्रा, युध्वीर सिंह चारक, क्वेना मफाका, विग्नेश पुथुर, अमन राव पेरेला।

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर: रजत पाटीदार, टिम डेविड, विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, फिलिप साल्ट, जितेश शर्मा, जैकब बेटेल, कृणाल पांड्या, रोमारियो शेफर्ड, अभिनंदन सिंह, जोश हेजलवुड, रसिख सलाम दार, सुयश शर्मा, स्वप्निल सिंह, यश दयाल, नुवान थुशारा, वेंकटेश अय्यर, जैकब डफी, मंगेश यादव, जॉर्डन कॉक्स, विक्की ओस्टवाल, विहान मल्होत्रा, कनीष्क चौहान, सत्विक देसवाल, भुवनेश्वर कुमार

बिक गई जेपी कंपनी, अडानी बने नए मालिक! जिनके पैसे फंसे हैं उनका क्या होगा? पुराने मालिक ने दिया ये जवाब…

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चार दशक से अधिक समय तक देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी धाक जमाने वाली कंपनी ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड’ (JAL) के लिए अब एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है.

लंबे समय से भारी-भरकम कर्ज और आर्थिक संकट के बोझ तले दबी इस कंपनी की बागडोर अब अडानी ग्रुप के हाथों में होगी. जेपी ग्रुप के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ ने खुद इस बदलाव पर अपनी मुहर लगा दी है. उनका यह बयान उन हजारों घर खरीदारों, कर्मचारियों और निवेशकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो सालों से अनिश्चितता के भंवर में फंसे हुए थे.

अडानी ग्रुप के नेतृत्व पर जताया पूर्ण विश्वास

जयप्रकाश गौड़ ने स्पष्ट किया है कि कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) द्वारा अडानी समूह को सफल समाधान आवेदक (रेज़ोल्यूशन एप्लिकेंट) के रूप में चुना जाना एक सही कदम है, और वे इस फैसले का पूरा सम्मान करते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि गौतम अडानी के नेतृत्व में जयप्रकाश एसोसिएट्स की विरासत एक नई ऊर्जा, जिम्मेदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी. गौड़ ने पूरी दिवालिया समाधान प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और निष्पक्ष बताया. इसके साथ ही, उन्होंने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स और रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल की भूमिका की भी सराहना की.

घर खरीदारों और कर्मचारियों के लिए क्या हैं इसके मायने?

जयप्रकाश गौड़ ने भी इस बात को स्वीकार किया कि पिछला कुछ समय कंपनी से जुड़े हर व्यक्ति, चाहे वह घर खरीदार हो, कर्मचारी हो, कर्जदाता हो या बिजनेस पार्टनर, सभी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. इस समाधान प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य ही कर्ज की समस्या को सुलझाना और नए मालिकाना हक के तहत कंपनी के कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है. अडानी ग्रुप के मजबूत वित्तीय ढांचे के कारण अब अटके हुए प्रोजेक्ट्स के पूरे होने और लोगों को उनके घर मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं.

वेदांता की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

यह अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह से विवादों से मुक्त नहीं रही है. इस मामले में एक कानूनी लड़ाई भी देखने को मिली. प्रतिद्वंद्वी बोलीदाता वेदांता ग्रुप ने इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि उनके बड़े ऑफर को नजरअंदाज किया गया और चयन में पारदर्शिता की कमी थी. वहीं दूसरी तरफ, कर्जदाताओं (लेंडर्स) का तर्क बिल्कुल स्पष्ट था. लेंडर्स के अनुसार, अडानी ग्रुप के प्लान में नकद भुगतान की गारंटी (अपफ्रंट कैश), काम पूरा करने की क्षमता और तेजी से कर्ज चुकाने का रोडमैप ज्यादा मजबूत था. हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने भी अडानी ग्रुप के इस टेकओवर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे इस अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया. विवादों के बावजूद, जयप्रकाश गौड़ ने शुक्रवार को वेदांता ग्रुप को इस पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने और दिलचस्पी दिखाने के लिए धन्यवाद दिया.

1979 से शुरू हुआ सफर, अब एक नए मुकाम पर

साल 1979 में स्थापित जयप्रकाश एसोसिएट्स ने भारत को कई बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स दिए हैं. इनमें बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, कई विशाल पनबिजली (हाइड्रोपावर) प्रोजेक्ट्स, सीमेंट प्लांट्स और जेपी स्पोर्ट्स सिटी जैसी विशाल इंटीग्रेटेड टाउनशिप शामिल हैं. वित्तीय संकट के कारण कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, लेकिन अब यह 45 साल पुराना साम्राज्य एक नई शुरुआत करने जा रहा है.

Farmer ID Mandatory: अब इस चीज के बिना किसानों को नहीं मिलेगी यूरिया, कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने लागू किया नियम…

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Farmer ID Mandatory: देश में खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.अब किसानों को यूरिया समेत अन्य खाद खरीदने के लिए फॉर्मर आईडी अनिवार्य की जा रही है. यह व्यवस्था 2026-27 के खरीफ सीजन से लागू होगी. इसके बाद बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को खाद मिलना मुश्किल हो सकता है. अधिकारियों के अनुसार, इस नए सिस्टम का मकसद सही किसानों तक सही मात्रा में खाद पहुंचना है. ताकि अनियमित वितरण और ब्लैक मार्केटिंग को रोका जा सके.

डिजिटल सिस्टम के जुड़ेगा खाद डिस्ट्रीब्यूशन

सरकार की ओर से जारी नियमों के अनुसार, अब यूरिया समेत दूसरी खाद खरीदने के लिए किसानों के पास फार्मर आईडी होना जरूरी है. नई व्यवस्था के तहत खाद वितरण प्रक्रिया को डिजिटल सिस्टम के जरिए पूरा किया जाएगा. इसमें किसान को उसकी जमीन और फसल के आधार पर तय मात्रा ही दी जाएगी. डीलरों को भी निर्देश दे दिया गया है कि वे बिना फार्मर आईडी दर्ज किए खाद की बिक्री नहीं कर सकते हैं. इसके लिए के-किसान सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है.

रजिस्ट्रेशन नहीं तो खाद और योजनाओं से भी वंचित

सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें न सिर्फ यूरिया और डीएपी मिलने में दिक्कत होगी, बल्कि कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा. जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ, बीज, कीटनाशक और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, सहकारी समितियां से खाद वितरण और सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल की खरीद का लाभ भी किसान नहीं ले पाएंगे. इन सभी सुविधाओं के लिए अब फार्मर आईडी जरूरी कर दी गई है.

कैसे बनवा सकते हैं फार्मर आईडी?

जिन किसानों के पास अभी फार्मर आईडी नहीं है. वह नजदीकी केंद्रों पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, जमीन से जुड़े डॉक्यूमेंट, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर जैसे जरूरी दस्तावेज ले जाने होंगे. सरकार ने गांव-गांव में कैंप लगाकर भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसमें शामिल हो सके.

डिजिटल कृषि की ओर बढ़ता कदम

इन नए फैसलों को लेकर कृषि मंत्रालय का कहना है कि फार्मर आईडी डिजिटल कृषि की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे किसानों को बैंक लोन, सब्सिडी और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा. इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्यों से इस काम को मिशन मोड में पूरा करने के अपील की है, ताकि कोई भी किसान खाद की सरकारी मदद से वंचित न रहे.

बंगाल: 6 महीने के अंदर UCC, 3 श्वेतपत्र, बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपये. बीजेपी के ‘भरोसा पत्र’ में क्या-क्या?

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रचार जोरों पर हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का घोषणा पत्र जारी कर दिया. ‘भरोसा पत्र’ के नाम से जारी घोषणा पत्र में पार्टी ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए नए मार्ग दिखाने का वादा किया है.

बीजेपी ने इस बार ‘संकल्प पत्र’ की जगह अपने घोषणा पत्र को ‘भरोसा पत्र’ नाम दिया है. शाह ने कहा कि बंगाल में बेरोजगार युवाओं को 3000 मासिक आर्थिक भत्ता दिया जाएगा और 6 महीना के अंदर यूसीसी लागू करेंगे.

पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए बीजेपी नेता अमित शाह ने कहा, “ये संकल्प पत्र बंगाल के हर वर्ग को निराशा से निकलने का मार्ग है. किसान को एक नया मार्ग दिखाएगा. साथ ही ये बेरोजगार युवाओं और भयभीत महिलाओं के लिए नया मार्ग दिखाने वाला संकल्प पत्र है. बंगाल की जनता के लिए काली रात्रि से मुक्ति का भी संकल्प पत्र है.”

पार्टी के संकल्प पत्र के बारे में अमित शाह ने कहा, “यह बंगाल के नागरिकों को नई आशा देगा. इस ‘संकल्प पत्र’ को बंगाल की जनता के सामने रखा गया है, इसमें उनके लिए नई आशा है.” उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने ममता दीदी को मैंडेट दिया, फिर दूसरी बार भी मौका दिया. उन्हें तीसरा मौका भी मिला, लेकिन जिस आशा से जनता ने जनमत दिया था, उससे उन्हें निराशा हुई और अब बंगाल की जनता निराश है. पिछले दस सालों में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका विपक्ष निभा रहा है.

बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3 हजारः शाह

युवाओं और महिलाओं की बात करते हुए शाह ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3000 आर्थिक भत्ता देंगे. साथ ही गरीब की दयनीय महिला के बैंक खाते में हर महीने 3000 रुपये दिए जाएंगे. 1 करोड़ युवाओं को नौकरी दी जाएगी. जबकि सरकारी कर्मचारियों के लिए 45 दिनों के अंदर DA सुनिश्चित किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ये हमारा संकल्प पत्र बीजेपी की विकसित बंगाल के लिए रोड मैप है, ये भरोसे का शपथ पत्र है. उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 15 साल का दुश्वापन में हम बंगाल में विकास का रास्ता खोलेंगे.

6 महने के अंदर UCC लागू करेंगेः शाह

उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के 6 महीने के अंदर यूसीसी लागू करेंगे. साथ ही हमारी सरकार 3 तीन श्वेत पत्र भ्रष्टाचार के खिलाफ, राजनीतिक हिंसा के खिलाफ और कानून व्यवस्था के मामले में लाएगी.

राज्य में 2 चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले, पार्टी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अपना चुनावी अभियान तेज कर रही है. अमित शाह ने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल अब तृणमूल कांग्रेस से मुक्ति चाहता है. साथ ही उन्होंने बताया कि आज वह डेबरा में जनसंपर्क कार्यक्रमों और खड़गपुर में एक रोड शो करने जा रहे हैं.

TMC से त्रस्त बंगाल अब परिवर्तन चाहता है।

आज कोलकाता में TMC के ‘भय राज’ से बंगाल को मुक्त करने के आधार, भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ का विमोचन करूँगा।

इसके पश्चात, पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा में जनसभा और खड़गपुर में रोड-शो के माध्यम से प्रदेश के बहनों-भाइयों के बीच रहने के लिए उत्सुक…

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में जारी होने वाले अपने संकल्प पत्र को भरोसा पत्र का नाम दिया है. ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल को भय का कार्यकाल बताते हुए उसके खिलाफ गृह मंत्री ने हफ्ते भर पहले चार्जशीट जारी किया था

शेष भारत में शाकाहार के नाम पर वोट मांगेंगे, लेकिन असम में गोमांस और बंगाल में मछली खाने की वकालत करेंगे..<br><br>कमाल की मक्कारी और बेशर्मी है..पद की गरिमा और मर्यादा को तो तेल लेने भेजा ही हुआ है, स्ट्रेट ऑफ होर्म्यूज से.!!

UP Final Voter List: फाइनल वोटर लिस्ट में भी जिनका नहीं नाम, उनका क्या होगा, क्या छोड़ना पड़ेगा यूपी? जानें नियम

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उत्तर प्रदेश की नई वोटर लिस्ट जारी हो गई है. ऐसे में लाखों लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि अगर उनका नाम लिस्ट में नहीं है तो अब क्या होगा? क्या वोट देने का अधिकार खत्म हो जाएगा या राज्य छोड़ना पड़ेगा?

इन सवालों के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नियम क्या कहते हैं और ऐसे लोगों के पास कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं. यहां पूरी प्रक्रिया समझना जरूरी है ताकि कोई अपना अधिकार न खोए और परेशान न हों.

फाइनल वोटर लिस्ट जारी

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के तहत उत्तर प्रदेश में एसआईआर-2026 के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है. यह अभियान 27 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 166 दिन चला. इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राज्य की नई वोटर लिस्ट सामने आई है, जिसमें बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिला है.

लिस्ट में कितने वोटर हुए कम

नई सूची के मुताबिक पहले जहां कुल मतदाता 15.44 करोड़ थे, अब यह घटकर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 रह गए हैं. यानी करीब 2 करोड़ नाम सूची से हट गए हैं. हालांकि ड्राफ्ट लिस्ट (6 जनवरी 2026) में संख्या 12.55 करोड़ थी, जो सुधार और नए नाम जोड़ने के बाद बढ़ी है. नई सूची में 18-19 साल के 3.33 लाख से ज्यादा नए मतदाता जुड़े हैं. कुल मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 7.30 करोड़ (54.54%) और महिलाओं की संख्या 6.09 करोड़ (45.46%) है. लिंगानुपात भी सुधरकर 1000 पुरुषों पर 834 महिलाएं हो गया है, जो पहले 824 था.

अगर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है तो क्या उसे यूपी छोड़ना पड़ेगा? जवाब साफ है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का मतलब सिर्फ इतना है कि फिलहाल आप वोट नहीं डाल सकते हैं, लेकिन इससे आपकी नागरिकता या रहने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है.

नाम जुड़वाने का क्या है तरीका?

अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह कभी भी फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकता है. यह प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी, यह किसी खास समय तक सीमित नहीं है. इसके लिए आवेदन ऑनलाइन भी किया जा सकता है और मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है.

सिर्फ नाम जोड़ने ही नहीं, बल्कि गलत या अपात्र नाम हटाने की प्रक्रिया भी जारी रहती है. इसके लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है. अगर किसी मृत व्यक्ति या गलत तरीके से जुड़े नाम को हटाना हो, तो यह प्रक्रिया भी आसान है और ऑनलाइन उपलब्ध है.

अपील का अधिकार भी है मौजूद

अगर किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह अपील कर सकता है. Representation of the People Act, 1950 की धारा 24 के तहत पंजीकरण अधिकारी (ERO) के फैसले के खिलाफ 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील की जा सकती है. इसके बाद भी असंतोष होने पर 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास दूसरी अपील का विकल्प मौजूद है.

ऑनलाइन चेक और आवेदन कैसे करें?

मतदाता अपना नाम आसानी से ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना नाम खोजा जा सकता है. वहीं से नया आवेदन, सुधार या हटाने की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है. इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बन गई है.

राज्यसभा सांसद बनने के साथ नीतीश कुमार के नाम दर्ज हुआ रिकॉर्ड, ऐसा करने वाले बिहार के छठे नेता…

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बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है. इसके साथ ही नीतीश कुमार ने एक रिकॉर्ड भी कायम कर दिया है.

दरअसल नीतीश कुमार बिहार के छठे ऐसे नेता बन गए, जो चारों सदन के सदस्य बनने वाले सूची में शामिल हो गए. नीतीश कुमार से पहले बिहार से पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी, राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा तथा वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने ये रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

यह पहले पांच ऐसे नेता रह चुके हैं, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक पारी को खेल चुके हैं. नीतीश कुमार सांसद रहते हुए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो रहे हैं, वह अब पार्टी को मार्गदर्शन देने का काम करेंगे. उन्हें बधाई देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक बताया हैं और उनके सुशासन और प्रतिबद्धता की सराहना की है.

नागमणि का ये रहा था सफर

बिहार की राजनीति में अलग स्थान रखने वाले और बिहार के लेनिन के नाम से प्रसिद्ध जगदेव प्रसाद के पुत्र नागमणि सदन के सदस्य रह चुके हैं. सबसे ज्यादा पार्टी बदलने का रिकॉर्ड बनाने वाले नागमणि ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 70 के दशक में की थी. 1977 में नागमणि पहली बार कुर्था से विधायक बने थे. इसके बाद वो चतरा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं. नागमणि बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं. 2002-04 में नागमणि राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं. 2006 में नागमणि बिहार विधान परिषद के सदस्य बने थे हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव को लड़ने के लिए उन्होंने अपने सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इनकी पत्नी सुचित्रा सिंह बिहार सरकार में मंत्री रह चुकी हैं.

लालू प्रसाद ने भी बनाया रिकॉर्ड

बिहार की राजनीति के दिग्गज और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी उसे सूची में शामिल हैं, जिस सूची में बहुत कम लोग अपना स्थान बना पाए हैं. दरअसल लालू प्रसाद यादव भी बिहार विधानसभा बिहार विधान परिषद के सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य और लोकसभा सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक पारी को खेल चुके हैं. 1977 में लोकसभा के लिए चुने जाने के वक्त लालू प्रसाद यादव सबसे युवा सदस्य के रूप में थे. 1980 में लालू प्रसाद यादव पहली बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए थे तब उन्होंने कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवार को हराया था. 1998 में लालू प्रसाद यादव फिर लोकसभा के लिए चुने गए. 2002 में वह राज्यसभा के सदस्य बने. 2004 में लालू प्रसाद यादव ने लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार में रेल मंत्री भी बने.

सुशील मोदी के नाम भी अनूठा रिकॉर्ड

पटना यूनिवर्सिटी से अपने राजनीतिक पारी का आगाज करने वाले भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता रहे और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी भी उस सूची में शामिल है, जो बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं. सुशील कुमार मोदी ने 1990 में राजधानी के कुम्हरार सीट से जीत हासिल की थी. 2004 में वह भागलपुर लोकसभा सीट से लोकसभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद वह बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे साथ-साथ वह बिहार के डिप्टी सीएम भी रहे. 2020 से 2024 तक वह राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं.

कभी लालू के साथ अब बीजेपी के रामकृपाल भी रहे मेंबर

राजन सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के कभी करीबी माने जाने वाले रामकृपाल यादव भी उसे सूची में शामिल हैं, जिस सूची में बिहार से बहुत कम राजनेता पहुंचे हैं. 1985-86 में पटना के डिप्टी मेयर के रूप में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज करने वाले राम कृपाल यादव 1992-93 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं. 1996 में वे फिर विधान परिषद के लिए चुने गए. इसके बाद वह लोकसभा के लिए चुने गए थे. कालांतर में रामकृपाल यादव ने लालू प्रसाद यादव के साथ अपनी राजनीतिक दूरी बनाई और वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए नरेंद्र मोदी वन सरकार में वह केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.

हालांकि 2010 में वह राजद की तरफ से ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. 2025 में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उनको दानापुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था. इस सीट पर उन्होंने राजद के रीतलाल यादव को हराया और इसके साथ ही इस सूची में अपना नाम दर्ज कर लिया.

उपेंद्र कुशवाहा ने भी खेली पारी

बिहार के उन गिने चुने राजनेताओं में उपेंद्र कुशवाहा का भी नाम शामिल है, जो लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं. भूपेंद्र कुशवाहा को बिहार की राजनीति में लव कुश समीकरण के प्रमुख नेता के रूप में देखा जाता है. कुशवाहा 2000 से 2005 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. जबकि 2014 से लेकर के 2019 तक वह काराकाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत दर्ज कर चुके हैं.

उपेंद्र कुशवाहा नरेंद्र मोदी सरकार पार्ट वन में केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. कुशवाहा 2021 से 2023 तक बिहार विधान परिषद के भी सदस्य के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने काराकाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था हालांकि उनका जीत नहीं मिल सकी थी. वह तीसरे नंबर पर चले गए थे, इसी साल अगस्त में वह राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे.

अब नीतीश कुमार का भी जुड़ा नाम

चारों सदनों के सदस्य की सूची में शामिल होने वाला सबसे नया नाम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का है. 1985 में पहली बार विधायक बने नीतीश कुमार ने अपना सियासी सफर अपने गृह जिले नालंदा के हरनौत सीट से किया था. इस सीट पर नीतीश कुमार ने 1995 में दूसरी बार जीत दर्ज की थी. 1995 के बाद नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए. नीतीश 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में कुल 6 बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं.

1989 से 2000 तक उन्होंने केंद्र में कृषि मंत्री और रेल मंत्री के पद पर भी काम किया. नीतीश कुमार का विधान परिषद का कार्यकाल भी काफी लंबा रहा है. 2006 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. जबकि 2012 में वह दूसरी बार सदस्य बने. 2018 में तीसरी बार और 2024 में वह चौथी बार बिहार विधान परिषद के लिए चुने गए. 2025 में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने बिहार में प्रचंड जनादेश हासिल किया था. अब चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और नीतीश कुमार के शपथ लेने के साथ ही उनके नाम उस सूची में शामिल हो गया, जो चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं.

चाबहार भारत और ईरान की दोस्ती का गोल्डन ब्रिज: ईरानी दूतावास

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भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध युद्ध के बीच भी खराब नहीं हुए हैं. भारत में ईरानी दूतावास ने गुरुवार को चाबहार पोर्ट की तस्वीरें साझा कीं और इसे ईरान-भारत दोस्ती का गोल्डन ब्रिज कहा.

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध में युद्ध विराम के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत चल रही है.

एक्स पर एक पोस्ट में ईरान एंबेसी ने चाबहार पोर्ट की तस्वीरें शेयर कर इस पोर्ट को ‘ईरान-भारत मित्रता का स्वर्णिम पुल’ कहा. पोस्ट में बंदरगाह की भूमिका को सहयोग के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, भले ही भू-राजनीतिक तनाव क्षेत्रीय कूटनीति को आकार देना जारी रखे हुए है. यह आउटरीच अमेरिका और ईरान की ओर से हफ्तों के संघर्ष के बाद दो सप्ताह के अस्थायी युद्ध विराम पर सहमत होने के के बाद आई है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के तहत वार्ता जारी रहने की उम्मीद है.

भारत और ईरान के रिश्ते में क्यों गोल्डन ब्रिज है चाबहार?

भारत की चाबहार पोर्ट में भूमिका मुख्य रूप से रणनीतिक, आर्थिक और कनेक्टिविटी आधारित है. यह भारत की एक्ट ईस्ट, कनेक्ट सेंट्रल एशिया और INSTC (International North-South Transport Corridor) नीतियों का खास हिस्सा है. पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया (तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि), रूस और यूरोप तक पहुंच बनाने के लिए चाबहार भारत के लिए एक गोल्डन गेट की तरह काम करता है.

मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल के लिए एक समझौता हुआ था. इसके तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को शहीद बहेश्ती टर्मिनल (Shahid Beheshti Terminal) का संचालन, उपकरण लगाने और विकास का अधिकार मिला. भारत इस पोर्ट पर अब 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का निवेश कर चुका है.

कल होगी संघर्ष विराम की वार्ता

पाकिस्तान की भागीदारी से मध्यस्थता किए गए इस संघर्ष विराम का उद्देश्य तनाव कम करना, महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को फिर से खोलना और व्यापक बातचीत के लिए जगह बनाना है. लेबनान में चल रहे इज़राइली हमलों ने इस नाजुक बना दिया है. शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिकी डेलीगेशन के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता होगी.

संघर्ष विराम की बातचीत से पहले चाबहार पर ज़ोर देकर ईरान यह संदेश दे रहा है कि आर्थिक पार्टनरशिप खासकर भारत के साथ, US के साथ बातचीत के दौरान भी जारी रहेगी. यह स्ट्रेटेजिक जगह पर मौजूद पोर्ट भारत की अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से कनेक्टिविटी के लिए बहुत ज़रूरी है, जबकि यह पाकिस्तान को बायपास करता है, और दोनों देशों ने इसे बार-बार आपसी रिश्तों की नींव बताया है.