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“PMO High Level Meeting: ट्रंप के डबल टैरिफ बम को लेकर कल होगी PMO की अहम बैठक, क्या भारत करेगा पलटवार!”

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“PMO High Level Meeting: ट्रंप के डबल टैरिफ बम को लेकर कल होगी PMO की अहम बैठक, क्या भारत करेगा पलटवार!”

भारतीय निर्यातकों के सामने अमेरिकी बाजार में बढ़ते टैरिफ की चुनौती से निपटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) मंगलवार यानी 26 अगस्त को एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें इस मुद्दे पर गहन चर्चा होगी.

इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव द्वारा किए जाने की संभावना है. अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लागू टैरिफ को दोगुना कर 50% कर दिया है, जो बुधवार से प्रभावी होगा. इस कदम से भारतीय निर्यातकों पर लागत का दबाव बढ़ गया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यातकों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ सलाह लेना शुरू किया है ताकि मौजूदा 25% टैरिफ के प्रभाव को समझा जा सके. कंपनियों का कहना है कि पहले ही उनके लाभ मार्जिन में कमी आई है और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई है.”

लक्षित समर्थन पर जोर बैठक में व्यापक नीतिगत उपायों के बजाय विशिष्ट उद्योगों के लिए लक्षित समर्थन पर चर्चा होगी. निर्यातकों ने आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की मांग की थी, जिसमें सरकार समर्थित जोखिम कवर के साथ संपार्श्विक-मुक्त कार्यशील पूंजी प्रदान करती है. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र-विशिष्ट हस्तक्षेप अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं. इसके अलावा, तरलता के दबाव को कम करने के लिए क्लस्टर-आधारित कार्यशील पूंजी निधि पर भी विचार किया जा रहा है.

एसएमई पर विशेष ध्यान सरकार की रणनीति का केंद्रबिंदु लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) और निर्यात की जाने वाली इकाइयों की सुरक्षा है, जो वैश्विक झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं. 50% टैरिफ का असर कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान और विशेष रसायन जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है.

मंगलवार को होगी रणनीति को अंतिम रूप मंगलवार की बैठक में भारत की प्रतिक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की उम्मीद है. सरकार का यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए बढ़ती चुनौतियों के बीच राहत प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. इस बैठक में लिए गए निर्णय न केवल निर्यातकों को राहत देंगे, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में भी मदद करेंगे.

“जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हो रही राजनीति पर भड़के शाह, विपक्ष के ‘हाउस अरेस्ट’ के दावे पर दिया मुंहतोड़ जवाब”

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“जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर हो रही राजनीति पर भड़के शाह, विपक्ष के ‘हाउस अरेस्ट’ के दावे पर दिया मुंहतोड़ जवाब”

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (25 अगस्त) को स्पष्ट किया कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है.

उन्होंने विपक्ष के उन दावों को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि धनखड़ को “नजरबंद” किया गया है. न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “धनखड़ साहब का त्यागपत्र अपने आप में स्पष्ट है. उन्होंने अपने इस्तीफे के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों तथा सरकार के सदस्यों के अच्छे कार्यकाल के लिए उनका हार्दिक आभार भी व्यक्त किया है.”शाह ने इस बात पर जोर दिया कि धनखड़ ने संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया और उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से हुआ.

विपक्ष के “नजरबंद” दावों पर शाह का पलटवार कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा धनखड़ के “नज़रबंद” होने के दावे के बारे में पूछे जाने पर, अमित शाह ने कहा कि सच और झूठ की व्याख्या केवल विपक्ष के बयानों पर आधारित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर हंगामा करने के खिलाफ चेतावनी दी. शाह ने कहा, “ऐसा लगता है कि सच और झूठ की आपकी व्याख्या विपक्ष के बयानों पर आधारित है. हमें इस सबका बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए. धनखड़ एक संवैधानिक पद पर थे और उन्होंने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया. उन्होंने व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया. इस मुद्दे पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं करना चाहिए.”

शाह की यह टिप्पणी कई विपक्षी नेताओं द्वारा अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए जाने के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार ने धनखड़ को “खामोश” कर दिया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ-साथ उन्हें चुप कराने की भी बात हुई है.

सलवा जुडूम मामले में शाह का विपक्ष पर हमला उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कथित “वामपंथी” समर्थक सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को नामित करने के लिए इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम पर रेड्डी का फैसला ही एकमात्र कारण था कि वामपंथी उग्रवाद, जो अपनी मृत्युशय्या पर था, दो दशकों से अधिक समय तक जीवित रहा.

शाह ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और मांग की कि कांग्रेस नेता को विपक्षी गठबंधन द्वारा ऐसे उम्मीदवार को चुनने के फैसले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जो “वामपंथी विचारधारा से सहानुभूति रखता है” और जिसके फैसले ने “सशस्त्र नागरिक निगरानी समूह” को “भंग” कर दिया, जिससे 2020 से पहले नक्सलियों का सफाया नहीं हो सका.

जुलाई 2011 का फैसला, जिसे जस्टिस रेड्डी ने जस्टिस एसएस निज्जर के साथ मिलकर लिखा था, उसने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सलवा जुडूम को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए उसे भंग कर दिया था. यह फैसला तब सुनाया गया था जब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में थी.

“दिल्ली में MP कांग्रेस की रणनीति: जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क, रतलाम में आंदोलन की तैयारी”

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“दिल्ली में MP कांग्रेस की रणनीति: जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क, रतलाम में आंदोलन की तैयारी”

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आगामी चुनावों की तैयारी को और मजबूत करने के लिए दिल्ली में 24 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रदेश के सभी नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों को वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का बड़ा टास्क सौंपा गया।

साथ ही, 31 अगस्त को रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन की घोषणा की गई, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेता शामिल होंगे। इस बैठक में शामिल होने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी बिहार यात्रा को बीच में रोककर दिल्ली पहुंचे। बैठक में जिला अध्यक्षों के लिए एक महीने में पंचायत कमेटी गठन, हर तीन महीने में कामकाज का आकलन, और हर महीने एक बड़ा प्रदर्शन व प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इस रणनीति के तहत ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) जिला अध्यक्षों के कामकाज पर कड़ी नजर रखेगी।

दिल्ली में हुई हाई-लेवल बैठक 24 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में मध्य प्रदेश के नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, AICC संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राहुल गांधी ने अपनी बिहार ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को बीच में रोककर इस बैठक में हिस्सा लिया, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना था।

वोटर लिस्ट जांच का बड़ा टास्क बैठक में जिला अध्यक्षों को सबसे महत्वपूर्ण टास्क वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का दिया गया। मध्य प्रदेश में हाल ही में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों के बाद कांग्रेस ने इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया है। जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची का गहन निरीक्षण करें और किसी भी तरह की गड़बड़ी, जैसे डुप्लिकेट वोटर, मृत व्यक्तियों के नाम, या फर्जी पते, को चिह्नित करें।

रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन बैठक में 31 अगस्त को रतलाम में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई। यह आंदोलन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और सत्तारूढ़ दल पर वोटर मैनिपुलेशन के आरोपों के खिलाफ होगा। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

जिला अध्यक्षों के लिए ब्लूप्रिंट और टारगेट बैठक में जिला अध्यक्षों के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया, जिसमें निम्नलिखित निर्देश शामिल हैं: पंचायत कमेटी का गठन: सभी जिला अध्यक्षों को एक महीने के भीतर अपने जिले में पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करने का टारगेट दिया गया। यह कमेटियां स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करेंगी और जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगी।

कामकाज का आकलन: हर तीन महीने में जिला अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा होगी। AICC इस पर कड़ी नजर रखेगी और प्रदर्शन के आधार पर नेताओं को जवाबदेह बनाएगी। प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस : प्रत्येक जिले में हर महीने एक बड़ा प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्देश दिया गया। यह जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए होगा।

10 दिन की ट्रेनिंग : जिला अध्यक्षों को संगठनात्मक और वैचारिक प्रशिक्षण के लिए 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण उनकी नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने और पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में मदद करेगा।

एकजुटता का निर्देश: नेताओं को एकजुट होकर काम करने और गुटबाजी से बचने का सख्त निर्देश दिया गया। राहुल गांधी ने कहा, “पार्टी का हर कार्यकर्ता एक परिवार है। हमें एकजुट होकर जनता के लिए लड़ना है।”

AICC की नजर, संगठन में सुधार इस बैठक ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अप्रैल 2025 में अहमदाबाद में हुए AICC सत्र के बाद शुरू हुए संगठनात्मक सुधारों का यह हिस्सा है, जिसमें जिला अध्यक्षों को संगठन का आधार बनाने का निर्णय लिया गया था। AICC जिला अध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखेगी और उनकी प्रगति को नियमित रूप से आंकेगी। मध्य प्रदेश में 862 जिला इकाइयों में से 450 से अधिक में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें युवा और वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध लोग शामिल हैं।

बीजेपी का हमला बीजेपी ने इस आंदोलन को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी हार को छिपाने के लिए अनावश्यक मुद्दे उठा रही है। बीजेपी प्रवक्ता रमेश ठाकुर ने कहा, “वोटर लिस्ट में कोई अनियमितता नहीं है। यह कांग्रेस की हताशा है।” जवाब में जीतू पटवारी ने कहा, “हम जनता के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बीजेपी की सच्चाई रतलाम में सामने आएगी।”

‘लालू को बचाने के लिए मनमोहन सिंह का अध्यादेश फाड़ा था राहुल गांधी ने’, अमित शाह ने कर दिया एक्सपोज”

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‘लालू को बचाने के लिए मनमोहन सिंह का अध्यादेश फाड़ा था राहुल गांधी ने’, अमित शाह ने कर दिया एक्सपोज”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (25 अगस्त) को कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नैतिकता पर सवाल उठाए। अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी का रुख तीन लगातार चुनावी हार के बाद बदल गया है।

अमित शाह ने 2013 का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि उस वक्त राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट द्वारा लाए गए उस अध्यादेश को सार्वजनिक मंच पर फाड़ दिया था, जिसका उद्देश्य दोषी ठहराए गए नेताओं को बचाना था। यह अध्यादेश चारा घोटाले में दोषी ठहराए गए लालू प्रसाद यादव के हित में माना जा रहा था। क्या चंद्रबाबू नायडू उपराष्ट्रपति चुनाव में कर सकते खेला? सुदर्शन रेड्डी के बयान से मची हलचल, क्या है माजरा क्या राहुल गांधी ने RJD के लिए समझौता किया है?

यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गांधी ने राजद (RJD) के लिए समझौता किया है? अमित शाह ने कहा, “मुझे क्या कहने की जरूरत है? वह अपनी दो बातों को कैसे सही ठहराएंगे? मैं पहले ही पूछ चुका हूं। आप उनका इंटरव्यू ले सकते हैं और उनसे पूछ सकते हैं।” अमित शाह ने आगे कहा, ”लालू यादव को बचाने के लिए मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़ने का राहुल गांधी का क्या औचित्य था? अगर उस दिन नैतिकता थी, तो क्या आज नहीं है क्योंकि आप लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं? नैतिकता के मानदंड चुनाव की जीत या हार से जुड़े नहीं होते। क्या सिर्फ तीन चुनाव हार जाने से नैतिकता बदल जाती है? नैतिकता के मानदंड हमेशा अपनी जगह स्थिर रहते हैं, जैसे सूर्य और चंद्रमा।”

यह बयान संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के संदर्भ में आया है। इस विधेयक में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें स्वत पद से हटा दिया जाएगा।

‘राधाकृष्णन से कुछ पर्सनल नहीं’, उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर ये क्या बोल गए सुदर्शन रेड्डी, RSS पर कही बड़ी बात अमित शाह ने कहा, “आडवाणी जी, मदनलाल खुराना और कई अन्य लोगों ने इस्तीफा दे दिया था। अभी हेमंत सोरेन जी ने इस्तीफा दे दिया है… जो भी किसी मामले में आरोपी होता था, वह इस्तीफा दे देता था। बरी होने के बाद, वे फिर से राजनीति में आ जाते थे। तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया। दिल्ली के मंत्री और मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) ने इस्तीफा नहीं दिया। अगर राजनीति और सामाजिक जीवन की नैतिकता का स्तर इस तरह से गिराया जा रहा है, तो हम इससे सहमत नहीं हैं।”

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने कहा कि यह कानून सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होगा, यहां तक कि प्रधानमंत्री के पद पर भी। उन्होंने इसकी तुलना इंदिरा गांधी के 39वें संशोधन से की, जिसमें शीर्ष संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से छूट दी गई थी।

अमित शाह ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी ने खुद प्रधानमंत्री के पद को भी इस कानून के दायरे में लाया है। अगर पीएम जेल जाते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना होगा। संविधान निर्माताओं ने कभी यह कल्पना नहीं की होगी कि कोई सीएम या पीएम जेल से सरकार चलाएगा।”

विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम “संवैधानिक नैतिकता” को पुनर्स्थापित करने के लिए है। अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी नेता को जमानत मिल जाती है, तो उन्हें दोबारा पद पर बहाल किया जा सकता है।

‘अगर ऐसा न किया गया होता तो’, विपक्षी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को लेकर अमित शाह का बड़ा खुलासा संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के समर्थन में कौन-कौन है? यह पूछे जाने पर कि क्या चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार समेत एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं? अमित शाह ने कहा, “हां, सभी सहमत हैं। उन्हें आगे आकर समर्थन करने का मौका ही नहीं मिला। संसद में बहस नहीं होने दी गई। जब जेपीसी बुलाई जाएगी और संसद में बहस होगी, तो सभी दल अपने विचार रखेंगे।”

130वें संविधान संशोधन विधेयक पर अमित शाह ने कहा, “संसद कैसे चले, यह अकेले सत्ता पक्ष तय नहीं कर सकता। अगर विपक्ष किसी भी विधेयक या संविधान संशोधन पर स्वस्थ बहस का माहौल बनाने में विफल रहता है, तो देश की जनता तय करेगी कि यह व्यवस्था सही है या नहीं। जब यह तय हो गया कि यह विधेयक पारित नहीं होगा, तो यह जेपीसी के पास जाएगा। मैंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि सरकार ने फैसला कर लिया है कि यह विधेयक जेपीसी के पास जाएगा। दोनों सदनों की एक जेपीसी बनाई जाएगी जिसमें 31 सदस्य होंगे, जिनमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे।”

विपक्ष के आरोपों पर अमित शाह का पलटवार विपक्ष द्वारा उन पर लगाए जा रहे विभिन्न आरोपों पर अमित शाह ने कहा, “आज भी वे कोशिश कर रहे हैं कि अगर उन्हें कभी जेल जाना पड़ा, तो वे जेल से आसानी से सरकार बना लेंगे। जेल को ही सीएम हाउस, पीएम हाउस बना देंगे और डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से आदेश लेंगे। मेरी पार्टी और मैं इस विचार को पूरी तरह से खारिज करते हैं कि इस देश को उस व्यक्ति के बिना नहीं चलाया जा सकता जो वहां बैठा है। इससे संसद या विधानसभा में किसी के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक सदस्य जाएगा, पार्टी के अन्य सदस्य सरकार चलाएंगे, और जब उन्हें जमानत मिल जाएगी, तो वे आकर फिर से शपथ ले सकते हैं। इसमें क्या आपत्ति है?”

“देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी, राजस्थान-UP सहित कई राज्यों में स्कूल बंद, देखें लिस्ट”

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“देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी, राजस्थान-UP सहित कई राज्यों में स्कूल बंद, देखें लिस्ट”

देश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई राज्यों में नदियों का जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन की घटनाओं के बीच प्रशासन ने एहतियातन स्कूल-कॉलेज बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

जयपुर से लेकर बांदा, चमोली, देहरादून, कुल्लू और कांगड़ा तक बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवकाश की घोषणा की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है, ऐसे में प्रशासन हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।

देश के कई हिस्सों में जारी भारी बारिश और बाढ़ ने हालात को गंभीर बना दिया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के जिला प्रशासन ने स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

जयपुर में दो दिन की छुट्टी राजस्थान के जयपुर जिले में 25 और 26 अगस्त को सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। यह आदेश प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए लागू है। हालांकि, शिक्षक और स्टाफ को स्कूल आना होगा। जिला कलेक्टर ने आदेश के उल्लंघन पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

अगस्त के आखिरी सप्ताह में किस-किस दिन बंद रहेंगे बैंक? पहले ही निपटा लें जरूरी काम उत्तर प्रदेश के बांदा में स्कूल बंद बांदा जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण 25 अगस्त को कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है। यह आदेश परिषदीय, मान्यता प्राप्त और बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों पर लागू है।

उत्तराखंड के कई जिलों में अवकाश उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, देहरादून और नैनीताल जिलों में 25 अगस्त को सभी सरकारी-निजी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हिमाचल प्रदेश के स्कूल-कॉलेज भी बंद हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, बंजार और मनाली में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, आंगनवाड़ी, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज भी शामिल हैं। कांगड़ा जिले में भी आज सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज बंद रहेंगे। वहीं, चंबा जिले में पांगी उपमंडल को छोड़कर बाकी सभी जगह स्कूल बंद हैं। हमीरपुर जिले में भी स्कूल और कॉलेज छात्रों के लिए बंद रहेंगे, लेकिन मेडिकल और रिहायशी संस्थानों को इससे छूट दी गई है।

हालात पर नजर अधिकांश जिलों में हालात की समीक्षा के बाद आगे की छुट्टियों पर फैसला लिया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और बिना जरूरत बाहर निकलने से बचने की अपील की है।

“PM मोदी ने RSS से ही क्यों चुना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को? अमित शाह ने आरोपों पर दिया ये जवाब”

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“PM मोदी ने RSS से ही क्यों चुना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को? अमित शाह ने आरोपों पर दिया ये जवाब”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार (22 अगस्त) को महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए (NDA) की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया।

अमित शाह ने कहा कि यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से शीर्ष पदों पर लोग आएं। अमित शाह ने कहा, ”राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) पूर्व से हैं, प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) पश्चिम और उत्तर से आते हैं, इसलिए उप-राष्ट्रपति का उम्मीदवार दक्षिण भारत से होना स्वाभाविक है।”

NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को चुनने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को दी गई थी। ऐसे में विपक्ष का आरोप था कि आखिर पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े शख्स को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए क्यों चुना?

राधाकृष्णन के आरएसएस से जुड़े होने पर विपक्ष द्वारा उठाए सवालों के जवाब में अमित शाह ने कहा कि यह कोई नकारात्मक पहलू नहीं है।

जगदीप धनखड़ से कितने अलग हैं ‘होने वाले उपराष्ट्रपति’ सीपी राधाकृष्णन, BJP ने कैसे अपने फैसले से किया सरप्राइज अमित शाह बोले- क्या देश ने हमें इसलिए चुना है क्योंकि हम RSS से हैं?

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चयन को आरएसएस से जोड़ने पर अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का आरएसएस से संबंध है, मेरा भी आरएसएस से संबंध है। क्या देश ने हमें इसलिए चुना है क्योंकि हम आरएसएस से हैं? क्या आरएसएस से संबंध होना कोई माइनस पॉइंट है? अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी जी, मोदी जी भी आरएसएस से जुड़े हैं। ठीक ऐसे ही राधाकृष्णन का भी आरएसएस से यही संबंध है।”

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राधाकृष्णन पर खेला दांव अमित शाह ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से जोड़कर राधाकृष्णन की उम्मीदवारी पर उठ रहे सवालों को खारिज किया। उन्होंने कहा- “राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा रहा है। वे दो बार सांसद रहे हैं, तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं, झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और अब महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन बेहद स्वच्छ रहा है और वे परिपक्व राजनेता हैं।”

उपराष्ट्रपति नामांकन और चुनाव प्रक्रिया 20 अगस्त 225 को सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा सहित कई केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उप-राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन में 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल थे। उप-राष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होंगे और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्तूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं। बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक राधाकृष्णन ने 1974 में भारतीय जनसंघ (भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन) से राजनीति की शुरुआत की और इससे पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे।

”ओसाका (जापान) में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले दिन छत्तीसगढ़ पैवेलियन में उमड़ी रौनक, 22 हजार से अधिक दर्शकों ने किया अवलोकन”

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”ओसाका (जापान) में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले दिन छत्तीसगढ़ पैवेलियन में उमड़ी रौनक, 22 हजार से अधिक दर्शकों ने किया अवलोकन”

ओसाका (जापान) में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले दिन ही छत्तीसगढ़ पैवेलियन आकर्षण का केंद्र बन गया।

उद्घाटन दिवस पर 22 हजार से अधिक दर्शक छत्तीसगढ़ पैवेलियन पहुंचे।

दर्शकों ने छत्तीसगढ़ पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की विरासत, उद्योग और पर्यटन की अनूठी झलक का अनुभव किया।

”भारत सरकार के इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) के आमंत्रण पर 24 से 30 अगस्त 2025 तक भारत पैवेलियन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। आज इस भव्य पैवेलियन का विधिवत शुभारंभ किया गया।”

”पैवेलियन को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह आगंतुकों को एक जीवंत अनुभव प्रदान करता है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, औद्योगिक शक्ति और पर्यटन की संभावनाओं को सुंदर रूप से पिरोया गया है। यह वैश्विक दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराता है।”

पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की धरती की सुंदरता और धरोहर को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। नवा रायपुर, देश का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, जिसे निवेश और औद्योगिक प्रगति के लिए तैयार किया गया है, यहाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

”छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान चित्रकोट जलप्रपात ने भी सबका ध्यान खींचा। भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात होने के कारण इसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है।”

”इतिहास और आस्था की झलक देने वाला सीतापुर (Sirpur) पैवेलियन में प्रमुख रूप से प्रदर्शित है। यह 8वीं शताब्दी ईस्वी से जुड़ा भारत का एक विशाल बौद्ध स्थल है, जो छत्तीसगढ़ की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का परिचायक है। भारत और जापान की सांस्कृतिक विरासत के इस जुड़ाव में, छत्तीसगढ़ बुद्ध के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरित होकर शांति, समावेश और सतत विकास के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाता है।”

”पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर विशेष बल दिया गया। राज्य की केंद्रीय स्थिति और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क उसे देश के भीतर सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाते हैं।”’

विनिर्माण, वस्त्र, आईटी/आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रामोद्योग जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की तेजी से हो रही प्रगति को भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए राज्य को निवेश-तैयार गंतव्य के रूप में स्थापित करता है।

”छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोककला और हस्तशिल्प में भी झलकती है। पैवेलियन में बस्तर की ढोकरा कला—4,000 वर्ष पुरानी जीआई टैग प्राप्त धातु शिल्प-अपने अनगढ़ सौंदर्य और मौलिकता से सबको आकर्षित कर रही है।”

”इसी तरह, कोसा सिल्क, जिसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा कहा जाता है, पैवेलियन का मुख्य आकर्षण बना। यह अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और आकर्षण के लिए विख्यात है और राज्य के वनों में पाए जाने वाले एंथरेया मायलिट्टा रेशमकीट से तैयार किया जाता है।”

कोसा से बनी कलात्मक इंस्टॉलेशन छत्तीसगढ़ की आत्मा को व्यक्त करती है—जहाँ आध्यात्मिकता, प्रकृति और विकास का संतुलन साफ़ दिखाई देता है।

”वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पैवेलियन की शानदार शुरुआत और रिकॉर्डतोड़ दर्शक संख्या ने आने वाले सप्ताह की दिशा तय कर दी है। यह पैवेलियन न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, बल्कि छत्तीसगढ़ को सतत औद्योगिक प्रगति और वैश्विक निवेश अवसरों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है।”

CG: ‘भूपेश बघेल को मर्यादा में रहकर बात करनी चाहिए’ पूर्व सीएम पर भड़के रामविचार नेताम ..

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CG: ‘भूपेश बघेल को मर्यादा में रहकर बात करनी चाहिए’ पूर्व सीएम पर भड़के रामविचार नेताम ..

रायपुर: गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति बी सुदर्शन रेड्डी को नक्सल समर्थक बताया था जिसे लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में बवाल मचा हुआ है। मामले को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए गृह मंत्री अमित शाह को तड़ीपार बताया था। वहीं, इस मामले में अब कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने भूपेश बघेल पर करारा हमला किया है। रामविचार नेताम ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि भूपेश बघेल को मर्यादा में रहकर बात करनी चाहिए, भूपेश बघेल खीज में अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भूपेश बघेल के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।

वहीं, बी सुदर्शन रेड्डी द्वारा सलवा जुड़ूम के खिलाफ दिए जजमेंट को लेकर उन्होंनेग कहा कि बस्तर में सलवा जुडूम के समय मैं गृहमंत्री था। सलवा जुडूम से बस्तर की जनता ने लड़ाई लड़ी, नक्सलियों ने इस लड़ाई का खूब विरोध किया। SC के जजमेंट से सलवा जुडूम बंद हो गया, उन्होंने नक्सलियों के समर्थन में जजमेंट दिया गया था। बी सुदर्शन रेड्डी के इस जजमेंट से नक्सलियों का मनोबल बढ़ा था। इस दौरान रामविचार नेताम ने आगे कहा कि नक्सलियों के साथ कांग्रेस की गठजोड़ रही है।
रामविचार नेताम ने पूर्व कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे के बयान जनता की इच्छा कांग्रेस का नेतृत्व आज भूपेश बघेल करें पर भी करारा पलटवार करते हुए कहा कि रविंद्र चौबे की बात कांग्रेसी पता नहीं कितना मानेंगे? कांग्रेस के सभी धड़ों में लॉबिंग शुरू हो गई है। महंत, सिंहदेव, बैज के लिए लॉबिंग हो रही है। इनके कोई भी चेहरे हो सांपनाथ-नागनाथ जैसे हैं। चुनाव आते-आते कांग्रेस और बिखर जाएगी।

”CG: एनएचएम कर्मचारियों की 10 में से 5 मांग सरकार ने मानी, पांच मांगों पर केंद्र करेगा फैसला: मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल”

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”CG: एनएचएम कर्मचारियों की 10 में से 5 मांग सरकार ने मानी, पांच मांगों पर केंद्र करेगा फैसला: मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल”

मंत्री ने NHM कर्मचारियों से त्योहारों और बारिश के मौसम को देखते हुए काम पर लौटने की अपील की है.

पिछले 18 अगस्त से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी हड़ताल पर है. जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है. छत्तीसगढ़ में 16 हजार से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी और अधिकारी प्रदेश के अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दूरदराज इलाकों में एनएचएमकर्मियों का बड़ा योगदान है. इनके हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है. NHM कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर है.

ये है एनएचएम कर्मचारियों की 10 मांगे:

  1. संविलियन एवं स्थायीकरण
  2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
  3. ग्रेड पे निर्धारण
  4. कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता
  5. 27% लंबित वेतन वृद्धि
  6. अनुकंपा नियुक्ति
  7. महिला कर्मियों के लिए विशेष अवकाश नीति
  8. ट्रांसफर की सुविधा
  9. 10 लाख रुपये का कैशलेस मेडिकल बीमा

एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर मंत्री का बड़ा बयान: एनएचएम कर्मचारियों की मांगों पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगों को पूरा कर दिया है. इसके बारे में एनएचएम पदाधिकारियों को बता दिया गया है.

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- ” NHM पदाधिकारियों को बताया गया है कि उनकी 10 में से 5 मांगों को जो राज्य सरकार के हाथ में है उसे पूरा कर दिया है. कुछ ऐसी मांगे है जिन्हें सिर्फ राज्य सरकार पूरा नहीं कर सकती उन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. जितनी मांगे हमने मान ली है उनका इंप्लीमेंट जल्द कर दिया जाएगा.”

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की एनएचएम कर्मचारियों से अपील: स्वास्थ्य मंत्री ने एनएचएम कर्मियों से हड़ताल छोड़कर काम पर वापस लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा- “त्योहारों का समय है, इसके साथ ही बीमारियों का भी मौसम है. इसलिए एनएचएमकर्मी अपनी हड़ताल वापस ले लें. उनकी जिन मांगों को हमने मान लिया है वो जल्द लागू हो जाएंगी.”

श्यामबिहारी जायसवाल का भव्य स्वागत: मंत्री ने ये बयान मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले में दिया है. दरअसल मुख्यमंत्री ने श्याम बिहारी जायसवाल को सीएम साय ने स्वास्थ्य विभाग के साथ ही पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है. नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मंत्री पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचे तो कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्याम बिहारी का भव्य स्वागत किया. ढोल-नगाड़ों की थाप, पटाखों और फूलों की बारिश से कार्यकर्ताओं ने अपनी खुशी जाहिर की.

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को स्वास्थ्य विभाग के साथ 2 और विभाग:

मेरे जैसे कार्यकर्ता को स्वास्थ्य विभाग की अहम जिम्मेदारी के साथ पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विभाग की जिम्मेदारी दी हूं. सीएम और प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा

हरियाणा का फॉर्मूला छत्तीसगढ़ में भी: मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने छत्तीसगढ़ कैबिनेट में 14 मंत्री बनाने के मामले में भी अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्रियों की संख्या का 15 प्रतिशत का लॉकिंग था, जो साढ़े 13 प्रतिशत था, जिससे वह 14 भी हो सकता था और 13 भी हो सकता था. हरियाणा में भी 90 विधानसभा है. वहां 14 मंत्री बनाए गए. हरियाण के फॉर्मूले को देखते हुए छत्तीसगढ़ में भी 14 मंत्री बनाए गए.

कैबिनेट में 14 मंत्री बनाए जाने पर श्याम बिहारी जायसवाल: पिछले 18 अगस्त से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी हड़ताल पर है. जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है. छत्तीसगढ़ में 16 हजार से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी और अधिकारी प्रदेश के अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दूरदराज इलाकों में एनएचएमकर्मियों का बड़ा योगदान है. इनके हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है. NHM कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर है.

CG: सीएम विष्णुदेव साय ने टोक्यो के ‘लिटिल इंडिया’ में महात्मा गांधी को किया नमन ..

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CG: सीएम विष्णुदेव साय ने टोक्यो के ‘लिटिल इंडिया’ में महात्मा गांधी को किया नमन ..

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो स्थित ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो स्थित ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का शांति, अहिंसा और सद्भाव का अमर संदेश केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए मानवता का प्रेरणास्त्रोत है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘लिटिल इंडिया’ में स्थापित गांधी जी की प्रतिमा भारत-जापान मैत्री और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह स्थान भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय होने के साथ-साथ जापानी नागरिकों को भी भारत की महान परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी उपस्थित थे।