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UP Politics: यूपी में गठबंधन को लेकर चंद्रशेखर आजाद का बड़ा बयान, बताया- किसके साथ लड़ेंगे चुनाव…

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UP Politics: यूपी में गठबंधन को लेकर चंद्रशेखर आजाद का बड़ा बयान, बताया- किसके साथ लड़ेंगे चुनाव…

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव को लेकर अभी से सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. इन तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आगामी चुनाव में गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया हैं.

उन्होंने हम धोखेबाजों से गठबंधन नहीं करेंगे. चंद्रशेखर आजाद ने एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी का रुख साफ किया. पत्रकार ने जब उनसे सवाल किया कि क्या आगामी चुनाव में आजाद समाज पार्टी किसी दल के साथ गठबंधन करेंगी तो उन्होंने गठबंधन के संकेत दिए लेकिन साथ ही ये भी बताया कि वो किनके साथ जाएंगे.

चुनाव में किसके साथ गठबंधन करेंगे चंद्रशेखर नगीना सांसद ने कहा कि आगामी चुनाव में हम उन्ही दलों के साथ गठबंधन करेंगे जो हमारे विचारों से मेल खाता होगा लेकिन, धोखेबाजों से दूर रहेंगे. उन्होंने साफ कहा कि हम दोबारा धोखा नहीं खाएंगे. उनकी पार्टी जमीनी स्तर पर चुनाव की तैयारी करने में जुटी है. पार्टी के संगठन को भी मजबूत करने का काम किया जा रहा है.

यूपी में अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं और 2027 में विधानसभा चुनाव होंगे. ऐसे में सभी बीजेपी, सपा, कांग्रेस समेत तमाम दल अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. आजाद समाज पार्टी ने भी इन चुनावों में पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरने का ऐलान किया है. आसपा पंचायत चुनाव में अकेले अपने दम पर लड़ेगी.

चंद्रशेखर आजाद पहले भी ये बात कह चुके हैं कि उनकी पार्टी पंचायत चुनाव में पूरे दमखम से लड़ेंगी और पंचायत चुनाव के जब नतीजे आएंगे तो सबको ये पता चल जाएगा कि उनकी पार्टी की ताक़त क्या है? उन्होंने कहा कि वो पंचायत चुनाव के नतीजे के बाद वो यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति को तय करेंगे.

उन्होंने ये भी साफ किया कि पंचायत चुनाव के बाद ही ये तय किया जाएगा कि गठबंधन किसके साथ होगा? बता दें कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ गठबंधन करना चाहते थे लेकिन, बात नहीं बन पाई थी. जिसके बाद उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा और नगीना से जीत हासिल की.

“वैश्विक अनिश्चितता के बीच अब संभलकर उठा रुपया, करेंसी के रिंग में अमेरिकी डॉलर को दी करारी शिकस्त”

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“वैश्विक अनिश्चितता के बीच अब संभलकर उठा रुपया, करेंसी के रिंग में अमेरिकी डॉलर को दी करारी शिकस्त”

भारतीय रुपये पिछले कुछ दिनों में काफी कमजोर हुआ है. पिछले हफ्ते इसमें ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली. हालांकि, उसके बाद भारतीय करेंसी ने खुद को संभाला है. मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपये घरेलू बाजार में 25 पैसे की मजबूती के साथ ऊपर उठा और कमजोर हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.01 के स्तर पर पहुंच गया.

रुपये में क्यों तेजी? इस साल अब तक भारतीय करेंसी में 2.76 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. इसके बाद यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल है. रुपये पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को 88.27 के स्तर पर खुला था. लेकिन बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि मंगलवार को रुपये में मजबूती बनी रहेगी.

हालांकि, उसके बावजूद अमेरिका के भारी भरकम टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता के चलते रुपये के ऊपर दबाव बना हुआ है. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि हाल में भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दखल की उम्मीद बढ़ी है, ताकि उसकी गिरावट को कम किया जा सके.

क्या आरबीआई देगा दखल? उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ इस महीने ही रुपये में पिछले महीने के मुकाबले 0.34 प्रतिशत की गिरावट आई है. इस बीच जहां एक तरफ केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि इस साल नवंबर तक टैरिफ पर नया प्रस्ताव आ सकता है, वहीं दूसरी तरफ केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार रुपये की बेहद करीब से निगरानी कर रही है और निर्यातकों की मदद के लिए कदम उठाने की तैयारी कर रही है.

 

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा…

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लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा…
“राहुल गांधी यात्रा निकाल रहे हैं. आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में यात्रा निकालने वाले हैं. मैं पूछता हूं कि ‘वोट चोरी’ का अर्थ बता दें राहुल गांधी.”

विजय शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी ने एक जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि मतदाता सूची में नाम नहीं है और बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ी थी. वहां गहन पुनरीक्षण हो रहा है. इसका विरोध कर रहे हैं. दोनों में वह कहना क्या चाहते हैं, इसका मतलब बता दें. पहले यह बताएं कि ‘वोट चोरी’ का क्या अर्थ है. जनता को बताओ तो किए आंदोलन किस बात का है. जनता को जानकारी होनी चाहिए कि आंदोलन किस बात का करना है, जनता को पहले जानकारी देनी चाहिए. जनता को गुमराह करना बंद करें. पहले जनता को सच्चाई पता चलनी चाहिए. उन्होंने उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार को होने वाले चुनाव पर कहा, “संसद में उपराष्ट्रपति पद को लेकर वोटिंग होनी है, हमारे एनडीए के प्रत्याशी जीत कर आएंगे.”

भाजपा नेता को धमकी देने का मामला, डिप्टी सीएम विजय शर्मा का पलटवार…

पश्चिम बंगाल टीएमसी विधायक अब्दुर रहीम बख्शी की ओर से भाजपा नेता को धमकी देने का मामला तूल पकड़ने लगा है. छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “प्रवासी मजदूरों को घुसपैठ कहने की कोई बात नहीं होती है. पश्चिम बंगाल का अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे प्रदेश में रह रहा है तो वह विषय नहीं है. हम भी इस समस्या से छत्तीसगढ़ में जूझ रहे हैं. स्पष्ट है बांग्लादेश से जो आएगा, उसको हटाया ही जाएगा.”

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा भाजपा के नेता कह रहे हैं तो उनके मन में राष्ट्रवाद है, वह चाहते हैं कि डेमोग्राफी चेंज न हो, वह चाहते हैं कि समाज सुदृढ़ हो. जिन्होंने भी उन्हें धमकी दी है, यह कायरता है. अपनी सरकार बनाकर जो वहां हिंसा कर रहे हैं और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं, एक दिन वह उनके लिए ही काल का ग्रास बनेगा.”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की अहम बैठक होगी।

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रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की अहम बैठक होगी। यह बैठक मंत्रालय में दोपहर 3.30 बजे से होगी।

माना जा रहा है कि बैठक में बाढ़ प्रभावितों के हालात पर चर्चा होगी। इसमें सरकार बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत पैकेज देने की घोषणा कर सकती है। बता दें कि बाढ़ प्रभावितों के लिए मध्य प्रदेश, ओडिशा और गोवा जैसे राज्यों ने भी हाथ बढ़ाया है।

कैबिनेट की बैठक में धान खरीदी की नीति को लेकर भी चर्चा होगी। कैबिनेट नीति को हरी झंडी दे सकती है। इसमें धान खरीदी से जुड़ी तमाम जानकारी शामिल होगी। राज्य सरकार हर साल धान खरीदी की नीति जारी करती है। हालांकि इस नीति में बहुत ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। कुछ नई व्यवस्थाएं जरूरी लागू हो सकती हैं।

इसके अलावा बैठक में राज्योत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हो सकती है। बता दें कि इस बार सरकार रजत जयंती वर्ष के रूप में मना रही है। 1 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कराने की तैयारी है। इस दिन नए विधानसभा भवन का लोकार्पण कराने की भी तैयारी है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विकसित छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और यूनिसेफ की ओर से तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यूनिसेफ इंडिया के सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि यूनिसेफ द्वारा विश्वभर में जनकल्याण हेतु विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अंजोर विजन 2047 दस्तावेज़ के अंतर्गत सरकार की प्राथमिकताओं को प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा किया।
मुख्यमंत्री को यूनिसेफ के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सर्विसेज प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने राज्य की पोषण संबंधी पहल और “विकसित छत्तीसगढ़” निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
सुश्री हेरेरो ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ में हमर स्वस्थ लइका कार्यक्रम में भी सहयोग प्रदान कर रहा है, जिसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस पहल को मध्यप्रदेश, राजस्थान और ओडिशा जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने यूनिसेफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ में किए जा रहे योगदान की सराहना की और भविष्य में भी अंजोर विजन 2047 के लक्ष्यों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का आह्वान किया है। उसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए संकल्पित है और इसके लिए अंजोर विजन 2047 दस्तावेज़ तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के तहत आदिवासी समुदाय, विशेषकर विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। शिशु मृत्यु दर, कुपोषण सहित स्वास्थ्य एवं पोषण के सूचकांकों को बेहतर बनाने में यूनिसेफ का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री ने किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख विलियम हैनलॉन जूनियर तथा डॉ. बाल परितोष दास भी उपस्थित रहे।

21000 लोगों को बचाया, 29 पुल बनाए, 10000 पीड़ितों का इलाज… बाढ़ में देवदूत बनकर आई सेना

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देश के अनेक हिस्से इस वर्ष भयंकर बाढ़ से प्रभावित हैं. ऐसे कठिन समय में भारतीय सेना ने आपदा में फंसे आम देशवासियों की तरह मदद का हाथ बढ़ाया है. भारतीय सेना ने बाढ़ में फंसे 21 हजार से अधिक नागरिकों को सुरक्षित बचाया है. वहीं देश भर के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों में हजारों लोगों को उपचार मुहैया कराया जा रहा है. सैकड़ों घंटे की हेलीकॉप्टर उड़ानों से हजारों बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई है. सेना के मुताबिक अकेले पंजाब में ही अब तक करीब 10 हजार लोगों को बचाया जा चुका है.
गौरतलब है कि पंजाब इस वर्ष भयंकर बाढ़ का सामना कर रहा है और राज्य के अधिकांश जिले बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. सेना ने अपने इस अभियान से ‘सेवा परमो धर्म’ की मिसाल कायम की है. सेना ने अग्रिम चौकियों पर तैनात लगभग 500 सुरक्षा बल कर्मियों को भी सुरक्षित निकाला है. भारतीय सेना की कुल 126 रेस्क्यू कॉलम्स (बड़ी टीमों) को राहत कार्यों में लगाया गया. सेना की इन विभिन्न टीमों की मदद से अब तक 21,500 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है. ये बचाव अभियान हिमाचल, जम्मू कश्मीर, पंजाब, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न इलाकों में चलाए गए.
सेना न केवल बाढ़ के दौरान लोगों को बचाने का काम कर रही है बल्कि बाढ़ से प्रभावित हुए व्यक्तियों को उचित उपचार भी प्रदान कर रही है. जिन इलाकों से पानी उतरा है या फिर बाढ़ग्रस्त इलाकों से सुरक्षित निकाले गए लोगों को भी चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है. अकेले सेना ने अब तक लगभग ऐसे करीब 9,700 लोगों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान की है. इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को 23,500 किलोग्राम से अधिक राहत सामग्री वितरित की गई है. इस राहत सामग्री में आवश्यक दवाएं, खाने-पीने की वस्तुएं, पीने के लिए साफ पानी, बिस्तर व वस्त्र आदि जरूरी चीजें शामिल हैं.

इस कठिन समय में सेना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आपदा की घड़ी में उसकी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा और सेवा है. सेना के मुताबिक अप्रैल 2025 में मानसून के आगमन से लेकर अब तक सेना की टुकड़ियां 75 से अधिक स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुई हैं. बाढ़ के कारण जो इलाके बाकी हिस्सों से कट गए हैं, सेना उन इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल करने का काम भी कर रही है. संचार और राहत कार्यों को बनाए रखने के लिए सेना के इंजीनियरों ने देश भर के अलग-अलग बाढ़ग्रस्त हिस्सों में 29 पुलों का निर्माण किया है. इनमें से एक पुल की लंबाई 110 फीट है.

ये वे पुल हैं जो बाढ़, बरसात, भूस्खलन आदि के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे या फिर पूरी तरह से टूट गए थे. इस कारण से कई महत्वपूर्ण स्थानों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी. सेना की मदद से इन पुलों का निर्माण कर इन इलाकों की आवाजाही एक बार फिर सुनिश्चित की गई है. सेना के हेलिकॉप्टरों ने 500 से अधिक घंटे उड़ान भरते हुए राहत कार्यों को अंजाम दिया, जो सैनिकों की तत्परता और समर्पण का स्पष्ट उदाहरण है. पंजाब में सेना का बड़ा अभियान अभी भी जारी है.
पंजाब में भारी वर्षा के कारण व्यापक स्तर पर बाढ़ आई. यहाँ सेना के 48 रेस्क्यू कॉलम्स सक्रिय किए गए हैं, जिन्होंने लगभग 10,000 नागरिकों को सुरक्षित निकाला है. बाढ़ के कारण अस्वस्थ हुए 4,700 लोगों को चिकित्सकीय सहायता दी गई. यही नहीं, हेलिकॉप्टर की मदद से 12,500 किलोग्राम से अधिक आवश्यक सामग्री वितरित की गई है. सेना के मुताबिक पंजाब में सेना के हेलिकॉप्टरों ने 250 घंटे से अधिक उड़ान भरकर फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. उन क्षेत्रों तक भी राहत सामग्री पहुंचाई जहां जमीनी मार्ग से जाना संभव नहीं था.

इसके साथ ही, सेना ने लस्सियन, कसोवाल और दर्या मंसूर में अग्रिम चौकियों पर तैनात लगभग 500 सुरक्षा बल कर्मियों (बीएसएफ सहित) को भी सुरक्षित निकाला. मैदानी इलाकों से लेकर देश के आंतरिक हिस्सों तक, भारतीय सेना ने एक बार फिर अपने मूलमंत्र “सेवा परमो धर्म” को साकार किया है. गौरतलब है कि जब-जब आपदा आती है, सेना की हरी वर्दी सबसे पहले मोर्चे पर खड़ी होती है और सबसे अंत में वहां से लौटती है.

कुलगाम एनकाउंटर में दो जवान शहीद, मारा गया पाक‍िस्‍तानी आतंकी रहमान भाई

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साउथ कश्मीर के कुलगाम जिले के गुडार इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया गया. इस ऑपरेशन में हमारे दो बहादुर जवान भी शहीद हो गए, जबकि एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) घायल हुआ है. सेना ने बताया कि आतंकियों की पहचान रहमान भाई और आमिर बशीर दर के रूप में हुई है. रहमान भाई पाकिस्तान का आतंकी था और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा हुआ था. वहीं आमिर बशीर दर स्थानीय आतंकवादी था, जो शोपियां जिले से संबंधित था.
शहीद हुए जवानों की पहचान परभत गौर और नरेंद्र सिंधु के रूप में हुई है. दोनों सेना के बहादुर सिपाही थे और देश की रक्षा करते हुए शहादत को प्राप्त हुए. उनका बलिदान पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है. सेना ने कहा कि आतंकियों का सफाया करना जरूरी था, क्योंकि वे क्षेत्र में आतंक फैलाकर आम नागरिकों और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा रहे थे. घायल हुए JCO को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है और क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि आतंकियों के बाकी नेटवर्क का पता लगाया जा सके. सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में तलाशी अभियान भी तेज कर दिया है. यह मुठभेड़ पिछले कुछ दिनों से कुलगाम और आसपास के इलाकों में सक्रिय आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है. सेना का कहना है कि पाकिस्तान से आए आतंकियों को स्थानीय समर्थन मिल रहा है, लेकिन सुरक्षा बल हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.

नेटवर्क मजबूत कर रहा था रहमान भाई
रहमान भाई के बारे में पता चला है कि वह पाकिस्तान से आतंकी गतिविधियों में शामिल होकर कश्मीर में अपने नेटवर्क को मजबूत करने आया था. वहीं आमिर बशीर दर जैसे स्थानीय आतंकियों की मदद से ये संगठन यहां खतरनाक हालात पैदा कर रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन से आतंकियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. स्थानीय लोगों ने भी सेना के ऑपरेशन की सराहना की है. आम नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में आतंक के डर से जीवन कठिन हो गया था और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से उन्हें राहत मिली है. कई जगहों पर लोग शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए और उनके परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त की.

सेना का ऑपरेशन जारी
सुरक्षा बलों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. सेना ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें. साथ ही उन्होंने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और देश की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा. कुलगाम एनकाउंटर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारे जवान देश की सीमाओं और भीतर के खतरे से निपटने के लिए हर समय तत्पर हैं. सुरक्षा बलों का संकल्प है कि आतंकवाद से कश्मीर को मुक्त कर, वहां शांति और विकास का माहौल बनाया जाएगा.

मुंबई में हाई अलर्ट, नेवी के जवान का रायफल लेकर फरार हुआ संदिग्ध….सर्च ऑपरेशन जारी

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मुंबई के कोलाबा में एक अनदान शख्स ने नौसेना एक जवान का रायफल और कारतूस लेकर फरार हो गया है. घटना नेवी नगर में शनिवार 6 सितंबर की देर रात की है. घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर है. फिलहाल नेवी, मुंबई पुलिस और ATS को हाई अलर्ट मोड पर हैं. पूरी मुंबई में सर्च अभियान जारी किया गया है. दरअसल, शनिवार को देर रात भारतीय नौसेना की वर्दी पहने एक शख्स ने नेवी नगर के रिहायशी इलाके में ड्यूटी पर तैनात एक अग्निवीर को धोखा देकर उसकी राइफल और जिंदा कारतूस ले लेकर फरार हो गया.
संदिग्ध ने खुद को नौसेना अधिकारी बताकर अग्निवीर से कहा कि तुम्हारी ड्यूटी खत्म हो गई है, हथियार मुझे दे दो और जाकर रेस्ट करो. जवान को उसकी असलियत का पता नहीं थी. उसने बहरुपिये के आदेश के अनुसार ही काम किया. इसके बाद वह अनजान शख्स उसका हथियार लेकर फरार हो गया. कुछ देर बाद जानकारी हुई कि वह व्यक्ति नौसेना का अधिकारी नहीं, बल्कि एक बाहरी घुसपैठिया था. इलाके में अफरा तफरी मच गई.

इस घटना ने नौसेना, एटीएस और मुंबई पुलिस को चौकन्ना कर दिया गया है. नेवी नगर में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है. मुंबई पुलिस और भारतीय नौसेना ने संयुक्त रूप से इस सुरक्षा उल्लंघन की जांच शुरू की है. कफ परेड पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4) (धोखाधड़ी), 341(2) (चोरी), और 7 (आयुध अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया है. केंद्रीय जांच एजेंसियां और महाराष्ट्र की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) भी इस मामले में शामिल हो गई हैं.
कोई सुराग नहीं लगा हाथ
नौसेना ने इस घटना की गहन जांच के लिए बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया है, जो यह पता लगाएगी कि यह घुसपैठ कैसे संभव हुई. प्रारंभिक जांच में संदिग्ध के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी मदद से सबूत जुटाए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक संदिग्ध, राइफल, या कारतूस का कोई सुराग नहीं मिला है. यह घटना नौसेना के लिए एक गंभीर सुरक्षा चूक मानी जा रही है, क्योंकि नेवी नगर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घुसपैठ चिंता का विषय है. नौसेना और पुलिस ने नेवी नगर, कोलाबा, और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है.
मुंबई में बढ़ रही टेंशन
गेटवे ऑफ इंडिया और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना दें. यह घटना हाल के दिनों में मुंबई में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, जैसे बम धमकियों और तस्करी की घटनाओं के बीच आई है.

पीएम मोदी बाढ़ प्रभावित हिमाचल-पंजाब का दौरा, कौन-कौन होगा साथ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 9 सितंबर को बाढ़ प्रभावित राज्यों हिमाचल प्रदेश और पंजाब का दौरा करेंगे. इस दौरे पर वह बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान और पुनर्वास के कार्य की समीक्षा करगें. अपने दौरे में पीएम मोदी सबसे पहले दोपहर 1:30 बजे के करीब हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहुंचेंगे, जहां वे सबसे प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे. इसके बाद वे धर्मशाला में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र टीमों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. पीएम मोदी बाढ़ पीड़ितों से भी बातचीत करेंगे. सके बाद प्रधानमंत्री पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे, जो लगभग 3 बजे होगा. वे 4:15 बजे के करीब गुरदासपुर पहुंचेंगे, जहां वे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे और जमीनी स्थिति पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे.
हिमचाल में अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य गणमान्य लोगों के साथ बैठक करेंगे. इसमें राज्य में हुए नुकसान से लेकर उनके पुनर्वास सभी पर चर्चा की जाएगी.

हिमाचल प्रदेश और पंजाब की स्थिति

हिमाचल प्रदेश में चल रहे मानसून सीजन में अब तक 370 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 205 मौतें बारिश से संबंधित घटनाओं जैसे भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटना, डूबना, बिजली गिरना, करंट लगना और अन्य आपदा से संबंधित कारणों से हुई हैं. कुल 434 लोग घायल हुए हैं और 41 लोग लापता हैं. हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) के अनुसार, सोमवार शाम 6 बजे तक कुल 744 सड़कें अवरुद्ध थीं, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग: एनएच-03, एनएच-70 और एनएच-305 शामिल हैं. कुल्लू जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 223 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं. इसके अलावा, 959 वितरण ट्रांसफार्मर क्षेत्र (डीटीआर) और 472 जल आपूर्ति योजनाएं बाधित हुई हैं.
1988 से ज्यादा खतरनाक तबाही

इस बीच, पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने मानव और आर्थिक नुकसान को बढ़ा दिया है. पंजाब के सूचना और जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मौतों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है. सभी जिलों को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया गया है और बचाव कार्य जारी हैं. सतलुज जैसी नदियों के उफान और लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण आई इस बाढ़ को अधिकारियों ने दशकों में राज्य की सबसे भयानक बाढ़ बताया है, जो 1988 की बाढ़ के पैमाने को भी पार कर गई है.
राज्य सरकारें राहत पैकेज की मांग कर रही हैं
हिमाचल प्रदेश और पंजाब दोनों की सरकारों ने पीएम मोदी से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज प्रदान करने का अनुरोध किया है. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उम्मीद जताई कि पीएम मोदी आपदा प्रभावित राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करेंगे. पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कम से कम 25,000 करोड़ रुपये के मुआवजे की तत्काल घोषणा करेंगे, इसके अलावा 60,000 करोड़ रुपये के लंबित बकाया को बिना देरी के मंजूरी देंगे. इस बीच, पंजाब कैबिनेट ने सोमवार को राज्य में बाढ़ से फसल नुकसान के लिए प्रति एकड़ 20,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया.

उपराष्‍ट्रपत‍ि चुनाव में क्या खेला होगा? कांग्रेस का दावा, बीजेपी के 2 दोस्‍तों ने छोड़ा साथ

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क्या सच में उपराष्ट्रपति चुनाव कोई बड़ा खेला होने जा रहा है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि बीजेपी के दो दोस्त उन्हें छोड़कर चले गए हैं और उपराष्ट्रपति चुनाव में उनका साथ नहीं देंगे. तय है कि कुछ दिलचस्प होगा. उधर, बीजेपी ने भी अपने सियासी कील-कांटे दुरुस्त कर लिए हैं. बाकायदा बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे सहयोगी दलों के सांसदों को अपने यहां ब्रेकफास्ट कराएं और साथ ही वोट डालने के लिए लेकर आएं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि एनडीए के सभी सांसद मंगलवार की सुबह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आवास पर जलपान करेंगे और उसके बाद वोटिंग के लिए एक साथ जाएंगे.
जयराम रमेश ने सोमवार को कहा, “पिछले एक दशक से संसद में भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी रहीं दो पार्टियों ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा न लेने का फैसला किया है. आगे क्या होगा?” दरअसल, बीजू जनता दल (बीजेडी) और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने यह फैसला लिया है कि वह उप-राष्ट्रपति चुनाव में शामिल नहीं होंगे. इसी वजह से कांग्रेस नेता के इस बयान से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. एनडीए के सभी सांसद मंगलवार सुबह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आवास पर जलपान करेंगे.
राधाकृष्णन और रेड्डी में मुकाबला
लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मंगलवार को तय करेंगे कि सी. पी. राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी में से देश का अगला उप-राष्ट्रपति कौन होगा. राधाकृष्णन, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार हैं, जिनका सीधा मुकाबला विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी से है. उप-राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान मंगलवार 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे समाप्त होगा. मंगलवार देर शाम तक नतीजे घोषित होने की उम्मीद है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी राज्यसभा महासचिव पी. सी. मोदी ने कहा है कि मतदान मंगलवार को संसद भवन के कमरा संख्या एफ-101, वसुधा में होगा.

उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए कैंडिडेट का पलड़ा भारी
देश के 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए, निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में पांच सीट रिक्त हैं), 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में एक सीट रिक्त है) शामिल हैं. निर्वाचक मंडल में कुल 788 सदस्य (वर्तमान में 781) हैं. विभिन्न दलों द्वारा दिए गए समर्थन को आधार बनाकर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो एनडीए उम्मीदवार का पलड़ा भारी है. हालांकि विपक्ष के उम्मीदवार रेड्डी बार-बार यह कहकर अपनी दावेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं कि लड़ाई वैचारिक है तथा यह मतदान सिर्फ उप राष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं है, बल्कि भारत की भावना के लिए है.