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“‘गाजा युद्ध हो सकता है समाप्त, अगर बंधकों की रिहाई हो और…’, इजरायल की क्या शर्त”

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“‘गाजा युद्ध हो सकता है समाप्त, अगर बंधकों की रिहाई हो और…’, इजरायल की क्या शर्त”

इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने गाजा युद्ध को लेकर रविवार को यरुशलम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा युद्ध तब समाप्त हो सकता है, जब बंधकों को रिहा कर दिया जाए।

साथ ही, फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह हमास अपने हथियार डाल दे। यह बयान हमास की ओर से अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह सभी बंधकों को रिहा कर देगा, बशर्ते इजरायल युद्ध समाप्त करने और गाजा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत हो।

गिदोन सार का यह बयान इजरायल-हमास संघर्ष के बीच शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम हो सकता है, क्योंकि यह युद्ध को समाप्त करने की शर्तों को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह बयान दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी मांगों को भी उजागर करता है, क्योंकि हमास की शर्तें इजरायल की मांगों से पूरी तरह भिन्न हैं। यह बयान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर सकता है, क्योंकि इससे मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं। यह दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को भी दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है।

शहर को खाली करने का निर्देश इस बीच, इजरायल की सेना ने गाजा शहर के फिलिस्तीनियों को निर्देश दिया कि वे शहर को खाली कर दें और दक्षिण स्थित मानवीय क्षेत्र में चले जाएं। इजरायल ने शनिवार को इसी के साथ शहर की बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। सहायता समूहों ने चेतावनी दी कि गाजा से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने से मानवीय संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है। खाद्य संकट के मद्देनजर दुनिया के अग्रणी संगठन ने शहर को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। अधिकांश परिवार लगभग 2 वर्ष से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध के कारण कई बार विस्थापित हो चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि इजरायली सेना ने बार-बार उन शिविरों पर बमबारी की है, जिन्हें उसने मानवीय क्षेत्र घोषित किया था।

“रूस ने यूक्रेन को 800 ड्रोन से निशाना बनाया, युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे बड़ा हमला”

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“रूस ने यूक्रेन को 800 ड्रोन से निशाना बनाया, युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे बड़ा हमला”

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर शनिवार को बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल दागीं, जिससे कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए। यूक्रेनी अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

इसे फर‍वरी 2022 में दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन पर रूस का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।

रविवार को हुए इस हमले के बाद एक प्रमुख सरकारी इमारत की छत से धुआं उठता दिखाई दिया। अधिकारियों ने बताया कि रूस ने यूक्रेन पर 805 ड्रोन से हमला किया। यूक्रेन की वायु सेना के प्रवक्ता यूरी इहनाट ने पुष्टि की कि रविवार का हमला यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा रूसी ड्रोन हमला था। रूस ने विभिन्न प्रकार की 13 मिसाइल भी दागीं।

वायु सेना के एक बयान के अनुसार, यूक्रेन ने 747 रूसी ड्रोन और चार मिसाइलों को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया। यूक्रेन में 37 जगहों पर नौ मिसाइल हमले और 56 ड्रोन हमले हुए। मार गिराए गए ड्रोन और मिसाइलों का मलबा आठ जगहों पर गिरा। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के पत्रकारों ने एक सरकारी इमारत की छत से धुएं का गुबार उठता देखा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि यह धुआं हमले के कारण उठा या अन्य कोई कारण है। माना जा रहा है कि अगर धुआं किसी हमले के कारण उठा, तो रूस ने हवाई हमले तेज किए हैं। रूस अब तक शहर के केंद्र में सरकारी इमारतों को निशाना बनाने से बचता रहा है।

यह इमारत यूक्रेन के मंत्रिमंडल का मुख्यालय है, जहां उसके मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं। दमकल गाड़ियों और एम्बुलेंस के पहुंचने पर पुलिस ने इमारत में प्रवेश रोक दिया। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि हमले में दो लोग मारे गए और 15 घायल हुए। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरीडेंको ने कहा, ”पहली बार दुश्मन के हमले में सरकारी इमारत को नुकसान पहुंचा है। हम इमारतों का जीर्णोद्धार करेंगे, लेकिन जो जानें चली गईं, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता।”

कीव के मेयर विटालि क्लिट्स्को के मुताबिक, रूसी ड्रोन का मलबा स्वियातोशिन्स्की में नौ मंजिला आ‍वासीय इमारत और डार्नित्स्की में चार मंजिला आवासीय इमारत पर गिरा। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब यूरोपीय नेताओं ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने का दबाव बढ़ा दिया है। इससे पहले, यूक्रेन के 26 सहयोगी देशों ने युद्ध समाप्त होने के बाद वहां ‘आश्वासन बल’ के रूप में सेना तैनात करने का वादा किया था।

भाजपा सांसदों की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को संसद परिसर में शुरू हुई, भाजपा की कार्यशाला में आम सांसद बनकर सबसे पीछे बैठे प्रधानमंत्री…

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भाजपा सांसदों की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को संसद परिसर में शुरू हुई, भाजपा की कार्यशाला में आम सांसद बनकर सबसे पीछे बैठे प्रधानमंत्री…

उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले इस कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें पीएम मोदी सहित भाजपा के सभी सांसद शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी का अनोखा अंदाज एक बार फिर देखने को मिला। वह बैठक में एक साधारण सांसद की तरह सबसे पीछे बैठे नजर आए। अब उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

साधारण सांसद की तरह दिखे पीएम मोदी रविवार सुबह शुरू हुई इस कार्यशाला में भाजपा सांसदों ने पीएम मोदी को जीएसटी सुधारों के लिए बधाई दी।

इसके बाद सभी सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी जानकारी दी गई। इस दौरान पीएम मोदी सबसे पीछे की पंक्ति में एक आम सांसद की तरह बैठे दिखे। गोरखपुर सांसद रवि किशन ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की और लिखा कि सांसदों की कार्यशाला में आखिरी पंक्ति में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। यही है भाजपा की ताकत। यहां हर कोई कार्यकर्ता है।

इससे पहले, जीएसटी में ऐतिहासिक सुधारों के लिए भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन और सम्मान किया।

इस मौके पर जगदंबिका पाल ने जीएसटी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने जीएसटी को लेकर एक बड़ा फैसला लिया, जो अंतरराष्ट्रीय टैरिफ के दबाव का विकल्प है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले विपक्ष जीएसटी को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहता था, और अब वे इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। पूरा देश उनकी सच्चाई जानता है।

दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य’ बता दें कि इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य विधायी कौशल, शासन रणनीतियों और राजनीतिक संचार पर ध्यान देना है। नेताओं ने केंद्र सरकार के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने और विपक्ष का मुकाबला करने के तरीकों पर चर्चा की। रविवार को सांसद पूरे दिन की कार्यशाला में शामिल हुए। सोमवार को भी तीन घंटे का एक और सत्र निर्धारित है।

9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा।

पीएम मोदी उपराष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पहले, सोमवार को भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन भी कर रहे हैं। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और विपक्ष के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि, संख्या बल के आधार पर राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने दिया इस्तीफा…

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जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने दिया इस्तीफा…

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने रविवार (07 सितंबर,2025) को इस्तीफा दे दिया, जब उन्होंने जुलाई में देश में हुए संसदीय चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक हार का सामना किया. इशिबा के इस कदम के पीछे उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर से लगातार इस्तीफे की मांगें थीं, जिसमें उन्हें हार की जिम्मेदारी स्वीकार कर पद छोड़ने के लिए कहा जा रहा था.

इशिबा ने विरोधियों की मांग को किया अनदेखा अक्टूबर में प्रधानमंत्री बने शिगेरु इशिबा ने एक महीने से अधिक समय तक अपनी पार्टी के दक्षिणपंथी विरोधियों की इस्तीफे की मांग को अनदेखा किया था. उन्होंने कहा था कि उनके पद से हटने से देश में राजनीतिक शून्य पैदा हो जाएगा. उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और जापानी अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव के साथ-साथ बढ़ती कीमतों, चावल नीति सुधारों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव का मुद्दा भी उठाया था.

उनके पद छोड़ने का फैसला एलडीपी द्वारा समय से पहले नेतृत्व चुनाव कराने के फैसले से एक दिन पहले आया है, जो अगर मंजूर हो जाता तो इशिबा के खिलाफ एक तरह का अविश्वास प्रस्ताव होता.

इशिबा ने रिप्लेसमेंट के लिए वोट प्रक्रिया शुरू करने की बात कही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिगेरु इशिबा ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व के लिए अपने उत्तराधिकारी के चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को होने वाला निर्णय अब जरूरी नहीं रहेगा.

जुलाई में संसदीय चुनाव में सरकार को बड़ा झटका जुलाई में हुए अहम संसदीय चुनाव में इशिबा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन को 248 सीटों वाले उच्च सदन में बहुमत प्राप्त नहीं हो सका, जिससे उनकी सरकार की स्थिरता पर गंभीर असर पड़ा.

पूर्व पीएम सुगा और कृषि मंत्री कोइजुमी के साथ बैठक एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इशिबा ने सोमवार के पार्टी वोटिंग से पहले कृषि मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के साथ बैठक की. माना जा रहा है कि इन नेताओं ने इस्तीफा देने की सलाह दी थी.

“समाज सेवा से लेकर राष्ट्रनिर्माण तक, जानें RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा”

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“समाज सेवा से लेकर राष्ट्रनिर्माण तक, जानें RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक रविवार (07 सितंबर, 2025) को जोधपुर में सम्पन्न हुई. अंतिम दिन आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने बैठक में हुए विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि देशभर से आए विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं, राष्ट्रीय अध्यक्षों और प्रमुख पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय समस्याओं, अनुभवों और कार्य योजनाओं को साझा किया.

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का संकल्प सुनील आम्बेकर ने कहा कि बैठक में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर विशेष चर्चा हुई. देशभर में महिलाओं के लिए आयोजित अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत 887 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. क्रीड़ा भारती ने महिला खिलाड़ियों पर एक व्यापक अध्ययन कर उनकी समस्याओं के बारे में बताया.

अध्ययन से यह सामने आया कि आज अनेक महिलाएं योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं. आम्बेकर ने कहा, ‘महिलाओं की सहभागिता निरंतर बढ़ रही है और हम चाहते हैं कि यह सहभागिता और व्यापक हो. संघ प्रेरित सभी संगठन इस दिशा में सतत प्रयासरत हैं.’

शिक्षा नीति पर व्यापक विचार बैठक में शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर मंथन किया. विद्या भारती, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, शिक्षा संस्कृति उत्थान, भारतीय शिक्षण मंडल और विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों ने अपनी भूमिका साझा करते हुए बताया कि वे केंद्र और राज्य स्तर पर शिक्षा को भारतीय दृष्टि से आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं.

एनसीईआरटी सहित शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं में पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन में विशेषज्ञों के साथ मिलकर सुझाव दिए गए. भाषा, इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल कर पाठ्यक्रमों को समृद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है.

सामाजिक चुनौतियों पर गंभीर चिंतन आम्बेकर ने कहा, ‘देश के सामान्य लोगों को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध हो, इसके लिए संघ का निरंतर प्रयास है. विभिन्न संगठनों ने मिलकर समाज में जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया है.’

बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पन्न हो रही समस्याओं पर भी चर्चा हुई. देशभर में बढ़ रहे लव जेहाद के मामलों को लेकर उन्होंने कहा कि इसको लेकर जमीनी तौर पर काम किया जा रहा है. लोगों में इसके प्रति जागरूकता के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं. इसके साथ ही लोगों को भी जागरूक होना जरूरी है कि किस तरह से जिहाद का जहर लोगों में फैलाया जा रहा है.

धर्म परिवर्तन को लेकर क्या बोले आम्बेकर? धर्म परिवर्तन को लेकर आम्बेकर ने कहा कि इसके लिए भी जागरूकता की जरूरत है और जागरूक समाज को होना चाहिए और समाज को जागृत करने के लिए जमीन स्तर पर हम लोग काम कर रहे हैं. पंजाब में बढ़ते मतांतरण और नशे के दुष्परिणाम पर चिंता व्यक्त की गई. युवाओं में बढ़ती ड्रग्स की लत और उसके प्रभाव पर सभी संगठनों ने चिंता जताई.

बंगाल में अवैध घुसपैठ और लॉ एंड ऑर्डर की बिगड़ती स्थिति को लेकर भी गहरी चिंता प्रकट की गई. वहां रहने वाले अवैध नागरिकों के कारण समाज में उत्पन्न समस्याओं का समाधान आवश्यक बताया गया.

मणिपुर हिंसा को लेकर आम्बेकर का बयान पूर्वोत्तर क्षेत्र में जातीय हिंसा को कम करने के प्रयास साझा किए गए. विशेष रूप से मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच उत्पन्न विवाद के बाद भारत सरकार की ओर से समझौते और मार्ग खोलने को शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया. आम्बेकर ने कहा, ‘हम सब मिलकर प्रयास कर रहे हैं कि विभिन्न जाति और जनजातियों में प्रेम और सौहार्द बना रहे. नफरत और हिंसा का स्थान सहयोग और विश्वास ले.’

आपदा राहत कार्यों में योगदान हाल ही में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी की. सेवा भारती समेत कई संगठनों ने जरूरतमंदों तक राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास के उपाय पहुंचाए. आम्बेकर ने कहा, ‘जहां-जहां आवश्यकता है, वहां स्वयंसेवक और संगठन के कार्यकर्ता सेवा के लिए तत्पर हैं. संकट की घड़ी में मानवता की सेवा ही सर्वोच्च कर्तव्य है.’

वनवासी क्षेत्रों में सेवा और चुनौतियां वनवासी कल्याण आश्रम समेत विभिन्न संगठनों ने नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास की दिशा में कार्यरत रहने की जानकारी साझा की. हालांकि हिंसा में कमी आई है, फिर भी वहां की समस्याएं अभी पूरी तरह हल नहीं हुई हैं. जनजातीय समुदायों के लिए छात्रावास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाओं पर कार्य हो रहा है. संगठन नक्सली प्रभावों से जनजातीय युवाओं को बचाने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं.

शताब्दी वर्ष के आयोजन और पंच परिवर्तन संकल्प बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर योजनाओं पर भी चर्चा की गई. पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबंधन, नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं. आम्बेकर ने कहा, ‘यह आयोजन केवल शताब्दी वर्ष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में भी समाज की सेवा और संगठन की सक्रियता निरंतर जारी रहेगी.’

उन्होंने कहा, ‘आगामी कार्यकारी मंडल की बैठक 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक जबलपुर में आयोजित होगी. वहीं, 2 अक्टूबर को नागपुर में पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन शताब्दी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होगा.’

समाज में सेवा और राष्ट्रभावना ही उद्देश्य जोधपुर में सम्पन्न यह समन्वय बैठक संघ से जुड़े विभिन्न संगठनों की सामूहिक शक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रही. महिलाओं की सहभागिता से लेकर शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, सेवा कार्य, आपदा राहत, जनजातीय विकास और शांति स्थापित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर एक नई दिशा तय की गई. सभी संगठनों ने मिलकर समाज में सहयोग, सेवा और राष्ट्रभावना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया.

“‘देश की राजनीति में परिवर्तनकारी मील का पत्थर’, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की वर्षगांठ पर बोले जयराम रमेश”

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“‘देश की राजनीति में परिवर्तनकारी मील का पत्थर’, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की वर्षगांठ पर बोले जयराम रमेश”

कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा की तीसरी वर्षगांठ पर रविवार (7 सितंबर, 2025) को कहा कि यह देश की राजनीति में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है और इसकी गूंज आज भी है. कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा तीन साल पहले आज ही के दिन कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद शिला स्मारक से शुरू हुई थी.

रमेश ने कहा, ‘यह यात्रा तीन ज्वलंत और चिंताजनक सार्वजनिक मुद्दों- बढ़ती आर्थिक असमानता, गहराता सामाजिक ध्रुवीकरण और बढ़ते राजनीतिक अधिनायकवाद- को उजागर करने के लिए की गई थी.’

12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरी थी भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘यह कन्याकुमारी से कश्मीर तक की 4,000 किलोमीटर की पदयात्रा थी और राहुल गांधी और 200 से अधिक भारत यात्रियों ने यह यात्रा की थी. यह यात्रा 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरी और 145 दिनों से अधिक समय तक चली. यह यात्रा हमारे देश की राजनीति में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर थी. इसकी गूंज और प्रतिध्वनि आज भी जारी है.’

रमेश ने कहा, ‘यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 12 जनसभाओं, 100 से ज्यादा नुक्कड़ सभाओं और 13 प्रेस कॉन्फ्रेंसों को संबोधित किया. उन्होंने पैदल चलते हुए 275 से ज्यादा संवाद किए थे. अपनी 4,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा के साथ राहुल गांधी अपने समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों का भी ध्यान खींचने में कामयाब रहे.’

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में कौन-कौन हुए थे शामिल?

इस यात्रा में समाज के हर वर्ग ने हिस्सा लिया, जिसमें कमल हासन, पूजा भट्ट, रिया सेन, स्वरा भास्कर, रश्मि देसाई, आकांक्षा पुरी और अमोल पालेकर जैसी फिल्मी और टीवी जगत से जुड़ी हस्तियां भी शामिल थीं. इसके अलावा, पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर और पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल. रामदास सहित लेखक और सैन्य दिग्गज और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम जैसे प्रख्यात लोग भी यात्रा में शामिल हुए.

वहीं, राजनीतिक पक्ष से नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती, शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे, प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले जैसे विपक्षी नेता भी यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर गांधी के साथ जुड़े.

प्रदेश के निगम-मंडल और आयोग में 50 से अधिक पदों पर नियुक्ति…

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प्रदेश के निगम-मंडल और आयोग में 50 से अधिक पदों पर नियुक्ति…

करीब 50 से अधिक पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां बाकी हैं। अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद उपाध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्तियां करने का आश्वासन भाजपा ने दावेदार कार्यकर्ताओं को दिया था

प्रदेश के निगम-मंडल और आयोग में अभी तक बहुत से पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां बाकी हैं। इन पदों पर नियुक्ति का इंतजार भाजपा के दावेदार कार्यकर्ता पिछले एक साल से कर रहे हैं। भाजपा सरकार ने अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद बाकी पदों पर अभी तक नियुक्ति नहीं की है।
बता दें कि करीब 50 से अधिक पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां बाकी हैं। अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद उपाध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्तियां करने का आश्वासन भाजपा ने दावेदार कार्यकर्ताओं को दिया था। अध्यक्षों की नियुक्ति को तीन माह से अधिक हो गए हैं। अध्यक्षों ने कार्यभार संभालकर काम भी शुरू कर दिया है।
इस माह के आखिरी सप्ताह में सूची संभावित
बताया जाता है कि निगम-मंडल और आयोग में बचे पदों पर राजनीतिक नियुक्ति की तीसरी सूची इस माह के आखिरी सप्ताह में जारी हो सकती है। क्योंकि नाराज कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने की कवायद चल रही है। नाराज कार्यकर्ता भी अपने मंत्री-विधायकों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के पास आए दिन गुहार लगा रहे हैं। इस कारण दावेदारों की संख्या अधिक होने पर सूची फाइनल करने में संगठन के नेताओं को दिक्कतें भी हो रही हैं।

नई कार्यकारिणी में भी नहीं मिली जगह

बता दें कि पिछले माह भाजपा संगठन द्वारा घोषित नई कार्यकारिणी में जगह मिलने की उम्मीद कई जुझारू सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी, लेकिन नई कार्यकारिणी में कई ऐसे कद्दावर नेताओं को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिन लोगों को बड़े पद मिलने की उम्मीद थी, उन्हें भी निराशा हाथ लगी। अब वे भाजपा कार्यालय में गाहे-बगाहे जाकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। साथ ही पता लगा रहे है कि आखिर नई कार्यकारिणी में उसे स्थान क्यों नहीं मिला।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बड़ी खबर 4 पुलिस कांस्टेबल सस्पेंड…

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बड़ी खबर 4 पुलिस कांस्टेबल सस्पेंड…

महासमुंद जिले के एसपी ने कड़ा एक्शन लेते हुए पटेवा थाना के 4 आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया है. आइए जानते हैं पूरा मामला आखिर क्या है?

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बड़ी खबर है. यहां एसपी आशुतोष सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 पुलिस कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है. पूरा मामला गांजा तस्करी से जुड़ा हुआ है.

बताया जा रहा है कि गांजा तस्करी को पुलिस ने पकड़ा था. लेकिन पैसे लेकर आरोपी को छोड़ दिया था. इसका खुलासा तब हुआ जब आरोपी भीखम चंद्रवंशी को 500-500 के 15 नकली नोट के साथ कवर्धा जिले की पुलिस ने गिरफ्तार किया. जब उससे पूछताछ की गई तो उसने सारे राज उगल दिए. मामले का खुलासा होते ही हड़कंप मच गया.

आरोपी भीखम चंद्रवंशी उड़ीसा से गांजा और नकली नोट लेकर महासमुंद जिले के रास्ते से अवैध कारोबार कर रहा था. इसे पुलिस की शरण मिली हुई थी. हालांकि इसे कवर्धा पुलिस ने गिरफ्तार किया तो सारा राज खुल गया. पटेवा थाने के 4 आरक्षक भी लपेटे में आए. जांच के बाद एसपी ने कड़ा एक्शन लेते हुए चारों आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया.

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लोगों के लिए बड़ी राहत, केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से अब इसका दोगुना लाभ…

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छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लोगों के लिए बड़ी राहत, केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से अब इसका दोगुना लाभ…

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य सरकार का प्रत्यक्ष सहयोग मिलने से अब इसका लाभ दोगुना हो गया है। ‘डबल सब्सिडी’ और ‘हाफ बिजली से मुफ्त बिजली’ के नारे के साथ यह योजना न केवल बिजली बिलों का बोझ कम कर रही है, बल्कि आम लोगों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बना रही है।
आवासीय मकानों की छतों पर सौर पैनल स्थापित कर स्वच्छ और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। पहले केंद्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही थी, लेकिन अब राज्य सरकार के सहयोग से यह राहत और बढ़ गई है। उदाहरण के तौर पर, 3 किलोवाट क्षमता का सौर पैनल लगाने की लागत लगभग 1.50 लाख रुपये आती है। डबल सब्सिडी के बाद उपभोक्ताओं को सिर्फ 30 से 40 हजार रुपये का खर्च करना होगा।

योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बैंकों से 6.5 प्रतिशत ब्याज दर पर 10 साल की अवधि के लिए ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मासिक ईएमआई मौजूदा बिजली बिल से भी कम साबित होगी। कुछ वर्षों बाद उपभोक्ता जीवनभर मुफ्त बिजली का लाभ ले सकेंगे। इतना ही नहीं, जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली को ग्रिड के माध्यम से राज्य की वितरण कंपनियों को बेचा जा सकेगा, जिससे लोगों को अतिरिक्त आय भी होगी।

यह योजना आर्थिक ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। हर घर “ग्रीन एनर्जी हब” बन रहा है और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में योगदान दे रहा है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां बिजली आपूर्ति बाधित रहती है, वहां सौर ऊर्जा के जरिए लगातार और स्वच्छ बिजली उपलब्ध होगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए इंस्टॉलेशन, तकनीकी और रखरखाव कार्यों में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

राज्य सरकार का नारा है— हाफ बिजली से मुफ्त बिजली की ओर छत्तीसगढ़। इसका मतलब है कि जितना पैसा पहले लोग बिजली बिल में खर्च करते थे, अब उसी राशि से सौर पैनल लगाकर जीवनभर मुफ्त बिजली पा सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक नागरिक pmsuryaghar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। निरीक्षण और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे उपभोक्ता के खाते में जमा की जाएगी।

डबल सब्सिडी, किफायती ऋण, अतिरिक्त आय और पर्यावरण संरक्षण जैसे लाभों के साथ यह योजना छत्तीसगढ़ को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। सरकार का मानना है कि जनभागीदारी और जागरूकता से “हर घर सौर – हर घर रोशन” का सपना जल्द ही हकीकत बन जाएगा।

CG: शासकीय मेडिकल कालेज में 12 करोड़ 5 लाख 92 हजार की लागत के सीटी स्कैन मशीन का किया लोकार्पण…

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शासकीय मेडिकल कालेज में 12 करोड़ 5 लाख 92 हजार की लागत के सीटी स्कैन मशीन का किया लोकार्पण…

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव परिसर में 12 करोड़ 5 लाख 92 हजार 500 रूपए की लागत के सीटी स्कैन मशीन का लोकार्पण किया।

उल्लेखनीय है कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव परिसर में सीटी स्कैन मशीन लगने से जनसामान्य के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होगी।

इस मशीन से मरीजों को त्वरित एवं सटीक जांच सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए मॉडल का अवलोकन किया। जिसमें तुरंत ओपीडी के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही सीटी स्कैन मशीन, एक्स-रे मशीन, सोनोग्राफी मशीन, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं अन्य विभाग द्वारा रूचिकर मॉडल के माध्यम से नागरिकों को जानकारी प्रदान की गई।