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“Teacher’s Day पर शिक्षक को भेजें ये मैसेज, स्पेशल अंदाज में करें टीचर्स डे विश”

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“Teacher’s Day पर शिक्षक को भेजें ये मैसेज, स्पेशल अंदाज में करें टीचर्स डे विश”

टीचर्स डे हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं होते, बल्कि हमारे जीवन के मार्गदर्शक भी होते हैं. टीचर्स के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए शिक्षक दिवस एक सुनहरा अवसर है.इस मौके पर आप अपने टीचर्स को खास मैसेज भेजकर स्पेशल फील करवा सकते हैं.

नहीं हैं शब्द कैसे करूं धन्यवाद, बस चाहिए हर पल आप सबका आशीर्वाद, हूं जहां आज मैं उसमें है बड़ा योगदान, आप सबका जिन्होंने दिया मुझे इतना ज्ञान शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

-गुरु तेरे उपकार का कैसे चुकाऊं मैं मोल लाख कीमती धन भला गुरु हैं मेरे अनमोल !

Happy Teachers Day 2025 – आपने हमें सिर्फ पढ़ाना नहीं सिखाया, बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना करना भी सिखाया, मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद गुरु!

– जिसे देता है हर व्यक्ति सम्मान जो करता है वीरों का निर्माण जो बनाता है इंसान को इंसान ऐसे गुरु को हम करते हैं प्रणाम

Happy Teacher’s Day 2025 – जो बनाएं हमें इंसान, कराए सही-गलत की पहचान देश के उन निर्माताओं को, हम करते हैं शत-शत प्रणाम

Happy Teacher’s Day! – जीने की कला सिखाते शिक्षक ज्ञान की कीमत बताते शिक्षक पुस्तकों के होने से कुछ नहीं होता अगर मेहनत से नहीं पढ़ाते शिक्षक

Happy Teacher’s Day 2025 – गुरु का स्थान सबसे ऊंचा, गुरु बिन कोई ना दूजा गुरु करें सबकी नाव पार गुरु की महिमा सबसे अपार शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं!

हिमाचल के भुंतर में डरावना फ्लैश फ्लड…4 दिन से मलबे में दफ्न 8 लोग, कुल्लू शहर के आसपास 16 घंटे से ब्लैक ऑउट

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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू शहर में कुदरत ने ऐसा कहर ढाया है कि पांच दिन में दो लोगों की मौत, 8 लोग मलबे में दफ्न हैं. बीते 4 दिन से जहां दो लोग इनर अखाड़ा बाजार के घर के मलबे में दफ्न है. वहीं, 48 घंटे से छह लोगों की तलाश अखाड़ा बाजार की एक अन्य लोकेशन पर चल रही है. उधऱ, गुरुवार को जिले के भुंतर में भीषण फ्लेश फ्लैड देखने को मिला और पिपलागे नाले में पेड़, पत्थर और मलबा बहते हुए नजर आया.
साथ ही कुल्लू शहर में आसपास रात से ही ब्लेक आउट है. राहत की बात है कि आज मौसम कुछ हद तक खुला है और धूप खिली है. हालांकि, हल्के बादल भी मौजूद हैं. उधर, सीएम सुक्खू भी आज कुल्लू और मनाली के दौरे पर पहुंच रहे हैं और हालात का जायजा लेंगे. बता दें कि बिजली महादेव की पहाड़ियों से भी गुरुवार को लैंडस्लाइड हुआ और नाले में पत्थर गिरते नजर आए.
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला में 2 और 4 सितंबर को इन अखाड़ा बाजार में दो लोकेशन पर पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ. इसमें 2 सितंबर को एक घर में कश्मीर मजदूर के अलावा, एनडीआरएफ का जवान दबे हुए हैं. वहीं, 4 सितंबर को के कारण मलबे में दबे छह लोगों के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन 32 घंटे से चल रहा है. घटनास्थल पर पहाड़ी से बार-बार मलबा आने की वजह से गुरुवार शाम को सर्च ऑपरेशन रोका गया था औऱ अब सुबह 6:00 बजे शुरू हुआ है.

दो घरों पर हुए भूस्खलन में 1 युवक की मौत, तीन लोग घायल और छह लोग मलबे में दफ्न है. इसमें गुरुवार को महिला के शरीर सिर का कुछ हिस्सा बरामद हुआ है. लेकिन जम्मू एवं कश्मीर के पांच लोगों का अब तक कोई भी सुराग नहीं मिला है.एसपी कुल्लू डॉक्टर कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने कहा कि इनर अखाड़ा बाजार में गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे के आसपास भूस्खलन हुआ था और अब भी 6 लोगों के दबे होने की आशंका है. सर्च ऑपरेशन में एनडीआरएफ, होमगार्ड, अग्निशमन विभाग आईटीबीपी और पुलिस की टीम लगी हुई है. लोक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की मशीनरी भी इस्तेमाल की जा रही है. सर्च ऑपरेशन में शरीर का कुछ हिस्सा बरामद हुआ है.

एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडर संतोष ने कहा कि लगातार सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है औऱ बीच बीच में परेशानी हुई है. कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि लैंडस्लाइड का कारण सीरवेज और गलियां अवरूद्ध होने से हुआ है. काफी सेफ जोना इनर अखाड़ा बाजार माना जाता है. लेकिन इस बार नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि चार लोग जख्मी हुए हैं और एक को रेफर किया गया है. उन्होंने बताया कि लापता लोगों में पांच कश्मीरी हैं.

कुल्लू के भुंतर में फ्लैश फ्लड
गुरुवार को कुल्लू के भुंतर के पिपलागे नाले में फ्लैश फ्लड देखने को मिला. यहां पर पत्थऱ, मलबा औऱ पेड़ बहते हुए नजर आए. कुछ लोग मौके पर मौजूद थे जो कि जान बचाकर भागे. इसी तरह कुल्लू के गांधीनगर में घर के साथ लैंडस्लाइड होने से गाड़ियां मलबे में दब गई और खासा नुकसान हुआ. बजौरा के 33 केबी सबस्टेशन की बिजली लाइन क्षतिग्रस्तहोने से कुल्लू और आसपात में 12 घंटे से बत्ती गुल है. जो कि शुक्रवार दोपहर तक बहाल होगी.

उधर चीन ने बीजिंग में किया शक्ति प्रदर्शन, इधर भारत ने दिखाया दम, दिल्‍ली में जुटे 53 देश, क्‍या है प्‍लानिंग

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चीन ने कुछ द‍िनों पहले ही मिलिट्री परेड का आयोजन किया था. इस शक्ति प्रदर्शन में दुनिया के कई देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों ने शिरकत की थी. एक्‍सपर्ट की नजर में इसका सबसे बड़ा मकसद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों को संदेश देना था कि चीन अब झुकने वाला नहीं है. वहीं, फाइटर जेट से लेकर अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस मिसाइल को दुनिया के सामने पेश कर राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने यह संदेश भी दे दिया कि चीन अब डिफेंस तकनीक के क्षेत्र में भी पीछे नहीं है. इससे अमेरिका समेत तमाम वेस्‍टर्न पावर में खलबली मची हुई है. दूसरी तरफ, भारत की राजधानी दिल्‍ली में 53 देशों के 67 प्रतिनिधियों का महाजुटान हुआ है. इस महाकार्यक्रम में कई मसलों पर विचार-विमर्श हुआ. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा से जुड़ी अपने तरह की यह पहली महाबैठक थी.
इंडियन आर्मी ने बुधवार को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में विदेशों से भारत में तैनात रक्षा अताशे के लिए वार्षिक ब्रीफिंग आयोजित की. इस मौके पर समकालीन वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों तथा उन पर भारत के दृष्टिकोण को साझा किया गया. सेना ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि इस कार्यक्रम में 53 देशों से आए 67 रक्षा अताशे शामिल हुए. इस दौरान भारत की सुरक्षा नीतियों, रणनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों के प्रति दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा हुई.

इंडियन आर्मी चीफ भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में भारत के सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी हिस्सा लिया और विदेशी अताशे के साथ बातचीत की. उन्होंने उभरते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्यों, भारत की रणनीतिक सोच और भारतीय सेना की प्राथमिकताओं पर अपने विचार साझा किए. सेना ने बताया कि इन चर्चाओं से रक्षा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक शांति व स्थिरता की दिशा में साझा समझ विकसित होगी. भारतीय सेना ने ब्रीफिंग के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में हो रहे प्रयासों की जानकारी भी दी. अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है बल्कि मित्र देशों के साथ सहयोग के नए आयाम भी स्थापित करना है.

4 घंटे तक चली महाबैठक
सेना द्वारा साझा की गई तस्वीरों में विदेशी रक्षा अताशे और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को विभिन्न सत्रों में भाग लेते हुए देखा जा सकता है. कार्यक्रम ने भागीदार देशों के प्रतिनिधियों को भारत की सैन्य दृष्टि और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को बेहतर ढंग से समझने का अवसर दिया. भारतीय सेना के मुताबिक, इस तरह के संवाद से आपसी विश्वास और सहयोग की भावना को बल मिलता है. साथ ही यह अवसर वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाली सामूहिक पहल को मजबूत करता है. करीब चार घंटे चले इस वार्षिक सत्र में रक्षा अताशे ने भारतीय सैन्य नेतृत्व के साथ कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और भविष्य में रक्षा साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई.

बंगाल में मचा दहशत, कागज लेकर सरकारी ऑफिस भाग रहे हैं लाखों लोग, SIR-NRC को लेकर मचा हड़कंप

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पश्चिम बंगाल में लोगों के बीच एक अलग प्रकार का हड़कंप मचा हुआ है. लोग राज्य के मूल निवासी के पक्के कागज के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं. हाल में बिहार में चुनाव आयोग के एसआईआर (विशेष गहन संशोधन) को देखते हुए पड़ोसी राज्य में भी दहशत का माहौल है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के कई जिलों में लोग एसआईआर और एनआरसी को लेकर लोगों के बीच भय का माहौल है.
दरअसल, मुर्शिदाबाद जिले में SIR (विशेष गहन संशोधन) और NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की आने की आशंका के बीच लोग डरे हुए हैं. जनता अपनी कागजात को मजबूत करने में जुटी हुई है. लोगों ने अपना पीड़ा मीडिया को बताया है. बहरमपुर नगरपालिका ऑफिस के बाहर अपने 11 साल के बेटे आसिफ के साथ खड़ी मॉयना खातून ने अपना कष्ट सुनाया है. उन्होंने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र के पक्के कागज के लिए लंबी कतार में खड़ी हैं.

बंगाल में अफवाह फैलाया जा रहा है कि अगर आपके पास कागजात है, मगर इसका डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ तो दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. मॉयना खातून के पड़ोसियों ने बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड भी “अपडेट” कराने होंगे. हालांकि, अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही वह घर लौटीं.
अल्पसंख्यकों में समाया डर

पिछले दो हफ्तों से मुर्शिदाबाद और आसपास के गांवों में लोग सुबह तड़के से देर रात तक मैनुअल जन्म प्रमाणपत्रों को डिजिटल कराने के लिए जुट रहे हैं. यह दहशत 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार जैसी मतदाता सूची संशोधन की आशंका और NRC से नागरिकता छिनने के डर से उपजी है. बिहार में लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसका डर अब बंगाल के अल्पसंख्यक समुदायों में फैल रहा है.
बंग्लादेशी घोषित होने की डर
सोशल मीडिया और अफवाहों ने लोगों के बीच डर को और बढ़ाया है. प्रवासी मजदूरों को ‘बांग्लादेशी‘ बताकर निकाले जाने की खबरें और दस्तावेजों के बिना बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता ने लोगों को परेशान कर रखा है. आंकड़े बताते हैं कि मध्य अगस्त तक बहरमपुर में रोज 50-60 डिजिटल प्रमाणपत्र जारी होते थे, लेकिन अब मांग 10-20 गुना बढ़कर 2 सितंबर को 1,000 तक पहुंच गई. नगरपालिका अध्यक्ष नरु गोपाल मुखर्जी ने बताया कि भीड़ को संभालने के लिए 20 अतिरिक्त कर्मचारी और विशेष कैंप लगाए गए हैं, फिर भी भीड़ कम नहीं हो रही. लगभग 98% आवेदक अल्पसंख्यक समुदाय से और 99% ग्रामीण क्षेत्रों से हैं.
नाम में गड़बड़ी से लोग परेशान
दुर्लवपुर के साहबुद्दीन बिस्वास सुबह 3:30 बजे घर से निकले और 5:30 बजे काउंटर पर पहुंचे. वे अपनी छोटी बेटी तुहीना के मैनुअल प्रमाणपत्र को लेकर चिंतित हैं. बसंतपुर के शिक्षक सफीकुल इस्लाम ने कहा, ‘ड्राइविंग लाइसेंस भी अब डिजिटल हैं, इसलिए मैंने बच्चों के प्रमाणपत्र अपडेट कराए.’ दादपुर की ज्योत्स्ना बीबी को उपनामों में अंतर की चिंता है, क्योंकि उनके बच्चों के प्रमाणपत्र में पिता का उपनाम “अली” है, जबकि उनके दस्तावेजों में “शेख”.

भीड़ बढ़ने परेशान अधिकारी
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले अधिकारी पार्थसारथी रॉय ने बताया कि कर्मचारी इस भीड़ को संभालने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा, ‘हम लोगों को समझा रहे हैं कि बिना गलती वाले मैनुअल प्रमाणपत्र भी मान्य हैं, डिजिटल कराना अनिवार्य नहीं है.’ लालबाग नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रजीत धर ने बताया कि डिजिटल प्रमाणपत्रों के लिए आवेदनों में 30% की वृद्धि हुई है. जिला मजिस्ट्रेट राजर्षि मित्रा ने आश्वासन दिया कि मैनुअल प्रमाणपत्र मान्य हैं और अफवाहों से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अफवाहें आश्वासनों से तेजी से फैल रही हैं.

ईवीएम नहीं बैलेट पेपर से होगा चुनाव, कांग्रेस ने चली ऐसी चाल कि सकते में आ गया चुनाव आयोग

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पूरे देश में ईवीएम मशीन से चुनाव और ‘वोट चोरी‘ को लेकर विपक्ष का विरोध चल रहा है. सरकार से वैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग चल रही है. विपक्ष का कहना है कि ईवीएम से चुनाव में गड़बड़ी हो रही है. हालांकि, चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावों को कई मौकों पर नाकार दिया है. बकौल, आयोग ईवीएम को हैक करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. मगर, इन सबके बीच कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने वैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया है. कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को राज्य में आगामी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव ‘ईवीएम के बजाय वैलेट पेपर’ से कराने की सिफारिश करने के अपने फैसले की घोषणा की.
कर्नाटक के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके. पाटिल ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी घोषणा की. उन्होंने मीडिया से बताया, ‘ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों में ईवीएम को लेकर विश्वास और विश्वसनीयता कम हो रही है.’ पाटिल ने वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर भी सरकार के फैसले की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन को आसान बनाने के लिए आवश्यक कानूनी उपाय करने और मौजूदा नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है.

इनकम टैक्स के बाद जीएसटी रिफॉर्म… अब मीडिल क्लास बना मोदी सरकार की नीतियों का लाभार्थी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2025 में मीडिल क्लास को केंद्र में रखकर अपनी सुधार नीतियों को और मजबूत किया है. पहले फरवरी में इनकम टैक्स में कटौती और अब जीएसटी दरों में बदलाव के साथ मीडिल क्लास अब सरकार की नीतियों का मुख्य लाभार्थी बन गया है. यह कदम न केवल मीडिल क्लास की जेब में अधिक पैसा डालता है, बल्कि उपभोग को बढ़ावा देकर उनकी आकांक्षाओं को भी नई उड़ान देता है.
जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कहा- भारत का मेहनती मीडिल क्लास हमारी विकास यात्रा का केंद्र है. यह बयान जीएसटी कटौती की घोषणा के एक दिन बाद आया, जिसने मीडिल क्लास की लंबे समय से चली आ रही शिकायत को दूर कर दिया है. सोशल मीडिया पर मीडिल क्लास का एक बड़ा वर्ग यह शिकायत करता रहा है कि वह नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करता है और बड़े पैमाने पर बीजेपी को वोट देता है, लेकिन सरकार से उसे उसका हक नहीं मिलता.
सरकार का ध्यान गरीबों के लिए मुफ्त आवास, मुफ्त राशन, शौचालय, मुफ्त चिकित्सा बीमा और किसानों के लिए आर्थिक सहायता जैसे कल्याणकारी योजनाओं पर रहा है. यह भावना तब और मजबूत हुई जब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कॉरपोरेट क्षेत्र को बड़े पैमाने पर कर राहत दी गई. हालांकि, 2025 में सरकार ने मीडिल क्लास की इस शिकायत को गंभीरता से लिया और दो बड़े उपहार दिए. पहला, इनकम टैक्स में कटौती ने मीडिल क्लास की जेब में अधिक पैसा छोड़ा और दूसरा जीएसटी सुधारों ने रोजमर्रा की वस्तुओं को और सस्ता कर दिया, जिससे उपभोग को बढ़ावा मिला.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के दौरान उच्च टैक्स रेट के कारण लोगों का मासिक बजट बिगड़ जाता था. इसके विपरीत, एनडीए सरकार ने लोगों को समय पर राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इनकम टैक्स में छूट और अब जीएसटी सुधारों के माध्यम से हम करोड़ों परिवारों की जिंदगी को आसान बनाने और उनकी आकांक्षाओं को बल देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ताजा जीएसटी सुधारों के कारण मोटरसाइकिल, कार सहित टीवी, एसी और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी.

जीएसटी सुधारों ने जीवन और स्वास्थ्य बीमा को भी और सस्ता कर दिया है, क्योंकि इन पर अब शून्य जीएसटी लागू होगा. यह हर मीडिल क्लास परिवार के लिए एक बड़ी राहत है, जो आमतौर पर चिकित्सा और जीवन बीमा पॉलिसी लेता है. इसके अलावा, छोटी कारों पर जीएसटी में 11-13% की कटौती ने मीडिल क्लास के लिए दोपहिया वाहन से छोटी कार की ओर शिफ्ट होने का सपना साकार कर दिया है. रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों पर भी जीएसटी को 5 फीसदी के स्लैब या शून्य जीएसटी में लाया गया है, जिससे मीडिल क्लास का रसोई बजट कम होगा.
पीएम ने कहा कि आवश्यक खाद्य पदार्थों, खाना पकाने की जरूरी चीजों और प्रोटीन युक्त उत्पादों पर कर दरों को कम करके ये सुधार देश भर के परिवारों के लिए बेहतर सामर्थ्य और पोषण तक पहुंच को बढ़ावा देते हैं. ये कदम न केवल मीडिल क्लास की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं, बल्कि उनकी आकांक्षाओं को भी प्रोत्साहित करते हैं. जीएसटी सुधारों से न केवल आवश्यक वस्तुएं सस्ती हुई हैं, बल्कि उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी. इनकम टैक्स कटौती ने मीडिल क्लास को अधिक बचत करने का अवसर दिया है, जिसे वे अब शिक्षा, स्वास्थ्य, या अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने में निवेश कर सकते हैं.

मीडिल क्लास भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अब यह वर्ग सरकार की नीतियों का केंद्र बन गया है. ये सुधार न केवल उनकी आर्थिक चिंताओं को दूर करते हैं, बल्कि उनके विश्वास को भी मजबूत करते हैं कि सरकार उनकी जरूरतों को समझती है. यह मीडिल क्लास के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहां उनकी मेहनत और योगदान को न केवल पहचाना जा रहा है, बल्कि उसे नीतिगत समर्थन भी मिल रहा है.

दिल्ली कोर्ट में सोनिया गांधी पर शिकायत, भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम होने पर सवाल

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दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट में एक नई कानूनी हलचल शुरू हो गई है. यहां कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लेकर एक क्रिमिनल कम्प्लेंट (फौजदारी शिकायत) दर्ज कराई गई है. शिकायत में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम साल 1980 में दिल्ली की वोटर लिस्ट में दर्ज कर लिया गया था, जबकि आधिकारिक तौर पर वे 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिक बनी थीं.
यह मामला अब अदालत की दहलीज़ तक पहुँच चुका है. एसीजेएम (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) वैभव चौरेसिया ने इस शिकायत पर संज्ञान लिया है और 10 सितंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई है. शिकायत दाखिल करने वाले वकील विकास त्रिपाठी का कहना है कि यह मामला गंभीर है क्योंकि जब सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब वोटर लिस्ट में उनका नाम कैसे जुड़ गया? उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि पुलिस को या तो इस मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाए या फिर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए.
कानूनी रूप से गलत
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि नागरिकता हासिल करने से पहले किसी विदेशी नागरिक का नाम भारतीय वोटर लिस्ट में शामिल होना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है. इसमें पूरी प्रक्रिया की जांच करने की मांग की गई है.

आगे क्‍या होगा
अब निगाहें 10 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि अदालत इस शिकायत पर आगे क्या रुख अपनाती है. यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि सोनिया गांधी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक की शीर्ष नेता हैं. बीजेपी पहले भी उनकी नागर‍िकता को लेकर सवाल उठा चुकी है.

पेट को बनाना है फ्लैट, जान लीजिए तरीका, कमर हो जाएगी पतली

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भाग दौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के कारण बहुत से लोग मोटापे और पेट की चर्बी से परेशान हैं. पेट के आसपास बढ़ी हुई चर्बी इतनी आसानी से नहीं जाती. इसकी वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन बेहतर डाइट प्लान और वर्कआउट से पेट को फ्लैट किया जा सकता है. यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है किअगर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित खान-पान की आदतों को अपनाया जाए तो इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है. आइए जानते हैं वे आसान टिप्स जो पेट को फ्लैट बनाने में मदद करते हैं.

फाइबर ज्यादा खाना : पेट को फ्लैट करने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि अपने आहार में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से शामिल करें. फाइबर पानी को तेजी से अवशोषित करके पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है. इससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार स्नैकिंग या ज्यादा खाने से रोकता है. एक अध्ययन में भी बताया गया है कि यदि रोज़ाना के आहार में 10 ग्राम फाइबर जोड़ा जाए तो पांच साल में बेली फैट में 3.7 प्रतिशत की कमी हो सकती है. इसलिए फाइबर से भरपूर रेशेदार हरी सब्जियां, ताजे फल, एवोकाडो, दालें, अलसी के बीज, ब्लैकबेरी आदि का सेवन करना चाहिए.

प्रोटीन युक्त आहार : प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और शरीर में कैलोरी जमा नहीं होती. इससे बेली फैट बनने की संभावना कम हो जाती है. प्रोटीन का अधिक सेवन करने से भूख कम करने वाला हार्मोन रिलीज़ होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. इसलिए लीन मीट, मछली, अंडे, बीन्स और डेयरी उत्पादों को रोज़ाना के आहार में शामिल करना चाहिए.

पानी ज्यादा पीना : शरीर को जितना संभव हो उतना हाइड्रेटेड रखना चाहिए. ज्यादा पानी पीने से पाचन क्रिया में सुधार होता है. साथ ही, शरीर में जमा हुए टॉक्सिन और अपशिष्ट बाहर निकल जाते हैं, जिससे पेट फूलना और गैस की समस्या कम होती है.
इन्हें बिल्कुल नहीं खाना चाहिए : शुगर और शुगरयुक्त ड्रिंक्स का सेवन जितना हो सके कम करना चाहिए. खासतौर पर शुगर की अधिक मात्रा शरीर के लिए बहुत हानिकारक होती है. इससे अंगों के आसपास चर्बी जमा हो जाती है और यह लीवर में फैट उत्पादन को भी बढ़ाती है. प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें वजन बढ़ाने और पेट की चर्बी जमा करने वाले शुगर, अनहेल्दी फैट्स और सोडियम अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसी तरह अल्कोहल का सेवन भी नियंत्रित करना चाहिए. बीयर जैसी चीज़ों का अधिक सेवन करने से बेली फैट बढ़ता है.

एक्सरसाइज़ टिप्स : रोज़ाना खाने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक टहलना, सुबह उठते ही एक्टिव वॉकिंग या जॉगिंग करना, साइक्लिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज़ करनी चाहिए. ये शरीर की चर्बी को कम करती हैं. हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट तक ये एक्सरसाइज़ करने से बेहतरीन परिणाम मिलते हैं. इसके साथ ही मांसपेशियों को मज़बूत बनाने वाली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करनी चाहिए. इससे आराम के समय भी कैलोरी बर्न होती रहती है.

अगर पेट ज्यादा बढ़ गया हो तो डॉक्टर की सलाह से बेली फैट कम करने के लिए हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग्स करनी चाहिए. भूख बढ़ाने और चर्बी जमा करने वाले तनाव को नियंत्रित करने के लिए मेडिटेशन, योग और डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीकों का अभ्यास करना चाहिए. पूरी नींद लेना भी ज़रूरी है. यह भूख को नियंत्रित करने वाले घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन के स्राव को संतुलित करता है और कॉर्टिसॉल लेवल को कम करता है.

GST का इतिहास और विश्वभर में इसका विस्तार भारत में GST लागू होने से पहले, दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से ही मौजूद थी। जानें सबकुछ…

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GST का इतिहास और विश्वभर में इसका विस्तार भारत में GST लागू होने से पहले, दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से ही मौजूद थी। जानें सबकुछ…

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुड्स और सर्विसेज टैक्स (GST) के स्लैब में महत्वपूर्ण बदलाव का ऐलान किया है। अब 12 फीसदी और 28 फीसदी के स्लैब को समाप्त करके केवल 5 फीसदी और 18 फीसदी कर दिया गया है।

यह नया बदलाव 22 सितंबर से लागू होगा। भारत में GST की शुरुआत 1 जुलाई 2017 से हुई थी, जिसे महंगाई कम करने, टैक्स कलेक्शन बढ़ाने, टैक्स चोरी रोकने और देश की GDP में वृद्धि लाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।

“71 साल पहले ही लागू हो चुका था GST, ऐसा करने वाला बना था पहला देश”

दुनिया का पहला देश जिसने GST लागू किया, वह था फ्रांस। फ्रांस ने 1954 में GST लागू किया था। उस समय फ्रांस में कर प्रणाली बहुत जटिल और बिखरी हुई थी, जिसमें कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अप्रत्यक्ष कर लागू थे। इससे कारोबार पर बोझ बढ़ता था और टैक्स चोरी की संभावनाएं भी अधिक थीं। इसलिए फ्रांस ने एक समेकित टैक्स प्रणाली अपनाने के लिए GST लागू किया, जिससे कर प्रणाली सरल, स्थिर और भरोसेमंद बनी।

दुनिया के अन्य देशों में GST का स्वरूप

न्यूजीलैंड: यहां GST 1986 में शुरू हुआ था। 1989 से 2010 तक इसकी दर 12.5% थी, जिसे बाद में 15% कर दिया गया। GST न्यूजीलैंड के कुल कर संग्रह का लगभग 31.4% हिस्सा बनता है।

कनाडा: जनवरी 1991 में GST लागू हुआ। संघीय GST की दर 5% है, जबकि प्रांत स्तर पर अलग-अलग 6% से 7% के बीच प्रांतीय बिक्री कर (PST) लगाया जाता है। कुछ आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं जैसे किराने का सामान, डॉक्टर की दवाएं, और निर्यात GST मुक्त हैं। वार्षिक 30,000 कनाडाई डॉलर से अधिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।

ऑस्ट्रेलिया: GST 2000 में लागू हुआ और वर्तमान दर 10% है। भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सरकारी शुल्क कर मुक्त हैं।

मालदीव: GST अक्टूबर 2011 में लागू हुआ। मानक दर 8% है। वार्षिक कर योग्य आपूर्ति 1 मिलियन MVR से अधिक होने पर पंजीकरण जरूरी है।

पापुआ न्यू गिनी: यहां की GST दर 10% है, लेकिन निर्यात और कुछ सेवाएं छूट प्राप्त हैं। वार्षिक 2,50,000 KN से अधिक कारोबार करने वालों को GST पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

CG: मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, बाढ़ पीड़ितों को ईलाज के साथ अब मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

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CG: मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, बाढ़ पीड़ितों को ईलाज के साथ अब मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री राम कुमार टोप्पो, विधायक श्री आशाराम नेताम, विधायक श्री प्रबोध मिंज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम श्री राम सेवक सिंह पैकरा, केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, सभापति जिला पंचायत धमतरी श्री टीकाराम कंवर, प्रदेश अध्यक्ष कंवर समाज श्री हरवंश सिंह मिरी, अध्यक्ष कंवर समाज रायपुर महानगर श्री मनोहर सिंह पैकरा सहित कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

बाढ़ पीड़ितों को राशन-ईलाज के साथ अब जरूरी दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू, मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश …

तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत

बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।

बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है।

अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं।

बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।

स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।